" महंगाई की तहलील में जब जिस्म टटोला, मालूम हुआ हम तो कमर भी नहीं रखते " सय्यद ज़मीर जाफ़री का ये शेर आज हर आम आदमी का किस्सा है। एक तो कोरोना और इस पर बढ़ती महंगाई, गरीब और मध्यम वर्गीय वर्ग यदि कोरोना से बच भी रहा है तो महंगाई कमर तोड़ रही है। लॉकडाउन ने रोजगार ठप कर दिए है। आमद है नहीं और महंगाई है कि रुकने का नाम नहीं ले रही। सरकार को इस मुश्किल दौर में राहत पहुंचानी चाहिए लेकिन सरकार को तो मानो आम लोगों की तकलीफ से कोई सरोकार ही नहीं रह गया है। जब देश में चुनाव होते है तो महंगाई पर थोड़ा ब्रेक जरूर लगता है, फिर चुनाव खत्म और दाम बढ़ना शुरू। जब सियासी फायदे के लिए महंगाई पर ब्रेक लग सकता है, तो कोरोना के इस मुश्किल दौर में आमजन को राहत देने के लिए क्यों नहीं ? मानो सरकार असंवेदनशील हो चुकी है। आम आदमी लाचार है और सरकार से आस लगाए हुए है कि वह कुछ करेगी, वहीं सरकार है कि सिर्फ जनता को दिलासा देने के अलावा कुछ नहीं कर रही। ये कहना भी गलत नहीं होगा कि सरकार की नीतियों से महंगाई बढ़ती जा रही है, सरकार खुद भी आए दिन पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाकर और अपनी इस करनी को देश के आर्थिक विकास के लिए जरूरी बताकर आम आदमी के जले पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। थोक महंगाई (WPI) के मोर्चे पर भी सरकार को बड़ा झटका लगा है। देश में अप्रैल के महीने में थोक महंगाई में रिकॉर्ड तोड़ तेजी देखने को मिली है। अप्रैल, 2021 में थोक महंगाई दर बढ़कर 10.49 फीसदी पर रही है, जो ऑल टाइम हाई है। जबकि मार्च में यह 7.29 फीसदी पर रही थी, जो 8 साल में सबसे ज्यादा थी। फरवरी में थोक महंगाई दर 4.17 फीसदी पर थी। फिलहाल अप्रैल में महंगाई ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। 2021 में 115 रुपये बढ़े रसोई गैस के दाम वर्ष 2021 में घरेलू गैस की कीमत में बड़ी बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है। जनवरी में इसकी कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ। पर 4 फरवरी को कीमत 694 रुपए से 25 रुपए बढ़कर 719 रुपए हो गई। उसके बाद 15 फरवरी को कीमत में 50 रुपए की तेजी आई और यह 769 रुपए का हो गया। फिर 25 फरवरी को 25 रुपए के उछाल के साथ यह 794 रुपए का हो गया। 1 मार्च को इसकी कीमत में फिर 25 रुपए की तेजी आई और यह 819 रुपए का हो गया। अप्रैल में कीमत में 10 रुपए की गिरावट आई और यह 809 रुपए का हुआ। मई में घरेलू गैस की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ। क्या बेहिसाब-बेलगाम मुनाफाखोरी है कारण ! बेकाबू महंगाई के पीछे एक तर्क ये दिया जा रहा है कि पिछले साल मानसून कमजोर रहा या पर्याप्त बारिश नहीं हुई, जिसके चलते खाद्य सामग्री के दाम बढ़े है। पर सवाल ये है कि क्या इसका असर सभी चीजों पर एकसाथ पड़ा है। कीमत इतनी ज्यादा होने के बावजूद बाजार में किसी भी आवश्यक वस्तु का अकाल-अभाव दिखाई नहीं पड़ता, पर जब आपूर्ति कम होती है तो बाजार में चीजें दिखाई नहीं पड़ती हैं और उनकी कालाबाजारी शुरू हो जाती है। मूल सवाल ये है कि क्या बेहिसाब-बेलगाम मुनाफाखोरी ही तो बेकाबू महंगाई का कारण नहीं है। सरकार को बाजार पर योजनाबद्ध तरीके से अंकुश लगाना चाहिए। उत्पादन लागत के आधार पर चीजों के विक्रय दाम तय होने चाहिए। जब सरकार कृषि उपज के समर्थन मूल्य तय कर सकती है तो वह बाजार में बिकने वाली चीजों की अधिकतम कीमत क्यों नहीं तय कर सकती?
18 से 44 वर्ष तक के आयु वाले युवाओं के लिए काेविड वैक्सीन लगवा पाना अब किसी लक्ज़री से कम नहीं रहा। वैक्सीन लगवाने के लिए अपॉइंटमेंट लेने की प्रक्रिया इतनी जटिल है की घंटो इंतज़ार और कड़ी जद्दोजहद के बाद भी स्लॉट बुक होता है या नहीं ये आपकी किस्मत और ऑनलाइन एक्सपर्टीज पर निर्भर करता है। कोरोना के इस काल में जहां वैक्सीन को कोरोना से लड़ाई का एकमात्र हथियार माना जा रहा है, वहीं हिमाचल के युवाओं को कब आसानी से वैक्सीन लगेगी ये एक बड़ा सवाल है। केंद्र सरकार द्वारा तो जनता की सहूलियत के लिए ऑनसाइट रजिस्ट्रेशन का प्रावधान किया गया मगर हिमाचल प्रदेश में वैक्सीन की कमी के चलते ये व्यवस्था लागु नहीं की गई थी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा ये स्पष्ट किया गया था कि हिमाचल में वैक्सीन की वेस्टेज नहीं हो रही है और न ही यहां वैक्सीन की अधिक खेप उपलब्ध है, इसीलिए हिमाचल में ऑनसाइट रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा सकता। हालाँकि अब नेशनल हेल्थ मिशन के डायरेक्टर डा. निपुण जिंदल ने बताया है कि भारत सरकार के 18 से 44 वर्ष तक के आयुवर्ग के लिए ऑनसाइट पंजीकरण तथा अप्वाइंटमेंट की सुविधा के निर्णय को हिमाचल में लागू करने के बारे में जल्द निर्णय लिया जा सकता है। उन्होंने कहा की भारत सरकार ने स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर ऑनसाइट पंजीकरण को खोलने के निर्णय को राज्य सरकारों तथा केन्द्र शासित राज्यों को सौंपा है, जिस पर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। बता दें की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) से हिमाचल प्रदेश को सीमित टीके की ही आपूर्ति हो पाई है। राज्य में अब तक लगभग 19 लाख लोगों को कोविशील्ड की पहली खुराक दी जा चुकी है। हिमाचल में फिलहाल सिर्फ कोविशील्ड वैक्सीन ही लोगों को दी जा रही है, बाकि दो वैक्सीन की खरीद अभी नहीं की गई। हालांकि एसआईआई से कोविशील्ड की आपूर्ति धीमी होने की संभावना है, इसलिए स्वास्थ्य विभाग अन्य निर्माताओं से स्पुतनिक और कोवैक्सिन खरीदने पर विचार कर रहा है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने ने वैकल्पिक टीकों की खरीद की लागत पर काम किया है लेकिन सबसे बड़ी बाधा बड़ी धनराशि की आवश्यकता है। बता दें की 72 लाख कोवैक्सिन खुराक प्राप्त करने की लागत 600 रुपये प्रति खुराक की दर से 432 करोड़ रुपये होगी। वहीं, स्पुतनिक की 72 लाख डोज 948 रुपये प्रति डोज की दर से खरीदने पर राज्य को 682 करोड़ रुपये और व्यय करने होंगे। इंटरनेट नहीं चलता तो कैसे बुक होगा स्लॉट शिमला जिले के सुदूर डोदरा-क्वार क्षेत्र में, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं है, टीकाकरण (18-44 आयु वर्ग) के लिए 90 प्रतिशत से अधिक स्लॉट बाहरी लोगों द्वारा बुक किए गए हैं। लगभग 8,000 की आबादी वाले इस क्षेत्र में इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी है, इसलिए प्रशासन ने कोविन पोर्टल पर स्थानीय लोगों को पंजीकृत करने की जिम्मेदारी ली है। पर इससे पहले की स्थानीय लोगों की बुकिंग हो पाती है अन्य क्षेत्रों के लोगों ने स्लॉट बुक कर लेते है। स्थिति को देखते हुए बीते दिनों रोहड़ू के एसडीएम ने भी सभी बाहरी लोगों से अपने स्लॉट रद्द करने का अनुरोध किया ताकि स्थानीय आबादी टीकाकरण से वंचित न रहे। प्रशासन चाहता है कि यहां के लोगों का जल्द से जल्द टीकाकरण हो, इसका एक और कारण यह है कि ऊंचे इलाकों में बर्फबारी होने पर यह इलाका महीनों तक बंद रहता है। अन्य कई क्षेत्रों में भी इसी तरह की परेशानी है।
काेराेना महामारी ने देश और प्रदेश में इस वर्ष होने वाली जनगणना की प्रक्रिया को राेक दिया है। प्रदेश सरकार की ओर से इसके लिए पिछले साल दिसंबर माह में तैयारियां भी शुरु कर दी गई थी, लेकिन इस वर्ष जनगणना संभव हो पाना काफी कठिन लग रहा है। कारण यही है कि पूरा देश इस वक्त काेराेना से लड़ रहा है, हालाँकि कोरोना से जंग पूरी तरह जीतने के बाद शायद जनगणना की प्रक्रिया शुरु हाे जाए। प्रदेश सरकार ने जनगणना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्यस्तरीय समन्वय समिति भी बना दी है। हिमाचल प्रदेश में जनगणना कार्य में पारदर्शिता और सही जानकारी के संकलन के लिए मोबाइल एप भी बनेगा। इसके माध्यम से राज्य में जनगणना 2021 का अधिकतम कार्य संपादित करवाया जाएगा। जानकारियों का संकलन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से किया जा सकेगा। बीते फरवरी व मार्च माह में उपायुक्तों और जिले के अन्य अधिकारियों को जनगणना के कार्य का विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया है। निदेशक जनगणना के मुताबिक जनगणना कार्यालय द्वारा हिमाचल में 18 मास्टर ट्रेनर को पिछले साल नवंबर में प्रशिक्षण दिया गया था। ये मास्टर ट्रेनर मार्च में सभी जिलों में लगभग 418 फील्ड ट्रेनर को प्रशिक्षण देने वाले थे। इनके द्वारा अप्रैल में राज्य के लगभग 19500 प्रगणकों व पर्यवेक्षकों को जनगणना का कार्य करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाना था, लेकिन काेराेना के बढ़ते केस काे देखते हुए ऐसा संभव नहीं हाे पाया। बताया गया कि जनगणना से पहले प्रगणक अपने मोबाइल फोन का उपयोग कर मोबाइल एप के माध्यम से जनगणना का कार्य संपादित करेंगे। मोबाइल फोन के माध्यम से जनगणना कार्य करने वाले प्रगणकों को लगभग 25 हजार और पेपर पर कार्य करने वाले प्रगणकों को लगभग 17 हजार रुपये मानदेय भी दिया जाना है। 16 मई से 30 जून तक हाेना थी मकानाें की गणना जनगणना विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक राज्य में प्रथम चरण में 16 मई से 30 जून तक मकानों की गणना कर उन्हें सूचीबद्ध किए जाने का शेडयूल तैयार कर दिया है। उपरोक्त कार्य के साथ-साथ राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर को भी अपडेट किया जाएगा। जनगणना के संपूर्ण कार्य का पर्यवेक्षण वेब पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। पर अभी इसके लिए हिमाचल के काेराेना मुक्त हाेने का इंतजार करना पड़ेगा।
काेराेना संकट के दौरान स्कूली बच्चों की फीसों में भारी वृद्धि के खिलाफ संघर्ष दूसरे साल भी जारी है। हिमाचल प्रदेश में जहां एक तरफ कोरोना कर्फ्यू ने लोगों कि आर्थिक स्थिति बिगाड़ दी है तो वहीं प्रदेश के निजी स्कूल अभिभावकों से मनचाही फीस वसूल उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा रहे है। सरकार ने प्राइवेट स्कूलाें की फीसाें पर कंट्राेल करने के लिए कानून बनाने का दावा तो किया था, लेकिन अब तक ये दावा हकीकत नहीं बन पाया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल चुप्पी साधे हुए है । प्रदेश में एकमात्र छात्र अभिभावक मंच पिछले साल यानी पहले दिन से ही ये जंग लड़ रहा है। मंच की ओर से अकेले ही सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ संघर्ष जारी है। छात्र अभिभावक मंच ने उच्चतर शिक्षा निदेशक से निजी स्कूलों द्वारा वर्ष 2020 व वर्ष 2021 में अभिभावकों का जनरल हाउस किये बगैर ही की गयी 15 से 50 प्रतिशत भारी फीस बढ़ोतरी को वापिस लेने की मांग की है। मंच ने कोरोना काल के इन दो वर्षों में की गई फीस वृद्धि को गैरकानूनी करार दिया है व इसे सम्माहित करने की मांग की है। मंच ने इस संदर्भ में तुरन्त अधिसूचना जारी करने की मांग की है। मंच ने प्रदेश सरकार को चेताया है कि निजी स्कूलों में बगैर जनरल हाउस की अनुमति के वर्ष 2020 व 2021 में की गयी भारी फीस बढ़ोतरी को अगर वापिस न लिया गया तो छात्र अभिभावक मंच आंदोलन तेज करेगा। मंच के संयोजक विजेंदर मेहरा ने कहा कि अभिभावकों के निरंतर संघर्ष के बाद शिक्षा विभाग का दयानंद स्कूल के संदर्भ में जारी किया गया लिखित आदेश तभी मायने रखता है अगर शिक्षा अधिकारी 5 दिसम्बर 2019 के आदेश को अक्षरशः लागू करवाने में सफल होते हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसा ही आदेश सभी निजी स्कूलों के लिए तुरंत जारी होना चाहिए ताकि भारी फीस पर लगाम लग सके। उन्होंने शिक्षा निदेशक से मांग की है कि वह तुरन्त सभी निजी स्कूलों में पांच दिसम्बर 2019 की शिक्षा निदेशालय की अधिसूचना को लागू करवाएं। यह अधिसूचना वर्ष 2019 में जारी हुई थी व इसमें स्पष्ट किया गया था कि वर्ष 2020 व उसके तत्पश्चात कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों के जनरल हाउस के बगैर कोई भी फीस बढ़ोतरी नहीं कर सकता है। इसके बावजूद भी निजी स्कूलों ने वर्ष 2020 में भारी फीस बढ़ोतरी की। वर्ष 2021 में भी सारे नियम कायदों की धज्जियां उड़ाते हुए टयूशन फीस में भारी-भरकर बढ़ोतरी करके सीधे पन्द्रह से पचास प्रतिशत तक फीस बढ़ोतरी कर दी गयी। 20 हजार रुपए तक बढ़ा दी फीस: मेहरा छात्र अभिभावक मंच के संयोजक विजेंदर मेहरा ने बताया कि पिछले दो वर्षों में शिमला शहर में निजी स्कूलों ने 12 हजार से 20 हज़ार रुपये तक की फीस बढ़ोतरी की है। इन स्कूलों ने बड़ी चालाकी से अब टयूशन फीस को भी कई गुणा बढ़ा दिया है व कुल फीस का मुख्य हिस्सा ही टयूशन फीस में बदल दिया है। अब कुल फीस का 80 से 90 प्रतिशत टयूशन फीस ही बना दिया गया है ताकि कोई ट्यूशन फीस के नाम पर फीस बढ़ोतरी पर प्रश्न चिन्ह न खड़ा कर सके। यह सीधी व संगठित लूट है तथा इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। सरकार व शिक्षा विभाग की इस मामले पर खामोशी व निष्क्रियता कई सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने कहा है कि पिछले दो वर्षों में हुई भारी फीस बढ़ोतरी पूर्णतः छात्र व अभिभावक विरोधी कदम है। दो वर्षों में असहनीय फीस वृद्धि की निजी स्कूलों ने विजेंद्र मेहरा ने कहा कि पिछले दो वर्षों में जो फीस बढ़ोतरी की गई है वो कोरोना काल में असहनीय है। स्कूल न चलने से निजी स्कूलों का बिजली,पानी,स्पोर्ट्स,कम्प्यूटर,वार्षिक कार्यक्रमों,स्कूल का रखरखाव,सफाई व्यवस्था,निर्माण व मिसलेनियस चार्जेज़ आदि पर खर्च लगभग शून्य हो गया है लेकिन इसके बावजूद भी हज़ारों रुपये की फीस बढ़ोतरी समझ से परे है। निजी स्कूलों के खर्चों की कटौती के कारण छात्रों की फीस लगभग पच्चीस प्रतिशत तक कम होनी चाहिए थी, परन्तु इन स्कूलों ने इसके विपरीत पन्द्रह से पचास प्रतिशत तक की फीस बढ़ोतरी कर दी। सरकार, निजी स्कूलों की मनमानी लूट व भारी फीसों को संचालित करने के लिए कानून बनाने व रेगुलेटरी कमीशन स्थापित करने के लिए लगातार आनाकानी कर रही है जिस से स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार द्वारा ही निजी स्कूलों की मनमानी लूट को संगठित व पोषित किया जा रहा है।
हिमाचल काडर के आईएएस अफसराें का पलायन हर साल हाेते जा रहा है। पहले से ही अफसराें की कमी से जूझ रहे हिमाचल काे आईएएस अफसराें के डेपुटेशन की चिंता हमेशा सताने लगती है। प्रदेश में 123 के काेटे में 102 अफसराें से ही काम चल रहा है। हालांकि बीते दिनों 1997 बैच के आईएएस अफर सुभाशीष पांडा डेपुटेशन से वापस लाैट चुके हैं, लेकिन उनके अलावा अभी 21 अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्त पर सेवाएं दे रहे हैं। बताया गया कि प्रियतु मंडल और शाइना जल्द ही हिमाचल वापस लाैटेंगे। 2006 बैच के आईएएस अधिकारी प्रियतु मंडल वर्तमान में इंटर कैडर डेप्युटेशन पर पश्चिम बंगाल में हैं। वह जल्द लौट रहे हैं। इनके अलावा 2007 बैच की अफसर शाइना मोल भी आने वाली हैं। वह वर्तमान में स्पाइस बोर्ड कोची में डायरेक्टर फाइनांस हैं। प्रदेश सरकार के मुताबिक प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं दे रहे हिमाचल काडर के आइएएस अफसरों को वापस बुलाने के लिए हिमाचल सरकार ने पिछले साल काम शुरू किया था। उस समय प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया था कि प्रतिनियुक्ति पर गए किसी भी अफसर को अब एक्सटेंशन नहीं दी जाएगी। इन अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की अवधि पांच वर्ष है, लेकिन कई सालों से ये बाहर ही डटे हैं। सूत्राें से मिली जानकारी के मुताबिक 10 आइएएस अफसराें को राज्य से बाहर गए 7 साल का समय हो रहा है। ये एक्सटेंशन 2021 में खत्म हो रही है। जिन अधिकारियों का प्रतिनियुक्ति कार्याकाल खत्म हो गया है उनमें अधिकतर अधिकारी केरल, झारखंड व चेन्नई में व भारत सरकार में नई दिल्ली स्थित विभिन्न मंत्रालयों में सेवाएं दे रहे हैं। 7 एचएएस अधिकारियाें की टली इंडक्शन कोरोना महामारी के कारण एचएएस से आईएएस की इंडक्शन भी टल गई है। हिमाचल प्रशासनिक सेवा के सात अधिकारियों की इंडक्शन आईएएस कैडर में होनी हैं। इनमें अश्वनी राज शाह, कुमुद सिंह, विनय सिंह, हरंबस ब्रैस्कॉन, रीमा कश्यप, शुभकरण और सुमित खिमटा शामिल हैं। इस बारे में यूपीएससी के चेयरमैन का शिमला दौरा भी तय हो गया था। बताया गया कि शिमला के पीटरहाफ में 5 अप्रैल को ये डीपीसी तय हुई थी, लेकिन कोरोना पर पीएमओ से जारी प्रोटोकॉल के बाद इसे अब टाल दिया गया है। फिलहाल ये इंडक्शन कब होगी, ये तय नहीं है। इस इंडक्शन के बाद हिमाचल सरकार को आईएएस कैडर में ज्यादा अफसर मिल जाएंगे। हिमाचल काडर के ये आईएएस हैं सेंट्रल डेपुटेशन पर अफसर बैच प्रतिनियुक्ति स्थान संजीव गुप्ता 1995 दिल्ली तरुण कपूर 1987 दिल्ली ए.रजा रिजवी 1988 दिल्ली के. संजय मूर्ति 1989 दिल्ली अनुराधा ठाकुर 1994 दिल्ली भरत खेड़ा 1995 दिल्ली आरडी नजीम 1995 दिल्ली मनीष गर्ग 1996 दिल्ली अमनदीप गर्ग 1999 दिल्ली पुषपेंद्र राजपूत 1999 दिल्ली आर सेलवाम 2001 चेन्नई नंदिता गुप्ता 2001 दिल्ली अभिषेक जैन 2002 चंडीगढ़ एम सुधा देवी 2003 तमिलनाडू प्रियंका वासू 2004 काेलकात्ता मीरा माेहंती 2005 पीएमओ दिल्ली रिजेश चाैहान 2005 दिल्ली प्रियतू मंडल 2006 पश्चिम बंगाल शाइना मोल 2007 दिल्ली कदम संदीप 2008 महाराष्ट्रा आशीष सिंघमार 2008 झारखंड
हिमाचल में बंदरों के आतंक पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने दो साल पहले राज्य की 91 तहसीलों में बंदरों काे मारने की अनुमति दी थी, जिसकी अवधि पूरी हो चुकी है। ऐसे में अब हिमाचल में बंदरों को मारने पर प्रतिबंध लग गया है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने राज्य की 91 तहसील व उप तहसीलों में बीते अप्रैल महीने तक ही इन्हें मारने की इजाजत दे रखी थी। लिहाजा अब यदि कोई बंदरों को मारता है तो वह अपराध माना जाएगा। वहीं राज्य के वन विभाग ने सभी फील्ड अधिकारियों से पूछा है कि यदि किसी ओर क्षेत्र में बंदरों को वर्मिन घोषित करवाना है तो जल्द मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा जाए। इसके बाद वन विभाग के माध्यम से केंद्र को प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसमें बंदरों को दोबारा एक साल के लिए वर्मिन घोषित करने का आग्रह किया जाएगा। प्रदेश में बंदर हर साल करोड़ों रुपए की नगदी फसलें तबाह कर जाते है। इन्होंने किसानों का जीना दूभर कर रखा है। शहरी क्षेत्रों में भी लोगों के लिए बंदर परेशानी का सबब बने हुए है। शिमला में तो कई बार बंदर लोगों की जेबें भी तलाश करते देखे गए है। यही वजह है कि राज्य सरकार बीते कुछ सालों से केंद्र से बंदरों को वर्मिन घोषित करवाती रही है, ताकि फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले बंदरों को किसान मार सके। केंद्र भले ही कई सालों से बंदरों को मारने की इजाजत देता आया है, लेकिन सच्चाई यह है कि प्रदेश में अधिकतर लोग बंदरों को नहीं मार रहे है। इसके पीछे कारण चाहे धार्मिक हो या फिर इन्हें मारने के लिए असले की कमी हो। किसान सभा सालों से मांग करती आई है कि वन विभाग अपने प्रशिक्षित शूटरों से बंदरों को शूट करवाए या फिर किसानों को कारतूस उपलब्ध कराए। वहीं वन विभाग ने बंदरों को मारने पर इनाम की घोषणा कर रखी है। बंदरों की संख्या में ऐसे आई कमी राज्य में बंदरों की संख्या में लगभग 33.5 फीसद की कमी आई है। यह आंकड़े राज्य वन विभाग के सर्वेक्षण में सामने आए है। माना जा रहा है कि वन विभाग द्वारा बंदरों की नसबंदी जैसे कदमों के परिणामस्वरूप इनकी संख्या कम हुई है। प्रदेश में इस समय 1 लाख 36 हजार 443 बंदर हैं। जबकि साल 2015 में 2 लाख 67 हजार बंदर थे। इनका घनत्व हॉट स्पॉट भी 263 से घटकर 226 रह गया है। हिमाचल में फिलहाल बंदरों काे मारने पर रोक लगी है, बंदरों को फिर से वर्मिन घोषित करने का आग्रह हम केंद्र सरकार से करेंगे। इसे देखते हुए फील्ड के अन्य अधिकारियों से भी इस तरह के प्रस्ताव मांग रखे है। इसके बाद केंद्र को प्रस्ताव भेजकर बंदरों को वर्मिन घोषित करवाने का आग्रह किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं पर फैसले को लेकर सुनवाई शुरू होते हीं स्थगित हो गई है। केंद्र सरकार ने अपना फैसला साझा करने के लिए कोर्ट से दो दिन का समय मांगा है। इस पर मामले को स्थगित करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, सीबीएसई से कहा है कि अगर उसने परीक्षा को आगे बढ़ाने का फैसला किया है और परीक्षा रद्द करने के लिए अपनी पिछले वर्ष की नीति का पालन नहीं करने का इरादा है तो उसके लिए उचित कारण भी बताएं। सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन के समय पर सहमति जताते हुए केंद्र और सीबीएसई से गुरुवार तक अपना फैसला साझा करने को कहा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह पिछले साल की नीति के अनुरूप निर्णय की उम्मीद कर रहा है, जब बोर्ड ने परीक्षा रद्द कर दी थी। सीबीएसई ने 26 जून, 2020 को सुप्रीम कोर्ट में लंबी बहस के बाद लंबित कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय प्रस्तुत किया था।
कोरोना महामारी बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिका दाखिल करने वालों पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने कहा कि ये कोई पीआईएल नहीं है। यह एक मोटिवेटेड पेटिशन है। याचिका में मांग की गई थी कि कोरोना की सेंकेंड वेव के मद्देनजर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक लगाई जाए। याचिका में ये भी कहा गया था कि कोरोना के दौरान किसी भी ऐसे प्रोजेक्ट को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। याचिका में दलील दी गई थी कि इस प्रोजेक्ट की वजह से महामारी के दौर में कई लोगों की जान खतरे में है। क्या है सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट? दिल्ली में इंडिया गेट के पास राजपथ के दोनों तरफ के इलाके को सेंट्रल विस्टा कहा जाता है। इसमें राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट के करीब प्रिंसेस पार्क का इलाका आता है। सेंट्रल विस्टा रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट केंद्र सरकार के इस पूरे इलाके को रेनोवेट करने की योजना को कहा जाता है। इसी प्रोजेक्ट के तहत नए संसद परिसर का निर्माण किया जाना है।
हिमाचल प्रदेश के लाखों बागवानों को सीजन में सेब पैकिंग सामग्री महंगी मिलेगी। कोविड काल में पिछले साल भले ही कार्टन के रेट नहीं बढ़ाए गए थे, लेकिन इस साल बागवानों को कार्टन खरीदने के लिए और जेब ढीली करनी पड़ेगी। इस साल सेब की करीब तीन करोड़ पेटी सेब की पैदावार होने का अनुमान लगाया जा रहा है। कार्टन उत्पादकों ने प्रदेश के सेब बागवानों की मांग के कार्टनों की एडवांस बुकिंग भी शुरू कर दी है। इस बार खुले बाजार में मिलने वाले सेब कार्टनों के रेट में 12 से 14 रुपये की वृद्धि की गई है। पिछले साल बागवानों को बीस किलो का कार्टन 40 से 58 रुपये में बेचा गया था। इस बार बागवानों को वही कार्टन 52 से 70 रुपये में मिल रहा है। इन कार्टनों के कागज की गुणवत्ता के हिसाब से दाम वसूले जा रहे हैं। कई कंपनियां अपने हिसाब से कार्टन के दाम वसूलते हैं जबकि ये कंपनियां सरकारी एजेंसियों के माध्यम से कार्टन बेचने से परहेज करते रहे हैं। इसी तरह से सेब पैकिंग की सौ ट्रे के बंडलों में भी उत्पादकों ने सौ रुपये तक बढ़ोतरी की है। जो सेब पैकिंग ट्रे का बंडल पिछले साल 525 रुपये में बेचा जा रहा था, उसी ट्रे का बंडल इस बार बागवानों को 625 से 650 रुपये में बेचा जा रहा है। सेब उत्पादक बागवानों का कहना है कि कार्टन उत्पादक दलील दे रहे हैं कि उनको पहले सस्ती दरों में कार्टन और पैकिंग ट्रे बनाने के लिए सस्ती दरों में कागज मिल जाता था, लेकिन इस बार यह कागज महंगा मिल रहा है। हिमाचल प्रदेश सब्जी एवं उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान कहते हैं कि सेब सीजन 15 जून से आरंभ हो जाएगा। इस बार कार्टनों और पैकिंग ट्रे महंगे दामों पर मिल रहे हैं। उत्पादक दलील दे रहे हैं कि कच्चा माल महंगा हो गया है।
देश की राजधानी दिल्ली में संपूर्ण लॉकडाउन बार फिर बढ़ा दिया है। अब राज्य में 7 जून की सुबह 5 बजे तक पाबंदियां जारी रहेंगी। हालांकि DDMA ने सोमवार से कुछ लोगों को बाहर निकलने और काम पर जाने की सशर्त अनुमति दे दी गई है। दिल्ली में आवश्यक गतिविधियों को छोड़कर लोगों की आवाजाही पर रोक रहेगी। इसके अलावा कंटेनमेंट जोन के बाहर, औद्योगिक क्षेत्रों में कंस्ट्रक्शन और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को संचालन के लिए अनुमति दी गई है। हालांकि इस दौरान सभी को सख्ती के साथ कोविड प्रोटकॉल का पालन करने का निर्देश दिया गया है।गौरतलब है कि पिछले 24 घंटे में दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के 956 नए मामले सामने आए, जो लगभग पिछले दो महीने में दर्ज किए गए मामलों में संख्या के लिहाज से सबसे कम रहे। वहीं महामारी से 122 और मरीजों की मौत हुई, जबकि संक्रमण दर घटकर 1.19 प्रतिशत हो गई। दिल्ली में 22 मार्च को इस संक्रमण के 888 मामले दर्ज किए गए थे और इसके बाद से पहली बार एक दिन में एक हजार से कम मामले सामने आए हैं।
IMA और स्वामी रामदेव के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रह है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, उत्तराखंड ने स्वामी रामदेव को बहस करने की चुनौती दी है। आईएमए ने उनसे से ये सवाल भी पूछा है कि किस एलोपैथिक हॉस्पिटल में पतंजलि की दवाएं इलाज के लिए दी गईं। आईएमए ने स्वामी रामदेव से खुली बहस करने के लिए कहा है। गौरतलब है कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की तरफ से स्वामी रामदेव को कानूनी नोटिस भी भेजा जा चुका है। इस पर स्वामी रामदेव ने दावा किया कि एलोपैथी ने महज 10 फीसदी गंभीर मरीजों का इलाज किया, वहीं बाकी 90 फीसदी संक्रमित योग और आयुर्वेद से ठीक हुए। स्वामी रामदेव ने कहा कि कोरोना संकट में लोगों को नेचुरोपैथी और योग की सबसे ज्यादा जरूरत है। इस कोरोना महामारी से लाखों लोगों की जान डॉक्टरों ने नहीं बल्कि नेचुरोपैथी और योग ने बचाई है। उन्होंने कहा कि ये एलोपैथी के खिलाफ मोर्चाबंदी नहीं है, बल्कि यह बीमारी को ठीक करने के लिए है। कमजोर लिवर-हार्ट, कमजोर फेफड़े, कमजोर नर्वस सिस्टम, कमजोर इम्यून सिस्टम और कमजोर इच्छाशक्ति इस बीमारी के बड़े कारण हैं, लेकिन एलोपैथी के पास इसका कोई इलाज नहीं है। वो सिर्फ सिम्प्टोमैटिक ट्रीटमेंट करते हैं।
हिमाचल प्रदेश कोरोना कर्फ्यू को अब 7 जून तक बढ़ा दिया गया हैं। इसी बाबत अब हिमाचल प्रदेश में पांच जून तक परिवहन सेवाएं बहाल नहीं होंगी, लेकिन सरकार ने परिवहन विभाग से एसओपी और परिवहन निगम से तैयारी कर रखने के लिए कहा है। पांच जून को होने वाली कैबिनेट की बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा। बताया जा रहा है कि विभाग 50 फीसदी ऑक्यूपेंसी के तहत बसें चलाने के नियम तैयार किये जा रहे है। बरहाल सरकार अभी बाहरी राज्यों के लिए बसें नहीं चलाना चाहती है। वंही, करोड़ों के घाटे में डूबे परिवहन निगम की माली हालत है। निगम के कोष में पैसा नहीं है। सरकार कर्मचारियों को तनख्वाह देने में असमर्थ है। बसें न चलने से निगम को प्रतिदिन डेढ़ करोड़ का घाटा उठाना पड़ रहा है। इस समय परिवहन निगम के बेड़े में 3400 बसें हैं। इनमें 2900 बसें सड़कों पर दौड़ती हैं। परिवहन मंत्री बिक्रम सिंह ने बताया कि प्रदेश और बाहरी राज्यों के लिए अभी बसें नहीं चलाई जा रही हैं। कुछ दिन इंतजार करना पड़ेगा। दूसरी और गौर करें तो हिमाचल प्रदेश में निजी बस ऑपरेटर पहले से ही सरकार से खफा हैं। यूनियन प्रदेश सरकार की ओर से विशेष पथकर माफ करने की मांग कर रही है। इन ऑपरेटरों ने प्रदेश में कर्फ़्यू लगने से पहले ही बसें खड़ी कर दी थीं।
केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के लिए कोविशील्ड वैक्सीन का कोटा बढ़ा दिया है। यह कोटा 18 से 44 साल और 45 साल से ऊपर के दोनों वर्गों के लिए बढ़ाया गया है। हिमाचल सरकार ने केंद्र से पहले 1,19,760 डोज मांगी थी। केंद्र सरकार ने इसमें 47,420 डोज बढ़ाकर हिमाचल को 1,67,180 डोज देने का फैसला लिया है। यह डोज़ जून महीने के लिए जारी की गई है। इसी तरह केंद्र सरकार ने 45 साल से ऊपर के लोगों के लिए भी डोज बढ़ा दी है। इसमें 2,52,770 के अलावा 46,630 डोज बढ़ाई है। अब यह कोटा 2,99,400 कर दिया है। यह वैक्सीन एक सप्ताह के भीतर आ सकती है। 45 साल से ऊपर के आयु वर्ग के लिए यह डोज हिमाचल को केंद्र से निशुल्क मिलेगी। यह वैक्सीन जून के पहले पखवाड़े के लिए जारी की गई है। हिमाचल सरकार ने प्रदेश की कुल जनसंख्या के 27.4 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लगा दी है। 18 साल से ऊपर की पात्र जनसंख्या के 34 प्रतिशत और 45 साल से ज्यादा उम्र के 89.4 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लगाई गई है।
कोरोना के खिलाफ जारी जंग में स्वास्थ्य विभाग की टीमें अपनी जान जोखिम में डालकर अदृश्य वायरस को हराने में जुटी हुई हैं। विकासखंड करसोग की अतिदुर्गम पंचायतों में वैक्सीनेशन करने के लिए हेल्थ विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी रही है। यहां शुक्रवार को दूरदराज की सरतेयोला पंचायत में चलने फिरने में असमर्थ बुजुर्गों को कोरोना की वैक्सीन लगाने के लिए हेल्थ विभाग की टीम ढांक पार कर जेसीबी की बकेट में बैठकर पंचायत भवन पहुंची। आजादी के सात दशक बाद भी अभी तक सरतेयोला पंचायत सड़क सुविधा से नहीं जुड़ी है। हालांकि घरद्वार पर कोरोना वैक्सीन लगाने से बुजुर्गों ने राहत की सांस ली। स्वास्थ्य विभाग ने कठिन भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सरतेयोला पंचायत के बुजुर्गों को पंचायत में टीकाकरण करने का निर्णय लिया था। ज़िसके लिए लोगों ने स्वास्थ्य विभाग का आभार प्रकट किया है। सरतेयोला पंचायत में वैक्सीन लगाने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम में रमेश वर्मा फार्मासिस्ट माहूनांग, फीमेल हेल्थ वर्कर कुनहों कला ठाकुर व याचना हेल्थ सब सेंटर चिंडी शामिल थे। इसके लिए स्थानीय प्रधान तिलक वर्मा ने बीएमओ करसोग सहित हेल्थ विभाग की टीम का आभार प्रकट किया है। प्रधान तिलक वर्मा ने बताया कि दूरदराज की पंचायत सरतेयोला में वैक्सीनेशन किया गया। ये पंचायत अभी तक सड़क सुविधा से नहीं जुड़ी है। स्वास्थ्य विभाग ने इस दुर्गम पंचायत में वैक्सीनेशन के लिए टीम भेजी। ऐसे में चलने फिरने में असमर्थ बुजुर्गों को घरद्वार पर ही टीका लगा। उन्होंने भविष्य में भी टीकाकरण के लिए पंचायत में टीम भेजे जाने का आग्रह किया है। ताकि दूरदराज के लोगों को वैक्सीन के लिए परेशानियों का सामना न करना पड़े। इस काम के स्वास्थ्य विभाग की टीम के जज्बे की सराहना की जा रही है।
पैराग्लाइडिंग के लिए विश्व प्रसिद्ध बीर बिलिंग घाटी से जनवरी माह में लापता हुए पैराग्लाइडर पायलट रोहित भदोरिया का शव मिल गया है। जालसू पास और बड़ा भंगाल की पहाड़ियों के बीच में एक संकरे पहाड़ के निकट शव मिलने की सूचना है। हालांकि, आधिकारिक रूप से पुलिस ने इसकी अभी तक कोई पुष्टि नहीं की है। लेकिन सर्च अभियान में जुटी टीम ने यह सूचना बीर में दी है। जहां शव मिला है, उसी स्थान में पिछले महीने रोहित का काफी सामान भी मिला था। रोहित को ढूंढने के लिए लगातार एक बड़ा सर्च अभियान चल रहा था। इस दौरान अप्रैल में उसका कुछ सामान जालसू जोत के समीप मिला था। उसी क्षेत्र में अब बर्फ कम होने के बाद रोहित का शव मिलने की सूचना मिली है। मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले 48 वर्षीय रोहित भदोरिया काफी समय से बीड़ में रह रहे थे। इसी साल 8 जनवरी को रोहित ने बिलिंग से उड़ान भरी थी। कुछ घंटों की उड़ान के बाद उतराला से ऊपर की पहाड़ियों से अचानक रोहित लापता हो गए थे।
पांवटा की एक फार्मा कंपनी से पुलिस ने ओपिओइड्स की 30.2 लाख नशीली गोलियां पकड़ी हैं। मार्केट में इसकी कीमत करीब 15 करोड़ रुपये बताई जा रही है। सिरमौर पुलिस, अमृतसर पुलिस, ड्रग इंस्पेक्टर सिरमौर ने मिलकर इस कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस का यह अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त ऑपरेशन बताया जा रहा है। पंजाब पुलिस ने खेप कब्जे में ले ली है। पांवटा के दवा उद्योग में पुलिस व ड्रग विभाग ने रातभर रिकॉर्ड खंगाला। अमृतसर में नशीली दवाएं मिलने के मामले में पंजाब पुलिस ने यह कार्रवाई की है। बताया जा रहा है कि एक ट्रक में भर कर नशीली दवा की खेप पंजाब पुलिस की टीम साथ ले गई है। हिमाचल की पांवटा पुलिस का सहयोग लेकर पंजाब पुलिस टीम ने कंपनी परिसर में छापामारी की थी। अमृतसर में बड़ी मात्रा में नशीली दवा पकड़ी गई थी। दवा में पांवटा की एक कंपनी का नाम पता लिखा था।
सीबीएसई और आईसीएसई की 12वीं की परीक्षा रद्द करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई सोमवार, 31 मई के लिए टाल दी गई है। कोर्ट ने दोनों बोर्ड से मामले पर पक्ष रखने के लिए कहा. साथ ही याचिकाकर्ता से कहा कि वह याचिका की कॉपी सीबीएसई और आईसीएसई के वकीलों को सौंपे। याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार, सीबीएसई और सीआईएससीई को निर्देश दिया जाए कि वह कोरोना के मद्देनजर 12वीं का पेपर रदद् करें। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि तय समय सीमा में ऑब्जेक्टिव मैथोडोलॉजी के बेसिस पर रिजल्ट घोषित किया जाए।गौरतलब है कि 12वीं क्लास के करीब 300 छात्रों ने भारत के चीफ जस्टिस एनवी रमना को एक पत्र भेजा था, जिसमें कोरोना वायरस महामारी के बीच ऑफलाइन परीक्षा आयोजित करने के केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के फैसले को रद्द करने की मांग की थी। छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को छात्रों को वैकल्पिक मूल्यांकन योजना उपलब्ध कराने का निर्देश देने की भी मांग की थी।
नए आईटी नियमों का पालन नहीं करने पर माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दर्ज की गई है। वकील अमित आचार्य ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि नियमों के तहत महत्वपूर्ण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म होने के नाते ट्विटर को अपने कानूनी और कार्यकारी कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। इससे पहले ट्विटर ने नए आईटी नियमों को लेकर 27 मई को अपना बयान जारी किया था और कहा था कि भारत सरकार के साथ बातचीत जारी रखेंगे। इसके साथ ही ट्विटर ने भारत में अपने कर्मचारियों और यूजर्स की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए संभावित खतरे को लेकर चिंता जाहिर की थी। माइक्रोब्लॉगिंग साइट ने अपने बयान में कहा था कि ट्विटर भारत के लोगों के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सेवा सार्वजनिक बातचीत के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई है और महामारी के दौरान लोगों का सपोर्ट किया है। हम अपनी सेवा जारी रखने के लिए भारत में लागू कानून का पालन करने की कोशिश करेंगे। ट्विटर ने आगे कहा था कि हम भारत सरकार के साथ बातचीत जारी रखेंगे और मानते हैं कि सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाना महत्वपूर्ण है। जनता के हितों की रक्षा करना निर्वाचित अधिकारियों, उद्योग और नागरिक समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल अनिल बैजल को चिट्ठी लिखकर तिरंगे के अपमान की शिकायत की है। प्रहलाद पटेल ने केजरीवाल के प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के गलत तरीके से लगाने को लेकर सवाल उठाया है। प्रहलाद पटेल ने अपनी चिट्ठी में जिक्र किया है कि दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तिरंगे झंडे को सजावट के सामान के रूप में इस्तेमाल किया साथ ही उसे इस तरह से लगाया कि सिर्फ उसका हरा रंग ही दिखाई दे रहा था। केंद्रीय मंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि वह पत्र राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान की हम सबकी जिम्मेवारी के उत्तरदायित्व को ध्यान में रखते हुए लिख रहे हैं। केजरीवाल जब भी टीवी पर संबोधन के लिए आते हैं तो उनका ध्यान बेबस ही तिरंगे पर चला जाता है। क्योंकि वह उन्हें देश की गरिमा एवं संवैधानिक स्वरूप से भिन्न प्रतीत होता है। बीच में सफेद हिस्से को कम करके हरे हिस्से को जोड़ दिया गया लगता है जो भारत सरकार गृह मंत्रालय के द्वारा निर्दिष्ट भारतीय झंडा संहित में उल्लिखित भाग 1 के 1.3 में दिए गए मानकों का प्रयोग नहीं दिखाई देता है। बता दें कि बीते कई दिनों से दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच कोविड मैनेजमेंट, ऑक्सीजन की कमी, वैक्सीन की कमी को लेकर वाक युद्ध चल रहा है, ऐसे में तिरंगे को लेकर लिखा गया यह खत एक नए विवाद को जन्म दे सकता है।
हिमाचल में कोरोना के कहर के बीच ब्लैक फंगस ने भी अपने पैर पसारने शुरू कर दिए है। आईजीएमसी शिमला में ब्लैक फंगस के 2 मरीज़ों ने अपनी जान गवा दी है। इस बात की पुष्टि आईजीएमसी हॉस्पिटल शिमला के एमस डॉ जनक राज ने की है। ये दोनों ही मरीज़ पुरुष है। डॉक्टर की जानकारी के अनुसार दोनो मरीज़ों को डाइअबीटीज़ कीटोअसिडोसिस था और ब्लैक फ़ंगस मस्तिष्क तक पहुँच गया था। जिसके चलते दोनों मरीज़ों की आज सुबह मौत हो गई। बता दें की एक मरीज़ जिला सोलन के कसौली का था जिसे 22 मई को ब्लैक फंगस के लक्षण दिखने के बाद आईजीएमसी शिमला लाया गया था। वंही दूसरा मरीज़ हमीरपुर से कल शिमला के आईजीएमसी हॉस्पिटल के लिए रेफेर किया गया था। यह मरीज़ 5 बजे के करीब शिमला पंहुचा था। डॉक्टर के मुताबिक मरीज़ की आंख के पास सूजन थी। गौरतलब है कि यह मरीज़ कोरोना वायरस से भी संक्रमित थे।
पिछले डेढ़ साल से टल रही हिमाचल प्रदेश पुलिस की सिपाही भर्ती की वजह से हजारों युवाओं के लिए रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। पिछले साल बजट की घोषणा के दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कांस्टेबल के एक हजार पद भरने का एलान कर दिया, लेकिन इसके बाद कोविड संक्रमण के चलते लॉकडाउन लग गया। सितंबर के बाद हालात साल के अंत तक हालात सुधरे तो पुलिस महकमे ने सरकार से भर्ती को लेकर पत्राचार शुरू किया। पत्राचार इतनी बार और इतने लंबे समय तक चला कि मार्च के बाद प्रदेश में कोरोना की दूरी लहर ने दस्तक दे दी। नतीजा यह हुआ कि अब अगले दो तीन महीने तक भर्ती होने की संभावना नहीं लग रही। इसकी वजह से हजारों की संख्या में युवा भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित रह जाएंगे। ऐसा इसलिए है कि भर्ती में देर होने से बड़ी संख्या में युवाओं की उम्र निर्धारित मानदंड को पार कर रही है। इसमें ऐसे युवा भी है, जो लंबे समय से भर्ती के लिए तैयारी तक कर रहे थे। सोशल मीडिया पर युवाओं का आरोप है कि पुलिस मुख्यालय अगर भर्ती से पहले ही औपचारिकताओं को लॉकडाउन के दौरान पूरा कर लेता तो दूसरी लहर आने से पहले सेना की ही तरह पुलिस भर्ती भी हो जाती। लेकिन दूरदर्शिता की कमी की वजह से उन्हें मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।
राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर अब वाहनों को 10 सेकंड से ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। NHAI इस बात के निर्देश जारी किए है। NHAI के इन निर्देशों के बाद टोल प्लाजा पर पर लंबे इंतजार से छुटकारा मिल सकता है। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने कहा है कि पीक आवर में भी टोल प्लाजा पर वाहनों को 10 सेकंड से ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। टोल प्लाजा पर 100 मीटर से ज्यादा लंबी वाहनों की कतार नहीं लगेगी। किसी भी कारण से अगर टोल प्लाजा पर 100 मीटर से ज्यादा लंबी कतार है तो वाहनों को बिना टोल टैक्स का भुगतान किए टोल प्लाजा पास करने की परमीशन होगी। NHAI के नए नियमों के मुताबिक हर टोल प्लाजा पर 100 मीटर की दूरी दर्शाने के लिए एक पीली लाइन खींची जाएगी। ऐसा देश के हर टोल प्लाजा पर किया जाएगा। NHAI ने कहा, यह टोल प्लाजा ऑपरेटरों की जवाबदेही तय करने के लिए किया जा रहा है। NHAI के अनुसार, फरवरी 2021 से 100 प्रतिशत कैशलेस टोलिंग हो चुकी है। देश में बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह को ध्यान में रखते हुए, एक कुशल टोल संग्रह प्रणाली के लिए अगले 10 वर्षों में काम किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश में संक्रमण दर में भारी कमी आई है। हिमाचल में कोरोना कर्फ्यू का असर दिखने लगा है। एक सप्ताह पहले संक्रमण की दर 27.47 थी, जो 25 मई को घटकर 15.83 फीसदी रह गई है। इस अंतराल के बीच करीब 11 फीसदी की कमी दर्ज की गई। अप्रैल और मई में प्रदेश के अन्य जिलों की अपेक्षा 5 जिले कोरोना से प्रभावित रहे। इनमें कांगड़ा, मंडी, शिमला, ऊना और जिला हमीरपुर शामिल हैं। अब इन जिलों में पहले की अपेक्षा कोरोना के कम मामले आ रहे हैं। ज्यादातर मरीज इन्हीं जिलों में ठीक हो रहे हैं। प्रदेश में कोरोना के रिकवरी रेट में भी बड़ा सुधार आया है। यह दर 85 फीसदी से बढ़ गई है। इससे साफ है कि लोग तेजी से ठीक हो रहे हैं। दूसरी ओर, मृत्यु दर में कमी न होने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। प्रतिदिन 60 से ज्यादा कोरोना संक्रमितों की मौत हो रही है। मृत्यु दर 1.52 फीसदी है।
हिमाचल प्रदेश के राशन डिपुओं में राशनकार्ड उपभोक्ताओं को जून से रिफाइंड तेल नहीं मिलेगा। उपभोक्ताओं को रिफाइंड के बदले दो लीटर सरसों तेल ही दिया जाएगा। खाद्य आपूर्ति निगम ने रिफाइंड तेल का टेंडर नहीं किया है। वंही उपभोक्ताओं को अगले माह से सरसों तेल 57 रुपये महंगा मिलेगा। विभाग ने इसकी जानकारी पहले ही दे दी है। एपीएल उपभोक्ताओं को 160 और बीपीएल को 155 रुपये प्रतिलीटर तेल मिलेगा। हिमाचल में साढ़े 18 लाख राशनकार्ड उपभोक्ता हैं। इनमें 12.50 लाख एपीएल और 4.45 लाख बीपीएल उपभोक्ता हैं। सरकार की ओर से उपभोक्ताओं को सब्सिडी पर राशन उपलब्ध कराया जाता है। सरकार उपभोक्ताओं को एक लीटर रिफाइंड और एक लीटर सरसों तेल उपलब्ध कराती है। बताया जा रहा है कि रिफाइंड तेल के दाम में भारी उछाल आया है। इसके चलते अगले महीने दो लीटर सरसों तेल ही देने का फैसला लिया गया है।
कोरोना के नियंत्रण में 97.6 प्रतिशत तक कारगर रूसी वैक्सीन स्पूतनिक वी का अब हिमाचल प्रदेश के बद्दी में बड़े पैमाने पर उत्पादन होगा। पनेशिया बॉयोटेक कंपनी को पहली बार इतनी बड़ी असाइनमेंट मिली है। यहां बनने वाली वैक्सीन की गुणवत्ता की देख-देख रूस से की जाएगी। इसकी आपूर्ति भी रूस को ही जाएगी। बताया जा रहा है कि रूस ने भारत में स्पूतनिक वी की 18 मिलियन खुराक भेजने की योजना की घोषणा की है, जिसमें मई माह में 30 लाख, जून में 50 लाख और जुलाई में 10 मिलियन खुराक शामिल है। सूत्रों के अनुसार भारत सरकार के ड्रग कंट्रोलर की ओर से रूस के आरडीआईएफ और पनेशिया बॉयोटेक को इस बाबत मंजूरी मिल चुकी है। पनेशिया बॉयोटेक के एमडी डॉ. राजेश जैन ने बताया कि इस करार से हम देश और विश्व में इस महामारी को रोकने में बड़ा योगदान दे सकेंगे। गौर हो कि बीबीएन एशिया का सबसे बड़ा फार्मा हब है जहां से देश सहित विश्व के कोने-कोने में दवाओं की आपूर्ति की जाती है। यहां पनेशिया बॉयोटेक और आरडीआईएफ एक वर्ष में स्पूतनिक वी की 100 मिलियन खुराक का उत्पादन करेगी। उधर, राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मरवाह ने कहा कि फिलहाल मामला उनके संज्ञान में नहीं है। कंपनी और भारत सरकार के उच्चाधिकारियों के बीच इस बाबत बात हुई है।
पंजाब में लगातार कृषि कानूनों का विरोध जारी है। इसी बाबत विधायक नवजोत सिद्धू ने किसानों के हक में अपने आवास पर काला झंडा लगाया। सिद्धू लगातार किसानों के हक में अपनी आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने अपने पटियाला और अमृतसर स्थित आवासों पर भी नवजोत सिद्धू ने ट्विटर पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह अपनी पत्नी के साथ छत पर झंडा लहरा रहे हैं। कांग्रेस नेता नवजोत सिद्धू ने वीडियो में कहा कि पिछले 20-25 साल से घट रही आमदनी, बढ़ रहे कर्ज के कारण किसान परेशान है और पंजाब के किसानों को आंदोलन करना पड़ रहा है। पंजाब आज एक साथ तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहा है, ये तीनों कानून किसान, मजदूर और व्यापारी के पेट पर लात मारने वाले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिए बिना सिद्धू ने उन पर तंज कसते हुए कहा कि आपके पूंजीपति दोस्तों के विपरीत किसानों को लोगों का पैसा नहीं चाहिए। किसानों को अपनी सही आमदनी चाहिए। गौरतलब है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले नवजोत सिंह सिद्धू एक बार फिर सुर्खियों में हैं। बीते कुछ दिनों से कांग्रेस में ही उनके बागी तेवर फिर देख रहे हैं, जहां मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू आमने-सामने हैं। नवजोत सिंह सिद्धू ने बीते कुछ दिनों में ऐसे बयान दिए हैं, जो पंजाब सरकार के लिए गले की फांस बन गए हैं। यही कारण है कि हाल ही में पंजाब सरकार के कई मंत्रियों ने पार्टी स्तर पर नवजोत सिंह सिद्धू पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की थी।
कोरोना महामारी और बारहवीं की परीक्षा पर संश्य होने के कारण बच्चे काफी तनाव में हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड बच्चों में बैचेनी और डर के इस माहौल को दूर करने के लिए दसवीं-बारहवीं के विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों की टेली-काउंसलिंग की शुरूआत की है। इस टेली काउंसलिंग के माध्यम से वह अपनी समस्याओं व जिज्ञासाओं का समाधान कर सकते हैं। इसके लिए टोल-फ्री नंबर 1800118004 जारी किया गया है। सीबीएसई ने सोमवार से इस टेलीकाउंसलिंग सेवा की शुरुआत कर दी है। इस पर देशभर से 83 विशेषज्ञ व 24 प्रिंसिपल छात्रों व उनके अभिभावकों की शंकाओं, परेशानियों व तनाव संबंधी सवालों को लेकर काउंसलिंग करेंगे। विद्यार्थी और अभिभावक सोमवार से शुक्रवार तक सुबह 9.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक इस सेवा का लाभ उठा सकते हैं। इससे पहले बोर्ड ने मई की शुरुआत में सीबीएसई दोस्त फॉर लाइफ एप की शुरुआत की थी। उसकी सफलता के बाद ही बोर्ड ने अब टेली काउंसलिंग सेवा की शुरुआत की है। उल्लेखनीय है कि कोविड-19 महामारी को देखते हुए दसवीं की परीक्षाएं पहले ही रद्द की जा चुकी हैं। दसवीं में विद्यार्थियों का मूल्यांकन आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर होना है। जबकि बारहवीं की परीक्षाओं को लेकर अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है। कोविड की दूसरी भयावह लहर को देखते हुए केंद्र सरकार व राज्य सरकारें इसको लेकर मंथन कर रही हैं। इस सप्ताह तक इस पर कुछ फैसला होने की संभावना है।
मौसम विभाग ने चेतावनी जारी कर दी कि अगले 24 घंटे में चक्रवात यास बेहद गंभीर चक्रवात तूफान में तब्दील हो जाएगा। बुधवार को यास बंगाल और ओडिशा के तट पर पहुंचेगा। चक्रवात के टकराने के बाद भारी तबाही से बचने के लिए लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है। वहीं गृह मंत्रालय ने चक्रवात यास से प्रभावित होने वाले सभी राज्यों को आश्वासन दिया है कि मंत्रालय उनकी मदद के लिए 24 घंटे तैयार रहेगा। इसके अलावा भारतीय मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि 26 मई की दोपहर को चक्रवात यास उत्तरी ओडिशा और बंगाल के तटों से टकराएगा।
दुनिया भर में सबसे बड़ी कही जाने वाली कंपनियां फेसबुक, ट्वीटर और इंस्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया कंपनियों के पास भारतीय नियमों के मुताबिक चलने का फैसला लेने के लिए मिली समय सीमा आज समाप्त हो रही है। 25 फरवरी को आईटी मंत्रालय ने एक गाइडलाइन और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड नियम जाारी किए थे। उस समय सोशल मीडिया कंपनियों को 3 महीने दिए गए थे, ताकि वे भारतीय नियमों और कानूनों के मुताबिक काम शुरू कर दें। लेकिन अभी तक किसी भी कंपनी ने इन नियमों का पालन नहीं किया है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या 26 मई के बाद भारत में फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया कंपनियां बंद हो जाएंगी...? ये थे नियम 1.कंपनियों को भारत में अपने 3 ऑफिसर नियुक्त करने थे और उनसे संपर्क के लिए भारत का ही पता देना था। एक कंप्लायेंस ऑफिसर, एक नोडल कॉन्टैक्ट पर्सन और एक रेजिडेंट ग्रिवांस ऑफिसर नियुक्त करना था। नियमों के मुताबिक इन अधिकारियों का निवास भारत में ही होना चाहिए था। 2.ग्रीवांस रीड्रेसल यानि 24 घंटे के भीतर किसी भी शिकायत मिलने की बात स्वीकार करना और 15 दिनों के भीतर ही अपनी कार्रवाई या फिर कार्रवाई नहीं करने के कारण बताना शामिल है। 3.गलत कंटेट की सक्रिय मॉनिटरिंग करना, कंपनियों को टेक्नोलॉजी पर आधारित टूल विकसित करना, जिसमें रेप, बच्चों के खिलाफ अमानवीय व्यवहार जैसी सूचनाएं जो पहले हटाई जा चुकी हैं, उनकी जानकारी दी जा सके। 4.सरकारी निर्देशों के मुताबिक कंपनियों को हर महीने एक रिपोर्ट जारी करना था, जिसमें शिकायतों की संख्या, उन पर की गई कार्रवाई और कितने लिंक खत्म किए इसकी जानकारी भी शामिल करना था। 5.अगर कोई आपत्तिजनक बात हटायी गयी हो तो उसे बनाने और शेयर करने वाले को कारण बताना होगा। उन्हें मौका देना होगा कि अपनी बात रख सकें और अपना कंटेट वापस डालने की बात कर सकें।
हिंदुस्तान की स्वतंत्रता को करीब 74 वर्ष बीत चुके है और इतना ही वक्त बीत चुका है देश के बंटवारे को। बंटवारे की टीस वक़्त के साथ धुंधली ज़रूर हो सकती हैं, मगर इसे दबा पाना मुमकिन नहीं। देश की हवा में मिट्टी की खुशबू के साथ एक गंध भी उठती है, उन सभी शवों की जिन्हें कोई जलाने, दफ़नाने वाला भी नहीं मिला था। अंग्रेज़ों की कूटनीति ने हमारे मुल्क़ को दो हिस्सों में बाँट कर रख दिया। बंटवारे की त्रासदी में कितने ही लोग बेघर हुए और कितने ही परिवारों के चिराग बुझ गए। उस दर्द की कल्पना भी कर पाना भी मुश्किल है। मगर इसे बेहद करीब से छुआ जा सकता है, उस समय का दर्द बयां करते कुछ साहित्यकारों की रचनाओं को पढ़ कर। अमृता प्रीतम ने 'पिंजर' में उकेरा है विभाजन का दर्द जहां बेहतरीन लेखन और स्वतंत्रता की बात हो, वहां अमृता प्रीतम का नाम आना भी लाज़मी है। विद्रोही समझ वाली अमृता, न केवल महिलाओं के लिए बोला करती थी, बल्क़ि बेहतरीन, स्वतंत्र समझ का उदाहरण भी थी। अमृता के कई उपन्यासों में विभाजन का दर्द दिखाई देता है, जिनमें से एक है 'पिंजर '। यूँ तो विभाजन पर कई उपन्यास लिखे गए हैं, परन्तु आज तक लिखे गए सभी उपन्यासों में पिंजर का अपना विशिष्ठ स्थान है। 1947 में हुए विभाजन का दर्द, अमृता ने अपने इस उपन्यास के ज़रिये 1950 के आसपास लिखा। अमृता के इस उपन्यास का अहम किरदार है 'पुरो' जो एक हिन्दू परिवार में जन्म लेती है, परन्तु पारिवारिक रंजिश के चलते, एक मुस्लमान शेख द्वारा, ज़बरदस्ती विवाह सम्बन्ध में बांधी जाती है। इस उपन्यास में अमृता बात करती हैं एक ऐसे गांव की जहां मुसलमानों की आबादी हिन्दू आबादी से कहीं ज़्यादा है और दंगों के चलते सभी हिन्दू एक हवेली में छुप गए, जो भी हिन्दू बाहर आता वह मार दिया जाता था। अमृता लिखती हैं एक रात जब हिन्दू मिलिट्री के ट्रक गाँव में आए तो लोगों ने हवेली में आग लगा दी। मिलिट्री ने आग बुझा कर लोगों को बाहर निकाला। आधे जले हुए तीन आदमी भी निकाले गए, जिनके शरीर से चर्बी बह रही थी, जिनका मांस जलकर हड्डियों से अलग-अलग लटक गया था। कोहनियों और घुटनों पर से जिनका पिंजर बाहर निकल आया था। लोगों के लारियों में बैठते-बैठते उन तीनों ने जान निकाल दी। उन तीनों की लाशों को वही फेंककर लारियाँ चल दीं। उनके घर वाले चीखते-चिल्लाते रह गए, पर मिलिट्री के पास उन्हें जलाने-फूंकने का समय नहीं था। इस सिक्के के दूसरे पहलू पर भी रोशनी डालते हुए अमृता लिखती हैं कि कुछ शहरों में सीमाएं बना दी गई थी जिनकी एक ओर हिन्दू और दूसरी ओर सभी मुसलमान थे। दूसरी ओर से मुसलमान मरते कटते चले आ रहे थे, कुछ वहीँ मार दिए गए और कुछ रास्ते में मारे गए। मोहन राकेश ने सुनाई बिछड़े अपनों की दास्ताँ साहित्यकार मोहन राकेश अपने उपन्यास 'मलबे का मालिक' में भी ऐसा ही कुछ दर्द बयां करते नज़र आए जिसमें कहानी के मुख्य किरदार 'गनी मियां' दंगों के समय पाकिस्तान चले जाते हैं और उनके बेटे बहु और दो पोतियां यहीं हिंदुस्तान में रह जाते हैं। विभाजन के 7 साल बाद, जब दोनों देशों में आवाजाही के साधन खुलते हैं, तो हॉकी का मैच देखने के बहाने गनी मियां अमृतसर (भारत) आते हैं, इस आस में कि अपने पुराने घर परिवार को फिर देख सकेंगे, परन्तु यहां आ कर उन्हें पता चलता है कि उनके परिवार की 7 साल पहले ही हत्या हो चुकी है। पियूष मिश्रा ने 'हुस्ना' (नाटक) में किया अधूरी मोहब्बत का ज़िक्र बंटवारे के समय हुई ऐसी कई घटनाओं का, कई परिवारों का दर्द साहित्य आज भी ज़िंदा रखे हुए है। पियूष मिश्रा ने एक नाटक किआ है, 'हुस्ना'। पियूष मिश्रा ने न केवल इसे लिखा, बल्क़ि मंच पर बखूबी इसे निभाया भी। इस नाटक में दो मुल्क़ों के बंटवारे में कभी न बँट पाने वाली मोहब्बत की कहानी है। इसमें हिंदुस्तान में रहने वाले प्रेमी का खत है, जो की उसकी विभाजन के बाद सेपाकिस्तान में रह रही प्रेमिका के नाम है। खत को गाने के रूप में पेश किया गया है जिसके बोल हैं, "लाहौर के उस जिले के दो परांगना में पहुंचे , रेशमी गली के दूजे कूचे के चौथे मकां में पहुंचे, और कहते हैं जिसको दूजा मुल्क़ उस पाकिस्तान में पहुंचे," गाने की इन पंक्तियों में लेखक खुद के पाकिस्तान में होने की कल्पना करते हैं व कहते हैं "मुझे लगता है में लाहौर के पहले जिले के दुसरे राज्य में हूँ।" इसी गाने में पियूष मिश्रा ने दोनों मुल्क़ों की समानताओं की ओर इशारा करते हुए यह भी लिखा की "पत्ते क्या झड़ते हैं पाकिस्तान में, वैसे ही जैसे झड़ते हैं यहाँ ओ हुस्ना, होता क्या उजाला वहां वैसा ही, जैसा होता है हिन्दोस्तान में हाँ ओ हुस्ना।" जॉन ऐलिया का फ़ारेहा के नाम संदेश सवाल है जो दर्द इधर हिन्दुस्तान में है क्या वही दर्द वहां दूसरी ओर भी उठता है? इसे समझने के लिए पाकिस्तानी लेखकों की रचनाओं पर भी रोशनी डालना ज़रूरी है। पाकिस्तान के मशहूर लेखक जॉन ऐलिया की ही बात करें तो, जॉन का जन्म 1931 में अमरोहा (भारत) में हुआ और विभाजन के समय वह पाकिस्तान चले गए। जॉन की कई ग़ज़लें उनकी बचपन की मोहब्बत 'फ़ारेहा' के नाम हैं। फ़ारेहा हिंदुस्तान में रहा करती थीं और कहा जाता है विभाजन के बाद जॉन का फ़ारेहा से मिलना कभी नहीं हुआ। मगर जॉन की लिखी एक ग़ज़ल 'फ़ारेहा' में उनका दर्द पढ़ा जा सकता है। " सारी बातें भूल जाना फ़ारेहा, था सब कुछ वो इक फ़साना फ़ारेहा, हाँ मोहब्बत एक धोखा ही तो थी, अब कभी धोखा न खाना फ़ारेहा " इन पंक्तियों में जॉन अपनी बचपन की मोहब्बत फ़ारेहा से, सब कुछ भूल जाने को कहते हैं, क्योंकि वह जानते हैं के दो मुल्क़ों के बीच खिंच चुकी इस लकीर को मिटा पाना, और इस मोहब्बत को अनजाम देना भी अब मुमकिन नही। विभाजन से किसी का घर टूटा तो किसी का दिल, किसी के अपने बिछड़े तो किसी के अपने ही पराए हो गए। इस नुकसान की भरपाई तो अब की नहीं जा सकती, पर इस बात को नकारा भी नहीं जा सकता कि नुकसान दोनों ओर बराबर रहा होगा।
प्रदेश विधानसभा सदन में विपक्ष के विरोध और हल्ले का मूंह ताेड़ जवाब देने वाले संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज पिछले एक साल से शहराें का विकास करवाने में कृतसंकल्प हैं। हालांकि जयराम सरकार के कार्यकाल के दाे साल तक उनके पास शिक्षा विभाग का दायित्व भी था, लेकिन पिछले साल मंत्रीमंडल विस्तार में उनसे शिक्षा विभाग लेकर उन्हें शहरी विकास विभाग थमा दिया गया। ऐसे में अब उनकी प्राथमिकता प्रदेश के शहराें काे विकसित करना है। फर्स्ट वर्डिक्ट के साथ विशेष बातचीत में सुरेश भारद्वाज कहते हैं कि स्मार्ट सिटी और AMRUT मिशन शहरीकरण में आने वाले चुनाैतियाें का सामना करने में सक्षम हैं। इसके साथ-साथ सुरेश भरद्वाज के साथ अन्य मसलाें पर हुई चर्चा के विशेष अंश... सवाल: बढ़ते शहरीकरण की चुनौतियां क्या हैं और उनके समाधान क्या हैं ? जवाब: हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी राज्य है और शहरीकरण के चलते रहने के लिए मकान, आने - जाने के लिए संसाधन (ट्रांसपोर्ट) व अन्य मूलभूत सुविधाएं जुटाना अन्य राज्यों से मुश्किल काम हैं। स्मार्ट सिटी और अटल मिशन फॉर रेजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन मिशन ( AMRUT ) के माध्यम से इन चुनौतियों से पार पाने के प्रयास किये जा रहे हैं। शिमला शहर का कायाकल्प हो रहा है तथा दूसरी स्मार्ट सिटी धर्मशाला पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा अन्य योजनाओं के माध्यम से मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है जिस से आने वाली चुनौतियों का सामना किया जा सके। देश में नरेंद्र मोदी और प्रदेश में जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा सरकारें इन चुनौतियों से निपटने के लिए काम कर रही है। सवाल: पूरे प्रदेश में ही निर्माण अव्यवस्थित सा है, उसे देखते हुए गावों से शहरों में बढ़ रही पलायन गतिविधियों को कैसे व्यवस्थित करेंगे ? जवाब: जैसे - जैसे शहरीकरण बढ़ रहा है गाँव से शहर की और पलायन बढ़ रहा हैं। सभी चाहते है शहर या शहर के नज़दीक उनकी रिहाइश हो। ऐसी परिस्थिति में अव्यवस्थित निर्माण हुआ है। अब प्रयास यह है कि भविष्य में ऐसा न हो। जिन जगहों पर शहरीकरण हो रहा है, वो प्लानिंग एरिया के अधीन लाये जाते हैं ताकि सुव्यस्थित निर्माण सुनिश्चित कराया जा सके। दूसरी बात, अब गाँवों में भी पहले से बेहतर सुविधाएं उपलब्ध है। ऐसे में असुंतलन को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। सवाल: बढ़ते शहरीकरण के बीच शहरी विकास विभाग का स्वरूप, शक्तियां और आम बजट में वित्तीय आवंटन क्या बढ़ेगा ? जवाब: बढ़ते शहरीकरण के साथ-साथ विभाग की ज़िम्मेदारियाँ भी बढ़ी है। जहाँ तक स्वरूप और शक्तियों की बात है, इनको बदलने या बढ़ाने से पहने इनका सही उपयोग करना प्राथमिकता है और हम इस दिशा में काम कर रहे है। 15 वे वित्तायोग में शहरी निकायों के लिए पर्याप्त बजट का प्रावधान है है। इसके अतिरिक्त स्मार्ट सिटी, AMRUT व अन्य योजनाओं में बजट का प्रावधान है। केंद्र सरकार की योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना प्राथमिकता रहेगी। सवाल: आगामी बजट में आप क्या क्या प्रस्ताव लाना चाहेंगे ? अब तक क्या नयी जरूरतें महसूस हुई हैं ? जवाब: आम जनता से, जन प्रतिनिधियों से फीडबैक लिया जा रहा है। आपके माध्यम से भी मैं अपील करता हूँ कि आम जनता अपने सुझाव दे। बजट में अभी समय है और लिए अभी चर्चा होनी है और लोकहित में कदम ज़रूर उठाये जाएंगे। जहाँ तक नयी ज़रूरतों की बात है, नए नगर निगम, नगर पंचायतों का गठन हुआ है, वहां भी लोगों को सुविधाएं मिले, योजनाएं सुचारू रूप से चले, इस पर ज़ोर होगा। सवाल: टीसीपी कानून को किस तरह और मजबूत करेंगे ? साडा एरिया टीसीपी का क्या प्रारूप और प्रक्रिया होगी ? जवाब: मैं समझता हूँ कानून को मज़बूत होने के साथ-साथ सरल भी होना चाहिए। यह तय है कि कानून को सख्ती से लागू किया जायेगा और यदि कोई जटिलताएं है तो उन्हें दूर किया जाएगा। मेरी प्राथमिकता एक पारदर्शी व्यवस्था बनाना है। इसके लिए तकनीक का सहारा लिया जायेगा और जनता को अपने काम लिए लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़े इस पर काम होगा। जहाँ तक साडा एरिया की बात है इसके लिए सरकार नए सिरे से विचार करेगी। एक प्लानिंग क्षेत्रों के लिए एक केबिनेट सब कमेटी भी बनी है। सरकार आम जनता को राहत देने के पक्ष में है। सवाल: शहरों में सबसे बड़ी समस्या कूड़ा कचरा प्रबंधन की है, इसका क्या समाधान होगा और इसके लिए क्या कर रहे हैं ? जवाब: कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश के 30 शहरों के 5,000 स्ट्रीट वेंडर्स को ठोस कचरा प्रबंधन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अतिरिक्त ठोस कचरा प्रबंधन से सम्बंधित एडवोकेसी और कम्युनिकेशन रणनीति भी तैयार कर की गयी है और सभी शहरी निकायों को इसका प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए है। नई तकनीकों का सहारा लेकर व्यवस्था को चाक चौबंद किया जा रहा है और आधुनिक कचरा संवर्धन प्लांट लगाने के प्रावधान किये जाएंगे। शहरों में कूड़ा उठाने की यंत्रीकृत व्यवस्था की गई है। काेराेना मुक्त के साथ-साथ कांग्रेस मुक्त राज्य बनेगा हिमाचल शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज का कहां है कि पूरी दुनिया जहां काेराेना महामारी से लड़ रही है, वहीं कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दल सिर्फ राजनीति कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश की यदि बात करें ताे कांग्रेस ने पिछले साल से सिर्फ राजनीति ही की है। ऐसे दाैर में सभी दलाें काे साथ मिलकर काम करना चाहिए। केंद्र की माेदी और प्रदेश की जयराम सरकार ने हिमाचल की जनता काे काेराेना से मुक्त करवाने के लिए पहले दिन से ही लड़ाई लड़ी। केंद्र से हर संभव सहायता मिल रही है। स्वास्थ्य उपकरण से लेकर ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, खाद्य सामग्री सहित हर क्षेत्र के लिए भरपूर सहयाेग मिल रहा है। यही नहीं, बल्कि वेक्सीनेशन में भी हिमाचल इस वक्त पूरे देश में पहले नंबर पर है। बावजूद इसके कांग्रेस वेक्सीनेशन पर भी राजनीति कर रही है। मैं साथ ही कहना चाहता हूं कि अगले साल हाेने वाले विधानसभा चुनावाें में कांग्रेस कहीं पर भी दिखाई नहीं देगी। यानी हिमाचल काेराेना मुक्त के साथ-साथ कांग्रेस मुक्त राज्य बनेगा। तीन नगर निगम और 6 नगर पंचायतों का किया गठन प्रदेश में नए नगर निगम बनाने की वर्षों पुरानी मांग राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के चलते पूरी होती नहीं दिख रही थी, विशेषकर सोलन और मंडी। सुरेश भारद्वाज के शहरी विकास मंत्री बनते ही इस मामला आगे बढ़ा और प्रदेश सरकार ने तीन नए नगर निगम और 6 नई नगर पंचायतों के गठन को हरी झंडी दे दी। सोलन, मंडी और पालमपुर को नगर निगम का दर्जा मिल चूका है। जबकि कंडाघाट, अंब, आनी, निरमंड, नेरवा और चिड़गांव को नगर पंचायत बनाया जा चूका है।
ये वो दौर था जब हिंदुस्तान के हर कोने में आजादी के लिए नारे लग रहे थे। क्रांतिकारी देश को आज़ाद करवाने के लिए हर संभव प्रत्यन कर रह थे। पुरे मुल्क में हजरत मोहनी का लिखा गया नारा इंकलाब जिंदाबाद क्रांति की आवाज बन चूका था। उसी दौर में हिमाचल की शांत पहाड़ियों में एक व्यक्ति पहाड़ी भाषा और लहजे में क्रांति की अलख जगा रहा था। वो गांव-गांव घूमकर अपने लिखे लोकगीतों व कविताओं से आम जन को आजादी के आंदोलन से जोड़ रहा था। नाम था कांशी राम, वहीँ काशी राम जिन्हे पंडित नेहरू ने बाद में पहाड़ी गाँधी का नाम दिया। वहीँ बाबा काशी राम जो 11 बार जेल गए और अपने जीवन के 9 साल सलाखों के पीछे काटे। वहीँ बाबा कशी राम जिन्हें सरोजनी नायडू ने बुलबुल-ए-पहाड़ कहकर बुलाया था। और वहीँ बाबा काशी राम जिन्होंने कसम खाई कि जब तक मुल्क आज़ाद नहीं हो जाता, वो काले कपड़े पहनेंगे। 15 अक्टूबर 1943 को अपनी आखिरी सांसें लेते हुए भी कांशी राम के बदन पर काले कपड़े थे और मरने के बाद उनका कफ़न भी काले कपड़े का ही था। ‘अंग्रेज सरकार दा टिघा पर ध्याड़ा’ यानी अंग्रेज सरकार का सूर्यास्त होने वाला है, जैसी कई कवितायेँ लिख पहाड़ी गाँधी ने ब्रिटिश हुकूमत से लोहा लिया था। मुल्क आज़ाद हो गया लेकिन ये विडम्बना का विषय है कि सियासतगारों ने पहाड़ी गाँधी को भुला दिया। बस कभी -कभार, खानापूर्ति भर के लिए पहाड़ी गाँधी को याद कर लिया जाता है। उनका पुश्तैनी मकान भी पूरी तरह ढहने की कगार पर है, मानो एक तेज बरसात का इन्तजार कर रहा हो। सियासतगार अपनी राजनीति चमकाने के लिए घोषणाएं करते है, वादे करते है पर उन्हें पूरा नहीं किया जाता। न वीरभद्र और न जयराम सरकार ने पूरा किया वादा 2017 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वीरभद्र सरकार को पहाड़ी गाँधी की याद आई और डाडासिबा में उनके पुश्तैनी घर को कांशीराम संग्रहालय बनाने का वादा किया गया। खेर चुनाव के बाद सरकार बदल गई और जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री बने। वर्ष 2018 में बाबा काशीराम की जयंती पर 11 जुलाई को जयराम ठाकुर ने भी काशीराम संग्राहलय बनाने की घोषणा की, किन्तु अब तक कुछ नहीं हुआ। परिवार ने कर दी रजिस्ट्री, पर अब तक ताला लटका है 24 जून 2020 को ये खबर आई थी की एसडीएम देहरा धनबीर ठाकुर के नेतृत्व में गठित टीम ने पध्याल गांव (गुरनवाड़ डाडासीबा) में पहुंचकर बाबा कांशीराम के घर की जमीन की निशानदेही की है। एसडीएम ने एसडीओ डाडासीबा को शीघ्र सर्वेक्षण कर एस्टीमेट बनाकर भेजने के निर्देश दिए है। जल्द पहाड़ी गांधी बाबा कांशी राम के पैतृक घर को स्मारक बनाया जाएगा। बाबा कांशीराम के पोते विनोद शर्मा बताते है इस बीच 17 दिसंबर 2020 को परिवार ने उनके पुश्तैनी मकान की रजिस्ट्री भी सम्बंधित महकमे के नाम कर दी ताकि संग्रहालय बन सके किन्तु अब तक ज़मीनी स्तर पर कोई कार्य नहीं हुआ है। संग्राहलय बनाना तो दूर कोई अधिकारी वहां आने का कष्ट भी नहीं करता। बाबा का परिवार अब खुद को ठगा सा महसूस करता है। इंदिरा गांधी ने जारी किया था डाक टिकट 23 अप्रैल 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कांगड़ा के ज्वालामुखी में बाबा कांशीराम पर एक डाक टिकट जारी किया था। तब सांसद नारायण चंद पराशर ने बाबा को सम्मान दिलवाने के लिए संसद में बहस की और तमाम सबूत तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को सौंपे। जिसके बाद 1984 में प्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालामुखी में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बाबा के नाम का डाक टिकट जारी किया। कई सालों से नहीं दिया गया पहाड़ी बाबा गांधी पुरस्कार बाबा कांशीराम के नाम पर हिमाचल प्रदेश से आने वाले कवियों और लेखकों को अवॉर्ड देने की भी शुरुआत हुई थी, पर पिछले कुछ सालों से ये अवार्ड नहीं दिया जा रहा है। देहरा से संबध रखने वाले पूर्व सांसद हेमराज सूद के प्रयासों से वर्ष 1981 में हिमाचल प्रदेश भाषा, कला एवं संस्कृति अकादमी हिमाचल प्रदेश ने पहाड़ी गांधी बाबा कांशी राम जयंती का आयोजन शुरू किया और पहाड़ी साहित्य के लिए बाबा कांशी राम पुरस्कार योजना शुरू की। पहाड़ी गजल को नई पहचान देने वाले डॉ. प्रेम भारद्वाज को उनके पहाड़ी काव्य ‘मौसम खराब है’ के लिए पहली बार यह पुरस्कार मिला था। अब बीते कुछ सालों से ये सम्मान नहीं दिया जा रहा है। पंजाब के मुख्यमंत्री ने बनवाया था स्कूल बाकी कांशीराम के नाम से उनके गांव में एक सरकारी स्कूल बना है, जो पंजाब के मुख्यमंत्री पूर्व प्रताप सिंह कैरों ने बनवाया था। दरअसल, हिमाचल बनने से पहले बाबा कांशीराम का गृह क्षेत्र पंजाब में आता था। इस स्कूल का उद्घाटन तत्कालीन शिक्षा मंत्री लाला जगत नारायण ने 1954 में सवैया राजाओं की पुरानी घुड़साल में किया था। 508 में से 64 कविताएं छपी हैं, बाकी संदूकों में धूल खा रही राष्ट्रीय स्तर पर चमकेगा पहाड़ी के रचनाकार का घर पहाड़ी भाषा में क्रांति का बिगुल फूंकने वाले बाबा कांशीराम ने ‘अंग्रेजी सरकारा दे ढिगा पर ध्याड़े’, ‘समाज नी रोया’, ‘निक्के -निक्के माहणुआ जो दुख बड़ा भारी’, ‘उजड़ी कांगड़े देस जाणा’, ‘पहाड़ी सरगम’, ‘कुनाळे दी कहाणी’ ‘क्रांति नाने दी कहाणी कांसी दी जुबानी’ सहित कई क्रन्तिकारी रचनाओं से लोगों को आजादी के जूनून से लबरेज कर दिया था। उनकी प्रसिद्ध कविता ‘अंग्रेज सरकार दा टिघा पर ध्याड़ा’ (अंग्रेज सरकार का सूर्यास्त होने वाला है) के लिए अंग्रेज सरकार ने उन्हें गिरफ्तार किया था मगर राजद्रोह का मामला जब साबित नहीं हुआ तो रिहा कर दिया गया। अपनी क्रांतिकारी कविताओं के चलते उन्हें 1930 से 1942 के बीच 9 बार जेल जाना पड़ा। हैरत की बात ये है कि रिकार्ड्स के मुताबिक बाब कांशी राम ने 508 कविताएं लिखी जिनमें से सिर्फ 64 कविताएं ही छपी हैं, बाकी संदूकों में पड़ी धूल खा रही हैं। काम के गए थे लाहौर पर क्रांतिकारी बन गए 11 जुलाई 1882 को लखनू राम और रेवती देवी के घर पैदा हुए कांशीराम की शादी 7 साल की उम्र में हो गई थी। उस वक्त पत्नी सरस्वती की उम्र महज 5 साल थी। जब कांशीराम 11 साल के ही हुए तो उनके पिता की मौत हो गई। परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके सिर पर आ गई थी। काम की तलाश में वो लाहौर चले गए। यहां कांशी ने काम ढूंढा, मगर उस वक्त आजादी का आंदोलन तेज हो चुका था और कांशीराम के दिल दिमाग में आजादी के नारे गूंजने लगे। यहां वो दूसरे स्वतंत्रता सेनानियों से मिले इनमें लाला हरदयाल, भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह और मौलवी बरक़त अली शामिल थे। संगीत और साहित्य के शौकीन कांशीराम की मुलाकात यहां उस वक्त के मशहूर देश भक्ति गीत ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ लिखने वाले सूफी अंबा प्रसाद और लाल चंद ‘फलक’ से भी हुई, जिसके बाद कांशीराम का पूरा ध्यान आजादी का लड़ाई में रम गया। साल 1905 में कांगड़ा घाटी में आये भूकंप में करीब 20 हजार लोगों की जान गई और 50,000 मवेशी मारे गए। तब लाला लाजपत राय की कांग्रेस कार्यकर्ताओं की एक टीम लाहौर से कांगड़ा पहुंची जिसमें बाबा कांशीराम भी शामिल थे। उनकी ‘उजड़ी कांगड़े देश जाना’ कविता आज भी सुनी जाती है। 1919 में जब जालियांवाला बाग हत्याकांड हुआ, बाबा कांशीराम उस वक्त अमृतसर में थे। इस क्रूर घटना ने बाबा कांशीराम को बहुत आहत किया। वो कभी ढोलक तो कभी मंजीरा लेकर गांव-गांव जाते और अपने देशभक्ति के गाने और कविताएं गाते थे, पर जो काम उन्होंने काम किया उस हिसाब से उन्हें सम्मान नहीं मिल पाया। बाबा कांशी राम ने अपनी ज़मीन गिरवी रख दी थी ताकि घर का पालन पोषण हो सके क्यों कि वे कमाते नहीं थे, उनका पूरा समय स्वतंत्र भारत के लिए संघर्ष में व्यतीत होता था। उनके पास एक मकान, एक गौशाला और दो दुकानें थी जो वे गिरवी रख चुके थे। शुरूआती दौर में उन्होंने अपने ताया के पास भी नौकरी की। मगर आज़ादी के लिए जूनून ने सब कुछ छुड़वा दिया। काले कपड़े पहनने का लिया प्रण, नेहरू ने दिया पहाड़ी गांधी का नाम 1931 में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू को फांसी मिलने के बाद उन्होंने प्रण लिया कि जब तक मुल्क आज़ाद नहीं हो जाता, तब तक वो काले कपड़े पहनेंगे। उन्हें ‘स्याहपोश जरनैल’ भी कहा गया। उनकी क्रन्तिकारी कविताओं के लिए अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें कई बार पीटा, कई यातनाएं दी मगर वो लिखते रहे। वर्ष 1937 में जवाहर लाल नेहरू ने होशियारपुर के गद्दीवाला में एक सभा को संबोधित करते हुए बाबा कांशीराम को पहाड़ी गांधी कहकर संबोधित किया था, जिसके बाद से कांशी राम को पहाड़ी गांधी के नाम से ही जाना गया। अब भी रखे है बाबा का चरखा और चारपाई बाबा कांशी राम के पैतृक घर को स्मारक बनाने की मांग काफी पुरानी है। उनके पुराने घर में अब भी उनकी कई पुरानी चीज़ें रखी है, जैसे उनका चरखा, उस समय की चारपाई, खपरैल और उनके द्वारा इस्तेमाल किया अन्य सामान। इन धरोहरों को संजो के रखना बेहद महत्वपूर्ण है।
1931 में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू को फांसी मिलने के बाद उन्होंने प्रण लिया कि जब तक मुल्क आज़ाद नहीं हो जाता, तब तक वो काले कपड़े पहनेंगे। उन्हें ‘स्याहपोश जरनैल’ भी कहा गया। उनकी क्रन्तिकारी कविताओं के लिए अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें कई बार पीटा, कई यातनाएं दी मगर वो लिखते रहे। वर्ष 1937 में जवाहर लाल नेहरू ने होशियारपुर के गद्दीवाला में एक सभा को संबोधित करते हुए बाबा कांशीराम को पहाड़ी गांधी कहकर संबोधित किया था, जिसके बाद से कांशी राम को पहाड़ी गांधी के नाम से ही जाना गया। अब भी रखे है बाबा का चरखा और चारपाई बाबा कांशी राम के पैतृक घर को स्मारक बनाने की मांग काफी पुरानी है। उनके पुराने घर में अब भी उनकी कई पुरानी चीज़ें रखी है, जैसे उनका चरखा, उस समय की चारपाई, खपरैल और उनके द्वारा इस्तेमाल किया अन्य सामान। इन धरोहरों को संजो के रखना बेहद महत्वपूर्ण है।
कोरोना महामारी के साथ-साथ अब लोगों को महंगाई की मार भी झेलनी पड़ेगी। जून से लोगों को डिपुओं में 57 रुपये प्रतिलीटर सरसों का तेल महंगा मिलेगा। हिमाचल प्रदेश सरकार ने हरियाणा की सरकारी एजेंसी हैफेड के साथ एक महीने के लिए सरसों तेल का शार्ट टेंडर कर सप्लाई के लिए ऑर्डर भी जारी कर दिया है। 27 मई से एजेंसी सप्लाई भेजना शुरू कर देगी। प्रदेश के एपीएल राशनकार्ड उपभोक्ताओं को डिपुओं में अभी 103 रुपये प्रतिलीटर सरसों तेल दिया जा रहा है। अगले महीने 160 रुपये प्रतिलीटर चुकाने होंगे, जबकि बीपीएल राशनकार्ड धारकों को 155 रुपये चुकाने होंगे। कोरोना के चलते डिपुओं में दालें भी 5 से 15 रुपये तक महंगी हुई है। चना दाल बीपीएल के लिए 45 रुपये प्रति किलो, एपीएल के लिए 55 और आयकरदाता को 76 रुपये प्रतिकिलो मिलेगी। वहीं, मलका दाल बीपीएल के लिए 60 रुपये, एपीएल के लिए 70 और आयकरदाता को 88 रुपये प्रतिकिलो मिलेगी। दाम बढ़ने का कारण मालभाड़ा और लेबर की दिहाड़ी में इजाफा होना है।
हिमाचल कैबिनेट की बैठक आज शिमला स्थित राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ में सुबह 10:30 बजे शुरू होगी। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर करेंगे। बैठक में 26 मई तक लागू कोरोना कर्फ्यू को लेकर फैसला होना है। इसमें कर्फ्यू की अवधि को कोरोना की वर्तमान स्तिथि को देखते हुए 5 या 10 जून तक बढ़ाया जा सकता है। राज्य में अभी कोरोना की संक्रमण दर 20 फीसदी से अधिक है। इससे भी ज़्यादा चिंताजनक कोरोना से रोजाना मरने वालों का आंकड़ा है, जो रुकने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे में कर्फ्यू में ढील की संभावनाएं कम होती नजर नहीं आ रही है। वहीं सूत्रों की मानें तो कोरोना कर्फ़्यु को 5 जून तक प्रदेश में बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा कोरोना कर्फ्यू के बीच दुकानें खोलने के मामले में भी कुछ निर्णय हो सकते हैं। आवश्यक वस्तुओं के अलावा अब अन्य दुकानों को भी खोलने और इन्हें खोलने की अवधि में बदलाव के बारे में कैबिनेट बैठक में चर्चा होगी। व्यापारी वर्ग लगातार सरकार पर दुकानें खोलने के लिए दबाव बना रहे हैं। कैबिनेट बैठक में कई और अहम फैसले होंगे। कोरोना से बेहतरीन तरीके से योजना बनाकर लड़ाई लड़ रहीं पंचायतों को सम्मानित करने की योजना की भी घोषणा हो सकती है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शनिवार को कोविड नियंत्रण के लिए बेहतरीन काम कर रही ग्राम पंचायतों को सम्मानित करने और एक्टिव केस फाइंडिंग जैसे किसी अभियान पर विचार करने की बात की थी। इस बारे में एक-दो दिन में योजना तय करने के बारे में सीएम ने कहा था। हो सकता है कि कैबिनेट बैठक में इस पर कोई निर्णय लिया जाए।
असम-नगालैंड की सीमा के पास पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में रविवार को दिमासा नेशनल लिबरेशन आर्मी के 8 उग्रवादी मारे गए हैं। असम पुलिस ने बताया कि पश्चिम कार्बी आंगलोंग के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रकाश सोनोवाल के नेतृत्व में पुलिस अधिकारियों और असम राइफल्स के जवानों की टीम ने एक खुफिया सूचना के आधार पर जिले में एक संयुक्त अभियान चलाया था। इस दौरान सुरक्षा बलों और उग्रवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में प्रतिबंधित संगठन के 8 सदस्य मिचिबैलुंग इलाके में मारे गए। उन्होंने बताया कि मारे गए उग्रवादियों के पास से 4 एके-47 राइफल और गोला-बारूद भी बरामद किया गया है। फ़िलहाल मिचिबैलुंग में तलाशी अभियान अब भी जारी है।
एक ओर जहाँ देश कोरोना महामारी से जंग लड़ रहा है, ऐसे में आए दिन सोशल मीडिया में ऐसे वीडिओ सामने आ रहे है जो बेहद निंदनीय है। ऐसा ही एक वीडिओ छत्तीसगढ़ से भी सामने आया है। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने सूरजपुर के कलेक्टर रणबीर शर्मा को हटाने के निर्देश दिए हैं। हाल ही में उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था जिसमें वह एक युवक के साथ बदसलूकी करते नजर आए थे। उस वीडिओ में वह लॉकडाउन के दौरान बाहर निकले एक युवक के मोबाइल को तोड़ते और फिर उसे चाटा मारते दिख रहे थे। वीडियो वायरल होने के बाद रणबीर शर्मा की सोशल मीडिया पर काफी निंदा हो रही है। आईएएस एसोसिएशन ने भी रणबीर शर्मा के व्यवहार की निंदा की है। एसोसिएशन का कहना है कि उनका व्यवहार बुनियादी शिष्टाचार के खिलाफ है। उधर, सीएम बघेल ने ट्विटर के जरिए कहा कि ''सोशल मीडिया के माध्यम से सूरजपुर कलेक्टर रणबीर शर्मा द्वारा एक नवयुवक से दुर्व्यवहार का मामला मेरे संज्ञान में आया है। यह बेहद दुखद और निंदनीय है। छत्तीसगढ़ में इस तरह का कोई कृत्य कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कलेक्टर रणबीर शर्मा को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए हैं। किसी भी अधिकारी का शासकीय जीवन में इस तरह का आचरण स्वीकार्य नहीं है। इस घटना से में क्षुब्ध हूँ नवयुवक व उनके परिजनों से खेद व्यक्त करता हूँ।" कोरोना काल में जहाँ लोग मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान है ऐसे में प्रशासन का इस तरह का व्यवहार बेहद निंदनीय है।
छत्रसाल स्टेडियम में दो गुटों में लड़ाई में 23 साल के पहलवान सागर राणा की हत्या के बाद फरार चल रहे ओलंपिक विजेता सुशील कुमार को आज गिरफ्तार कर लिया गया है। सुशील कुमार के ऊपर पुलिस ने एक लाख का इनाम रखा था। सुशील के अलावा उनके साथी अजय को भी अरेस्ट किया गया है। दिल्ली के मुंडका इलाके से सुशील कुमार और अजय को गिरफ्तार किया गया है। दोनों कार छोड़कर स्कूटी पर सवार होकर किसी से मिलने जा रहे थे। बता दें कि एक हत्या मामले में आरोपी पहलवान सुशील कुमार को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस ने पंजाब के भटिंडा, मोहाली समेत कई राज्यों में छापेमारी की है। दिल्ली में भी कई ठिकानों पर दिल्ली पुलिस ने छापेमारी की लेकिन सुशील कुमार हाथ नहीं आया। पहलवान सुशील कुमार अलग नंम्बरों से अपने करीबियों के संपर्क में था। दिल्ली पुलिस की कई टीमें पहलवान सुशील कुमार की तलाश में लगी हुईं थीं। लेकिन आखिरकार पुलिस की स्पेशल टीम ने उसे ढूंढ लिया। हालाँकि पुलिस ने सुशिल को ढूंढने के लिए 1 लाख रुपए का इनाम भी रखा था। गौरतलब है कि सुशील कुमार पर दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में 23 वर्षीय पहलवान सागर राणा की हत्या का आरोप है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, लॉकडाउन के बाद भी पहलवान सुशील कुमार, लारेंस विश्नोई और काला जखेड़ी गैंग के बदमाशों को साथ में लेकर स्टेडियम में दाखिल हुए। जहां एक रेसलरों के दूसरे पक्ष से उनकी मारपीट हुई, जिसमें एक रेसलर सागर राणा की मौत हो गई थी।
कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को ब्लैक फंगस को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। सोनिया गांधी ने पत्र लिखकर पीएम मोदी से अनुरोध किया कि म्यूकोर मायकोसिस यानी ब्लैक फंगस का कहर बढ़ता जा रहा है, ऐसे में ब्लैक फंगस से निपटने के लिए पर्याप्त दवाओं का इंतजाम किया जाए। सोनिया गांधी ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में लिखा, केंद्र सरकार को ब्लैक फंगस यानी म्यूकोर मायकोसिस को महामारी घोषित करना चाहिए। इस बीमारी की चपेट में आने वाले सभी मरीजों का निशुल्क इलाज किया जाना चाहिए। कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष ने पीएम से अनुरोध किया कि इस बीमारी से निपटने के लिए एम्फोटेरिसिन-बी बेहद आवश्यक है। फिलहाल बाजार में इसकी भारी कमी है। तत्काल कार्रवाई कर दवाओं का इंतजाम किया जाए। साथ ही उन्होंने म्यूकर मायकोसिस आयुष्मान भारत और अन्य स्वास्थ्य बीमा में कवर किए जाने का अनुरोध किया है।
कोरोना संक्रमण की लहर के चलते देश में पिछले दिनों चक्रवात ताउते ने भी खूब कहर बरपाया। चक्रवात 'ताउते' की चपेट में आने के छह दिन बाद भी बार्ज पी305 के कई कर्मी अब भी लापता हैं। जिनका पता लगाने के लिए नौसेना ने विशेष गोताखोर टीमों को तैनात कर दिया है। सोमवार को अरब सागर में बार्ज पी305 के डूबने से मरने वालों की संख्या शुक्रवार को 61 तक पहुंच गई। जेजे अस्पताल से पोस्टमार्टम और अन्य औपचारिकताओं के बाद मृतक के परिजनों को 61 में से 26 शव सौंपे दिए गए है। कई शव ऐसे हैं जो काफी सड़ चुके हैं और उनकी पहचान करना मुश्किल है। पुलिस शवों से मिलान करने के लिए परिजनों के डीएनए सैंपलिंग की व्यवस्था कर रही है। पी 305 बार्ज पर सवार 261 कर्मियों में से अब तक 186 को बचाया जा चुका है। वाराप्रदा में सवार 13 लोगों में से दो को बचा लिया गया है। गौरतलब है कि अरब सागर में बार्ज हादसे के बाद बार्ज 305 चलाने वाली कंपनी सवालों के घेरे में है। बार्ज के इंजीनियर मुस्तफिजूर रहमान शेख की शिकायत पर बार्ज के कप्तान राकेश बल्लव पर एफआईआर दर्ज की गई। मुंबई पुलिस ने कहा है कि वह इस बात की जांच करेगी कि चक्रवात ‘ताउते’ की चेतावनी के बावजूद बजरा अशांत क्षेत्र में क्यों रुका रहा। पुलिस ने बार्ज पर सवार कर्मियों की मौत के मामले में भी दुर्घटनावश हुई मौत का मामला दर्ज किया है।
पुणे की वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुरेश जाधव ने देश के कई राज्यों में वैक्सीन की किल्लत की समस्या समाने आने के बाद एक ब्यान जारी किया है। उनका कहना है कि सरकार ने वैक्सीनेशन के विस्तार के दौरान वैक्सीन के उपलब्ध स्टॉक और विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइंस को ध्यान में नहीं रखा। जाधव ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत सरकार को WHO की गाइडलाइंस को ध्यान में रखकर उसके अनुसार ही वैक्सीनेशन में लोगों को प्राथमकिता देनी चाहिए थी। शुरुआत में 300 मिलियन लोगों को वैक्सीन दी जानी थी, जिसके लिए 600 मिलियन डोज की जरूरत थी। उन्होंने आगे कहा कि हम टारगेट तक पहुंचते इससे पहले ही सरकार ने 45 साल के ऊपर के सभी लोगों को वैक्सीन के साथ- साथ 18 साल से ऊपर की उम्र वालों को वैक्सीन की डोज़ देने की घोषणा कर दी। जबकि सरकार इस बात से परिचित थी कि हमारे पास वैक्सीन का स्टॉक नहीं है। जाधव ने कहा कि वैक्सीनेशन जरूरी है लेकिन वैक्सीन की डोज मिलने के बाद भी लोग संक्रमित हो रहे हैं। इसलिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। वैक्सीनेशन के बाद कोरोना गाइडलाइंस के पालन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वैरिएंट के डबल म्यूटेंट को न्यूट्रलाइज कर दिया गया है। फिर भी वैरिएंट वैक्सीनेशन में मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि कौन सी वैक्सीन प्रभावी है और कौन सी नहीं ये कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी। सीडीसी और एनआईएच डेटा के मुताबिक जो भी वैक्सीन उपलब्ध है उसकी डोज ली जानी चाहिए।
कोविड के प्रसार को रोकने के लिए कनाडा ने भारत से आने वाली सभी पैसेंजर फ्लाइट्स पर प्रतिबंध 30 दिन और बढ़ा दिया है। अब ये प्रतिबंध 21 जून तक लागू रहेगा। इससे पहले ये प्रतिबंध 21 मई तक के लिए लगाया गया था। हालांकि यह बैन कार्गो फ्लाइट्स पर लागू नहीं होगा ताकि वैक्सीन, पीपीई किट और अन्य आवश्यक सामानों की निरंतर शिपमेंट सुनिश्चित की जा सके। कनाडा के परिवहन मंत्री उमर अल्गबरा ने इसकी घोषणा की है। परिवहन मंत्री उमर अल्गबरा ने कहा कि कनाडा ने भारत और पाकिस्तान से यात्री उड़ानों पर अपने प्रतिबंध को 30 दिनों के लिए बढ़ाकर 21 जून तक कर दिया है। इस साल 22 अप्रैल को पहली बार प्रतिबंध की घोषणा के बाद से आने वाले एयरलाइन यात्रियों के बीच कोविड संक्रमण में कमी देखी गई है। कई दूसरे देश ने भी लगा चुके प्रतिबंध कनाडा की तरह कई दूसरे देश भी ऐसी घोषणा कर चुके हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने भारत से सभी फ्लाइट्स को सस्पेंड कर रखा है। ब्रिटेन में भी भारत से यात्रियों की एंट्री बंद है। बता दें कि कनाडा संक्रमण की तीसरी लहर का सामना कर रहा है। कनाडा में अब तक 13 लाख 50 हजार से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं।जिसमें 25,111 लोगों की मौत हुई हैं।
कोरोना संक्रमण की समय पर जांच ही संक्रमण से लड़ने में कारगर हैं। बढ़ते आकड़ों के बीच लोगों को कोरोना जांच कराने में दिक्कतें आ रहीं हैं। कोरोना का संक्रमण है या नहीं इसकी जांच के लिए अब लोगों को बार-बार लैब जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि अब घर बैठे ही कोरोना की जांच खुद कर सकते हैं। इस समस्या से बड़ी निजात देते हुए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने बीते बुधवार को घर में ही कोविड जांच के लिए ‘कोविसेल्फ’ किट को मंजूरी दे दी है। इस जांच किट के जरिये अब कोई भी घर बैठे ही कोरोना संक्रमण की जांच कर सकता है। जानकारी के मुताबिक, कोविसेल्फ नाम की यह टेस्ट किट एक रैपिड एंटीजेन टेस्ट (आरएटी) किट है। बहुत जल्द कोविसेल्फ किट देश की 7 लाख से ज्यादा दवा दुकानों पर मिलेगी । आईसीएमआर ने कोविसेल्फ को लेकर एक एडवाईजरी भी जारी की है। इसमें किट को इस्तेमाल करने से लेकर तमाम दिशा निर्देश मौजूद हैं, जिसे आपको जानना बेहद जरूरी भी है। आईसीएमआर के दिशा निर्देशों के मुताबिक, घर पर कोरोना जांच किट कोविसेल्फ किट का इस्तेमाल उन्हीं लोगों को करना चाहिए, जिनमें कोविड-19 के लक्षण हैं या फिर वे किसी लैब द्वारा कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के संपर्क में आए हों। इस जांच किट इस्तेमाल बार-बार और बिना सोचे समझे न करें।आईसीएमआर ने कहा कि घर पर जांच के लिए किट में दी गई गाइडलाइंस को ध्यानपूर्वक और आवश्यक रूप से पढ़ें, उसके बाद ही जांच करें। मोबाइल एप की सहायता लें : सरकार की ओर से कोविसेल्फ मोबाइल एप गूगल प्ले स्टोर और एपल एप स्टोर पर मौजूद हैं। आईसीएमआर के मुताबिक घर पर रैपिड एंटीजन टेस्ट एक मोबाइल एप के जरिए संपन्न होगा। एक कंपनी एप को डेवलप कर दिया है, जबकि अन्य तीन कंपनियां भी इस पर काम कर रही हैं। पहले आपको किसी दवा दुकान से टेस्ट किट खरीदना होगा। उसके बाद मोबाइल एप को डाउनलोड करना होगा। फिर टेस्ट करना होगा और टेस्ट की फोटो (किट सहित) इस एप पर अपलोड करना होगा। आपका डेटा रहेगा सुरिक्षत : आपके मोबाइल फोन पर मौजूद ऐप का डाटा एक सुरक्षित सर्वर पर रहेगा, जो आईसीएमआर की कोविड-19 टेस्टिंग पोर्टल से जुड़ा है, जहां सभी डाटा को स्टोर किया जाएगा। एडवाइजरी में कहा गया है कि मरीज की जानकारी की पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी। जांच में पॉजिटिव आने पर क्या करें ? आईसीएमआर के दिशानिर्देशों के मुताबिक, कोविसेल्फ टेस्ट किट की जांच में जो लोग पॉजिटिव पाए जाते हैं, उन्हें वास्तव में कोरोना पॉजिटिव ही समझा जाए। ऐसे में उन्हें दोबारा टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं है। वहीं पॉजिटिव आने वाले सभी लोगों को होम आइसोलेशन में रहने और आईसीएमआर एवं स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइंस के तहत जारी कोरोना नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। वहीं ऐसे लोग जिनमें कोरोना के लक्षण हैं और वे कोविसेल्फ किट की जांच में निगेटिव आए हैं, उन्हें आरटी-पीसीआर कराना चाहिए। ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि माना जाता है कि कम वायरस लोड के कारण रैपिड एंटीजेन टेस्टिंग के जरिए कुछ मामलों में इसकी पुष्टि नहीं हो पाती है।
उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र समेत देश भर के कई राज्यों में ब्लैक फंगस (म्यूकोर्मिकोसिस) का कहर बढ़ता जा रहा है। इन राज्यों में ब्लैक फंगस के केस काफी तेजी से बढ़ रहे है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे महामारी रोग अधिनियम 1897 के तहत म्यूकोर्मिकोसिस को महामारी घोषित करने की अपील की है। साथ ही इससे निपटने के लिए सरकारी और निजी अस्पतालों में सभी सुविधाएं मजबूत करने की अपील की है। तेलंगाना और राजस्थान ने तो इसे महामारी घोषित कर दिया है।
चक्रवाती तूफान ताउ-ते की चपेट में आए जहाज बार्ज पी-305 से अब तक 37 शव बरामद किए गए हैं। अभी भी भारतीय नौसेना और इंडियन कोस्ट गार्ड की टीम लापता 36 लोगों की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। बार्ज पी-305 (Barge P-305) पर सवार कुल 261 लोगों में से 188 इंडियन नेवी और इंडियन कोस्ट गार्ड ने रेस्क्यू कर लिया है।अभी भी तलाश और बचाव अभियान अभी जारी है। लोगों को तट तक सुरक्षित लाने की उम्मीद अभी भी बरकरार है। सर्च एंड रेस्क्यू ओपेराशन में आईएनएस कोच्ची और आईएनएस कोलकाता के साथ इंडियन नेवी के बीस, बेतवा और तेग नवल शिप्स भी जुट गए हैं। बार्ज P305 मुंबई से 35 नॉटिकल माइल्स की दूरी पर डूबा है। सर्च और रेस्क्यू के काम मे P8I और नेवल हेलीकॉप्टर्स की भी मदद ली जा रही है। इसके इलावा बार्ज P-305 जहाज से 188 के अलावा गाल कन्स्ट्रक्टर जहाज में फंसे सभी 137 लोगों को इंडियन नेवी और इंडियन कोस्ट गार्ड ने रेस्क्यू कर लिया है। बार्ज SS3 के 196 लोग और ड्रिल ऑइल सागर भूषण के 101 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है।
अरब सागर से सटे तटीय इलाकों में तबाही मचाने के बाद चक्रवाती तूफान ताउते का असर अब मैदानी इलाकों में भी दिखेगा। मौसम विभाग के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में भी बुधवार और वीरवार को तेज हवाओं के साथ भारी बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने दो दिन के लिए अलर्ट जारी किया है। केंद्र के निदेशक डॉ. मनमोहन सिंह ने बताया कि ताउते के कारण प्रदेश के मौसम में आ रहे बदलाव के कारण दो दिन मौसम खराब रहेगा। हालांकि 23 मई तक पूरे प्रदेश में बादल बरसने का पूर्वानुमान है। 24 मई को मौसम साफ रहने की संभावना जताई गई है। मंगलवार को राजधानी शिमला सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों में हल्के बादल छाए रहने के साथ धूप खिली। मंगलवार को प्रदेश के अधिकतम तापमान में सामान्य से चार डिग्री की कमी दर्ज की गई है। मंगलवार को ऊना में अधिकतम तापमान 35.8, कांगड़ा में 34.6, बिलासपुर में 34.1, चंबा में 33.0, हमीरपुर में 32.8, भुंतर में 31.3, सुंदरनगर में 30.8, नाहन में 29.8, धर्मशाला में 27.2, सोलन में 26.7, शिमला में 22.6, डलहौजी में 21.1, कल्पा में 20.6 और केलांग में 16.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।
अरब सागर में उठे चक्रवाती तूफान ताउते के बाद समुद्र में फंसे बार्ज P-305 जहाज का रेस्क्यू मिशन जारी है। जहाज पर मौजूद 261 लोगों में से 184 को बचा लिया गया है, हालांकि अभी भी 76 लोग लापता है। बार्ज P-305 जहाज से 184 के अलावा GAL Constructor जहाज में फंसे सभी 137 लोगों को इंडियन नेवी और इंडियन कोस्ट गार्ड ने रेस्क्यू कर लिया है। बार्ज SS3 के 196 लोग और ड्रिल ऑइल सागर भूषण के 101 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। बार्ज P-305 पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी बार्ज P-305 जहाज पर अभी भी 76 लोग फंसे हुए हैं और सर्च एंड रेस्क्यू ओपेराशन में INS Kochi और INS Kolkata के साथ इंडियन नेवी के बीस, बेटवा और तेग नवल शिप्स भी जुट गए हैं। बार्ज P305 मुंबई से 35 नॉटिकल माइल्स की दूरी पर डूबा है। सर्च और रेस्क्यू के काम मे P8I और नेवल हेलीकॉप्टर्स की भी मदद ली जा रही है।
कोरोना महामारी को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बयान पर बवाल हो गया है। सिंगापुर ने केजरीवाल के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सिंगापुर सरकार ने इस संबंध में बुधवार को भारतीय राजदूत को बुलाकर अपनी नाराजगी जताई। सिंगापुर ने कहा कि एक मुख्यमंत्री का बगैर तथ्यों के इस तरह की बयानबाजी निराशाजनक है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट के माध्यम से यह जानकारी प्रदान की है। उन्होंने बताया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा कोरोना के नए वैरिएंट संबंधी बयान से सिंगापुर नाराज है। वहां की सरकार ने बुधवार को सिंगापुर में भारतीय उच्चायुक्त पी कुमारन के समक्ष अपनी नाराजगी व्यक्त की। हालांकि, भारत ने सिंगापुर को बता दिया है कि केजरीवाल की टिप्पणी उनकी व्यक्तिगत टिप्पणी थी और यह भारत सरकार की सोच नहीं है। वहीं, विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने भी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बयान पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा है कि बिना सही जानकारी के इस तरह के बयान सिंगापुर और भारत के मजबूत रिश्तों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। विदेश मंत्री ने कहा, 'कोरोना से जंग में सिंगापुर और भारत मजबूत साझेदार हैं। मुश्किल वक्त में जिस तरह से सिंगापुर ने भारत की मदद की है, वो दोनों के मधुर संबंधों को दर्शाता है'।इससे पहले, केजरीवाल के बयान पर भारत में सिंगापुर के उच्चायुक्त ने प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था, ‘इस बात में कोई सच्चाई नहीं है कि सिंगापुर में कोविड का नया स्ट्रेन मिला है। सिंगापुर में फाइलोजेनेटिक टेस्ट में मिला B.1.617.2 वैरिएंट बच्चों सहित कोरोना के ज्यादातर मामलों में प्रबल है’। उच्चायुक्त के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए गए इस ट्वीट के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री फिलहाल खामोश हैं। बता दें कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को ट्वीट कर लिखा था कि सिंगापुर में आया कोरोना का नया रूप बच्चों के लिए बेहद ख़तरनाक बताया जा रहा है, भारत में ये तीसरी लहर के रूप में आ सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की थी कि सिंगापुर के साथ हवाई सेवाएं तत्काल प्रभाव से रद्द की जाएं और बच्चों के लिए भी वैक्सीन के विकल्पों पर प्राथमिकता के आधार पर काम किया जाए।
हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और ओलावृष्टि के अलर्ट के बीच मौसम बिगड़ना शुरू हो गया है। राजधानी शिमला समेत प्रदेश के कई अन्य भागों में सुबह से बादल छाए हुए हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने आज प्रदेश के मैदानी और मध्य पर्वतीय जिलों में मंगलवार को अंधड़ का येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं,19 और 20 मई को पूरे प्रदेश में भारी बारिश, अंधड़ और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी हुआ है। 23 मई तक पूरे प्रदेश में मौसम खराब बना रहने का पूर्वानुमान है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से मौसम में यह बदलाव आ रहा है। मौसम विभाग ने ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन, सिरमौर और किन्नौर जिले के लिए येलो-ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। उच्च पर्वतीय जिलों किन्नौर व लाहौल-स्पीति में कहीं-कहीं बर्फबारी होने की संभावना भी है।
हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म और हत्या मामले में दोषी की सजा पर सुनवाई अब 28 मई तक टल गई है। शिमला जिले के कोटखाई में साल 2017 में हुए गुड़िया दुष्कर्म व हत्याकांड में सीबीआई की ओर से पेश चालान में चरानी अनिल उर्फ नीलू को जिला शिमला की विशेष अदालत ने 28 अप्रैल को दोषी करार दिया था, जिस पर दोषी को मंगलवार को सजा को लेकर सुनवाई होनी तय थी। लेकिन कोरोना कर्फ्यू की बंदिशों के चलते शिमला की एक विशेष अदालत में अब सजा को लेकर इस मामले में 28 मई की तारीख तय की गई है। गौरतलब है कि जिला शिमला के कोटखाई की एक छात्रा 4 जुलाई, 2017 को लापता हो गई थी। 6 जुलाई को कोटखाई के तांदी के जंगल में पीड़िता का शव मिला। जांच में पाया गया कि छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी।


















































