फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा आज प्रस्तुत किए गए बजट को ऐतिहासिक और आम आदमी का बजट बताया है। उन्होंनेे कहा कि प्रदेश सरकार के इस बजट में हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। बजट व्यावहारिक है और सभी वर्गों को इस बजट से लाभ होगा। सुरेश भारद्वाज ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान शहरी युवाओं को रोजगार प्रदान करने के लिए वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री शहरी आजीविका गारंटी योजना आरम्भ की गई थी। वित्तीय वर्ष 2022-23 में इस योजना पर 5 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान बजट सत्र में शहरी बेरोजगार युवाओं को रोजगार की गारंटी, पात्रता एवं अन्य शर्तों से संबंधित, विधेयक विधानसभा में पेश किया जाएगा। हिमाचल देश का पहला राज्य होगा, जहां मनरेगा कि तर्ज पर शहरी क्षेत्रों में आजीविका के लिए कानून बनाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उन्नत शहरों के सपने को पूरा करने में यह योजना जो कि जल्दी कानून का रूप लेने वाली है, कारगर सिद्ध होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री का वृद्धावस्था पेंशन की आयु सीमा 60 वर्ष करने पर आभार व्यक्त किया। पहले यह आयु सीमा 70 वर्ष थी। वित्तीय वर्ष 2022-23 में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 40000 अतिरिक्त पात्र लोगों को पेंशन प्रदान की जाएगी। ऐसे सभी वर्ग जो वर्तमान में 850 रुपये प्रतिमाह की पेंशन प्राप्त कर रहे हैं, की पेंशन बढ़ाकर 1000 रुपए की जाएगी। दिव्यांगजनों व विधवाओं को दी जा रही पेंशन को 1000 रुपए से बढ़ाकर 1500 रुपए प्रतिमाह किया जाएगा। 70 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनों की पेंशन को 1500 रुपए से बढ़ाकर 1700 रुपए प्रतिमाह किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2022-23 में सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर 1300 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे।
उज्ज्वला और गृहिणी सुविधा योजना के तहत अब 3 निशुल्क सिलेंडर उपलब्ध करवाए जाएंगे फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए एक बेहतरीन बजट प्रस्तुत किया है। यह बजट शानदार एवं जानदार है, जिसमें हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा की हिमाचल के बजट में वृद्धावस्था पेंशन के लिए आयु सीमा को बड़ा कर 60 वर्ष कर दिया गया है, इसके बड़ा सामाजिक लाभ होने जा रहा है, पशुपालन क्षेत्र के लिए 469 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। इस कर्मयोगी सरकार ने पहाड़ी गाय के संरक्षण हेतु उत्कृष्ट फार्म स्थापित किए जाने का प्रावधान किया है और कृषि क्षेत्र के लिए बजट में 583 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया। उन्होंने कहा की जयराम सरकार के बजट में किसानों- बागवानों की सुविधा हेतु प्रदेश में एक और फूल मंडी स्थापित की जाएगी और साथ ही उज्ज्वला और गृहिणी सुविधा योजना के तहत अब 3 निःशुल्क सिलेंडर उपलब्ध करवाए जाएंगे। इससे महिलाओं एवं जनता को बड़ा लाभ होने जा रहा हैं। यह सच में वो सरकार है, जो जनता का दर्द समझती है। उन्होंने कहा हिमकेयर योजना का जनता को बड़ा लाभ हुआ है, जो की प्रत्यक्ष रूप से दिखता है, जनता के लिए यह बजट खुशखबरी लेकर आया है। बजट में बताया की हिम केयर का पंजीकरण पूरे साल होगा और यह कार्ड तीन साल के लिए माननीय होगा। उन्होंने कहा मेडिकल डिवाइस पार्क का कार्य 2022-23 में शुरू कर दिया जाएगा। इस पार्क के बनने से 10 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके निर्माण पर 332 करोड़ व्यय किए जाएंगे। इससे युवाओं को रोजगार का स्वर्ण अवसर प्राप्त होगा। साथ ही जल शक्ति क्षेत्र के लिए बजट 2022-23 में 2,772 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, अब जल्द ही पूरे प्रदेश में हर घर में जल पहुंचेगा। जयराम सरकार ने कानून व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने हेतु राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जाने का प्रावधान किया है।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला सासंद प्रतिभा सिंह ने आज प्रस्तुत प्रदेश के बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि बजट को लोकलुभावन बनाने की पूरी कोशिश की गई है, जबकि उन्हें नहीं लगता कि मुख्यमंत्री इस बजट में की गई अपनी घोषणाओं को पूरा कर पाएंगे। प्रतिभा सिंह ने प्रदेश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि बजट में अर्थव्यवस्था सुधार के कोई भी उपाय नहीं सुझाए गए हैं। उन्होंने कहा है कि बजट पूरी तरह दिशाहीन है। बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से निपटने की भी इस बजट में कोई कारगर योजना नहीं है। यह बजट महज आंकड़ों का दस्तावेज है, जो आगामी विधानसभा चुनावों के दृष्टिगत राजनीतिक लाभ लेने के लिए लोगों को लुभाने के लिए बनाया गया है।
Governor Rajendra Vishwanath Arlekar said that activities like 'Bird Festival' should be organized in an effective manner to further boost tourism and economic activities in the State so as to attract international attention and also convey the message of wildlife conservation. The Governor was presiding over a meeting on Wildlife Day with the senior officers of the Forest Department here today. He said that the Bird Festival in the State has a big potential, which not only attracts the bird watchers throughout the world but also provides good prospects for them. He said that Pong Dam Lake wildlife sanctuary is the largest wetland of H.P having an area of 207 sq. km and was one of the most important bird sites of the State. He said that this site was known for the largest congregation of Bar Headed Geese in the world and 45 per cent of total world population, 40000 to 50000 Bar-headed geese reported from this sanctuary alone every year. He added that it was the best wintering ground for migratory birds and since year 2000 around 420 bird species have been recorded in Pong. He said that annual water birds count nearly about 1.10 lakh. Rajendra Vishwanath Arlekar said that Western Tragopan was the state bird of Himachal Pradesh and efforts should be intensified for its conservation. He expressed satisfaction that efforts have been made in this direction at the Sarahan Pheasantry, which was the only captive breeding site for Western Tragopan in the World. He also stressed on implementing the flagship conservation programs of Cheer Pheasant, Western Tragopan etc. in a more effective manner. On the occasion, Principal Chief Conservator of Forest (Wild Life) Rajeev Kumar gave power point presentation on wildlife conservation and said that strengthening of rapid response teams, Exchange of Surplus Asiatic Black Bear, Common Leopard, Snow Leopard, conservation & release programme of Monal, Cheer and Western Tragopan Pheasants being pursued during 2022.
फर्स्ट वर्डिक्ट। राेहड़ू (हटकाेटी) हटकोटी (जुब्बल) आज एक नेपाली मजदूर के 13 वर्ष के गोलू पुत्र सागर जोशी (केसर) ने फांसी लगाकर दी जान, जो की स्थानीय सरकारी स्कूल में 8वीं कक्षा का छात्र था। साथ ही मिली जानकारी के अनुसार मृतक के माता-पिता अपने घर नेपाल गए हुए थे और वही वो अपनी दो बहनों के साथ किराए के मकान में रह रहा था। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में ले लिया था और पोस्टमार्टम के लिए जुब्बल हस्पताल भेज दिया था, जिस वक्त यह हादसा हुआ उस वक्त मृतक अकेला था, उसकी बहन किसी काम से रोहडू गई थी, जब वापस लौटी तो दरवाजा न खुलने के कारण पुलिस को सूचित किया गया। जब दरवाजा खोला गया तो कमरे में रस्सी में झूलता शव दिखा। साथ ही मृतक कि दोनों बहने नाबालिक होने के कारण, शव को पुलिस ने अपने कब्जे में रखा है जब तक मृतक के माता-पिता नहीं लौटते।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने आज परीक्षा नियंत्रक का घेराव किया। विद्यार्थी परिषद ने इस दौरान मांग उठाई की लंबित पड़े परीक्षा परिणामों को वि.वि प्रशासन जल्द घोषित करे। इकाई अध्यक्ष आकाश नेगी की अगवाई में कार्यकर्ता दोपहर 2 बजे परीक्षा नियंत्रक के कार्यालय पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने पीजी परीक्षाओं के महीनों से लंबित पड़े परिणामों को घोषित न करने पर परीक्षा नियंत्रक को घेरा। आकाश ने कहा कि पीजी की परीक्षाएं पिछले वर्ष सितंबर में आयोजित की गई थी, लेकिन विश्वविद्यालय की लच्चर व्यवस्था के कारण आज 5 महीने बीत जाने के बाबजूद भी इन परीक्षाओं का परिणाम विवि प्रशासन घोषित नहीं कर पाया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद द्वारा इन पीजी परीक्षाओं का रिजल्ट घोषित करने की मांग के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन ने आनन फानन में कुछ विभागों का परिणाम जारी कर दिया, लेकिन उनमें भी बहुत से अनियमिताएं पाई गई हैं। आकाश ने कहा कि बहुत से छात्रों का रिजल्ट आधा अधूरा ही घोषित कर दिया गया है, जो कि विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। आकाश ने कहा कि 3 मार्च से विवि प्रशासन ने पीजी की परीक्षाएं शुरू कर दी हैं लेकिन अभी पिछले परिणाम घोषित नहीं किए हैं, जिन छात्रों ने रिअपीयर की परीक्षाएं दी थी, उनका भी रिजल्ट नहीं आया है। छात्र असमंजस की स्तिथि में हैं, उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वे दोबारा रिअपीयर के पेपर भरें या नहीं। एलएलएम की कॉउंसलिंग 3मार्च को, एलएलबी का रिजल्ट अधूरा घोषित आकाश ने कहा कि विवि प्रशासन ने 3 मार्च से एलएलएम की कॉउंसलिंग शुरू की है, लेकिन अभी तक एलएलबी का परीक्षा परिणाम अधूरा घोषित किया है, छात्र समझ नहीं पा रहे हैं कि वे अब कॉउंसलिंग में हिस्सा लें या नहीं। आकाश ने कहा कि छात्रों को परिणाम के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है। विवि की लच्चर कार्यप्रणाली के कारण प्रदेशभर के हजारों छात्र परेशान हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद छात्रों के साथ हो रहे अन्याय को सहन नहीं करेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 3 दिनों के भीतर परीक्षा परिणाम घोषित नहीं हुए, तो आने वाले समय में प्रशासनिक ब्लॉक पर ताले लगा दिए जाएंगे। आकाश ने कहा कि विद्यार्थी परिषद विवि प्रशासन से मांग करती है कि तय दिनों के भीतर पीजी परीक्षा परिणामों को घोषित किया जाए तथा एलएलएम की कॉउंसलिंग की तिथि को एक्सटेंड किया जाए, ताकि सभी छात्र कॉउंसलिंग में भाग ले सकें।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश के कर्मचारियों की समस्या को हल कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने ओल्ड पेंशन स्कीम को हिमाचल प्रदेश में लागू करने और उनके पदाधिकारियों से वार्ता करने और मुख्यसचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का ऐलान भी कर दिया है, जो ऐतिहासिक निर्णय हैं अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय सचिव पवन मिश्रा, हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ के प्रांत अध्यक्ष पवन कुमार, प्रांत महामंत्री डॉ मामराज पुंडीर, संगठन मंत्री विनोद सूद, मीडिया प्रभारी शशि शर्मा, अतिरिक्त महामंत्री सुधीर गौतम, दर्शन लाल व वरिष्ठ उपाध्यक्ष जय शंकर ठाकुर सहित सभी जिलों प्रधान, महामंत्री व सभी जिला कार्यकारिणी सहित प्रदेश कार्यकारिणी ने सरकार से पुरानी पेंशन को हिमाचल प्रदेश में लागू करने की मांग की है। प्रांत महामंत्री डॉ मामराज पुंडीर ने कहा कि एनपीएस से संबंधित कर्मचारियों को वार्तालाप का रास्ता अपनाना चाहिए। हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ प्रदेश में पूरानी पेंशन बहाली की मांग करता है, लेकिन धरने प्रदर्शन वालो के साथ नहीं हैं। प्रदेश में कुछ नेता इस धरने प्रदर्शन से राजनीति रोटियां सेंकने में लगे हैं। पूर्व सरकार द्वारा 2003 में प्रदेश के कर्मचारियों से पेंशन छीनी और आज वो ही बहाल करने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के कर्मचारियों को भूखे मरने को छोड़ दिया था और आज उनको कर्मचारियों की याद आ रही है। हिमाचल प्रदेश में जब से जयराम सरकार बनी है, प्रदेश के कर्मचारियों के लिए हर लाभ दिया है। डॉ मामराज पुंडीर ने कहा कि प्रदेश के एनपीएस कर्मचारियों को 2009 की नोटिफिकेशन जारी करने का काम भी जयराम सरकार ने ही किया हैं।
अंग्रेजी व विज्ञान-गणित के रिक्त सैकड़ों पदों पर नवीन चयनसूचि जारी करने की रखी मांग फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला एसएलपी वापसी के बाद भी रीट भर्ती 2016 में रिक्त पड़े सैकड़ों पदों पर नवीन चयनसूचि जारी कर नियुक्ति देने की मांग जोर पकड़ने लगी है। मंगलवार को वर्षों से नियुक्ति का इंतजार कर रहे दर्जनों बेरोजगारों ने जयपुर पहुंचकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इस बाबत लिखित ज्ञापन सौंपा। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व पूर्व राज्यमंत्री गोपाल केसावत की अगवाई में पीड़ित अभ्यर्थियों ने उक्त भर्ती के मामले में एसएलपी वापस लेने के ऐतिहासिक निर्णय पर मुख्यमंत्री का आभार प्रकट किया। साथ ही सरकार के उक्त कदम के बाद भी रिक्त पड़े सैकड़ों पदों पर नवीन सूचि जारी कर वर्षों से भटक रहे पात्र बेरोजगारों के लिए नई सूचि जारी कर यथाशीघ्र नियुक्ति दिलवाने हेतु लिखित ज्ञापन सौंपा। बेरोजगारों ने ज्ञापन की मार्फत सीएम को अवगत करवाया कि वर्तमान में उक्त भर्ती में अंग्रेजी व विज्ञान-गणित के करीब 600 पद रिक्त हैं। इसलिए नई चयनसूचि जारी कर सरकार के एसएलपी वापसी के ऐतिहासिक कदम को सार्थक साबित करते हुए बेरोजगारों को यथाशीघ्र नियुक्ति दिलवाई जाए। मुख्यमंत्री ने उपस्थित प्रतिनिधिमंडल को मामले में सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया। बेरोजगारों के दल में सोना टेलर, पूनम शेखावत, रिछपाल दून, रवि, अल्का, राजीव शर्मा, राकेश शर्मा, सुभाष यादव, दिनेश ओलान, देवेंद्र चाहर व पुरुषोत्तम वर्मा सहित दर्जनों अभ्यर्थी शामिल रहे। क्यों अटका है मामला रीट भर्ती-2016 वर्षों से लंबित है। गत वर्ष राजस्थान सरकार ने बेरोजगार हित में सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी वापस लेकर रिक्त पदों को भरने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया था, लेकिन निदेशालय ने बिना कागजात सत्यापन किए ही अस्थायी चयनसूचि जारी कर मामले से पल्ला झाड़ लिया था। कागजात सत्यापन के दौरान अंग्रेजी व विज्ञान-गणित के करीब 600 अभ्यर्थी अपात्र व अनुपस्थित पाए गए हैं, जिससे अस्थायी सूचि में से करीब आधे पद रिक्त रह गए हैं।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 5000 करोड़ रुपए के महत्वाकांक्षी पूंजीगत व्यय उपयोग (कैपेक्स) लक्ष्य को एसजेवीएन ने एक माह पूर्व ही हासिल कर लिया है। नंद लाल शर्मा, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने आज बताया कि 28 फरवरी, 2022 तक 5007.89 करोड़ रुपए का कैपेक्स हासिल कर एसजेवीएन ने वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए 5000 करोड़ रुपए के लक्षित कैपेक्स के 100.16 प्रतिशत को पार कर लिया है। नंद लाल शर्मा ने कहा कि वर्तमान वित्तीय वर्ष के 11 माह में 100 प्रतिशत से अधिक कैपेक्स उपयोग दर्ज करके, एसजेवीएन ने सर्वोत्कृष्ट, निष्पादनकर्त्ता विद्युत क्षेत्र सीपीएसयू होने की प्रतिष्ठा को बनाए रखा है। कार्य की वर्तमान गति पर, चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 5500 करोड़ रुपए के कैपेक्स तक पहुंचने की संभावना है, जो कि लक्ष्य से 10 प्रतिशत अधिक रहेगा। वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए एसजेवीएन ने 8000 करोड़ रुपए के कैपेक्स उपयोग का लक्ष्य रखा है और विकास के तहत कई परियोजनाओं के साथ, कंपनी इस लक्ष्य को भी पूरा करने के लिए तैयार है। नंद लाल शर्मा ने अवगत कराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्वड और केंद्रीय विद्युत मंत्री आरके सिंह के मार्गदर्शन सेएसजेवीएन ने इस लक्ष्य को हासिल किया है। भारत सरकार तथा विद्युत मंत्रालय द्वारा कंपनी को यह कैपेक्स लक्ष्य देश को महामारी के कारण उत्पएन्न, मंदी से उबारने तथा आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए निर्धारित किए गए हैं। शर्मा ने कहा कि एसजेवीएन का पूंजीगत व्यय 3500 मेगावाट से अधिक क्षमता की दस निर्माणाधीन परियोजनाओं में व्याप्त है। कैपेक्सी उपयोग का अभिप्राय है कि एसजेवीएन में कार्यों की गति और मात्रा प्रगतिशील है। बिहार में 1320 मेगावाट की बक्सर ताप विद्युत परियोजना, नेपाल में 900 मेगावाट अरुण-3 जल विद्युत परियोजना और 217 किमी अरुण-3 ट्रांसमिशन लाइन, भूटान में 600 मेगावाट खोलोंग्चू् जल विद्युत परियोजना, हिमाचल प्रदेश में 210 मेगावाट लुहरी-1 जल विद्युत परियोजना और 66 मेगावाट धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजना, उत्तराखंड में 60 मेगावाट की नैटवाड़ मोरी जल विद्युत परियोजना और 37 किलोमीटर की नैटवाड़ मोरी ट्रांसमिशन लाइन और दो सौर परियोजनाएं बगोदरा और परासन सौर परियोजनाएं निर्माण के अग्रिम चरणों में हैं और इनमें पूंजीगत व्यय का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा हैं। 33 वर्षों के हमारे इतिहास में किसी भी समय निर्माण चरण में हमारे पास इतनी सारी परियोजनाएं कभी नहीं थीं। कंपनी के लिए नए आयाम और व्यावसायिक अवसर सृजित हो रहे हैं, जो यह प्रमाणित करता है कि हमारा हाल ही में पुनर्निर्मित बिजनेस मॉडल बेहतरीन कार्य कर रहा है। एसजेवीएन के जनरेटिंग पावर स्टेशनों के सर्वोत्कृष्टा निष्पादन के बारे में बताते हुए नंद लाल शर्मा ने अवगत कराया कि नवीनतम उपलब्धि में फरवरी 2022 के लिए सभी पावर स्टेशनों से संचयी विद्युत उत्पादन 239 मि.यू. है, जो फरवरी 2021 की तुलना में 11 मि.यू.से अधिक है। एसजेवीएन ने वर्ष1988 में एकल जल विद्युत परियोजना के साथ शुरुआत की। आज इसके पास 16800 मेगावाट से अधिक का पोर्टफोलियो है, जिसमें से 2016.5 मेगावाट प्रचालनाधीन है और शेष विकास के विभिन्न चरणों में है। भारत के नौ राज्यों और दो पड़ोसी देशों अर्थात नेपाल और भूटान में अपनी उपस्थिति के साथ, एसजेवीएन के पास अब हाइड्रो, थर्मल, पवन और सौर ऊर्जा परियोजनाओं का एक विविधीकृत पोर्टफोलियो है। कंपनी ने पावर ट्रांसमिशन में भी विविधता लाई है और पावर ट्रेडिंग के लिए लाइसेंस प्राप्ते किया है। एसजेवीएन ने हाल ही में वर्ष 2023 तक 5000 मेगावाट, 2030 तक 25000 मेगावाट और वर्ष 2040 तक 50000 मेगावाट की स्थापित क्षमता हासिल करने के नए साझा विजन के साथ अपने क्षमतागत लक्ष्यों को संशोधित किया है।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला खन्ना ने यूक्रेन में फंसे छात्रों के परिवारों को हौसला बनाए रखने की अपील की भाजपा हिमाचल प्रदेश प्रभारी वह पंजाब के पूर्व राज्यसभा सांसद अविनाश राय खन्ना ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को वापस लाने के लिए सभी प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि रोमानियाई सीमाओं तक पहुंचने वाले छात्रों के साथ यहां पहले से ही 5 उड़ानें उतर चुकी हैं। पोलैंड और स्लोवेकिया की सीमाओं में भी सुविधाएं बनाई जा रही हैं। खन्ना ने बताया कि मंत्री हरदीप पुरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, क्रिएन रिजेजू, जनरल वीके सिंह व्यक्तिगत रूप से निकासी और एयरलिफ्टिंग प्रक्रिया की निगरानी के लिए वहां जा रहे हैं। इस मौके पर यूक्रेन में फंसे छात्रों के परिवारों को खन्ना ने अपील की कि वे हौसला बनाए रखें। भारत सरकार निरंतर अपने लोगों को यूक्रेन से निकालने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के साथ-साथ भाजपा का हर नेता व कार्यकर्ता यूक्रेन में फंसे छात्रों के परिवारों के साथ खड़ा है खन्ना ने कहा की निसंदेह जल्द ही भारत सरकार यूक्रेन में फंसे छात्रों को वहां से सकुशल निकाल लेगी।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों की सकुशल स्वदेश वापसी के लिए राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। यह बात मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज शिमला से रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों और उनके माता-पिता तथा यूक्रेन से भारत लौटे विद्यार्थियों के साथ वर्चुअल माध्यम से बातचीत करते हुए कही। मुख्यमंत्री ने यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों को यूक्रेन में भारतीय दूतावास के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने का परामर्श दिया। उन्होंने कहा कि छात्र दूतावास के अधिकारियों और अपने-अपने संस्थानों के प्रबंधन से परामर्श के उपरान्त ही स्थान छोड़ंें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है और उनकी सकुशल वापसी के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार विद्यार्थियों की सुरक्षित वापसी के लिए भारत सरकार सेे लगातार संपर्क में है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार स्थिति से पूरी तरह अवगत है और सुरक्षित वापसी प्रक्रिया की निगरानी और समन्वय के लिए यूक्रेन के विभिन्न पड़ोसी देशों में चार केंद्रीय मंत्रियों को तैनात किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूक्रेन में फंसे लोगों से समुचित समन्वय के लिए राज्य सरकार ने एक हेल्पलाइन भी स्थापित की है। उन्होंने कहा कि इस हेल्पलाइन पर अब तक 218 लोगों ने पंजीकरण करवाया है और अब तक हिमाचल प्रदेश के 102 विद्यार्थी भारत पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के 317 विद्यार्थी अभी भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक छात्र को सकुशल घर वापिस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जयराम ठाकुर ने यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों के माता-पिता से विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निरंतर भारत सरकार और विदेश मंत्रालय के संपर्क में है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के अधिकारियों और मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा भी स्थिति की निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भारत आने वाले सभी विद्यार्थियों को निःशुल्क घर लाने के लिए व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री ने यूक्रेन से सुरक्षित वापस लौटे विद्यार्थियों का भी स्वागत किया। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर, महासचिव बाल कल्याण परिषद पायल वैद्य, प्रधान सचिव सामान्य प्रशासन विभाग भरत खेड़ा, मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव डॉ. आर.एन. बत्ता और अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।
- अधिसूचना जारी होने के बाद भी असंतुष्ट, अधिनियम बनाने की मांग विलियम शेक्स्पीयर ने कहा था कि 'नाम में क्या रखा है'। पर देवभूमि क्षत्रिय संगठन का मानना है कि 'सब कुछ नाम में ही रखा है', शायद इसीलिए प्रदेश सरकार द्वारा सामान्य वर्ग आयोग के गठन के बावजूद प्रदेश का सवर्ण समाज संतुष्ट नज़र नहीं आ रहा। हिमाचल प्रदेश में सामान्य वर्ग आयोग के गठन के बाद अब उसका संविधान और पूरी कार्यप्रणाली निर्धारित कर दी गई है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। सामान्य वर्ग आयोग के गठन की अधिसूचना के बावजूद क्षत्रिय संगठनों का गुस्सा शांत होता नहीं दिखाई दे रहा। देवभूमि क्षत्रिय संगठन एवं देवभूमि सवर्ण मोर्चा के पदाधिकारियों का मानना है कि सरकार ने ये अधिसूचना जारी कर प्रदेश के सबसे बड़े समाज को धोखा दिया है। सवर्ण आयोग के नाम पर सामान्य वर्ग आयोग गठित किया गया है। उनका कहना है कि सवर्ण आयोग गठित किया जाना चाहिए था लेकिन सरकार ने सामान्य वर्ग आयोग गठित किया है, जिसका सवर्ण वर्ग विरोध करता है। विरोध कर रहे संगठनों को नाम के अलावा एक अन्य आपत्ति भी है। देवभूमि क्षत्रिय संगठन के अध्यक्ष रुमीत सिंह ठाकुर का मानना है कि सरकार द्वारा सामान्य वर्ग आयोग के गठन की अधिसूचना जारी की गई है जबकि प्रदेश भर के लोग इसे अधिनियम बनाने की मांग कर रहे हैं। रुमीत ने कहा की शीतकालीन सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने तपोवन में इस बात की घोषणा की थी। इसमें सामान्य वर्ग आयोग को अधिनियम के दायरे में लाने का आश्वासन दिया गया था। इसके लिए सरकार ने तीन माह की मोहलत मांगी थी और अब तीन माह का समय पूरा होने वाला है तो सरकार ने इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी है। इस अधिसूचना में एक अध्यक्ष और दो सदस्यों की बात कही गई है। अध्यक्ष की मर्जी से आयोग की बैठक होगी। आयोग का अध्यक्ष यदि पूरा साल बैठक नहीं करता है तो प्रदेश भर के सामान्य वर्ग के लोगों को इस आयोग का कोई लाभ नहीं होगा। उनका मानना है की प्रदेश सरकार ने यह अधिसूचना 16 मार्च से प्रस्तावित आंदोलन को टालने के लिए की है। पर मांग अब भी बरकरार है और चेतावनी भी दी गई है कि यदि सरकार सामान्य वर्ग आयोग ( सवर्ण आयोग ) को अधिनियम के दायरे में नहीं लाती है तो 16 मार्च को उग्र प्रदर्शन होगा।
तिलक राज को भाजपा प्रदेश सचिव के रूप में नियुक्त किया गया। तिलक राज गांव सौर किलाड पांगी जिला चंबा के रहने वाले हैं।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने बताया कि उनकी इस नियुक्ति से संगठन को बल मिलेगा। इसके साथ-साथ तिलक राज को भाजपा के सभी मोर्चों एवं प्रकोष्ठ के कार्यक्रम एवं बूथ प्रबंधन का समन्वयक भी बनाया गया है। सुरेश कश्यप ने बताया की भाजपा प्रदेश सचिव पायल वैद्य को भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया है।
बच्चों मेें आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक योग्यता विकसित करने के उद्देश्य से समग्र शिक्षा अभियान के अन्तर्गत निपुण हिमाचल मिशन का शुभारम्भ किया गया। इस मौके पर शिक्षा मंत्री गोविन्द ठाकुर ने कहा कि निपुण भारत योजना, केन्द्र सरकार की शिक्षा के क्षेत्र में एक नवाचार पहल है। हिमाचल के विद्यार्थियों के लिए निपुण हिमाचल मिशन का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। आधारभूत साक्षरता भविष्य में शिक्षा प्राप्त करने का आधार बनती है। इस मिशन के माध्यम से छोटे बच्चों को भविष्य में शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मिशन के अन्तर्गत कक्षा एक से तीन के विद्यार्थियों के लिए विद्यालय में सक्षम वातावरण का निर्माण किया जाएगा तथा उन्हें आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता का ज्ञान प्रदान किया जाएगा। इस मिशन के अन्तर्गत कक्षा एक से तीसरी कक्षा के विद्यार्थियों में पढ़ने, लिखने तथा अंक गणित की शिक्षा का विकास किया जाएगा। यह योजना बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बहुत कारगर सिद्ध होगी। इससे बच्चे समय पर आधारभूत साक्षरता तथा संख्यात्मक ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उनका मानसिक एवं शारीरिक विकास होगा। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों की स्कूली शिक्षा, शिक्षक क्षमता निर्माण, उच्च गुणवत्ता तथा विद्यार्थी की आधारभूत आवश्यकतानुसार शिक्षण सामग्री को भी तैयार किया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि मिशन के अन्तर्गत निपुण लक्ष्य भी रखे जाएंगे, जिन्हें प्राप्त करने के प्रयास किए जाएंगे। मिशन के अन्तर्गत बेहतर कार्य करने वाले विद्यालयों को निपुण विद्यालय घोषित कर उस विद्यालय के मुख्याध्यापक और अध्यापकों को सम्मानित किया जाएगा। निष्ठा कार्यक्रम के अन्तर्गत अध्यापकों की ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियांें के लिए पाठ्य पुस्तकें तैयार की गई हैं और बच्चों की पाठ्य कुशलता को जॉंचने के लिए शीघ्र ही ओरल रिडिंग फल्यूएंसी ऐप भी तैयार किया जाएगा।
- डेढ़ लाख पेंशनरों की 2.57 फीसदी बढ़ेगी पेंशन हिमाचल प्रदेश में न्यूनतम पेंशन व पारिवारिक पेंशन को बढ़ाकर पेंशनभोगिओं को बड़ी राहत प्रदान की है। सरकार ने इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी है। अब पहली जनवरी, 2016 से न्यूनतम पेंशन व पारिवारिक पेंशन को 3,500 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 9 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त पहली जुलाई 2021 से पेंशनभोगियों को 31 प्रतिशत महंगाई भत्ता प्रदान करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके अनुसार वर्ष 2016 के पेंशनरों की नई पेंशन को अब 31 दिसंबर 2015 की बेसिक पेंशन या पारिवारिक पेंशन की तर्ज पर तय किया जाएगा। राज्य में एक जुलाई 2016 से न्यूनतम पेंशन 9000 रुपये प्रति माह होगी। संशोधित पेंशन या पारिवारिक पेंशन को अगले उच्चतम रुपये पर संशोधित किया जाएगा। समय-समय पर अंतरिम राहत दी जाती रही है, जो 21 फीसदी दी गई है। इसे पेंशन या पारिवारिक पेंशन के एरियर में समायोजित किया जाएगा। संशोधित पेंशन मार्च में फरवरी के देय वेतन में दी जाएगी। राज्य में एक जुलाई 2016 से न्यूनतम पेंशन 9000 रुपये प्रति माह होगी। इसमें ओल्ड पेंशनर को दी जाने वाली अतिरिक्त पेंशन शामिल नहीं होगी। पेंशन और पारिवारिक पेंशन के लिए ऊपरी सीलिंग उच्चतम वेतनमान यानी 2,24,100 रुपये की 50 से 30 फीसदी होगी। इसके अनुसार अब पहली जनवरी 2016 से ग्रेच्युटी की सीमा को 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख किया गया है। राज्य के 80 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों को संशोधित पेंशन और पारिवारिक पेंशन पर देय अतिरिक्त पेंशन लाभ प्रदान किए जाएंगे। इस निर्णय से 1.73 लाख पेंशनभोगियों को पहली फरवरी, 2022 से संशोधित पेंशन व पारिवारिक पेंशन मिलेगी। इसके साथ ही 1.30 लाख पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों को पहली जनवरी 2016 से संशोधित पेंशन व पारिवारिक पेंशन मिलेगी।
भाजपा सह प्रभारी संजय टंडन ने कहा कि भाजपा की प्रदेश शाखा नगर निगम शिमला चुनावों के लिए पूरी तरह से तैयार है। भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी रोड मैप तैयार कर रही है। टंडन ने कहा कि कल की बैठक में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप के साथ मिलकर नगर निगम शिमला को लेकर रणनीति तय कर ली है और तीन सीनियर लीडर की ड्यूटी नगर निगम को लेकर लगा दी गई है। चुनावों में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती, मंत्री सुरेश भारद्वाज एवं विधायक डा. राजीव बिंदल की एक समिति का गठन कर दिया गया है और इनके सहयोग में प्रदेश महामंत्री त्रिलोक जम्वाल, सचिव बिहारी लाल शर्मा और महेंद्र धर्माणी सहयोगी के रूप में काम करेंगे। टंडन ने कहा की आने वाले समय में इन नगर निगम चुनावों के 41 वार्डों के प्रभारियों की नियुक्ति भी जल्द हो जाएगी । नगर निगम में लोकल मुद्दों का एक खाखा तैयार किया जाएगा, भाजपा ने शिमला शहर के लिए अच्छे काम किए हैं और इनको लेकर हम घर-घर जाने के लिए तैयार हैं। अगले 15 दिन में भाजपा नगर निगम शिमला के चुनावों को लेकर पूरा रोड मैप बना लेगी। हिमाचल प्रदेश में भाजपा के पास मजबूत संगठन है और जल्द ही हमारी पन्ना समितियों का भी गठन हो जाएगा , इससे सभी वोटर पर नजर बनी रहेगी। कांग्रेस के पास सरकार के खिलाफ कोई मुद्दा नहीं है और साथ ही कांग्रेस में नेतृत्व की लड़ाई चल रही है, ऐसे में भाजपा का मिशन रिपीट तय है।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला दुर्घटना में घायल व्यक्ति का इलाज करने से कोई भी सरकारी या निजी अस्पताल इनकार नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इसे मौलिक अधिकार घोषित किया है। इसी तरह गरिमा पूर्ण ढंग से अंतिम संस्कार मृतक के मौलिक अधिकारों में शामिल है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विधि विभाग के प्रोफेसर ललित डढवाल ने यह जानकारी "मौलिक अधिकारों के संरक्षण में न्यायपालिका की भूमिका" विषय पर उमंग फाउंडेशन के वेबिनार में दी। उन्होंने बताया कि मौलिक अधिकारों के विस्तार और उनके संरक्षण में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका अत्यंत प्रशंसनीय है। कार्यक्रम की संयोजक एवं प्रदेश विश्वविद्यालय से बॉटनी में पीएचडी कर रही अंजना ठाकुर ने कहा कि वेबिनार में हिमाचल प्रदेश के साथ ही पड़ोसी राज्यों और छत्तीसगढ़, बिहार तथा झारखंड के लगभग 70 युवाओं ने भाग लिया। विशेषज्ञ वक्ता प्रो. डढवाल ने युवाओं के सवालों के जवाब भी दिए। मानवाधिकार जागरूकता पर उमंग फाउंडेशन का यह 24वां साप्ताहिक वेबिनार था। प्रो. ललित डढवाल ने भारतीय संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों की विस्तृत व्याख्या करते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 1989 में परमानंद कटारा बनाम भारत सरकार केस में फैसला दिया था कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति को बिना कोई औपचारिकताएं पूरी किए नजदीक के सरकारी या निजी अस्पताल में इलाज कराने का मौलिक अधिकार है। इससे पहले आमतौर पर अस्पताल मरीजों का इलाज करने से इंकार कर देते थे। उन्होंने कहा कि संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों के आधार पर न्यायपालिका ने अपने फैसलों के माध्यम से उन्हें काफी विस्तार दिया। न्यायपालिका द्वारा दिए गए अधिकारों को मानवाधिकार भी कहा जाता है। इनमें वयस्क महिला एवं पुरुष को अपनी पसंद से विवाह का अधिकार, निजता का अधिकार, मैला ढोने की कुप्रथा से मुक्ति का अधिकार, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से महिलाओं को सुरक्षा का अधिकार, समलैंगिक एवं ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार, विकलांगजनों को नौकरी में पदोन्नति में आरक्षण का आधिकार और इंटरनेट तक पहुंच का अधिकार प्रमुख रूप से शामिल है। उन्होंने कहा कि छुआछूत को छोड़कर मौलिक अधिकारों के मामले आमतौर पर राज्य के विरुद्ध दर्ज होते हैं। मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होने पर पहले पीड़ित को मुआवजा देने की व्यवस्था नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी भी शुरुआत की। अनेक मामलों में पीड़ित व्यक्तियों को सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी विभागों अथवा अन्य एजेंसियों से मुआवजा भी दिलवाया। कर्नाटक से शुरू हुए हिजाब विवाद पर उन्होंने कहा की अंतिम फैसला तो कर्नाटक हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट यही करेगा। कर्नाटक हाई कोर्ट मुख्य रूप से दो प्रश्नों पर विचार कर रहा है। पहला, क्या इस्लाम में महिलाओं के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य है। दूसरा, क्या हिजाब धार्मिक चिन्ह है? उन्होंने बताया कि 2018 में केरल हाईकोर्ट ने फातिमा बनाम केरल सरकार मामले में निर्णय दिया था कि विद्यार्थी कोई विशेष स्कूल यूनिफार्म पहनने पर जोर नहीं दे सकते। इसी प्रकार का एक निर्णय मुंबई हाईकोर्ट ने भी दिया था। उन्होंने कहा वर्तमान विवाद पर न्यायपालिका का निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी होगा। उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए प्रो. ललित डढवाल ने कहा कि दिव्यांग विद्यार्थियों, बेसहारा महिलाओं, बेघर बुजुर्गों, अनाथ बच्चों एवं अन्य कमजोर वर्गों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए उनकी जनहित याचिकाओं पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनेक महत्वपूर्ण निर्णय दिए। इससे प्रदेश सरकार की नीतियों में बड़ा बदलाव आया। वेबिनार के संचालन में संजीव शर्मा, मुकेश कुमार, अभिषेक भागड़ा, विनोद योगाचार्य और उदय वर्मा ने सहयोग दिया।
प्रदेश के कॉलेजों में व्यावसायिक शिक्षा देने वाले वोकेशनल शिक्षक भी सरकार से पॉलिसी बनाने की मांग कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि हरियाणा व असम की तर्ज पर इन शिक्षकों के लिए भी हिमाचल में पॉलिसी तैयार की जाए, ताकि वोकेशनल शिक्षकों को भविष्य में नियमित किया जा सके और इन शिक्षकों को पदोन्नति के अवसर मिले। शिक्षकों का कहना है कि इस बजट सत्र में उन्हें उम्मीद ही नहीं बल्कि भरोसा है कि गठित कमेटी उनके भविष्य के बारे में सोचकर स्थायी नीति बनाएगी। हिमाचल प्रदेश बी. वॉक वोकेशनल संघ के अध्यक्ष कुश भारद्वाज ने आउटसोर्स पर कार्यरत हजारों वोकेशनल प्रशिक्षकों के लिए स्थायी नीति बनाने हेतु कमेटी का गठन करने हेतु सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि स्थायी नीति बनाने से प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ-साथ उनके परिवार भी लाभान्वित होंगे जिससे बढ़ती हुई महंगाई के दौर में आसानी से गुजारा कर पाएंगे। उन्होंने मांग की है की इस बजट सत्र के दौरान उनके लिए स्थाई नीति की घोषणा की जाए।
शारीरिक शिक्षा अध्यापक प्रदेश के स्कूलों में 100 विद्यार्थियों वाली शर्त को हटाने की मांग कर रहे है। अपनी मांगों को लेकर बीते दिनों राजकीय शारीरिक शिक्षा अध्यापक संघ का एक प्रतिनिधि मंडल शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर भी मिला। प्रतिनिधि मंडल ने शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि हिमाचल प्रदेश के सभी माध्यमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा अध्यापकों के पदों को भरा जाये तथा 100 विद्यार्थियों वाली शर्त को हटाया जाए। संघ के अनुसार प्रदेश में शारीरिक शिक्षा अध्यापकों के 380 पद खाली चल रहे है जिन्हें अतिशीघ्र भरा जाना चाहिए। शारीरिक शिक्षा अध्यापक संघ के राज्य कोषाध्यक मनोहर लाल ठाकुर एवं जिला महासचिव गिरधारी शर्मा के बताया कि इसके अतिरिक्त संघ की मांग है की वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में डीपीई के पदों को सृजित किया जाए, जिससे फिट इंडिया प्रोग्राम को सफल बनाया जा सके। संघ चाहता है कि जिला सहायक शिक्षा अधिकारी एपीडीएओ के पदों को स्थाई किया जाए तथा एडीपीईओ के पदनाम बदल कर डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स ऑफिसर रखा जाए। इन सभी मांगों पर शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपा गया। संघ के पदाधिकारियों का कहना है की मंत्री ने सभी मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें पूरा करने का भी आश्वासन दिया।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन सम्बन्धित सीटू के बैनर तले हिमाचल प्रदेश के सैंकड़ों आंगनबाड़ी कर्मियों ने विधानसभा शिमला के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेशभर के आंगनबाड़ी कर्मी पंचायत भवन शिमला में एकत्रित हुए व एक जुलूस के रूप में विधानसभा की ओर कूच किया। प्रदर्शन के दौरान यूनियन का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिला व उन्हें बारह सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री ने आगामी बजट में कर्मियों की मांगों को पूर्ण करने का आश्वासन दिया। यूनियन ने चेताया है कि अगर बजट में मांगें पूर्ण न हुईं तो 28-29 मार्च को आंगनबाड़ी कर्मी राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल होकर आंदोलन तेज करेंगे। विदित रहे कि प्रदेशव्यापी हड़ताल के दौरान प्रदेश के अठारह हजार आंगनबाड़ी केंद्र बन्द रहे व लगभग सैंतीस हजार आंगनबाड़ी योजना कर्मी प्रदेशव्यापी हड़ताल पर रहे। ये है मुख्य मांगे : आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन कि मांग है कि प्री प्राइमरी में तीस के बजाए सौ प्रतिशत नियुक्ति दी जाए। नियुक्ति प्रक्रिया में 45 वर्ष की शर्त को खत्म किया जाए। साथ ही प्री प्राइमरी कक्षाओं में छोटे बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा केवल आंगनबाड़ी कर्मियों को दिया जाए क्योंकि वे पहले से ही काफी प्रशिक्षित कर्मी हैं। इसके अलावा मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यरत कर्मियों को पूर्ण कर्मी का दर्ज़ा दिया जाए व उन्हें आंगनबाड़ी कर्मियों के बराबर वेतन दिया जाए। आंगनबाड़ी कर्मियों को नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के तहत वर्ष 2013 की बकाया राशि का भुगतान तुरन्त किया जाए। सुपरवाइजर नियुक्ति में आंगनबाड़ी कर्मियों की नब्बे प्रतिशत भर्ती सुनिश्चित की जाए व इसकी पात्रता के लिए भारतवर्ष के किसी भी मान्यता प्राप्त विश्विद्यालय की डिग्री को मान्य किया जाए। वरिष्ठता के आधार पर मेट्रिक व ग्रेजुएशन पास तथा दस साल का कार्यकाल पूर्ण करने वाले कर्मियों की सुपरवाइजर श्रेणी में तुरन्त भर्ती की जाए। आंगनबाड़ी कर्मियों को अन्य राज्यों की तर्ज़ पर सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। उन्हें वर्ष 2013 व 2014 में हुए 45वें व 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार नियमित कर्मी का दर्ज़ा दिया जाए व श्रम कानूनों के दायरे में लाया जाए। उन्हें हरियाणा की तर्ज़ पर साढ़े ग्यारह हजार रुपये वेतन दिया जाए। उनकी रिटायरमेंट की आयु अन्य राज्यों की तर्ज़ पर 65 वर्ष की जाए। अन्य राज्यों की तर्ज़ पर उन्हें दो लाख रुपये ग्रेच्युटी,तीन हज़ार रुपये पेंशन,मेडिकल व छुट्टियों आदि की सुविधा लागू की जाए। आईसीडीएस का निजीकरण मंजूर नहीं : यूनियन अध्यक्ष नीलम जसवाल व महासचिव वीना शर्मा ने कहा कि नन्द घर बनाने की आड़ में आईसीडीएस को वेदांता कम्पनी के हवाले करके निजीकरण की साजिश तथा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, पोषण ट्रैकर ऐप व बजट कटौती आदि मुद्दों पर अगर ज़रूरत हुई तो हरियाणा, दिल्ली, पंजाब,आंध्र प्रदेश आदि की तर्ज़ पर हिमाचल प्रदेश के आंगनबाड़ी कर्मी अनिश्चितकालीन आंदोलन करने से भी गुरेज नहीं करेंगे। उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार को चेताया है कि अगर आईसीडीएस का निजीकरण किया गया व आंगनबाड़ी वर्कर्स को नियमित कर्मचारी घोषित न किया गया तो आंदोलन और तेज होगा। उन्होंने नई शिक्षा नीति को भी वापिस लेने की मांग की है क्योंकि यह आइसीडीएस विरोधी है। इनके अनुसार नई शिक्षा नीति में आईसीडीएस के निजीकरण का एजेंडा छिपा हुआ है। आईसीडीएस को वेदांता कम्पनी के हवाले करने के लिए नंदघर की आड़ में निजीकरण को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा क्योंकि इस से भविष्य में कर्मियों को रोज़गार से हाथ धोना पड़ेगा।
डॉक्टरों की पेन डाउन स्ट्राइक रंग लाई है और सरकार ने डॉक्टरों की लंबित मांगें मान ली है। अब हिमाचल प्रदेश में डॉक्टरों की नियमित भर्तियां साल में दो बार कमीशन के तहत होगी और हर वर्ष डॉक्टरों के लिए पर्याप्त भर्तियां निकाली जाएंगी। डॉक्टर एसोसिएशन की विधानसभा में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के साथ दो घंटे तक बैठक हुई, जिसमें स्वास्थ्य मंत्री राजीव सैजल, मुख्य सचिव, वित्त सचिव, स्वास्थ्य सचिव भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों की मांगों को तसाली से सुना भी और अधिकारियों को उनको पूर्ण करने के निर्देश भी दिए। खुद मुख्यमंत्री से सकरात्मक आश्वासन मिला तो डॉक्टरों ने भी पेन डाउन हड़ताल स्थगित कर दी। अब जल्द अनुबंध पर लगे डॉक्टरों के लिए नॉन प्रैक्टिस एलाउंस (एनपीए) की अधिसूचना भी जल्द जारी की जाएगी। वहीं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के हस्तक्षेप के बाद डॉक्टरों की मांगों पर एक कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता में बनाई गई है। इस कमेटी में 12 लोग है, मेडिकल ऑफिसर संघ के पांच प्रतिनिधि भी शामिल है। कमेटी को दो महीने के अंदर रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। इसके बाद सरकार की ओर से अगला कदम उठाया जाएगा। एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. राजेश सूद ने कहा कि दो महीने के भीतर मांगें पूरी नहीं होती हैं तो संघर्ष दोबारा शुरू होगा। एसोसिएशन महासचिव पुष्पेंद्र वर्मा ने कहा कि वेतन की सीलिंग को 2.18 लाख से बढ़ाकर 2,24,100 रुपये करने पर सहमति बन गई है। 20 फीसदी नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस भी 1 जनवरी 2022 से लागू होगा और इसे एनपीए को बेसिक का हिस्सा मानने पर सहमति बनी है। 4-9-14 पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी अधिसूचना जल्द जारी होगी। चिकित्सकों का विशेषज्ञ भत्ता बढ़ाने, मेडिकल कॉलेज में काम कर रहे डॉक्टरों के लिए एकेडमिक भत्ते पर भी सहमति बनी है। कमेटी अपनी सिफारिशें आठ सप्ताह में पेश करेगी।
प्रदेश में 2009 की अधिसूचना को लागू भी किया गया और कर्मचारियों के साथ बैठकर कर वार्ता भी हुई लेकिन फिर भी पुरानी पेंशन बहाली के लिए शुरू हुई पदयात्रा को रोका नहीं जा सका। प्रदर्शन पर रोक लगाने के लिए कई फरमान भी जारी हुए, वेतन काटने और प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने के फरमान भी जारी किये गए, मगर पदयात्रा पर निकले कर्मचारियों के इरादे नहीं बदले। जाहिर है कर्मचारी अब रुकने वाले नहीं है और आर पार की लड़ाई के मूड में है। प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाली के लिए पदयात्रा की जा रही है। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न विभागों में तैनात सभी वर्ग के कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली के लिए राजधानी शिमला तक पैदल यात्रा पर निकल गए हैं। पदयात्रा की शुरुआत मंडी शहर के ऐतिहासिक सेरी मंच से हुई। नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के बैनर तले शुरू हुई इस पदयात्रा को कर्मचारियों का पूरा सहयोग मिलता हुआ दिखाई दे रहा है और जहां भी कर्मचारी पहुँच रहे है वहां उनका स्वागत किया जा रहा है। कर्मचारी बिलासपुर जिला मुख्यालय होते हुए 3 मार्च को शिमला पहुचेंगे और वहां पर विधानसभा का घेराव कर पुरानी पेंशन बहाली के लिए धरना प्रदर्शन किया जाएगा। स्पष्ट है ये मांग अब बड़े आंदोलन का रूप ले चुकी है। उधर मुख्यमंत्री कर्मचारियों की हड़तालों और प्रदर्शनों से नाराज़ है और कई तरह की चेतावनियां भी दी जा रही है। मगर कर्मचारी मानने को तैयार नहीं है। इस पदयात्रा को रोकने के लिए कई प्रयास भी किये गए। पत्र जारी कर कर्मचारियों को वार्ता के लिए बुलाया गया, कर्मचारी वार्ता के लिए पहुंचे भी परन्तु कोई सार्थक परिणाम नहीं निकल पाया। इसके बाद सरकारी कर्मचारियों के धरने प्रदर्शन पर रोक लगाने के लिए सरकार ने फरमान जारी किया की सूबे के कर्मचारी अगर हड़ताल पर गए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने सिविल सर्विस रूल्स 3 और 7 का हवाला देते हुए आदेश जारी किए हैं कि प्रदर्शन, बहिष्कार, पेन डाउन स्ट्राइक और इस तरह की अन्य गतिविधियों में शामिल सरकारी कर्मचारियों का वेतन काटा जाएगा और साथ ही कर्मचारियों पर अपराधिक मामला भी दर्ज होगा। पर सरकार की इस चेतावनी के बाद भी पदयात्रा जारी रही। हिमाचल प्रदेश के कर्मचारी सरकार से तुरंत पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग कर रहे है। विधानसभा के शीत सत्र के दौरान पेंशन बहाली के लिए कमेटी के गठन की घोषणा की गई थी जो की अब तक पूरी नहीं हुई। कमेटी का गठन नहीं किया गया और अब कर्मचारी चाहते है की बिना कमेटी के गठन के सीधे पेंशन बहाली की घोषणा की जाए। इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष है की वर्तमान वित्तीय परिस्थितियों के अनुसार फिलवक्त पुरानी पेंशन बहाल नहीं की जा सकती। हालांकि पेंशन बहाली से सरकार पूरी तरह इंकार भी नहीं कर रही। सरकार का कहना है की पहले कर्मचारी अपनी पदयात्रा समाप्त करे और फिर चर्चा के माध्यम से इस मसले का हल निकलने की कोशिश की जाएगी, परन्तु कर्मचारी अब चर्चा नहीं एक्शन चाह रहे है। कर्मचारियों को मिला विपक्ष का साथ : पुरानी पेंशन के मुद्दे को विपक्ष भी खूब भुनाने में लगा है। हर विधायक की जुबान पर पुरानी पेंशन का मुद्दा है। कांग्रेस अब कर्मचारियों को यकीन दिला रही है कि सत्ता वापसी की स्थिति में पुरानी पेंशन बहाल की जाएगी। दरअसल राजस्थान में कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन की बहाली के बाद हिमाचल कांग्रेस के हौसले भी बुलंद हुए है। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री कह चुके है की कांग्रेस पार्टी सत्ता में आई तो पुरानी पेंशन योजना बहाल करेगी। राजस्थान से कांग्रेस सरकार ने इसकी शुरुआत कर दी है। अन्य राज्यों को भी इसे लागू करना पड़ेगा। पदयात्रा के समर्थन में शिमला पहुंचेगे राजन सुशांत : पूर्व सांसद डॉ. राजन सुशांत भी पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने की मांग सरकार से कर रहे है। सुशांत का कहना है कि राजस्थान में 1 जनवरी 2004 से बंद पड़ी कर्मचारियों की ओपीएस को लागू करने की घोषणा की है, इसका वे स्वागत करते हैं और उम्मीद करते है की हिमाचल सरकार भी पेंशन बहाल करेगी। राजन सुशांत पूरी तरह कर्मचारियों के समर्थन है और पदयात्रा के समर्थन में वे शिमला भी पहुंचेंगे। चर्चा का वक्त गया, अब फैसले की घड़ी : प्रदीप नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर का कहना है कि अब चर्चा के लिए कुछ शेष नहीं रहा है और फैसला लेने का वक्त है। वे कई बार मुख्यमंत्री, मंत्रियों व विधायकों तक अपनी मांग चर्चा के माध्यम से पहुंचा चुके है। पुरानी पेंशन की बहाली पर प्रदेश सरकार के ढुलमुल रवैये से परेशान सरकारी कर्मचारी भारी रोष के चलते राजधानी शिमला के लिए पैदल मार्च करने को मजबूर हैं। कर्मचारी बिलासपुर जिला मुख्यालय होते हुए 3 मार्च को शिमला पहुंचेंगे और वहां पर विधानसभा का घेराव कर पुरानी पेंशन बहाली के लिए धरना प्रदर्शन किया जाएगा। कर्मचारियों की पदयात्रा नेशनल हाईवे होकर ही जाएगी। इस दौरान उनके साथ कर्मचारी संगठन व अन्य संगठन भी जुड़ते जाएंगे। यह एक ऐतिहासिक धरना प्रदर्शन रहेगा।
छात्र अभिभावक मंच हिमाचल प्रदेश ने निजी स्कूलों में भारी फीसों, मनमानी लूट, फीस वृद्धि व गैर कानूनी फीस वसूली पर रोक लगाने के लिए प्रदेश सरकार से वर्तमान बजट सत्र में कानून बनाने की मांग की है। मंच ने प्रदेश सरकार को चेताया है कि अगर वर्तमान सत्र में कानून न बना, तो मंच आंदोलन तेज करेगा व विधानसभा पर प्रदर्शन भी करेगा। मंच के राज्य संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा है। प्रदेश सरकार की नाकामी व उसकी निजी स्कूलों से मिलीभगत के कारण निजी स्कूल लगातार मनमानी कर रहे हैं। कोरोना काल में भी निजी स्कूल टयूशन फीस के अलावा एनुअल चार्ज, कम्प्यूटर फीस, स्मार्ट क्लास रूम, मिसलेनियस, केयर, स्पोर्ट्स, मेंटेनेंस, बिल्डिंग फंड, ट्रांसपोर्ट व अन्य सभी प्रकार के फंड वसूलते रहे हैं। निजी स्कूलों ने बड़ी चतुराई से वर्ष 2021 में कुल फीस के अस्सी प्रतिशत से ज्यादा हिस्से को टयूशन फीस में बदल कर लूट को बदस्तूर जारी रखा है,जो अभिभावक कोरोना काल में रोजगार छिनने पर मनमानी फीस नहीं दे पाए हैं, उन्हें प्रताडि़त करने के लिए उनके बच्चों को या तो ऑनलाइन कक्षाओं व परीक्षाओं से वंचित किया गया या फिर उनके रिजल्ट रोक दिए गए। प्रदेश सरकार पर निजी स्कूलों से मिलीभगत का आरोप लगाया है। कानून का प्रारूप तैयार करने में ही इस सरकार ने तीन वर्ष का समय लगा दिया। जबकि महीनों पहले अभिभावकों ने दर्जनों सुझाव दिए हैं तब भी जान बूझकर यह सरकार कानून बनाने में आनाकानी कर रही है। इस बजट सत्र में कानून हर हाल में बनना चाहिए था, परंतु सरकार की संवेदनहीनता के कारण कानून अभी तक भी नहीं बन पाया है। सरकार की नाकामी के कारण ही बिना एक दिन भी स्कूल गए बच्चों की फीस में पिछले दो वर्षों में पंद्रह से पचास प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। स्कूल न चलने से स्कूलों का बिजली, पानी, स्पोर्ट्स, कम्प्यूटर, स्मार्ट क्लास रूम, मेंटेनेंस व सफाई आदि का खर्चा लगभग शून्य हो गया है, तो फिर इन निजी स्कूलों ने किस बात की पंद्रह से पचास प्रतिशत फीस बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी पर सरकार मौन है। उन्होंने कहा है कि फीस वसूली के मामले पर वर्ष 2014 के मानव संसाधन विकास मंत्रालय व पांच दिसंबर 2019 के शिक्षा विभाग के दिशानिर्देशों का निजी स्कूल खुला उल्लंघन कर रहे हैं व इसको तय करने में अभिभावकों की आम सभा की भूमिका को दरकिनार कर रहे हैं। निजी स्कल अभी भी एनुअल चार्जे? की वसूली करके एडमिशन फीस को पिछले दरवाजे से वसूलू रहे हैं व हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के वर्ष 2016 के निर्णय की अवहेलना कर रहे हैं।उच्च न्यायालय ने सभी तरह के चार्ज की वसूली पर रोक लगाई थी। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह निजी स्कूलों में फीस, पाठयक्रम व प्रवेश प्रक्रिया को संचालित करने के लिए तुरंत कानून बनाए व रेगुलेटरी कमीशन का गठन करे।
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मन की बात कार्यक्रम के प्रदेश संयोजक संजीव कटवाल ने बताया की प्रदेश भर में सभी बूथों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात कार्यक्रम को कार्यकर्ताओं द्वारा सुना गया। कार्यक्रम में कामधेनु, बिलासपुर नम्होल का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया। यह हिमाचल के लिए सौभाग्य की बात है। कटवाल ने कहा की प्रधानमंत्री मोदी मन की बात के मध्यम से पूरे देश भर में हो रहे, कार्यों से अवगत करवाते हैं। उन्होंने कहा की प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मन की बात में माध्यम से बताया की हजारों वर्षों के हमारे इतिहास में, देश के कोने-कोने में एक-से-बढ़कर एक मूर्तियां हमेशा बनती रहीं। श्रद्धा भी थी, सामथ्र्य भी था, कौशल्य भी था और विवधताओं से भरा हुआ था और हमारे हर मूर्तियों के इतिहास में तत्कालीन समय का प्रभाव भी नजर आता है। आज जब भारत अपनी आजादी के 75वां वर्ष का महत्त्वपूर्ण पर्व मना रहा है, तो देशभक्ति के गीतों को लेकर भी ऐसे प्रयोग किए जा सकते हैं। जहां विदेशी नागरिकों को, वहां के प्रसिद्ध गायकों को, भारतीय देशभक्ति के गीत गाने के लिए आमंत्रित करें। आजादी के 75 साल बाद भी कुछ लोग ऐसे मानसिक द्वंद में जी रहे हैं, जिसके कारण उन्हें अपनी भाषा, अपने पहनावे, अपने खान-पान को लेकर एक संकोच होता है, जबकि, विश्व में कहीं और ऐसा नहीं है। ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स भी आयुर्वेद के बहुत बड़े प्रशंसकों में से एक हैं। जब भी मेरी उनसे मुलाकात होती है, वह आयुर्वेद का जिक्र जरूर करते हैं। उन्हें भारत के कई आयुर्वेदिक संस्थाओं की जानकारी भी है। इस कड़ी में पदेश कार्यालय दीपकमल शिमला में प्रदेश महामंत्री त्रिलोक जम्वाल, प्रदेश संगठन महामंत्री पवन राणा, प्रदेश कोषाध्यक्ष संजय सूद, सचिव पायल वैद्या, प्यार सिंह कंवर एवं सह मीडिया प्रभारी कर्ण नंदा उपस्थित रहें।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला जैसा लगभग तय सा था विधानसभा का बजट सत्र हंगामेदार अंदाज में गुजर रहा है। विपक्ष का वाकआउट जारी है और सरकार भी कई सालों से बचती दिख रही है। बदस्तूर बरसते विपक्षी बाणों से तो जयराम सरकार किसी तरह बचने के प्रयास में है ही मगर अब तो अपने भी सवालों के शोले बरसाने में लगे है। मानों सरकार के अपने भी अब बैरी हो गए है। ज्वालामुखी से भाजपा विधायक रमेश धवाला एक बार फिर अपनी ही सरकार के खिलाफ बरसने से गुरेज नहीं कर रहे। शनिवार को सदन में प्रश्नकाल के दौरान निगमों और बोर्डों के घाटे पर उन्होंने अपनी ही सरकार को घेरा। धवाला ने घाटे से जूझ रहे निगमों और बोर्डों के सरप्लस कर्मचारियों को अन्य उपक्रमों में भेजने की मांग उठाई। धवाला खूब बोले और कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि निगमों-बोर्डों में करीब चार हजार करोड़ के घाटे की बात सामने आई है और प्रदेश के 70 फीसदी निगम-बोर्ड घाटे में हैं। व्यवस्था पर तंज कस्ते हुए धवाला ने कहा कि परिवहन निगम में चालकों और परिचालकों से अधिक अफसर हैं। इसी तरह बिजली बोर्ड में जरूरत से अधिक चीफ इंजीनियर नियुक्त हैं। उन्होंने कहा कि सरप्लस स्टाफ को अन्य उपक्रमों में भेजने के लिए नीति बनाई जानी चाहिए। रमेश धवाला की बारी पूरी हुई, तो जवाब देने को मोर्चा संभाला खुद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सीएम ने कहा रमेश धवाला टेक्निकल आदमी हैं, अच्छा होता घाटा दूर करने के सुझाव भी देते। साथ ही सीएम ये बताने से भी नहीं चूके कि बेशक हिमाचल में 11 निगम और एक बोर्ड घाटे में है, किंतु दूरदराज क्षेत्रों में लोगों की सुविधा के लिए घाटे वाले उपक्रमों को चलाना भी जरूरी है। इन्हें बंद करने का सुझाव कुछ जगह व्यावहारिक नहीं है। मसलन जनहित में बिजली बोर्ड और एचआरटीसी को बंद नहीं किया जा सकता। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की सुविधा के लिए कई रूट घाटे में चलाने पड़ते हैं। इसी तरह दुर्गम क्षेत्रों में बिजली की मेंटेनेंस करनी पड़ती है। पिछड़े वर्गों के लिए भी उपक्रम बनाए गए हैं, जिन्हें नफे-नुकसान की दृष्टि से नहीं आंका जा सकता। सरप्लस स्टाफ को लेकर सीएम ने कहा कि जानकारी जुटाने के बाद आगामी फैसला लिया जाएगा।
फर्स्ट वर्जिक्ट। रिकांगपिओ किन्नौर में प्रदेश सरकार की ओर से जल शक्ति विभाग के दो सब डिविजन खुलने का नोटिफिकेशन जारी हुआ है, जिसमें सांगला तहसील के अंतर्गत सांगला और करछम में जल शक्ति विभाग के सब डिवीजन के कार्यालय जल्द ही खुलेंगे। जलशक्ति विभाग के सब डिवीजन सांगला में एक सहायक इंजीनियर सिविल, एक वरिष्ठ सहायक, JOA IT और वाटर वर्क्स क्लर्क का पद स्वीकृत किया गया है। इस सब डिवीजन का कार्य क्षेत्र छितकुल गांव, रकछम गांव, बटसेरी गांव, थंगरंग गांव, सांगला गांव, कामरू गांव और चासू गांव शामिल किया है। वहीं, दूसरा जल शक्ति विभाग के सब डिवीज़न करछम में जूनियर इंजीनियर सिविल, वर्क इंस्पेक्टर, एक सर्वेयर और चौकीदार का पद स्वीकृत हुआ है। इसका कार्य क्षेत्र शोंग, ब्रुआ, सापनी और किल्बा शामिल किया है। इसी भांति निचार जल शक्ति विभाग का क्षेत्र निचार, कटगांव, टापरी और निगुलसरी निश्चित किया है। जल शक्ति विभाग के सब डिवीज़न रिकांगपिओ के क्षेत्र कल्पा, रिकांगपिओ और पोवारी होगा। वहीं, प्रदेश वन विकास निगम के उपाध्यक्ष सूरत नेगी ने कहा कि सांगला तहसील वासियों को 50 किलोमीटर दूर रिकांगपिओ काम करने के लिए आना पड़ रहा था और रिकांगपिओ से एसडीओ को काम देखने के लिये परेशानी आ रहा था। इसलिए इनके काम को सरल करने के लिए उन्होंने हिमाचल सरकार से कई बार इसकी सब डिवीजन खोलने की मांग किया था। वहीं, उन्होंने बताया कि किन्नौर वासियों की मांग पर पिछले साल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर 20 नवंबर,2021 में जब किन्नौर के मुख्यालय रिकांगपिओ आए थे, तब उन्होंने दो जल शक्ति सब डिवीज़न देने की घोषणा की थी। इसके लिए सांगला तहसील वासियो को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। वहीं, उन्होंने कहा कि प्रदेश भाजपा सरकारजनता की सेवा के लिए सदैव तत्पर है व जिला के प्रत्येक क्षेत्रो में समान विकास किया जा रहा है। किन्नौर में जल शक्ति विभाग के अधिशाषी अभियंता अमित सूद ने इस दो सब डिवीज़न खोलने की पुष्टि किया है और यह सब डिवीज़न अधिशाषी अभियंता रिकांगपिओ के अंडर ही काम करेंगे, जबकि इन का सुपर विज़न रिकांगपिओ आफिस के माध्यम से होगा।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने केंद्रीय विदेश मंत्री डा. एस. जयशंकर से रूस और यूक्रेन के मध्य संघर्ष के कारण यूक्रेन में फंसे प्रदेश के लोगों को सुरक्षित वापस लाने के लिए आवश्यक उपाय करने का आग्रह किया। इस संबंध में केंद्रीय विदेश मंत्री को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने विदेश मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रारंभिक सूचना के अनुसार यूक्रेन में हिमाचल प्रदेश के 130 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार यूक्रेन में फंसे राज्य के लोगों की सुरक्षा के लिए चिंतित है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रदेश के मुख्य सचिव पहले से ही विदेश सचिव के संपर्क में हैं। जयराम ठाकुर ने मंत्रालय द्वारा यूक्रेन में फंसे भारतीयों की सहायता के लिए यूक्रेन के साथ-साथ नई दिल्ली में हेल्पलाइन स्थापित करने के लिए किए गए प्रयासों की भी सराहना की।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 26 ओर 27 फरवरी को बड़ोदरा में होगी। बैठक में हिमाचल प्रदेश से पांच पदाधिकारी जिसमें पवन मिश्रा, प्रांत अध्यक्ष, पवन कुमार, प्रांत महामंत्री, डा. मामराज पुंडीर, प्रांत संगठन मंत्री, विनोद सूद, सह संगठन भीष्म जी उपस्थित रहेंगे। हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ के प्रांत महामंत्री डा. मामराज पुंडीर ने बैठक की जानकारी देते हुए कहा कि बैठक में स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव की कार्ययोजना, राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षकों की समस्याओं पर चर्चा सहित 'मेरा विद्यालय मेरा तीर्थ कार्यक्रम की रूप रेखा पर चर्चा होगी।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो सदन में यूक्रेन में फंसे हिमाचली बच्चों का मामला गुंजा। विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने यूक्रेन में फंसे हिमाचल के बच्चों को सुरक्षित लाने का मामला उठाया। मुकेश अग्निहोत्री ने पूछा कि यूक्रेन में हिमाचल के कितने बच्चे फंसे हुए हैं। हवाई सफर निजी कंपनियों के हाथ के चलते महंगे कर दिए गए हैं। सरकार उनको अपने खर्चे पर सुरक्षित लाने के लिए क्या कर रही है। इस पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सदन में जानकारी दी, कि यूक्रेन में विद्यार्थी व अन्य लोग हिमाचल के भी फंसे हुए हैं। देशभर के 20 हजार विद्यार्थी यूक्रेन में फंसे हैं। उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता है। केंद्र को लिखा है कि जब तक बच्चे यूक्रेन में हैं उनको सुरक्षित जगह रखा जाए और सुरक्षित वापस लाया जा सके। पीएम ने भी रूस के राष्ट्रपति से बच्चों की सुरक्षा की लेकर बात की है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बताया हिमाचल की कितने बच्चे वहां फंसे हैं, उसकी सही जानकारी नहीं है। यह संख्या 100 से ज्यादा ही सकती है। हिमाचल सरकार ने 1100 हेल्पलाइन में ऐसे बच्चों की जानकारी मांगी गई है। जिसमें 60 लोगों ने संपर्क किया है। उनको सुरक्षित लाने के लिए हिमाचल सरकार हर संभव प्रयास कर रही है।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा बजट सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही आज 11 बजे शुरू हुई। कार्यवाही में दिवंगत विधानसभा सदस्य कश्मीरी लाल जोशी और चमन लाल के निधन पर शोकोदगार प्रस्तुत किया गया . मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कश्मीरी लाल के निधन पर शोक व्यक्त किया और बताया कि कश्मीरी लाल का निधन 28 जनवरी 2022 को हुआ था। उनका जन्म 1938 को हरोली में हुआ था। दो बार संतोषगढ़ से विधायक भी रहे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पूर्व में विधानसभा सदस्य रहे चमन लाल के निधन पर भी दुख व्यक्त किया और बताया कि उनका निधन 77 वर्ष की आयु में 13 जनवरी 2022 को हुआ। चमन लाल 6 जनवरी 1945 को सोलन में हुआ हुआ था। 1977 में पहली बार जनता दल से विधायक बने थे। मुख्यमंत्री ने दोनों दिवंगत नेताओं के निधन पर संवेदनाएं व्यक्त की। शोकोदगार में भाग लेते हुए विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि कश्मीरी लाल सेवा भाव में समर्पित रहे और कुछ वर्षों से राजनीति छोड़कर आध्यात्म में चले गए थे। जबकि चमन लाल भी जन सेवा के लिए समर्पित रहे। वह भी दोनों नेताओं के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। शोकोदगार में सदस्य डॉ. राजीव बिंदल, राकेश सिंघा, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव सैजल, सतपाल रायजादा, बलबीर चौधरी, लखविंदर सिंह, कर्नल धनी राम शांडिल ने भी अपने आप को सम्मलित किया। विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार ने भी दोनों दिवंगत नेताओं को याद करते हुए इनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की।
भारत स्काउट एंड गाइड हिमाचल प्रदेश राज्य मुख्यालय द्वारा संस्थापक दिवस व विश्व चिंतन दिवस के अवसर पर पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। जिसके मुख्य अतिथि के रूप में हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर रहे तथा उन्हीं के हाथों से कोरोना काल में भारत स्काउट एंड गाइड हिमाचल प्रदेश द्वारा आयोजित कार्यक्रमों ओएसडीडब्लू तथा स्काउट फाइट अगेंस्ट कोरोना 2.0 के विजेताओं को पुरस्कार दिए गए, जिनमें रोवर रेंजर इकाई सोलन 2, रोवर्स आकाश ठाकुर व रोहित कुमार भी शामिल रहे तथा दो पुरस्कार जिनमें ओएसडीडब्लू के दौरान बेस्ट असाइनमेंट ऑफ स्टोरी टेलिंग बाय फोटो, वीडियोग्राफी व बेस्ट असाइनमेंट ऑफ पायनियरिंग के पुरस्कार शामिल रहे। महाविद्यालय के रोवर लीडर डॉक्टर भूपेश ठाकुर वे रेंजर लीडर डा. अर्चना गुप्ता सहित महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉक्टर नीलम कौशिक द्वारा दोनों प्रतिभागियों को बधाई दी वह भविष्य के लिए शुभ आशीष प्रदान किया।
शिमला के नारकंडा में बतनाल के पास ग्लेशियर गिरने की घटना सामने आई है। ग्लेशियर गिरने के कारण वहां से गुजर रही एक कार नंबर HP-06A- 6203 चपेट में आ गई। जिस समय ये हादसा पेश आया है उस समय कार में करीब तीन लोग सवार थे। हिमस्खलन की चपेट में आने से कार सवार चमन लाल निवासी गांव बाईकुमारसैन, स्पीटी पुत्री चमन लाल और चमल लाल की पोती इनाया को हल्की चोटें आई हैं। पुलिस चौकी नारकंडा के कर्मचारियों ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। नारकंडा अस्पताल में उपचार के बाद सभी को छुट्टी दे दी गई है।
शिमला के नारकंडा में बतनाल के पास ग्लेशियर गिरने की घटना सामने आई है। ग्लेशियर गिरने के कारण वहां से गुजर रही एक कार नंबर HP-06A- 6203 चपेट में आ गई। जिस समय ये हादसा पेश आया है उस समय कार में करीब तीन लोग सवार थे। हिमस्खलन की चपेट में आने से कार सवार चमन लाल निवासी गांव बाईकुमारसैन, स्पीटी पुत्री चमन लाल और चमल लाल की पोती इनाया को हल्की चोटें आई हैं। पुलिस चौकी नारकंडा के कर्मचारियों ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। नारकंडा अस्पताल में उपचार के बाद सभी को छुट्टी दे दी गई है।
कालीबाड़ी हाल मे आयोजित मशहूर नृत्य प्रतियोगिता “बैटल ऑफ सुपर स्टार" के ग्रांड फ़िनाले मे हिमालयन पब्लिक स्कूल रोहरु के छात्र-छात्राओ ने अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता मे टर्म-1 डांस के जूनियर वर्ग मे हिमालयन पब्लिक स्कूल रोहडू की महक जिल्टा ने बेहतर प्रदर्शन कर तीसरा स्थान प्राप्त किया। महक बचपन से ही नृत्य में रूचि रखती है और वो वो काफी लम्बे समय से प्रतियोगिता की तैयारी भी कर रही थी। महक ने बताया की उन्हें डांस करना बहुत पसंद है और वे आगे भी इसी फेल्ड में रहकर कामयाबी के नए आयाम छूना चाहती है। महक की इस तरक्की से उनके माता पिता बेहद खुश है।
जुब्बल-नावर-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र से मीडिया प्रभारी व ब्लॉक युवा कांग्रेस के महासचिव राहुल शान्टा को जिला कांग्रेस कमेटी शिमला (ग्रामीण) अनुसूचित जाति विभाग का जिला उपाध्यक्ष बनाया गया है। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव यशपाल तनैईक ने आधिकारिक तौर पर राहुल शान्टा की नियुक्ति के आदेश जारी किए। राहुल शान्टा कोटखाई की दरकोटी पंचायत से संबंध रखते हैं और समाज सेवा के साथ कई वर्षों से कांग्रेस पार्टी में सक्रिय रूप से कई पदों पर सेवाएं दे चुके हैं।
ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी भाजपा मुख्यालय दीपकमल चक्कर में तीन घंटे के लिए बैठे और जनता की समस्याओं को सुना। ऊर्जा मंत्री से प्रदेश के 78 लोग और चार प्रतिनिधिमंडल भी मिले। इस अवसर पर कई प्रकार की समस्याएं मंत्री के समक्ष आईं, जिसको उन्होंने उसी समय निपटाया। कसुंपटी मंडल के एक प्रतिनिधिमंडल ने ट्रांसफार्मर को एक स्थान से दूसरे स्थान पर बदले जाने की मांग रखी, जिसको मंत्री ने स्वीकारा। इसी प्रकार से प्रदेश भर में बिजली की लाइन शिफ्ट करने की भी सिफारिश सामने आई और प्रमोशन व ट्रांसफर की भी कई मांगे सुखराम चौधरी के समक्ष उठाई गईं। सुखराम चौधरी ने कहा की मंत्रियों के प्रदेश कार्यालय में बैठने से कार्यकर्ताओं और जनता के बीच संवाद बढ़ता है। इस प्रयास से कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचालन हो रहा है।
फर्स्ट वर्डिक्ट। रिकांगपिओ उड़ान समाज सेवा किन्नौर द्वारा नेहरू युवा केंद्र के सौजन्य से यूथ वैलनेस पॉजिटिव लाईफ स्टाईल एंड फिट इंडिया कार्यक्रम का आयोजन राजकीय उच्च विद्यालय बरी में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अध्यापक बलवीर सिंह नेगी बतौर मुख्यातिथि उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग से फूल कुमारी, पुलिस प्रशासन व सभी अध्यापक गण मौजूद रहे। इस दौरान उप प्रधान बिमला देवी ने टोपी व खतक पनाह कर मुख्यातिथियों का स्वागत किया। अध्यक्ष उड़ान समाजसेवा किन्नौर हरविंदर सिंह ने युवाओं व विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवन, लक्ष्य के प्रति सकारात्मक विचार धारा व नशे जैसे ज़हर से दूर रहने का आह्वान किया, जबकि मुख्यातिथि बलवीर सिंह नेगी ने अपने जीवन के अनुभव को साझा कर युवाओं को लक्ष्य हासिल करने तक हार न मानने की प्रेरणा दी। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कोरोना जैसे महामारी से स्वयं को बचाने व पुलिस विभाग के अधिकारियों ने लगातार बढ़ रहे नशे से दूर रहकर व समाज को जागरूक करने का आह्वान किया उड़ान समाज सेवा किन्नौर के उपप्रधान बिमला देवी, कुलदीप नेगी, भागी राम, संतराम व लक्ष्मी देवी ने नेहरू युवा केंद्र इस प्रकार के कार्यक्रम को करवाने के लिए धन्यवाद किया।
आगामी बजट सत्र से हिमाचल प्रदेश में कार्यरत हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को काफी उम्मीदें है। ये कर्मचारी एक लम्बे समय से स्थाई नीति की मांग कर रहे है, मगर अब तक आश्वासनों के सिवा कुछ खास हाथ नहीं आया। अब बजट सत्र इनके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आया है। ये बजट इस सरकार के कार्यकाल का अंतिम बजट है और इसीलिए कर्मचारियों को इससे खूब उम्मीदें है। बीते 18 सालों से आउटसोर्स कर्मचारी प्रदेश के विभिन्न विभागों में ड्यूटी दे रहे हैं लेकिन उन्हें सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली कोई भी सुविधाएं नहीं मिलती। हालांकि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए कैबिनेट की सब कमेटी का गठन जरूर किया गया परन्तु इस कमेटी की बैठक के बाद भी कर्मचारियों को बजट तक इंतजार करने का आश्वासन दिया गया। दरससल लम्बे समय से इन कर्मचारियों का ब्यौरा सरकार एकत्र करने का प्रयास कर रही है और इसी को विलम्ब का बड़ा कारण भी बताया जा रहा है। अब उम्मीद तो है परन्तु कर्मचारी पूरी तरह आश्वस्त हो ऐसा नहीं कहा जा सकता। इसीलिए सरकार के आश्वासन के बाद भी आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ ने राज्य स्तरीय बैठक कर प्रदेश के 40 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाने की मांग फिर दोहराई है। शिमला में आउटसोर्स कर्मचारियों के प्रतिनिधि जुटे और समस्याओं पर मंथन किया। हिमाचल आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ की मांग है कि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बजट सत्र में किसी ठोस नीति का प्रावधान किया जाए। इन कर्मचारियों का कहना है कि यदि इस दफे भी इन कर्मचारियों को लटकाया गया तो ये सब मिलकर सरकार के खिलाफ संघर्ष का रास्ता अपनाएंगे। महासंघ का कहना है कि प्रदेश में विभिन्न कंपनियों व ठेकेदारों द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। सरकार से ठोस नीति बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अभी तक सरकार ने इस दिशा में कोई फैसला नहीं लिया है । हर बार आश्वासन ही दिए गए। आउटसोर्स कर्मचारी सोसाइटी और कंपनियों के माध्यम से लगे हैं। ये कर्मी पिछले 18 साल से सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इन्हें स्थायी करने के बारे में सोचा नहीं जा रहा है। महासंघ का कहना है कि सोसाइटी या कंपनी विभाग की मांग के अनुसार पैनल बनाकर विभाग के पास नाम भेजती है। इसके बाद विभागीय कमेटी इंटरव्यू लेकर आउटसोर्स पर रखती है। पर इसके बाद भी इनको नियमित नहीं किया जा रहा। हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ का कहना है कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में हजारों कर्मचारियों को आउटसोर्स पर रखा गया है लेकिन सरकार द्वारा इनके नियमितीकरण के लिए कोई नीति नहीं बनाई गई है और न ही इनके शोषण को कम करने के लिए भी कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए हैं। इनका कहना हैं कि कोरोना काल जैसी विकट परिस्थिति में भी सरकार इनकी सेवाएं लेती रही, मगर जब बात इनकी मांगो को पूरी करने की आती हैं तो ये ही कर्मचारी सरकार की आंखों में चुभने लगते हैं। मुश्किल में कोई साथ नहीं देता : शैलेन्द्र हिमाचल आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष शैलेन्द्र शर्मा के अनुसार कुछ दिन पहले ही एक मामला सामने आया था जिसमें बिजली विभाग में नियुक्त एक आउटसोर्स कर्मचारी की करंट लगने से हालत गंभीर हो गई। उसे आईजीएमसी तक रेफर कर दिया गया मगर न तो ठेकेदार ने उसकी कोई सहायता की और न ही सरकार ने। इसी तरह आउटसोर्स पर तैनात नर्सेज, अध्यापक और जल शक्ति विभाग के कर्मचारियों के शोषण की खबर भी आये दिन सामने आती रहती है। कमीशन काटकर वेतन देते हैं ठेकदार : आउटसोर्स कर्मचारी वे कर्मचारी हैं जिनको सरकारी विभागों में अनुबंध आधार पर रखा जाता है। यानी कि ये सरकारी विभाग में तो हैं पर सरकारी नौकरी में नहीं हैं। इनकी नियुक्तियां या तो ठेकेदारों के माध्यम से की जाती है या किसी निजी कंपनी के माध्यम से। ये कर्मचारी काम तो सरकार का करते है मगर इन्हें वेतन ठेकेदार या कंपनी द्वारा मिलता है। न तो इन्हें सरकारी कर्मचारी होने का कोई लाभ प्राप्त होता है न ही एक स्थिर नौकरी। इन्हें जब चाहे नौकरी से निकाला जा सकता है। सरकार द्वारा वेतन तो दिया जाता है मगर ठेकेदार की कमिशन के बाद ही इन तक तक पहुंच पाता है। .......................................................................... मांग : वेतनमान में विसंगतियां दूर हो - हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने की सरकार से मांग फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ (एचपीएसएलए) ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि नए वेतनमान में विसंगतियों को दूर किया जाएं। संघ का कहना है कि हिमाचल सरकार का 1972 से कर्मचारियों से करार है कि पंजाब पे कमीशन को हिमाचल के कर्मचारियों पर यथावत रूप में लागू किया जाएगा, उसे सरकार पूरा करे। साथ ही संघ ने चेताया है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी जाती तो जल्द ही एसोसिएशन जनरल हाउस बुलाकर सबकी सहमति से अगली रणनीति तैयार करेगी और सरकार को इसका खमियाजा भुगतना पड़ेगा। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ का कहना है कि पंजाब में 2016 के बाद जितने भी नियमित कर्मचारी हैं उन सबको नियुक्ति की तिथि से गुणांक 2.59 और 2.25 दिए जा रहे हैं, जिनसे क्रमश: उनकी इनिशियल स्टार्ट 43000 और 47000 रुपए बनती है। इनकी मांग है कि जिस प्रकार पंजाब में बढ़े हुए ग्रेड पे 5400 के साथ 2016 में नियुक्त हुए नए प्रवक्ताओं को 47000 से इनिशियल स्टार्ट दिया है, इसी तरह हिमाचल में भी दिया जाए। संघ के प्रदेश महासचिव संजीव ठाकुर ने कहा कि पंजाब पे कमीशन को हिमाचल के कर्मचारियों पर यथावत रूप में लागू किया जाएं। ........................................................................................ पदोन्नति में समय अवधि कम करने पर जताया आभार फर्स्ट वर्डिक्ट . शिमला हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष दुनी चंद ठाकुर एवं प्रदेश महामंत्री नेकराम ठाकुर ने बिजली बोर्ड में कार्यरत जूनियर टी मेट एवं जूनियर हेल्पर की पदोन्नति के लिए समय अवधि 4 वर्ष से 3 वर्ष करने पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का आभार व्यक्त किया है। उन्हें 14 फरवरी 2022 की बिजली बोर्ड की बीओडी की बैठक में स्वीकृति दी गई है जिसकी पुष्टि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने अपने प्रेस संबोधन में की है। तकनीकी कर्मचारी संघ ने भारतीय मजदूर संघ का भी धन्यवाद प्रकट किया है क्योंकि 8 फरवरी 2022 को भारतीय मजदूर संघ ने मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में ये मुद्दा उजागर किया था। इस बैठक में तकनीकी कर्मचारी संघ ने भी जूनियर टी मेट और जूनियर हेल्पर के विषय को बड़ी गंभीरता से रखा था जिस पर मुख्यमंत्री ने बिजली बोर्ड को उनकी घोषणा के अनुरूप आदेश करने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष ने हिमाचल सरकार वह बिजली बोर्ड प्रबंधन से यह भी मांग की है कि बिजली बोर्ड के कर्मचारियों को भी संशोधित वेतनमान तुरंत प्रभाव से दिए जाएं क्योंकि हिमाचल सरकार ने अन्य विभागों के कर्मचारियों को इस माह के वेतन को संशोधित वेतनमान के अनुसार वेतन देने के आदेश किए हैं जिस पर बिजली बोर्ड के कर्मचारी भी स्वभाविक तौर पर नए वेतन की आस लगाए हुए हैं। ............................................................................ पुरानी पेंशन : इंतजार की इन्तेहां हो गई, फिर विधानसभा घेराव की तैयारी फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला इंतजार की इन्तेहां हो गई है और अब कर्मचारी बात मानने के मूड में बिलकुल भी नजर नहीं आ रहे। पुरानी पेंशन बहाली के लिए कर्मचारियों की अनगिनत याचनाएं धरी की धरी है पर सुनवाई होती नहीं दिख रही। सुनवाई होती भी है तो कच्चे पक्के आश्वासन कर्मचारियों को थमा दिए जाते है, पर मांग को पूरी तरह मानने से सरकार बचती हुई दिखाई दे रही है। प्रदेश के हर विधायक, हर मंत्री के दर पर दस्तक देने के बावजूद कुछ ठोस होता नहीं दिख रहा। इसी बीच विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने जा रहा हैं और संभवतः एक बार फिर कर्मचारियों का उग्र प्रदर्शन देखने को मिले। बस धर्मशाला के तपोवन की जगह कर्मचारी शिमला के चौड़ा मैदान में डेरा डालेंगे और पुरानी पेंशन के लिए विधानसभा का घेराव होगा। पुरानी पेंशन बहाली के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहा न्यू पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ अब प्रदेश सरकार से आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार है। पुरानी पेंशन बहाली के लिए महासंघ ने प्रदेश के बजट सत्र के दौरान 3 मार्च को सरकार का घेराव करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय मंडी में आयोजित न्यू पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ की राज्य स्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक में महासंघ के साथ जुड़े प्रदेश भर के पदाधिकारी व कर्मचारी पहुंचे और तय किया गया कि अब याचना नहीं रण होगा। रणनीति विधानसभा के घेराव की बनाई गई है। प्रदेश के हज़ारों कर्मचारियों से शिमला आने की दरख्वास्त की जा रही और महासंघ की माने तो अधिकतर की सहमति मिलती भी दिखाई देने लगी है। यानि एक बार फिर विधानसभा के शीतसत्र के दौरान दिखा दृश्य शिमला में बजट सत्र के दौरान देखने को मिल सकता हैं। अब तक गठित नहीं हुई कमेटी : 10 दिसंबर को धर्मशाला के दाड़ी मैदान में भी कर्मचारियों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन सरकार के सामने किया था। एक नहीं अनेक संगठन पेंशन की मांग के लिए एकत्र हुए थे और अंत में सरकार को झुकना पड़ा और पुरानी पेंशन बहाली के लिए एक कमेटी गठन करने का आश्वासन दिया गया। अलबत्ता कमेटी अब तक गठित नहीं हो पाई है जिससे कर्मचारियों में नाराज़गी है। महासंघ का कहना है कि सरकार अब कमेटी के गठन को छोड़ पुरानी पेंशन बहाल करें। 2009 की अधिसूचना लागू ,पर कर्मचारी मांगे पुरानी पेंशन : हाल ही में सरकार द्वारा कैबिनेट बैठक के दौरान 2009 की अधिसूचना लागू करने को मंजूरी दी गई है। मगर उससे भी कर्मचारी पिघलते हुए नजर नहीं आ रहे। कैबिनेट के अप्रूवल के बाद एनपीएस के तहत आने वाले सभी कर्मचारियों के लिए मृत्यु व अपंगता पर फैमिली पेंशन का प्रावधान किया गया है, मगर कर्मचारी अपनी एक मात्र मांग पुरानी पेंशन बहाली पर अटके हुए है। सरकार को कोई वित्तीय घाटा नहीं होगा : प्रदीप न्यू पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर का कहना हैं कि बजट सत्र के दौरान शिमला में प्रदेश भर से एक लाख से अधिक कर्मचारी एकत्रित होंगे। पुरानी पेंशन के लिए मंडी से शिमला तक पैदल यात्रा निकाली जाएगी और फिर विधानसभा पहुंचकर बजट सत्र के दौरान सरकार का घेराव किया जाएगा। ठाकुर का कहना है कि धर्मशाला में रैली के बाद महासंघ की प्रदेश के सरकार के साथ बैठक भी हुई थी। बैठक में प्रदेश सरकार को सुझाव दिया गया था कि यदि सरकार पुरानी पेंशन बहाल करती है, तो सरकार को 2009 की अधिसूचना लागू की वृद्धि होगी। परन्तु 2 महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने अभी तक कमेटी तक का गठन नहीं किया है नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन का 10 प्रतिशत पैसा जबरदस्ती कंपनी को दिया जा रहा है और सरकार अपना 14 प्रतिशत पैसा भी कंपनी को दे रही है जिससे सरकार और कर्मचारी दोनों को नुकसान हो रहा है। नई पेंशन स्कीम से सिर्फ और सिर्फ कंपनी को ही फायदा हो रहा है जो सही नहीं है l पुरानी पेंशन पर सियासत भी भरपूर : पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर सियासत भी तेज है। विपक्ष कर्मचारियों को आश्वासन देकर सत्ता वापसी की स्थिति में पेंशन बहाल करने के सपने दिखा रहा है और भाजपा कर्मचारियों को याद दिला रही है कि प्रदेश में एनपीएस लाने वाली कांग्रेस ही थी जो आज इसे कर्मचारियों के अधिकारों का हनन बता रही है। पेंशन के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का कहना है कि इस वक्त कोई भी प्रदेश पुरानी पेंशन देने की स्थिति में नहीं है। जहां कांग्रेस की सरकार है वहां भी पुरानी पेंशन कर्मचारियों को नहीं मिल रही। ऐसे में पहले से वित्तीय घाटे में चल रहे हिमाचल प्रदेश के लिए भी पुरानी पेंशन की वापसी करवाना आसान नहीं होगा।
हिमाचल सरकार प्रदेश के किसानों व् बागवानों को अब कृषि करने की नयी सुविधा प्रदान करने जा रही है । प्रदेश के खेतों और बगीचों में जल्द ही ड्रोन खाद और दवाओं का स्प्रे करते नजर आएंगे। सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने ड्रोन की खरीद और किराये पर सुविधा देने के लिए नौ कंपनियों का चयन किया है।अब कोई भी विभाग या व्यक्ति शुल्क चुका कर यह सेवा ले सकेगा। ड्रोन को कृषि, बागवानी, मेलों, दवाइयां पहुंचाने, सुरक्षा दृष्टि के साथ अन्य आयोजनों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। सुविधा लेने के लिए आईटी विभाग से संपर्क करना होगा। विभाग की ओर से चयनित कंपनियों की सेवा लेने के लिए दाम तय किए गए हैं। दाम चुकाने के बाद इसकी सुविधा ले सकेंगे। विभाग के माध्यम से ड्रोन की खरीद भी की जा सकेगी। इस नई सुविधा से किसानों व बागवानों का समय भी बचेगा व किसानों को नई तकनीक से खेती करने का मौका भी मिलेगा। ख़ास बात यह है की प्रदेश सरकार ने कांगड़ा जिले के शाहपुर आईटीआई में ड्रोन प्रशिक्षण स्कूल खोलने का फैसला लिया है। यहां किसानों व् बागवानों को ड्रोन चलने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शाहपुर आईटीआई में शुरू होने वाले ड्रोन प्रशिक्षण स्कूल में दसवीं पास कोई भी व्यक्ति सात दिनों के कोर्स के लिए प्रवेश ले सकेगा। तमिलनाडु और तेलंगाना में हुआ ट्रायल -- केंद्र सरकार द्वारा आम बजट में फसलों पर दवा स्प्रे करने के लिए भी ड्रोन के इस्तेमाल करने का ज़िक्र किया गया था। बता दें की इस के चलते अब प्रदेश सरकार ने भी इस ओर कदम बढ़ाया है। अभी तक देश में तमिलनाडु और तेलंगाना में ड्रोन से खाद व स्प्रे करने का सफल ट्रायल किया गया है , जिसके बाद अब देश के अन्य प्रदेशों में भी इस नई सुविधा को शुरू करने की कवायद तेज हो गई है।
प्रदेश सरकार हर विभाग को हाईटैक करने के प्रयास में जुटी हुई है । इसी के चलते अब सरकार पंचायती राज विभाग में कुछ बदलाव करने जा रही है । जानकारी के अनुसार सरकार ने परिवार रजिस्टर को ऑनलाइन करने का फैसला लिया है। इस सन्दर्भ में मुख्य सचिव रामसुभग सिंह ने परिवार रजिस्टर ऑनलाइन करने के निर्देश विभाग को जारी किये है। बताया जा रहा है की ग्रामीण विकास विभाग के साथ मिलकर आईटी विभाग सॉफ्टवेयर बनाएगा। तीन महीने में इसका डाटा बेस तैयार किया जाएगा। खास बात यह है की परिवार रजिस्टर ऑनलाइन होने से विभिन्न कार्यों के लिए पंचायत सचिव के कार्यालय से नकल लेने के लिए लोगों को चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। प्रदेश सचिवालय में हुई बैठक में मुख्य सचिव रामसुभग सिंह ने परिवार रजिस्टर ऑनलाइन करने के निर्देश दिए । इस कार्य के लिए मुख्य सचिव रामसुभग ने ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक की अध्यक्षता में एक कमेटी भी गठित की है। बता दें की रजिस्टर में परिवार के सभी सदस्यों की एक पंजीकृत इकाई होती है। इसमें परिवार के सभी लोगों का विवरण दर्ज होता है। यह पंचायत सचिव के कार्यालय में होता है। इसमें उस ब्लॉक के तहत आने वाली सभी ग्राम पंचायतों के परिवारों की जानकारी और सदस्यों का विवरण होता है। परिवार रजिस्टर की नकल की जरूरत सरकार की ओर से दी जा रही विभिन्न सुविधाओं को प्राप्त करने में पड़ती है। इसकी नकल लेने के लिए ब्लॉक सेक्रेटरी के पास आवेदन देना पड़ता है। इस दस्तावेज के माध्यम से कोई भी सरकारी कागजात आसानी से बनवा सकते हैं। यह सुविधा शुरू होने से अब लोगों को पंचायत के चक्कर नहीं काटने होंगे। अभी पंचायतों में सेक्टरी द्वारा यह दस्तावेज लोगों को दिया जाता है।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला शिमला की तहसील कोटखाई के बाघी के समीप एक अल्टो कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई है, जो गाड़ी (एचपी-63-8522) बताई जा रही है। एक्सीडेंट समय करीब 2:35 बजे बताया जा रहा है। गाड़ी में सवार दो व्यक्ति थे कांन चनद सन ऑफ लेट भागचंद गांव नालाबण डाकघर कडीवन की मौके पर मौत हो गई है तथा हरदयाल सन ऑफ अकलु राम को काफी चोटें आई हैं, इसको उपचार के लिए कोटखाई ले जाया गया है।
यूजी एवं पीजी परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि आगे बढ़ाने की उठाई मांग फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने शनिवार विभिन्न छात्र मांगों को लेकर परीक्षा नियंत्रक को ज्ञापन सौंपा। विद्यार्थी परिषद ने ज्ञापन के द्वारा प्रशासन से मांग कि छात्रों से संबंधित इस मांग को प्रशासन जल्द पूरा करें। इकाई अध्यक्ष आकाश नेगी ने बताया कि आज विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता अपनी मांग को लेकर परीक्षा नियंत्रक से मिले। अपनी मांग को लेकर आकाश ने कहा कि आजकल विश्वविद्यालय में फाइनल एग्जाम के ऑनलाइन फॉर्म भरने का दौर चला है, लेकिन हम देखते हैं कि अभी भी सैकड़ों छात्रों की लॉगिंन आईडी अभी तक नहीं खुल रही है, जो कि प्रशासन की खामियों को दर्शाती है। लॉगिंन आईडी नहीं खुलने के कारण छात्र अपने एग्जाम फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं। इसमें तकनीकी खामियां होने के कारण इसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ता है, जो कि छात्रों के साथ सरासर अन्याय है। आकाश ने कहा कि प्रशासन दो बार परीक्षा फॉर्म भरने की तिथियों को आगे बढ़ा चुका है, लेकिन अभी भी बहुत से छात्रों की लॉगिंन आईडी खुल नहीं रही है, जिसके कारण छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसीलिए विद्यार्थी परिषद मांग करती है कि परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि जो कि 19 फरवरी है, उसे आगे बढ़ा दिया जाए, ताकि सभी विद्यार्थी अपना परीक्षा फॉर्म भर पाए। आकाश ने कहा कि विद्यार्थी परिषद आशा करती है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द से जल्द उनकी इन मांगों को पूरा करेगा। साथ ही साथ उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए भी कहा कि अगर जल्द से जल्द इन छात्र मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो आने वाले समय में प्रशासन को विरोध का सामना करना पड़ेगा, जिसके लिए प्रशासन स्वंय जिम्मेदार होगा।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रदेश के युवाओं से अपने क्षेत्र के विकास के लिए रचनात्मक योगदान देने का आह्वान किया है। वह आज शिमला से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सराज छात्र कल्याण संघ द्वारा राजकीय वल्लभ स्नातकोत्तर महाविद्यालय मंडी में आयोजित वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम शाश्वत को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सम्मान और स्वाभिमान के साथ प्रगति के पथ पर आगे बढ़कर ही जीवन के ध्येय को प्राप्त किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सराज विधानसभा क्षेत्र प्रगति के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में सराज क्षेत्र की 78 पंचायतों में सड़क सुविधा उपलब्ध है और क्षेत्र में 40 से अधिक बसों का परिचालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सराज क्षेत्र के लोग देश व प्रदेश के हर क्षेत्र के विकास में अपना योगदान सुनिश्चित कर रहे हैं। उन्होंने सराज के युवाओं से अपनी संस्कृति के विकास व सांस्कृतिक मूल्यों के अनुसार जीवन में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने वल्लभ स्नातकोत्तर महाविद्यालय मंडी में अध्ययन के दौरान अपनी मधुर स्मृतियां भी साझा की तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन के लिए सराज छात्र कल्याण संघ की सराहना की। उन्होंने कहा कि सराज छात्र कल्याण संघ ने कोरोना संकटकाल के दौरान मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है। वर्तमान प्रदेश सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में अनेक महत्त्वकांक्षी योजनाएं आरंभ की हैं, जिनमें अखंड शिक्षा ज्योति-मेरे स्कूल से निकले मोती, अटल आदर्श विद्यालय योजना, स्वर्ण जयंती सुपर-100 योजना, स्वर्ण जयंती ज्ञानोद्य, कलस्टर श्रेष्ठ विद्यालय योजना सहित कई योजनाएं शामिल हैं। कोरोना काल के दौरान सरकारी विद्यालयों व शैक्षणिक संस्थानों में शैक्षणिक गतिविधियों को सुचारू बनाए रखने के लिए ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था की गई। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश नई शिक्षा नीति को लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। प्रदेश के गठन के बाद केवल शिमला में ही राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी। वर्तमान प्रदेश सरकार के सार्थक प्रयासों से मंडी में दूसरा राज्य विश्वविद्यालय 1 अप्रैल, 2022 से कार्यशील हो जाएगा। इससे मंडी, कुल्लू व बिलासपुर जिला सहित प्रदेश के अन्य जिलों के छात्रों को भी उच्च शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने सराज छात्र कल्याण संघ को सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए अपनी ऐच्छिक निधि से 51 हजार रुपए प्रदान करने की घोषणा भी की। इस कार्यक्रम में संकुल विश्वविद्यालय मंडी के कुलपति सीएल चंदन, राजकीय वल्लभ स्नातकोत्तर महाविद्यालय मंडी के प्रधानाचार्य वाईवी शर्मा, भाजपा सराज मंडल के अध्यक्ष भागीरथ शर्मा, सराज छात्र कल्याण संघ के अध्यक्ष टिकम ठाकुर, भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य गुलजारी लाल ठाकुर, उपमंडलाधिकारी मंडी रीतिका जिंदल अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला जनवरी माह में शिमला साइबर सेल को पुलिस थाना सदर, कोटखाई व बालूगंज से ऑनलाइन ठगी की 5 शिकायतें प्राप्त हुईं थीं, जिसमें शातिरों ने दोस्त व रिश्तेदार बन के शिकायतकर्ताओं से ठगी कर के राशि को कैशफ़्री गेट-वे के द्वारा ऑनलाइन गेम प्लेटफॉर्म, जैसे की बैटबॉल 11, ऑनलाइन रम्मी इत्यादि पर लगा दिया था, जिस पर साइबर सेल शिमला ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करीब 85 हजार रुपए को होल्ड करवा कर शिकायकर्ताओं के खाते में वापस करवा दिया है। अतः शिमला पुलिस जनता से आग्रह करती है की किसी भी अनजान फाेन कॉल आने पर उस नंबर की बिना जांच किए किसी भी प्रकार की बैंक खाते संबंधी जानकारी OTP/CVV इत्यादि साझा न करें व न ही राशि को बिना जांच किए अनजान खाता में ट्रांसफर करें तथा किसी भी प्रकार की ऑनलाइन धोखाधड़ी होने पर इसकी सूचना तुरंत नज़दीकी पुलिस थाना या पुलिस कंट्रोल रूम नंबर 112 पर दर्ज करवाएं।
मार्च 2020 के बाद हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में आज दोबारा रौनक लौट आई है। नर्सरी-केजी और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चे पहली बार आज स्कूल पहुंचे। ग्रीष्मकालीन छुट्टियों वाली पाठशालाओं में नौवीं से 12वीं कक्षा के स्कूल पहले से ही खुले हैं। अब शीतकालीन अवकाश वाले स्कूल भी खुलेंगे। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही पहली से आठवीं कक्षा में दाखिला प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। वहीं, विद्यार्थियों को सरकार की ओर से उपलब्ध करवाई जाने वाली निशुल्क पाठ्यपुस्तकें भी आज सो मिलना शुरू हो जायेंगी। जिससे स्कूलों में खासी चहल पहल देखी गई। कोविड नियमों की पालना के साथ प्री प्राइमरी (नर्सरी-केजी) से लेकर आठवीं कक्षा तक के सभी स्कूल खोल दिए गए हैं। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए तय एसओपी के तहत हर स्कूल में माइक्रो प्लान बनाया गया है। कोरोना एसओपी के तहत कक्षाएं लगाई जाएंगी। लंच ब्रेक और आने-जाने का समय कक्षावार अलग-अलग होगा। कक्षाओं में एक बेंच में एक विद्यार्थी बैठाया जाएगा। कमरे की क्षमता अनुसार पचास फीसदी विद्यार्थियों को ही एक कक्षा में बैठाया जाएगा। शेष विद्यार्थियों की क्लास दूसरे कमरे में लगाई जाएगी। स्कूलों में फेस मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है। प्रार्थना सभा और खेलकूद गतिविधियों पर पूर्व की तरह रोक है। स्कूलों में मिड डे मील परोसने पर अभी रोक रहेगी।
भाजपा महामंत्री एवं मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार त्रिलोक जम्वाल ने कहा कि 6 नवंबर 2017 को आए एनजीटी के फैसले के बाद शहर के कोर एरिया में हर तरह के निर्माण कार्य पर पाबंदी लगी हुई थी, वहीं नॉन कोर एरिया में भी सिर्फ ढाई मंजिला भवन निर्माण की छूट दी जा रही थी, अब सरकार ने जो नया डेवलपमेंट प्लान बनाया है उसके अनुसार कोर एरिया में छूट मिलेगी। भाजपा जो कहती है, वो करके दिखाती है, जो काम पिछले 40 साल में नहीं उससे हमारी सरकार के कर दिखा है। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में कोर एरिया और नॉन कोर एरिया में रिहायशी भवनों के अलावा दुकानों, व्यावसायिक परिसरों और होटलों के निर्माण के लिए सरकार ने नया डेवलपमेंट प्लान तैयार किया है। जल्द ही इस प्लान को कैबिनेट द्वारा पारित भी कर दिया जाएगा, यह शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज को दूरगामी सोचा का परिणाम है। कोर और नॉन कोर एरिया में बिना पेड़ काटे मकान का निर्माण कर सकते हैं। नया डेवलपमेंट प्लान एनजीटी के आदेश पर तैयार किया गया है और नवंबर 2017 में एनजीटी की पाबंदी के बाद प्रदेश उच्च न्यायालय में एक याचिका भी दायर लंबित है। टीसीपी के एक्ट में प्रावधान है कि हर शहर का अलग से प्लान बनाया जाए। इसे अम्रुत योजना के तहत जीएसआई प्रक्रिया के तहत तैयार किया गया है, इस नए डेवलपमेंट प्लान को साडा और कंसल्टेंट द्वारा तैयार किया गया है।
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने गुरू रविदास जयंती पर प्रदेशवासियों को बधाई दी है। राज्यपाल ने कहा कि गुरू रविदास एक महान आध्यात्मिक संत थे, उनके आध्यात्मिक विचार व शिक्षाएं आज भी समाज को प्रेरणा देती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरू रविदास ऐसे महान संत थे, जिन्होंने भक्ति आंदोलन का नेतृत्व किया और लोगों को शांति, सद्भाव और समानता का संदेश दिया। उन्होंने लोगों से आपसी भाईचारे तथा सामाजिक समानता जैसे गुणों को अपनाने का आग्रह किया।
पंकज सिंगटा। फर्स्ट वर्डिक्ट शहरी विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज भाजपा के वरिष्ठ नेता है और उन चंद नेताओं में शामिल है जिन्हें मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का करीबी माना जाता है। विधानसभा चुनाव से पहले शिमला नगर निगम के चुनाव होने है जिन्हें सत्ता का सेमिफाइनल कहा जा रहा है। भारद्वाज शिमला शहरी निर्वाचन क्षेत्र से विधायक है और ऐसे में जाहिर है शिमला नगर निगम का चुनाव उनके लिए निजी तौर पर बहुत महत्वपूर्ण रहने वाला है। इसके साथ ही इन दिनों प्रदेश में नए जिलों की मांग जोरों पर है और कहीं न कहीं सरकार में शामिल कई नेताओं का भी इस ओर एक सकारात्मक रवैया रहा है। ऐसे ही कई मसलों पर फर्स्ट वर्डिक्ट ने सुरेश भारद्वाज से खास चर्चा की। भारद्वाज ने हर मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी। वहीं कांग्रेस नेता विक्रमादित्य सिंह के साथ उनकी सियासी नोक झोंक के प्रश्न पर उन्हें अपने ही चिर परिचित अंदाज में अपनी बात रखी। पेश है इस बातचीत के मुख्य अंश .... सवाल : विधानसभा चुनाव से पहले शिमला नगर निगम चुनाव होने है। आप शिमला शहर से विधायक है और कहीं न कहीं निजी तौर पर भी आपके लिए यह चुनाव महत्वपूर्ण रहने वाला है। उपचुनाव में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। किस तरह से शिमला नगर निगम चुनाव को लेकर तैयारियां है ? उत्तर : हिंदुस्तान में चुनाव आते रहते है। 2017 से भी हम अगर देखे तो हमने पहले नगर निगम का चुनाव लड़ा। उसके बाद हमने विधानसभा का चुनाव लड़ा, 2019 में लोकसभा के चुनाव हुए, उसके बाद 2019 में ही उन सीटों पर चुनाव हुए जो खाली हुई थी। इसके बाद 2021 में पंचायती राज संस्थाओं और नगर निगम के चुनाव हुए। फिर उपचुनाव हुए। कुछ ही समय में अब शिमला नगर निगम का चुनाव है और उसके साथ ही विधानसभा का चुनाव आएगा। आजकल भी कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे है और हमारे बहुत सारे कार्यकर्त्ता उसमें व्यस्त है। कुल मिलाकर चुनाव एक सतत प्रक्रिया है और इसमें हार जीत चलती रहती है, तो इसमें कोई बहुत बड़ा मसला नहीं है। शिमला नगर निगम ने इस बार बहुत अच्छे काम किये है और मैं समझता हूँ कि उसके आधार पर भाजपा वहां पर विजय हासिल करेगी। सवाल :क्या इस बार भी नगर निगम के चुनाव पार्टी चिन्हों पर करवाए जायेंगे ? उत्तर : पहले नगर निगम चुनाव बिना पार्टी सिंबल के होते थे लेकिन पिछले नगर निगम के चुनाव पार्टी सिंबल पर हुए है। अब इस पर सरकार में विचार किया जाएगा कि ये पार्टी सिंबल पर हो या इन्हें फ्री सिंबल कर दिया जाये। अभी इस पर चर्चा नहीं हुई है। इस पर मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल से चर्चा की जाएगी और उसके बाद तय किया जाएगा। सवाल : शिमला नगर निगम में कुछ नए वार्डों बनाये गए है और कांग्रेस इसे लेकर विरोध भी जता रही है। क्या कहेंगे ? उत्तर : डीलिमिटेशन एक क़ानूनी प्रक्रिया है और जनसंख्या के अनुसार वार्ड बनते है। कांग्रेस के समय में 2017 में डीलिमिटेशन की गयी लेकिन वो एक तरफ़ा की गयी और इर्रेशनल थी। प्रशासन ने प्रयास किया है कि जो बहुत बड़े वार्ड है उनको दूसरों के बराबर किया जाए और जो छोटे वार्ड है उनकी जनसंख्या इधर उधर से डाल कर बड़ा किया जाए। ये सब प्रशासन ने किया है और उनका निर्णय है। सच कहूं तो अभी तक डीलिमिटेशन में क्या किया है वो मैंने विस्तार पूर्वक नहीं देखा है क्यूंकि जिस दिन इसका नोटिफिकेशन आया था मैं उस दिन से टूर पर हूँ। डीलिमिटेशन की प्रोसेस में अभी ओब्जेक्शन्स का टाइम है। यदि किसी को उसमे आपत्ति हो और वह आपत्ति दर्ज़ कर सकता है और प्रशासन उसे ठीक करेगा। सवाल : कांगड़ा के अंदर नए जिलों को बनाने की मांग जोरों पर उठ रही है और भाजपा का भी एक सकारात्मक रवैया इसकी ओर दिख रहा है। बीते दिनों तो एक फेक न्यूज़ भी वायरल हुई थी कि नए जिले बना दिए गए है। तो क्या नए जिले बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी ? उत्तर : मैं मानता हूँ कि प्रशासनिक दृष्टि से जो छोटी इकाइयां है वो विकास कार्यों में लाभकारी रहती है। जयराम ठाकुर की सरकार में हमने बहुत स्थानों पर उपमंडल बनाये है। जिन्हें कांग्रेस की सरकारें अनदेखा करती थी, उन स्थानों पर हमने नए उपमंडल बनाए है। इसी तरह कई स्थानों पर तहसील यूनिट बनाए गए है। जिलों को लेकर भी विचार जब होगा, मन्त्रिमण्डल के समुख आएगा तो हम अपनी राय उसमे देंगे, लेकिन ये मुख्यमंत्री के ऊपर निर्भर करता है कि उनके आंकलन में जिला बनाना उपयोगी है या नहीं है। जब वह विषय को मन्त्रिमण्डल में लाएंगे तो हम सब विचार करेंगे पर अभी तक सीधे तौर पर यह विषय चर्चा के लिए नहीं आया है। फेक न्यूज़ मैंने भी देखी है, उसमे तो जिले बना दिए गए है, अब किसने बनाए है यह मुझे मालूम नहीं है। सवाल : 2022 विधानसभा के चुनाव बहुत नज़दीक है और भाजपा मिशन रिपीट को लेकर बात कर रही है और कांग्रेस कह रही है कि वो 2022 में सत्ता में फिर वापसी करेगी। विधानसभा चुनाव को किस तरह से देखते है? उत्तर : देखिये अगर आप हिंदुस्तान की बात करे तो आज कांग्रेस बिलकुल हाशिये पर है और आपको कांग्रेस मुक्त भारत बनता दिखाई दे रहा होगा। जो अभी 5 राज्यों के चुनाव भी हो रहे है उसमें उत्तर प्रदेश जैसा बहुत बड़ा राज्य है, वहां पर कांग्रेस कभी थी, अब तो उसकी गिनती ही नहीं होती है। तो कांग्रेस का जो भविष्य है वो बहुत सुखद नहीं है। केवल मात्र एक माता है, एक बेटी है, एक बेटा है उसके इर्दगिर्द सारी कांग्रेस चलती है। हिमाचल प्रदेश में भी यदि देखा जाए तो इनके पास न कोई पॉलिसी है ना कोई विज़न है और न कोई लीडरशिप है। तो ऐसे में कांग्रेस का भविष्य बहुत ज्यादा नहीं है। हम आंकलन केवल एकाध चुनाव के जीतने हारने पर करेंगे तो उससे पूरी विधानसभा के चुनाव के रुख का अंदाज़ा नहीं लगा सकते है। इस बार जयराम ठाकुर की सरकार ने गरीब हितेषी सरकार बन कर दिखाया है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार इस बार रिपीट करेगी और हिमाचल प्रदेश में इतिहास बनेगा, कांग्रेस कहीं देखने को नहीं मिलेगी। सवाल : आप वरिष्ठ नेता है और मुख्यमंत्री के करीबी भी माने जाते है। प्रदेश भर में पुरानी पेंशन का मुद्दा गूंज रहा है जिसको लेकर कर्मचारी संघर्षरत है। इन दिनों डॉक्टर्स भी हड़ताल कर रहे है, और भी कई कर्मचारी मसले है। आपको नहीं लगता कि विधानसभा चुनाव में इसका असर पड़ सकता है ? उत्तर : जो ऑर्गेनाइज़्ड सेक्टर होता है, जो सरकार से वेतनमान प्राप्त करता है उनमे अपने वेतन विसंगतियों को लेकर इस प्रकार की नाराज़गी और प्रसन्नता चलती रहती है। हिमाचल प्रदेश ऐसा राज्य है जहाँ पर पंजाब वेतनमान प्रदेश की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के बावजूद भी जारी किया गया है। आगे भी जो विसंगतियां है उनको भी दूर किया जा रहा है। अब आपको इस बात को भी ध्यान में रखना चाहिए कि 2015 में जब स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की सरकार थी, तब पुलिस कर्मचारियों के साथ एक अन्याय किया था, उनको 8 साल तक इनिशियल स्टेज पर रखा गया बल्कि जो उनके साथ के कर्मचारी थे उनको 2 साल में पूरा हो जाता था। उस अन्याय को भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने दूर किया है। इसी प्रकार से और भी बहुत सारे ऐसे मसले है जिनको ये सरकार दूर कर रही है। हिमाचल प्रदेश का कर्मचारी जानता है कि कौन सी सरकार उनके हित में है। जयराम सरकार कर्मचारियों की हित चिंतक सरकार है इसलिए कर्मचारी मांग भी इसी सरकार से करते है। जयराम ठाकुर की सरकार ने पैट, पेरा, पीटीए इन सबको नियमित कर दिया है और बाकी जो हमारे आउटसोर्स के कर्मचारी है उनके लिए कैबिनेट सब कमेटी बनाई है। उसके लिए विचार विमर्श हो रहा है कि किस प्रकार से उनको राहत दी जाएगी। बाकि भी जो कर्मचारियों के मसले है समय-समय पर वह उठते भी रहते है और उनका निदान भी होता रहता है। मैं समझता हूँ कि ये कोई ऐसे मसले नहीं है कि जिन पर हिमाचल प्रदेश की सरकार के ऊपर असर पड़ेगा। जयराम सरकार कर्मचारियों के हित में हरसंभव कदम उठा रही है। सवाल : पिछले सत्र में सवर्ण आयोग की मांग रखी गयी थी और जमकर हंगामा हुआ था। सरकार ने मांग तो मान ली थी लेकिन फिलहाल क्या स्थिति है सवर्ण आयोग को लेकर ? सवर्ण आयोग का यदि गठन नहीं होता है तो बजट सत्र के दौरान घेराव की चेतावनी भी दी गई थी। उत्तर : देखिये हिमाचल सरकार ने उस दौरान मांग में ली थी लेकिन यह तय नही है कि आयोग का नाम क्या होगा। जरूरी नही है कि उसका नाम सवर्ण आयोग ही रखा जाए। उसका नाम कुछ भी हो सकता है। जितना मेरी जानकारी है धर्मशाला में ही सेशन के दौरान इस हेतु नोटिफिक्शन जारी कर दिया गया था। बाकि प्रक्रिया मुख्यमंत्री के संज्ञान में है, वो इस पर उचित समय पर निर्णय लेंगे और उसके अनुसार काम होगा। सवाल : आजकल सोशल मीडिया पर आपकी और विक्रमादित्य की नोंक झोंक या कह लीजिये वार पलटवार लगातार चल रहा है, उसको लेकर क्या कहेंगे ? उत्तर : मेरा विक्रमादित्य के साथ नोंक झोंक का प्रश्न ही पैदा नहीं होता है। कोई वार या पलटवार नहीं है। विक्रमादित्य अपने शिमला ग्रामीण से विधायक है, वह अपनी बात कर सकते है। शायद पार्टी में वो और ज्यादा आगे बढ़ने की कोशिश करते है तो शायद इस लिए बहुत सारे मसलों पर वो बात करते है। हमारी उनके साथ कोई बराबरी नहीं है क्यूंकि वो राजा है, अब आजकल राजा तो रहते नहीं है लेकिन फिर भी राजा बने है। इसलिए हमारी उनके साथ किसी प्रकार की कोई बराबरी नहीं है। मैं शिमला शहर से विधायक हूँ वो शिमला ग्रामीण में अपने पिता की सीट खाली करके वहां से विधायक बने है। तो वो अपना काम करते है और मैं अपना काम करता हूँ, तो वार - पलटवार का कोई सवाल पैदा नहीं होता।
फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला हिमाचल प्रदेश समस्त विभाग लिपिक वर्ग कर्मचारी महासंघ ने प्रदेश सरकार से छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत लिपिक वर्ग को हो रहे सीधे-सीधे नुकसान व परेशानियों को देखते हुए जल्द इस वर्ग के वेतन निर्धारण बारे संशोधन की मांग की है। संगठन के राज्याध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा व महासचिव एल डी चौहान ने संयुक्त ब्यान में कहा कि सचिवालय, न्यायालय सहित हर विभाग की लिपिक वो श्रेणी है जो एक प्रशासनिक अधिकारी, नेता, शिक्षक से लेकर हर छोटी- बड़ी सभी श्रेणियों का रिकॉर्ड, स्थापना सहित लेखा-जोखा रखती है। बावजूद इसके पिछले वेतन आयोगों की सिफारिशों से लेकर वर्तमान तक इस श्रेणी को वेतन लाभ के मामले में चतुर्थ श्रेणी से भी नीचे लाया जा रहा है ,जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बात है। बात चाहे न्यायालय के केस रिप्लाई की हो, कैबिनेट के लिए एजेंडा तैयारी की हो, किसी भी श्रेणी की भर्ती या पदोन्नति की हो, विधानसभा सत्रों की हो या मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्री की विशेष स्पीच की तैयारी की हो, एक लिपिक वर्ग ही पूरी फ़ाइल तैयार करके पटल तक पहुंचाता है लेकिन अफसोस इससे सम्बंधित संगठनों के कर्मचारी नेताओं की लापरवाही व सुस्त कार्यप्रणाली की वजह से आज ये श्रेणी बैकफुट पर है। जबकि दूसरी श्रेणियों के कर्मचारी संगठनों ने अपनी एकता के दम पर पूर्व में सरकारों को वोटबैंक के दबाव में लेकर अपने वेतनों में लिपिक वर्ग से कहीं ऊपर की बढ़ोतरी करवाई है। चौहान ने कहा कि दो वर्ष पूर्व इस श्रेणी के उत्थान हेतु संगठन का गठन किया गया था तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी इस संगठन को तवज्जो दी थी और इस संगठन द्वारा रखी गयी मांग लिपिक से वरिष्ठ सहायक पदोन्नति हेतु कार्यकाल 10 से 7 साल करने को पूरा किया था। वर्तमान में लिपिक वर्ग के प्रोबेशन पीरियड सहित अन्य मसलों पर वेतन आयोग की सिफारिशों से हो रहे नुकसान बारे संगठन द्वारा मांग पत्र मुख्यमंत्री व अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त को दिया जा चुका है और आवश्यक संशोधन बारे आश्वस्त किया गया है। चौहान ने कहा कि उनसे सम्बंधित हर संगठन सदैव सरकार के साथ खड़ा रहा है, और दूसरे संगठनों की तरह छोटी-छोटी बातों पर विरोध की बात नहीं करता है। प्रदेश सरकार जल्द वेतन आयोग में लिपिक वर्ग को हो रहे घाटे पर आवश्यक संशोधन कर अधिसूचित करें, यदि सरकार फिर भी हर विभाग की इस महत्वपूर्ण श्रेणी को अनदेखा करती है तो मजबूरन संगठन को हजारों लिपिकों के साथ सड़कों पर उतरकर विरोध करना पड़ेगा, जिसकी लिए सरकार स्वयं जिम्मेदार होगी।
फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता मांग रहे कर्मचारी सरकार के आगे गुहार लगा कर थक चुके है मगर सरकार की तरफ से अब तक आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिल पाया। 27 नवंबर 2021 को हुई जेसीसी की बैठक में इन कर्मचारियों से ये वादा किया गया था कि उनकी मांगों को पूरा करने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा और फिर कर्मचारियों की ये मांग पूरी की जाएगी। न अब तक मांग पूरी हुई और न ही कमेटी का गठन। ये वादों का सिलसिला नया नहीं है, काफी पुराना है। ये वो ही कर्मचारी है जिनसे कहा गया था कि जाती हुई सरकार की बात मत सुनो आती हुई सरकार की मानो। ये शब्द पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने 2017 विधानसभा चुनाव के दौरान कहे थे। इन कर्मचारियों से वादा किया गया था कि भाजपा के सत्ता में आते ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया जाएगा और अनुबंध कर्मचारियों को नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता प्रदान करने हेतु कार्य किया जाएगा। खैर ये बात काफी पुरानी हो गई है मगर इसके बाद हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा किया गया वादा भी पूरा नहीं हुआ है। जाहिर है ऐसे में कर्मचारियों में रोष है। इनका कहना है कि जहां हर कर्मचारी वर्ग की मांगें पूरी की जा रही तो फिर इन्हें अनदेखा क्यों किया जा रहा है। हिमाचल अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन का एक प्रतिनिधि मंडल संगठन बीते दिनों प्रदेश महामंत्री अनिल सेन की अध्यक्षता और अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के प्रदेश महामंत्री राजेश शर्मा की अगुवाई में अपनी प्रमुख मांग यानी नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता व अनुबंध काल को कुल सेवा काल में जोड़ने के संदर्भ में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिला l मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया कि कमेटी का गठन करके अतिशीघ्र उनकी मांग को पूरा किया जाए l हिमाचल अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन का कहना है कि इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर वर्तमान सरकार अनुबंध से नियमित कर्मचारियों को हल्के में ना लें, क्योंकि उनकी संख्या 70 हजार के करीब है और यदि उनके परिवार के सदस्यों की संख्या को भी गिन लिया जाए तो यह 3 लाख के करीब हो जाती है यह संख्या मिशन रिपीट में बहुत बड़ी भूमिका निभा सकती है l यदि सरकार अनुबंध से नियमित कर्मचारियों को वरिष्ठता देती है व अनुबंध काल को कुल सेवाकाल में जोड़ती है तभी मिशन रिपीट होगा l नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता नहीं तो मिशन रिपीट भी नहीं । अतः सरकार अति शीघ्र अनुबंध से नियमित कर्मचारियों को वरिष्ठता व अनुबंध काल को कुल सेवाकाल में जोड़ने की घोषणा करें । डिमांड चार्टर में नंबर चार पर थी मांग : 27 नवंबर 2021 को शिमला में हुई संयुक्त सलाहकार समिति की बैठक में अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के डिमांड चार्टर में नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता की मांग को नंबर चार पर रखा गया था l बैठक में इस हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन करने व संगठन के पदाधिकारियों को भी इसमें शामिल किये जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन ढाई महीने बीत जाने पर भी कमेटी का गठन नहीं हो पाया है l हिमाचल अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन का कहना है कि सरकार ने अनुबंध कर्मचारियों का कार्यकाल 3 से 2 वर्ष तो कर दिया परंतु उन कर्मचारियों का क्या कसूर जिन्होंने 8 वर्ष,6 वर्ष,5 वर्ष और 3 वर्ष का लंबा कार्यकाल अनुबंध पर काटा है l कमीशन पास करके क्या कोई गुनाह किया है : सेन हिमाचल अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन के प्रदेश महामंत्री अनिल सेन ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए एक स्थाई नीति बनाने जा रही है जो कि एक स्वागत योग्य कदम है, परंतु दूसरी तरफ प्रदेश के विभिन्न विभागों में संवैधानिक तरीके से कमीशन पास करके व बैच वाइज आधार पर भर्ती अनुबंध से नियमित कर्मचारियों की इस जायज मांग को लगातार दरकिनार कर रही है l प्रदेश सरकार यह बताएं कि अनुबंध से नियमित कर्मचारियों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों? उन्होंने कमीशन पास करके कोई गुनाह किया है क्या? नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता न मिलने के कारण अनुबंध से नियमित कर्मचारी मानसिक पीड़ा और कुंठा में हैं l एक ही विभाग में एक ही पद पर 5 वर्षों से कार्यरत कर्मचारी जूनियर हो गया है,और सिर्फ 5 महीने तक रहने वाला कर्मचारी सीनियर हो गया है, यह कहां का न्याय है l जूनियर हुए सीनियर : वर्ष 2008 में बैचवाइज और कमीशन आधार पर लोकसभा आयोग और अधीनस्थ कर्मचारी चयन आयोग द्वारा कर्मचारियों की नियुक्तियां अनुबंध के तौर पर की जाने लगी l पहले अनुबन्ध काल 8 साल का हुआ करता था जो बाद में कम होकर 6 फिर 5 और फिर 3 साल हो गया और हाल ही में ये दो साल हो गया है। ये अनुबन्ध काल पूरा करने के बाद यह कर्मचारी नियमित होते है। अनुबंध से नियमित होने के बाद इन कर्मचारियों की अनुबंधकाल की सेवा को उनके कुल सेवा काल में नही जोड़ा जाता, इसी को लेकर संगठन को आपत्ति है। इनका कहना है कि अनुबंध काल अधिक होने से पुराने कर्मचारियों को वित्तीय नुक्सान के साथ प्रमोशन भी समय पर नहीं मिल पाती l अब मांग है कि उनको नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता प्रदान की जाए ताकि उन्हें समय रहते प्रमोशन का लाभ मिल सके। अनुबंध काल की सेवा का वरिष्ठता लाभ ना मिलने के कारण उनके जूनियर साथी सीनियर होते जा रहे हैं।


















































