केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट अफ़ेयर्स राज्यमंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा कोरोना आपदा की दूसरी लहर से निपटने की दिशा में सभी ज़रूरी कदम उठाने व वित्त मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री के सभी निर्देशों का गम्भीरता से पालन करने की बात कही है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार कोरोना आपदा से निपटने के लिए हर ज़रूरी कदम उठा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में ऑक्सीजन की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा के लिए बैठक में 3 महीने के लिए ऑक्सीजन से जुड़ी वस्तुओं उपकरणों के आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी और हेल्थ सेस नहीं लगाए जाने का निर्देश दिया जोकि कदम स्वागतयोग्य है। मोदी ने देशभर के जिला मुख्यालयों पर सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट बनाने की मंज़ूरी दे दी है। पीएम केअर्स फंड से 551 अस्पतालों में ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट्स लगाए जाएंगे। जिससे कोरोना के ख़िलाफ़ जंग में बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय के अधीनस्थ केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने कोविड संबंधी आयात से जुड़े सवालों के समाधान के लिए एक सहायता प्रकोष्ठ बनाया है, ताकि सीमा शुल्क विभाग से ऐसे सामान की त्वरित निकासी हो सके। कोविड-19 मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाला जीवन रक्षक रेमडेसिविर के उत्पादन को 38.80 लाख यूनिट प्रति माह से बढ़ाकर 74 लाख यूनिट प्रति माह करने का निर्णय भी मोदी सरकार ने लिया है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ लोगों को मई और जून महीने में 26000 करोड़ रुपए खर्च करके मुफ़्त 5 किलो अनाज उपलब्ध कराने का सराहनीय निर्णय लिया है। महामारी के इस समय में गरीबों को भोजन की समस्या से दो-चार न होना पड़े, इसके लिए केंद्र सरकार ने अहम कदम उठाया है। मोदी सरकार इस आपदा में हर कदम पर देशवासियों के साथ खड़ी है। पिछले साल भी पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना को तीन महीने के लिए शुरू किया गया था। पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के इस विस्तार में केंद्र सरकार ने पिछले साल 90,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किया था और अब मोदी सरकार आगामी 2 महीनों में 26000 करोड़ रुपए खर्च करके सुनिश्चित करेगी कि इस आपदा की घड़ी में कोई भूखा ना रहे।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने सभी से आग्रह किया है कि खांसी, जुखाम व बुखार जैसे लक्षण होने पर शीघ्र अपना कोरोना वायरस संक्रमण के लिए परीक्षण करवाएं ताकि भविष्य में किसी भी परेशानी से बचा जा सके। लोगों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा आयुर्वेदिक अस्पताल सोलन के साथ ठोडो मैदान सोलन में भी आरटीपीसीआर परीक्षण किया जा रहा है। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी सोलन डाॅ. राजन उप्पल ने दी। डाॅ. उप्पल ने कहा कि ठोडो मैदान सोलन में आरटीपीसीआर परीक्षण के लिए वाक इन क्योस्क स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि आरटीपीसीआर परीक्षण सुविधा प्राप्त करने के लिए पूर्व पंजीकरण किया जा रहा है। पूर्व पंजीकरण प्रातः 9.30 बजे से प्रातः 11.30 बजे तक करवाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दिन में 12.30 बजे से 1.30 बजे तक आरटीपीसीआर के लिए सैम्पल एकत्र किए जाएंगे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि ठोडो मैदान में रेपिड एंटीजन परीक्षण सुविधा भी उपलब्ध है। रेपिड एंटीजन परीक्षण के लिए पंजीकरण दिन में 2.00 बजे से 2.30 बजे तक किया जा सकता है। रेपिड एंटीजन परीक्षण तदोपरांत सांय 3.00 बजे से 4.00 बजे तक करवाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पंजीकरण ऑनलाइन करवाया जा सकता है। ठोडो मैदान सोलन में आरटीपीसीआर अथवा रेपिड एंटीजन परीक्षण के लिए ऑनलाइन https://forms.gle/ypf5VNcqvFKmZ1tD6 पर पंजीकरण किया जा सकता है।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय से दूरभाष पर बातचीत कर कोविड-19 को लेकर राज्य की स्थिति और सुविधाओं को लेकर चर्चा की। उन्होंने राज्यपाल से कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में राज्य के पूर्व सैनिकों को शामिल करने और सैन्य व्यवस्था का लाभ लेने का सुझाव दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक हैं और यहां कई प्रकार से सैनिक व्यवस्था भी उपलब्ध है। यह दौर महामारी का है। इसलिए, इस दौरान राज्य को अपने पूर्व सैनिकों की सेवाएं कोरोना के खिलाफ लड़ाई में लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सैनिक गेस्ट हाउस, रेस्ट हाउस व अन्य मेडिकल सुविधाओं का भी लाभ लिया जा सकता है। महामारी के खिलाफ प्रदेश स्तर पर किए जा रहे विभिन्न प्रयासों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मिलकर इस चुनौती का सामना किया जा सकता है। मुश्किल की इस घड़ी में हमें अपने स्तर पर योगदान देना चाहिए। राज्यपाल ने केंद्रीय रक्षा मंत्री द्वारा हिमाचल के प्रति व्यक्त उनकी चिंता पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में कोरोना महामारी के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में पूर्व सैनिकों और सैन्य व्यवस्था के नेटवर्क इस दिशा में पहले से ही क्रियाशील है, जिसका लाभ और प्रभावी तरीके से लिया जाएगा ताकि इस लड़ाई में विजय हासिल की जा सके। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को आश्वस्त किया कि उनके सुझावों पर कार्य योजना बनाकर महामारी के खिलाफ क्षेत्रीय स्तर पर पूर्व सैनिकों की अधिक से अधिक सेवाओं को लेकर मजबूती से काम किया जाएगा।
सोलन जिला की नगर पंचायत कण्डाघाट की नव निर्वाचित अध्यक्षा गीता देवी तथा नव निर्वाचित उपाध्यक्ष मनीष सूद को आज शपथ दिलाई गई। उपमण्डलाधिकारी कण्डाघाट डाॅ. विकास सूद ने उन्हें शपथ दिलाई। नगर पंचायत कण्डाघाट के वार्ड नम्बर-07 ब्रिजेश्वर महादेव से नव निर्वाचित पार्षद गीता देवी को अध्यक्ष तथा वार्ड नम्बर-05 राज राजेश्वरी से नव निर्वाचित पार्षद मनीष सूद को नगर पंचायत कण्डाघाट के उपाध्यक्ष पद की शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर भाजपा कार्यकारिणी सदस्य डाॅ. राजेश कश्यप, खण्ड विकास समिति कण्डाघाट के अध्यक्ष विजय ठाकुर, भाजपा मण्डल सोलन के अध्यक्ष मदन ठाकुर, तहसीलदार कण्डाघाट अमन राणा उपस्थित थे।
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उपायुक्त हेमराज बैरवा ने किन्नौर जिला के सभी लोगों से आग्रह किया है कि वे प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन द्वारा कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए समय-समय पर जारी सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से बचाव के लिए हम सभी का दायित्व बनता है कि सही प्रकार से मास्क अवश्य पहनें, हाथों को बार-बार साबुन से धोतें रहें या सेनेटाईजर का प्रयोग करें। भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर यदि अति आवश्यक हो तभी जाएं तथा दो-गज की दूरी की अनुपालना सुनिश्चित बनाएं। उन्होंने बाहरी राज्यों से आए जिलावासियों से भी आग्रह किया कि वे बाहर से आने पर अपने पंचायत प्रतिनिधियों को अवश्य सूचित करें तथा चिकित्सकों के दिशा-निर्देशों अनुसार होम-आइसोलेशन पर रहें और 7 दिन बाद चिकित्सकों द्वारा कोरोना टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट आने के उपरान्त ही अपने घरों से बाहर निकलें। उन्होंने जिला के ऐसे सभी नागरिकों जिनकी आयु 45 वर्ष से अधिक है से आग्रह किया है कि वे अपने निकटतम स्वास्थ्य संस्थान में कोविड का टीका अवश्य लगाएं। भारत सरकार व प्रदेश सरकार द्वारा 1 मई से 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों को निःशुल्क कोविड टीका लगाने का निर्णय लिया गया है। उपायुक्त ने तीनों उपमण्डल पूह, कल्पा व निचार के अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी व उप-मण्डलाधिकारियों से वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले में कोरोना की स्थिति व बर्फबारी से हुए नुकसान का भी जायजा लिया। उन्होंने सभी उप-मण्डलाधिकारियों को कोरोना से संबंधित सरकार व जिला प्रशासन द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव को लेकर स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड डिवीज़न परवाणु में अच्छी पहल की जा रही है। बिजली से सम्बन्धित कार्य, बिजली से सम्बन्धित शिकायत व किसी भी अन्य प्रकार की पूछताछ के लिए सम्बंधित अधिकारियों के मोबाईल नम्बर जारी किए गए है। इस पहल से उपभोगताओं को दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नही होगी। इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए अधिशासी अभियंता इंजीनियर राहुल वर्मा ने कहा कि किसी भी प्रकार की बिजली बोर्ड से सम्बंधित समस्या जैसे बिल का भुगतान, विधुत आपूर्ति व अन्य किसी भी जानकारी के लिए बिना संकोच किए जारी मोबाइल नंबर पर कॉल कर सकते है। राहुल वर्मा ने बताया कि आज हर भुगतान ऑनलाइन प्रक्रिया से सम्भव है ऐसे में जहां तक सम्भव हो सके बिजली के बिल का भुगतान ऑनलाईन करें और कोरोना संक्रमण से बचाव करें। उन्होंने कहा कि बहुत आसान तरीके से www.hpsebl.in पर विजिट कर अपने बिल का भुगतान कर सकते है। बिल का भुगतान HPSEBL App, Amazon App, Google Pay, Bharat Pay, Phone Pay,और अन्य विश्वसनीय ऐप से कर सकते है। राहुल वर्मा ने कहा कि सम्पूर्ण डिवीजन से सम्बंधित किसी प्रकार की जानकारी के लिए अधिशासी अभियंता राहुल वर्मा 94184-53864 को सम्पर्क करें। इसके अतिरिक्त उपमंडल परवाणु से सम्बंधित जानकारी के लिए सहायक अभियंता चतर सिंह 94182-27969, धर्मपुर से सम्बंधित किसी भी जानकारी के लिए सहायक अभियंता गौरव अधीर 94183- 81900, सहायक अभियंता कसौली अशोक शर्मा 94186-14564 पर सम्पर्क करें। उन्होंने सभी से अपील की है कि कोरोना से बचें व सभी नियमों का सख्ती से पालन करें।
अर्की उपमंडल के अंतर्गत ग्राम पंचायत चम्यावल के सैंज गांव में मंगलवार को हनुमान जयंती सभी ग्रामवासियों ने कोविड के नियमों की अनुपालना करते हुए मनाई। ग्रामवासियों ने मिलकर स्थानीय गांव में एक मंदिर भी बनाया है जिसमें मंगलवार को हनुमान व शनिदेव की मूर्ति को महंत बलदेव गिरी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ स्थापित किया गया। इस दौरान मूर्ति स्थापना के लिए ग्रामीणों ने पंचायत प्रधान उर्मिला ठाकुर और उप प्रधान चरणदास को विशेष रूप से आमंत्रित किया। उर्मिला ठाकुर ने सभी को हनुमान जयंती की शुभकामनाएं दी और मन्दिर में आशीर्वाद भी प्राप्त किया। इस दौरान अर्की के व्यवसायी देवेंद्र कालिया, ताराचंद शर्मा ,बब्बी तथा मनसा राम भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
देवभूमि क्षत्रिय संगठन के प्रदेश कोषाध्यक्ष हरजिन्दर ठाकुर ने मिडिया के माध्यम से बताया कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को सवर्ण आयोग गठन के लिए जो प्रस्ताव देवभूमि क्षत्रिय संगठन और सामान्य वर्ग संगठन द्वारा दिया गया है उस पर ध्यान देते हुए प्रदेश के सवर्ण समाज को आश्वस्त किया है कि अगले तीन महीनों के भीतर सवर्ण समाज के लोगों के मौलिक अधिकारों के सरंक्षण के मद्देनजर सवर्ण आयोग का गठन तीन महीने के अंदर किया जाएगा। सवर्ण आयोग के गठन को लेकर मुख्यमंत्री से शिमला में मुलाकात के बाद इस मांग के जल्द पूरा होने की उम्मीद प्रदेश के सवर्ण समाज में जगी है। राजेन्द्र ठाकुर, कुलदीप सिंह कँवर, सुनील ठाकुर, अशोक ठाकुर, चेतन पंवर, कुलदीप पंवर, राहुल, श्रवण, कर्ण कँवर, धर्मेंद्र ठाकुर आदि संगठन के पदाधिकारियों व सदस्यों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का आभार व्यक्त किया है।
देश में कोरोना वायरस की स्थिति से हाहाकार मचा हुआ है। दिनोंदिन स्थति भयावह होती जा रही है। भारत में कोरोना वायरस के आंकड़े काफी भयानक है। हर दिन देश में 3 लाख से अधिक मामलें दर्ज हो रहे है। वंही, हिमाचल प्रदेश में बीते एक सप्ताह के दौरान कोरोना की जांच के लिए करीब 65486 लोगों के सैंपल लिए गए हैं। इनमें से 10529 से अधिक लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 20 अप्रैल को बीते 24 घंटे में कोरोना की जांच के 9071 सैंपल लिए गए। इनमें से 1295 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 21 अप्रैल की रिपोर्ट के अनुसार 7615 सैंपल लिए गए और 454 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 22 अप्रैल को 7799 सैंपल लिए और 959 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 23 अप्रैल को 10079 सैंपल व 819 पॉजिटिव, 24 अप्रैल को 9990 सैंपल व 1041 लोग पॉजिटिव, 25 अप्रैल को 6483 और 534 पॉजिटिव केस आए। वहीं, 26 अप्रैल को 7172 सैंपल लिए गए और 1072 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। प्रदेश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा वर्तमान में 89193 के पार पहुंच गया है। सक्रिय मामले 14326 से ज्यादा हो गए हैं। अब तक से अधिक 73478 संक्रमित ठीक हो चुके हैं और 1350 की मौत हुई है।
युवा कोंग्रेस नेता व सरस्वती नगर से जिला परिषद सदस्य कौशल मुंगटा ने सरकार को चेताया है कि अगर बागवानों को उनके नुक़सान का उचित मुआवज़ा नहीं मिला तो वो आगामी दिनों में धरना प्रदर्शन व हड़ताल से भी गुरेज़ नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि ऊपरी क्षेत्रों में बेमौसमी बर्फ़बारी और ओलावृष्टि से सब कुछ तबाह हो गया है, नुकसान का आंकलन करना मुश्किल हो गया है। कई जगहों पर पेड़ जड़ से ही उखड़ गए हैं तो कहीं ओलावृष्टि से पूरी फसल तबाह हो गई है। नुकसान का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिसकी 2 हज़ार से अधिक सेब की पेटियाँ होती थी, उस बागवान की फसल इस तरह तबाह हुयी है की इस वर्ष उसकी 50 पेटियाँ होना भी मुश्किल है। ऐसे में जिन लोगों की आर्थिकी सेब की फसल पर निर्भर है वो पुरे साल कैसे गुजर-बसर करेंगे, ये बड़ा सवाल है। वहीं मुंगटा ने सरकार से आग्रह किया है कि जो मुआवज़े की राशि लोगों को मिलनी है उसमें पारदर्शिता हो क्यूँकि जिसका करोड़ों का नुकसान हुआ है उसे कुछ राशि देकर भरपाई नहीं हो सकती है। वहीं, KCC लिमिट पर लगने वाले ब्याज को भी सरकार को इस आपदाकाल में माफ़ कर देना चाहिए ताकि बागवान परेशान ना हों। मुंगटा ने कहा कि उनका पूरा वार्ड सेब बाहुल्य क्षेत्र में आता है, सभी लोग सेब पर ही निर्भर है ऐसे में जब पूरी फसल ही तबाह हो गई हो तो लोग कैसे अपना गुजर बसर करेंगे, सरकार को इस विषय के बारे में सोचना चाहिए और उचित मुआवज़ा और राहत प्रदान करनी चाहिए। अगर बागवानों को मुआवज़ा देने में आनाकानि की गई तो सरकार 2022 में अपना बोरिया बिस्तर भी तैयार रखें।
दाड़लाघाट क्षेत्र के ग्याणा गांव के प्रख्यात साहित्यकार, कहानीकार, उपन्यासकार, वरिष्ठ समाजसेवी व कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता बद्री सिंह भाटिया के आकस्मिक निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। बद्री सिंह भाटिया का इस क्षेत्र के युवाओं, लेखकों तथा साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बद्री सिंह भाटिया के निधन से जहां परिवार वालों ने एक बुजुर्ग को खोया है वहीं समाज ने भी एक बुद्धिजीवी व समाज सेवक और हर आमजन के दुख दर्द में शामिल होने वाला व्यक्ति खो दिया है। क्षेत्र के पीसीसी महासचिव संजय अवस्थी, रमेश ठाकुर, अमर चंद पाल, रोशन वर्मा, जगरनाथ शर्मा, प्यारे लाल, राजेंद्र रावत जगदीश ठाकुर, राजेश गुप्ता, अनिल गुप्ता, सुरेंद्र वर्मा, रविकांत पाठक, हेमंत वर्मा आदि ने शोक प्रकट किया है।
हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटिड सोलन से प्राप्त जानकारी के अनुसार 28 अप्रैल व् 29 अप्रैल को विद्युत लाईनों के आवश्यक मुरम्मत व रखरखाव कार्य के दृष्टिगत विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। यह जानकारी विद्युत बोर्ड सहायक अभियन्ता दिनेश ठाकुर ने दी। उन्होंने कहा कि इसके दृष्टिगत 28 अप्रैल को प्रातः 10.00 बजे से सांय 5.30 बजे तक एससीईआरटी, हाउसिंग बोर्ड फेज-2, एचआरटीसी काॅलोनी तथा रबौण के कुछ क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। जबकि 29 अप्रैल को प्रातः 10.00 बजे से सांय 6.00 बजे तक फोरेस्ट काॅलोनी, जिला उद्योग केन्द्र, चम्बाघाट चैक, बेर पानी, बेर खास, बेर गांव, एनआरसीएम, शिल्ली, जौणाजी, अश्वनी खड्ड, दामकड़ी, फ्लाई, फशकना, नडोह, बजरोल, शूलिनी नगर के कुछ क्षेत्र एवं आसपास के इलाके में विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। उन्होंने इस दौरान लोगों से सहयोग की अपील की है।
बेमौसमी बर्फबारी, ओलावृष्टि और भारी बारिश के कारण फसलों और फलों को हुए नुकसान की समीक्षा के लिए बागवानी मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर ने बागवानी अधिकारियों, फसल बीमा कंपनियों और फल उत्पादक संघ की बैठक की अध्यक्षता करते हुए सेब व अन्य फसलों को पहुंचे नुकसान के आंकलन के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिमला सहित किन्नौर, मंडी, कुल्लू, चंबा, लाहौल-स्पीती तथा सिरमौर जिला के उद्यान उप-निदेशकों की अध्यक्षता में कमेटियों का गठन किया जाए। इन कमेटियों में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, राजस्व विभाग के अधिकारियों, बागवानों और बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों को भी सम्मिलित किया जाए। बागवानी मंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश सरकार को नुकसान के आंकलन की वीडियोग्राफी सहित विस्तृत रिर्पोट 15 दिनों के भीतर भेजी जाए। संबंधित क्षेत्रों के उपमण्डलाधिकारी इस कार्य की दैनिक समीक्षा रिपोर्ट भी बागवानी मंत्री के कार्यलय में भेजे। उन्होंने कहा कि उद्यान विभाग ने प्रदेश के बागवानों को पौध संरक्षण दवाइयों के अनुदान को सीधे किसानों व बागवानों के बैंक खातों मे वितरित करने का निर्णय लिया है ताकि दवाइयों के वितरण में दक्षता, प्रभावशीलता व जवाबदेही लाई जा सके तथा प्रदेश के अधिक से अधिक लघु एवं सीमांन्त बागवानों को लाभ मिल सके। वर्तमान में विभाग के लगभग 355 पौध संरक्षण केन्द्रों में विभागीय अधिकारी दवाइयों की वितरण प्रक्रिया में शामिल हैं। प्रत्यक्ष लाभा हस्तांतरण (डीबीटी) लागू होने से इन अधिकारियों की सेवा आधुनिक बागवानी तकनीक एवं योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए ली जा सकेगी। डीबीटी लागू होने से समय अवधि समाप्त होने पर खराब होने वाली दवाइयों पर सरकार का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रूपये का नुकसान होता था, जिससे बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसान-बागवान विश्वविद्यालय एवं विभाग द्वारा सुझाई गई पौध संरक्षण दवाइयां बाज़ार से खरीद सकेंगे। विभाग द्वारा विभागीय छिड़काव सारणी मे दर्शाई गई सभी दवाइयों के दाम तय किए जाएंगे ताकि बागवानों को प्रदेश के हर हिस्से मे एक समान दाम पर दवाइयां मिल सके। महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि दवाइयों की गुणवता सुनिश्चित करने के लिए कीटनाशक अधिनियम 1968 के अनुसार, विभागीय अधिकारियों द्वारा नमूने कृषि विभाग शिमला के बालूगंज स्थित प्रयोगशाला मे जांच के लिए भेजे जाते हैं और इनके फेल होने पर अधिनियम के अनुसार कार्रवाई की जाती है। ओला अवरोधक जालियों को लगाने के लिए सरकार द्वारा वर्ष 2020-21 कृषि उत्पाद संरक्षण (एन्टी हेलनेट) योजना कुशी (केयूएसएचवाई) चलाई जा रही है, जिसमें स्टील की स्थाई संरचना के निर्माण पर बागवानों को 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया है। इस वर्ष कुशी योजना के अन्तर्गत 20 करोड़ धनराशि का प्रावधान किया गया है। इस दौरान बागवानी विभाग के निदेशक डाॅ. जे.पी. शर्मा, अतिरिक्त निदेशक उद्यान डाॅ. डी.पी. सिंह, संयुक्त निदेशक, हिमाचल फल उत्पाक संघ के अध्यक्ष हरीश चैहान सहित अन्य बागवनी अधिकारी तथा फसल बीमा कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।
कसौली के साथ लगते पट्टा-जोहड़जी सड़क पर दर्दनाक हादसा पेश आया है। हादसे में एक गाड़ी 400 मीटर खाई में जा गिरी। सड़क हादसे में दो लोगों की मौत हो गई है। जानकारी के अनुसार पुलिस थाना कसौली चौकी कुठाड़ के तहत यह हादसा हुआ है। कार में तीन लोग सवार थे। यह कार पट्टा-जोहड़जी सड़क पर अचानक 400 मीटर खाई में जा गिरी। लोगों ने इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस और एम्बुलेंस को दी। स्थानीय लोगों ने सभी को कार से निकालकर इलाज के लिए अस्पताल भेजा। स्वास्थ्य केंद्र पट्टा में प्राथमिक उपचार देने के बाद दो घायलों को चंडीगढ़ रेफर किया गया लेकिन उपचार के दौरान दोनों की मौत हो गई। थाना प्रभारी संजय कुमार ने इस मामले की पुष्टि की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
जल शक्ति विभाग यह सुनिश्चित बना रहा है कि सोलन शहर एवं आसपास के क्षेत्रों में लोगों को आवश्यकतानुसार पेयजल उपलब्ध हो। यह जानकारी आज यहां जल शक्ति विभाग के अधिशाषी अभियन्ता सुमित सूद ने दी। सुमित सूद ने कहा कि सोलन शहर सहित आसपास के क्षेत्रों को उठाऊ पेयजल योजना गिरी से जलापूर्ति की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना से सोलन शहर के अतिरिक्त कुम्हारहट्टी एवं धर्मपुर क्षेत्र के गांवों को भी गर्मियों में पेयजल की कमी के दृष्टिगत जलापूर्ति की जाती है। सोलन शहर तथा धर्मपुर एवं कुम्हारहट्टी क्षेत्र के लिए जलापूर्ति वितरण पाइप लाइन अलग-अलग हैं। यह सभी क्षेत्र वर्ष 2008 में ही योजना के दायरे में सम्मिलत किए गए। उठाऊ पेयजल योजना गिरी वर्ष 2008 से क्रियाशील है। इस योजना से पानी का वितरण पूर्ण नियन्त्रण एवं मांग के अनुसार किया जाता है। उन्होंने कहा कि गत कुछ दिनों से गिरी नदी के जलागम क्षेत्र में अत्याधिक ओलावृष्टि एवं वर्षा के कारण पानी में भारी गाद आ रही है। गाद के कारण पानी की लिफ्टिंग प्रभावित होती है और जल वितरण मांग के अनुसार नहीं हो पाता। जल शक्ति विभाग निरन्तर यह प्रयास करता है कि लोगों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो। 25 अप्रैल से गिरी नदी के जल की गुणवत्ता में सुधार आया है और गाद की मात्रा कम होने पर गिरी पेयजल योजना से पानी की लिफ्टिंग सुचारू रूप से की जा रही है। उन्होंने कहा कि जल सभी के लिए मूलभूत आवश्यकता है और जल शक्ति विभाग यह प्रयास कर रहा है कि आवश्यकतानुसार नगर निगम सोलन सहित अन्य क्षेत्रों को समुचित पेयजल उपलब्ध करवाया जाए। प्रातः 5.00 बजे नगर निगम सोलन के मुख्य भण्डारण टैंकों से जवाहर पार्क, दुर्गा क्लब, चम्बाघाट व निचला डमरोग स्थित भण्डारण टैंकों को पेयजल उपलब्ध करवाया जाता है ताकि लोगों को सुचारू जलापूर्ति प्राप्त हो। इस कारण दिन के समय मुख्य भण्डारण टैंको में पानी की मात्रा कम रहती है। शहर के देहूंघाट, पावर हाउस, सपरून, तार फैक्टरी, क्लीन, हाउसिंग बोर्ड फेज-2, रबौण, आंजी, बाईपास, कथेड़, चम्बाघाट, बसाल व सलोगड़ा इत्यादि क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति जल शक्ति विभाग द्वारा की जा रही है। समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार कि सोलन शहर का पानी किसी दूसरी जगह दिया जा रहा है को पूर्णतः निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि उपरोक्त तथ्यों के दृष्टिगत उठाऊ पेयजल योजना की स्थिति एवं मौसम के अनुसार जल वितरण में कोई कमी नहीं रखी जा रही है। सोलन शहर तथा धर्मपुर एवं कुम्हारहट्टी क्षेत्र के लिए अलग-अलग जल वितरण पाइपें होने से असमान जलापूर्ति सम्भव नहीं है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि जल की एक-एक बूंद का सदुपयोग करें और अफवाहों पर ध्यान न दें।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने वर्चुअल माध्यम से मंडी जिले के सुंदरनगर में 12 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मातृ एवं शिशु अस्पताल का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने शिमला से सुंदरनगर के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि इस अस्पताल को वर्तमान राष्ट्रीय भाजपा अध्यक्ष और तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने वर्ष 2017 में राज्य के लिए स्वीकृत किया था और पिछले तीन वर्षो के दौरान इस परियोजना के कार्य में तेज़ी लाने के उपरान्त आज जनता को समर्पित किया गया है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण राज्य सरकार इस अस्पताल को वर्चुअल माध्यम से लोगों को समर्पित करने के लिए मजबूर हुई। इस अस्पताल का उपयोग समर्पित कोविड-19 अस्पताल के रूप में किया जाएगा और यह जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं प्रदान करेगा। नेरचैक मेडिकल कालेज को कोविड-19 अस्पताल के रूप में समर्पित किया गया है और अतिरिक्त 100 बिस्तरों की क्षमता वाले प्री-फैब्रिकेटिड अस्पताल का कार्य भी कुछ दिनों में पूरा हो जाएगा। नागरिक अस्पताल सुंदरनगर को 150 बिस्तर वाले अस्पताल में स्तरोन्नत किया गया है और यह क्षेत्र के लोगों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान कर रहा है। राज्य सरकार अस्पताल में लिफ्ट और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए अतिरिक्त धन उपलब्ध करवाएगी। उन्होंने कहा कि कोविड-19 मामलों की संख्या में वृद्धि चिंता का विषय है। राज्य सरकार ने प्रदेश में आने वाले लोगों से 72 घंटे पहले किए गए आरटीपीसीआर परीक्षण की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से साथ लाने और उन्हें चौदह दिनों की अवधि के लिए अपने निवास स्थान पर होम आईसोलेशन में रहने का आग्रह किया है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के निर्वाचित प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं और दिशा-निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आरंभ करने का आग्रह किया ताकि इस महामारी को फैलने से रोका जा सके।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रदेश में कोविड-19 मामलों में तीव्र वृद्धि से उत्तपन्न स्थिति के दृष्टिगत वर्चुअल माध्यम से सभी उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और चिकित्सा महाविद्यालय के प्रधानाचार्याें व चिकित्सा अधीक्षकों के साथ समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय माईक्रो कन्टेन्मेंट जोन के माध्यम से प्रभावी निगरानी कर कोविड मामलों की टैस्टिंग और ट्रीटमेंट अत्यन्त आवश्यक है। उन्होंने उपायुक्तों को अपने जिलों में कोविड जांच में तेज़ी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोविड-19 वैक्सीन की कम से कम बर्बादी हो क्योंकि देश और प्रदेश को इसकी बहुत आवश्यकता है। प्रदेश सरकार कोविड-19 मरीजों के लिए बिस्तरों की क्षमता में तीन हज़ार तक वृद्धि करने के लक्ष्य को लगभग पूरा कर चुकी है और किसी भी आपातकालीन स्थिति का सामना करने के लिए बिस्तरों की क्षमता को पांच हज़ार तक बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार ने एहतियाती तौर पर अतिरिक्त तीन हज़ार डी-टाईप ऑक्सीजन सिलेण्डरों का भण्डारण किया है ताकि खाली सिलेण्डरों की कोई कमी न हो। जयराम ठाकुर ने कहा कि होम आइसोलेशन प्रणाली को सुदृढ़ बनाना चाहिए और आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला मण्डलों और युवक मण्डलों को होम क्वारंटीन में रखे गए कोविड मरीजों के परिजनों के साथ सम्पर्क में रहने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों से होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों पर निगरानी रखने का अनुरोध किया। इन प्रतिनिधियों को बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों को प्रदेश सरकार द्वारा समय-समय पर जारी की गई मानक संचालन प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करवाने का भी आग्रह किया।
जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण सोलन ने आमजन की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नम्बर जारी किए हैं। यह जानकारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के अध्यक्ष भूपेश शर्मा ने दी। भूपेश शर्मा ने कहा कि वर्तमान में कोविड-19 संक्रमण के दृष्टिगत आम लोगों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से यह हेल्पलाइन नम्बर जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन दूरभाष नम्बरों पर कोई भी व्यक्ति अपने घर से ही विधिक जानकारी प्राप्त कर सकता है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा की जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण ने जिला व उपमंडल स्तर पर गठित विधिक सेवाएं प्राधिकरण के दूरभाष नम्बर को हेल्पलाइन के रूप में जारी किया हैं। इन हेल्पलाइन नम्बर पर लोग विधिक सेवा सम्बन्धी किसी भी जानकारी के लिए सम्पर्क कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इन हेल्पलाइन नंबरों का लाभ उठाने के लिए जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण सोलन के सचिव के दूरभाष नम्बर 01792-220713 पर संपर्क किया जा सकता है। उपमंडलीय विधिक सेवाएं समिति सोलन के अध्यक्ष से हेल्पलाइन नम्बर 01792-220553, उपमंडलीय विधिक सेवाएं समिति अर्की के अध्यक्ष से हेल्पलाइन नम्बर 01796-220619, उपमंडलीय विधिक सेवाएं समिति कण्डाघाट के अध्यक्ष से हेल्पलाइन नम्बर 01792-256256, उपमंडलीय विधिक सेवाएं समिति कसौली के अध्यक्ष से हेल्पलाइन नम्बर 01792-273711 तथा उपमंडलीय विधिक सेवाएं समिति नालागढ़ के अध्यक्ष से हेल्पलाइन नंबर 01795-221197 पर संपर्क किया जा सकता है। इन सभी हेल्पलाइन नंबरों पर किसी भी कार्यदिवस पर प्रातः 10.00 बजे से सांय 5.00 बजे के मध्य सम्पर्क किया जा सकता है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि इन हेल्पलाइन नम्बरों पर समस्या की जानकारी मिलने के उपरान्त विधिक सेवाएं प्राधिकरण की टीम शिकायतकर्ता की समस्या का समाधान करने का प्रयास करेगी।
किन्नौर एक जिला और एक ही निर्वाचन क्षेत्र है, लेकिन यहां की सियासत में पिछले कई वर्षाें से गुटबाजी हावी हाेती आ रही है। चाहे कांग्रेस की बात करें या फिर भाजपा की, दाेनाें राजनीतिक दलाें में गुटबाजी जाेराें पर चली हुई है। यही वजह है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के तेजवंत सिंह नेगी काे कांग्रेस के जगत सिंह नेगी से पराजित हाेना पड़ा। बीजेपी में ऐसी स्थिति अभी तक है। कारण यह है कि 2017 के विधानसभा में चुनाव लड़ने वाले तेजवंत सिंह नेगी काे जयराम सरकार ने साइडलाइन करने में काेई कसर नहीं छाेड़ी। गाैरतलब है कि तेजवंत सिंह नेगी पूर्व में विधायक भी रह चुके हैं और जब सत्ता में भाजपा आई ताे उन्हें काफी उम्मीदें थी कि बाेर्ड या किसी निगम में उन्हें अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का ताेहफा मिलेगा, मगर उन्हें मायूस हाेना पड़ा। दरअसल 2017 के चुनाव में किन्नौर सीट से भाजपा के दाे नेता टिकट के चाहवान रहे। एक तेजवंत सिंह नेगी और दूसरा सूरत नेगी। वर्तमान में वन विकास निगम के उपाध्यक्ष सूरत नेगी पिछले चुनाव में टिकट के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन पार्टी हाईकमान ने पूर्व विधायक तेजवंत नेगी पर ही भराेसा जताया। सूरत का टिकट कटने के बाद तेजवंत नेगी भी हार का मुंह देखना पड़ा। बताया जाता है कि भाजपा में गुटबाजी नहीं हाेती ताे शायद तेजवंत सिंह नेगी इस वक्त विधानसभा में दिखते। ऐसे में जाहिर है कि मिशन -2022 से पहले भी भाजपा की गुटबाजी समाप्त हाेती नजर नहीं आ रही है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस में भी इस वक्त युवा कांग्रेस से लेकर कांग्रेस नेताओं में गुटबाजी चल रही है। विधायक जगत सिंह नेगी वीरभद्र सिंह समर्थक हैं ताे युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष निगम भंडारी सुक्खू गुट से हैं। यही वजह है कि किन्नौर से टिकट के लिए अगले साल के चुनाव में गुटबाजी खुलकर सामने आ सकती है। पूर्व विधायक तेजवंत नेगी काे नहीं मिला सत्ता का सुख प्रदेश में जयराम सरकार बनते ही वर्ष 2018 में बाेर्ड एवं निगमों में उपाध्यक्षाें की नियुक्ति की गई ताे किन्नौर के पूर्व विधायक तेजवंत सिंह काे सत्ता का सुख नसीब नहीं हुआ। दरअसल तेजवंत नेगी पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल समर्थक हैं, जबकि सूरत नेगी काे जयराम समर्थक माना जाता है। इसी वजह से ही सूरत नेगी काे वन विकास निगम में उपाध्यक्ष की कुर्सी मिली। लाेकल एरिया डेवेल्पमेंट अथाॅरिटी कमेटी पर भी राजनीति जिला किन्नौर में भले ही एक विधानसभा क्षेत्र हाे, मगर राजनीतिक सरगर्मियां काफी तेज हाेती है। राज्य सरकार ने पहली बार एलएडीए यानी लाेकल एरिया डेवेल्पमेंट अथाॅरिटी कमेटी में भी राजनीति की। आज तक का इतिहास रहा है कि इस कमेटी में चेयरमैन स्थानीय विधायक ही हाेता है। जबकि किनौर में ऐसा नहीं किया। कांग्रेस विधयक जगत सिंह नेगी ने इस मसले पर कई बार जयराम सरकार काे घेरने की काेशिश की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब तक काैन-काैन रहे विधायक ? -ज्ञान सिंह नेगी। -ठाकुर सेन नेगी। -देवराज नेगी। -चेतराम नेगी। -तेजवंत सिंह नेगी। -जगत सिंह नेगी।
- अनुशासन है नहीं, पर सपना है 2022 में शासन पाने का 2022 में सोलन निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा का चेहरा कौन होगा ये तो समय के गर्भ में छीपा है, किन्तु सोलन भाजपा में अभी से जड़ खुदाई शुरू हो गई है। नगर निगम में हार का ठीकरा दोनों गुट एक दूसरे पर फोड़ रहे है, बड़े नेता बेशक चुप है, लेकिन कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर भड़ास निकाल रहे है। अनुशासन है नहीं, पर सपना है 2022 में शासन पाने का। बदलते समीकरणों के बीच चेहरे की जंग अभी से प्रखर होती दिख रही है। किस ओर जा रही है सोलन भाजपा की सियासत, क्या बन सकते है समीकरण ये जानने - समझने के लिए बात 2017 के चुनाव से शुरू करनी होगी। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले सोलन निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा टिकट के लिए सिर्फ दो नाम चर्चा में थे, एक कुमारी शीला और दूसरा तरसेम भारती। थोड़ी बहुत कोशिश हीरानंद कश्यप भी करते रहे पर वो कभी रेस में दिखे नहीं। पर चुनाव से ठीक पहले डॉ राजेश कश्यप पैराशूट से आए और टिकट ले गए। कहते है टिकट दिलाने वाले थे डॉ राजीव बिंदल। इस टिकट ने तरसेम भारती और कुमारी शीला के अरमान कुचल दिए थे। रोचक बात ये है कि बिंदल के चहेते भी तब शीला के साथ खड़े दिखे थे, मंशा दिलासा देना था या बहलाना, इसे लेकर सबका अपना -अपना विश्लेषण है। खैर डॉ राजेश कश्यप चुनाव हार गए, पर कहते है चुनाव में बिंदल के कुछ ख़ास लोगों ने उनके पक्ष में काम नहीं किया। सो तभी से बिंदल गुट और उनके बीच एक खाई बन गई। आहिस्ता-आहिस्ता कश्यप सोफत गुट के नजदीकी हो गए। वहीं महेंद्र नाथ सोफत जिनका डॉ राजीव बिंदल के साथ मनभेद जगजाहिर है। 2017 से अब तक 40 माह में डॉ राजीव बिंदल का सियासी सफर किसी रोलर कोस्टर के सफर जैसा रहा है। सो जब - जब बिंदल अर्श पर सोलन में उनकी टीम भी फ्रंट फुट पर और जैसे ही बिंदल फर्श पर उनकी टीम भी हाशिए पर। इस सब के बीच डॉ राजेश कश्यप जमे रहे और भाजपा के प्राइम फेस बने भी रहे। नगर निगम चुनाव में भी बेशक प्रभारी डॉ राजीव बिंदल थे लेकिन जो भाजपाई जीते है उनमे से अधिकांश डॉ राजेश कश्यप के करीबी माने जाते है। अब जो बात निकल कर आ रही है वो आने वाले समय में सोलन भाजपा की सियासत को नई दिशा दे सकती है। दरअसल कुछ लोगों को अब तरसेम भारती के चेहरे में भाजपा का ग्लो दिख रहा है और इनमें वो लोग भी शामिल है जिन्हें 2017 तक तरसेम भारती फूटी आंख नहीं सुहाते थे। यानी वक्त, परिस्थिति और मौके के हिसाब से अब एक नया गठबंधन आकार ले सकता है ताकि डॉ राजेश कश्यप को साधा जा सके। अब ये गठबंधन जन्म लेता है या इसकी भ्रूण हत्या हो जाती है ये देखना रोचक होगा। शीला जीत जाती तो और बात होती जिला परिषद् चुनाव में सलोगड़ा वार्ड से कुमारी शीला भाजपा उम्मीदवार थी। लगातार तीन चुनाव जीत चुकी कुमारी शीला जीत का चौका लगाने का दावा कर रही थी, लेकिन जनता का आशीर्वाद उन्हें नहीं मिला। ये हार कुमारी शीला के लिए बड़ा झटका है। शायद यही कारण है कि डॉ राजेश के विरोधी अब कुमारी शीला की जगह तरसेम भारती में संभावना तलाश रहे है। निसंदेह, शीला अगर जीत जाती तो शायद 2022 में कुछ और बात होती। बहरहाल शीला अब भी डटी है और 2022 में ऊंट किस करवट बैठता है ये देखना रोचक होगा। नगर निगम में नहीं चला तरसेम का जादू नगर निगम चुनाव में तरसेम भारती ने वार्ड 7 में जमकर प्रचार किया। तरसेम भारती के करीबी बादल नाहर की पत्नी सोना नाहर वहां से चुनाव लड़ रही थी। पर इस पुरे चुनाव में भाजपा कभी भी मजबूत नहीं दिखी। तरसेम भारती का प्रचार यहां पूरी तरह बेअसर दिखा। कांग्रेस ने बागी के मैदान में होने के बावजूद यहां शानदार जीत दर्ज की। यानी तरसेम की पोलिटिकल मैनेजमेंट का जनाजा हालही में हुए सोलन नगर निगम चुनाव में निकल चूका है। पर हर दिन की तरह हर चुनाव भी नया होता है। बिंदल के खासमखास भी हारे चुनाव जानकार मानते है कि भाजपा बेशक नगर निगम हार गई लेकिन डॉ राजेश कश्यप ने इस हार के बावजूद ज्यादा नहीं खोया। दरअसल भाजपा ने डॉ राजीव बिंदल को प्रभारी बनाया था और यदि बिंदल का जादू चल जाता तो जाहिर है 2022 के टिकट वितरण में भी उनकी दखल ज्यादा होती। पर नगर निगम जीतना तो दूर बिंदल के कई खासमखास चुनाव में बुरी तरह हारे। इस हार का ठीकरा भी विरोधी बिंदल के सर ही फोड़ रहे है। 2022 में फिर पैराशूट लैंड हुआ तो 2012 से 2017 तक कई नेता टिकट के लिए जमीनी काम करते रहे। पर भाजपा आलाकमान ने इन सबके अरमान कुचल दिए और पैराशूट कैंडिडेट उतार दिया। 2022 में टिकट को लेकर भी तमाम दावेदारों में मन में ये भय जरूर होगा। न जाने ऐन मौके पर किसकी एंट्री हो जाए।
- 2017 में दो बार के विधायक का टिकट काटा, फिर अनदेखी भी हुई - ठगा सा महसूस कर रहा है भाजपा का पुराना कार्यकर्ता अर्की निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा का हाल फिलहाल ठीक नहीं दिख रहा है। दो नेताओं के बीच बढ़ती खींचतान और वर्चस्व की लड़ाई में पार्टी फंसी हुई है। क्षेत्र में नेतृत्व और चेहरे को लेकर लगातार सवाल उठ रहे है। दरअसल, 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने दो बार विधायक रहे गोविन्द राम शर्मा का टिकट काट कर रतन सिंह पाल को टिकट दिया था। इसके बाद से ही अर्की भाजपा में विभाजन स्पष्ट देखा जा सकता है। खेर 2017 में सरकार बनी तो उम्मीद थी कि गोविन्द राम को पार्टी कोई महत्वपूर्ण पद या ज़िम्मेदारी देगी, पर ऐसा भी हुआ नहीं। इसका असर अर्की भाजपा के बड़े खेमे में दिखता है। गोविन्द राम से जुड़ा पुराना कार्यकर्ता खुद को ठगा सा महसूस करता है। उधर, गोविन्द राम अब तेवर बदल चुके है। वे 2022 के लिए अभी से खुलकर अपना दावा ठोक रहे है। उनके साथ भाजपा का एक बड़ा गुट दिख रहा है और जैसे - जैसे 2022 नजदीक आ रहा है उनके समर्थकों का कुनबा भी बढ़ता दिख रहा है। वैसे भी 2017 से ही भाजपा के लिए अर्की में कुछ ख़ास अच्छा नहीं हुआ है। हालहीं में हुए नगर पंचायत चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। बीडीसी पर भी कांग्रेस का कब्ज़ा रहा। वहीं जिला परिषद् में भी टिकट वितरण को लेकर सवाल उठे। जिला परिषद् के डुमैहर कुनिहार वार्ड से पार्टी के बागियों ने जीत दर्ज की। बहरहाल, रतन सिंह पाल बेशक फ्रंट फेस बने हुए है पर गोविन्द राम की पकड़ पर कोई संशय नहीं है। अर्की में दो बार कमल खिला चुके है गोविंद राम कांग्रेस के गढ़ रहे अर्की में लम्बे समय बाद 2007 में गोविन्द राम शर्मा ने कमल खिलाया था। 2012 में शर्मा लगातार दूसरी बार जीते। बावजूद इसके 2017 में उनका टिकट काट दिया गया। हालांकि जानकार मानते है कि 2017 में शर्मा भाग्यशाली रहे क्योंकि अर्की से कांग्रेस टिकट पर खुद वीरभद्र सिंह ने चुनाव लड़ा था। अब तक खरे नहीं उतरे पाल अर्की नगर पंचायत में भाजपा को करारी शिकस्त मिली थी। जिला परिषद् चुनाव में पार्टी ने अमर सिंह ठाकुर और आशा परिहार का टिकट काटा था जो भारी भूल साबित हुआ। आखिरकार ये दो चेहरे ही अध्यक्ष पद पर पार्टी का कब्ज़ा करवाने में निर्णायक सिद्ध हुए। माना जाता है कि अर्की भाजपा में फिलवक्त रतन सिंह पाल की खूब चल रही है, पर चुनावी समर में पाल अब तक कुछ कमाल नहीं कर सके है। सोलन नगर निगम चुनाव में भी रतन सिंह पाल को वार्ड 17 का प्रभारी बनाया गया था। प्रत्याशी चयन में भी उनकी राय को तवज्जो दी गई पर वार्ड 17 में भाजपा तीसरे स्थान पर रही। मैं आश्वस्त, 2022 में मुझे मिलेगा टिकट: गोविन्द राम गोविन्द राम शर्मा 2022 के लिए अभी से हुंकार भर चुके है। शर्मा आश्वस्त है कि पार्टी उन्हें टिकट देगी और वे चुनाव जीतेंगे भी। निसंदेह उन्हें दरकिनार करना भाजपा के लिए आसान नहीं होने वाला। शर्मा कहते है 2017 में उन्होंने टिकट भी छोड़ा और पूरी शिद्दत से पार्टी के लिए काम करते आ रहे है। अब पार्टी के आशीर्वाद से 2022 में वे ही कमल खिलाएंगे।
हिमाचल में बढ़ रहे कोरोना संक्रमण को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए फैसले का एनपीएस कर्मचारी संघ सोलन ने समर्थन किया है। संघ का कहना है की सरकार ने जो कर्मचारियों का एक दिन का वेतन कोविड -19 सहायता के लिए काटा है एनपीएस कर्मचारी संघ उसके लिए तैयार है। एनपीएस कर्मचरियों का कहना है की प्रदेश में लगातार कोरोना के मामलों में वृद्धि हो रही है। ऐसे में सभी कर्मचारियों को सरकार के इस फैसले का समर्थन करना चाहिए। संघ के जिला अध्यक्ष अशोक ठाकुर ने बताया कि एनपीएस कर्मचारी इस संकट के शुरुआत से ही सरकार के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर काम कर रहे हैं। पिछले वर्ष भी एनपीएस कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 25 लाख से अधिक राशी दी थी तथा इसके साथ ही सभी कर्मचारियों ने एक दिन का वेतन भी दिया था। एनपीएस कर्मचारियों ने कहा कि भविष्य में भी सभी कर्मचारी सरकार का हर संभव साथ देने का वादा करते हैं। उन्होंने कहा की कर्मचारी अपने स्वास्थ्य की परवाह किए बिना कोविड-19 से लड़ रहे हैं। कोई अस्पताल में सेवाएँ दे रहा है तो कोई सड़कों पर लोगों को जागरूक कर रहा है। एनपीएस कर्मचारियों ने सरकार से मांग की है कि केंद्र सरकार की तर्ज पर कर्मचारी की मृत्यु या विकलान्गता पर 2009 की अधिसूचना के तहत पुरानी पेंशन की व्यवस्था को प्रदेश में लागु किया जाए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर एनपीएस कई बार सरकार के समक्ष मांग रख चूका है ,लेकिन अभी तक सरकार कि तरफ से उन्हें कोई भी आश्वासन नहीं मिला है। इसके साथ ही कर्मचरिओं ने मांग रखी है कि भाजपा के चुनावी दृष्टिपत्र के अनुसार पुरानी पेंशन की बहाली के लिए जल्द कमेटी गठन किया जाए।
बेरोजगार कला अध्यापक शिक्षा विभाग व सरकार से खफा है। इनअध्यापकों को प्रशिक्षण देने के बाद भी उन्हें आज तक नियुक्ति ही नहीं मिल पाई है। बेरोजगार कला अध्यापक संघ का कहना है कि सरकार से बार -बार गुहार लगाने के बात भी उनकी मांगों को अनदेखा कर रही है। अब इन बेरोजगार कला अध्यापकों ने सरकार को दो टूक कह दिया है की उनकी अनदेखी का पता सरकार को 2022 में विधानसभा चुनाव में चल जाएगा। बेरोजगार कला अध्यापकों का कहना है की वर्ष 2005 से 2009 तक एससीवीटी के माध्यम से सरकार ने हजारों बच्चों को मैट्रिक आधार पर कला अध्यापक का प्रशिक्षण करवाया ताकि उन सभी को रोजगार प्राप्त हो सके, लेकिन उसके बाद सरकार ने कला अध्यापक बनने के लिए 12वीं में 50 प्रतिशत अंकों के साथ न्यूनतम योग्यता अनिवार्य रख दी गई। इससे पता लगाया जा सकता है कि ना तो सरकार और ना शिक्षा विभाग को इस बात का ज्ञान था कि कला अध्यापक बनने के लिए न्यूनतम योग्यता क्या होनी चाहिए थी। बेरोजगार कला अध्यापकों संघ के प्रदेशाध्यक्ष मुकेश भारद्वाज ने कहा कि वह सरकार से लगातार मांग कर रहे हैं कि उन्हें सरकारी स्कूलों में चल रहे कला अध्यापकों के खाली पदों में नियुक्ति प्रदान करें, लेकिन सरकार उन्हें हर बार झूठे आश्वासन ही दे रही है। उन्होंने कहा की जहां भी शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री का कोई भी कार्यक्रम होता है वहां पर यह सभी कला अध्यापक यह आस लगाकर पहुंच जाते हैं कि इस बार सरकार हमारी मांगे जरूर पूरा करेगी, लेकिन आज तक कोई भी सुनवाई नहीं हो सकी। उन्होंने बताया की अभी हाल ही में कला अध्यापकों के 500 पद भरने की एक फाइल शिक्षा विभाग से वित्त विभाग के पास गई है, इसके साथ ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपना बजट 12 हजार पद शिक्षा विभाग में भरने के लिए कहा था, मगर बेरोजगार कला अध्यापकों को इस बात का भी पता नहीं है कि कला अध्यापक के 500 पद इन पदों में शामिल है भी या नहीं। उन्होंने कहा कि पिछले कई सालों से मुख्यमंत्री जी हमें आश्वासन पर आश्वासन दिए जा रहे हैं कि कला अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होगी, लेकिन यह आश्वासन केवल झूठे जुमले साबित हो रहे है। हिमाचल में करीब 1800 कला अध्यापकों के पद खाली बेरोजगार कला अध्यापक संघ के अनुसार मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र मण्डी की बात करें तो इस समय जिला मंडी में ही कला अध्यापक के 284 पद खाली चल रहे हैं। उन स्कूलों में बच्चों को कला विषय तो है, लेकिन उसे पढ़ाने वाला अध्यापक ही नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी जिला में कई ऐसे स्कूल है जहां पर कला अध्यापक कई सालों से नहीं है। इस समय पूरे हिमाचल में 1800 के आसपास कला अध्यापक के पद खाली चल रहे हैं। बच्चों के माता-पिता को मजबूरन अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजना पड़ रहा है, क्योंकि सरकारी स्कूलों में अध्यापक ही नहीं होंगे तो वहां पर बच्चों का भविष्य कैसा होगा। सभी बेरोजगार कला अध्यापकों ने मांग की है कि हिमाचल के सरकारी स्कूलों को दिल्ली में चल रहे सरकारी स्कूलों की तरह बनाया जाए। सभी को एक समान शिक्षा दी जाए व सभी सरकारी स्कूलों में सभी विषयों के अध्यापकों की नियुक्ति की जाए नहीं तो हिमाचल में भी यही हाल होगा जो दिल्ली में विधानसभा चुनावों में भाजपा सरकार का हुआ था।
लम्बे अर्से बाद हिमाचल कैबिनेट ने प्रदेश के कर्मचारी वर्ग के लिए एक बड़ा राहत भरा फैसला लिया गया है। हालहीं में हुई जयराम मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश के हजारों अनुबंध कर्मियों, दैनिक/कंटींजेंट और अंशकालिक कार्यकर्ताओं को सौगात दी गई है। बैठक में विभिन्न विभागों में कार्यरत उन अनुबंध कर्मचारियों के सेवाकाल को नियमित करने का निर्णय लिया गया, जिन्होंने 31 मार्च 2021 को तीन वर्ष का सेवाकाल पूरा किया है या जिनका सेवाकाल 30 सितंबर 2021 को पूरा होने जा रहा है। इसी तरह मंत्रिमंडल ने उन दैनिक/कंटींजेंट कार्यकर्ताओं की सेवाएं भी नियमित करने का निर्णय लिया जो 31 मार्च को अपनी सेवाओं के पांच साल पूरा कर चुके हैं या फिर 30 सितंबर को पूरा करने वाले हैं। इसके साथ ही इन्हें विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों पर नियमित करने का भी फैसला लिया गया है। मंत्रिमंडल ने उन अंशकालिक कार्यकर्ताओं की सेवाओं को विभिन्न विभागों में दैनिक वेतन भोगी के रूप में परिवर्तित करने का भी निर्णय लिया, जिन्होंने 31 मार्च 2021 को 8 वर्ष का निरंतर सेवाकाल पूरा कर लिया है अथवा 30 सितंबर 2021 को पूरा करने जा रहे हैं। इस फैसले से हिमाचल के कर्मचारी बेहद खुश है व हिमाचल के के कर्मचारी वर्ग ने मुख्यमंत्री व सरकार का आभार भी जताया है। कर्मचारियों की और भी कई मांगें लंबित पड़ी है जैसे पुरानी पेंशन बहाली की मांग, जेसीसी की बैठक जल्द बुलाने की मांग, अनुबंध काल को 2 वर्ष करने की मांग, नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता की मांग इतियादी। कर्मचारियों ने ये उम्मीद जताई है की सरकार इन मांगों को भी जल्द पूरा करेगी।
हिमाचल प्रदेश में कुछ दवा उद्योगों के सैंपल लगातार फेल हो रहे है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रक संगठन (सीडीएससीओ) के ड्रग अलर्ट में लगातार इसका खुलासा हो रहा हैं। पिछले 9 महीनों के आंकड़ों पर अगर गौर करें तो हिमाचल में बनी कुल 41 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। जुलाई 2020 में कुल 11, अगस्त में 4, सितम्बर में 3, अक्टूबर में 2, नवंबर में 5, दिसंबर में 2, जनवरी 2021 में 8, फरवरी में 3 और मार्च में भी 3 सैंपल फेल हुए हैं। मार्च महीने में हिमाचल प्रदेश के दवा उद्योगों की तीन और देश की 18 दवाइयां मानकों पर खरी नहीं उतरी है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रक संगठन के मार्च के ड्रग अलर्ट में प्रदेश में बनी एंटी एलर्जी, पेन किलर और एंटीबायोटिक दवा के सैंपल फेल हो गए है। सिरमौर के पांवटा साहिब स्थित मैसर्ज जी लैबोरेटरीज कंपनी में बनने वाली एंटी एलर्जी दवा टरबीनापाइन, नालागढ़ के दवा औद्योगिक क्षेत्र में मैसर्ज एक्मे जेनेरिक्स कंपनी की पेन किलर दवा ट्रीपसिन एंड किमो ट्रीपसिन और औद्योगिक क्षेत्र झाड़माजरी की एंटीबायोटिक दवा अमोक्साइक्लीन के सैंपल फेल हुए हैं। चौंकाने वाली बात तो ये है की इनमें एक कंपनी ऐसी है जहां बनी दवाओं के सैंपल पिछले 8 महीनो में कई बार फेल हो चुके है। पौंटा की जी लैबोरेट्रीज में बनी दवाओं के सैंपल कई बार फेल हो चुके हैं। प्रदेश दवा नियंत्रक नवनीत मरवाह ने बताया तीनों दवा कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। फेल सैंपलों के बैच बाजार से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रक संगठन ने मार्च में देश की कुल 1572 दवाओं के सैंपल लिए थे, जिनमें 1553 मानकों पर खरे उतरे और 18 सैंपल फेल हुए हैं। खराब हुए सैंपलों में तमिलनाडु के छह, हिमाचल की तीन, मुंबई, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा और उत्तराखंड का एक-एक सैंपल शामिल है। एक सैंपल आयुर्वेदिक फार्मेसी का खराब निकला, जबकि दो सैंपल बिना लेवल के थे।
हिमाचल प्रदेश में बेकाबू होती कोरोना की दूसरी लहर कहर बरपा रही है। कोरोना की रोकथाम के लिए बढ़ती सख्ती और पाबंदियों से पर्यटन उद्योग की रफ़्तार एक बार फिर धीमी कर दी है। हिमाचल प्रदेश में लगातार दूसरे साल ग्रीष्म पर्यटन सीजन पिट गया है। कोरोना के खतरे और बंदिशों ने देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के कदम जकड़ लिए हैं। प्रदेश के अधिकांश होटलों और होमस्टे में ऑक्यूपेंसी शून्य हो चुकी है। एडवांस बुकिंग भी धड़ाधड़ रद्द होने लगी है। परेशान पर्यटन कारोबारी फिर से अपना काम-धंधा समेटने लग पड़े हैं। लगातार दूसरे साल भी सीजन पिटने से कारोबारी चिंतित हैं। हिमाचल में पर्यटन सीजन शुरू होना ही था की इससे पहले ही बढ़ते कोरोना के चलते सरकार को कई बंदिशों को लेकर फरमान जारी करना पड़ा। इसके बाद अब होटल व्यवसाय पर इसका असर देखने को मिल रहा है। पर्यटन हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी का एक बड़ा हिस्सा है, परन्तु लगातार दूसरे साल स्थिति खराब होने से पर्यटन व्यवसाइयों की चिंता बढ़ गई है। होटल, रेस्टोरेंट ईकाइयों को फिक्स्ड खर्चों का वहन कर पाना असंभव हो गया है। हालाँकि सरकार ने अभी बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों पर कोई रोक नहीं लगाई है, लेकिन इसके बावजूद भी प्रदेश के होटलों में कम ही पर्यटक देखने को मिल रहे है। बता दें की हिमाचल की पर्यटन इकाइयों की आमदन का बहुत बड़ा हिसा समर सीजन पर ही निर्भर करता है, लेकिन इस बार भी कोरोना की दूसरी लहर के चलते समर सीजन पर संकट के बादल छाए हुए है। पर्यटन से जुड़ा है राज्य का हर घर और परिवार: सेठ स्टेट टूरिज्म इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहेंद्र सेठ का कहना है कि पर्यटन से राज्य का हर घर और परिवार जुड़ा हुआ है। ऐसे में पर्यटन राज्य में पयटकों के आने पर किसी प्रकार का अनावश्यक प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए। पर्यटक केवल होटलों में नहीं रहता है बल्कि अन्य उद्योग भी इससे जुड़े है। बहुत मुश्किल से प्रदेश में पर्यटन व्यवसाय पटरी पर लौटने लगा था , लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने अब फिर से चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से जो इंटरेस्ट सुबवेंशन स्कीम के तहत ऋण के रूप में पर्यटन से जुड़े करोबारियों को आर्थिक मदद करने का नोटिफिकेशन जारी की हुई थी, उस स्कीम के अंतर्गत प्रदेश के किसी भी पर्यटन कारोबारी को वर्किंग कैपिटल ऋण बैंकों द्वारा नही दिए गए है। पर्यटन कारोबारियों में इस बात का रोष है कि आर्थिक मदद तो दूर विभागों द्वारा लॉकडाउन अवधि के भी पानी, टैक्स के बिल होटलों को भेजे जा रहे है।
'अपने चेहरे से जो जाहिर है छुपाये कैसे ' वसीम बरेलवी के एक शेर का ये मिस्रा मंडी कांग्रेस के हाल को बखूबी बयां कर रहा है। स्पष्ट दिख रहा है कि लगातार मिल रही पराजय से मंडी में कांग्रेस का जमीनी कार्यकर्ता उदास है और हौंसला पस्त। पर पार्टी का असल मर्ज है बड़े नेताओं का बड़ा अहम् और सुनहरे अतीत पर टिका उनका वहम। इन्हीं दिग्गजों के अहम् और वहम के बीच फिलवक्त मंडी में कांग्रेस ठंडी दिख रही है। ये दिग्गज अगर ताव में आ जाएं तो कार्यकर्ता को हौंसला भी मिले और आस भी जगे। पर फिलहाल तो पार्टी कंफ्यूज है, न दिशा है, न मजबूत चेहरा और न ही कोई ठोस रणनीति। 2022 में प्रदेश की सल्तनत और कांग्रेस के बीच सबसे बड़ी चुनौती मंडी की रणभूमि होगी। हालहीं में जिला परिषद् और नगर निगम चुनाव में कांग्रेस की खूब किरकिरी हुई है और अब लोकसभा का उपचुनाव दस्तक दे रहा है। 2022 की उम्मीद जिन्दा रखने के लिए उपचुनाव में पार्टी पर बेहतर करने का दबाव है, पर वर्तमान राजनैतिक परिवेश में डगर बेहद कठिन दिख रही है। अंतर्कलह से ग्रस्त कांग्रेस की राह मुश्किल इसलिए भी है क्योंकि मजबूत भाजपा से मुकाबला करने से पहले कांग्रेस को अपनों को भी साधना होगा। बहरहाल, कांग्रेस को सबसे पहले ये तय करना होगा कि मंडी संसदीय उप चुनाव में पार्टी की तरफ से मैदान में कौन होगा। जगजाहिर है कि पंडित सुखराम कांग्रेस में वापस इसीलिए लौटे थे ताकि पोते आश्रय को सांसद बनता देख सके। पर 2019 के लोकसभा चुनाव में जनता ने उनके अरमान कुचले ही नहीं बल्कि अरमानों का कचूमर निकाल दिया था। आश्रय का राजनैतिक सफर भी अब तक फीका -फीका सा ही रहा है। बावजूद इसके हालहीं दिए बयान में पंडित जी ने फिर पोते को सांसद देखने की इच्छा व्यक्त की है। यानी पंडित जी की विरासत के बूते एक बार फिर आश्रय का दावा प्रबल रहेगा। दूसरे दावेदार है प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष निगम भंडारी जो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी माने जाते है। निगम भंडारी उभरते हुए चेहरे तो है, युवाओं में पकड़ भी है पर सुक्खू का करीबी होना उन्हें बाकी कई दिग्गजों से दूर कर देता है। तीसरा पक्ष ये है कि पार्टी वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर को मैदान में उतार सकती है। हालांकि खुद कौल सिंह ठाकुर फिलहाल चुनाव लड़ने से इंकार कर रहे है। बाकी अंतिम निर्णय पार्टी आलाकमान को करना है। पंडित सुखराम की पारिवारिक भूलभुलैया और मझधार में अटकी कांग्रेस हिमाचल की सियासत के चाणक्य पंडित सुखराम पोते सहित कांग्रेस का हाथ थामे हुए है, तो उनके पुत्र अनिल शर्मा कहने को तो भाजपा के विधायक है लेकिन उनकी स्थिति किसी से छिपी नहीं है। कभी मुख्यमंत्री उन पर तंज कसते हुए कहते है कि " अगर साथ होते तो और बात होती', तो कभी बेटे द्वारा उनकी तारीफ़ करने पर भरी सभा में कांग्रेसी भी लाल हो जाते है। बहरहाल जो सियासी इक्वेशन सुखराम फैमिली, कांग्रेस और भाजपा के बीच बनी हुई है, ऐसी कोई और मिसाल हिमाचल ही क्या देश के सियासी इतिहास में भी शायद ही हो। भविष्य में पंडित सुखराम एंड फैमिली का क्या रुख रहेगा ये फिलहाल अबूझ पहेली है। सुखराम की सियासत को समझने वाले फिलहाल इस विषय पर कोई भी दावा करने से बच रहे है। हालांकि जिस तरह की तनातनी बीते दिनों अनिल शर्मा और प्रदेश सरकार के बीच दिखी है उसे देखते हुए माना जा सकता है कि 2022 चुनाव से पहले अनिल की कांग्रेस में घर वापसी होगी। पर ये सिर्फ कयास है और पल - पल बदलती सियासत में कुछ भी मुमकिन है। यानी पंडित सुखराम की पारिवारिक भूलभुलैया में कांग्रेस मझधार में अटकी है। पंडित सुखराम फैक्टर : क्या वो दौर अब गुजर चुका है पंडित सुखराम, वो नेता है जो कभी मुख्यमंत्री तो न बन सके लेकिन जब भी मौका लगा अपनी ताकत का लोहा खूब मनवाया। यूं ही इन्हें हिमाचल की सियासत का चाणक्य नहीं कहा जाता, इतिहास गवाह है 1998 में इन्हीं की मेहरबानी से धूमल सरकार बनी भी और पांच साल चली भी। इन्हीं के कोप से वीरभद्र सिंह ने पांच वर्ष सत्ता का वनवास झेला। मौके के हिसाब से मोहरे चलना पंडित सुखराम की वो सियासी अदा रही है जिसका कोई सानी नहीं। 2017 से पहले बेटे अनिल शर्मा समेत पंडित जी कांग्रेस से भाजपा में गए और बेटे को लगातार दूसरी बार मंत्री भी बनवा दिया। पर कहते है ना 'बुलंदी देर तक किस शख़्स के हिस्से में रहती है, बहुत ऊँची इमारत हर घड़ी खतरे में रहती है'। पोते को सांसद बनाने की चाह में पंडित जी 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले वापस कांग्रेस में आ गए। पर सर मुंडाते ही ओले पड़ गए। पोता भी चुनाव हारा, बेटे का मंत्री पद भी गया और सबसे बड़ा नुकसान पंडित सुखराम का तिलिस्म टूट गया। जिस अंतर से आश्रय चुनाव हारे उससे स्पष्ट था कि पंडित सुखराम की विरासत के नाम पर आश्रय को सिर्फ टिकट मिला वोट नहीं। बहरहाल यक्ष प्रश्न यही है कि क्या मंडी की सियासत में पंडित सुखराम का जादू बरकरार है या वो दौर अब गुजर चुका है? जाहिर है उपचुनाव में यदि आश्रय उम्मीदवार होते है तो उनकी प्रदर्शन कांग्रेस के साथ - साथ पंडित सुखराम एंड फॅमिली का भी इम्तिहान होगा। सरकार उसी की बनी जो मंडी जीता इतिहास गवाह है कि 10 विधानसभा सीटों वाला जिला मंडी जिस भी राजनैतिक दल ने जीता वही सत्ता पर काबिज हुआ और जिसे मण्डी ने ठुकराया उसे सत्ता से भी हाथ धोना पड़ा। 1982 से 2017 तक हुए 9 विधानसभा चुनाव भी इस बात की तस्दीक करते है। इन 9 में से 7 बार उसी पार्टी की सरकार बनी जिसने मंडी में सर्वाधिक सीटें जीती। जबकि 1998 में भाजपा की सरकार इसलिए बनी क्योंकि मंडी में 4 सीट कब्जाने वाली हिमाचल विकास कांग्रेस से उसका गठबंधन हुआ। वहीं 2012 में कांग्रेस और भाजपा दोनों को 5 - 5 सीटें मिली थी, हालांकि सरकार बनाने में कांग्रेस कामयाब रही थी। विस् चुनाव कांग्रेस भाजपा अन्य 1982 5 2 3 कांग्रेस की सरकार बनी 1985 7 2 1 कांग्रेस की सरकार बनी 1990 1 8 ( गठबंधन ) 1 भाजपा की सरकार बनी 1993 9 0 1 कांग्रेस की सरकार बनी 1998 4 3 4 सुखराम के समर्थन से भाजपा सरकार बनी 2003 6 2 2 कांग्रेस की सरकार बनी 2007 3 6 1 भाजपा की सरकार बनी 2012 5 5 0 कांग्रेस की सरकार बनी 2017 0 9 1 भाजपा की सरकार बनी 2017 से कांग्रेस के सितारे गर्दिश में मंडी में 2017 का विधानसभा चुनाव बुरी तरह हारने के बाद कांग्रेस 2019 का लोकसभा चुनाव भी रिकॉर्ड अंतर से हारी थी। हालहीं में हुए नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को 15 में से सिर्फ 4 वार्ड में जीत मिली। जबकि इसी वर्ष जनवरी में हुए जिला परिषद् चुनाव में 36 वार्ड में से कांग्रेस ने सिर्फ एक वार्ड पर जीत दर्ज की थी। कमोबेश ऐसी ही स्थिति पंचायत समिति में भी रही जहां भाजपा का दबदबा रहा। 2017 में आमने - सामने थे दो दिग्गज सियासी घराने 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वीरभद्र कैबनेट के मंत्री अनिल शर्मा भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने भी उन्हें मंडी सदर से ही टिकट दिया और वे फिर विधायक बन गए। वहीं कौल सिंह ठाकुर की बेटी चंपा ठाकुर उक्त चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी थी जिन्हें अनिल ने हराया था। मान सकते है कि इस हार की टीस इन दोनों सियासी घरानों के बीच बढ़ी दूरी का कारण है। अगर अनिल वापस कांग्रेस में आते है तो पार्टी अनिल को टिकट देगी या चंपा को, ये कांग्रेस के समक्ष सबसे बड़ी उलझन होगी। कौल सिंह ठाकुर और चंपा ठाकुर के तेवर बयां कर रहे है कि घर वापसी होती भी है तो भी अनिल की राह मुश्किल ही होगी। अलबत्ता चंपा का दावा टिकट के लिए होना लाज़मी है। क्या 'जयराम' को 'मंडी का सीएम' कहना मंडी में भारी पड़ेगा कांग्रेस जयराम ठाकुर को मंडी का सीएम कहकर उन पर निरंतर निशाना साधती रही है। प्रदेश के बाकी हिस्सों में शायद कांग्रेस को इससे कोई लाभ हो सके लेकिन मंडी में कांग्रेस का ये नारा उलटा ही पड़ेगा। एक किस्म से कांग्रेस खुद सीएम जयराम ठाकुर द्वारा मंडी में करवाए गए विकास को मान्यता दे रही है। 50 साल से दो परिवारों ने दिलाई जीत मंडी संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस का झंडा पंडित सुखराम और वीरभद्र सिंह के परिवार ने ही बुलंद रखा है। 1971 से अब तक हुए 13 लोकसभा चुनाव और एक उप चुनाव में कांग्रेस को उप चुनाव सहित 8 में जीत मिली है और ये सभी जीत पंडित सुखराम, वीरभद्र सिंह और वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह के नाम दर्ज है। यानी 50 साल से मंडी में कांग्रेस की सियासत सिर्फ दो परिवारों के भरोसे चली है ।
फूड इंस्पेक्टर सोलन संत राम वर्मा ने दाड़लाघाट व आसपास की दुकानों का औचक निरीक्षण किया, हालांकि निरीक्षण के दौरान कोई मामला सामने नहीं आया है। इस मौके पर फ़ूड इंस्पेक्टर संतराम वर्मा ने कहा कि कोविड-19 के चलते जिला उपायुक्त सोलन के आदेशानुसार दाड़लाघाट व आसपास के बाज़ार का निरीक्षण किया गया है। उन्होंने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनज़र संकट की घड़ी में सब्जियों, ढाबों सहित अन्य दुकानदारों को अधिक दाम न वसूलने की हिदायत भी दी। फ़ूड इंस्पेक्टर संतराम वर्मा व पुलिस प्रशासन की टीम ने मास्क पहनने तथा सोशल डिस्टेंस का पालन करने का आग्रह किया और दुकानदारों व ढाबा संचालकों को निर्देश दिए कि कोई भी व्यक्ति बिना मास्क के सब्जी, ढाबा या अन्य दुकानों में पहुंचता है तो उन्हें कोई सुविधा न प्रदान की जाए। लोगों को नो मास्क नो सिर्वीस के नियम की अनुपालना करवाई जाए। उन्होंने कहा कि दुकानों पर मूल्य सूचियां प्रदर्शित हों। इस मौके पर पुलिस विभाग के कर्मचारी भी मौजूद रहे।
सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र दाड़लाघाट में कोविड-19 से बचाव व इसकी रोकथाम के सम्बंध में हिमाचल प्रदेश सरकार व उपायुक्त सोलन द्वारा हाल ही में जारी दिशानिर्देशों के मद्देनजर शनिवार व रविवार को आवश्यक वस्तुओं की दुकानें छोड़ अन्य सभी दुकानों को बंद करने के आदेश का व्यापक असर देखने को मिला। व्यापार मंडल दाड़लाघाट के अध्यक्ष वेद प्रकाश शुक्ला ने बताया कि दाड़लाघाट बाजार में आवश्यक वस्तुओं की चीजों की दुकानों के सिवा सभी दुकानें बंद रही। बाजार बंद होने से दाड़लाघाट बाजार में सन्नाटा भी पसरा रहा। लोगों को दूध, ब्रैड, सब्जी व दवा की खरीद के लिए कोई भी परेशानी नही हुई। बाजार में दुकानें बंद होने को लेकर पुलिस प्रशासन की नज़र भी बनी रही। पुलिस ने बाजारों में गश्त भी की, हालांकि इस दौरान आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर अन्य सभी दुकानें बंद पाई गई। डीएसपी दाड़लाघाट प्रताप सिंह ठाकुर ने कहा कि पुलिस प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है तथा फील्ड में कोविड-19 के नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए आग्रह कर रहा है।
लंबे-लंबे बाल, तन पर भगवा वस्त्र और कमर के साथ लटकी चटाई और लोटा, कुछ ऐसे ही दिखते हैं बेन बाबा। बेन बाबा स्विट्जरलैंड से भारत पहुंचे हैं जबकि इन दिनों सोशल मीडिया में बेन बाबा का नाम बहुत चर्चित है। बात हो रही है स्विजरलैंड से पैदल भारत व इन दिनों देव भूमि हिमाचल में पैदल यात्रा कर रहे बेन बाबा की जो दाड़लाघाट से निकलते हुए पुलिस थाना दाड़लाघाट रुके। थाना प्रभारी जीत सिंह सहित उनके स्टाफ ने बेन बाबा को सेनिटाइज़र व फल भेंट करके मानवता की मिसाल पेश की है। बेन बाबा इन दिनों देव भूमि हिमाचल प्रदेश में पैदल यात्रा कर रहे है। बेन बाबा स्विट्जरलैंड से विश्व यात्रा पर निकले हुए हैं। भारत पहुंचने पर यहां की संस्कृति तथा धर्म की सराहना करते हुए इस विदेशी साधु ने हमारे धर्म में आस्था जताकर बता दिया है कि हमारा हिंदू धर्म दुनिया भर में शिरोमणि है और उसे बेन बाबा हिंदू वेशभूषा तथा पैदल यात्रा से सार्थक कर रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने ठियोग,जुब्बल व कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में बर्फबारी और ओलावृष्टि से हुए सेब के बगीचों के नुकसान का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने प्रभावित बागवानों से बातचीत कर उन्हें प्रदेश सरकार से नुकसान की भरपाई का मामला उठाने का भरोसा भी दिलाया। राठौर ने कडयाली, कैंथलामोड़, नारकंडा, नगरोटा, सिहल, बाघी, कोटखाई, जरोल, करालटी दोजा, मधावली में प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर बागवानों से बातचीत की। राठौर ने कहा कि वह इस बारे मुख्यमंत्री से मिल कर बागवानों के इस प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की पूरी जानकारी देंगे। उन्होंने कहा कि वह स्वयं भी एक बागवान होने के नाते किसानों व बागवान का दर्द भलि भांति समझ सकते है। राठौर ने प्रदेश सरकार से शिमला, किन्नौर, मंडी, कुल्लू,लाहौल स्पीति में बर्फबारी से हुए नुकसान का जायजा लेने को कहा है। उन्होंने बागवानों को मुआवजा देने की मांग करते हुए कहा कि सेब की पूरी फसल बर्बाद हो चुकी है। इस भारी बर्फबारी से उनके सेब के पौधे भी नष्ट हो चुके हैं और आने वाले कई सालों तक सेब की पैदावार भी कम होगी। इस दौरान उनके साथ ठियोग ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष कवंर नरेंद्र सिंह, जुब्बल कोटखाई ब्लॉक अध्यक्ष मोतीलाल, महिला कांग्रेस महासचिव पुष्पा शोभटा, रूपेश कंवल,नरेश कैंथला, शेर सिंह के अतिरिक्त पार्टी के कई अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद थे।
ग्राम पंचायत दाड़लाघाट में पंचायत प्रधान बंसी राम भाटिया की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन हुआ। बैठक में दाड़लाघाट पंचायत के क्षेत्र को स्वच्छ रखने के विषय में चर्चा कि गई। इस दौरान सभी सदस्यों ने मकान मालिकों को और उनके किरायेदारों को कूड़ा दान प्रयोग करने हेतु प्रोत्साहित करने की बात की। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी हर घर से कूड़ा कचरा एकत्रित करते हैं इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि पंचायत में रहने वाला कोई भी व्यक्ति अपने घर का कूड़ा इधर-उधर न फैंके। वह केवल सफाई कर्मचारी को ही कूड़ा दें ताकि पंचायत द्वारा बनाई गई इस व्यवस्था में कोई ढील न आने पाए और सब अपनी पंचायत को स्वच्छ और रोग मुक्त बनाने में स्वयंसेवी भावना से अपना सहयोग दें। बैठक में यह प्रस्ताव भी पारित किया गया कि जो व्यक्ति इस कार्य में पंचायत का सहयोग नहीं करेगा और उसके विरुद्ध ग्राम पंचायत द्वारा पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 13(ट) व 15 के अंतर्गत जुर्माना करने से परहेज नहीं किया जाएगा। बैठक में उप प्रधान हेमराज, सचिव धनीराम, वार्ड सदस्य मस्तराम, उमेश, महेश, ललित गौतम, नेमचंद, कांता, विमला देवी, अनुराधा, शारदा, अमर देई, पिंकी, पवन शर्मा इत्यादि मौजूद रहे।
हिमाचल प्रदेश के ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बे-मौसम हुई बर्फ़बारी और ओलावृष्टि से बागवानों और किसानों को ख़ासा नुक़सान हुआ है। प्रदेश के ऊपरी क्षेत्रों की बात करें तो यहाँ के लोग सबसे ज्यादा सेब की पैदावार करते हैं और सभी लोग बाग़वानी पर निर्भर है। ऐसे में बीते दिन हुई बे-मौसम बर्फ़बारी ,ओलावृष्टि से सेब की फसल तबाह हो गई और बागवानों के लिए आपातकाल जैसी स्तिथि उत्पन्न हो गई है। बर्फबारी और भारी ओलावृष्टि से सेब के पेड़ों के टहनियों को तोड़ दिया है। कुछ क्षेत्रों से सेब के पेड़ों के जड़ से उखड जाने की घटनाएं भी सामने आई है। इसी के चलते जिला परिषद मेम्बर और कांग्रेस मीडिया पेनेलिस्ट मोनिता चौहान ने गैर मौसमी बर्फ़बारी से हुए नुक़सान पर प्रदेश सरकार से किसानों को उनके नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा की सरकार को इस बुरे वक़्त में किसानों के साथ खड़ा रहा चाहिए।
राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने महावीर जयंती के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर राज्यपाल ने रविवार को राजभवन में भगवान महावीर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धाजंलि दी। अपने संदेश में राज्यपाल ने कहा कि उनकी शिक्षाओं ने अहिंसा, करुणा और निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा और प्रगति का मार्ग प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर की शिक्षा आज अधिक प्रासंगिक है और हमें उनका अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि कोविड महामारी के दृष्टिगत स्वच्छता और कोविड नियमों का पालन करते हुए इस त्यौहार को घर पर ही मनाएं और कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में अपना योगदान करें।
राज्य में बे-मौसमी बर्फबारी, ओलावृष्टि और भारी बारिश के कारण फसलों और फलों को हुए भारी नुकसान की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री ने राज्य के उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिले में फसलों को हुए नुकसान का मूल्यांकन करें ताकि राहत प्राप्त करने के लिए नुकसान की रिपोर्ट केंद्र को भेजी जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के लगभग सभी जिलों में बे-मौसमी बर्फबारी, ओलावृष्टि और बारिश से सेब, गेहूं और मटर की फसल को भारी नुकसान हुआ है, जो चिंता का विषय हैं। उन्होंने उपायुक्तों को यह भी निर्देश दिए कि वे बीमा एजेंसियों को फसल बीमा योजना के अन्तर्गत कवर की गई फसलों के नुकसान का मूल्यांकन करने के लिए अपने एजेंटों को कहें ताकि किसानों को शीघ्र मुआवजा प्रदान किया जा सके। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज, तकनीकी शिक्षा और जनजातीय विकास मंत्री राम लाल मारकण्डा, स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. राजीव सैजल, वन मंत्री राकेश पठानिया, मुख्य सचिव अनिल खाची, अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना और अन्य अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 551 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के निर्णय कि सरहाना की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के उत्थान के लिए जो काम करते हैं, वह सभी भाजपा कार्यकर्ताओं एवं भारत के नागरिकों के लिए गर्व की बात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो कहते हैं वह कर के दिखाते हैं और जिस प्रकार से वह बीते दिनों से ऑक्सीजन की कमी को दूर करने का कार्य कर रहे थे, उस पर आज ऐतिहासिक निर्णय लेकर उन्होंने दिखा दिया है कि हर समस्या का समाधान नरेंद्र मोदी के पास है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' के अंतर्गत मई और जून माह के लिए देश के 80 करोड़ ज़रूरतमंद लोगों को 5 किलो निःशुल्क खाद्यान्न प्रदान करने के लिए जो निर्णय लिया है इससे देश और प्रदेश कि गरीबों को बहुत बड़ा फायदा होने जा रहा है। यह गरीब कल्याण के प्रति हमारी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जिस प्रकार से केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार इस कोविड-19 संकटकाल में जन सेवा के प्रति कटिबद्ध है उसी प्रकार हिमाचल प्रदेश में भी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार हिमाचल की जनता की सेवा के लिए हर स्तर पर कार्य कर रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 1 मई के बाद 18 से 44 वर्ष की आयु वाले तरुण युवा शक्ति को भी कोविड-19 का टीका लगने जा रहा है और यह टीका एक बार फिर निशुल्क प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार एवं संगठन मिलकर कोविड-19 महामारी के खिलाफ एक युद्ध लड़ रही है। लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करना, कोविड-19 से संक्रमित व पूरे परिवार की सेवा करना, महिला मोर्चा द्वारा मास्क बनाना, सैनिटाइजर वितरण, कड़ा वितरण जैसे अनेकों सेवा प्रकल्पों को लेकर भाजपा की सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा की इस महामारी के समय धरातल पर अगर कोई संगठन कार्य कर रहा है तो वह भाजपा है और यह हिमाचल की जनता भलीभांति जानती है। भाजपा कोविड-19 पर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं कर रही है केवल जन सेवा का कार्य कर रही है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण हेतु हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद व केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट अफ़ेयर्स राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर के मार्गदर्शन में प्रयास संस्था ने हाल ही में हुनर से शिखर कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को उनके हुनर के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर रोज़गार स्वरोजगार प्राप्त करने में उन्हें आत्मनिर्भर बनाना था। इसी कड़ी में प्रयास संस्था द्वारा ब्यूटी ट्रेनिंग कोर्स की शुरुआत की गई जिसके अंतर्गत टौणी देवी में चल रहे ट्रेनिंग सेंटर में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पहले बैच के विधिवत प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत कुछ दिनों पहले हुई। ब्यूटी ट्रेनिंग कोर्स में 35 महिलाओं के पहले बैच का आज समापन हो गया।कोरोना आपदा को देखते हुए कुछ दिनों के स्थगन के बाद आगे भी कई बैचों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस ब्यूटी कोर्स की ट्रेनिंग में महिलाओं को ब्यूटी व सम्बंधित कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वो इस क्षेत्र में रोज़गार स्वरोज़गार प्राप्त करके आर्थिक तौर पर सशक्त बन सकें। ब्यूटी कोर्स के क्षेत्र में प्रसिद्ध सिल्वी सैलून की भागीदारी के साथ बेस्ट ट्रेनर द्वारा बेस्ट ट्रेनिंग एवं कार्यक्रम का सर्टिफिकेशन कोर्स कराया जा रहा है।
स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी ने राज्य की पात्र व्यक्तियों से कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण करवाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि लोगों को कोरोना की दूसरी लहर को गंभीरता समझने की जरूरत है, जो पहली लहर की अपेक्षा कहीं अधिक भयावह है। इस लहर में अधिक संख्या में लोग इस बीमारी के कारण मृत्यु का ग्रास बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक दूरी, हाथों को बार-बार धोने और मास्क का उपयोग करने जैसी सावधानियों से ही इससे बचा जा सकता है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि मीडिया में रिपोर्ट्स आई हैं कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा गंभीर रोगियों की संख्या को छुपाया जा रहा है, जो गलत है। इस महामारी की शुरुआत से जिलावार परीक्षणों की संख्या के साथ-साथ लम्बित परिणाम, किए गए परीक्षणों के प्रकार, कोविड पाॅजिटिव व्यक्तियों की संख्या, मौतों की संख्या के साथ दैनिक मीडिया बुलेटिन जारी किया जा रहा है। शुरूआत में यह बुलेटिन दिन में तीन बार और अब दिन में दो बार जारी किया जा रहा था। पारदर्शिता और लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से बुलेटिन को तेजी से प्रसार के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से भी दिन में दो बार सांझा किया जा रहा है। इसलिए, यह कहना गलत है कि स्वास्थ्य विभाग किसी भी तथ्य या आंकड़े को छिपा रहा है। विभिन्न स्तरों के संस्थानों में बिस्तरों की उपलब्धता की जानकारी भी संबंधित लिंक पर अपडेट की जा रही है, जो सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है।
हिमाचल का पर्यटन उद्योग लगातार चार वर्षों से आर्थिक नुकसान की मार झेलता आ रहा है। 2018 में पानी की भयानक कमी, 2019 में लोक सभा चुनाव के कारण समर सीजन फीका रहा। 2020 में पर्यटन व्यसाय कोरोना की भेंट चढ़ गया था। इस वर्ष सीजन शुरू होने से पहले ही लगातार दूसरे वर्ष कोरोना की दूसरी लहर ने पर्यटन उधोग को खत्म कर दिया है। पर्यटन से जुड़े व्यवसाइयों को आर्थिक तंगी से झूझना पड़ रहा है। पिछले चार वर्षों से मार झेल रहे पर्यटन उधोग की कमर पूरी तरह से टूट गई है। इस स्तिथि में होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी ऑपरेटर, एडवेंचर स्पोर्ट्स, वाटर स्पोर्ट्स, फोटोग्राफर्स तथा अन्य पर्यटन कारोबारियों को अपने रोजमर्रा के ख़र्चे भी पूरे करना मुश्किल हो गए है। पर्यटन उध्मियों के पास इकाइयों पर लिए लोन की किश्तें, ब्याज देने के लिए भी पैसा नहीं है जिसके चलते उन्हें उनके अकाउंट NPA होने का ख़तरा सता रहा है। होटल, रेस्टोरेंट तथा अन्य पर्यटन इकाइयों से जुड़े व्यवसाइयों को समझ मे नहीं आ रहा कि वह कर्मचारियों को वेतन, बिजली पानी के बिलों का भुगतान तथा अन्य फिक्स्ड ख़र्चों का भुगतान कहा से करें। मौजूदा कोविड नेगेटिव रिपोर्ट की शर्त के चलते बिजनेस ट्रैवलर भी हिमाचल के रुख नही कर रहे हैं। इसका सीधा असर सर्विसेज पर पड़ रहा है क्योंकि कई प्रकार की सर्विसेज बहरी राज्यों से ही प्रोवाइड की जाती है। हम सरकार से आग्रह करते है कि बिजनेस ट्रैवलर को कोविड नेगेटिव रिपोर्ट की एडवाइजरी की शर्त से बाहर रखा जाए। इन मौजूदा हालात में पर्यटन से जुड़े सभी व्यसाईओं की नजर सरकार द्वारा आर्थिक मदद प्रदान करने पर टिकी है। पर्यटन उधोग को वापिस पटरी पर आने तथा पर्यटन इकाइयों को आर्थिक आत्म निर्भर होने में दो से तीन वर्षो का समय लग सकता है। यदि जल्द से जल्द पर्यटन उध्मियों को राहत न दी गई तो पर्यटन इकाइयों को पूर्णता बन्द करने की नौबत आ सकती है तथा इन इकाइयों में कार्यरत सभी कर्मचारियों की नौकरियां जा सकती है। इतना ही नहीं पर्यटन उद्योग से जुड़े उध्मियों द्वारा लिए गए ऋणों की भरपाई न कर पाने के कारण अपनी इकाइयों को बचा पाना भी मुश्किल हो जाएगा। पर्यटन कारोबारी अपेक्षा करते है कि इस महामारी के चलते सरकार द्वारा जल्द इंटरस्ट सुबवेंशन स्कीम के माध्य्म से सभी पर्यटन इकाइयों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। पर्यटन उधोग पहले भी इस महामारी की लड़ाई में सरकार के साथ खड़ा था और आज भी सरकार के साथ खड़ा है। हम पुनः आग्रह करते है कि पर्यटन उधोग जो कि सबसे अधिक डायरेक्ट तथा इनडायरेक्ट एम्प्लॉयमेंट प्रदान करता है तथा जीडीपी का लगभग 10 % हिस्सा देता है को शीघ्र से शीघ्र सरकार की तरफ से आर्थिक मदद की जाए तथा अन्य रियायते दी जाएं ताकि हिमाचल के सबसे बड़े उद्योग को बचाया जा सके।
शुक्रवार देर शाम कराडाघाट से मांगू लिंक मार्ग पर एक कार अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे चली गई। जिसमे एक युवक की मौत हो गई है,जबकि दूसरे को घायलावस्था में आईजीएमसी शिमला रेफर किया गया है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रेम सिंह पुत्र राम चंद गांव मांगू ने इस हादसे की सूचना दी पुलिस को दी। गाड़ी में उसके साथ एक और लड़का पीयूष निवासी मांगू भी था। जिसे उपचार के लिये घायल अवस्था में अर्की अस्पताल ले जाया गया। जहाँ से चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के उपरांत उसे आईजीएमसी शिमला रेफर कर दिया गया है।कार चालक ललित ठाकुर 26 वर्षीय पुत्र गोपाल चन्द गांव मांगू के द्वारा अपनी गाड़ी को सड़क पर तेज रफ्तारी व लापरवाही से चलाने के कारण यह हादसा हुआ है। पुलिस द्वारा लापरवाही से वाहन चलाने का मामला दर्जकर आगमी कार्यवाही की जा रही है। मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी दाड़लाघाट प्रताप सिंह ठाकुर ने बताया कि एक युवक की मौत हो गई है जबकि दूसरे युवक को आईजीएमसी शिमला रेफर किया गया है। उन्होंने कहा कि मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।
दाड़लाघाट क्षेत्र के ग्याणा गांव के प्रख्यात साहित्यकार,वरिष्ठ समाजसेवी व कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता बद्री सिंह भाटिया के आकस्मिक निधन से क्षेत्र में शोक की लहर छा गई। वह कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। बद्री सिंह भाटिया का इस क्षेत्र के युवाओं, लेखकों तथा साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वे हिमाचल प्रदेश से मुद्रित होने वाले गिरिराज समाचार पत्र के कई वर्षों तक उपसंपादक भी रहे। उन्होंने अपने लेखनकाल में 12 बहुमूल्य कहानी संग्रह तथा तीन उपन्यास हिंदी साहित्य को प्रदान किए। वे हिमाचल प्रदेश सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, मुद्रणालय घोड़ा चौकी से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के उपरांत वे सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेते रहते थे। क्षेत्र के वरिष्ठ साहित्यकार अमर देव अंगिरस, पूर्व उपप्रधान राजेश गुप्ता, अनिल गुप्ता, सुशील ठाकुर, सुरेंद्र वर्मा, जगदीश ठाकुर, हेमंत वर्मा, तुलसीराम, पवन ठाकुर, प्रेम केशव,चमन ठाकुर ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
पंचायती राज दिवस के उपलक्ष में राजीव गांधी पंचायती राज संगठन ने हमीरपुर में एक बैठक का आयोजन किया। इस बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष विक्रम शर्मा ने की। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस महासचिव सुनील शर्मा इस बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। जिला अध्यक्ष विक्रम शर्मा ने राजीव गांधी पंचायती राज संगठन की ओर से कोरोना सहायता कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में बताते हुए कहा कि राजीव गांधी पंचायती राज संगठन पंचायत स्तर पर चुने हुए प्रतिनिधियों से मुलाकात करके गांव वासियों के लिए कोरोना सहायता कार्यक्रम का संचालन करेगा। इस कड़ी में चुने हुए पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों के साथ ब्लॉक एवं जिला स्तर पर 5 पंचायतों का एक क्लस्टर जोन बनाया जाएगा तथा क्लस्टर जोन प्रभारी के द्वारा पंचायतों में गांव वासियों की मदद के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएग। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस महासचिव सुनील शर्मा ने राजीव गांधी पंचायती राज संगठन "कोरोना सहायता योजना" की सोच की सराहना की तथा उन्होंने आश्वासन दिया कि कोरोना सहायता कार्यक्रम के लिए हर संभव मदद प्रदान की जाएगी। पंचायती राज दिवस के इस अवसर पर विक्रम शर्मा की अध्यक्षता में मुख्य अतिथि सुनील शर्मा ने क्लस्टर जॉन के प्रभारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। कोरोना सहायता योजना के लिए जिला अध्यक्ष विक्रम शर्मा ने अखिल भारतीय राजीव गांधी पंचायती राज संगठन की अध्यक्षा मीनाक्षी नटराजन एवं प्रदेश अध्यक्ष दीपक राठौर का आभार प्रकट किया। विक्रम शर्मा ने कहा कि पंचायत स्तर पर एक हेल्पलाइन जारी की जाएगी जिसके द्वारा पंचायत स्तर पर गांव वासियों के लिए हर संभव मदद का प्रयत्न किया जाएगा।
लंबे अरसे से बेरोजगार कला अध्यापक संघ बार-बार मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से अपने पदों को भरने की गुहार लगा रहे थे। लेकिन उन्हें हर बार निराशा हाथ लग रही थी। अभी हाल ही में 16 मार्च को सभी बेरोजगार कला अध्यापकों ने विधानसभा का घेराव किया था और अपनी मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा था। बेरोजगार कला अध्यापकों ने मुख्यमंत्री से मांग की थी कि जो शिक्षा विभाग ने वित्त विभाग को एक फाइल भेजी है जिसमें 500 कला अध्यापकों को भरने के लिए मंजूरी मांगी है उसे जल्द से जल्द मंजूरी दी जाए ताकि हमें रोजगार के अवसर प्राप्त हो सके। उसके उपरांत मुख्यमंत्री कार्यालय से वित्त विभाग के मुख्य सचिव को इस बारे में अवगत करवाया है और साथ ही जल्द से जल्द 500 कला अध्यापकों को वित्त विभाग से मंजूरी देने के लिए कहा।
थाना क्षेत्र कुपवी के कुपवी देईया मार्ग पर एक दर्दनाक सड़क हादसा पेश आया है। जानकारी के मुताबिक हादसे में ऑल्टो-k10 HP 08c 4800 के ऊपर बडा पत्थर गिरने के कारण गाड़ी दुर्घटना ग्रस्त हो गई है। गाड़ी में चार लोग सवार थे। जिनमें से दो व्यक्तियों की मौके पर ही मौत हो गई व अन्य दो महिलाएं इस दुर्घटना में जख्मी हुई है। उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए स्थानीय लोगों की सहायता से सिविल अस्पताल कुपवी भेजा जा चुका है। प्राप्त जानकारी अनुसार मृतको में दोनों व्यक्ति चचेरे भाई बताए गए हैं। मृतकों की पहचान सुनील पुत्र संतराम गांव सनत डाकघर भालू तहसील कुपवी, प्रकाश पुत्र स्व० सही राम गांव सनत डाकघर भालू तहसील कुपवी जिला शिमला के रूप में हुई है। वंही, घायलों की पहचान दोनों मृतकों की पत्नियां सुमन पत्नी सुनिल व गुलाबी देवी पत्नी प्रकाश के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी अनुसार ये लोग देहा में शादी समारोह से घर को वापस लौट रह थे। समय करीब 3:15 बजे अपने घर से कुछ दुरी पर धोताली नामक स्थान पर दुर्घटना के शिकार हुए हैं। थाना प्रभारी कुपवी ने पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच कर आगामी कार्यवाही शुरू कर दी है।
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट अफ़ेयर्स राज्यमंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रदेश वासियों को शुभकामनाएं दी। जिसके चलते सरकार द्वारा आयोजित वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग बैठक में अनुराग सिंह ठाकुर ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश में तीन स्थानों पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हो रही टेलीमेडिसिन सेवा को सफल बनाने के लिए अधिकारियों से अपना शत प्रतिशत योगदान देने की अपील की है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि कोरोना वैश्विक महामारी के दौरान स्वास्थ्य देखभाल उद्योग वर्तमान में बड़े पैमाने पर परिवर्तनशील दौर से गुज़र रहा है और टेलीमेडिसिन स्वास्थ्य क्षेत्र में एक क्रांति है। पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रदेश सरकार द्वारा पायलट आधार पर थाना कलां, अवाहदेवी व थुनाग में टेलीमेडिसिन सेवा की शुरुआत एक स्वागत योग्य कदम है। इन टेलीमेडिसिन केंद्रों से स्थानीय लोग सीधा चण्डीगढ़ पीजीआई के वरिष्ठ चिकित्सकों से जुड़ कर परामर्श प्राप्त कर सकेंगे। टेलीमेडिसिन सभी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता है, लेकिन कई समस्याओं के निराकरण में बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। टेली-हेल्थ, टेली-एजुकेशन और टेली-होम हेल्थकेयर जैसी सेवाएँ स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में चमत्कारिक साबित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में जहाँ भौगोलिक दृष्टि से दूर दराज़ के इलाक़ों में समयाभाव की स्थिति में तुरंत स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना थोड़ा कठिन कार्य है ऐसे में टेलीमेडिसिन सेवा एक वरदान साबित हो सकती है। सुदूर क्षेत्रों तक आसान पहुँच, परिवहन लागत और समय की बचत, लाइन में लगने की समस्या से निराकरण व कोरोना आपदा के इस कठिन समय में सामाजिक दूरी की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए टेलीमेडिसिन सेवा अत्यंत प्रभावी साबित हो सकती है। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के दूर-दराज़ गाँवों में घर-घर तक उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने के लिए स्थानीय स्वयंसेवी संस्था प्रयास के माध्यम से तीन वर्ष पूर्व एक पायलट सेवा के तौर पर सांसद मोबाइल स्वास्थ्य सेवा की शुरूआत की थी। हर्ष का विषय है कि इन तीन वर्षों में इस सेवा ने 5 जिलों, 17 विधानसभा, 800 पंचायतों के 5000 गाँवों में घर द्वार घूम कर 5 लाख 11 हज़ार से ज़्यादा लोगों को मुफ़्त जाँच, दवा व उपचार उपलब्ध करवाई है। इसी के साथ उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि यदि हर ज़िले में सम्भव ना हो सके तो हर तीन ज़िले के बीच में एक मेमोग्राफ़ी का सेंटर खुलवाने व हमीरपुर, बिलासपुर, ऊना में सीटी स्कैन की सुविधा शुरू करवाने का पुनीत कार्य करें।
सीटू राज्य कमेटी ने हिमाचल प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा टीचर यूनियन के नेताओं के खिलाफ जारी किए गए पत्रों व दंडात्मक कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। सरकार का यह निर्णय पूर्णतः तनाशाहीपूर्वक है तथा संविधान व लोकतंत्र विरोधी है। सीटू ने मांग की है कि टीचर यूनियन के नेताओं को प्रताड़ित करना बंद किया जाए। सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने कहा है कि अध्यापक आंदोलन की प्रदेश के ट्रेड यूनियन आंदोलन में एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हिमाचल के ट्रेड यूनियन आंदोलन में हिमाचल प्रदेश के निर्माण के बाद से ही अध्यापक आंदोलन का एक स्वर्णिम इतिहास रहा है। इसने अध्यापकों, छात्रों व कर्मचारियों की आवाज़ को निरन्तर बुलन्द करने का कार्य किया है। अध्यापक नेताओं के खिलाफ प्रदेश सरकार की कार्रवाई अध्यापक, छात्र व कर्मचारी विरोधी है व ट्रेड यूनियन आंदोलन को दबाने की साज़िश है जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा है कि यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 19 का खुला उल्लंघन है जो किसी भी व्यक्ति को अपनी यूनियन बनाने, भाषण देने, अपनी बात उठाने व बोलने की आज़ादी देता है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 का भी उल्लंघन है जो हर व्यक्ति को गरिमामयी जीवन जीने का अधिकार देता है व इस हेतु आवाज़ बुलंद करने का लोकतांत्रिक अधिकार देता है। उन्होंने कहा है कि हिमाचल सरकार के शिक्षा विभाग की टीचर यूनियन के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई भारतीय संविधान का घोर उल्लंघन है जो हर नागरिक की अपनी बात रखने का अधिकार देता है। आधुनिक युग में मांग-पत्र देने के साथ ही कोई भी व्यक्ति अपनी मांगों को इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट व सोशल मीडिया पर भी उठा सकता है व सरकारी की कर्मचारी विरोधी नीतियों पर सवाल उठा सकता है।
वैश्विक महामारी कोरोना ने पुरे विश्व में हाहाकार मचाया हुआ है। दो साल से विश्व में इस महामारी का संकट छाया हुआ है। इसी के चलते हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शान्ता कुमार ने इस महामरी को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इतिहास की किसी भी बड़ी से बड़ी विपत्ति के मुकाबले में आज का कोरोना सबसे बड़ा संकट है जिसने पूरे विश्व में हाहाकार मचा रखी है। टी.वी. देखना और अख्बार पढ़ना कठिन हो गया है। उन्होंने कहा इस प्रकार की भयंकर परिस्थिति में राजनितिक नेताओं की एक-दूसरे पर तीखी कड़वी अलोचना उन्हें कोरोना से भी अधिक दुखी करती है। यह आलोचना का समय नहीं, सहयोग का समय है। गलतियां सबसे होती है परन्तु उन पर कड़वी आलोचना करना बहुत बड़ा पाप है। इससे जनता का मनोबल टूटता है। आज की स्थिति में मनोबल सबसे अधिक आवश्यक है। शान्ता कुमार ने सभी दलों के नेताओं से आग्रहपूर्वक निवेदन किया है कि परस्पर आलोचना बिलकुल बन्द कर दीजिए। यदि सरकार में कोई कमी है तो उसे एक सुझाव के रूप में सरकार को बताएं। उन्होंने कहा कि राजनीति में उनके आदर्श अटल बिहारी वाजपेयी रहे है। वे बार-बार कहते थे कि दलों की दीवारें बहुत छोटी होती है परन्तु राष्ट्र का मन्दिर बहुत ऊँचा होता हैं। बांग्लादेश के युद्ध में भाजपा ने खुल कर सरकार की मदद की। यहां तक कि अटल बिहारी वाजपेयी ने इन्दिरा गांधी को दुर्गा तक कह दिया। बाद में पार्टी के भीतर इस पर आलोचना भी हुई थी। शान्ता कुमार ने सभी से आग्रहपूर्वक निवदेन किया है कि कोई किसी की आलोचना न करे तथा सहयोग दें। कोई ऐसा काम न करे कि विपक्ष को आलोचना का मौका मिले। सरकार को गरीब दुखियों की सहायता करनी है। सरकार कर रही है। जयराम ठाकुर बहुत अच्छे तरीके से सरकार का संचालन कर रहे है। सरकार को साधन चाहिए। साथ ही कहा कि, उन्हें विश्वास है प्रदेश के सभी कर्मचारियों ने कटौती पर बिलकुल बुरा नहीं मना होगा।
कुल्लू खराहल घाटी की चतानी पंचायत में आने वाले शिल्हा गांव में शनिवार सुबह ढाई मंजिला मकान जलकर राख हो गया। माकन में आग लगने से लाखों का नुकसान हुआ है। मकान में आग भड़कने के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने मिलकर आग पर काबू पाया। मकान सड़क से दूर होने के चलते आग बुझाने के लिए ग्रामीण दमकल विभाग की सहायता नहीं ले सके। आग लगने का कारण शार्ट सर्किट बताया जा रहा है। यह आग शिल्हा गांव में धनी राम पुत्र रामनाथ के घर में सुबह साढ़े आठ बजे के करीब लगी। जिस समय घर में आग लगी, उस वक़्त परिवार के सभी सदस्य घर में ही मौजूद थे। परिवार के लोग अपनी जान बचाकर बाहर की ओर दौड़े। आग का धुआं उठते देख आसपास के लोग भी पानी की बाल्टियों के साथ आग पर काबू पाने के लिए दौड़े। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। ग्राम पंचायत चतानी के प्रधान शेर सिंह ने कहा कि आग की इस घटना में लाखों का नुकसान हुआ है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित परिवार को आग से हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।
विधानसभा क्षेत्र फतेहपुर के अंतर्गत आती ग्राम पंचायत बड़ी बतराहण के सभी लोगों से पंचायत के उपप्रधान रमेश धीमान ने अपील की है कि कोविड-19 और दो दिवसीय लॉकडाउन के चलते सरकार द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करें। यदि उनके वार्ड में कोई व्यक्ति पॉजिटिव पाया जाता है, तो तुरंत इसकी सूचना अपने वार्ड मेंबर को दे। उन्होंने लोगों से कोविड-19 के नियमों का पालन करने की अपील की। हमेशा मास्क पहने, समय-समय पर हाथों को धोए, सैनिटाइज करें और 2 गज की दूरी बनाए रखें। पॉजिटिव व्यक्तियों से भी अनुरोध किया है कि वह सरकार द्वारा निर्धारित समयावधि तक खुद को क्वारंटाइन रखें। अपने वार्ड से संबंधित आशा वर्कर, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से संपर्क बनाए रखें। दवाई या किसी अन्य सहायता के लिए वार्ड मेंबर को बताएं ताकि इस बीमारी को रोका जा सके। ग्राम पंचायत बड़ी बतराहण और उसके प्रतिनिधि सहायता के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।


















































