भारतीय नौसेना ने अरब सागर में आए चक्रवाती तूफान ‘ताउते’ के कारण समु्द्र में अनियंत्रित होकर बहे एक बजरे पर सवार 146 लोगों को बचा लिया है और बाकियों की तलाश अभी जारी है। एक अधिकारी ने बताया कि नौसेना ने बचाव कार्य के लिए मंगलवार सुबह पी-81 को तैनात किया था। यह खोज एवं बचाव कार्यों के लिए नौसेना का एक बहुमिशन समुद्री गश्ती विमान है। इससे पहले, सोमवार को निर्माण कंपनी ‘एफकान्स’ के बंबई हाई तेल क्षेत्र में अपतटीय उत्खनन के लिए तैनात दो बजरे लंगर से खिसक गए और वे समुद्र में अनियंत्रित होकर बहने लगे थे, जिसकी जानकारी मिलने के बाद नौसेना ने तीन फ्रंटलाइन युद्धपोत तैनात किए थे। इन दो बजरे पर 410 लोग सवार थे। इसमें से 140 लोगों की जान बचा ली गई। बाकी अन्य की खोज जारी है। मौसम विभाग ने जानकारी दी कि गुजरात तट से टकराने के बाद ताउते तूफान अब कमजोर पड़ गया है। वहीं गुजरात में दो लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा चुका है। ताउते से महाराष्ट्र में छह लोगों की मौत हो गई है।
पहाड़ी राज्य हिमाचल में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने में राष्ट्रीय आजीविका मिशन अग्रणी भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के अन्तर्गत स्वयं सहायता समूह गठित कर महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है ताकि वह स्वरोजगार की राह अपना कर आत्मनिर्भर बन सके। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का उद्देश्य ग्रामीण गरीब परिवारों को सामाजिक मुख्यधारा से जोड़ना, उन्हें सम्मानजनक और बेहतर जीवनयापन की सुविधा उपलब्ध करवाना है। एनआरएलएम में गरीब ग्रामीणों को सक्षम और प्रभावशाली संस्थागत मंच प्रदान कर उनकी आजीविका में निरंतर वृद्धि करना, वित्तीय सेवा तक उनकी बेहतर और सरल तरीके से पहुंच बनाकर उनकी पारिवारिक आय में वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। एनआरएलएम ग्रामीण महिलाओं केे सशक्तिकरण में भी सहायक सिद्ध हो रहा है। महिलाओं को हर क्षेत्र में अवसर प्रदान करने के साथ-साथ एनआरएलएम उनकी आर्थिकी में भी सुधार कर रहा है। मिशन के अंतर्गत ग्रामीण संस्थाओं को ऋण उपलब्ध करवा कर महिलाओं केा आत्मनिर्भर बनाने की राह को बढावा दिया जा रहा है। प्रदेश में एनआरएलएम के अन्तर्गत गठित स्वयं सहायता समूहों में बीपीएल और गरीब परिवारों की महिलाओं को प्राथमिकता प्रदान की जाती है। इन समूहों में 70 प्रतिशत महिलाएं बीपीएल परिवारों से सम्बन्धित होती हैं। स्वयं सहायता समूहों को आजीविका अर्जित करने एवं किसी भी प्रकार के व्यवसाय को करने के लिए इन्हें बैंकों से जोड़कर 7 प्रतिशत और 4 प्रतिशत ब्याज पर ऋण प्रदान किया जा रहा है। ऐसी हैं स्वयं सहायता समूहाेंं की एनआरएलएम के अन्तर्गत प्रदेश में वर्ष 2019-20 में 4,666 स्वयं सहायता समूह और 121 ग्रामीण संगठन गठित किए गए। वर्ष 2020-21 में अब तक 3,384 स्वयं सहायता समूह और 90 ग्रामीण संगठन गठित किए गए। प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2019-20 में 4,392 स्वयं सहायता समूहों को एक करोड़ 10 लाख रुपये और 57 ग्रामीण संगठनों को लगभग 25 लाख रुपये के स्टार्टअप फंड वितरित किए गए। वर्ष 2020-21 में अब तक 5,945 स्वयं सहायता समूहों को एक करोड़ 49 लाख और 143 ग्रामीण संगठनों को 64 लाख रुपये के स्टार्टअप फंड वितरित किए गए हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद प्रदेश की महिलाओं की आर्थिकी सुदृढ़ हुई है। स्वयं सहायता समूहों के गठन से महिलाओं का सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक उत्थान सुनिश्चत हुआ है।
हरित क्रांति से पूर्व भारत खाद्यान्नों के अभाव से गुजर रहा था। देश के संवेदनशील क्षेत्रों के लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली विकसित की गई ताकि वांछित वर्ग को सस्ती दरों पर खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाई जा सके। वितरण की यह प्रणाली वर्ष 1951 से चली आ रही है। देश की खाद्य आर्थिकी के प्रबंधन में सार्वजनिक वितरण प्रणाली सरकार की नीति का महत्त्वपूर्ण भाग है। हिमाचल प्रदेश सार्वजनिक वितरण प्रणाली लागू करके समाज के गरीब व कमजोर वर्गों को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध करवाने वाले अग्रणी राज्यों में है। वर्ष 1997 में इसका नाम बदलकर लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली रखा गया। राज्य में वर्ष 2017 से 2020 तक लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली में राज्य खाद्य आपूर्ति निगम लिमिटेड के 117 थोक गोदाम व 5017 उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से अनुदानित खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाई जा रही है। राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के दृढ़ प्रयासों से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में अनेक सुधार आए हैं और यह कार्यक्रम जरूरतमंदों के लिए सहायक सिद्ध हुआ है। लोगों को उचित मूल्य पर खाद्य आपूर्ति के लिए विभाग द्वारा 1 अप्रैल 2007 को राज्य अनुदान योजना आरंभ की गई। राज्य के और अधिक व्यक्तियों को लाभान्वित करने के लिए इस योजना को संशोधित भी किया गया। योजना के तहत सभी राशन कार्ड धारकों को सरकार के वित्तीय संसाधनों से अनुदानित चीनी, दालें, तेल व नमक प्रदान किया जा रहा है। गत तीन वर्षों में, राज्य सरकार द्वारा योजना के तहत 574.81 करोड़ रुपये व्यय किए गए। वर्ष 2013 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू किया गया जो खाद्य आन्दोलन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल थी। यह अधिनियम हिमाचल में भी लागू किया गया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत प्रदेश सरकार अंत्योदय अन्न योजना के परिवारों को 35 किलोग्राम खाद्यान्न, जिसमें 20 किलो गेहूं का आटा और 15 किलो चावल तथा प्राथमिकता प्राप्त परिवारों को 3 किलोग्राम गेंहू का आटा और 2 किलोग्राम चावल प्रदान कर रही है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अतिरिक्त गरीबी रेखा से ऊपर के लाभार्थियों को प्रति परिवार 11-13 किलोग्राम गेंहू का आटा और 5-7 किलोग्राम चावल प्रदान किए जा रहे हैं। राज्य के लक्षित लोगों को गुणवत्तायुक्त खाद्यान्न प्रदान करने से उनकी पोषण स्थिति में समग्र सुधार हुआ है। कुपाेषण से निपटने काे आयरन युक्त नमक प्रदेश सरकार कुपोषण से प्रभावी तरीके से निपटने और खाद्य पदार्थों के पोषक तत्वों को बढ़ाने के उद्देश्य से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन-ए व डी से युक्त गुणवत्तायुक्त तेल, आयोडीन और आयरन से युक्त नमक प्रदान कर रही है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए तकनीक के उपयोग के साथ डिजिटाइजेशन और स्वचालन पर विशेष बल दिया जा रहा है। विभाग सार्वजनिक वितरण प्रणाली में दक्षता और पारदर्शिता में सुधार के लिए ‘एण्ड टू एण्ड कम्प्यूटराइजेशन’ क्रियान्वित कर रहा है। इस योजना के अंतर्गत राशनकार्डों का डिजिटाइजेशन किया गया है और अब तक 19.08 लाख राशनकार्डों को डिजिटाइजड किए जा चुके हैं। प्रदेश की उचित मूल्यों की दुकानों में स्वचालन के लिए एंड्राइड आधारित पीओएस डिवाइस भी लगाए गए हैं। उचित निगरानी के लिए सीडिंग अभियान उचित निगरानी और सही वितरण प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा आधार सीडिंग अभियान भी शुरू किया गया है। जिसके अन्तर्गत अब तक लगभग 99 प्रतिशत राशनकार्डो को आधार नंबर से जोड़ा जा चुका है। तकनीकी प्रगति की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार के हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा विकसित किए गए खाद्यान्नों के ऑनलाइन आवंटन और आपूर्ति श्रृंखला स्वचालन मोडयूल को क्रियान्वित किया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के थोक गोदामों से खाद्यान्न प्राप्त होने पर उचित मूल्यों की दुकानों से एसएमएस आधारित अलर्ट भेजा जाता है। प्रदेश राज्य आपूर्ति निगम के थोक गोदाम से अनाज प्राप्त करने के पश्चात संबंधित उचित मूल्य की दुकानों के उपभोक्ताओं को एसएमएस अलर्ट भी भेजा जाता है। लोगों को सुविधापूर्वक ई-कार्ड प्रदान करने के लिए एंड्रायड आधारित ई-पीडीएस एचपी मोबाइल एप्प को लांच किया गया है। यह एप्प प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इस एप्प के माध्यम से उपभोक्ताओं को उचित मूल्यों की दुकानों और थोक गोदामों में अनाज की उपलब्धता और मूल्य संबंधी जानकारी प्राप्त होती है। विभाग के सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम जैसे लक्षित पीडीएस, रियायती खाद्यान्न आदि कई वर्गों के लिए लाभदायक सिद्ध हुए है।
राज्य सरकार द्वारा शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भावस्था, प्रसव और प्रसव के बाद महिलाओं को दी जा रही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के फलस्वरूप संस्थागत प्रसव में कई गुना वृद्धि हुई है और हिमाचल प्रदेश की मातृ मृत्यु दर में गिरावट आई है। वर्तमान में प्रदेश में संस्थागत प्रसव बढ़कर 91 प्रतिशत हो गया है। राज्य में मातृ मृत्यु दर घटकर 55 प्रति 1,00,000 जीवित जन्म हो गई है जो परिकल्पित वैश्विक लक्ष्य से भी बेहतर है। विश्व के सभी देश वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सहमति दिखाई हैं। सतत विकास लक्ष्य में ”वैश्विक मातृ मृत्यु दर को 70 प्रति 1,00,000 जीवित जन्म से कम करना, किसी भी देश की मातृ मृत्यु दर वैश्विक औसत के दोगुना से अधिक नहीं“ का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य शामिल है। गर्भावस्था, प्रसव और प्रसव उपरान्त स्वास्थ्य सेवाओं तथा उचित देखभाल सम्बन्धी जागरूकता बढ़ाने के लिए, राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस प्रति वर्ष 11 अप्रैल को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पत्नी कस्तूरबा गांधी की जयंती पर मनाया जाता है। ऐसा करने वाला भारत विश्व का पहला देश है। राज्य सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं की देखभाल के लिए कई पहल की गई हैं। सरकार ने संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती महिलाओं, सामान्य व शल्य क्रिया द्वारा प्रसव और बीमार नवजात शिशु को जन्म के एक वर्ष तक मुफ्त और कैशलेस सेवाएं प्रदान की जाती हैं। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रदान की जाने वाली सुविधाओं में मुफ्त दवाएं व अन्य उपयोगी वस्तुएं, मुफ्त जांच, आवश्यकता होने पर मुफ्त रक्त और मुफ्त आहार शामिल हैं। घर से स्वास्थ्य संस्थान, दूसरे अस्पताल को रेफर किए जाने पर स्वास्थ्य संस्थानों में मध्य और स्वास्थ्य संस्थान से घर वापस जाने के लिए मुफ्त परिवहन सुविधा भी प्रदान की जाती है। सभी बीमार नवजातों और शिशुओं को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार के लिए समान सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। मातृ स्वास्थ्य और नवजात स्वास्थ्य का आपस में गहरा सम्बन्ध हैं। यदि महिलाएं स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं की रोकथाम या उपचार के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का उपयोग करती हैं तो अधिकांश मातृ मृत्यु की रोकथाम की जा सकती है। सभी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान, प्रसव के समय और प्रसव के बाद की जाने वाली देखभाल के बारे में जागरूक होना चाहिए। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि उपचार सम्बन्धी आवश्यकताओं का ध्यान में रखते हुए सभी प्रसव कुशल स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा करवाए जाएं। संस्थागत प्रसव पर 1100 रुपये की प्रोत्साहन राशि संस्थागत प्रसव के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव पर 1100 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। स्वास्थ्य संस्थानों में यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रसव पूर्व जांच के दौरान गर्भवती महिलाओं के सभी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मापदंडों की जांच सहित भ्रूण के विकास की भी निगरानी की जाए। नियमित रूप से प्रसव पूर्व जांच नहीं करने से गर्भावस्था के दौरान पहले से मौजूद बीमारियों जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अनीमिया आदि का पता नहीं चल पाता, जिसके परिणामस्वरूप माता और बच्चे दोनों में जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। प्रसव पूर्व जांच के दौरान गर्भवती महिलाओं को टेटनस टॉक्साइड (टी.टी.) से भी प्रतिरक्षित किया जाता है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान को प्रदेश में सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया गया है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक महीने की 9 तारीख को सभी गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण व निःशुल्क प्रसव पूर्व स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस दौरान सभी गर्भवती महिलाओं को निर्धारित सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भावस्था की दूसरी या तीसरी तिमाही में स्वास्थ्य संस्थान में जांच और दवाएं जैसे आयरन व कैल्शियम आदि की खुराक प्रदान किया जाती हैं। एक्सपर्ट डाॅक्टर्स बाेले... चिकित्सक या विशेषज्ञ द्वारा सभी गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच करके उच्च जोखिम गर्भधारण की पहचान व जांच की जाती है ताकि आवश्यक इलाज प्रदान किया जा सके। माताओं के स्वास्थ्य में पौष्टिक आहार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। गर्भावस्था में कुपोषण से अनेको जटिलताएं पैदा हो जाती हैं, जिसमें प्रसवोत्तर रक्तस्राव भी शामिल है। प्रदेश में बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त हैं, जो मातृ मृत्यु के बुनियादी कारणों में से एक है। गर्भवती महिला के लिए आयरन फोलिक एसिड सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक है। इस समस्या के समाधान स्वरूप, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों जांच के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान लिए जाने वाले आहार के बारे में परामर्श दिया जाता है और उन्हें आयरन और कैल्शियम की खुराक मुफ्त प्रदान की जाती है।
विकास के लिए सीमित संसाधनों वाले हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने में बाह्य वित्त पोषित परियोजनाएं अहम भूमिका निभा रही हैं। वर्तमान में प्रदेश में लोक निर्माण, वानिकी, ऊर्जा, पर्यटन, कृषि, बागवानी, शहरी और कौशल उन्नयन आदि क्षेत्रों में 9877.95 करोड़ रुपये की 14 बाह्य वित्त पोषित परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं के अंतर्गत राज्य को भारत सरकार से 90ः10 के अनुपात में ऋण प्राप्त हो रहे हैं। इन परियोजनाओं में एशियन विकास बैंक की लगभग 3723 करोड़ रुपये की चार परियोजनाएं, विश्व बैंक की 3062 करोड़ रुपये की पांच परियोजनाएं, एएफडी की 862 करोड़ रुपये की एक परियोजना, जाईका की 1,121 करोड़ रुपये की दो परियोजनाएं और केएफडब्ल्यू की 1,110 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं में 4,060 करोड़ रुपये की तीन परियोजनाएं ऊर्जा क्षेत्र, 1,808 करोड़ रुपये की तीन परियोजनाएं वानिकी क्षेत्र और 1061 करोड़ रुपये की दो परियोजनाएं बागवानी क्षेत्र में क्रियान्वित की गई हैं। इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र के लिए लगभग 800 करोड़ रुपये की एक परियोजना, पर्यटन क्षेत्र के 583 करोड़ रुपये, कौशल उन्नयन क्षेत्र में 650 करोड़, वित्त क्षेत्र में 315 करोड़ रुपये और कृषि क्षेत्र में 321 करोड़ रुपये की परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। आईडीपी प्राेजेक्ट काे वर्ल्ड बैंक से 700 कराेड़ विश्व बैंक द्वारा 700 करोड़ रुपये की एकीकृत विकास परियोजना (आईडीपी) वित्त पोषित की जा रही है। इस परियोजना को 11 मार्च, 2020 को पांच वर्ष के लिए स्त्रोत सस्टेनेबिलिटी और जलवायु आधारित कृषि तथा कृषि उत्पादन में सुधार एवं मूल्य संवर्द्धन के लिए हस्ताक्षरित किया गया है। इससे राज्य की विभिन्न ग्राम पंचायतों में जल प्रबन्धन में सुधार और कृषि जल उत्पादन क्षमता में सुधार होगा। यह परियोजना प्रदेश के 10 जिलों शिमला, ऊना, कांगड़ा, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, मंडी, कुल्लू, सोलन और सिरमौर की 428 चयनित पंचायतों में क्रियान्वित की जा रही है। प्रदेश सरकार द्वारा इस परियोजना के तहत अब तक 1928.93 लाख रुपये व्यय किये गए हैं और 1543.15 लाख रुपये विश्व बैंक को मुआवजे के लिए भेजे गए थे जिसमें से 1540.77 लाख रुपये राज्य को वापिस मिल चुके हैं। हिमाचल प्रदेश फसल विविधिकरण संवर्द्धन योजना (एचपीसीडीपी-जाईका) राज्य में फसल विविधिकरण को बढ़ावा देने में उत्प्रेरक साबित हो रही है। यह भारत-जापान के सहयोग से ओडीए ऋण समझौते के तहत जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी और भारत सरकार के मध्य लागू की गई है। इस परियोजना की पूर्ण अनुमानित लागत 800 करोड़ है, जिसका 80 प्रतिशत यानी 640 करोड़ रुपये जापान द्वारा और 20 प्रतिशत यानि 160 करोड़ रुपये हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रदान किये जा रहे हैं। 640 करोड़ रुपये का 90 प्रतिशत भारत सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश सरकार को अनुदान के रूप में प्रदान किया जाएगा। प्रदेश के 6 जिलाें के लिए तीन चरणाें में हाेंगे कार्य यह परियोजना बिलासपुर, शिमला, मंडी, कुल्लू, किन्नौर और लाहौल-स्पीति सहित छह जिलों में अप्रैल, 2018 से 2028 तक 10 वर्षों के लिए तीन चरणों में क्रियान्वित की जा रही है। इन जिलों के 7 वन वृत्त, 5 क्षेत्रीय, 2 वन्य प्राणी, 18 वन प्रभाग, 61 वन क्षेत्र, 400 ग्राम वन विकास सोसायटी (वीएफडीएस), 60 जैव विविधता प्रबन्धन उप-समितियां, 920 स्वयं सहायता समूह शामिल हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने राज्य में जाईका परियोजना के अंतर्गत वानिकी और अन्य गतिविधियों तक पहुंच स्थापित करने के लिए जाईका परियोजना की वेबसाइट का शुभारंभ किया। इस परियोजना के क्रियान्वयन से परियोजना क्षेत्र में औसत कृषि आय और किसानों की आय में चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है और जल्द ही यह परियोजना प्रदेश के सभी 12 जिलों में भी कार्यान्वित की जाएगी। इन परियोजनाओं से किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के वांछित परिणाम देखने को मिले हैं। सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में रबी की फसलों में 232 प्रतिशत और खरीफ की फसलों में 328 प्रतिशत वृद्धि हुई है। रबी और खरीफ की फसलों के मौसम में सिंचाई और इन परियोजनाओं के कारण सब्जी उत्पादन में 108 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
प्रदेश में विद्यार्थी वन मित्र योजना के अन्तर्गत अब तक स्कूली छात्रों द्वारा 295.35 हेक्टेयर क्षेत्र में 2,53,532 पौधे रोपित किए जा चुके है। बढ़ती आबादी, शहरीकरण और अनेक विकासात्मक कार्योंं के कारण हमारे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। वन, जोकि एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है वह भी इस बढ़ते दबाव से अछूते नहीं है। वास्तव में विकासात्मक कार्यों का सबसे अधिक प्रभाव वनों पर ही पड़ा है। हिमाचल प्रदेश का कुल वन क्षेत्र 37,948 वर्ग किलाेमीटर है। इस कुल वन क्षेत्र के 15,433.52 वर्ग कि.मी. पर ही हरित वन आवरण है। प्रदेश का लगभग 16,376 वर्ग किलाे मीटर वन क्षेत्र वृक्ष रेखा अथवा ट्री-लाईन से ऊपर है, जो हमेशा बर्फ से ढका रहता है। हिमाचल प्रदेश वन विभाग का उदेश्य प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों का भावी पीढि़यों के लिए प्रभावी प्रबन्धन तथा वनों और वन्य जीवों के संरक्षण के साथ-साथ वनों पर निर्भर समुदायों की प्रतिदिन की आवश्यकताओं जैसे चारा, बालन, ईमारती लकड़ी, औषधीय पौधों आदि की पूर्ति व आजीविका के साधन उपलब्ध करवाना है। इसके अतिरिक्त वन विभाग का लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्रदेश के हरित वन आवरण को 30 प्रतिशत तक बढ़ाना है। अपने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वन विभाग को प्रदेश के प्रत्येक वर्ग के सहयोग की आवश्यकता है। प्रदेश की जनता को वनों के महत्व, उनका संरक्षण और विकास के बारे में जानकारी होना आवश्यक है। वनों के संरक्षण में समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा लोगों व वनों के बीच के पारम्परिक बन्धन को मजबूत करने के लिए वन विभाग प्रयासरत है। विभाग द्वारा अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनके माध्यम से लोगों को वन गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा वन विभाग के माध्यम से इस दिशा में विद्यार्थी वन मित्र योजना चलाई जा रही है, जिसका उदेश्य स्कूली छात्रों में वनों और पर्यावरण के महत्व को समझाना है। पौधरोपण और पौधों की सुरक्षा के प्रति जागरूक करके उन्हें वनों के संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना है। इस योजना से न केवल भाग लेने वाले विद्यार्थी वन एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होंगे अपितु इस संदेश को फैलाने के लिए भी एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होंगे। 2018 के बजट से शुरु हुई थी याेजना विद्यार्थी वन मित्र योजना के अन्तर्गत वर्ष 2018-19 में 228 स्कूलों के माध्यम से 164.30 हेक्टेयर क्षेत्र में 1,66,830 पौधे रोपे गए तथा वर्ष 2019-20 में 146 स्कूलों के माध्यम से 131.5 हेक्टेयर क्षेत्र में 86,702 पौधे रोपित किए गए है। वर्ष 2020-21 में 114 नए विद्यालयों के माध्यम से 106 हेक्टेयर क्षेत्र में 90,500 पौधे लगाए गए है। इस योजना के अन्तर्गत ऐसे स्कूलों को लाया जा रहा है जिनमें ईको क्लब गठित है और जिनके आस-पास बंजर वन भूमि उपलब्ध हो। जहां पर स्कूली बच्चें स्थानीय पौधों की प्रजातियां रोपित करके स्वयं इन पौधों की देखभाल कर सकें। योजना के तहत विद्यार्थियों में हरित प्रदेश की भावना जगाने का भी प्रयास किया जा रहा है। विद्यार्थी वन मित्र योजना में पौधरोपण के लिए भूमि चयन से लेकर पौधे रोपित करने तक के कार्यों में स्कूल प्रशासन व विद्यार्थियों की भूमिका अहम रहती है। पाैधराेपण की तैयारी करता है स्कूल प्रशासन पाैधराेपण की सूक्ष्म योजना भी स्कूल प्रशासन द्वारा ही तैयार की जाती है, जिसकी स्वीकृति स्थानीय वन मण्डल अधिकारी द्वारा दी जाती है। वन विभाग योजना को तैयार करने और पौधरोपण करने के लिए केवल आवश्यक तकनीकी जानकारी उपलब्ध करवाता है। पौधरोपण क्षेत्र की फेन्सिंग, खरपतवार हटाना, पौधे को पानी देना आदि के अतिरक्त यदि कोई पौधा सूख जाए तो उसके स्थान पर दूसरा पौधा लगाने का कार्य भी विद्यार्थियों द्वारा ही किया जाता है। जिससे विद्यार्थी भावनात्मक रूप से उनके द्वारा लगाए गए पौधों से जुड़ जाते हैं। योजना के माध्यम से जहां एक ओर वन विभाग को अपने हरित आवरण को बढ़ाने के लक्ष्य में मदद मिल रही है, वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों को भी वृक्षों की जानकारी मिल रही है। विद्यार्थी वनों के महत्व को समझ रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने के साथ-साथ वे अन्य लोगों को भी वन एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश में कोरोना से मरने वालों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था स्थानीय विधायक देखेंगे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विधायकों से आग्रह किया कि वे स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर कोरोना से मरने वालों के पारिवारिक सदस्यों के साथ उचित संपर्क बनाएं, ताकि मृतकों का अंतिम संस्कार केंद्र के दिशा-निर्देशों और प्रोटोकॉल के तहत हो सके। कांगड़ा जिले के रानीताल में कोरोना से मां की मौत होने के बाद एक युवक द्वारा शव कंधे पर उठाकर श्मशान घाट तक अंतिम संस्कार के लिए ले जाने वाला वीडियो वायरल होने के बाद प्रदेश सरकार एक्शन मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री ने विधायकों से मृतक व्यक्ति के परिवार से संपर्क बनाने का आग्रह किया, ताकि मुश्किल घड़ी में उनका मनोबल बढ़े। सीएम ने कहा कि उपायुक्त सुनिश्चित करें कि शोक संतप्त परिजनों को मृतक के अंतिम संस्कार में जिला प्रशासन का पूरा सहयोग और सहायता मिले। शहरी क्षेत्रों में संबंधित नगर आयुक्त, शहरी स्थानीय निकायों के कार्यकारी अधिकारी और सचिव नोडल अधिकारी होंगे। ये अधिकारी अस्पतालों से समन्वय बनाकर काम करें। ग्रामीण क्षेत्रों में खंड विकास अधिकारी नोडल अफसर होंगे। मृतक व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए पीपीई किट, डेड बॉडी बैग, डिस्इंफेक्टेंस, सैनिटाइजर, वेस्ट डिस्पोजेबल बैग आदि संसाधन प्रदान करने चाहिएं। इसके लिए अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को उपरोक्त सामग्री दी जाएगी। खंड विकास अधिकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, पंचायतों, पंचायत सचिवों और पटवारियों के साथ समन्वय बनाएं। मृतक के परिजनों को संकट में सहायता के लिए शहरी निकायों के अधिकारियों, कार्यकारी अधिकारियों, सचिवों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में संबंधित पंचायत सचिवों और पटवारियों से संपर्क करना चाहिए।
हिमाचल में इस कोरोना काल के दौरान भी उपभोक्ताओं को फिंगर प्रिंट के माध्यम से राशन आवंटित किया जा रहा था। बायोमेट्रिक फिंगर प्रिंट स्कैनिंग से कोरोना का खतरा बढ़ता है। लोग और डेपो होल्डर दोनों ही इससे परेशान थे। इसीलिए हिमाचल के राशन कार्ड उपभोक्ताओं को अब डिपो में बायोमीट्रिक मशीनों में अंगुली लगाकर फिंगर प्रिंट से राशन नहीं मिलेगा। कोरोना संक्रमण और राशन की गड़बड़ी रोकने के लिए खाद्य आपूर्ति विभाग ने आवंटन का नया तोड़ निकाला है। उपभोक्ताओं के राशनकार्ड पर जो नंबर होगा, उसे बायोमीट्रिक मशीन में अपलोड किया जाएगा। नंबर अपलोड होने पर उपभोक्ता के मोबाइल पर ओटीपी नंबर आएगा। उपभोक्ता यह ओटीपी डिपो होल्डर को बताएंगे। इस नंबर को मशीन में अपलोड किया जाएगा। उसके बाद लोगों को राशन आवंटित किया जाएगा। खाद्य आपूर्ति विभाग में इसका ट्रायल चल रहा है। खाद्य आपूर्ति विभाग के निदेशक आरके गौतम ने बताया कि एक सप्ताह के बाद इस व्यवस्था को शुरू किया जाना है। इस व्यवस्था से हेराफेरी की गुंजाइश नहीं रहेगी। बड़ी बात यह भी है कि व्यक्ति किसी को भी डिपो में सामान लाने भेज सकेंगे। उपभोक्ता को सिर्फ ओटीपी नंबर बताना है।
हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला पुलिस के एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) और जिले की यौन उत्पीड़न रोकथाम कमेटी के चेयरमैन पर महिला हेड कांस्टेबल ने शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का मामला दर्ज करवाया है। शिमला शहर के महिला थाने में पुलिस को दी शिकायत में कहा गया है कि यह पुलिस अफसर कई दिनों से उसे तंग कर रहा था और आपत्तिजनक मांग भी रख रहा था। पुलिस अफसर पर आरोप है कि उसने पत्नी को गाड़ी सिखाने के बहाने महिला कांस्टेबल को अपने घर बुलाया। एक दिन अफसर ने कहा कि उसकी पत्नी महिला कांस्टेबल मिलना चाहती है। जब वह उसके घर गई तो उस अफसर के अलावा वहां कोई नहीं था। आरोपी अफसर ने उसके साथ छेड़खानी की। आरोप है कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी पीड़ित हेड कांस्टेबल के साथ छेड़खानी की गई। इस बात की जानकारी उसने अपने सहकर्मियों को भी दी। महिला पुलिस थाने ने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की दी है। बताया जा रहा है कि मामले की जांच सीआईडी को सौंपी जा रही है। इसके अलावा प्रदेश पुलिस की राज्यस्तरीय यौन उत्पीड़न रोकथाम कमेटी को भी मामला दिया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के रानीताल में मानवता को शर्मसाार करने वाली घटना सामने आई है । यहां एक कोरोना संक्रमित महिला की मौत के बाद उसे कंधा देने के लिए कोई भी आगे नहीं आया। कोरोना संक्रमित महिला का बीटा लगातार अपने रिश्तेदारों से मदद की गुहार लगता रहा मगर सभी रिश्तेदारों ने संक्रमण से खतरे का हवाला देते हुए उसे ताल दिया। न प्रशासन ने मदद की न अपनों ने। अंत में हिम्मत जुटाकर मां के शव को बेटे ने अकेले कंधे पर उठाकर श्मशानघाट पहुंचाया और अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं। कोरोना संक्रमित महिला भंगवार पंचायत की पूर्व प्रधान भी रह चुकी थीं और उन्होंने बीते दिन घर पर ही दम तोड़ दिया था। गांव से महिला के अंतिम संस्कार के लिए कोई भी आगे नहीं आया। भंगवार पंचायत के प्रधान सूरम सिंह ने बताया कि वह बीमार थे इसलिए वह खुद उनके घर नहीं जा सके। उन्होंने कहा कि प्रशासन से पीपीई किट मंगवाई लेकिन मृतका के बेटे वीर सिंह ने कहा कि मेरे रिश्तेदार पीपीई किट लेकर आ रहे हैं आप रहने दीजिए। सूरम सिंह ने कहा कि शव को उठाने के लिए दो ट्रैक्टर वालों से भी बात की लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। अपनी माँ के शव को अकेले शमशान घाट तक पहुंचाते हुए बेटे की फोटो सोशल मीडिया पर खूब बवाल मचा रही है। लोग सरकार को कोस रहे है , प्रशासन से भी सवाल पूछे जा रहे है। मगर सवाल ये है की क्या इंसानियत सर सरकार को ही दिखानी चाहिए। क्या कोरोना के इस दौर ने हमसे हमारी मानवता छीन ली है ?
मालेरकोटला पंजाब का 23वां जिला बन गया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ईद-उल-फितर के मौके पर मालेरकोटला को जिला घोषित करने के साथ ही शुक्रवार को इस नए जिले के लिए नए डीसी की नियुक्ति का एलान भी कर दिया। कैप्टन ने मालेरकोटलावासियों के लिए उपहारों की घोषणा करते हुए कहा कि शेर मोहम्मद खान के नाम पर 500 करोड़ रुपये की लागत से मालेरकोटला में एक मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जाएगी। 12 करोड़ रुपये की लागत से लड़कियों के लिए एक और कॉलेज स्थापित किया जाएगा। एक बस स्टैंड, एक महिला थाना भी बनेगा, जिसे सिर्फ महिला कर्मचारी ही चलाएंगी। इससे पहले जनवरी में सरकार ने मालेरकोटला में मुबारिक मंजिल पैलेस के अधिग्रहण, संरक्षण और उपयोग की स्वीकृति दी थी। बेगम मुनव्वर उल निसा ने प्रदेश सरकार को लिखा था कि मुबारक मंजिल पैलेस मालेरकोटला की वह इकलौती मालिक हैं और वे इस संपत्ति को प्रदेश या पर्यटन व सांस्कृतिक मामले विभाग सहित किसी भी व्यक्ति को देने के पूरे अधिकार रखती हैं। बता दें कि मालेरकोटला पंजाब का एकमात्र मुस्लिम बहुल एरिया है। मालेरकोटला के नवाब शेर मोहम्मद खान ने सरहिंद के सूबेदार का विरोध करते हुए श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों के पक्ष में अपनी आवाज उठाई थी। इसके चलते पंजाब के इतिहास में उनका एक सम्मानित स्थान है।
देश के अन्य राज्यों की तरह ही कोरोना महामारी के बीच हरियाणा में ब्लैक फंगस के मामले सामने आने लगे है । प्रदेश में ब्लैक फंगस के बढ़ते मरीजों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता और बढ़ा दी है। कोरोना से ठीक होने के बाद अब ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जिन्हें शुगर है और उन पर ब्लैक फंगस ने हमला बोल दिया है। पीजीआई रोहतक के बाद अब करनाल स्थित कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में भी ऐसे दो मरीजों को दाखिल किया है। दोनों मरीजों की एक-एक आंख पर फंगस बढ़ने लगी है। हालांकि, डाक्टरों ने इलाज शुरू कर दिया है। स्टेरायड, एंटी बायोटिक दवाओं के कारण व अधिक समय तक इंटेंसिव केयर यूनिट (आइसीयू) व हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) में रहने से म्यूकारमाइकोसिस (काली फफूंदी या ब्लैक फंगस) कोरोना संक्रमितों की आंखों पर हमला कर रहा है। यह समस्या कोरोना से ठीक होने के बाद भी आ रही है। जानिए क्या है Black Fungus के लक्षण यूएस सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार, म्यूकॉमिकोसिस या ब्लैक फंगस एक दुर्लभ फंगल संक्रमण है। इसे श्लेष्मा रोग या ज़ाइगोमाइकोसिस भी कहा जाता है। यह एक गंभीर संक्रमण है जो श्लेष्म या कवक के समूह के कारण होता है जिसे श्लेष्माकोशिका कहा जाता है। ये मोल्ड पूरे वातावरण में रहते हैं। यह आमतौर पर हवा से फंगल बीजाणुओं को बाहर निकालने के बाद साइनस या फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह त्वचा पर कट, जलने या अन्य प्रकार की त्वचा की चोट के बाद भी हो सकता है। Black Fungus कब नजर आता है कोरोना संक्रमण से उबरने के दो-तीन दिन बाद काली फफूंद के लक्षण दिखाई देते हैं। यह फंगल संक्रमण सबसे पहले साइनस में तब होता है जब रोगी कोविड -19 से ठीक हो जाता है और लगभग दो-चार दिनों में यह आंखों पर हमला करता है। सूरत के किरण अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संकेत शाह के मुताबिक, इसके अगले 24 घंटों में यह संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंच जाता है।
कोरोना संकट के चलते सरकारी स्कूल बंद है और बच्चों को ऑनलाइन माध्यमों से शिक्षा प्रदान की जा रही है। इस दौर में जारी ऑनलाइन पढ़ाई की मॉनिटरिंग के लिए छह सदस्यीय अधिकारियों की कमेटी गठित की गई है। नौवीं से बारहवीं कक्षा को हर घर पाठशाला कार्यक्रम में करवाई जा रही पढ़ाई पर सीधी नजर रखने के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने तीन अधिकारियों को चार-चार जिलों का जिम्मा सौंपा है। प्रारंभिक निदेशालय को भी जिलावार जिम्मेवारी सौंपने के लिए ड्यूटी लगाने को कहा गया है। इसके अलावा दो अधिकारियों को ओवरऑल सुपरविजन और एक अधिकारी को डिजिटल शिक्षण सामग्री जिलों में भेजने का काम सौंपा गया है। छह सदस्यीय अधिकारियों की गठित यह विशेष टीम रोजाना उच्च शिक्षा निदेशक को अपनी रिपोर्ट भी सौंपेंगी। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा की ओर हर घर पाठशाला कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए छह सदस्यीय कमेटी की गई है। अतिरिक्त निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. प्रमोद चौहान को नौवीं से बारहवीं और संयुक्त निदेशक प्रारंभिक शिक्षा हितेश आजाद को पहली से आठवीं कक्षा की ऑनलाइन पढ़ाई की मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा गया है। संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. अशीथ कुमार मिश्रा को हमीरपुर, कांगड़ा, बिलासपुरख्, चंबा, संयुक्त निदेशक हरीश कुमार को सिरमौर, सोलन, ऊना, कुल्लू और ओएसडी डॉ. अंजु शर्मा को शिमला, किन्नौर, मंडी और लाहौल स्पीति जिला में जारी हर घर पाठशाला कार्यक्रम पर नजर रखने का जिम्मा रहेगा। समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशालय से समन्यवक अनीमा शर्मा को डिजिटल शिक्षण सामग्री तैयार करवाने और इसका लिंक सभी जिलों तक पहुंचाने का काम दिया गया है।
शुक्रवार को निर्वासित तिब्बत सरकार का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाएगा । निर्वासित तिब्बत सरकार का चुनाव आयोग 14 मई सुबह 10 बजे अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर ऑनलाइन चुनाव परिणाम घोषित करेगा। 14 मई सुबह 10 बजे यह साफ हो जाएगा कि निर्वासित तिब्बत सरकार का नए प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग होंगे या केलसंग दोरजे। प्रधानमंत्री पद के लिए इन दो उम्मीदवारों के बीच ही मुकाबला है। तिब्बत की कुछ वेबसाइटों के अनुसार प्रधानमंत्री पद की दौड़ में पेंपा सेरिंग आगे चल रहे हैं। निर्वासित तिब्बत सरकार के आखिरी चरण के चुनाव परिणाम पर चीन, अमेरिका, भारत सहित दुनिया भर के कई देशों की नजर है। चुनाव परिणाम ऐसे समय में आ रहे हैं, जब अमेरिका और आस्ट्रेलिया सहित कई देश खुले तौर पर चीन पर निशाना साध रहे हैं। नए राष्ट्रपति जो बाइडन पहले ही अमेरिका में दलाईलामा को आमंत्रित करने की बात कह चुके हैं। इस तरह निर्वासित तिब्बत सरकार के नए प्रधानमंत्री के लिए हो रहे चुनाव दुनिया भर के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। इन देशों में हुआ था मतदान आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, आस्ट्रिया, बेल्जियम, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, नीदरलैंड, नार्वे, पोलैंड, स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, यूके, जापान, नेपाल, अमेरिका, रूस, ताइवान सहित भारत के कई हिस्सों में तिब्बती लोगों ने नए प्रधानमंत्री के लिए मतदान किया है।
मंडी के करसोग से इंसानियत को शर्मसार करने वाला मसला सामने आया है। यहां एक महिला के कोरोना संक्रमित आने के बाद मकान मालिक ने उसे और उसके परिवार को घर से निकाल दिया । इस वजह से महिला और उसके परिवार को दो साल के बच्चे के साथ दो दिन तक टैक्सी में रहना पड़ा। मंडी के करसोग में टैक्सी चालक परसराम दो दिन पहले पत्नी को चेकअप के लिए शिमला ले गया था, जहां जांच के दौरान पत्नी कोरोना पॉजिटिव पाई गई। पत्नी की हालत ठीक थी, जिस पर डॉक्टरों ने परिवार को होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी। डॉक्टरों ने दी थी होम आइसोलेशन की सलाह चालक परसराम पत्नी और 2 साल के बेटे के साथ घर आ गया। यह परिवार करसोग में एक किराये के मकान पर रहता है। ऐसे में परसराम ने मकान मालिक को पूरे मामले को लेकर अवगत करवाया, लेकिन मकान मालिक ने कोरोना के खतरे को देखते हुए परसराम को कहीं और ठहरने की सलाह दी। परसराम कोरोना पॉजिटिव पत्नी और 2 साल के बेटे के साथ दो दिनों से टैक्सी में ही रहा। इस मुश्किल घड़ी में कोई भी व्यक्ति इस परिवार की मदद करने को तैयार नहीं हुआ। डीएसपी की मदद से मालिक मालिक ने दी अनुमति आखिर में परसराम ने डीएसपी गीतांजलि ठाकुर से मदद की गुहार लगाई। डीएसपी बिना देर किए पुलिस टीम के साथ परसराम की सहायता के लिए पहुंच गई। इस दौरान न केवल डीएसपी ने मकान मालिक से बात करके परसराम को उसके कमरे में पहुंचाया, बल्कि परिवार के लिए राशन पानी की भी पूरी व्यवस्था की। डीएसपी गीतांजलि ठाकुर ने बताया कि रविवार को 4 बजे परसराम का फोन आया। इनकी दिक्कत थी कि पत्नी कोरोना पॉजिटिव थी, इसलिए ये दो दिन से पत्नी और 2 साल के बच्चे के साथ गाड़ी में रह रहे थे। उन्होंने कहा कि फोन आने के बाद मकान मालिक से बात कर परसराम को घर पहुंचाया गया और जरूरत का हर सामान पुलिस घर तक पहुंचाएगी।
कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच उत्तर प्रदेश में अभी लॉकडाउन लगा हुआ है। लेकिन इस पाबंदी के बीच गौतमबुद्ध नगर में शराब की दुकानों को खोलने का निर्देश दिया गया है। आदेश के अनुसार जिले में सुबह 10:00 बजे से 7:00 बजे तक शराब, बीयर की दुकानें खुलेंगी। जिले में कुल 524 शराब की दुकानें हैं हालांकि इस दौरान किसी भी दुकान की कैंटीन नहीं खुलेगी और कोरोना प्रोटोकॉल का पालन संपूर्ण रूप से किया जाएगा । गौतमबुद्ध नगर के अलावा गाजियाबाद जिले में भी मंगलवार से ही शराब की दुकाने खुल रही हैं। दुकानों के बाहर 6 फीट की दूरी पर गोला बनाना होगा ताकि लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। नोएडा और गाजियाबाद में शराब की दुकानें खुलने पर लोग मास्क लगाकर शराब की दुकान पर पहुंचे। यूपी के अन्य कुछ जिलों में बुधवार से शराब की दुकानें खुलने की समभावना हैं। यूपी के बनारस समेत कुछ ज़िलों में ज़िलाधिकारियों ने 1 बजे दिन तक शराब की दुकानें और बाकी ज़रूरी सामानों की दुकानें खोलनी की इजाज़त दी है।
हिमाचल प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशालय ने स्कूल शिक्षा बोर्ड की 10वीं कक्षा के 1.16 लाख विद्यार्थियों को 11वीं कक्षा में प्रमोट करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। निदेशालय ने सभी जिलों के शिक्षा उपनिदेशकों को 30 मई तक 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों को रोल नंबर के आधार पर 11वीं कक्षा में दाखिला देने को कहा है। साथ ही स्कूल शिक्षा बोर्ड को 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। विद्यार्थियों को हर घर पाठशाला कार्यक्रम में कक्षाएं लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इस संबंध में मंगलवार को उच्च शिक्षा निदेशक डाॅ अमरजीत शर्मा की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं।
कोरोना मैनेजमेंट पर मोदी सरकार को घेर रही कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को भाजपा ने जवाब दिया है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मंगलवार को कहा कि आज के हालात में कांग्रेस की करनी से हैरान नहीं हूं, दुखी हूं। उन्होंने कहा कि एक ओर उनकी पार्टी के कुछ मेंबर्स लोगों की मदद करने का काम कर रहे हैं तो वहीं, दूसरी ओर उनके वरिष्ठ नेताओं की फैलाई नकारात्मकता से ये सराहनीय काम धूमिल हो रहा है। जेपी नड्डा ने कहा कि ये खत गहरी पीड़ा और दुख के साथ लिख रहा हूं। मैंने कभी ऐसा पत्र नहीं लिखा है, लेकिन जिस तरह से कांग्रेस के मेंबर्स भ्रम फैला रहे हैं, उनके मुख्यमंत्री ऐसा कर रहे हैं उसके बाद मुझे यह खत लिखना पड़ा। जिस वक्त भारत कोरोना महामारी के साथ पूरी ताकत से लड़ रहा है, उस वक्त कांग्रेस की टॉप लीडरशिप को लोगों को गुमराह करना और झूठा डर फैलाना बंद कर देना चाहिए। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में सोनिया गांधी ने कहा था कि मोदी सरकार कोरोना काल में फेल हो गई। CWC में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया था।
Air-ambulance service is now available in Himachal Pradesh to rescue patients via air transportation in the event of a serious emergency. Despite the advancements and availability of services in the state, there are many places that are hard to reach because of inadequate roads and bad infrastructure, delaying road ambulances to reach hospitals on time. Understanding the needs of advanced services like Air Ambulances for medical care Charter Aircraft Services (Chandigarh) and Kestrel Aviation Pvt Ltd. (Mumbai) are now providing air ambulance service in HP. Charter Aircraft Services and Kestrel Aviation Pvt Ltd. (Mumbai) are one of the leading DGCA Approved Helicopter Operators in India with a fleet of three high-performance Agusta 119 Koala Helicopters. Agusta 119 Koala is one of the fastest helicopters that provides approx 140-150 NM Speed per hour and is also capable of high altitude hill flying. The company has highly experienced hill-qualified Ex Army pilots who have long experience of hill flying in Uttrakhand. With a vision to serve the need of fast transfers required for critically ill/injured people living in remote areas of Himachal Pradesh, like Rampur, Rohru, and Kinnaur this service has been started. The company has kept one of its helicopters at Dehradun as well to bring patients quickly from Shimla or Chandigarh for their further treatment. The company believes that advancements in technology should be applied to provide medical facilities and treatments making any patient’s life easy and long. The company's spokesperson said that, if the company gets support from the government of HP, they would be able to place helicopters on strategic locations of Himachal Pradesh such as “Shimla” to ensure fast availability of air ambulance in case of any medical emergency anywhere in the state. As per the company, In case of Medical emergencies, usually, there is not much time to wait for DM Permissions to operate the helicopter, all they request from the HP government is to extend support to get fast permissions from all districts of Himachal Pradesh so that they can ensure fast service to the people in need.
हिमाचल प्रदेश के सियासी इतिहास में नारी शक्ति की मौजूदगी कम जरूर रही है पर फीकी नहीं रही। यहाँ सियासी क्षितिज पर बेहद कम महिलाएं अब तक अपना नाम चमकाने में कामयाब रही और इसका बड़ा कारण ये है कि प्रदेश के प्रमुख राजनैतिक दलों ने कभी महिलाओं पर ज्यादा भरोसा नहीं जताया है। पर कुछ नाम ऐसे है जिन्होंने प्रदेश की सियासत में अपना खूब जलवा बिखेरा है, यानी गिनती जरूर कम है पर महिला नेताओं ने रंग खूब जमाया है। तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कई महिलाओं ने न सिर्फ विधानसभा में जगह बनाई है, बल्कि मंत्री भी रही। ये भी गौरव का विषय है कि देश की प्रथम स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर भी हिमाचल प्रदेश से ही सांसद थी। उमावती थी पहली महिला विधायक 1954 में बिलासपुर के हिमाचल प्रदेश में विलय के बाद उमावती गेहड़वीं से निर्दलीय के तौर पर पहली महिला विधायक बनी। 1957 में कांग्रेस ने सत्यावती को मनोनीत किया। 1962 में कांग्रेस ने सुभद्रा अमीं चंद को मनोनीत किया। चंबा से कांग्रेस ने ही देविंद्रा कुमारी को मनोनीत किया। कुटलैहड़ से सरला शर्मा 1972 में कांग्रेस की विधायक रही। भटियात से पदमा भी 1972 में विधायक रहीं। इसी वर्ष लाहुल स्पीति से लता ठाकुर विधायक रही। चंदेश कुमारी 1972, 1982, 2003 में विधायक रही। नाहन से श्यामा शर्मा तीन बार विधायक रही। 1977, 82, 1990 में जनता दल की विधायक बनी। बनीखेत अब डलहौजी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की ही आशा कुमार 85, 93, 98, 2003, 2012, 2017 में विधायक चुनी गई। 1990 में गोपालपुर से भाजपा की लीला शर्मा और चिंतपूर्णी से सुषमा शर्मा चुनी गई। सोलन से कांग्रेस की कृष्णा मोहिनी 1993 और 98 में विधायक बनी। हमीरपुर से कांग्रेस की अनीता वर्मा 1994 के उप चुनाव और 2003 में विधायक रही। भाजपा से उर्मिल ठाकुर हमीरपुर से 1998 और 2007 में विधायक बनी। शाहपुर से भाजपा की सरवीण चौधरी 1998, 2007, 2012, 2017 में विधायक चुनी गई। 2008 में डलहौजी से भजपा की रेणु चड्ढा विधायक बनी। कांग्रेस की विप्लव ठाकुर जसवां से तीन बार विधायक रही। वह 1985, 93, 98 में विधायक चुनी गई। दून से भाजपा की विनोद कुमारी 2007 में विधायक रही। आठ बार विधायक बनी विद्या स्ट्रोक्स वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्या स्टोक्स कांग्रेस से आठ बार विधायक चुनी गई। उनका रिकॉर्ड कोई दूसरी महिला नेता नहीं तोड़ पाई है। स्ट्रोक्स पहली बार 1974 में विधायक बनीं थी। वह विधानसभा की अध्यक्ष भी रहीं है और नेता विपक्ष भी बनी। स्ट्रोक्स 1974, 1982, 1985, 1990,1998, 2003, 2007 व 2012 में विधायक रही। वर्तमान में पांच महिला विधायक 2017 के चुनाव में भाजपा से शाहपुर सीट से सरवीण चौधरी, भाेरंज से कमलेश कुमारी और इंदाैरा से रीता देवी विधायक बन कर विधानसभा पहुंची थी, जबकि कांग्रेस की आशा कुमारी डलहौजी से चुनाव जीत कर विधायक बनी थी। 2019 में उपचुनाव में पच्छाद से भाजपा की 34 वर्षीय रीता कश्यप ने जीत हासिल कर विधायक बनी। 1998 में जीती थी सबसे अधिक 6 महिलाएं हिमाचल प्रदेश के इतिहास पर नज़र डाले तो 1998 के विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक 6 महिअलों ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में कांग्रेस की विप्लव ठाकुर, मेजर कृष्णा मोहिनी, विद्या स्ट्रोक्स, आशा कुमारी और भाजपा की उर्मिल ठाकुर और सरवीण चौधरी ने जीत दर्ज की। हालांकि बाद में भाजपा नेता महेंद्र नाथ सोफत की याचिका पर सोलन का चुनाव सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द घोषित कर दिया गया जहाँ से पहले मेजर कृष्णा मोहिनी को विजेता घोषित किया गया था। वहीँ 1998 में परागपुर में हुए उप चुनाव में निर्मला देवी ने जीत दर्ज की। विस चुनाव : महिला प्रत्याशी जीती 1977 : 1 1982 : 3 1985 : 3 1990 : 4 1993 : 3 1998 : 6 ( बाद में सोलन चुनाव रद्द घोषित हुआ ) 2003 : 4 2007 : 5 2012 : 3 2017 : 4 सरला शर्मा से सरवीण चौधरी तक प्रदेश में 1972 में पहली बार सरला शर्मा मंत्री बनी। फिर 1977 में श्यामा शर्मा मंत्री रही। उसके बाद आशा कुमारी, विप्लव ठाकुर, चंद्रेश कुमारी, विद्या स्टोक्स मंत्री रही। वहीँ वर्तमान सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री सरवीण चौधरी इससे पहले धूमल सरकार में भी मंत्री रह चुकी है। सिर्फ तीन महिलाएं पहुंची लोकसभा लोकसभा की बात करें तो वर्ष 1952 में राजकुमारी अमृत कौर प्रदेश की पहली महिला सांसद बनी। इसके बाद चंद्रेश कुमारी वर्ष 1984 में कांगड़ा से सांसद चुनी गई। वहीँ प्रतिभा सिंह मंडी सीट से दो बार लोकसभा सांसद रही है। वे वर्ष 2004 और 2013 के उप चुनाव में विजेता रही। 1956 में लीला देवी बनी थी राज्यसभा सांसद अपर हाउस राज्यसभा की बात करें तो आज तक हिमाचल प्रदेश की कुल 7 महिलाएं राज्यसभा में पहुँच सकी है। सबसे पहले वर्ष 1956 में कांग्रेस नेता लीला देवी राज्यसभा के लिए चुनी गई। इसके बाद 1968 में सत्यावती डांग, 1980 में उषा मल्होत्रा, 1996 में चंद्रेश कुमारी, 2006 व 2014 में विप्लव ठाकुर को कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा भेजा। वहीँ भाजपा से 2010 में बिमला कश्यप व 2020 में वर्तमान राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी राज्यसभा पहुंची तो क्या पहली महिला सीएम हो सकती थी मैडम स्ट्रोक्स वर्ष 2003 में कांग्रेस की हिमाचल की सत्ता में वापसी हुई थी। इससे पिछले चुनाव में पंडित सुखराम की हिमाचल विकास कांग्रेस वीरभद्र सिंह के अरमानो पर पानी फेर चुकी थी जिसकी बदौलत प्रो प्रेमकुमार धूमल पांच वर्ष मुख्यमंत्री रहे। अब जब 2003 में मुख्यमंत्री चुनने की बारी आई तो ठियोग विधायक और कांग्रेस की तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष विद्या स्टोक्स ने वीरभद्र को चुनौती दे दी। उस वक्त प्रदेश में माहौल बना की शायद मैडम स्ट्रोक्स सोनिया गांधी से अपनी नजदीकी के बुते सीएम बनने में कामयाब हो जाए। कहते है स्ट्रोक्स ने बाकायदा दिल्ली में दावा पेश कर दिया था कि विधायक दल उन्हें मुख्यमंत्री पद पर देखना चाहता है। वीरभद्र विरोधी गुट का भी उन्हें पूरा साथ मिला। पर अंत में बाजी वीरभद्र सिंह ने ही मारी। विद्या दिल्ली में थी और वीरभद्र सिंह ने शिमला में मीडिया के सामने अपने 22 विधायकों की परेड करा कर अपनी ताकत का अहसास आलाकमान को करवा दिया। जो परेड में शामिल नहीं हुए उनमे से अधिकांश विधायक भी वीरभद्र के साथ हो लिए। इस तरह वीरभद्र सिंह पांचवी बार मुख्यमंत्री बन गए और प्रदेश को महिला सीएम मिलने के कयास सिर्फ कयास ही रह गए।
प्रदेश की जयराम सरकार और भाजपा संगठन में जिला सिरमौर खूब चमक रहा है। मात्र पांच विधानसभा सीटाें वाले इस ज़िले में भाजपा ने 2017 में तीन सीटें ही जीती थी, पर सरकार और संगठन दोनों में सिरमौर का जलवा दिखा है। वर्तमान में जिला सिरमौर से एक मंत्री तो है ही, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद भी सिरमौर से है। 2017 के चुनाव में नाहन, पांवटा साहिब और पच्छाद सीट पर भाजपा की जीत हुई ताे नाहन विधायक डा. राजीव बिंदल काे विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी मिली। 2019 में डॉ राजीव बिंदल ने स्पीकर पद से इस्तीफा दिया और उन्हें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की कमान मिल गई। पर पिछले साल यानी काेविड-19 के दाैरान स्वास्थ्य विभाग में घाेटाले के चलते डा. बिंदल काे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा देना पड़ा। पर पार्टी ने उनका रिप्लेसमेंट भी सिरमौर से ही ढूंढा। सांसद सुरेश कश्यप काे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का ज़िम्मा मिल गया। सिरमौर काे तवज्जो मिलने का सिलसिला ज़ारी रहा और पिछले साल मंत्रिमंडल विस्तार में पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्र से विधायक सुखराम चाैधरी काे मंत्री की कुर्सी मिल गई। यहीं से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिला सिरमौर काे सरकार और संगठन में विशिष्ट स्थान प्राप्त है। बिंदल चले गए ताे सुखराम चाैधरी की हुई एंट्री 2017 के विधानसभा चुनाव में जब भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लाैटी तो संभावनाएं जताई जा रही थी कि डा.बिंदल काे कैबिनेट में जगह मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्हें विधानसभा में स्पीकर की कुर्सी दे दी गई। फिर वे प्रदेश अध्यक्ष रहे। पर वक्त बदला और डॉ बिंदल न सरकार में है और न संगठन में, लेकिन सिरमौर काे जगह दिलाने में उनका काफी याेगदान रहा। दरअसल, माना जाता है कि संतुलन बनाये रखने के लिए ही सुखराम चाैधरी को कैबिनेट में एंट्री मिली। पहली बार सिरमौर से सांसद पच्छाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे सुरेश कश्यप काे भाजपा ने 2019 में लाेकसभा चुनाव के मैदान में उतारा और वे जीत भी गए। शिमला संसदीय क्षेत्र से पहली बार सिरमौर का कोई नेता सांसद बना। उसके बाद हुए उपचुनाव में संगठन ने एक युवा महिला नेता काे टिकट के काबिल समझा और रीना कश्यप काे पच्छाद उपचुपनाव में जीत मिली। क्या सिरमौर भी रखेगा 2022 में ख्याल बेशक भाजपा ने सरकार और संगठन में जिला सिरमौर का पूरा ख्याल रखा है पर सिरमौर भाजपा का कितना ख्याल रखेगा इसका पता 2022 में ही चलेगा। पच्छाद क्षेत्र से भाजपा की फायर ब्रांड नेता रही दयाल प्यारी अब कांग्रेस में शामिल हो चुकी है। यहाँ से कांग्रेस के लिए हार की हैट्रिक लगा चुके वरिष्ठ नेता गंगूराम मुसाफिर की जगह पार्टी 2022 में दयाल प्यारी को मौका दे सकती है। वैसे भी पच्छाद में भाजपा की स्तिथि कमजोर हुई है, जिला परिषद् और स्थानीय निकाय के नतीजे भी इसकी तस्दीक करते है। कमोबेश ऐसा ही हाल मंत्री सुखराम चौधरी के क्षेत्र पावंटा साहिब का है। यहाँ अभी से भीतरखाते मंत्री की मुख़ालफ़त का बंदोबस्त दिखने लगा है। नाहन में जरूर डॉ राजीव बिंदल खुद को साबित करते आ रहे है लेकिन इसमें कोई शक-ओ-शुबह नहीं है कि मौजूदा स्तिथि में वे हाशिए पर ही है। रेणुकाजी और शिलाई में फिलहाल कांग्रेस का कब्ज़ा है और 2022 में भी यहाँ जबरदस्त मुकाबला होना तय है।
2022 के विधानसभा चुनाव में राज्य सचिवालय का सबसे फेमस कमरा नंबर 202 क्या फिर एक मंत्री के सियासी अरमानों की बलि लेगा ? क्या जयराम सरकार में आईटी मिनिस्टर डा. रामलाल मारकंडेय अगले साल चुनाव जीत पाएंगे या फिर मनहूस कमरे का ग्रहण लगेगा? ये बड़े सवाल है और इस कमरे पर बवाल है। जनाब ये कमरा नम्बर 202 है ही ऐसा, सत्तालोभी नेता इसका नाम सुनते ही भागे भागे फिरते है। दरअसल, राज्य सचिवालय में मंत्रियाें काे हर दफे कमरे अलॉट होते हैं, जिसको जो मिला वो उसमे खुश, लेकिन यहां एक कमरा ऐसा भी है जिसमें बैठने के लिए कोई भी मंत्री तैयार नहीं होता। प्रदेश सचिवालय में सभी मंत्रियों के इन कमरों से ही प्रदेश सरकार का कामकाज कैबिनेट मंत्री संभालते हैं। इन कमरों में कमरा नंबर 202 वो कमरा है जिसमें बैठने वाला मंत्री चुनाव हारता है। ये हम नही पिछले चुनाव के नतीजे बताते है और हिमाचल के सियासी गलियारों में भी ये बात आम है। पिछले चुनाव के नतीजों पर गाैर करें ताे 2012 में जब वीरभद्र सरकार बनी तो ये कमरा शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा को मिला, और 2017 का चुनाव सुधीर शर्मा हार गए। सुधीर शर्मा इसी कमरे में बैठते थे। हालांकि उस वक्त सुधीर शर्मा बार-बार यही कहते थे कि ये सबकुछ अन्धविश्वास है, ऐसा कुछ नहीं हाेगा, मगर हुआ तो वो जो सोचा न था। इस कमरे में मंत्री बनने पर जगत प्रकाश नड्डा, आशा कुमारी और नरेंद्र बरागटा भी बैठे है और ये तीनों तत्कालीन मंत्री रहते हुए अगला चुनाव हार गए। हालांकि इसके बावजूद सियासत में इन नेताओं का दबदबा बना रहा। जगत प्रकाश नड्डा इस समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जबकि आशा कुमारी एआईसीसी सचिव के साथ पंजाब कांग्रेस की प्रभारी हैं। नड्डा का केंद्र में दबदबा है और आशा कुमारी के पंजाब कांग्रेस के प्रभारी रहते हुए पार्टी को सत्ता मिली। गौरतलब है कि वर्ष 1998 से 2003 तक तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा इस कमरे में बैठे। नड्डा दाे बार राज्य सरकार में मंत्री रहने के अलावा प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं। हालांकि राज्य में स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद वे वर्ष 2003 में चुनाव हार गए थे। जीत हुई पर कैबिनेट में नहीं मिल पाई जगह 2012 के चुनाव में आशा कुमारी जीत कर विधानसभा पहुंची, लेकिन वीरभद्र सिंह के कैबिनेट में उन्हें जगह नहीं मिल पाई। इसी तरह से पूर्व बागवानी मंत्री नरेंद्र बरागटा 2017 का चुनाव जीत कर आए ताे जयराम सरकार में मंत्री पद नसीब नहीं हुआ। उन्हें चीफ व्हिप की कुर्सी दी गई, वह भी डेढ़ साल बाद। वर्ष 2002 के चुनाव में आशा कुमारी को भी शिक्षा मंत्री बनने के बाद यही कमरा मिला था, लेकिन वे 2007 में विधानसभा चुनाव हार गई थीं। जेपी नड्डा और आशा कुमारी के बाद यही कमरा नरेंद्र बरागटा को 2007 में बागवानी मंत्री बनने पर आबंटित हुआ और 2012 का विधानसभा चुनाव हार गए। उसके बाद सुधीर शर्मा को शहरी विकास मंत्री बनने पर ये कमरा मिला था, जो चुनाव हार गए हैं। अभी डा. रामलाल मारकंडा निपटा रहे हैं कामकाज प्रदेश की जयराम सरकार में आईटी मिनिस्टर डा. रामलाल मारकंडा कमरा नंबर 202 में बैठकर सरकार का कामकाज निपटा रहे हैं। अब देखना है की अगले साल हाेने वाले चुनाव में क्या डा. मारकंडा चुनाव जीत पाते हैं या फिर इतिहास बरकरार रहेगा?
'औरों के ख़यालात की लेते हैं तलाशी और अपने गरेबान में झाँका नहीं जाता', मुज़फ़्फ़र वारसी का ये शेर कांग्रेस के मौजूदा हालात पर बिलकुल सटीक बैठता है। बंगाल में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला पर पार्टी को ख़ुशी इस बात की है कि भाजपा 77 पर सिमित रह गई। देश की सबसे बुजुर्ग पार्टी का मनोबल गिर चूका है और कांग्रेस की मानसिकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वो स्वयं की जीत के बनिस्पत भाजपा की हार में अपनी ख़ुशी तलाश रही है। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व में न धार दिख रही है और न ही नई सोच, फिर भी परिवर्तन को पार्टी तैयार नहीं है। रही सही कसर चापलूसों की फ़ौज पूरा कर देती है। अशरफ़ मालवी ने कहा था कि 'हुकूमत से एजाज़ अगर चाहते हो, अंधेरा है लेकिन लिखो रोशनी है', कांग्रेस में भी ऐसा ही है। पार्टी में भविष्य देखना है तो अँधेरे को रोशनी कहना ही पड़ेगा। पर सवाल ये है कि ऐसा कब तक चलेगा। कब तक पार्टी हकीकत को अनदेखा करती रहेगी। ये सिर्फ कांग्रेस का आंतरिक मसला नहीं है, देश के लोकतंत्र के लिए भी एक मजबूत विपक्ष का होना आवश्यक है। निसंदेह कांग्रेस की जड़ गहरी है, हिली जरूर है पर अभी उखड़ी नहीं है। कांग्रेस को जरूरत है वक्त रहते आत्ममंथन की। कांग्रेस का एक बड़ा तबका मानता है कि संगठनात्मक तौर पर कांग्रेस को दोबारा खड़ा करने की सख्त आवश्यकता है। मौजूदा स्तिथि में एक ही रास्ता है की पार्टी में हर स्तर पर लोकतांत्रिक तरीक़े से संगठनात्मक चुनाव करवाकर नेतृत्व चुना जाए। राष्ट्रीय स्तर से बूथ स्तर तक संगठनात्मक चुनाव हो, राज्य स्तर पर भी पार्टी मजबूत हो और मुद्दा आधारित राजनीति के मार्ग पर पार्टी आगे बढ़े। कई बड़े नेता सार्वजानिक तौर पर इसकी वकालत कर चुके है। कई युवा नेता भी खुलकर लोकतांत्रिक तरीक़े से संगठनात्मक चुनाव करवाने के पक्ष में अपनी बात रखते रहे है। न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि प्रदेश में भी इसकी मांग उठती रही है। हालहीं में हिमाचल प्रदेश के युवा नेता और शिमला ग्रामीण विधायक विक्रमादित्य सिंह ने इस मसले पर अपनी राय रखी। विक्रमादित्य इससे पहले भी संगठनात्मक चुनाव करवाने के पक्ष में बोलते रहे है। कांग्रेस को कामराज प्लान की दरकार तीन बार मुख्यमंत्री बनने के बाद कांग्रेस के एक नेता को लगा कि पार्टी कमज़ोर होती जा रही है और इसी मुद्दे पर चर्चा करने के लिए एक दिन वो देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से मिले और कहा कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनना चाहते है। वो नेता थे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के कामराज। जब पंडित नेहरू ने कामराज से इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा की कांग्रेस के सब बुजुर्ग नेताओं में सत्ता लोभ घर कर रहा है, उन्हें वापस संगठन में लौटना चाहिए और लोगों से मिलना जुलना चाहिए। भारतीय राजनीती के इतिहास में इस योजना को कामराज प्लान के नाम से जाना जाता है। इस योजना के तहत उन्होंने खुद भी इस्तीफा दिया और इनके अलावा लाल बहादुर शास्त्री, जगजीवन राम, मोरारजी देसाई तथा एसके पाटिल जैसे नेताओं ने भी पद त्यागे थे। अगर आज की बात करे तो भले ही अब भी कुछ राज्य में कांग्रेस की सरकार है मगर कांग्रेस की कुव्वत अब पुरे देश में कुछ खास नहीं रही। अपना अस्तित्व ढूंढ़ती आज की कांग्रेस को कामराज जैसे नेताओ की ज़रूरत है जो सत्ता का लालच छोड़ कर पार्टी का संगठन मजबूत करने में अपना योगदान दें। वर्तमान परिवेश की बात करें तो पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंद्र सिंह और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ऐसे चेहरे है जो राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का नेतृत्व करने का मादा रखते है। गहलोत तो 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में भी अपनी क्षमता का लोहा मनवा चुके है। वहीँ कई राज्यों में बेशक कांग्रेस सत्ता में नहीं है लेकिन सत्ता स्वपन ने ही नेताओं में रार डाली हुई है। ये बिखराव और अंतर्कलह ही पार्टी की बड़ी कमजोरी है। यदि ऐसे बुजुर्ग नेता युवाओं को आगे लाकर खुद पार्टी के संगठन में काम करते है तो निसंदेह पार्टी की काया पलट सकती है। देश में हाल : यूपी, बंगाल, बिहार में मुख्य विपक्षी दल भी नहीं है कांग्रेस उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, आंध्र प्रदेश, दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में तो अब कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल तक नहीं रही। दक्षिण में भी पार्टी की स्तिथि ठीक नहीं है। कांग्रेस का जमीनी स्तर पर संगठन या तो नदारद है, या कमजोर पड़ चुका है। हर स्तर पर आत्ममंथन की जरूरत है। हालहीं में केरल में कांग्रेस गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा, तमिलनाडु में गठबंधन की जीत पूरी तरह से डीएमके की ही जीत है। पुडुचेरी और आसाम भी पार्टी हारी है। पिछले वर्ष हुए बिहार चुनाव में तो कांग्रेस के साथ गठबंधन का खमियाजा आरजेडी को भुगतना पड़ा था। राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब में जरूर अब भी कांग्रेस के मुख्यमंत्री है। महाराष्ट्र, झारखण्ड और तमिलनाडु में गठबंधन की सरकार है पर इनमें कांग्रेस की हैसियत कुछ ख़ास नहीं दिखती। मध्य प्रदेश में आपसी खींचतान से कांग्रेस सत्ता गवां चुकी है तो राजस्थान में बमुश्किल सत्ता बची है। इसी तरह कर्नाटक में भी गठबंधन सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई। हिमाचल: लचर संगठन से पार्टी लाचार, वीरभद्र का अब भी विकल्प नहीं देश के मुकाबले हिमाचल में कांग्रेस की स्तिथि बेहतर दिखती है लेकिन 2022 में बगैर वीरभद्र सिंह अब भी कांग्रेस सरकार की कल्पना गले से नहीं उतरती। बढ़ती उम्र और खराब सेहत ने वीरभद्र सिंह को काफी सिमित कर दिया है, पर उनका विकल्प अब भी कांग्रेस के पास नहीं दिख रहा। बीते साढ़े तीन साल में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री का दायरा सिमित ही दिखा हैं। कौल सिंह ठाकुर और सुधीर शर्मा जैसे कई वरिष्ठ नेता पिछला चुनाव हारने के बाद मानो किसी योजना के तहत हाशिए पर धकेल दिए गए है। कांग्रेस का प्रदेश संगठन लचर हैं। प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप राठौर तो मानो बंद कमरे से पत्रकार वार्ता करके ही अपनी सियासी गाड़ी धकेलना चाहते है। हालांकि नगर निगम चुनाव में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन ने कुछ आस जरूर जगाई है पर विधानसभा चुनाव जीतने के लिए पार्टी को दमदार चेहरे और नेतृत्व की जरुरत है, जो फिलहाल नहीं दिखता। पांच साल की सत्ता परिवर्तन थ्योरी के आधार पर ही सत्ता में वापसी मुश्किल होगी।
सियासत का कोई धर्म कोई वक्त नहीं होता, ये तो बस कुर्सी के लोभ से प्रेरित हो बेवक्त चलती रहती है। इंसानियत पर भारी पड़ती सियासत के नमूने तो इस कोरोना काल में बहुत दिखे, मगर सियासत को छोड़ इन्सानियत का हाथ बढ़ाने वाले बेहद कम है। कोरोना के मामले बढ़ते ही सियासी दलों के बीच ब्लेम गेम शुरू हो जाता है, आरोप तो सभी लगाते है मगर कोई भी मदद करने को राज़ी नहीं। अपवाद मिलेंगे भी तो बहुत कम, बाकी तो मदद कम और दिखावा ज्यादा। इस वैश्विक आपदा में हिमाचल प्रदेश में कुछ नेता ऐसे भी है जो कोरोना को गंभीरता से ले रहे है और बढ़चढ़कर ज़रूरतमंद लोगों की सहायता कर रहे है। इन नेताओं में से एक कांग्रेस के राष्ट्रिय सचिव व पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा भी है जो निरंतर लोगो की सेवा कर रहे है। हिमाचल प्रदेश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और सबसे बुरी स्थिति कांगड़ा जिले में है। काँगड़ा में सबसे ज्यादा कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं। आलम यह है कि कोविड मरीजों से अस्पताल भर रहे हैं। ऐसे सुधीर शर्मा ने अपने आलिशान मकान को कोविड सेंटर बनाने का प्रस्ताव रखा था, हालांकि इसे प्रशासन द्वारा मंज़ूरी नहीं दी गई। प्रशासन की शर्तों एवं प्रोटोकॉल के चलते यह संभव नहीं हो पाया है। तमाम सुविधाएं के बाद ही सुधीर के घर को कोविड सेंटर बनाया जा सकता था मगर इन शर्तों की लम्बी फेहरिस्त को पूरा कर पाना आसान नहीं था। कांगड़ा प्रशासन द्वारा जो पत्र लिखा गया था उसके अनुसार सुधीर को अपने घर को कोविड केयर -ऑक्सीजन युक्त 50 बेड का प्रबंध करने के लिए कहा गया। साथ ही रोगियों के लिए खाने की व्यवस्था का इंतजाम भी उन्ही को करना था। इसके अलावा, कोविड केयर सेंटरों के डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, वार्ड ब्वॉयज और सफाई कर्मचारियों की लिस्ट भी प्रशासन को दी जानी थी। ये सभी इंतजाम तीन दिन के भीतर करने के लिए कहा गया था जो संभव नहीं हो पाया। सुधीर निश्चित तौर पर कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में अपना श्रेष्ठ देना चाहते है सो उन्होंने अलग रास्ता निकाल लिया। अब सुधीर ने अपने घर में बिस्तरों की व्यवस्था की और इसे क्वारंटाइन सेंटर बना दिया। किसी व्यक्ति के घर में यदि रहने की व्यवस्था नहीं है तो वह यहां पर क्वारंटाइन रह सकता है। पूर्व मंत्री ने अपने घर में प्राइवेट नर्सेज का भी इंतज़ाम किया है और एक एम्बुलेंस भी 24 घंटे उनके घर पर उपलब्ध रहती है। सिर्फ ये ही नहीं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने लोगों की सहायता के लिए शक्ति हेल्पलाइन भी शुरू की है। इसके माध्यम से लोगों को एंबुलेंस की सुविधा व होम आइसोलेट व्यक्ति तक भोजन पहुंचाया जा रहा है। इस बुरे वक्त में सुधीर की ये सुखद पहल सचमुच काबिल ए तारीफ़ है। मुझसे जो होगा मैं करूँगा : सुधीर बिगड़ते कोरोना के हालात में राजनीति से ऊपर उठकर मानव जाति को बचाने के लिए आगे आने का समय आ गया है। जहाँ आवश्यक है वहां सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाना भी जरूरी है क्यों कि जो सत्ता में है पहली जवाबदेही उसकी है। पर अब ये हम सबकी निजी लड़ाई बन चुकी है। ये मानवता की लड़ाई है और सबको अपनी क्षमता अनुसार इसमें योगदान करना चाहिए। इसी कड़ी में 24/7 शक्ति हेल्पलाइन सभी जरूतमंदो की सेवा में तत्पर है। हमने एक अलगाव केंद्र बनाया है, एम्बुलेंस सेवा मुहैया करवा रहे है, होम क्वारंटाइन के लिए तीन बार पैक भोजन की व्यवस्था कर रहे है, जरूरतमंदो के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था कर रहे है। मुझसे जो हो सकेगा मैं करूँगा, ये मेरे लिए सियासत का विषय नहीं है, आत्म संतोष का विषय है।
देश में कोरोना संक्रमण की बेकाबू रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है । देश में लगातार चौथे दिन कोरोना के 4 लाख से अधिक नए केस सामने आए हैं जबकि लगातार दूसरे दिन 4 हज़ार से ज़्यादा कोरोना मरीजों की मौत हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार पिछले 24 घंटे में कोरोना के 4,03,738 नए केस सामने आए हैं जबकि कोरोना से संक्रमित 4092 कोविड मरीजों की मौत हुई है। देश में कोरोना के करीब 37 लाख एक्टिव केस हैं। लगातार बढ़ते कोरोना मामलों के बीच मरीजों के रिकवरी रेट में कमी आ रही है। राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में कोरोना संक्रमण के आंकड़ों में तो गिरावट दर्ज की जा रही है लेकिन मरने वालों की संख्या में कमी नहीं है। लगातार बढ़ते कोविड मरीजों की संख्या के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाते हुए कोरोना की राष्ट्रीय नीति में बदलाव किया है। नई नीति के तहत अब कोविड हेल्थ फैसिलिटी में बिना पॉजिटिव रिपोर्ट के भी मरीज को भर्ती किया जा सकेगा। किसी भी मरीज को ऑक्सीजन और दवा देने से मना नहीं किया जाना चाहिए भले ही वो अलग शहर का ही क्यों ना हो। इसके साथ ही भारत में कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण अभियान की शुरुआत से लेकर अब तक टीके की 16.90 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार शनिवार को देश के 30 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में 18-44 साल आयु वर्ग के 2,86,800 लोगों को कोविड-19 टीके की पहली खुराक दी गई। अब तक इस आयु वर्ग के 17,76,540 लोगों को टीके की पहली खुराक दी जा चुकी है।
प्रदेश में कोविड-19 मामलों की संख्या और कोविड से होने वाली मृत्यु में हो रही तीव्र वृद्धि के मद्देनज़र राज्य सरकार ने प्रदेश में जारी कोरोना कर्फ्यु के तहत 10 मई के सुबह छः बजे से कुछ और सख्त पाबंदियां लगाने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेश में दैनिक ज़रूरतों और आवश्यक वस्तुओं की दुकानों के अतिरिक्त अन्य सभी दुकानें बन्द रहेंगी। दैनिक जरूरतों और आवश्यक वस्तुओं की दुकानें दिन में केवल तीन घंटे ही खुली रहेंगी और इसका समय संबंधित उपायुक्तों द्वारा निर्धारित किया जाएगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सार्वजनिक परिवहन आगामी आदेशों तक बंद रहेगा और निजी वाहनों को आपात स्थितियों में ही आवाजाही की स्वीकृति होगी। मुख्यमंत्री ने राज्य के लोगोें से कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए कोरोना कर्फ्यु के प्रभावी कार्यान्वयन में अपना पूर्ण सहयोेग देने का आग्रह किया। उन्होंने लोगों से घर में ही रहने और अति आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा यह निर्णय कोरोना वायरस की चेन को तोड़ने और प्रदेशवासियों के जीवन और सुरक्षा के मद्देनज़र लिया गया है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष विपिन परमार, शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री डाॅ. राम लाल मारकण्डा, स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. राजीव सैजल, अतिरिक्त मुख्य सचिव जे.सी. शर्मा, पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू, प्रधान सचिव शुभाषीश पांडा और स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी मुख्यमंत्री के साथ बैठक में उपस्थित रहे जबकि मुख्य सचिव अनिल खाची, जिला कांगड़ा, मंडी और सोलन के उपायुक्तों ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में भाग लिया।
कोरोना महामारी के इस काल में जहां हज़ारों कि संख्या में लोग मर रहें हैं वहीं मानवता भी अब मरती नज़र आ रही है। मानवता को शर्मसार करने वाला एक किस्सा कानपुर में दिखा है जहां खांसी, बुखार आने पर एक बुजुर्ग को परिजनों ने सड़क पर फेंक दिया। जिसके दरवाजे फेंका उसने बुजुर्ग के दूसरे रिश्तेदार को बुलाया लेकिन उस रिश्तेदार ने भी बुजुर्ग को एक किलोमीटर दूर दुकान के बाहर छोड़ दिया। पुलिस ने कार को ट्रेस कर रिश्तेदार को बुलाया और हिदायत देकर बुजुर्ग को उसके हवाले कर दिया। सुरेंद्र सिंह (52)की शादी नहीं हुई थी। वह 20 सालों से गुजैनी के ब्लॉक निवासी रिश्तेदार गौरव और सौरभ के यहां रह रहे थे। दो दिन पूर्व खांसी, जुकाम और बुखार आने पर रिश्तेदारों ने उन्हें कोरोना के डर से घर से ही बाहर निकाल दिया। सोमवार को सुरेंद्र गुजैनी सब्जीमंडी में किसी के घर के बाहर लेट गए। इस पर लोगों ने विरोध किया और उनके रिश्तेदारों को ले जाने को कहा। गुजैनी में ही रहने वाले सुरेंद्र के सगे भतीजे मुकेश को सूचना दी गई। मुकेश कार से वहां पहुंचा और बुजुर्ग को कार में लिटाकर करीब एक किमी दूर स्थित जैना पैलेस के अंदर एक दुकान के बाहर एक बिस्कुट का पैकेट थमाकर चला गया। दुकानों की देखरेख करने वाले कर्मचारियों ने इसकी जानकारी रतनलाल नगर चौकी इंचार्ज अरविंद सिंह को दी। दरोगा ने कार के नंबर को ट्रेस कर दोबारा मुकेश को बुलाया और जमकर फटकार लगाई। इस पर मुकेश ने बताया कि पहले वह अस्पताल गया था भर्ती न होने पर उन्हें यहां छोड़ा था। पुलिस कार्रवाई के डर से मुकेश सुरेंद्र को लेकर चला गया।
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट अफ़ेयर्स राज्यमंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए दिल्ली में सेवा इंटरनेशनल संस्था व सेवा भारती के तत्वावधान में प्रवासी भवन से 22 राज्यों के लिए 7 हज़ार से ज़्यादा ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से स्वयंसेवक इंद्रेश विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर अनुराग ठाकुर ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते हालात थोड़े मुश्किल हो गए हैं और ऐसे में मदद के लिए जो भी हाथ आगे बढ़ रहे हैं वही इंसानियत की सच्ची तस्वीर है। केंद्र व राज्य सरकारों के साथ कई और एनजीओ इस आपदा की घड़ी में सहायता के सारे उपाय कर रहे हैं। सेवा इंटरनेशनल द्वारा देश के 22 राज्यों में 7 हज़ार से भी ज़्यादा ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर की व्यवस्था करना सराहनीय है। इन ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर के पहुंचने से विभिन्न राज्यों में कोविड के उपचाराधीन मरीज़ों को बहुत मदद मिलेगी। इस पुनीत कार्य के लिए संस्था के सभी सदस्य बधाई के पात्र हैं। अनुराग ठाकुर ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के कारण संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है और इस बढ़ते संक्रमण के चलते पूरे देश में ऑक्सीजन की मांग भी बढ़ी है। सिर्फ़ हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में यह मांग 60 गुना तक बढ़ गई है। इसलिए ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, काँगड़ा व मंडी के जिला प्रशासन से बात करके तीन जिलों में पीएसए ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगवाने का निर्णय लिया गया है जिससे हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के सभी पांचो जिलों को लाभ पहुंचेगा। ऊना में 500 एलपीएम, व हमीरपुर और बिलासपुर में 120 एलपीएम के ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगाने के लिए विशेषज्ञों की टीम ने तीनों जिलों के कोविड सेंटरों का सर्वेक्षण कार्य भी पूरा कर लिया है। पिछले हफ़्ते हमीरपुर व ऊना में कोविड उपचाराधीन मरीज़ों को ऑक्सीजन से जुड़ी कोई समस्या आए इस दिशा में 105 ऑक्सीजन सिलेंडर जिला प्रशासन को हैंडओवर किए गए । इन उपायों से 260 बेडों को सीधा ऑक्सीजन सप्लाई उपलब्ध कराने में सफलता मिलेगी।
दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच ऑक्सीजन की कमी एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। ऑक्सीजन की कमी के चलते दिल्ली का ऑक्सीजन कोटा बढ़ाया गया है और बुधवार को पहली बार 730 मीट्रिक टन ऑक्सीजन भी दी गई है। इस बात के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सरकार और कोर्ट का शुक्रिया अदा किया है। साथ ही सीएम अरविन्द केजरीवाल ने इस बात पर भी जोर दिया है कि उन्हें दिल्ली के लिए रोज 700 मीट्रिक टन से ज्यादा ऑक्सीजन चाहिए। सिर्फ एक दिन इतनी ऑक्सीजन मिलने से इस संकट को दूर नहीं किया जा सकता है। केजरीवाल ने उम्मीद जताई है कि केंद्र की तरफ से दिल्ली को अब लगातार 700 मीट्रिक टन से ज्यादा ऑक्सीजन उपलब्ध करवाई जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि अब तमाम अस्पतालों को बेड बढ़ाने के निर्देश दे दिए गए हैं। उनके मुताबिक क्योंकि पहले अस्पतालों के पास पर्याप्त ऑक्सजीन नहीं था, ऐसे में बीएड की क्षमता नहीं बढ़ाई जा सकती थी। लेकिन अब जब दिल्ली को मांग के मुताबिक ऑक्सीजन मिला है तो ऐसे में अस्पतालों को भी बेड बढ़ाने के निर्देश दे दिए गए हैं। सीएम ने उम्मीद जताई है कि ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ने से अब दिल्ली में कई लोगों की जान बचाई जा सकेगी और इस कोरोना संकट से प्रभावी अंदाज में लड़ा जा सकेगा।
भारतीय सेना में सैनिक सामान्य ड्यूटी, सैनिक लिपिक व स्टोर कीपर तकनीकी भर्ती के लिए लिखित परीक्षा को स्थगित कर दिया गया है। यह जानकारी निदेशक भर्ती कर्नल शाल्व सनवाल ने दी। कर्नल सनवाल ने कहा कि यह लिखित परीक्षा राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पोर्टमोर, शिमला में 30 मई को आयोजित की जानी थी। परीक्षा को वैश्विक महामारी कोविड-19 के दृष्टिगत लागू की गई पाबंदियों के कारण स्थगित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह लिखित परीक्षा सोलन, शिमला, सिरमौर तथा किन्नौर जिलों के उन उम्मीदवारों के लिए आयोजित की जानी थी जिन्होंने 28 मार्च से 03 अप्रैल तक इंदिरा गांधी खेल मैदान ऊना में आयोजित भर्ती रैली में सभी शारीरिक मापदण्ड एवं मेडिकल परीक्षण उत्तीर्ण किए थे। लिखित परीक्षा की तिथि एवं जानकारी उचित समय पर उपलब्ध करवाई जाएगी।
राष्ट्रीय शोध पत्र लेखन प्रतियोगिता में लाखों शिक्षक शामिल होंगे। यह बात शिक्षक महासंघ की राज्य कार्यकारिणी की वर्चुअल मीटिंग में बतौर मुख्य अतिथि शामिल रहे अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री महेंद्र कपूर ने कही। बैठक की अध्यक्षता शिक्षक महासंघ के प्रांत अध्यक्ष पवन कुमार ने की। जिसमें प्रदेश कार्यकारिणी के 60 पदाधिकारियों ने भाग लिया। अपने संबोधन में राष्ट्रीय महामंत्री महेंद्र कपूर ने कहा कि कोरोना के संकट काल में शिक्षकों को प्रांतीय रक्षक के रूप में बड़ी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने शिक्षक महासंघ की राज्य इकाई से लोगों की मदद के लिए खुलकर आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने राष्ट्रीय शोध पत्र लेखन प्रतियोगिता के संबंध में बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर यह प्रतियोगिता दो हिस्सों में संपन्न होगी जिसमें देशभर के लाखों शिक्षक भाग लेंगे। प्रतियोगिता में देश की शिक्षा और संस्कृति से जुड़े विषय रहेंगे जिसके पहले हिस्से में शिक्षा के माध्यम से एक श्रेष्ठ भारत की भावना को बढ़ाना, ऑनलाइन शिक्षा की प्रभावशीलता, बच्चों का समग्र विकास में मातृभाषा की भूमिका, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन में अवसर और चुनौतियों से जुड़े विषय शामिल रहेंगे। जबकि दूसरे हिस्से में कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर के प्रतिभागियों के लिए आत्मनिर्भर भारत अवसर और चुनौतियां, लोकतंत्र में सोशल मीडिया की भूमिका, शिक्षा के माध्यम से धारणक्षम विकास के रूप में मुख्य विषय होंगे जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार के रूप में ₹21000, द्वितीय पुरस्कार ₹15000, तृतीय पुरस्कार ₹11000 के साथ ₹51000 के रूप में 7 सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के लिए ऑनलाइन 31 मई तक देशभर में पंजीकरण किया जाएगा। बैठक में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव पवन मिश्रा, शिक्षक महासंघ के प्रांत महामंत्री विनोद सूद, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जयशंकर, उपाध्यक्ष डॉ मामराज पुंडीर, अतिरिक्त महामंत्री सुधीर गौतम, प्रदेश मीडिया प्रभारी दर्शन लाल, रविंद्र ठाकुर, सुमित भारद्वाज, श्याम सिंह ,मंडी के प्रधान भगत चंदेल, कुल्लू से चतर सिंह, बिलासपुर से ललित मोहन, ऊना से सुशील मल्होत्रा, कांगड़ा से जोगिंदर शर्मा, नरेंद्र शर्मा, किन्नौर से बलवीर नेगी, शिमला से अशोक कुमार, सोलन से नरेंद्र कपिला, चंबा से नरेश मिन्हास शशि शर्मा, टिशम ठाकुर समेत अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक ने राज्य में कोविड-19 स्थिति की समीक्षा की और राज्य में कोविड -19 मामलों की संख्या में तेज वृद्धि पर चिंता व्यक्त की। इसके दृष्टिगत वायरस श्रृंखला को तोड़ने के लिए कैबिनेट ने पूरे राज्य में कोरोना कर्फ्यू लगाने का फैसला किया है। सभी सरकारी और निजी कार्यालय / प्रतिष्ठान 7 मई से 16 मई की मध्यरात्रि तक बंद रहेंगे। यह भी तय किया गया था कि सभी आवश्यक सेवाएं जैसे स्वास्थ्य, बिजली, दूरसंचार, जल आपूर्ति, स्वच्छता आदि खुली रहेंगी। मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया कि नागरिक कार्य स्थलों, बागवानी / कृषि और अन्य परियोजना स्थलों पर काम जारी रहेगा। राज्य में शैक्षणिक संस्थान 31 मई तक बंद रहेंगे। सभी सरकारी और निजी परिवहन अधिभोग का 50 प्रतिशत होगा और अंतर-राज्यीय परिवहन जारी रहेगा। औद्योगिक प्रतिष्ठान राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करेंगे। राज्य में कोरोना के मामलों की तीव्र वृद्धि को ध्यान में रखते हुए बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन की 10 वीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा रद्द कर दी जाएगी। बोर्ड द्वारा 10 वीं कक्षा के सभी छात्रों को सीबीएसई द्वारा सुझाए गए मानदंडों के अनुसार 11 वीं कक्षा में पदोन्नत किया जाएगा। यह भी निर्णय लिया गया कि हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन की 12 वीं कक्षा की परीक्षा और कॉलेजों की वार्षिक परीक्षा भी अगले आदेश तक स्थगित रहेगी। राजस्व संग्रहण, जो प्रदेश की राजस्व का एक प्रमुख साधन है, से संबंधित कार्यों में आबकारी एवं कराधान विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए और प्रदेश में विभिन्न कर कानूनों के बेहतर प्रबंधन एवं विनियमन के लिए बैठक में आबकारी एवं कराधान विभाग में अधिकारियों के वर्तमान पदों के स्थान पर विशेष एवं समर्पित हिमाचल प्रदेश राजस्व (राज्य कर एवं आबकारी) सेवा सृजित करने का निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल ने क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य देखभाल अस्पताल सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न श्रेणियों के 76 पदों के सृजन के साथ क्षेत्रीय अस्पताल ऊना को 300 बेडेड क्षेत्रीय अस्पताल के रूप में अपग्रेड करने के लिए अपनी स्वीकृति दी। मंत्रिमंडल ने क्षेत्र के लोगों की सुविधा के लिए आवश्यक पदों के साथ मंडी जिले के धरमपुर में एक नया जल शक्ति सर्किल बनाने का निर्णय लिया। वहीं, ऊना जिले के कुटलेहर विधानसभा क्षेत्र में थानाकलां में एक नया जल शक्ति प्रभाग खोलने के लिए भी अपनी सहमति दी। तथा डिवीजन के बेहतर प्रशासनिक कामकाज के लिए जल शक्ति सब डिवीजन नंबर 2 ऊना में बेसल को मौजूदा कर्मचारियों और बुनियादी ढांचे को स्थानांतरित करने की अनुमति दी।
देश में बढ़ रहे कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते ओडिशा सरकार ने प्रदेश में 14 दिन का लॉकडाउन लगाने का फैसला लिया है। बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण ओडिशा में 5 मई से 19 मई तक लॉकडाउन रहेगा। ओडिशा सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस दौरान आवश्यक सेवाओं, हेल्थ सेवाओं को ही छूट रहेगी। इसके अलावा सुबह के 7 बजे से दोपहर के 12 बजे तक लोग अपने घरों से 500 मीटर के दायरें में निकल सकेंगे, ताकि वे अपने जरूरी कार्य कर सकें। ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बीते 24 घंटो में राज्य में कोरोना के 8015 नए मामले सामने आए हैं। वहीं, कोरोना से अब तक 2068 मौत हो चुकी हैं। वहीं, अगर पूरे देश की बात करें तो 24 चौबीस घंटे में कोरोना के 3,92,488 नए मामले सामने आएं हैं और 3689 लोगों की मौत हो गई है। राहत वाली बात यह रही कि करीब 3 लाख 7 हजार 865 लोग इस बीमारी को मात देकर घर लौट चुके हैं।
दसवीं और बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं और कॉलेजों की परीक्षाओं को लेकर आज शनिवार को फैसला होगा। दसवीं कक्षा और प्रथम व द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी बिना वार्षिक परीक्षाएं लिए प्रमोट किए जा सकते हैं। 12वीं की परीक्षाओं पर सीबीएसई के फैसले का सरकार इंतजार करेगी। कॉलेजों में फाइनल सेमेस्टर और फाइनल ईयर की परीक्षाएं भी करवाने की योजना है। सरकार ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने पर 17 मई तक दसवीं-बारहवीं और कॉलेजों की परीक्षाएं स्थगित की हैं। बीते दिनों उच्च शिक्षा निदेशालय ने परीक्षाओं को लेकर विभिन्न हितधारकों से सुझाव मांगे थे। अभिभावकों, शिक्षकों, शिक्षक संगठनों, विद्यार्थियों सहित कई अन्य जागरूक नागरिकों ने शिक्षा निदेशालय को सुझाव भेजे हैं। अधिकांश सुझावों में दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों की इस वर्ष वार्षिक परीक्षाएं नहीं करवाने की वकालत की गई है। इन कक्षाओं के विद्यार्थियों को बीते दिनों हुई प्री बोर्ड परीक्षाओं और फर्स्ट व सेकेंड टर्म की परीक्षाओं के अंकों के आधार पर जमा एक कक्षा में प्रमोट करने की सलाह दी गई है। बारहवीं की परीक्षाएं लेने के सुझाव आए हैं। इन विद्यार्थियों को प्रमोट करने के हक में हितधारक नहीं हैं। वहीं, कॉलेजों में प्रथम व द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को प्रमोट करने की मांग की गई है। यहां फाइनल सेमेस्टर और फाइनल ईयर के विद्यार्थियों की परीक्षाएं लिए जाने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा शिक्षण संस्थानों को स्थिति में सुधार होने तक बंद रखने और शिक्षकों को रोस्टर आधार पर स्कूल-कॉलेजों में बुलाने और ऑनलाइन पढ़ाई को लाइव करने की मांग भी गई है। इन सभी सुझावों के आधार पर उच्च शिक्षा निदेशालय ने प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेज दिया है।
गुजरात के भरूच में एक कोविड-19 अस्पताल में आग लगने से 14 लोगों की मौत हो गई। वहीं, दो नर्सों ने भी अपनी जान गंवा दी। घटना के बाद मरीजों को यहां से दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है। आग लगने के कारणों का फिलहाल पता नहीं लगा है। बताया जा रहा है कि आग शुक्रवार देर रात 12:30 से एक बजे के बीच लगी। इस घटना में कई मरीज घायल भी हुए हैं। घटना की जानकारी मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां आग बुझाने पहुंच गईं। पटेल वेलफेयर अस्पताल की पहली मंजिल में कोरोना मरीजों के लिए कोविड केयर सेंटर बनाया गया था। करीब 50 लोगों को रेस्क्यू किया गया और उन्हें दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गौरतलब है कि चार मंजिला यह अस्पताल भरूच-जंबूसर हाईवे पर स्थित है। इसे एक ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाता है। फायर ऑफिसर शैलेश संसिया ने बताया कि अस्पताल की पहली मंजिल पर कोविड वार्ड बनाया गया था। एक घंटे के भीतर आग पर काबू पा लिया गया। साथ ही, फायर फाइटर्स और स्थानीय लोगों की मदद से करीब 50 लोगों को बचा लिया गया।
देश में कोरोना संकट को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार से कोविड को लेकर नेशनल प्लान मांगा, साथ ही एक चिंता भी व्यक्त की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सोशल मीडिया पर जो लोग अपनी परेशानियां जता रहे हैं, उनके साथ बुरा व्यवहार नहीं होना चाहिए। अदालत में सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि मैं यहां पर एक गंभीर विषय उठाना चाहता हूं, अगर कोई भी नागरिक सोशल मीडिया या अन्य किसी प्लेटफॉर्म पर अपनी समस्या बताता है, तो इसका मतलब ये नहीं है कि वो गलत ही है। किसी भी तरह की इन्फॉर्मेशन को दबाया नहीं जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हर राज्य को ये कड़ा संदेश जाना चाहिए कि अगर किसी नागरिक पर मदद की गुहार लगाने के लिए एक्शन लिया गया, तो उसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस वक्त राष्ट्रीय संकट की स्थिति में हैं, ऐसे में आम लोगों की बात सुनना बहुत जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की ये सख्त टिप्पणी उस वक्त आई है, जब हाल ही में उत्तर प्रदेश के अमेठी में एक व्यक्ति पर अफवाह फैलाने का केस दर्ज किया गया था। युवक ने सोशल मीडिया पर ऑक्सीजन की मदद मांगी थी, जबकि मरीज कोविड पॉजिटिव नहीं था। इसी के बाद अमेठी में उसपर केस दर्ज किया गया था।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने वरिष्ठ पत्रकार और प्रसिद्ध टीवी एंकर रोहित सरदाना के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा है कि रोहित सरदाना के निधन से पत्रकारिता जगत को एक बड़ी क्षति पहुंची है। वह एक निष्पक्ष और निडर पत्रकार थे और अपने कार्यक्रमों के माध्यम से देश व जनता के हितों से जुड़े मुद्दों को बड़ी बेबाकी के साथ उठाते रहे। रोहित सरदाना युवा पत्रकारों के लिए भी प्रेरणा के स्रोत रहेंगेे और पत्रकारिता जगत को दिए गए उनके सराहनीय योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। जयराम ठाकुर ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोक संतप्त परिजनों के साथ अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।
हिमाचल प्रदेश के अधिंकाश कॉलेजों के प्रिंसिपल प्रथम और द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों की इस वर्ष परीक्षाएं न करवाने के हक में हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय में कॉलेजों से सुझाव पहुंच गए हैं। अब कैबिनेट की मंजूरी के लिए इन सुझावों के आधार पर प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। इस विषय पर राज्य सरकार अंतिम फैसला लेगी। उच्च शिक्षा निदेशालय को प्राप्त हुए कॉलेज प्रिंसिपलों और शिक्षक संगठनों के सुझावों में फाइनल सेमेस्टर और फाइनल ईयर के विद्यार्थियों के लिए कुछ माह बाद कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी आने पर परीक्षाएं लेने की पैरवी की गई है। इसके अलावा ऑनलाइन पढ़ाई को जल्द शुरू करने और शिक्षकों को रोस्टर अनुसार कॉलेजों में बुलाने की मांग भी की गई है। अधिकांश सुझावों में कॉलेजों को अभी विद्यार्थियों के लिए बंद रखने की मांग की गई है। उच्च शिक्षा निदेशालय में ई-मेल के माध्यम से आए इन सुझावों के आधार पर अधिकारी प्रस्ताव बनाने में जुट गए हैं। विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अब मामले राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
प्रदेश सरकार ने राज्य में कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप के दृष्टिगत वैवाहिक और अन्य सभी प्रकार के आयोजनों में सामुदायिक भोज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में राज्य में कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा के लिए आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कोविड-19 के मामलों में तीव्रता से हो रही वृद्धि चिंता का विषय है। प्रदेश सरकार इस महामारी के प्रसार को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और सरकार ने कई कठोर निर्णय भी लिए हैं। सरकार ने विवाह और अन्य सामाजिक आयोजनों में केवल 20 लोगों को ही शामिल होने की अनुमति देने का निर्णय लिया है। प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थान और श्रद्धालुओं के लिए मंदिर भी 10 मई तक बंद रहेंगे। सभी सरकारी कार्यालय में पांच कार्य दिवस होंगे और 10 मई तक कार्यालयों में श्रेणी तीन व चार की 50 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ज़्यादा कोविड प्रभावित जिलों जैसे कांगड़ा, मण्डी, शिमला, सोलन, ऊना और सिरमौर के अस्पतालों में बिस्तरों की क्षमता बढ़ाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश में कोविड के सैम्पल लेने के कार्य में तेज़ी लाई जाएगी और रिपोर्ट भी कम समय में उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जाएंगे। बाहरी राज्यों से प्रदेश में आने वाले लोगों पर निगरानी रखने के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित किया जाएगा। देश के अन्य राज्यों से प्रदेश में आने वाले लोगों को 14 दिनों तक होम आइसोलेशन में रहना अनिवार्य होगा और इन्हें अपने आने की सूचना स्थानीय प्रशासन और पंचायती राज संस्थाओं व शहरी स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों से साझा करनी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में टीकाकरण अभियान में और तेजी लाई जाएगी। अभी तक 16,65,481 लोगों को कोविड की खुराक दी गई है। प्रदेश में कोविड-19 के मामलों पर निगरानी के लिए चार कमेटियों का गठन किया गया है। लाॅजिस्टिक कमेटी में राज्य इलैक्ट्रानिक्स डेवलपमेंट काॅर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक अरिंदम चैधरी को संयोजक सदस्य नियुक्त किया गया है। यह कमेटी ऑक्सीज़न की उपलब्धता, ऑक्सीज़न गैस सिलेण्डर के आर्डर की समयबद्ध उपलब्धता, जिले में मरीजों के लिए ऑक्सीज़न सिलेण्डर की आपूर्ति और अतिरिक्त बिस्तरों की क्षमता उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी निभाएगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के एसएसओ डाॅ. राजेश ठाकुर के नेतृत्व में कोविड-19 मरीज/एम्बुलेंस प्रबंधन कमेटी जिला स्तर पर मरीजों को संबंधित अस्पतालों में पहुंचाना सुनिश्चित करेगी। कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व समन्वय कमेटी में शहरी विकास निदेशक आबिद हुसैन औद्योगिक घरानों से कोविड-19 एसडीआरएफ फंड के लिए सभी संभावित दानकर्ताओं से अंशदान दिलाने का प्रयास करेंगे। मीडिया/आइईसी कमेटी में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हिमाचल प्रदेश के मिशन निदेशक डाॅ. निपुण जिंदल समयबद्ध डेटा एकत्रित करके मीडिया तक सही सूचना पहुंचाने और सभी स्तरों पर जानकारी के अभाव कोे खत्म करने के साथ नियमित रूप से मीडिया को जानकारी उपलब्ध करवाएंगे। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से 5000 डी-टाइप ऑक्सीज़न सिलेंडर और 3000 बी-टाइप ऑक्सीज़न सिलेंडर प्रदान करने का आग्रह किया ताकि राज्य में ऑक्सीज़न की कोई कमी न हो।
कोरोना के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर देवभूमि उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2021 को स्थगित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने यह दी। बता दें कि गुरुवार को इस संबंध में एक बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में अधिकारियों के अलावा पर्यटन और धार्मिक मामलों के मंत्री सतपाल महाराज भी मौजूद रहे। बैठक में मई के दूसरे हफ्ते में शुरू होने वाली चारधाम यात्रा को कोविड के चलते स्थगित किए जाने का फैसला किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चारों धाम के कपाट अपने तय समय पर खुलेंगे। लेकिन केवल पुजारी और पुरोहित ही धामों में पूजा अर्चना करेंगे। यात्रियों को वहां जाने की अनुमति नहीं होगी। कोविड महामारी पहाड़ों तक न पहुंचे इसके लिए वहां आने वाले तीर्थयात्रियों को अभी ना आने को कहा जा रहा है। हालात ठीक होने पर यात्रा पर पुनर्विचार किया जाएगा। वहीं, श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे की यात्रा भी स्थगित कर दी गई है, जो कि 10 मई से शुरू होनी थी।
छात्र अभिभावक मंच ने उच्चतर शिक्षा निदेशक से मांग की है कि वह दयानंद पब्लिक स्कूल के मामले में हस्तक्षेप करें व पांच दिसम्बर 2019 की शिक्षा निदेशालय की अधिसूचना को लागू करवाएं। यह अधिसूचना वर्ष 2019 में जारी हुई थी व इसमें स्पष्ट किया गया था कि वर्ष 2020 व उसके तत्पश्चात कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों के जनरल हाउस के बगैर कोई भी फीस बढ़ोतरी नहीं कर सकता है। इसके बावजूद भी डीपीएस स्कूल ने वर्ष 2020 में फीस बढ़ोतरी की। वर्ष 2021 में इस स्कूल ने सारे नियम कायदों की धज्जियां उड़ाते हुए टयूशन फीस में भारी-भरकर बढ़ोतरी करके सीधे 55 प्रतिशत तक फीस बढ़ोतरी कर दी है। डीपीएस प्रबंधन ने नर्सरी व केजी कक्षा की फीस को एक हज़ार नौ सौ से बढाकर दो हज़ार आठ सौ पचास रुपये, पहली से पांचवीं कक्षा तक की प्रतिमाह टयूशन फीस दो हज़ार से बढ़ाकर तीन हज़ार रुपये, छठी से आठवीं कक्षा की फीस को दो हज़ार एक सौ से बढ़ाकर तीन हज़ार दो सौ पचास रुपये तथा नौंवीं-दसवीं कक्षा की प्रतिमाह फीस को दो हज़ार दो सौ पचास रुपये से बढ़ाकर तीन हज़ार पांच सौ रुपये कर दिया है। इस तरह वार्षिक बारह हज़ार रुपये से पन्द्रह हज़ार रुपये की टयूशन फीस बढ़ोतरी की गई है। यह पूर्णतः छात्र व अभिभावक विरोधी कदम है व इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। उन्होंने हैरानी व्यक्त की है कि शिक्षा विभाग की नाक तले अंधेरा है व इस से दो सौ मीटर दूर डीपीएस स्कूल में ही शिक्षा विभाग अपने 5 दिसम्बर 2019 के आदेशों को ही लागू नहीं करवा पा रहा है जिसका सीधा मतलब है कि निजी स्कूलों के साथ प्रदेश सरकार की सीधी मिलीभगत है। उन्होंने कहा कि अगर इस फीस बढ़ोतरी पर अंकुश न लगाया गया तो आंदोलन तेज़ होगा जिसके तहत 28 अप्रैल को शिक्षा निदेशालय का घेराव होगा।
Corona outbreaks are being seen in different parts of the country. The number of new patients is constantly increasing. Such a situation is increasing the pressure on hospitals. Many hospitals have complaints of beds and oxygen shortage. People are wandering from rate to rate for oxygen. At the same time, the negligence of the hospital is also being seen in many cities. Some cases of negligence are coming out from different cities of Uttar Pradesh where the private hospital in Rohania area crossed the limits of negligence. The doctors and staff were seen missing in the hospital in Bacchana area of Rohania. A family alleges that the hospital has admitted the Covid patient to the hospital, but is not receiving any kind of care. Angry families created a fierce commotion and vandalized the hospital. The sad part is that despite this ruckus, the patient's life could not be saved.
देश में कोरोना की स्थिति ने भयंकर रूप ले लिया है। हर तरफ महामारी से हाहाकार मचा हुआ है। अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से मरीज़ झूझ रहे हैं। लेकिन इस मुश्किल की घड़ी में भारत अकेला नहीं है। इस घातक बीमारी से लड़ने के लिए भारत के सहयोग में कई देश व नामी हस्तियां आगे आ रहीं हैं। इसी कड़ी में अमेरिका की शीर्ष 40 कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) ने भी मदद का हाथ बढ़ाते हुए एकजुटता का बड़ा उदाहरण पेश किया है। बता दें कि इन 40 कंपनियों के सीईओ ने एक वैश्विक टास्क फोर्स बनाई है, ताकि वे भारत की मदद के लिए संसाधन जुटा सकें। डेलोइट के सीईओ पुनीत रंजन ने कहा कि यूएस चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स की यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल और यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक एंड पार्टनरशिप फोरम की बैठक में सामूहिक पहल के तहत बनी टास्क फोर्स ने अगले कुछ हफ्तों में भारत में 20 हज़ार ऑक्सीजन मशीनें भेजने की प्रतिबद्धता जताई है। महामारी पर यह वैश्विक टास्क फोर्स भारत को अहम चिकित्सा सामान, टीके, ऑक्सीजन और अन्य जीवन रक्षक सहायता मुहैया करवाएगा।
हिमाचल के दस जिलों में कृषि बीजों की डीएनए टेस्ट प्रयोगशालाएं स्थापित होंगी। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति और किन्नौर को छोड़ कर अन्य सभी जिलों में यह सुविधा उपलब्ध होगी। प्रदेश में उत्पादित कृषि बीजों के डीएनए की जांच और गुणवत्ता का पता लगाने में ये प्रयोगशालाएं मदद करेंगी। प्रदेश में अभी तक कृषि विभाग के पास फसलों के डीएनए जांचने के लिए कोई प्रयोगशाला उपलब्ध नहीं है। ऐसे में किसानों के लिए उपलब्ध होने वाले बीज के जीन और गुणवत्ता को लेकर दावे के साथ कुछ नहीं कहा जा सकता। किसान अक्सर बीजों की गुणवत्ता को देखते हुए शिकायतें करते रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार बीजों के डीएनए की जांच करने के लिए आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित करेगी। बता दें, कि इन प्रयोगशालाओं की मदद से किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के आग्रह को स्वीकार करते हुए दिल्ली को ऑक्सीजन की आपातकालीन आपूर्ति करने की सहमति प्रदान की है। कोविड-19 महामारी के संकट के कारण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र मेंऑक्सीजन का भारी संकट चल रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि दिल्ली में उत्पन्न स्थिति से हिमाचल प्रदेश काफी चिन्तित है और दिल्ली सरकार को हर सम्भव सहायता प्रदान करने में प्रदेश को प्रसन्नता होगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के अधिकारी ऑक्सीजन की आपूर्ति का प्रबन्ध करने के लिए हिमाचल प्रदेश के उद्योग विभाग के अतिरिक्त निदेशक से सम्पर्क कर सकते हैं। अरविन्द केजरीवाल ने इस उदारता के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया है।
भारतीय अभिनेता इरफान खान और भारत की पहली ऑस्कर पुरस्कार विजेता कॉस्ट्यूम डिजाइनर भानु अथैया को 93वें अकादमी पुरस्कार समारोह के ‘स्मृति’ खंड में सम्मानित किया गया। हर साल की तरह, अकादमी पुरस्कार ने तीन मिनट के ‘इन मेमोरियम’ मोंटाज में फिल्मी जगत के उन दिग्गज सितारों को याद किया जिनका पिछले एक साल में निधन हुआ है। खान और अथैया के अलावा चैडविक बोसमेन, सीन कोनरी, क्रिस्टोफर प्लमर, ओलिविया डे हैवीलैंड, किर्क डोगलस, जॉर्ज सेगल, निर्देशक किम की डक, मैक्स वोन साइदो और अन्य को भी तस्वीरों के जरिए इस खंड में याद किया गया। भारत के दिग्गज कलाकारों में से एक इरफान खान (54) का पिछले साल 28 अप्रैल को कैंसर की दुर्लभ बीमारी से लड़ते हुए मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया था। अथैया को मस्तिष्क का कैंसर था और उनका 91 साल की उम्र में लंबी बीमारी के बाद पिछले साल 15 अक्टूबर को अपने घर में निधन हो गया था। उन्होंने 1983 में रिचर्ड एटनबोरो की महात्मा गांधी पर बनी बायोपिक ‘गांधी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ कॉस्ट्यूम डिजाइन का ऑस्कर जीता था। इस फिल्म को आठ ऑस्कर मिले थे। फिल्म में बेन किंग्सले ने महात्मा की भूमिका निभाई थी जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ऑस्कर मिला था। अथैया ने 2012 में अपना ऑस्कर पुरस्कार एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर ऑर्ट्स एंड साइंसेज को लौटा दिया था ताकि पुरस्कार सुरक्षित रखा जा सके। वंही, इरफान ने स्लमडॉग मिलेनियर, इनफर्नो, लाइफ ऑफ पाई, जुरासिक वर्ल्ड और द नेमसेक जैसी कई हॉलिवुड फिल्मों में काम किया था। भानु अथैया को साल 1982 में फिल्म 'गांधी' के लिए बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइन का अवॉर्ड मिला था। पिछले साल भी अकैडमी ने इरफान के निधन के बाद उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। फिल्म 'स्लमडॉग मिलेनियर' में इरफान के साथ काम कर चुकीं ऐक्ट्रेस फ्रीडा पिंटो ने अकैडमी अवॉर्ड में एक नोट लिखकर भेजा। फ्रीडा ने लिखा, 'इरफान खान जैसा कोई नहीं हो सकता। एक ऐक्टर के तौर पर उनका टैलेंट और सम्मान, एक ऐक्टर जिसने हर तरह से मानवता को दिखाया, जिसके कारण मैं दिल से उनका सम्मान करती हूं। मैं भी अपने करियर में उनका अनुसरण करना चाहती हूं।'
किन्नौर एक जिला और एक ही निर्वाचन क्षेत्र है, लेकिन यहां की सियासत में पिछले कई वर्षाें से गुटबाजी हावी हाेती आ रही है। चाहे कांग्रेस की बात करें या फिर भाजपा की, दाेनाें राजनीतिक दलाें में गुटबाजी जाेराें पर चली हुई है। यही वजह है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के तेजवंत सिंह नेगी काे कांग्रेस के जगत सिंह नेगी से पराजित हाेना पड़ा। बीजेपी में ऐसी स्थिति अभी तक है। कारण यह है कि 2017 के विधानसभा में चुनाव लड़ने वाले तेजवंत सिंह नेगी काे जयराम सरकार ने साइडलाइन करने में काेई कसर नहीं छाेड़ी। गाैरतलब है कि तेजवंत सिंह नेगी पूर्व में विधायक भी रह चुके हैं और जब सत्ता में भाजपा आई ताे उन्हें काफी उम्मीदें थी कि बाेर्ड या किसी निगम में उन्हें अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का ताेहफा मिलेगा, मगर उन्हें मायूस हाेना पड़ा। दरअसल 2017 के चुनाव में किन्नौर सीट से भाजपा के दाे नेता टिकट के चाहवान रहे। एक तेजवंत सिंह नेगी और दूसरा सूरत नेगी। वर्तमान में वन विकास निगम के उपाध्यक्ष सूरत नेगी पिछले चुनाव में टिकट के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन पार्टी हाईकमान ने पूर्व विधायक तेजवंत नेगी पर ही भराेसा जताया। सूरत का टिकट कटने के बाद तेजवंत नेगी भी हार का मुंह देखना पड़ा। बताया जाता है कि भाजपा में गुटबाजी नहीं हाेती ताे शायद तेजवंत सिंह नेगी इस वक्त विधानसभा में दिखते। ऐसे में जाहिर है कि मिशन -2022 से पहले भी भाजपा की गुटबाजी समाप्त हाेती नजर नहीं आ रही है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस में भी इस वक्त युवा कांग्रेस से लेकर कांग्रेस नेताओं में गुटबाजी चल रही है। विधायक जगत सिंह नेगी वीरभद्र सिंह समर्थक हैं ताे युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष निगम भंडारी सुक्खू गुट से हैं। यही वजह है कि किन्नौर से टिकट के लिए अगले साल के चुनाव में गुटबाजी खुलकर सामने आ सकती है। पूर्व विधायक तेजवंत नेगी काे नहीं मिला सत्ता का सुख प्रदेश में जयराम सरकार बनते ही वर्ष 2018 में बाेर्ड एवं निगमों में उपाध्यक्षाें की नियुक्ति की गई ताे किन्नौर के पूर्व विधायक तेजवंत सिंह काे सत्ता का सुख नसीब नहीं हुआ। दरअसल तेजवंत नेगी पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल समर्थक हैं, जबकि सूरत नेगी काे जयराम समर्थक माना जाता है। इसी वजह से ही सूरत नेगी काे वन विकास निगम में उपाध्यक्ष की कुर्सी मिली। लाेकल एरिया डेवेल्पमेंट अथाॅरिटी कमेटी पर भी राजनीति जिला किन्नौर में भले ही एक विधानसभा क्षेत्र हाे, मगर राजनीतिक सरगर्मियां काफी तेज हाेती है। राज्य सरकार ने पहली बार एलएडीए यानी लाेकल एरिया डेवेल्पमेंट अथाॅरिटी कमेटी में भी राजनीति की। आज तक का इतिहास रहा है कि इस कमेटी में चेयरमैन स्थानीय विधायक ही हाेता है। जबकि किनौर में ऐसा नहीं किया। कांग्रेस विधयक जगत सिंह नेगी ने इस मसले पर कई बार जयराम सरकार काे घेरने की काेशिश की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब तक काैन-काैन रहे विधायक ? -ज्ञान सिंह नेगी। -ठाकुर सेन नेगी। -देवराज नेगी। -चेतराम नेगी। -तेजवंत सिंह नेगी। -जगत सिंह नेगी।
हिमाचल की कर्मचारी राजनीति के कई दिग्गज असली सियासी पटल पर भी अपनी किस्मत आजमाते रहे है। कुछ सफल हुए कुछ नहीं। जल्द मंडी संसदीय क्षेत्र का उप चुनाव होना हैं, और इस चुनाव में हिमाचल की कर्मचारी राजनीति के एक धुरंधर के भी चुनावी समर में उतरने के कयास हैं। माना जा रहा है कि कर्मचारी नेता एनआर ठाकुर भाजपा से टिकट के चाहवान है। हालांकि खुद एनआर ठाकुर खुलकर इस मसले पर नहीं बोल रहे पर उनके समर्थक सोशल मीडिया पर उन्हें टिकट देने की खूब पैरवी कर रहे है। स्वास्थ्य शिक्षक और अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष एनआर ठाकुर पिछले 30 सालों से कर्मचारी राजनीति में है। उन्होंने कर्मचारी राजनीति में रहते हुए 18 चुनाव लड़े है और अपना वर्चस्व कायम रखने में हमेशा कामयाब रहे। एन आर ठाकुर अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के तीनों बड़े पदों पर रहे है, पहले साल 2000 में चुनाव जीतकर वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनें, उसके बाद महामंत्री और फिर प्रदेश अध्यक्ष। 13 अन्य संस्थाओं से भी जुड़े हैं और कर्मचारियों में खासी पकड़ रखते है। ठाकुर संघ की पृष्ठ्भूमि से भी है। यानी ठाकुर का बायोडाटा तो ठीक-ठाक है, लेकिन बायोडाटा के साथ-साथ राजनीति में आलाकमान के आशीर्वाद की भी जरूरत होती है। अब ठाकुर को आशीर्वाद मिलता है या नहीं ये देखना दिलचस्प होगा। क्या तीसरी दफा जोखिम लेगी भाजपा ? नगर निगम चुनाव में लगे झटके के बाद भाजपा के लिए मंडी संसदीय क्षेत्र का उपचुनाव बेहद ख़ास है, या यूं कहे की साख का सवाल है। नगर निगम चुनाव में भाजपा सिर्फ मंडी में ही अच्छा परफॉर्म कर पाई थी। अब उपचुनाव है, यदि मंडी में पार्टी ठंडी पड़ गई तो सरकार और संगठन पर तो सवाल उठेंगे ही भाजपा के भीतर भी सियासी बवंडर तय है। इतिहास पर नज़र डाले तो मंडी संसदीय क्षेत्र में इससे पहले भाजपा दो कर्मचारी नेताओं को टिकट दे चुकी है, 1984 में व 1996 में और दोनों ही मर्तबा भाजपा को शिकस्त मिली। ऐसे में बड़ा सवाल ये ही है कि क्या पार्टी तीसरी दफा जोखिम लेगी ? मधुकर और अदन सिंह ठाकुर लड़ चुके है मंडी से चुनाव मंडी संसदीय क्षेत्र की बात करें तो प्रदेश कर्मचारी महासंघ में अध्यक्ष के पद पर रह चुके फायर ब्रांड कर्मचारी नेता मधुकर और ठाकुर अदन सिंह ने यहां से चुनाव लड़ा था। इन दोनों ने हिमाचल की राजनीति के चाणक्य पंडित सुखराम के खिलाफ चुनाव लड़ा। हालांकि दोनों को ही चुनावों में सफलता नहीं मिली थी, लेकिन संसदीय क्षेत्र के चुनाव में कर्मचारी नेताओं ने दिग्गज नेता को टक्कर दी थी। मधुकर ने 1984 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, तो वहीं अदन सिंह ठाकुर ने 1996 में भाजपा के ही टिकट पर चुनाव लड़ा था। विस चुनाव में भी रही है कर्मचारी नेताओं की धाक -रणजीत सिंह ठाकुर और चौधरी विद्यासागर रहे हैं मंत्री ऐसा नहीं है कर्मचारी नेताओं पर खेला गया हर दांव उल्टा पड़ा हो ,लोकसभा न सही पर विधानसभा चुनाव में कर्मचारी नेताओं ने खुद को साबित किया है। राज्य की कर्मचारी राजनीति में सक्रिय रहे ठाकुर रणजीत सिंह 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर बमसन से चुनाव लड़े और तत्कालीन मंत्रिमंडल में भी शामिल हुए । वहीं कर्मचारी नेता चौधरी विद्यासागर कांगड़ा जिले के कांगड़ा निर्वाचन हलके से भाजपा टिकट पर चार बार चुनाव जीते और प्रदेश कैबिनेट का हिस्सा बने । चौधरी विद्या सागर 1982, 1985,1990 और 1998 में चुनाव जीते हैं । अर्की के पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा भी कर्मचारी राजनीति सक्रिय रह चुके हैं। वह महासंघ में संयुक्त सचिव भी रहे हैं। वर्तमान में खादी बोर्ड के उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम गुलेरिया भी कर्मचारी नेता रहे है। हालांकि गुलेरिया चुनावी राजनीति से अब तक दूर है। ये नाम भी चर्चा में मंडी उप चुनाव में भाजपा टिकट के लिए महेश्वर सिंह का नाम भी चर्चा में है। महेश्वर सिंह 1989 , 1998 और 1999 में मंडी से सांसद रह चुके है। महेश्वर सिंह के अतिरक्त अभिनेत्री कंगना रनौत के नाम के भी चर्चे आम है। कंगना खुद सोशल मीडिया पर हिमाचल से चुनाव न लड़ने की बात कह चुकी है। इसी तरह जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह की बेटी वंदना गुलेरिया और पूर्व मंत्री गुलाब सिंह ठाकुर का नाम भी सुर्ख़ियों में है। ऐसे में भाजपा किसी पुराने चेहरे पर भरोसा जताती है या किसी नए चेहरे पर दांव खेलती है, इस पर सबकी नज़र है।
- अनुशासन है नहीं, पर सपना है 2022 में शासन पाने का 2022 में सोलन निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा का चेहरा कौन होगा ये तो समय के गर्भ में छीपा है, किन्तु सोलन भाजपा में अभी से जड़ खुदाई शुरू हो गई है। नगर निगम में हार का ठीकरा दोनों गुट एक दूसरे पर फोड़ रहे है, बड़े नेता बेशक चुप है, लेकिन कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर भड़ास निकाल रहे है। अनुशासन है नहीं, पर सपना है 2022 में शासन पाने का। बदलते समीकरणों के बीच चेहरे की जंग अभी से प्रखर होती दिख रही है। किस ओर जा रही है सोलन भाजपा की सियासत, क्या बन सकते है समीकरण ये जानने - समझने के लिए बात 2017 के चुनाव से शुरू करनी होगी। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले सोलन निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा टिकट के लिए सिर्फ दो नाम चर्चा में थे, एक कुमारी शीला और दूसरा तरसेम भारती। थोड़ी बहुत कोशिश हीरानंद कश्यप भी करते रहे पर वो कभी रेस में दिखे नहीं। पर चुनाव से ठीक पहले डॉ राजेश कश्यप पैराशूट से आए और टिकट ले गए। कहते है टिकट दिलाने वाले थे डॉ राजीव बिंदल। इस टिकट ने तरसेम भारती और कुमारी शीला के अरमान कुचल दिए थे। रोचक बात ये है कि बिंदल के चहेते भी तब शीला के साथ खड़े दिखे थे, मंशा दिलासा देना था या बहलाना, इसे लेकर सबका अपना -अपना विश्लेषण है। खैर डॉ राजेश कश्यप चुनाव हार गए, पर कहते है चुनाव में बिंदल के कुछ ख़ास लोगों ने उनके पक्ष में काम नहीं किया। सो तभी से बिंदल गुट और उनके बीच एक खाई बन गई। आहिस्ता-आहिस्ता कश्यप सोफत गुट के नजदीकी हो गए। वहीं महेंद्र नाथ सोफत जिनका डॉ राजीव बिंदल के साथ मनभेद जगजाहिर है। 2017 से अब तक 40 माह में डॉ राजीव बिंदल का सियासी सफर किसी रोलर कोस्टर के सफर जैसा रहा है। सो जब - जब बिंदल अर्श पर सोलन में उनकी टीम भी फ्रंट फुट पर और जैसे ही बिंदल फर्श पर उनकी टीम भी हाशिए पर। इस सब के बीच डॉ राजेश कश्यप जमे रहे और भाजपा के प्राइम फेस बने भी रहे। नगर निगम चुनाव में भी बेशक प्रभारी डॉ राजीव बिंदल थे लेकिन जो भाजपाई जीते है उनमे से अधिकांश डॉ राजेश कश्यप के करीबी माने जाते है। अब जो बात निकल कर आ रही है वो आने वाले समय में सोलन भाजपा की सियासत को नई दिशा दे सकती है। दरअसल कुछ लोगों को अब तरसेम भारती के चेहरे में भाजपा का ग्लो दिख रहा है और इनमें वो लोग भी शामिल है जिन्हें 2017 तक तरसेम भारती फूटी आंख नहीं सुहाते थे। यानी वक्त, परिस्थिति और मौके के हिसाब से अब एक नया गठबंधन आकार ले सकता है ताकि डॉ राजेश कश्यप को साधा जा सके। अब ये गठबंधन जन्म लेता है या इसकी भ्रूण हत्या हो जाती है ये देखना रोचक होगा। शीला जीत जाती तो और बात होती जिला परिषद् चुनाव में सलोगड़ा वार्ड से कुमारी शीला भाजपा उम्मीदवार थी। लगातार तीन चुनाव जीत चुकी कुमारी शीला जीत का चौका लगाने का दावा कर रही थी, लेकिन जनता का आशीर्वाद उन्हें नहीं मिला। ये हार कुमारी शीला के लिए बड़ा झटका है। शायद यही कारण है कि डॉ राजेश के विरोधी अब कुमारी शीला की जगह तरसेम भारती में संभावना तलाश रहे है। निसंदेह, शीला अगर जीत जाती तो शायद 2022 में कुछ और बात होती। बहरहाल शीला अब भी डटी है और 2022 में ऊंट किस करवट बैठता है ये देखना रोचक होगा। नगर निगम में नहीं चला तरसेम का जादू नगर निगम चुनाव में तरसेम भारती ने वार्ड 7 में जमकर प्रचार किया। तरसेम भारती के करीबी बादल नाहर की पत्नी सोना नाहर वहां से चुनाव लड़ रही थी। पर इस पुरे चुनाव में भाजपा कभी भी मजबूत नहीं दिखी। तरसेम भारती का प्रचार यहां पूरी तरह बेअसर दिखा। कांग्रेस ने बागी के मैदान में होने के बावजूद यहां शानदार जीत दर्ज की। यानी तरसेम की पोलिटिकल मैनेजमेंट का जनाजा हालही में हुए सोलन नगर निगम चुनाव में निकल चूका है। पर हर दिन की तरह हर चुनाव भी नया होता है। बिंदल के खासमखास भी हारे चुनाव जानकार मानते है कि भाजपा बेशक नगर निगम हार गई लेकिन डॉ राजेश कश्यप ने इस हार के बावजूद ज्यादा नहीं खोया। दरअसल भाजपा ने डॉ राजीव बिंदल को प्रभारी बनाया था और यदि बिंदल का जादू चल जाता तो जाहिर है 2022 के टिकट वितरण में भी उनकी दखल ज्यादा होती। पर नगर निगम जीतना तो दूर बिंदल के कई खासमखास चुनाव में बुरी तरह हारे। इस हार का ठीकरा भी विरोधी बिंदल के सर ही फोड़ रहे है। 2022 में फिर पैराशूट लैंड हुआ तो 2012 से 2017 तक कई नेता टिकट के लिए जमीनी काम करते रहे। पर भाजपा आलाकमान ने इन सबके अरमान कुचल दिए और पैराशूट कैंडिडेट उतार दिया। 2022 में टिकट को लेकर भी तमाम दावेदारों में मन में ये भय जरूर होगा। न जाने ऐन मौके पर किसकी एंट्री हो जाए।
अंतरराष्ट्रीय सीमा सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण इनर लाइन परमिट चेकपोस्ट अकपा से डुबलिंग शिफ्ट करने के लिए गृह मंत्रालय भारत सरकार ने पिछले साल मार्च महीने में ऑर्डर जारी किए थे, लेकिन अभी तक पालन नहीं हुआ। हैरानी की बात है कि किन्नौर पुलिस ने गृह मंत्रालय के आदेशों काे ठेंगा दिखाने में काेई कसर नहीं छाेड़ी। हालांकि मंत्रालय ने पिछले साल 11 मार्च को इनर लाइन परमिट चेकपोस्ट शिफ्ट करने को कहा था, लेकिन हिमाचल पुलिस ने एक साल बाद भी चेकपोस्ट शिफ्ट नहीं हो पाई। बताया गया कि भारत-चीन सीमा विवाद को देखते हुए इनर लाइन परमिट चेकपोस्ट डुबलिंग में शिफ्ट होने से जिला किन्नौर के पूह ब्लॉक की 27 पंचायतों को इनर लाइन परमिट लेने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे में जब तक चेकपोस्ट की शिफ्टिंग नहीं होती, तब तक 27 पंचायतों के लोगों को इनर लाइन परमिट लेनी होगी। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार के आग्रह पर भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने अकपा चेकपोस्ट को डुबलिंग पुल के पास स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया था। गृह मंत्रालय ने 11 मार्च 2020 को इनर लाइन परमिट चेकपोस्ट को अकपा से डुबलिंग पुल के पास शिफ्ट करने के आदेश जारी हुए थे। गृह मंत्रालय द्वारा हिमाचल सरकार को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार अकपा इनर लाइन परमिट चेकपोस्ट के अंतर्गत पूह ब्लाॅक के 41 गांव आते हैं। डुबलिंग पुल के पास चेकपोस्ट स्थापित होने से पूह ब्लॉक के केवल 14 गावों कुन्नू, चारंग, नेसंग, डुबलिंग, डुबलिंग, खाब, नमज्ञा, टाशींग, यंगथंग, मलिंग, नाको, मलिंग डोगरी और चांगो को ही इनर लाइन परमिट लेने की आवश्यकता होगी। इन गांव के लोगों को मिलनी है राहत इनर लाइन परमिट चेकपोस्ट डुबलिंग शिफ्ट होने से 27 गांव के लोगों को परमिट लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इनमें सुमरा, लियो, हांगो, चुलिंग, हंगरंग पूह, लाबरंग, पूह, शलखर, श्यासो, सुन्नम, ज्ञाबुंग, तलिंग, रोपा, रुषकुलंग, कानम, लाबरंग, स्पीलो, मोरंग, ग्रामंग, थोबारिंग, खोक्पा, शिलिंग, रुबंग, ठंगी, लंबर, लिप्पा और आसरंग गांव इनर लाइन परमिट से बाहर होंगे। वहीं लाहौल-स्पीति के नौ गांव ग्यू, कौरिक, चेक पोस्ट समधो, हुर्लिंग, ताबो, लडी, पौह, धनखर और शिचलिंग को इनर लाइन परमिट लेने की आवश्यकता रहती थी। ऐसे में अब डुबलिंग पुल के पास इनर लाइन परमिट चेक पोस्ट स्थापित होने से लाहौल-स्पीति के चार गांवों को इनर लाइन परमिट लेने की आवश्यकता नहीं होगी। गृह विभाग ने पुलिस विभाग को दिए निर्देश राज्य गृह विभाग ने इनर लाइन परमिट चेकपोस्ट अकपा से डुबलिंग शिफ्ट करने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। गृह विभाग ने डीजीपी संजय कुंडू को जिला पुलिस किन्नौर से इस मसले पर स्थिति का जायजा लेने को कहा है। साथ ही जिला पुलिस किन्नौर को भी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। यह चेकपोस्ट अंतरराष्ट्रीय सीमा सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां से मात्र 88 किलोमीटर दूर है चीन सीमा भारत-चीन सीमा की बात करें ताे जहां पर इनर लाइन चेकपाेस्ट स्थित है, यहां से शिपकी-ला मात्र 88 किलोमीटर की दूरी पर है। इसी वजह से पिछले साल गृह मंत्रालय ने इनर लाइन चेकपाेस्ट काे अकपा से डुबलिंग शिफ्ट करने के आदेश जारी किए थे। बताया गया कि शिपकी -ला क्रॉस करते ही चीन की सीमा शुरू होती है।


















































