राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने हिमाचलवासियों को गणेश चतुर्थी पर हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं दी हैं। अपने शुभ संदेश में राज्यपाल ने कहा कि गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है, जो पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि सभी देवताओं में प्रथम आराध्य भगवान गणेश जी की सब पर अपार कृपा बनी रहे और समाज में सौहार्द व प्रेम का वातावरण कायम रहे। मुख्यमंत्री ने अपने शुभ सन्देश में सभी को गणेश चतुर्थी की मंगलकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पावन अवसर हर किसी के जीवन में सुख, शान्ति और आरोग्य लेकर आए। उन्होंने कहा कि विघ्न विघ्नेश्वर भगवान गणेश जी सभी के हर प्रकार के कष्टों का निवारण करेंगे।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला की दृष्टिबाधित पीएचडी छात्रा एवं बेहतरीन गायिका मुस्कान को हिमाचल प्रदेश के लिए भारत निर्वाचन आयोग का यूथ आइकन बनने पर बधाई दी। वह युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने कहा कि राज्य की बेटियां समाज में बेहतर प्रर्दशन कर रही हैं और समाज मेें महत्वपूर्ण योगदान भी दे रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला शिमला के चिड़गांव के दूर-दराज गांव सिंदासली की रहने वाली मुस्कान ने साबित किया है कि मन में इच्छा हो तो किसी भी प्रकार की बाधा लक्ष्य प्राप्त करने से नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा कि मुस्कान की इस उपलब्धि ने हमें गौरवान्वित किया है।
मंडियों में सेब के रेट औंधे मुंह गिरने के बाद बागवानों ने अपनी फसल के विपणन के लिए नया तरीका निकाला है। शिमला जिले के कोटगढ़ के बागवान अपना प्रीमियम क्वालिटी का सेब ट्रायल के तौर पर एक किलो के पैक ऑफ सिक्स में बेचेंगे। इसके लिए बागवानों ने चंडीगढ़, दिल्ली और गुड़गांव के सुपर मार्केट और ग्रॉसरी स्टोर से संपर्क साधा है। बागवानों को उम्मीद है कि एक किलो का पारदर्शी डिब्बा150 से 200 रुपये में बिकेगा। इन दिनों मंडियों में बढ़िया क्वालिटी का सेब औसतन 1500 से 1800 रुपये प्रति पेटी बिक रहा है। 25 किलो की पेटी के बागवानों को प्रतिकिलो 60 से 70 रुपये मिल रहे हैं।
पेन्सिलवेनिया राष्ट्रमण्डल की भारत और संयुक्त अरब अमीरात की विशेष दूत कनिका चौधरी ने वीरवार को जायका मुख्यालय वन विभाग पोटर हिल का दौरा किया। मुख्य परियोजना निदेशक जायका वानिकी परियोजना के साथ उन्होंने इस दौरान बैठक कर बताया कि वानिकी परियोजना के उददेश्य से पेन्सिलवेनिया राष्ट्रमंडल का प्रतिनिधित्व कर रही है जिसके तहत परस्पर इस संबध में किए जा रहे कार्यो की उपयोगिता को सांझा किया जा सके। बैठक के दौरान अतिरिक्त मुख्य अरण्यपाल एवं मुख्य परियोजना अधिकारी जायका नागेश गुलेरिया ने प्रदेश में चल रही जायका फोरस्टी परियोजना की गतिविधियों से अवगत करवाया । उन्होंने बताया कि प्रदेश में 800 करोड़ रू0 की जायका फोरेस्टी योजनाऐं सात वन वृतों, 18 खण्डों तथा 61 रेंजों में क्रियान्वित की जा रही है जिसके तहत मण्डी, कुल्लू, बिलासपुर, शिमला, किन्नौर एवं लाहौल स्पिति जिले शामिल है। ंउन्होंने बताया कि वानिकी परिस्थितिकीय तंत्र प्रबन्धन योजना अथवा सामुदायिक जैव विविधता प्रबन्धन योजना को सभी हितकारकों की भागेदारी सुनिश्चित करते हुए योजनाऐं बनाई जा रही है । उन्होंने बताया कि आजीविका घटकों के तहत 382 स्वंय सहायता समूहों का गठन किया गया है इसके तहत 345 समूह महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे है जिनमें से 80 उद्यमी योजनाओं में 15 आय सृजन एवं वृद्धि की दृष्टि से कार्य किया जा रहा है । उन्होंने विशेष दूत को विभिन्न पर्यावरण, सामाजिक आर्थिक व औषधीय इस्तेमाल वाले चरमा औषधीय पौधा जो लाहौल स्पिति और किन्नौर के प्राकृतिक वातावरण और सीमांत भूमि पर उगता है के बारे में भी जानकारी दी । उन्होंने बताया कि जायका फोरेस्ट्री परियोजना के तहत चरमा के एक लाख पौधे लाहौल स्पिति वन मंडल में आगामी वर्ष तक लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है । कनिका चौधरी ने प्रदेश की सम्पन्न जैव विविधता की सराहना करतु हुए इसके प्रचार प्रसार की विधि और औषधीय गुणों तथा विभिन्न चरमा औषधी के विभिन्न उत्पादों के संबध में जानकारी प्राप्त करने के लिए उत्सूकता जाहिर की। उन्होंने इस अवसर पर चीनार का पौधा भी रोपित किया। इस दौरान हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रो0 अरविन्द कुमार भटट, जडी बूटी प्रकोष्ट के सेवानिवृत निदेशक डा0 आरसी कंग और श्री राजेश शर्मा व जायका परियोजना प्रबंधन के अधिकारी व कर्मचारी भी उपस्थित थे।
डी.ए.वी महाविधयालय कोटखाई में नवागुनतकों के लिए बी ए / बी कॉम द्वितीय एव तृतीय वर्ष के छात्रों द्वारा फ्रेशर पार्टी का आयोजन किया गया जिसमें बतौर मुख्ययातिथि पाण्डली पंचायत की प्रधान शशि चौहान ने शिरकत की। मंच का संचालन बी कॉम द्वितीय वर्ष के छात्र आनंद ने किया। कार्यक्रम का आगाज़ बी ए तृतीय वर्ष की छात्राओ अस्मिता और वंशिका ने मुख्यातिथि को शॉल व पुष्पगुच्छ देकर किया। बी ए द्वितीय वर्ष की छात्रा अनिता ने मुख्यातिथि का महाविद्यालय में आने के लिये धन्यवाद किया और बीए/ब कॉम प्रथम वर्ष के छात्रों का स्वागत किया। तत्पश्चात नए छात्रों के लिए अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जिसमें मॉडलिंग, म्यूजिकल चेयर और डमशीराज आदि आकर्षण का केन्द्र रही। सभी नए छात्रों ने इन प्रातियोगिताओ में बढ़चढ़ कर भाग लिया। इसमें छै छात्रों का अगले राउंड के लिए चयन किया गया। उनमें से ही मिस और मिस्टर फ्रेशर चुने गए। चुने गए छात्रों में मिस फ्रेशर ईशा और मिस्टर फ्रेशर रितिक रहे। जज की भूमिका मे डाक्टर जोगिंदर दुल्टा, डॉ कमलेश वर्मा और दिनेश शर्मा रहे। मुख्यातिथि ने मिस व मिस्टर फ्रेशर को सम्मानित किया और छात्रों को उज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी तथा अपने व्यक्तिगत जीवन को छात्रों के साथ सांझा किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं भी डी ए वी कोटखाई से ही स्नातक स्तर की शिक्षा ग्रहण की है। आज यहां आकर गौरवान्वित महसूस कर रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों के जीवन मे इस फ्रेशर पार्टी का अहम योगदान है क्योंकि ये दिन सभी को जीवन मे याद रहता है। अन्त में महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ राजकुमार जीस्टू ने मुख्यातिथि का धन्यवाद किया और बताया कि वह स्वयं को बहुत गौरवान्वित महसूस कर रहे है कि मुख्यातिथि इस महाविद्यालय से संबंध रखती है और कोटखाई क्षेत्र में ग्रामीण प्रधान के रूप मे सेवाए दे रही है जो इस महाविद्यालय के लिये गर्व की बात है।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने वीरवार को नई दिल्ली में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य एम सिंधिया से भेंट की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से मंडी जिले में ग्रीन फील्ड हवाई अड्डे के निर्माण तथा शिमला, भुन्तर और कांगड़ा में हवाई अड्डों के विस्तारीकरण से संबंधित स्वीकृतियां शीघ्र प्रदान करनेे का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक लोकप्रिय पर्यटन गंतव्य है और हवाई अड्डों के निर्माण और विस्तारीकरण से पर्यटकों के आगमन में वृद्धि होगी जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा व रोजगार सृजन की सम्भावनाएं भी बढ़ेगी। उन्होंने उड़ान योजना के तहत किराया घटाने के लिए केंद्रीय मंत्री तथा केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया और कहा कि उड़ानों को सस्ता करना सार्वजनिक हित में एक बड़ी पहल है। केंद्रीय मंत्री ने विभाग के अधिकारियों को मामले में तेजी लाने के निर्देश दिए और इसकी प्रगति बारे जानकारी देने को कहा। उन्होंने राज्य को हर संभव सहायता प्रदान करने का आश्वासन भी दिया। मुख्य सचिव राम सुभग सिंह तथा प्रधान आवासीय आयुक्त एस.के. सिंगला भी बैठक में उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने वीरवार को नई दिल्ली में भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द से भेंट की। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को प्रदेश के राज्यत्व की स्वर्ण जयन्ती के उपलक्ष्य में विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करने के लिए हिमाचल प्रदेश में आने का औपचारिक निमंत्रण दिया। उन्होंने राष्ट्रपति को जानकारी दी कि इस वर्ष 25 जनवरी को राज्य के 50 वर्ष पूर्ण हुए हैं और स्वर्ण जयंती के अवसर पर राज्य में वर्षभर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार तथा मुख्य सचिव राम सुभग सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने वीरवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भेंट की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से 100 मिलियन डाॅलर के एशियाई विकास बैंक के प्रथम चरण की परियोजना को पुनः आरम्भ करने का आग्रह किया। इस परियोजना का उद्देश्य राज्य में विश्व स्तर की अधोसंरचना का निर्माण कर राज्य में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि परियोजना के प्रथम चरण में 20 उप-परियोजनाएं शामिल हैं और कहा कि राज्य सरकार अटल टनल रोहतांग के दोनों छोर पर अधोसंरचना विकसित कर इस स्थल को बड़े पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करना चाहती है। केंद्रीय मंत्री ने एशियाई विकास बैंक परियोजना को पुनः आरम्भ करने के पर विचार करने का आश्वासन दिया और शीघ्र इससे संबंधित प्रस्ताव भेजने को कहा। केंद्रीय वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री को विकास में गति के लिए शीघ्र निधि तथा स्वीकृति प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय अधोसंरचना पाइपलाईन का उपयोग करने को कहा। उन्होंने मुख्यमंत्री को कोविड टीकाकरण की प्रथम खुराक के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन के लिए बधाई दी। मुख्य सचिव राम सुभग सिंह ने बैठक में बहुमूल्य सुझाव दिए। प्रधान आवासीय आयुक्त एस के सिंगला भी बैठक में उपस्थित थे।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता एवं देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्मदिवस 17 सितम्बर को है। माननीय प्रधानमंत्री जी सदैव गरीब, वंचित, दलित, आदिवासी, पिछड़ों एवं किसानों के कल्याण हेतु समर्पित रहते हैं। दशकों की उपेक्षा के बाद समाज के इन वर्गों की आवाज को नरेन्द्र मोदी की सरकार में सुना जा रहा है और वह अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए भी सशक्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह सुखद संयोग है कि हम सबके यशस्वी नेता माननीय नरेन्द्र मोदी का प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं देश के प्रधानमंत्री के रूप में 7 अक्तूबर, 2021 को लगातार 20 वर्ष का कार्यकाल जनता के आशीर्वाद से पूरा हो रहा है। 7 अक्तूबर, 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री बने तथा 2014 में विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री बने, लोकतंत्र में जननेता के रूप में यह अवसर बहुत ही कम लोगों को प्राप्त होता है, यह माननीय प्रधानमंत्री जी की निरन्तर बढती हुई लोकप्रियता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष हम सभी कार्यकर्ता आम जनमानस के साथ उनके जन्मदिवस को सेवा सप्ताह के रूप में विभिन्न सेवा के कार्यक्रमों के माध्यम से मनाते हैं एवं माननीय प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु की कामना करते हैं । इस वर्ष माननीय प्रधानमंत्री का जन्मदिवस एवं उनके 20 वर्ष जनसेवक के रूप में कार्यकाल का एक साथ सुखद संयोग हो रहा है। कश्यप ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी के माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के निर्देशानुसार “ सेवा और समर्पण अभियान "17 सितम्बर से 07 अक्तूबर, 2021 तक विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मनायेंगे। इसके माध्यम से सेवा के महत्व तथा समाज एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव को जन जागृत करेंगे। उन्होंने कहा भाजपा युवा मोर्चा मोदी मेला का आयोजन करेगी सभी जिला स्तरीय भाजयुमो समितियां पिछले 7 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए कार्यों को दर्शाती प्रदर्शनी का आयोजन करेंगी । साथ ही ज़िला स्तर पर रक्त दान शिविरों का आयोजन, आज़ादी का अमृत महाउत्सव कार्यक्रम, 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर ओर स्वछता से सम्मान अभियान, 25 सितंबर पंडित दीनदयाल जयंती पर मोदी का अंत्योदय अभियान और अनेकों अभियान चलाएगी भाजपा।
करुणामूलक संघ ने आज यानी वीरवार को अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष अश्वनी ठाकुर से मिल कर उन्हें मांग पत्र व ज्ञापन पत्र सौंपा। हिमाचल करूणामुलक संघ के प्रदेशाध्यक्ष अजय कुमार की अध्यक्षता में करुणामूलक आश्रितों का प्रतिनिधिमंडल अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष अश्वनी ठाकुर से मिलने सचिवालय पंहुचा था। उन्होंने अश्वनी ठाकुर से जेसीसी की बैठक में करुणामूलक नौकरियों को बहाल करने की मांग की। साथ ही उन्होंने समस्त विभागों, बोर्डों, निगमों में लंबित पड़े करुणामूलक आधार पर दी जाने वाली नौकरियों के केस जोकि 7 मार्च 2019 की पॉलिसी में आ रहे हैं, उन्हें वन टाइम सेटलमेंट के तेहत सभी को एक साथ नियुक्तियाँ दी जाने की मांग की है। बता दें कि करुणामूलक आधार पर नौकरी देने के मामलों पर अभी सरकार कोई अंतिम फैसला नहीं ले पाई है। जबकि सरकार के पास विभिन्न विभागों में करुणामूलक के लंबित करीब 4500 मामले पहुंचे हैं और प्रभावित परिवार करीब 15 साल से नौकरी का इंतजार कर रहे हैं। कई विभागों में कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने के बाद आश्रित परिवार की महिला ने बच्चे छोटे होने के कारण नौकरी नहीं ली थी।
एचआरटीसी पेंशनर कल्याण संघ शिमला खंड की मासिक बैठक राज्यस्तरीय कमेटी के प्रधान सत्य प्रकाश शर्मा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में संगठन से जुड़े 100 से अधिक सदस्यों ने भाग लिया। जिला महासचिव दयाल सिंह कंवर ने बताया कि बैठक में पेंशनरों की मांगों एवं समस्याओं पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि बैठक में सभी प्रवक्ताओं ने सरकार व निगम प्रबन्धन की द्वेषपूर्ण रवैये को लेकर रोष व्यक्त किया। बैठक के दौरान मंडी में होने वाली आक्रोश रैली के आयोजन पर चर्चा की गई। सभी पेंशनरों ने रैली को सफल बनाने लिए मंडी पहुँचने की अपील की। उन्होंने बताया कि सभी वक्ताओं ने सरकार द्वारा समय पर फ़ीड देने के बावजूद पेंशनर्ज की पेंशन रोकने पर प्रबन्धन के प्रति रोष व्यक्त किया तथा तुरन्त पेंशन देने का अनुरोध किया। सभी सदस्यों व प्रवक्ताओं ने प्रदेश भर के एचआरटीसी पेंशनर से इस यज्ञ को सफल बनाने के लिए मंडी पहुँचने के आह्वान किया।
दिल्लीः हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर ने बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात की। सीएम ने कार्यालय की ओर से जारी वक्तव्य के मुताबिक मांडविया को राज्य की संपूर्ण पात्र आबादी, कोविड-19 रोधी टीके की पहली खुराक टीकाकरण पूरा करने की सफलता से अवगत करावाया। ठाकुर ने कहा कि "राज्य ने 103 प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया है" जिसमें प्रवासी मजदूर और पर्यटक भी शामिल हैं। ठाकुर ने केंद्रीय मंत्री को यह भी बताया कि राज्य सरकार 30 नवंबर तक पात्र आबादी को टीके की दूसरी खुराक देने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए काम कर रही है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात की और उनसे राज्य के लिए 'दवाइयों के विशाल फॉर्मा पार्क' को मंजूरी देने का आग्रह किया। तत्पश्चात सीएम ने कहा कि हिमाचल प्रदेश एशिया में फार्मास्यूटिकल हब है और 'दवाइयों के विशाल फॉर्मा पार्क' को मंजूरी देने से राज्य में औद्योगीकरण को बढ़ावा मिलेगा और साथ ही साथ लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
कांग्रेस विधायक व पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। सुक्खू ने कहा कि भाजपा सरकार को कोरोना से लड़ने के बजाय जनमंच की चिंता ज्यादा है। कोविड महामारी की तीसरी लहर का खतरा अभी टला नहीं है। रोजाना 150-200 से ज्यादा नए केस मिल रहे हैं। 3-4 लोग संक्रमण से अपनी जान भी गंवा रहे। उन्होंने कहा है कि सरकार को जनमंच के जरिए राजनीति चमकाने की जगह जनता की जान बचाने को तवज्जो देनी चाहिए। अभी प्रदेश में जनता को कोविड की पहली ही डोज लगी है। दूसरी डोज लाखों लोगों को लगनी बाकी है। सरकार को यह लक्ष्य भी जल्दी पूरा करना चाहिए। 18 साल से कम उम्र के लिए अभी टीका ईजाद नहीं हुआ है। जल्दी इनके टीकाकरण की कोई संभावना नहीं दिख रही। इसलिए सरकार को अभी जनमंच शुरू करने से बचना चाहिए। क्योंकि, इन आयोजनों से लोगों व किशोर संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। सुक्खू ने कहा कि प्रदेश की पात्र जनता को पहली डोज लगाने का श्रेय स्वास्थ्य कर्मियों व अग्रणी कोरोना योद्धाओं को जाता है। सरकार को पीठ थपथपाने के साथ ही इन्हें सम्मानित भी करना चाहिए। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि प्रदेश में सेवा का अधिकार कानून सख्ती से लागू किया जाए। सेवा का अधिकार आयोग बनाएं। ताकि लोगों के काम तय समय पर हो सकें।
प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आइजीएमसी में इन दिनों चल रहे लंगर विवाद की सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश जारी कर दिए है। जांच का जिम्मा एडीएम लॉ एंड ऑर्डर शिमला राहुल चौहान को सौंपा गया है। एडीएम आगामी 15 दिनों में सरकार को जांच की रिपोर्ट सौंपेगे। शनिवार को आइजीएमसी प्रशासन ने ऑलमाइटी ब्लैसिंग संस्था का सामान अवैध बताकर बाहर निकलवा दिया था। जिसके बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था। इस वाक्य के बाद अस्पताल प्रशासन ने इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की थी। मामले पर आगामी कदम उठाते हुए अब सरकार ने जिला प्रशासन को इसकी जांच का दायित्व सौंपा है। हालांकि अभी भी अस्पताल में संस्था की ओर से चलाया गया लंगर सुचारू रूप से चल रहा है।
शिमला: बीते दिन आईजीएमसी शिमला में स्क्रब टाईफस से 19 वर्षीय युवती की मौत हो गई। युवती मंडी जिले की रहने वाली थी। युवती को पिछले महीने आईजीएमसी शिमला में उपचार के लिए लाया गया था। युवती का लगातार चिकित्सकों की निगरानी में उपचार चल रहा था, लेकिन गंभीर अवस्था के चलते लड़की की मौत हो गई। बता दें कि अस्पताल में इस बीमारी से यह पहली मौत है। वंही अस्पताल में युवती की मौत के बाद से हड़कंप मच गया।
हिमाचल प्रदेश में जहां इन दिनों सेब के रेट गिरने का मुद्दा गरमाया हुआ है, वहीं खरीद के कई मामलों में भी सेब बागवानों को पूरा भुगतान नहीं किया गया है। इस सीजन में भी कई बागवानों को आढ़तियों ने तय 15 दिन बाद भी उनका मेहनताना नहीं दिया है। ऐसे में इस साल की उपज की कमाई फंसने से भी वे आशंकित हैं। कई आढ़तियों को लदानियों ने बागवानों से खरीदे गए माल का पूरा भुगतान नहीं किया है। ऐसे में इस बार भी कई बागवानों का पैसा डूब सकता है। उन्हें एक तो रेट में गिरावट होने की मार पड़ रही है, वहीं कमाई का पैसा डूबने की आशंका सता रही है। आने वाले दिनों में सीआईडी के पास शिकायतें और भी बढ़ सकती हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने सेब बागवानों के साथ हो रहें हर स्तर पर अन्याय पर चिंता प्रकट की है। उन्होंने कहा कि सरकार न तो बागवानों की पीड़ा को ही समझ रही है और न ही उनके लिए कोई राहत दे रही है। उन्होंने कहा है कि आज प्रदेश में सेब बागवानों को बहुत ही विकट स्थिति से गुजरना पड़ रहा है। एक तरफ सड़कों की खस्ता हालत दूसरी तरफ सेब व्यापारियों की मनमर्ज़ी के चलते उन्हें इसके उचित दाम भी नही मिल रहे है। राठौर ने कहा कि प्रदेश में पूर्व कांग्रेस सरकार के समय रोहड़ू, गुम्मा, जरोल टिक्कर,ओड्डी,और पतलीकूहल व रिकांगपिओ के एचपीएमसी के परिसरों में सीए स्टोरों के अतिरिक्त ग्रेडिंग मशीनें भी स्थापित की गई थी, पर विभाग और सरकार की बेरुखी के चलते आज इन मशीनों का सही उपयोग नही हो रहा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने एपीडा से इसके लिए धन उपलब्ध करवाया गया था। राठौर ने कहा है कि एचपीएमसी की कार्यप्रणाली को लेकर प्रदेश के बागवानो में भारी रोष है। उन्होंने कहा कि बाहर से आने वाले सेब व्यपारियों पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है। कुछ व्यपारी बागवानों को चुना लगा कर फरार हो रहें है, इसलिए उन्ही व्यपारियों को सेब खरीद की अनुमति दी जानी चाहिए जिनकी सरकार के पास बैंक गारंटी हो।
परिवहन मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने आज यानि बुधवार को विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक की। बिक्रम सिंह ठाकुर ने बताया कि हिमाचल प्रदेश को इलैक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के लिए देश भर में माॅडल राज्य के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इलैक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सत्त विकास की ओर अग्रसर होने में मदद मिलेगी और राज्य में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश इलैक्ट्रिक वाहन नीति के कार्यान्वयन होने से लोग पुराने वाहनों के स्थान पर नए वाहन लेने के समय इलैक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के लिए प्रेरित होंगे। परिवहन मंत्री ने कहा कि लोगों की सुविधा के लिए प्रदेश में वाहनों के चार्जिंग स्टेशन और चार्जिंग प्वाईंट अधिक से अधिक संख्या में विकसित किए जाएंगे। यह सुविधा पैट्रोल पम्पों और अन्य स्थानों पर भी उपलब्ध होगी। इसके लिए हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड को नोडल एजेंसी के रूप में चिन्हित किया गया है। बैठक में नादौन में ट्रांसपोर्ट नगर तथा ड्राईविंग प्रशिक्षण और जांच केन्द्र स्थापित करने के बारे में विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन जेसी शर्मा, हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम के प्रबन्ध निदेशक संदीप कुमार, परिवहन विभाग के निदेशक अनुपम कश्यप, अतिरिक्त आयुक्त घनश्याम चन्द तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
शिमला: बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने प्रदेश विश्वविद्यालय में ईसी व विवि कोर्ट के चुनावों में कांग्रेस पार्टी से जुड़े नेताओं की जीत पर खुशी व्यक्त करते हुए नव निर्वाचित सदस्य राज कुमारी व नंद लाल को बधाई दी है। राठौर ने कहा है कि प्रदेश विश्वविद्यालय में कांग्रेस की दूसरी लगातार जीत से साफ है कि विश्वविद्यालय के अधिकतर शिक्षक व गैर शिक्षक कांग्रेस पार्टी के साथ है। उन्होंने विश्वविद्यालय के मतदाताओं का आभार प्रकट करते हुए कहा है कि कांग्रेस उनके साथ खड़ी है और उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने देगी।
शिमला: भाजपा सरकार हिमाचल प्रदेश व शिमला के अन्य सामाजिक संगठन 10 सितंबर को शिमला के रिज मैदान पर प्रातः 9:30 बजे एक रक्त दान शिविर का आयोजन करने जा रहे है। रक्त दान शिविर का आयोजन कम्पीटेंट फाउंडेशन के साथ किया जा रहा है, जिसके अध्यक्ष भाजपा सह प्रभारी संजय टंडन है। रक्त दान शिविर का शुभारंभ भाजपा प्रदेश महामंत्री एवं मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार त्रिलोक जम्वाल करेंगे। शिविर का संचालन भाजपा के आई टी सेल द्वारा किया जाएगा। इस रक्त दान शिविर के मुख्य अततिथि हरदीप सिंह पुरी केंद्रीय आवास एवं शहरी मामले एवं पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री, प्रहलाद सिंह पटेल केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री और जल शक्ति मंत्री गेस्ट ऑफ ऑनर, दुष्यंत कुमार गौतम राष्ट्रीय महासचिव भारतीय जनता पार्टी इस शिविर की अध्यक्षता वर्चुअल माध्यम से करेंगे। कम्पीटेंट फाउंडेशन अन्य सामाजिक संगठनों के साथ मिल कर इस दिन 6 राज्यों में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब एवं हिमाचल में 25 रक्तदान शिविरों का आयोजन करने जा रही है। जिसमें हिमाचल में रिज मैदान शिमला, ऊना में ब्लड बैंक, कसौली में होटल और मेरीडियन, बद्दी में बीबीएन इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन एवं सिविल हॉस्पिटल पालमपुर में इन शिवरों का आयोजन होने जा रहा है। इन रक्त दान शिविरों को मिलाकर आज तक इस संस्थान ने 70 से अधिक रक्त दान शिवरों का आयोजन किया गया है। इस दिन भाजपा सह प्रभारी संजय टंडन का 58वां जन्मदिन भी है।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के यूजी और पीजी कोर्स करने वाले लाखों छात्र-छात्राओं को अब डिग्री की अंतिम परीक्षा के परिणाम घोषित होने के साथ ही समग्र अंक तालिका को प्रिंट करवा दिया जाएगा और संबंधित कॉलेजों को भेज दिया जाएग। इसकी फीस भी विद्यार्थियों से नहीं ली जाएगी । विद्यार्थियों को अब इसके लिए लम्बा इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। उन्हें हाथों हाथ समग्र अंक तालिका दे दी जाएगी। पीजी कोर्स में भी इसी सत्र से यह निर्देश लागू कर दिया जाएगा। अंक तालिका की डिग्री पूरी करने वाले हर विद्यार्थी को आवश्यकता रहती है। इससे पूर्व विद्यार्थी जरूरत पड़ने पर विश्वविद्यालय आकर इसे बनवाते रहे थे। यह सुविधा केवल पास और डिग्री पूरी करने वाले विद्यार्थियों को ही होगी। कंपार्टमेंट या फेल होने वाले विद्यार्थियों को यह सुविधा नहीं होगी। किसी भी डिग्री कोर्स के पूरा करने के बाद ही समग्र अंक तालिका जारी की जाती है। इसमें पूरी डिग्री में दी गई परीक्षा के प्राप्तांक और छात्र का पूरा ब्योरा, सेशन सब कुछ अंकित होता है। इसे विद्यार्थी कहीं भी आवश्यकता पड़ने पर डिग्री के स्थान पर दिखा या जमा करवा सकता है। जिससे उसे आगे प्रवेश लेने व नौकरी में कोई परेशानी पेश नहीं आएगी।
विभिन्न किसान संगठनों के संयुक्त किसान मंच की बैठक कोटखाई में आयोजित की गई। इस बैठक में कोटखाई क्षेत्र के किसानों व बागवानों के 7 संगठनों जिसमें किसान संघर्ष समिति, पीजीए, यंग ग्रोवर्स एसोसिएशन, हिमाचल किसान सभा, घ्याल पर्यावरण समिति, भारतीय किसान यूनियन, एप्पल ग्रोवर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिसमे संयुक्त किसान मंच के संजय चौहान, आशुतोष चौहान, सुशील चौहान, इनके साथ प्रताप चौहान, राजेश चौहान, अरुण, संजय धनी, सनी सेकटा के साथ ही इनके संगठन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त जिला परिषद सदस्य विशाल शांगटा, क्यारी पंचायत की दुर्मा चौहान के अतिरिक्त पूर्व प्रधान पवन चौहान, जगदीश शर्मा भी उपस्थित रहे। इसमे संयुक्त किसान मंच की 27 सदस्यीय क्षेत्रीय कमेटी का गठन किया गया। जिसमें संयोजक सुशील चौहान व सह संयोजक प्रताप ठाकुर को चुना गया। इनके अतिरिक्त आषुतोष, संजय धनी, राजेश चौहान, रोशन लाल राजटा, अरुण, दुर्मा चौहान, संजीव ठाकुर, विशाल शांगटा, पवन चौहान, सुनील चौहान, पदम सिंह, राजिंदर चौहान, मिथुन चौहान, अमित, सरोज चौहान, दलीप जस्टा, कमलजीत, सुनील, राजिंदर मेहता, सीमा, सनी सेकटा, कुलदीप शर्मा, सुरिंदर शर्मा, बैठक में निर्णय लिया गया कि 13 सितम्बर को किसान संयुक्त मंच कोटखाई में प्रदर्शन किया जाएगा। इस बैठक में चर्चा करते हुए कहा कि आज कृषि खास रूप में सेब की खेती गंभीर संकट आ गया है। आज सरकार द्वारा बागवानी में दी जा रही सब्सिडी बन्द कर दी गई है। जिससे सेब की खेती की लागत बहुत अधिक बढ़ गई है। मौसम की मार से भी कृषि व सेब की खेती पर असर पड़ रहा है। एक ओर लागत निरन्तर बढ़ रही है वहीं उत्पादन व उत्पादकता घट रही है। इसके साथ सरकार व APMC की लचर कार्यप्रणाली से किसानों का मण्डियों में शोषण किया जा रहा है। आज मण्डियों में गैर कानूनी रूप से कारोबार किया जा रहा है। APMC कानून, 2005 के अनुसार जिस दिन मण्डी में किसान का उत्पाद बिकेगा उसी दिन उसका भुगतान किया जाएगा। परन्तु न तो अदानी और न ही मण्डियों में भुगतान कानून के अनुसार हो रहा है। इस बैठक में किसानों व बागवानों की समस्याओं के कारण पैदा हुए इस कृषि संकट के चलते संयुक्त किसान मंच द्वारा तय मांगो पर सहमति बनाई गई।
शिमला पुलिस थाना सदर में लोअर बाजार के चेतन पटियाल ने अपने पड़ोसी सौरभ के ख़िलाफ़ गाली गलौच व चाकू से हमला करने का आरोप लगाया है। पुलिस को दी शिकायत में कहा गया है कि सौरभ बीती शाम उसकी दुकान मिडल बाजार में आया और उसके साथ गाली गलौज और बहस बाजी करके चला गया। लगभग 6:10 बजे सौरव ने उसे आवाज लगाकर दुकान से बाहर बुलाया। जब वह बाहर गया तो सौरभ ने अचानक उस के पेट पर चाकू से हमला कर दिया जिससे उसे चोट आई है। पुलिस ने 324, 504, 506 IPC के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिक्षा विभाग में कार्यरत 231 पीईटी को पदोन्नत करके डीपीई बनाया गया है। इस संबंध में राज्य उपाध्यक्ष डॉ मामराज पुंडीर ने कहा कि काफी लंबे समय के बाद एकमुश्त 231 शारीरिक अध्यापकों को पदोन्नति प्रदान करके डीपीई बनाया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षक महासंघ द्वारा लगातार शारीरिक शिक्षकों की पदोन्नति का मामला उठाया जा रहा था। जिसे सरकार द्वारा पदोन्नति प्रदान करके अंतिम रूप दे दिया गया है। इसे लेकर हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ की राज्य कार्यकारिणी में अखिल भारतीय संयुक्त सचिव पवन मिश्रा, प्रांत अध्यक्ष पवन कुमार, राज्य महामंत्री विनोद सूद, प्रदेश मीडिया प्रभारी दर्शन लाल, भीष्म शर्मा, तीर्थ आनंद शर्मा, सुधीर गौतम, सोलन के प्रधान नरेंद्र कपिला, बिलासपुर से ललित मोहन, कुल्लू से चतर सिंह, किन्नौर से बलवीर नेगी ,जिला मंडी से भगत चंदेल, कांगड़ा से जोगिंदर शर्मा, हमीरपुर से नरेश शर्मा, सिरमौर से विजय कवर, ऊना से सुशील मल्होत्रा, शिमला से अशोक कुमार ,यशपाल, प्रकाश कौशल, सुमित भारद्वाज ,श्याम सिंह, रविंद्र कुमार ,किशन ठाकुर, सुरजीत शर्मा समेत सभी पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से सरकार का धन्यवाद व्यक्त किया है।
शिमला: हिमाचल में आपदा का दूसरा नाम है - सड़क दुर्घटना। एक दिन में औसतन के अनुसार तीन से चार लोगों की मौत सड़क हादसों में होती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पहाड़ी प्रदेश की सड़कों पर सुरक्षित चलना कितना चुनौती भरा है। पिछले कई वर्षों से यह देखने में आया है कि हादसों का शिकार होने वालों में ज्यादातर संख्या युवाओं की है। प्रदेश में सड़क सुरक्षा और बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए स्कूली स्तर पर बच्चे जागरूक होंगे, तभी वे युवावस्था में ज़िम्मेदारियों को सोच समझ कर सही फैसला ले सकेंगे। देखने में आया है कि लोग यातायात नियमों का पालन नहीं करते और हादसे का शिकार होते हैं। जिसके चलते दुर्घटना में उनकी मौत हो जाती है। ब्लैक स्पॉट यानी जहां हादसों की आशंका रहती है, उसे सुधारने की दिशा में उतनी तेजी से काम नहीं हो रहा, जितना अपेक्षित है। प्रदेश में हादसे रोकने के लिए सभी पक्षों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। सभी को समझना होगा कि यातायात नियमों का पालन, अपनी सुरक्षा के लिए करें न कि चालान के डर से। आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में तीन हजार के करीब सड़क हादसे हर साल होते है। जिनमें 1000 के लगभग लोगों कि मौत सड़क कि दुर्घटनाओं से होती है। इससे यह कहा जा सकता है कि अगर पहाड़ी क्षेत्रों में रहना आसान है तो सड़कों पर सुरक्षित चलना उतना ही चुनौती भरा भी है। सरकार को जल्द ही हादसे से जुड़े पहलुओं पर जागरूकता की कमी, निगरानी की पुख्ता व्यवस्था न होना, खस्ताहाल सड़कें, दोषियों को सख्त सजा का प्रविधान न होना, तेजरफ्तार, अप्रशिक्षित चालक व वाहनों की फिटनेस एहतियात के लिए कदम उठाना चाहिए। जिससे इन हादसों से बचा जा सके।
शिमला: उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा सोमवार को प्रदेश के निजी और सरकारी कॉलेज प्रिंसिपलों को कॉलेजों में छह माह की एक साथ हॉस्टल और मेस फीस वसूल करने पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं। कोरोना काल में अभिभावकों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने का हवाला देते हुए प्रिंसिपलों को विद्यार्थियों द्वारा मासिक या द्विमासिक आधार पर ही शुल्क लेने के लिए कहा गया है। उच्च शिक्षा निदेशक द्वारा बताया कि प्रदेश के कई डिग्री, बीएड, लॉ और संस्कृत के निजी और सरकारी कॉलेजों में विद्यार्थियों से छह माह या उससे अधिक समय की हॉस्टल और मेस फीस लेने की शिकायतें उन्हें मिली हैं। जिसके चलते उन्होनें बताया कि कोरोना काल के चलते बीते वर्ष से अभिभावकों की स्थिति अभी पटरी पर नहीं आ सकती। इस परिस्थिति के चलते अभिभावक छह माह की फीस चुकाने के लिए असमर्थ हैं। ऐसे मामलों के विद्यार्थियों से केवल एक या दो माह की हॉस्टल और मेस फीस ही वसूली जाए।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सोमवार को शिमला से वर्चुअल माध्यम द्वारा पुलिस विभाग की 24 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित 10 परियोजनाओं के लोकार्पण तथा 55 करोड़ रूपये की लागत से 16 नई परियोजनाओं के शिलान्यास किए। मुख्यमंत्री ने 226.14 लाख रूपये की लागत से निर्मित आई.जी. उत्तरी क्षेत्र के भवन, जिला बिलासपुर में 88.50 लाख रूपये की लागत से पुलिस थाना सदर के चार आवासीय भवन, जिला हमीरपुर में 105.63 लाख रूपये की लागत से पुलिस थाना नादौन में चार आवासीय भवन, जिला हमीरपुर में 84.95 लाख रूपये की लागत से पुलिस थाना सुजानपुर में एक आवासीय भवन, सिरमौर के धौलाकुंआ में छठी भारतीय आरक्षित पुलिस वाहिनी की 714 लाख रूपये की लागत से निर्मित एक बैरक ब्लाॅक और 380 लाख रूपये की लागत से निर्मित अत्याधुनिक शस्त्रागार भवन, जिला मण्डी की पुलिस चैकी रिवालसर में 149.16 लाख रूपये की लागत से निर्मित 6 आवासीय भवन, बद्दी के अन्तर्गत पुलिस लाइन किशनपुरा में 331.89 लाख रूपये की लागत से निर्मित 12 आवास और 238.30 लाख रूपये की लागत से निर्मित 8 आवासीय भवनों तथा नालागढ़ के अन्तर्गत पुलिस थाना मानपुरा का लोकार्पण किया। जयराम ठाकुर ने 614.93 लाख रूपये की लागत से निर्मित होने वाले महिला पुलिस थाना नाहन, 250.16 लाख रूपये की लागत से पुलिस अधीक्षक सोलन के आवास, 637.39 लाख रूपये की लागत से पहली भारतीय आरक्षित वाहिनी वनगढ़ के मोटर ट्रांसपोर्ट सैक्शन, 199.12 लाख रूपये की लागत से सीआईडी शिमला के तहत स्वान एवं संचालक के 6 आवासीय भवन, पुलिस मुख्यालय में 198.52 लाख रूपये की लागत से बनने वाले 6 आवासीय भवनों तथा 224.73 लाख रूपये की लागत से बनने वाले अन्य 6 आवासीय भवनों, 133.10 लाख रूपये की लागत से कांगड़ा स्थित सीआईडी के तहत स्वान एवं संचालक के दो आवासीय भवनों, जिला चम्बा के संघाणी में 217.98 लाख रूपये की लागत से पुलिस चैकी भवन, पीटीसी डरोह में 502.22 लाख रूपये की लागत से 12 आवास, 187.22 लाख रूपये की लागत से पुलिस लाइन हमीरपुर में सीआईडी के लिए दो आवासीय भवनों, 485 लाख रूपये की लागत से चतुर्थ भारतीय आरक्षित वाहिनी जंगलबैरी के बहुद्देशीय हाल, पीटीसी में 181.67 लाख रूपये की लागत से स्वीमिंग पूल, चम्बा जिला के किलाड़ में 180.95 लाख रूपये की लागत से बनने वाले पुलिस थाना के चार आवासीय भवनों, जिला सोलन के कुनिहार में 459.41 लाख रूपये की लागत से पुलिस थाना भवन, 489.13 लाख रूपये की लागत से बनने वाले पुलिस थाना भवन दाड़लाघाट और जिला बिलासपुर के घुमारवीं में 481.76 लाख रूपये की लागत से पुलिस थाना भवन के शिलान्यास किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग को बधाई देते हुए सभी परियोजनाओं का निर्माण समय पर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभाग के सभी भवनों का डिजाइन विश्वस्तरीय मानकों के आधार पर तैयार किया गया है तथा सिरमौर जिला के धौलाकूंआ स्थित छठी आईआरबी वाहिनी परिसर में निर्मित शस्त्रागार भवन अत्याधुनिक तकनीक से बनाया गया है। उन्होंने कहा कि पीटीसी में बनाए जाने वाले स्वीमिंल पुल का उपयोग जल आपदा प्रबन्धन केन्द्र के रूप में किया जाएगा और यहां जवानों को तैरने का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग के कर्मचारियों को कार्यस्थल में काम करने की सभी आवश्यक सुविधाएं समयबद्ध उपलब्ध करवाई जा रही हैं। वर्तमान में पुलिस विभाग की जवाबदेही और भी बढ़ी है क्योंकि आधुनिकता के साथ नए दायित्व भी बढ़े हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस विभाग के कर्मचारियों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध है और इस दिशा में अनेक सकारात्मक पग उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पात्र व्यस्क लोगों को वैक्सीनेशन की पहली डोज देने का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने में पुलिस के जवानों का भी बहुत अहम योगदान रहा है। उन्होंने इसके लिए पुलिस विभाग को बधाई दी। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि पुलिस के जवानों ने कोरोना संकट काल में बहुत ही सराहनीय भूमिका निभाई है। जवान विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने कर्तव्य का निर्वहन सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने कहा कि शिमला सदर थाना को स्मार्ट सिटी मिशन के तहत लाकर इसका आधुनिकीकरण करने के प्रयास किए जाएंगेे। पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने पुलिस विभाग में विभिन्न गतिविधियों और विकासात्मक कार्यों की जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि नवनिर्मित भवनों में पार्किंग व अन्य सुविधाएं सृजित करने के प्रयास किए गए हैं। विभाग का आधुनिकीकरण करने के लिए सशक्त प्रयास किए जा रहे हैं। इस अवसर पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री राजिन्द्र गर्ग, सांसद किशन कपूर, छठे वित्तायोग के अध्यक्ष सत्तपाल सिंह सत्ती, विधायक डा.राजीव बिन्दल, इन्द्र सिंह गांधी, विशाल नैहरिया, परमजीत सिंह पम्मी भी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए और अपने विचार व्यक्त किए। विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार, उपाध्यक्ष डा. हंस राज, सांसद एवं राज्य भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए । अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक वेणूगोपाल और पुलिस विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
टोक्यो पैरालिंपिक में सिल्वर मैडल विजेता ऊना जिला के एथलीट निषाद कुमार ने सोमवार को अपने परिजनों तथा अपने कोच नसीम अहमद के साथ मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने निषाद कुमार को हिमाचल का नाम रौशन करने के लिए बधाई दी व उन्हें सम्मानित किया तथा आगामी चैम्पियनशिप के लिए उन्हें शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार उन्हें हर सम्भव सहायता और सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में खेलों के विकास को बढ़ावा देने के लिए हर सम्भव प्रयास कर रही है और आधारभूत संरचना को सुदृढ़ किया जा रहा है। निषाद कुमार ने मुख्यमंत्री को पैरालिंपिक और खेल से सम्बन्धित विभिन्न तैयारियों के बारे अवगत करवाया। इस अवसर पर शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज, पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू, खेल एवं युवा सेवाएं सचिव एस.एस.गुलेरिया तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने सोमवार को राजभवन में टोकियो पैरालोपिक में भारत को ऊंची कूद में रजत पदक दिलाने वाले ऊना जिले के निशाद कुमार को सम्मानित किया। इस अवसर पर निशाद के माता-पिता, कोच और बहन भी उपस्थित थे। बातचीत के दौरान, राज्यपाल ने कहा कि निशाद ने अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा को तो सिद्ध किया ही है लेकिन देश के गौरव को भी ऊंचा किया है। उन्होंने कहा कि उनके पदक की चमक विषेशकर हिमाचल प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए आशा की किरण बनी है। उन्होंने सिद्ध किया है कि कड़ी मेहनत, जज़्बा और कुछ करने का इरादा बुलंद हो तो कोई भी बाधा लक्ष्य प्राप्ति से रोक नहीं सकती। उन्होंने कहा कि उनका संघर्षमय जीवन इस बात का साक्षात उद्हारण है। उन्होंने आशा जताई कि भविष्य में भी वह नित नई ऊंचाइयों को हासिल करेंगे और जीत की यह भावना अन्यों के लिए प्रेरणा बनेगी।राज्यपाल ने कहा कि आज का युवा बंद कमरे में केवल मोबाईल व इलैक्ट्रानिक गैजेट तक ही सीमित होकर रह गया है। ऐसे में निशाद की उपलब्धि उनमें नई प्रेरणा का संचार करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्पोर्टस स्कूल आरम्भ करने की आवश्यकता है क्योंकि यहां की भौगोलिक परिस्थितियां अच्छे खिलाड़ी जिनमें आत्मिक बल है, पैदा करने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि खेल का वातावरण होने से खेल भावना स्वतः जागृत हो जाती है इसलिए हमें मिलकर सकारात्मक माहौल बनाना चाहिए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि निशाद अगले वर्ष होने वाले एशियाई खेलों में भी भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर आएंगे। निशाद ने राज्यपाल का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने उन्हें जो सम्मान दिया है और देशवासियो ने प्यार प्रकट किया है वह उनके लिए नई ऊर्जा है। निशाद के कोच नसाीम अहमद ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और हमें जरूरत केवल प्रतिभाओं की खोज करनी है। निशाद के पिता रशपाल सिंह और माता पुष्पा देवी ने बेटे की उपलब्धि पर खुशी जताई। बहन कुमारी रमा देवी और भाई पंकज कौंडल ने कहा कि उनका भाई हमेशा से काफी मेहनती रहा है और उन्हें पूरा भरोसा था कि वे पदक जीतकर आएगा। इस अवसर पर, नेहरू युवा केंद्र के राज्य निदेशक सैमसन मसीह भी उपस्थित थे। बाद में, निशाद ने राजभवन के धरोहर भवन का अवलोकन किया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने केंद्र सरकार के किसानों के साथ अड़ियल रवैये पर दुःख जताया है। उन्होंने कहा है कि देश में पहली बार एक ऐसी निरकुंश सरकार बेठी है, जिसे न तो लोगों की कोई परवाह है और न ही देश की। आज देश जिन गम्भीर परिस्थितियों से गुज़र रहा है, वह सब इसके जनविरोधी नीतियों का ही परिणाम है। राठौर ने उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर में आयोजित किसानों की महापंचायत को सरकार के प्रति एक बड़ा जन आक्रोश बताते हुए कहा कि सरकार किसानों के प्रति संवेदनहीन बनी हुई है। उन्होंने कहा कि किसान इस देश का अन्नदाता है और उसकी आवाज पूरे देश की आवाज है।इनकी आवाज को दबाया नही जा सकता। राठौर ने कहा कि प्रदेश में सेब बागवानों के साथ भी सरकार का कमोबेश यही रवैया है। प्रदेश के बागवानो की कोई आवाज नही सुनी जा रही। उनकी उपेक्षा के चलते सरकार की ओर से उन्हें कोई भी मदद नही मिल रही है। बागवानो को पूरी तरह से निजी कंपनियों के हाथों में सौंप दिया है और वह अपनी मनमर्जी के चलते सेब के मूल्यों को तय कर रहें है। बागवानो को उनकी फसल का वाजिब दाम भी नही मिल रहा है। राठौर ने कहा कि केंद्र सरकार के काले तीन नए कृषि कानूनों ने देश की कृषि व बागवानी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से अस्त व्यस्त कर दिया है।उन्होंने कहा कि किसानों व बागवानो को पूरी तरह से निजी कंपनियों व विचौलियों को सौंप दिया है,जहां वह इनकी मनमर्जी व शोषण का शिकार हो रहें है। सरकार ने अपनी आंखे मूंद रखी है। राठौर ने कहा कि कांग्रेस किसानों बागवानो के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि अभी तो उत्तरप्रदेश से ही भाजपा के खिलाफ जंग का एलान हुआ है। अब प्रदेश के बागवान भी इस जंग में उतरेंगे और भाजपा के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस भाजपा की जनविरोधी नीतियों व निर्णयों के खिलाफ लोगों के साथ खड़ी है और उसे इस कुशासन से मुक्ति दिलाने के प्रति कृत संकल्प है।
कांग्रेस सचिव हरिकृष्ण हिमराल ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के सराहन की जनसभा में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व देश के पहले पूर्व प्रधानमंत्री स्व.पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम पर हंसी उपहास करने की आलोचना करते हुए कहा है भाजपा नेताओं ने भारतीय संस्कृति व परम्पराओं को तिलांजलि दे दी है। देश की स्वतंत्रता में अपना प्रमुख योगदान देने वाले नेताओं के नामों का मज़ाक उड़ाना और उन पर हंसना राष्ट्र भक्तों का घोर अपमान है, जिसे किसी भी स्तर पर सहन नही किया जा सकता। हिमराल ने अपने बयान में कहा कि गांधी व नेहरू का किसी भी मुख्यमंत्री द्वारा उनके नाम का उपहास करना यह उनका नही देश का अपमान है। उन्होंने कहा कि भाजपा जिस प्रकार से कांग्रेस के नेताओं का अपमान कर रही है, उससे इनकी संकीर्ण मानसिकता का साफ पता चलता है।उन्होंने कहा कि गांधी व नहेरु की तुलना किसी आम व्यक्ति से कदापि नही की जा सकती, इसलिए मुख्यमंत्री को अपने शब्द वापिस लेते हुए माफी मांगनी चाहिए।
भारत-तिब्बत समन्वय संघ की कोर कमेटी की बैठक में प्रथम राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिनाम वैज्ञानिक प्रो प्रयाग दत्त जुयाल को सर्वसम्मति से चुना गया। प्रो जुयाल प्रसिद्ध पशु विज्ञानी हैं और गत वर्ष जबलपुर (मध्य प्रदेश) के नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी के कुलपति के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। प्रो जुयाल के नाम का प्रस्ताव केंद्रीय संयोजक हेमेन्द्र तोमर ने रखा, जिसे सभी सदस्यों ने पूर्ण सहमति से पारित कर दिया। उत्तराखंड के मूल निवासी प्रो जुयाल वर्तमान में देहरादून में निवास कर रहे हैं और अब तक बीटीएसएस की केंद्रीय परामर्शदात्री समिति (सीएसी) के माननीय सदस्य के रूप में नियुक्त थे। इनके बारे में केंद्रीय संयोजक तोमर ने बताया कि प्रो जुयाल की तिब्बती मामलों में सक्रियता और सूझबूझ के साथ काम करने की उनकी आक्रामक कार्यशैली के कारण संघ के कार्यकर्ताओं में बहुत उत्साह दिखने लगा था। इस नाते उनके इस ऊर्जा से संघ को एक अच्छे, कुशल और परिणाममूलक नेतृत्व मिलने के विश्वास पर उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष दायित्व पर चुना गया। तोमर ने कहा कि इसी वर्ष मकर संक्रांति के दिन संघ की स्थापना और मार्च में सरकारी स्तर पर पंजीकरण के बाद यह नियुक्ति अत्यंत महत्वपूर्ण है। उधर, इसके बाद संघ के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो जुयाल ने अपने अधिकारिक बयान में कहा कि इस निर्णय को शिरोधार्य करते हुए अब तिब्बत-स्वातंत्र्य और कैलाश मुक्ति साधना में इस प्रकार लगना है कि विश्व समुदाय को इन उद्देश्यों में प्रभावी रुप से बीटीएसएस का ही कार्य दिखेगा। उन्होंने कहा कि तिब्बत की आज़ादी अब हम भारत वासियों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। चीन को अब समझना होगा कि हम आध्यात्मिक शक्ति के केंद्र भारत में जिस दिन पूर्ण जन जागरण हो जाएगा, उस दिन चीन न केवल तिब्बत छोड़ भाग खड़ा होगा बल्कि खुद भी कई भागों में विखंडित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि तिब्बती समाज को शत्रु-संघर्ष में अपना मुखर योगदान देने की आवश्यकता है क्योंकि चीन पूरी तरह से कपटी और धूर्त देश है।
केंद्रीय सूचना प्रसारण एवं खेल व युवा मामलों के मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने हिमाचल प्रदेश द्वारा 18 वर्ष से अधिक की आयुवर्ग का शत प्रतिशत कोविड टीकाकरण करने की उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर व प्रदेश की जनता को बधाई दी है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की कार्यकुशलता में हिमाचल का 18 वर्ष से अधिक की आयुवर्ग का शत प्रतिशत कोविड टीकाकरण करने वाला देश का पहला राज्य बनना सभी को गौरवान्वित करने वाला है। यह उपलब्धि हिमाचल की जनता की जागरूकता, गम्भीरता और निजी ज़िम्मेदारी के पूर्ण निर्वहन का परिणाम है। सभी प्रशासनिक अधिकारियों व स्वास्थ्यकर्मियों ने हर चुनौतियों का सामना करते हुए पूरी दृढ़ता से अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया जिसके लिए वो बधाई के पात्र हैं। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने पूरे देश के सामने वैक्सिनेशन को लेकर एक रोडमैप सामने रखा है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान हर दिन नए रिकॉर्ड बना रहा है। पिछले महीने यानी अगस्त में भारत ने 18 करोड़ से ज्यादा टीके लगाए जो जी-7 देशों में लगाए गए कुल टीके से भी अधिक है। यह देखना उत्साहजनक है कि हिमाचल में टीकाकरण अभियान ने उम्र की अधिकता, ख़राब मौसम व जटिल भौगोलिक परिस्थियों को मात देते हुए देश के सामने कर्तव्यपरायणता की सशक्त मिसाल पेश की है। वंही भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया का सबसे तेज कोविड टीकाकरण भारत में हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का विशेष प्रेम और सानिध्य हमेशा हिमाचल को मिला है।
विभिन्न किसान संगठनों के संयुक्त किसान मंच की बैठक आज रोहड़ू में आयोजित की गई। इस बैठक में रोहड़ू क्षेत्र के किसानों व बागवानों के 8 संगठनों जिसमें हिमालयन सोसाइटी फ़ॉर डेवलोपमेन्ट ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड एग्रीकल्चर, पीजीए, फल उत्पादक संघ रोहड़ू, छवारा वैली एप्पल ग्रोवर एसोसिएशन, हिमाचल किसान सभा, नावर वैली ग्रोवर्स एसोसिएशन, मंढोल सारी ग्रोवर्स एसोसिएशन, बुशहर ग्रोवर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिसमे संयुक्त किसान मंच के हरीश चौहान, संजय चौहान इनके साथ भगत सिंह ठाकुर, जय सिंह जेहटा, संजीव ठाकुर, सुखदेव चौहान, डिम्पल पांजटा, संजीव ठाकुर, सूंदर नैन्टा, बिहारी लाल, गोपाल चौहान, विभोर सिंह चौहान, भगवान सिंह के साथ ही इनके संगठन के प्रतिनिधि मौजूद थे। इसमे संयुक्त किसान मंच की 20 सदस्यीय क्षेत्रीय कमेटी का गठन किया गया। जिसमें संयोजक सुखदेव चौहान व सह संयोजक संजीव ठाकुर को चुना गया। इनके अतिरिक्त डिंपल पांजटा, सुंदर नैंटा, गोपाल चौहान, भगत सिंह ठाकुर, बिहारी लाल चौहान, भगवान सिंह , विभोर सिंह, गोपाल चौहान, प्रेम रमतयान, रितेश कुमार, रवि रावत, वीर सिंह ठाकुर, सुशील चौहान, सुधीर कपटा, राजन हारटा, कुलदीप तेगटा, शमशेर सिंह को सदस्य चुना गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि मंच 13 सिंतबर को रोहड़ू व चड़गांव में प्रदर्शन करंगे। इस बैठक में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सेब की खेती गंभीर संकट आ गया है। आज सरकार द्वारा बागवानी में दी जा रही सब्सिडी बन्द कर दी गई है। जिससे सेब की खेती की लागत बहुत अधिक बढ़ गई है। मौसम की मार से भी कृषि व सेब की खेती पर असर पड़ रहा है। एक ओर लागत निरन्तर बढ़ रही है, वहीं उत्पादन व उत्पादकता घट रही है। इसके साथ सरकार व APMC की लचर कार्यप्रणाली से किसानों का मण्डियों में शोषण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 3 सिंतबर को बागवानी मंत्री ने ठियोग में किसानों को आश्वासन दिया था कि सरकार APMC कानून, 2005 को मण्डियों में सख्ती से लागू करेगी, कंपनियों को उनके CA स्टोर में कम से कम 20 प्रतिशत किसानों को उनका सेब रखने के आदेश जारी किये जायेंगे और संयुक्त किसान मंच से सरकार तुरंत बात कर इनकी मांगो पर अमल के लिए सकारात्मक कदम उठाएगी। परन्तु बागवानी मंत्री द्वारा मानी मांगो पर आज तक कोई भी अमल नहीं किया गया है। इससे बागवानी मंत्री व सरकार की मंशा पर सवालिया निशान उठता है।
प्रदेशभर के छात्रों की मांगों को लेकर के एबीवीपी ने आज यानि सोमवार को कुलपति को ज्ञापन सौंपा। मीडिया को जानकारी देते हुए इकाई मंत्री आकाश नेगी ने कहा कि छात्र समुदाय महामारी से पिछले लंबे समय से ग्रस्त है। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में ऐसे अनेकों छात्र है जो महामारी के दौर के बीच में अनेकों कारणों से अपना प्रवेश परीक्षा फॉर्म नहीं भर पाए है। उन छात्रों के लिए प्रवेश परीक्षा फॉर्म भरने के लिए विश्वविद्यालय पोर्टल जल्दी खोला जाए।उन्होंने कहा की प्रदेश भर के यूजी और पीजी के अनेकों ऐसे भी छात्र है, जिनका किसी कारणवश असेसमेंट और असाइनमेंट के अंक परिणाम के साथ नहीं जुड़ पाए है, इसलिए उनके परिणामों के साथ असाइनमेंट और असेसमेंट के अंक जोड़ करके उनके परिणामों को जल्द घोषित किया जाए। यूजी के छात्रों की विशेष मांगों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कुलपति के सामने ये मांग उठाते हुए कहा कि अभी प्रदेश विश्वविद्यालय में नए प्रवेश परीक्षा कराने की प्रक्रिया विश्वविद्यालय में पूरी कर ली है। लेकिन प्रदेशभर के वह छात्र जो अन्य विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेना चाहते हैं, उनका अधूरे परिणाम के कारण प्रवेश नहीं हो पा रहा है। ऐसे में प्रदेश भर के यूजी के अंतिम वर्ष के छात्रों का परीक्षा परिणाम जल्द घोषित किया जाए। उन्होंने कहा की पूरे प्रदेश भर के महाविद्यालयों में अलग-अलग विषयों में बहुत सीटें खाली पड़ी है, उन सीटों को भरने का एक मौका आवश्य दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर के छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए ,जल्द इन सभी मांगो को पूरा किया जाए ।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में 10 दिन के योगा कैंप का शुभारंभ किया गया। यह शुभारम्भ सुनील उपाध्याय एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा किया गया। मीडिया को जानकारी देते हुए ट्रस्ट के सचिव डॉ सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि सुनील उपाध्याय एजुकेशनल ट्रस्ट अपने शुरुआत से ही समाज सेवा के पथ पर बढ़ता आ रहा है। इसी क्रम में कोरोना महामारी के समय में सुनील उपाध्याय ने पूरे प्रदेश भर में लोगों को भोजन किट, आवश्यक दवाइयां, और अन्य आवश्यक सामग्रियों को मरीजों तक पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट अपने ध्येय मार्ग में निरन्तर बढ़ते हुए देश समाज हित में कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में आज ट्रस्ट ने एक स्वास्थ्य मुहिम को लेकर विश्वविद्यालय में योग शिविर का शुभारम्भ किया है। उन्होंने कहा कि ये योग शिविर पूरे 10 दिनों के बाद 16 सितम्बर को समाप्त होगा। उन्होंने कहा कि शिविर का समय प्रात: 6:30 से 7:30 तक रहता है। उन्होंने स्थानीय लोगों से आग्रह करते हुए भी कहा की वो भी इस शिविर में जरूर भाग लें। शिविर में योग आचार्य रिंकू जो विश्वविद्यालय में योग विभाग में शोधार्थी है, व्यायाम की अनेकों स्थितियों को नियमित करने की सही और सामान्य प्रक्रिया बताएंगे।
अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य प्रदेश मामलों के प्रभारी राजीव शुक्ला की स्वीकृति से कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने प्रदेश की चारों संसदीय क्षेत्र शिमला, मंडी, कांगड़ा व हमीरपुर के लिए बूथ स्तर की कमेटियों की कार्य निगरानी व कार्य आवंटन करने के लिए पार्टी पदाधिकारियों की नियुक्तियां कर दी है। कांग्रेस महासचिव रजनीश किमटा ने बताया कि शिमला ससंदीय क्षेत्र का प्रभार प्रदेश कांग्रेस महासचिव विनोद सुल्तानपुरी व कांग्रेस सचिव वेद प्रकाश ठाकुर को दिया गया है। मंडी संसदीय क्षेत्र का प्रभार कांग्रेस महासचिव चेतराम ठाकुर व कांग्रेस सचिव केशव नाईक को दिया गया है। कांगड़ा संसदीय क्षेत्र का प्रभार कांग्रेस महासचिव केवल पठानिया व कांग्रेस सचिव नवनीत शर्मा को दिया गया है। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र का प्रभार कांग्रेस महासचिव विधायक इंद्रदत्त लखनपाल व कांग्रेस सचिव कमल पठानिया को दिया गया है। यह सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से प्रभावी मानी गई है।
अपनी मांगों को लेकर करुणामूलक संघ का क्रमिक अनशन अभी भी जारी है। आज यानि सोमवार को करुणामूलक आश्रितों को क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे हुए 39 दिन हो गए है, लेकिन प्रदेश सरकार के कानों पर जूं तक नही रेंगी। ये परिवार भरी बरसात में बारिश में कैसे जीवन व्यतीत कर रहे है ये सिर्फ यही परिवार जान सकते है,लेकिन 39 दिनों से सरकार को इन परिवारों की पीड़ा नजर नही आई है। प्रदेशाअध्यक्ष अजय कुमार का कहना है कि जब चुनाव का समय आता है तो करुणामूलक आश्रितों के लिए बड़े-बड़े वायदे किये जाते है पर सता में आने के बाद सरकार अपने वादे भूल जाती है। अजय कुमार का कहना है कि क्रमिक अनशन का 39 वां दिन है पर सरकार की तरफ से कोई भी हमसे मिलने नही आया, न ही किसी ने सुध उनकी ली, और न ही सरकार ने उनका हाल जानने की कोशीश की। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे ही सरकार करुणामूलक आश्रितों को नकारति रही तो क्रमिक अनशन अनिश्चितकाल तक चलेगा और आंदोलन तीव्र गति पकड़ लेगा। संघ का कहना है कि जल्द करुणामूलक संघ की मांगे मानी जाए व सब परिवारों को एक साथ नियुक्तियां दी जाए।
हिमालय साहित्य संस्कृति और पर्यावरण मंच के अध्यक्ष और लेखक एसआर हरनोट ने जहां शिमला नगर निगम द्वारा शिमला के हर वार्ड में बुक कैफे खोलने का स्वागत किया है वहीं रिज मैदान पर टका बैंच में स्थित बुक कैफे को निजी हाथों सौंपने का पहले की तरफ कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इस बुक कैफे को निजी हाथों सौंपने के बाद इसका मूल उद्देश्य ही समाप्त हो गया और यह एक ढाबे में बदल दिया गया है। हरनोट ने स्मरण करवाया कि शिमला बुक कैफे की लोकप्रियता में हिमालय मंच ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और देश भर से लगभग पांच सौ किताबे यहां के लिए उपलब्ध करवाई गई है। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से जो भी लेखक शिमला आते थे, उनके साथ बैठकें यहीं पर होती थी। इन बैठकों से देश भर में इसकी लोकप्रियता बढ़ी है। दूसरा कारण इसकी लोकप्रियता का जेल के कारावासी थे जो बिलकुल नया कॉन्सेप्ट था और लोग हैरान होते है कि उम्र कैदी भी इस तरह स्वतंत्र कार्य कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जेल के पास यह रहता तो कभी भी बंद न होता और यह शिमला का एक लैंडमार्क बन जाता। उन्होंने बताया कि शिमला के वार्डों में बुक कैफे खोलने का लिखित सुझाव हिमालय साहित्य मंच ने तत्कालीन आयुक्त पंकज राय को उनके साथ हुई बैठक में दिया था। जिसमें उनके साथ मंच के सदस्य लेखक प्रो मीनाक्षी एफ पॉल, डॉ विद्यानिधि, डॉ कुलराजीव पंत, आत्मा रंजन, सीता राम शर्मा, मधु शर्मा कात्यायनी, भारती कुठियाला, स्नेह नेगी, गुप्तेश्वर नाथ उपाध्याय, वंदना राणा, सतीश रत्न आदि कई लेखक शामिल थे। उन्होंने इस सुझाव की प्रशंसा करते हुए उसे तत्काल माना ही नहीं बल्कि हमारे साथ छोटा शिमला, संजौली और टूटी कंडी विजिट भी किया और इन्हें खोलने के लिए सारी औपचारिकताएं पूर्ण की। परंतु हमारी पहल को निगम और मीडिया ने भुला दिया।हिमालय मंच ने प्रदेश सरकार और नगर निगम से अनुरोध किया है कि शिमला रिज टका बेंच पर स्थित बुक कैफे को पहले की तरह जेल के कारावासियोंं को संचालन के लिए दें। उसका निजी करण न करें। साथ सभी बुक कैफे में लेखकों की साहित्यिक भागीदारी भी सुनिश्चित करें।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला ऐतिहासिक गोथिक वास्तुकला भवनों के लिए विख्यात है। अंग्रेजों की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला अथाह इतिहास समेटे हुए है। शिमला शहर में अंग्रेजी शासनकाल में जो निर्माण कार्य हुए हैं वह आज भी अपनी अद्भुत कला शैली के लिए विश्व भर में विख्यात हैं। शिमला में कई स्मारक और इमारतें हैं जिन्हें भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान सर्वश्रेष्ठ वास्तुकारों द्वारा डिजाइन और निर्मित किया गया है। इन्हीं विशाल इमारतों में से एक हैं शिमला की प्रसिद्ध ऐतिहासिक इमारत टाउन हॉल। ये इमारत शिमला के गौरवशाली अतीत का प्रमाण हैं जिसे उस युग के बेहतरीन कारीगरों द्वारा बनाया गया। टाउन हॉल शिमला का निर्माण 1910 में भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान किया गया था। तब शिमला ब्रिटिश हुकूमत की ग्रीष्मकालीन राजधानी थी। शिमला टाउन हॉल शहर के केंद्र में माल रोड पर स्थित है। शिमला के किसी भी हिस्से से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। 18 वीं शताब्दी के बाद के वर्षों में टाउन हॉल शिमला शहर का केंद्र हुआ करता था। टाउन हॉल की इमारत आधी लकड़ी की ट्यूडर शैली की इमारत हैं। सभी लकड़ी की फ्रेम और खिड़कियां रोशनीदार कांच के बने हैं। इसे स्कॉटिश वास्तुकार जेम्स रैनसम द्वारा एक पुस्तकालय के रूप में डिजाइन किया गया था। भारत के विभाजन के बाद नगर निगम के कुछ कार्यालय इसमें रखे गए थे। वैसे टाउन हॉल की मूल इमारत हेनरी इरविन द्वारा डिज़ाइन की गई थी जिन्होंने औपनिवेशिक भारत में कई अन्य इमारतों को डिजाइन किया था। मूल टाउन हॉल भवन 1860 में बनाया गया था और इसका निर्माण 1888 में पूरा हुआ था। पर बाद में अंग्रेजी हुकूमत ने इसका स्वरूप बदला। आपको बता दें कि प्रसिद्ध गेयटी थिएटर टाउन हॉल के भीतर था और इसके साथ ही टाउन हॉल में एक पुस्तकालय, एक विशाल हॉल, एक ड्राइंग रूम, कार्ड-रूम, बॉलरूम, शस्त्रागार, पुलिस स्टेशन और एक रिटायरिंग रूम भी था। इमारत में एक गिरजाघर का बाहरी रूप था, लेकिन इमारत के अंदर मनोरंजन के सभी घटक थे। उस समय इमारत के निर्माण के लिए इस्तेमाल किए गए पत्थर "बरोग स्टोन्स" के थे। पत्थरों के साथ-साथ लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता था और छतों को स्लेटी स्लेट से बनाया जाता था। छतें झुकी हुई थीं ताकि बर्फ या पानी जमा न हो सके। खिड़कियां चौड़ी थीं और शीशों से बनी थीं, जिससे इमारत में प्राकृतिक प्रकाश का पर्याप्त प्रावधान था और अत्यधिक सर्दियों के महीनों के दौरान, इमारत गर्म और आरामदायक रहती थी। पर कुछ समय बाद टाउन हॉल की ऊपरी मंजिलें इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं कि उसे तोड़ा गया और फिर से बनाना पड़ा। यह कार्य 1910-11 में स्कॉटिश वास्तुकार जेम्स रैनसम द्वारा किया गया था। ब्रिटिश शासन में गर्मियों के दिनों में सरकारी अधिकारी शिमला में आकर रुकते थे और शिमला में बहुत सारे प्रशासनिक कार्य किए जाते थे। उन कार्यों को पूरा करने के लिए और सरकारी अधिकारियों को आवास प्रदान करने के लिए कई निर्माण किए गए थे। टाउन हॉल बिल्डिंग शुरू से ही नगरपालिका गतिविधियों का केंद्र रही और वर्तमान में इसमें शिमला नगर निगम के महापौर व उपमहापौर बैठते है। इमारत आसपास की वास्तुकला को जोड़ती है, जो स्वतंत्रता पूर्व युग की याद दिलाती है। शिमला नगर बोर्ड का गठन 1851 में हुआ था और नगर पालिका के विभिन्न कार्य जैसे सड़क, स्वच्छता, जल आपूर्ति, जल निकासी, कर संग्रह शिमला नगर निगम द्वारा नियंत्रित किया जाता था। टाउन हॉल की आधारशिला शिमला नगर बोर्ड द्वारा रखी गई थी। उल्लेखनीय हैं कि कुछ साल पहले टाउन हॉल की इमारत में शिमला नगर निगम के विभिन्न कार्यालय चल रहे थे और इसमें एक पुस्तकालय भी था। बता दें कि टाउन हॉल के भीतर पुस्तकालय ब्रिटिश राज के बाद से ही है। पर अब इसका औपनिवेशिक ढाँचे में जीर्णोद्धार हुआ है, लेकिन इस संरचना की मौलिकता व इसके ऐतिहासिक जुड़ाव को यथावत बनाए रखा गया है। इमारत को उसके मूल रूप में बहाल करने के लिए 2014 में एक परियोजना शुरू की गई थी और इस औपनिवेशिक वास्तुशिल्प चमत्कार के नवीनीकरण में 8 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए थे। हालांकि यह बात और हैं कि उस समय इस इमारत के जीर्णोद्धार का कार्य खूब सुर्खियों में रहा था। ट्यूडर शैली के टाउन हॉल की इमारत को एडीबी द्वारा वित्त पोषित परियोजना के तहत 2 साल 11 महीने के भीतर अपने मूल स्वरूप में राज्य पर्यटन विभाग द्वारा बहाल किया गया था। एक विरासत संरचना होने के कारण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के मानदंडों के अनुसार किया गया। भवन के बेहतर जीवन के लिए सीमेंट की जगह चूना सुरखी का उपयोग किया गया है। इसके बाहरी और अंदरूनी हिस्से को पॉलिश और स्टोन वर्क की मरम्मत करके नए सिरे से तैयार किया गया है। माल रोड और रिज़ मैदान के दीवाने थे अंग्रेज अंग्रेज शिमला के माल रोड और रिज की खूबसूरती के बहुत कायल थे। उन्होंने इस बात को सुनिश्चित किया कि रिज के आसपास ऊंची-ऊंची ऐसी इमारतें न बनें, जिससे यहां से नजर आने वाली खूबसूरत पर्वतशृंखलाओं का दृश्य ही ओझल हो जाए। इसी तरह माल रोड की खूबसूरती और साफ -सफाई को बनाए रखने की तरफ भी वे विशेष ध्यान देते थे। अंग्रेजों के समय में माल रोड को दिन में दो बार पानी से धोया जाता था। इसके लिए चमड़े की मश्क लेकर विशेष सफाई कर्मचारी यहां हमेशा तैनात रहते थे। माल रोड पर थूकने या कूड़ा फेंकने के लिए लोगों पर जुर्माना किया जाता था। यह व्यवस्था आज तक कायम है। शिमला के माल रोड पर थूकने या कूड़ा फेंकने पर आज भी पांच सौ रुपए तक का जुर्माना किया जा सकता है। इस संबंध में चेतावनी देने वाले साइन बोर्डों को माल रोड पर प्रमुखतापूर्वक लगाया गया है। पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र टाउन हॉल न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि बाहरी राज्यों से आने वाले सैलानियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हैं। यह रिज मैदान के बीचों बीच स्थित है जिस वजह से यह हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस इमारत को बनाया ही कुछ इस तरह गया है कि हर कोई इस इमारत की खूबसूरती का कायल हो जाए। पर्यटक शहर शिमला के टाउन हॉल को रात की रोशनी में देखने पर एक अलग और शानदार नजारा मिलता है। टाउन हॉल शिमला के सबसे महत्वपूर्ण स्थल माल रोड पर स्थित है। इमारत के प्रवेश द्वार पर बड़ी सीढ़ियाँ हैं। इन चरणों का उपयोग न केवल आगंतुक बैठने और गपशप करने और विश्राम के कुछ क्षणों के लिए करते हैं, बल्कि इमारत का भव्य प्रवेश द्वार आगंतुकों के लिए तस्वीर लेने का पसंदीदा स्थान है। चूंकि टाउन हॉल का स्थान ठीक उसी स्थान पर है जहां द माल रोड रिज से मिलता है, आगंतुकों को इसके आसपास कई अन्य महत्वपूर्ण इमारतें और स्मारक देखने को मिलते हैं। टाउन हॉल के ठीक बगल में प्रसिद्ध गेयटी थियेटर है। इसके पास एक और लोकप्रिय विरासत स्थल है, क्राइस्ट चर्च, ब्रिटिश शिमला का एक भवन। इन सबको देखकर शिमला आने वाले सैलानी बार बार यहाँ आना पसन्द करते हैं। स्केटिंग शुरू होने की जानकारी देता था लाल गुब्बारा ऐतिहासिक टाउनहाल भवन की छत पर लाल गुब्बारा टांगा जाता था। जी हां आपको सुन कर हैरानी जरूर होगी लेकिन यह बिल्कुल सत्य है। अंग्रेजों के समय से सर्दियां शुरू होते ही टाउनहाल की छत पर लाल रंग का गुब्बारा दिख जाता था। सुबह और शाम के समय ये गुब्बारा टाउनहाल की छत पर टंगा दिखता था। 2014 में जब टाउनहाल की मरम्मत का काम शुरू हुआ तो ये गुब्बारा दिखना भी बंद हो गया। यह गुब्बारा 1920 से टाउनहाल की छत पर लगता आया है। गुब्बारे द्वारा बताया जाता था कि आइस स्केटिंग रिंक में स्केटिंग शुरू हो चुकी है। ये गुब्बारा उतनी देर ही टंगा रहता था, जितनी देर स्केटिंग होती थी। सुबह और शाम के सेशन के वक्त ये गुब्बारा टाउनहाल पर टंगा होता था। जिस दिन टाउनहाल पर ये गुब्बारा नहीं दिखता था तो उसका मतलब था कि मौसम की वजह से स्केटिंग नहीं हो रही है। अंग्रेजों के जमाने में टाउनहाल के दूसरी तरफ रिवॉली सिनेमा के ऊपर के हिस्से में घना जंगल था। पेड़ों की वजह से रिंक नजर नहीं आता था। तभी अंग्रेजों ने स्केटिंग रिंग के शौकीनों की सुविधा के लिए ये गुब्बारा लगाना शुरू किया ताकि माल रोड पर टहलते हुए स्केटिंग के शौकीनों को पता चल जाए कि स्केटिंग हो रही है या नहीं। गुब्बारा लटकता देख शिमला घूमने आए शौकिया पर्यटक और स्थानीय लोग भी स्केटिंग का लुत्फ उठाने के लिए स्केटिंग रिंक में पहुंच जाते थे। पर अब यह रिवाज या अंग्रेजों की बनी हुई परम्परा काफी सालों से बंद है। यादों को खोजते-खोजते शिमला पहुँचते है ब्रिटिश अंग्रेजों को उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्र शिमला में अपने देश की तस्वीर दिखती थी। उन्हें यह जगह इतनी पसंद आई की उन्होंने इसे हू-ब-हू इंग्लैंड के शहर की शक्ल देने की कोशिश की। खास बात तो यह है कि वे साल के ज्यादातर माह शिमला में ही गुजारते थे। आज ब्रिटिश काल के ये ऐतिहासिक भवन पर्यटकों के लिए आकर्षण बने हुए हैं। साथ ही शिमला की अस्तित्व की गवाह भी हैं। शिमला में अंग्रेज अपने देश की छवि ढूंढ़ते थे। शिमला से उन्हें बेहद प्यार था। आज भी इंग्लैंड की नई पीढ़ी के लोग अपने बाप-दादाओं की यादों को खोजते-खोजते शिमला आ पहुंचते हैं। इस शहर के चप्पे-चप्पे में इतिहास छिपा है। यहां के देवदार के वृक्ष न जाने कितनी कही-अनकही बातों और घटनाओं के गवाह हैं। इन्होंने एक लम्बा वक्त देखा है। शिमला की अहमियत इसकी खूबसूरत वादियों की वजह से ही नहीं रही बल्कि यहां से चलने वाले ताकतवर अंग्रेजी शासन ने भी इसे पूरी दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई। वर्तमान में नगर निगम महापौर और उपमहापौर का कार्यालय शिमला की खूबसूरती को चार चांद लगाने वाली ऐतिहासिक इमारत टाउन हॉल एक तरफ जहां लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं वहीं दूसरी तरफ इस इमारत में इन दिनों नगर निगम के महापौर और उपमहापौर का कार्यालय हैं। बता दे कि इस इमारत के जीर्णोद्धार के बाद हाईकोर्ट ने केवल महापौर व उपमहापौर के कार्यालय खोलने की ही अनुमति दी है। हालांकि निगम प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है कि इस इमारत में पहले की तरह नगर निगम का कार्यालय हो।
पहले मौसम की मार ने सेब की गुणवत्ता पर असर डाला, फिर रही सही कसर निजी कंपनियों ने सेब खरीद के कम दाम तय कर पूरी कर दी। इस पर कम दामों पर आयात हो रहे सेब से तो बाजार के सेंटीमेंट ही बिगड़ गए। निराश बागवानों को सरकार से हौंसला चाहिए था, पर मिले हताश करने वाले बयान। आखिर समस्या कहां है, कोई चूक हुई है, या खामी व्यवस्था की है ? इससे भी बड़ा सवाल ये है कि ये सिर्फ आज का मसला है या भविष्य के लिए एक चेतावनी है। गिरे सेब के दामों के मसले को फर्स्ट वर्डिक्ट ने हर पहलु से जानने-समझने का प्रयास किया, ताकि सही तस्वीर सामने आ सके। पेश है विशेष रिपोर्ट ..... हिमाचल सेब के दाम बाजार में गिर गए हैं जो बागवानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। बीते वर्ष की अपेक्षा इस बार सेब के दामों में करीब तीस फीसद की गिरावट दर्ज की जा रही है जिसका एक बड़ा कारण निजी कंपनियों द्वारा गिराए गए सेब के दाम बताया जा रहा है। अडानी कंपनी ने पिछले साल की तुलना में सेब के दाम प्रति किलो 16 रुपए कम तय किए है। बागवान मानते है कि कंपनी ने जैसे ही सेब खरीद मूल्य सार्वजनिक किये पूरे बाजार में सेब के दाम गिर गए। कंपनी 80 से 100 फीसदी रंग वाला एक्स्ट्रा लार्ज सेब 52 रुपए प्रति किलो जबकि लार्ज, मीडियम और स्मॉल सेब 72 रुपए प्रति किलो की दर पर खरीद रही है। बीते साल एक्स्ट्रा लार्ज सेब 68 जबकि लार्ज, मीडियम और स्मॉल सेब 88 रुपए प्रति किलो निर्धारित किया गया था। अडानी के बाद मंडियों के रेट भी कम होने से बागवान नाराज हैं। इस सीजन में 60 से 80 फीसदी रंग वाला एक्स्ट्रा लार्ज सेब 37 रुपए किलो जबकि लार्ज, मीडियम और स्मॉल आकार का सेब 57 रुपए प्रति किलो की कीमत पर खरीदा गया। 60 फीसदी से कम रंग वाले सेब की खरीद 15 रुपए प्रति किलो की कीमत पर हो रही है, जबकि पिछले साल ऐसा सेब 20 रुपए किलो खरीदा गया था। बागवानों के अनुसार अडानी कंपनी ने इस साल 10 साल पुराने रेट खोले हैं। 2011 में अडानी ने 65 रुपये प्रति किलो रेट पर सेब खरीद की थी। बागवान लगातार ये आरोप लगा रहे है कि अडानी ने हिमाचल आकर पहले सेब के दाम बढ़ाए जिससे छोटे कारोबारी खत्म हो गए और अब जब कम्पटीशन कम हो गया और बागवानों के पास बहुत कम अन्य विकल्प बचे है, तो दाम घटा दिए गए। अडानी के बाद सेब खरीद करने आई देवभूमि कोल्ड चेन प्राइवेट लिमिटेड ने भी बागवानों को झटका दिया है। इस कंपनी ने भी बीते साल के मुकाबले सेब के रेट 14 रुपये तक कम किए हैं। प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह बिष्ट सेब की मौजूदा मार्केट, किसान के हालात और अदानी एग्री फ्रेश द्वारा खोले गए रेट का असर बताते हुए कहते है कि अगर कोई बागवान 1000 पेटी सेब पैदा करता है तो उसमें 300 पेटी सेब प्रीमियम होता है बाकी 400-500 अच्छी क्वालिटी का और बाकी सेब कटा फटा बोरी में बेचने वाला होता है। बिष्ट कहते हैं, "सबसे अच्छी क्वालिटी का रेट 72 रुपए और सबसे निचली क्वालिटी के सेब का रेट सिर्फ 12 रुपए किलो ही है। बाग में तो हर तरह का सेब निकलता है, ऐसे में पूरी फसल का औसत रेट 30-50 रुपए किलो का बैठता है।" वो आगे कहते हैं, "किसान से 50 रुपए औसत में खरीदे गए इसी सेब को अदानी 3-4 महीने बाद 150 से 200 रुपए में बेचता है। अगर प्रति किलो पर कोल्ड स्टोरेज का 20-25 रुपए किलो का खर्च भी मान ले तो कंपनी को दोगुना-तिगुना मुनाफा होता है। अडानी की कंपनी अगर सेब की खरीद के वक्त 4-5 रुपए का अच्छा रेट दे देती तो उसके मुनाफे पर फर्क नहीं पड़ता लेकिन बागवान के लिए ये रकम बड़ी हो जाती।" वैसे इसमें भी कोई संशय नहीं है कि इस बार सेब की कीमतों में गिरावट का एक बड़ा कारण मौसम की मार भी है। सालभर सेब की फसल पर मौसम के विपरीत प्रभावों के बाद अब जब बाजार में बेचने का समय आया तो सीजन की शुरुआत तो अच्छे दामों से हुई, लेकिन फिर प्रति पेटी सेब के दामों में पांच सौ से हजार रुपये की कमी आ गई है। पहले सूखा और फिर अप्रैल में हुई बेमौसमी बर्फबारी व मई माह में हुई ओलावृष्टि व तूफान ने ऊपरी शिमला के अधिकतर स्थानों में सेब की फसल पर विपरीत असर डाला है, जिससे सेब की गुणवत्ता पर बुरा प्रभाव पड़ा है। वहीं इस साल ज्यादा फसल होने के साथ सेब का साइज भी छोटा है, जिससे मंडी में आ रही फसल में हर बागवान की खेप में अच्छी दर नहीं होने से सेब के दाम कम मिल रहे हैं। बागवान ये तो मानते है कि ओलावृष्टि से काफी फसल खराब हुई है, पर उनके अनुसार इसकी आड़ में आढ़तियों, व्यापारियों और कॉरपोरेट घरानों ने गुणवत्तापूर्ण सेब के भी रेट गिरा दिए। उधर, आढ़तियों का कहना है कि इस बार रेट कम मिलने का मुख्य कारण ओलावृष्टि से फसल का बहुत ज्यादा प्रभावित होना है। खराब सेब आ रहा है, ओलों का दागी सेब जो एचपीएमसी को बोरियों में जाना चाहिए, वह भी पेटियों में जा रहा है, जिस वजह से दाम गिरे है। ईरान और टर्की का सेब भी बना आफत हिमाचल की करीब साढ़े चार हजार करोड़ रुपये की सेब की आर्थिकी के लिए ईरान और तुर्की का सेब चुनौती बन गया है। पिछले साल की अपेक्षा सेब के दाम करीब तीस फीसदी तक कम मिलने का एक कारण ये भी है। बाजार में इस बार ईरान का सेब हिमाचली सेब को पछाड़ रहा है। ईरान का सेब रंग और स्वाद में श्रीनगर और किन्नौर की सेब की बराबरी करता है, जबकि वह एक हजार से 1500 रुपये प्रति पेटी तक उपलब्ध है। यह सेब मई से आना शुरू हो जाता है। वही मौसम की मार के चलते हिमाचल से आ रहा करीब 65 से 70 फीसदी सेब दागी और छोटे आकार का है। बड़े प्रदेशों और प्रमुख शहरों में बड़े आकार के सेब की मांग रहती है, इसलिए कम मांग के कारण भी दाम प्रभावित हुए हैं। बागवानों के अनुसार भारत में अफगानिस्तान के रास्ते ईरान और तुर्की से सेब का अनियंत्रित और अनियमित आयात हो रहा है जो बागवानों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। बागवान वाणिज्य मंत्रालय को पत्र लिखकर ईरान और तुर्की से सेब आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग भी कर चुके है। इनका मानना है कि भारी मात्रा में इन देशों से सेब का आयात होने के बाद मार्केट में हिमाचली सेब की मांग कम हुई है। चिंता की बात यह है कि ईरान और तुर्की से आयात होने वाले सेब पर किसी भी प्रकार का नियंत्रण नहीं है, जिसके चलते हिमाचल के सेब कारोबार पर इसका नकारात्मक असर पड़ा है। दरअसल अफगानिस्तान साफ्टा (SAFTA) दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र का हिस्सा है और यहां से सेब के आयात पर कोई शुल्क नहीं लगता है। ईरान इस समझौते का हिस्सा नहीं है और माना जा रहा है कि इसलिए ईरान अपना सेब अफगानिस्तान से पाकिस्तान के रास्ते अटारी बॉर्डर से भारत भेजता हैं। ऐसा हो रहा है तो एक कंटेनर पर आठ लाख के करीब आयात शुल्क की चोरी हो रही है। इसके कारण ईरान का सेब सस्ता बिकता है। यदि ये सेब ईरान के रास्ते आए तो इसमें पंद्रह प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी और 35 प्रतिशत सेस लगेगा। नैफेड से खरीद क्यों नहीं ? हिमाचल के बागवानों का मानना है की उनकी स्थिति इतनी बुरी नहीं होती अगर हिमाचल में भी कश्मीर की तरह नैफेड जैसी कोई केंद्रीय संस्था बागवानों का सेब खरीदती। दरअसल कश्मीर में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा जम्मू कश्मीर के सेब उत्पादकों और व्यापारियों की मदद के लिए बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआइएस) को मंजूरी दी गई है। एमआइएस के तहत नेशनल एग्रीकल्चर कोआपरेटिव मार्केटिग फेडरेशन ऑफ इंडिया (नैफेड) किसानों और व्यापारियों से सीधे सेब खरीदती है। सेब की कीमत उसकी ग्रेडिंग के आधार पर होती है। इसका भुगतान सीधे बागवानों के बैंक खाते में होता है। इस योजना के तहत तीनों ग्रेड का सेब बागवानों से खरीदा जाता है। एमआइएस के तहत सेब खरीद की प्रक्रिया में ग्रामीण आबादी के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होते है। सेबों की पैकिंग, गाड़ियों में उनकी लदाई-ढुलाई और मंडियों तक पहुंचाने के काम में कई लोगों को रोजगार मिलता है और बागवानों को सेब के अच्छे दाम मिलते है। परन्तु हिमाचल में अब तक ऐसा कुछ भी नहीं है। इसीलिए हिमाचल के बागवान मांग कर रहे है कि जम्मू कश्मीर की तर्ज पर हिमाचल में भी सेब की खरीद की जाए। बागवानों ने सरकार काे तीन अलग अलग श्रेणियों में बांट कर अलग-अलग रेट भी सुझाएं है। बागवानों की मांग के बाद सरकार भी एक्शन में है। बागवानी विभाग ने नैफेड और जम्मू-कश्मीर के बागवानी विभाग से ग्रेड सिस्टम काे लेकर जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। विभाग यह जानने में जुट गया है कि बाजार में सेब के दामों गिरावट आने के बाद कैसे उसे स्थिर किया जाए साथ ताकि बागवानाें काे नुकसान न हाे। साथ ही ग्रेड के आधार किस तरह से सेब की खरीद की जाए। मंडी मध्यस्थता योजना में सुधार की दरकार हिमाचल में एचपीएमसी द्वारा भी 'सी' कैटेगरी के सेब को पूरी तरह से बाजार से बाहर नहीं किया जा रहा। मार्किट इंटरवेंशन स्कीम के तहत जो 'सी' कैटेगरी का सेब उठाया जाता है उसे भी एचपीएमसी पूरी तरह इस्तेमाल करने के बजाए उसका ऑक्शन कर देता है। ऑक्शन के बाद जो लोग इस सेब को खरीद रहे है वो इसे फिर मार्किट में ले आते है जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। मौजूदा समय में 'सी' ग्रेड सेब भी मार्केट में पहुंच रहा है। इस कारण अच्छे सेब को भी बढ़िया रेट नहीं मिल पा रहे । बागवानों के अनुसार 'सी' ग्रेड सेब को मार्केट में जाने से रोकने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। जब मार्केट में ‘ए' और 'बी’ ग्रेड सेब ही पहुंचेगा तो रेट में सुधार आएगा। मंडी मध्यस्थता योजना में सरकार 9.50 पैसे प्रति किलो की दर से सेब खरीद रही है। पर बागवानों की माने तो निम्न गुणवत्ता वाले इस सेब को परवाणू में बोली के बाद डेढ़ से ढाई रुपये प्रति किलो के दाम पर बेचा जाता है, जिसके बाद यह सेब दोबारा मार्केट में पहुंच जाता है। ऐसे में अच्छे सेब की मार्केट भी गिर रही है। बागवानों का सुझाव है कि इस सेब को बागवानों से खरीदने के बाद नष्ट कर दिया जाए और सी ग्रेड के सेब को बोरी के स्थान पर पेटी में पैक कर जूस और जैम बनाने के लिए प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाया जाए तो फायदेमंद रहेगा। मौजूदा समय में बागवान सी ग्रेड सेब को पेटियों में पैक कर मंडियों में भेज रहे हैं। गुणवत्ता सही न होने के कारण मंडियों में ऐसे सेब को सही दाम नहीं मिल रहे साथ ही अच्छे सेब के रेट भी प्रभावित हो रहे हैं। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो सरकार का सी ग्रेड सेब स्टोर करने और ऑक्शन का खर्च भी बचेगा। अडानी और लदानी के बीच नेक्सस, तय हो दाम : विक्रमादित्य सिंह शिमला ग्रामीण विधायक विक्रमादित्य सिंह खुद एक बागवान भी है। विक्रमादित्य सिंह कहते है कि " सेब के दाम लगातार गिरने से प्रदेश के बागवान परेशान है। सरकार को इन बागवानों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। सेब के दामों को नियंत्रित करने के लिए और बागवानों की मदद के लिए एक कमिटी का गठन किया जाना चाहिए। अडानी और लदानी के बीच में जो नेक्सस बना हुआ है, और जो बड़े निजी घराने है जो सेब को जमा करने में लगे है, इनके लिए भी दाम तय किये जाने चाहिए। इसके साथ सेब की विभिन्न ग्रेड की उचित तरीके से श्रेणियां बनाई जानी चाहिए। सेब हिमाचल की आर्थिकी का बड़ा हिस्सा है और हम इस मुसीबत के समय में किसानों बागवानों के साथ खड़े है।" लॉन्ग टर्म प्लानिंग की जरूरत : बरागटा भाजपा नेता चेतन बरागटा भी एक बागवान है और इनका कहना है कि इस बार हिमाचल का सेब ओलावृष्टि के कारण काफी अधिक प्रभावित हुआ है, जिसकी वजह से सेब की कीमतों में गिरावट आई है। परन्तु जो अच्छी गुणवत्ता का सेब है वो अब भी 2000 से अधिक कीमत पर बिक रहा है। बरागटा मानते है कि सेब के दामों पर नियंत्रण के लिए एक लॉन्ग टर्म प्लानिंग चाहिए, एक रात में कुछ भी नहीं बदलने वाला है। फ़ूड प्रोसेसेसिंग यूनिट्स चाहिए, सीए स्टोर्स चाहिए, सेब की प्रोडक्शन में गुणवत्ता का ध्यान रखने की ज़रूरत है, ऐसी बहुत सी चीज़ें है जिनके लिए किसी ने तैयारी नहीं की। अगर इन पर काम नहीं किया गया तो ये समस्या आने वाले कई सालों तक सामने आती रहेगी। तीन अलग क्षेत्र है जिन पर ध्यान देने की ज़रूरत है। पहला है सेब की प्रोडक्शन, दूसरा है सप्लाई चेन और तीसरा है मार्केटिंग। इन तीनों में ही बहुत सी खामियां है जिन्हें दूर करने की ज़रूरत है। बागवानों और सरकार को मिलकर काम करना होगा। कांग्रेस बार -बार कह रही है की सरकार की नाकामियों की वजह से दाम कम हो गए, पिछले साल जब सेब के दाम अच्छे थे तब क्या उन्होंने सरकार की सराहना की थी। अडानी के दाम गिराने से प्रभावित हुए दाम : मुंगटा बागवान एवं जिला परिषद् सदस्य कौशल मुंगटा मानते है कि हिमाचल में सेब के दाम गिरने का सबसे बड़ा कारण अडानी द्वारा कम किये गए सेब के दाम है। बीते साल के मुकाबले इस बार प्रति किलो के हिसाब से 16 रुपए कम रेट तय किए गए हैं। अडानी हिमाचल के सेब का सिर्फ 2 प्रतिशत ही खरीदता है, परन्तु फिर भी उनके दाम गिराने से हिमाचल में सेब के दाम प्रभावित हुए है। इनका आरोप है कि सेब मंडी में अडानी के इंटरफेरेंस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। हिमाचल में सेब पर एमएसपी भी नहीं है। कश्मीर में जिस तरह नैफेड के तहत सरकार सेब खरीदती है अगर ऐसी कोई व्यवस्था हिमाचल में भी हो तो बेहतर होगा। अफगानिस्तान के रास्ते बिना ड्यूटी भारत आ रहा सेब : बिष्ट प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकिन्दर सिंह बिष्ट के अनुसार इस बार सिर्फ बाजार के कारणों की वजह से ही सेब के दाम कम नहीं हुए है, बल्कि मौसम ने भी काफी काम बिगाड़ा है। इस साल शुरुआत में काफी सूखा पड़ा और बाद में ओला वृष्टि हुई ,जिसके कारण सेब की क्वालिटी प्रभावित हुई है। इस बार काफी छोटा सेब आया है। इसी का फायदा उठा कर आढ़तियों ने और बड़े कॉर्पोरेट्स ने सेब का दाम गिरा दिए। जहां दाम 400 से 500 तक गिराया जाना था वहां दाम 1000 रूपए तक गिरा दिया गया। इसके अलावा पिछले तीन सालों से तुर्की और ईरान का सेब भी भारत आ रहा है ये सेब उसी सीजन में आता है जब हिमाचल के सेब का पीक सीजन होता है। अफगानिस्तान के रास्ते ये सेब बिना ड्यूटी के भारत आ रहा है। ये सेब बहुत सस्ते दामों पर यहां आता है तो लदानी इसे खरीदते है जो हमारे सेब के दामों को प्रभावित करता है। बागवानों का खून चूस रही है निजी कंपनियां : पांजटा हिमालयन सोसाइटी फॉर हॉर्टिकल्चर एंड एग्रीकल्चर डेवलपमेंट के अध्यक्ष डिंपल पांजटा मानते है कि जो दूसरे और तीसरे ग्रेड का सेब बाजार में जा रहा है वो सेब के दाम कम होने का बड़ा कारण है। सरकार या एपीएमसी को चाहिए कि वो इस सेब को खरीद कर फ़ूड प्रोसेसेसिंग यूनिट्स में या किसी भी तरह बाजार से बाहर भिजवा दे। पांजटा मानते है कि इसके अलावा जो निजी कंपनियां जैसे अडानी या कोई अन्य भी यदि अपने रेट्स कम निकालते है तो भी दाम गिरते है। इस बार भी अडानी ने दाम बहुत कम किये है। मंडियों में जिस तरह सेब के रेट गिरे हैं, यह पूरी तरह सरकारी तंत्र की विफलता है। बागवान भी जागरूक नहीं है। निजी कंपनियां बागवानों का खून चूस रही है, इनपर लगाम होनी चाहिए। इन पर भी एमएसपी लागू की जानी चाहिए। नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बागवानों को निजी कंपनियों का बहिष्कार करना चाहिए। नैफेड के तहत हिमाचल का सेब भी खरीदा जाना चाहिए जिसकी कवायद हिमाचल सरकार द्वारा शुरू कर दी गई है। मंडियों में रेट गिरे, रिटेल में जस के तस : सुरेंद्र सिंह यंग एंड यूनाइटेड ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह का कहना है कि संकट के समय में सेब बागवानों को राहत देने में राज्य सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है। मंडियों में रेट गिर रहे हैं लेकिन रिटेल में रेट जस के तस हैं। एपीएमसी को बाहरी राज्यों की एपीएमसी के साथ तालमेल बैठा कर सेब के लिए सही मार्केट उपलब्ध कराना चाहिए। बागवानों को सरकार से अब कोई उम्मीद नहीं है, कारण है बागवानी मंत्री का बेतुका बयान। मंत्री जी कहते है बोरियों में सेब ले जाओ, जिस मंत्री की ये मानसिकता हो उससे क्या उम्मीद की जा सकती है। दूसरा सुरेश भारद्वाज जी के पास अगर किसान जाते है तो वे कहते है की मैं कुछ नहीं कर सकता, मैं कोई विशेषज्ञ नहीं हूँ। इन मंत्रियों को मार्किट इंटरवेंशन स्कीम का ही पता नहीं है। इन हालातों में मुझे नहीं पता कि क्या होगा। अच्छे माल को दाम मिलेंगे : हरीश ठाकुर पराला, ढली और भट्ठाकुफर आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं हरीश फ्रूट एजेंसी (एचएफए) के मालिक हरीश ठाकुर बिट्टू ने कहा कि रेट कम मिलने का मुख्य कारण ओलावृष्टि से फसल का बहुत ज्यादा प्रभावित होना है। खराब सेब आ रहा है। ओलों का दागी जो सेब एचपीएमसी को बोरियों में जाना चाहिए, वह भी पेटियों में जा रहा है। सेब के दाम मांग और आपूर्ति पर निर्भर करते हैं। रेट गिरे हैं, लेकिन अब लोग तुड़ान भी कम कर रहे हैं। लोग आढ़ती पर आरोप लगाते हैं। अडानी की बड़ी बातें हुईं, वह तो बढ़िया माल की पेटी भी 1400 रुपये ले रहे हैं, हम तो अच्छे माल के उससे भी ज्यादा दे रहे हैं। अच्छे माल को दाम मिलेंगे। आढ़ती और लदानी की सांठगांठ के आरोप गलत लगते हैं। पराला और भट्टाकुफर मंडियों की बात करें तो यहां ऐसा कुछ भी नहीं है। अगर कोई आढ़ती ऐसा करता भी है तो किसान उसके पास नहीं जाएगा।
हिमाचल प्रदेश में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए ज़मीनी स्तर पर काम शुरू हो गया है। अब प्रदेश की सभी ग्राम पंचायत कार्यालयों के सूचना बोर्ड पर पीएम किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों की सूची होगी। इसके साथ ही प्रदेश राजस्व विभाग ने जिले के सभी पटवारियों, पंचायत सचिवों और नंबरदारों की कमेटी बनाकर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों की वेरिफिकेशन के निर्देश दिए हैं। संबंधित क्षेत्र का पटवारी यह लिखकर देगा कि लाभार्थी के पास इस योजना का लाभ उठाने के लिए नियमों के तहत जोताई योग्य भूमि है या नहीं। इसके साथ ही संबंधित ग्राम पंचायत के सचिव भी लाभार्थियों का सत्यापन करेंगे। इन दोनों कर्मचारियों की ओर से तैयार रिपोर्ट तहसीलदार और उसके बाद जिला राजस्व विभाग के पास पहुंचेगी। ज़मीनी स्तर पर वेरिफिकेशन होने से इस योजना में हो रहे भ्रष्टाचार पर विराम लगेगा। जिला हमीरपुर में कुछ अपात्र लोगों ने भी पूर्व में इस योजना के तहत आवेदन कर दिया था। जांच हुई तो पाया कि ये लोग इस योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र नहीं थे। अपात्र लोगों के पास सरकार का 98.40 लाख रुपये फंसा हुआ है। इसमें से अभी करीब 42 लाख रुपये रिकवर हुए हैं। उधर, जिला राजस्व अधिकारी देवराज भाटिया ने बताया कि जिले के सभी पटवारियों और पंचायत सचिवों को फील्ड स्तर पर प्रधानमंत्री किसान योजना के लाभार्थियों की जांच के निर्देश दिए हैं। पंचायतों में पात्र लाभार्थियों की सूची भी लगेगी।
भाषा एवं संस्कृति विभाग जिला शिमला (हिमाचल प्रदेश) द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 01सितम्बर,2021 से 14सितम्बर,2021 तक प्रदेश स्तर पर राजभाषा हिंदी पखवाड़े का आयोजन करवाया जा रहा है। इस अवसर पर जिला स्तर पर आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों के अन्तर्गत इस जिला के स्कूली छात्र-छात्राओं/युवाओं में राजभाषा हिंदी के प्रति रुचि पैदा करने तथा इसके व्यापक प्रचार-प्रसार तथा स्कूली छात्र-छात्राओं में प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने के उद्देश्य से ऑनलाइन (गुगल मीट ऐप) के माध्यम से कक्षा 9वीं से 10+2 कक्षा के लिए : 1. भाषण प्रतियोगिता विषय: स्वतंत्रता संग्राम में हिंदी की भूमिका कुल अंक: 50, समय सीमा 3-5 मिनट ऑनलाइन आयोजन 08 सितंबर,2021, प्रातः 11:00 बजे से 2. निबंध लेखन विषय: राष्ट्र के निर्माण में हिंदी भाषा का योगदान कुल अंक: 50, समय सीमा: एक घंटा, शब्द सीमा 250 से 500 शब्द 3. प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता (हिंदी साहित्य, हिंदी व्याकरण पर आधारित) दिनांक 08 सितम्बर,2021को 2:00 बजे के बाद दोपहर से आयोजित की जाएगी 4. नारा लेखन प्रतियोगिता (स्वर्णिम हिमाचल ) थीम पर आधारित होगी। सभी प्रतियोगिताओं में -प्रथम, तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को आकर्षक पुरस्कार तथा प्रशस्ति पत्र सभी प्रतिभागियों को प्रदान किए जाएंगे नियम व शर्तें:- 1.एक वर्ग की प्रतियोगिता में एक विद्यालय से केवल एक ही छात्र/छात्रा ले सकते है। यानि एक विद्यालय से केवल चार प्रतिभागी भाग ले सकते हैं। 2. निबंध लेखन तथा नारा लेखन में प्रतिभागी द्वारा तैयार किए गए निबंध/ नारे की फोटो को उसके नाम, कक्षा, विद्यालय का नाम, संपर्क सूत्र सहित JPEG फार्मेट में भाषा एवं संस्कृति विभाग जिला शिमला की ईमेल dloshimlahp@gmailcomपर 06सितम्बर,2021 सांय 5.00तक भेजा जाना अनिवार्य है। 3. भाषण व प्रश्नोतरी प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के नाम, कक्षा, विद्यालय का नाम, संपर्क सूत्र आदि की जानकारी विद्यालय के मुख्याध्यापक/प्रधानाचार्य/भाषा अध्यापक के माध्यम से दिनांक 06 सितंबर, 2021 सांय 5.00 तक भाषा एवं संस्कृति विभाग जिला शिमला के ईमेल dloshimlahp@gmail.com पर अनिवार्य रूप से भेजें जाए। अधिक जानकारी के लिए जिला भाषा अधिकारी शिमला के मो०नं० 9816756785 पर संपर्क करें
भाजपा प्रभारी एवं चीफ पैट्रन भारतीय पैरालंपिक संघ अविनाश राय खन्ना ने रविवार को दिल्ली में पैरालंपिक 2020 के खिलाड़ियों का वापिस भारत पहुंचने पर स्वागत किया। उन्होंने पैरालंपिक मेडलिस्ट सुरेंद्र सिंह गुज्जर व भारत की भाविनाबेन पटेल जिन्होंने टेबल टेंनिस मुखाबले में रजत पदक जीत। उनके साथ इस अवसर पर भाजपा के कांगड़ा से सांसद कृष्ण कपूर भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि पैरालंपिक 2020 में भारत का जोरदार प्रदर्शन रहा है अभी तक भारत ने कुल 19 पदक जीत आपने नाम किए है , हमारे सभी खिलाड़ियों ने इस प्रदर्शन के लिए कड़ी महेनत की है जिसके कारण भारत का यह प्रदर्शन रहा है। उन्होंने कहा हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी खिलाड़ियों के मनोबल बढ़ाने में किसी भी प्रकार की कमी नहीं छोड़ी है। मैं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का भी धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने भी पैरालंपिक 2020 में जीते खिलाड़ी के लिए 1 करोड़ की राशि देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि भारत के खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने के लिए समाज के सभी वर्गों एवं विभूतियों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है।
राजा ह्यूमन राइट ने रविवार को तीज के त्योहार का आयोजन किया। कार्यक्रम का आयोजन शिमला के गंज स्थित एसडी स्कूल के सभागार में किया गया। मुख्यातिथि के तौर पर शिमला भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष अनिला कश्यप सूद, सूद सभा की पूर्व सदस्य वीरमति सूद और भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय सदस्य भारती सूद ने शिरकत की। एनजीओ की प्रदेशाध्यक्ष संगीता सूद ने कहा कि एनजीओ अपनी भारतीय परम्पराओं के निर्वहन के साथ साथ अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों का भी बखूबी निर्वहन कर रहा है। आज के कार्यक्रम में एनजीओ ने अध्यापक दिवस के उपलक्ष्य में अपना जीवन शिक्षा को समर्पित कर चुके अध्यापकों को भी सम्मानित किया गया। इसी के साथ कोरोना महामारी को मात देने वाली महिलाओं को तीज पर्व पर सम्मानित किया गया। आज एनजीओ ने कोरोना से ठीक होने वाली एक 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला सहित पांच अन्य महिलाओं और सात अध्यापकों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इससे पहले एनजीओ ने रक्तदान शिविर भी पौधरोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया है। तीज के कार्यक्रम में महिलाओं ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। यहां महिलाओं के लिए मेहंदी, तंबोला, नाच गाने के साथ साथ अन्य मनोरंजक कार्यक्रम रखे गए थे। जिलाध्यक्ष मीना वर्मा, रीटा, लक्ष्मी, निशा, कमलेश राणा उप प्रधान, पुनीता, अनिला, कृष्णा, सुनंदा, रश्मि, स्नेहलता, सुविधा, आकांशा, शालिनी, रूपा शर्मा, बृजमोहन, मुकेश, कमला, कुमा, सिम्मी, गीतांजलि भागड़ा, शिप्रा कुठियाला, अनु व अन्य महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।
हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह रविवार को चंडीगढ़ में 26 औद्योगिक घरानों के साथ वन टू वन रूबरू हुए और इस दौरान हिमाचल प्रदेश में इन औद्योगिक घरानों द्वारा 3307 करोड रुपए निवेश के एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें करीब 15, 000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है । इस अवसर पर उद्योग निदेशक राकेश प्रजापति, उद्योग विभाग के अतिरिक्त निदेशक तिलक राज शर्मा, महाप्रबंधक ऊना एवम सिरमौर भी उपस्थित थे। जिन बड़ी कंपनियों के साथ आज समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए, उनमें लुधियाना स्थित ट्राइडेंट कम्पनी द्वारा प्रदेश में टैक्सटाइल पार्क बनाने का प्रस्ताव दिया गया जिसमें करीब 800 करोड़ का निवेश होगा। उद्योग मंत्री द्वारा द्वारा टैक्सटाइल पार्क की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करने के लिए विभाग के अधिकारियों को शीघ्र समुचित कदम उठाने के निर्देश दिए। भारत सरकार के आत्मनिर्भर अभियान के अंतर्गत पेट्रोल के आयात का खर्चा कम करने के लिए एथनॉल आधारित उद्योग स्थापित किए जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रदेश में लगभग एक हजार करोड़ निवेश के 6 एमओयू साइन किए गए। "बेटर टुमारो इंफ्रास्ट्रक्चर एंड सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड" द्वारा प्रदेश में प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्क के लिए 490 करोड रुपए का निवेश किया जाएगा जिसमें करीब 2000 लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा "माधव एग्रो " कंपनी द्वारा प्रदेश में 400 करोड रुपए की लागत से प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किया जाना प्रस्तावित है जिसमें 2,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। हिमालयन ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस द्वारा 150 करोड रुपए लागत की निजी क्षेत्र में हिमालयन स्किल यूनिवर्सिटी स्थापित की जाएगी जिसमें 450 लोगों को रोजगार मिलेगा। मैटेफिजिकल हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा नालागढ़ क्षेत्र में डेढ़ सौ करोड रुपए की लागत से 250 बिस्तर का प्राइवेट हॉस्पिटल स्थापित किया जाना प्रस्तावित है जिसमें 500 लोगों को रोजगार मिलेगा। उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने इस अवसर पर उद्यमियों को हिमाचल प्रदेश में अधिकाधिक निवेश करने का खुला निमंत्रण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में प्रदेश सरकार उद्यमियों को प्रदेश में निवेश के लिए हर संभव सुविधाएं, प्रोत्साहन व रियायते प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा 2 साल पहले राज्य सरकार द्वारा राज्य की पहली ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट का आयोजन किया गया जिसकी बदौलत हमारा प्रदेश दूसरी औद्योगिक क्रांति का अग्रदूत बना। इस ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट में दुनियाभर के निवेशकों ने भाग लिया और इस आयोजन के दौरान सरकार द्वारा 96 हजार करोड़ के प्रस्तावित निवेश के साथ सात सौ से अधिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए ।।इसके बाद 14500 करोड के निवेश की ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया जिसमें 28000 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा इन्वेस्टर मीट के बाद किसी भी राज्य द्वारा आयोजित यह अब तक का सबसे तेज ग्राउंड ब्रेकिंग था। उद्योग मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा अब दूसरी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की तैयारी है ताकि बड़े औद्योगिक घराने प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा निवेश के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा प्रदेश सरकार ने भविष्य के लिए प्रस्तावित औद्योगिक विकास व औद्योगिक पार्कों के लिए पिछले वर्ष के दौरान 3000 एकड़ से अधिक का भूमि बैंक बनाया है। उन्होंने कहा जल्दी ही प्रदेश को संभावित 8000 करोड निवेश का बल्क ड्रग पार्क मिलने की भी आशा है जिसमें 15000 लोगों को रोजगार देने की क्षमता होगी। उद्योग मंत्री ने कहा कि प्रदेश में दो नई पेपर मिल स्थापित होना भी प्रस्तावित है।
दलगत राजनीति से ऊपर उठकर प्रदेश व शिमला नगर के विकास को गति प्रदान करने के लिए सक्रियता से कार्य किया जा रहा है। यह विचार रविवार को शहरी विकास, आवास, नगर नियोजन, विधि, संसदीय कार्य एवं सहकारिता मंत्री सुरेश भारद्वाज ने समरहिल में 1 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से निर्मित सामुदायिक भवन के उद्घाटन अवसर पर व्यक्त किए। सुरेश भारद्वाज ने कहा कि शिमला नगर में विकास के अनेक कार्य शिमला स्मार्ट सिटी व अमरूत योजना के माध्यम से किए जा रहे है। शिमला नगर के विस्तारीकरण के कारण उत्पन्न समस्याओं के निवारण के लिए विभिन्न विभागों के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। प्रदेश व केन्द्र सरकार से प्राप्त राशि के माध्यम से जहां शिमला शहर को 24X7 निरंतर पेयजल आपूर्ति, लोगों को पार्किंग स्थलों की व्यवस्थाएं, सड़कों को चौड़ा करना इसके साथ-साथ शिमला शहर के सौंदर्यीकरण को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए कार्य किया जा रहा है ताकि जहां स्थानीय लोगों को सुविधाएं मिले वहीं पर्यटक शिमला नगर की ओर आकर्षित हो सके। उन्होंने बताया कि सामुदायिक भवन के निर्माण से जहां लोगों को सामाजिक, राजनीतिक अथवा पारिवारिक समारोह के लिए हॉल सुविधा मिलेगी वहीं समरहिल व आसपास के क्षेत्र के लोगों को पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इसी बहुमंजिला भव्य भवन में वार्ड पार्षद कार्यालय भी निर्मित किया गया है, जिससे नगर निगम के संबंध में कार्य करवाने के लिए लोगों को वार्ड पार्षद की उपलब्धता इस भवन के माध्यम से सुनिश्चित हो सकेगी। इस अवसर पर शिमला नगर निगम महापौर सत्या कौंडल ने बताया कि नगर निगम द्वारा प्रत्येक वार्ड में अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे है। उन्होंने बताया कि सभी वार्डों का समान विकास सुनिश्चित कर वहां सड़क, पानी, स्वास्थ्य व अन्य निगम के अधीन आने वाले क्षेत्रों को सुविधा प्रदान की जा रही है। समरहिल क्षेत्र की पार्षद शैली ने भवन निर्माण के लिए मंत्री व विभाग का आभार व्यक्त किया तथा विभिन्न चुनौतियों से उभरते हुए इस भवन निर्माण को पूर्ण करने में सहयोग करने वाले सभी का धन्यवाद किया। इस अवसर पर पार्षद अर्चना धवन, डॉ. किमी सूद, विदुषी शर्मा, आशा शर्मा, पूर्ण मल, जगदीश सिंह बग्गा, सीमी नंदा, मीरा शर्मा, विवेक शर्मा, आनंद कौशल, तनुजा चौधरी, दीपक शर्मा, पूर्व पार्षद प्रदीप कश्यप, सांगटी पंचायत के उप-प्रधान हेमन्त, महामंत्री गगन लखनपाल, राजेश भण्डारी, आयुक्त नगर निगम आशीष कोहली तथा संयुक्त आयुक्त नगर निगम अजीत भारद्वाज उपस्थित थे।
प्रदेश के हर परिवार को उसके घर पर आसानी से पेयजल मिले और लोगों को पानी के लिए परेशानी न उठानी पड़े, इसके लिए राज्य सरकार के प्रयास अब जल जीवन मिशन के तहत फलीभूत होनेे लगे हैं। मिशन के अन्तर्गत जिला लाहौल- स्पीति में 15 हजार 256 फुट की ऊंचाई पर स्थित देश के सबसे ऊंचे मतदान केंद्र टशीगंग गांव के घर-घर में भी राज्य सरकार ने नल से जल पहुंचाने में कामयाबी हासिल की है। कोविड-19 की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद भी राज्य सरकार प्रदेश में जल जीवन मिशन को प्रभावी तरीके से कार्यान्वित कर रही है। हर घर, नल से पेयजल पहुंचाने की राज्य सरकार की योजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रभावी तरीके से कार्य किया जा रहा है, जिसके चलते यह पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन में देशभर में उत्कृष्ट कार्य करने वाले राज्यों में अग्रणी स्थान पर है। प्रदेश में लगभग 17 लाख घरों में नल लगाए जाने है, जिनमें से अब तक 14 लाख 50 हजार घरों में नल उपलब्ध करवाए जा चुके हैं। जल जीवन मिशन के शुरू होने के बाद लगभग 18 माह की छोटी-सी अवधि में राज्य में 6 लाख 5 हजार नल लगाए गए हैं। हर घर, नल से पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य सरकार के जल शक्ति विभाग द्वारा 15 अगस्त, 2022 तक की समय सीमा निर्धारित की गई है, जिसके दृष्टिगत विभाग कार्य योजना तैयार कर उसे अमली जामा पहनाने में जुटा हुआ है। वर्ष 2019 में शुरू हुए जल जीवन मिशन के अन्तर्गत राज्य को जल जीवन मिशन के तहत किए जाने वाले विभिन्न कार्यों के लिए 2260 करोड़ की धनराशि आवंटित हुई है, जिसमें से जल शक्ति विभाग द्वारा तैयार की गई विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन पर अब तक 1107 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। जल जीवन मिशन के तहत राज्य में किए जाने वाले विभिन्न कार्यों की परफाॅरमेंस के आधार पर राज्य को 283 करोड़ का इंसेन्टिव भी प्राप्त हुआ है जो प्रदेश के कर्मचारियों विशेष कर जल शक्ति विभाग के कर्मचारियों के लिए भी गर्व की बात है। प्रदेश को मिला यह इंसेन्टिव जल शक्ति विभाग की बेहतर नीतियों व कार्य प्रबन्धन के साथ-साथ कर्मचारियों की कड़ी मेहनत के बदौलत ही मिल पाया है। राज्य में जल जीवन मिशन के तहत प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर की दर से पानी उपलब्ध करवाने के लिए कार्य किया जा रहा है। राज्य में विभिन्न पेयजल योजनाओं में सुधार व अनेक नई योजनाओं को बना कर लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। राज्य में 283 पेयजल योजनाओं के संवर्धन और सुधार के लिए 1120.24 करोड़ रुपये की योजनाओं के प्राकलन (डीपीआर) तैयार किए गए हैं। इन परियोजनाओं पर अब तक 288.11 करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई है। राज्य में वर्ष 2021-22 के लिए विभिन्न योजनाओं के संवर्धन और सुधार के लिए 764 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। जल जीवन मिशन के तहत राज्य सरकार द्वारा 888 करोड़ रुपये की लागत की 107 परियोजनाएं और तैयार मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजी गई है। जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि जल जीवन मिशन की विभिन्न गतिविधियों के मामले में हिमाचल प्रदेश देशभर में शीर्ष स्थान पर है। मिशन के अन्तर्गत जिला लाहौल-स्पीति में 15 हजार 256 फुट की ऊंचाई पर स्थित देश के सबसे ऊंचे मतदान केंद्र टशीगंग गांव के घरों में भी नल से जल पहंुचाया जा चुका है। मिशन की गतिविधियों को बिना किसी रूकावट के निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि 15 अगस्त, 2022 तक राज्य के हर घर में नल हो।
आजादी के अमृत महोत्सव और शिक्षक दिवस के उपलक्ष में क्यार कोटी गांव में उमंग फाउंडेशन ने युवक मंडल क्यार कोटी के साथ मिलकर रक्तदान शिविर लगाया। इसमें 42 लोगों ने खून दान किया। शिविर का उद्घाटन कसुम्पटी के विधायक अनिरुद्ध सिंह ने स्वयं रक्तदान करके किया। उन्होंने रक्तदाताओं को फूल और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। शिविर के संयोजक और उमंग फाउंडेशन के ट्रस्टी विनोद योगाचार्य ने बताया कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पीएचडी की छात्रा एवं जानी मानी दृष्टिबाधित गायिका भारतीय चुनाव आयोग की ब्रांड एम्बेसडर मुस्कान ने भी रक्तदान कर समाज को संदेश दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंचायत प्रधान भुवनेश्वर शर्मा ने की। विधायक अनिरुद्ध सिंह ने लोगों को रक्तदान जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। मुस्कान ने सुरीली आवाज़ में एक गीत सुनाया और कहा कि दृष्टिबाधित एवं अन्य दिव्यांग व्यक्ति भी रक्तदान कर दूसरों का जीवन बचा सकते हैं। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में हुए रक्तदान शिविर में प्रिंसिपल नविता गुप्ता और उनकी बेटी रिद्धिमा गुप्ता ने एक साथ खून दान किया। स्थानीय दंपत्ति जितेंद्र शर्मा और चंद्र प्रभा शर्मा ने भी रक्तदान किया। शिविर में कई शिक्षकों - बाल मुकंद शास्त्री, भुवन दत्त शास्त्री, ललित मोहन शास्त्री, नंदलाल शर्मा एवं ईश्वरी शर्मा ने रक्तदान कर शिक्षक दिवस मनाया। युवक मंडल क्यार कोटी के तोशित शर्मा, विकास, देवेश शर्मा, देवेन्दर शर्मा, अजय, रोहन और सौरभ शर्मा ने भी रक्तदान किया। क्यार कोटी गांव में हुए पहले रक्तदान कैंप में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पीएचडी के विद्यार्थियों- मुस्कान, मुकेश कुमार, वैशाली, अभिषेक भागड़ा, रोहित दुगलेट, रमेश कुमार एवं दिनेश के अलावा तेजू नेगी, एवं पल्लवी गौतम ने भी रक्तदान कर शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। आईजीएमसी ब्लड बैंक की टीम ने रक्त संग्रह किया। शिविर के संचालन में सोहन लाल वर्मा, गुलाब चंद्र शास्त्री, प्यारा सिंह कंवर, सानवी शर्मा, संजीव शर्मा, कार्तिक, हितेश, सुमन, ज्योति, कोमल, पल्लवी शर्मा, जितेंद्र, किशोर, पंकज धीमान, नीलम कंवर, ऊषा ठाकुर, प्रतिभा ठाकुर, रिया ठाकुर एवं प्रो.अजय श्रीवास्तव ने सहयोग दिया।
हिमाचल प्रदेश प्राइवेट स्कूल की विभिन्न एसोसिएशन के बिच वेब मीटिंग हुई जिसमें सरकार द्वारा स्कूल ना खुलने के निर्णय के लिए रोष प्रकट किया गया। एसोसिएशन के सदस्य ने कहा कि देश के अधिकतर राज्यों में स्कूल खुल चुके हैं और पता नहीं हिमाचल सरकार स्कूल क्यों नहीं खोल रही है जबकि स्कूल के अभिभावक, संचालक और बच्चे स्कूल आने को तैयार है। सरकार द्वारा दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है। सरकार द्वारा आवासीय स्कूल और एकेडमी खोल दी गई है दूसरी तरफ गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए स्कूल बंद रखकर शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। सरकार और शिक्षा विभाग जो भी शिक्षा को लेकर फैसला लेता है वह सरकारी स्कूलों को ध्यान में रखकर ही लेते है, कभी भी निजी स्कूलों के संगठनों से कोई राय नहीं ली जाती है। इस मीटिंग में सर्वसम्मति से मौजूद सदस्यों ने चंबा से संजीव सुरी, अनिल शर्मा, कांगड़ा से डॉक्टर गुलशन, सुधांशु शर्मा, अंकुश सूद, रमन अवस्थी अनुराग, हरबंस, यूके शर्मा, सुशदीन पठानिया, मंडी से वीरेंद्र गुलेरिया, नारायण सिंह, प्रेमभूषण शर्मा, बीडी शर्मा, दिनेश शर्मा, सत्य प्रकाश, बलवंत बुराड़ी, सुरेंद्र राणा, शिमला से रवि शांडिल्य, बीएन, किन्नौर से आर एल नेगी, ऊना से लखन पाल शर्मा, महेश राणा, अनु शर्मा अंशुल, श्यामलाल, अरुणा कौशल, हमीरपुर से एसके ठाकुर, राजन, अनिल, कुल्लू से पूर्ण चंद्, गणेश गनी, निरंजन और भी विभिन्न जिलों के सदस्य घनश्याम, कृष्ण कालिया, भूपेंद्र सिंह दीप कुमार आर्य, अरुण शर्मा, एके जरियाल, संगीता शर्मा, सुरक्षा शर्मा, कल्याण सिंह, महेंद्र गुलेरिया इत्यादि ने निर्णय लिया कि जिला स्तर पर स्कूल संचालकों की एक कमेटी गठित की जाएगी इसमें अभिभावकों को भी साथ किया जाएगा और स्कूल से जुड़े व्यवसाय के सदस्यों को भी साथ में लिया जाएगा और सरकार के समक्ष संयुक्त रूप से स्कूल खोलने के लिए आहवन किया जाएगा। स्कूल संचालकों को इस बात को लेकर भी रोष था की सरकार बच्चों के भविष्य की तरफ नहीं देख रही है और विभिन्न तरह के कार्यक्रम प्रदेश में हो रहे हैं उसमें भीड़ जुट रही है और कोरॉना का संक्रमण वैसा ही बना हुआ है कब तक सरकार यह दोहरा रवैया अपनाती रहेगी? बाकी राज्यों के स्कूल में, बच्चे स्कूल जाकर पढ़ रहे हैं लेकिन हिमाचल के बच्चे अभी घर में बैठकर ऑनलाइन पढ़ रहे हैं जब संयुक्त परीक्षा होगी तो हमारे राज्य के बच्चे दूसरे राज्यों के बच्चों से कैसे प्रतियोगिता करेंगे? कुछ स्कूल संचालकों का कहना था कि हिमाचल में 18 साल से ऊपर की वैक्सीनेशन 100 प्रतिशत हो चुकी है। अन्य राज्यों के साथ तुलना की जाए तो हिमाचल सबसे आगे हैं परंतु स्कूल खोलने की जब स्थिति आती है तो हिमाचल पिछड़ रहा है। सभी सदस्यों में सहमति थी कि बच्चे जो ऑनलाइन स्टडी कर रहे हैं, वह काफी पिछड़ गए हैं और इनको नॉर्मल करने में 2 या 3 साल लग जाएंगे। बच्चों पर मानसिक और शारीरिक दोनों तरफ से नुकसान हुआ है। इसलिए बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार को बहुत जल्दी निर्णय लेना पड़ेगा। इसके लिए मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री दोनों से समय लिया जाएगा और अपना पक्ष रखा जाएगा।


















































