After nearly seven decades of extinction, India recently celebrated the birth of two cheetah cubs via artificial insemination. Conservationists have successfully reintroduced cheetah cubs into India's protected areas through collaboration between the Wildlife Institute of India, the National Tiger Conservation Authority, and the Wildlife Trust of India. This news has revived interest in cheetah protection efforts in India and neighboring countries such as Nepal, where the big cats have been extinct for more than a century. Due to India’s success, Nepalese experts are now asking for the reintroduction of cheetahs into the country's protected areas, where they once roamed openly before becoming extinct due to hunting and habitat loss. Conservationists are hopeful that successful cheetah breeding in India can be replicated in other parts of the world, including Nepal. "Seeing the success of India's cheetah breeding program has inspired us to think that maybe we can also do something similar here in Nepal," said Tika Ram Adhikari, a senior wildlife conservation officer with the Department of National Parks and Wildlife Conservation in Nepal. "We are interested in exploring the possibility of reintroducing cheetahs into our protected areas and providing them with a safe habitat." India project's success has given conservationists working to protect endangered species and restore ecosystems around the globe renewed enthusiasm, resulting in renewed interest in cheetah conservation efforts.
सुखविंदर सिंह सुक्खू हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर पहुंचने वाले सातवें शख्स है। प्रथम मुख्यमंत्री डॉ वाईएस परमार से लेकर पिछले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर तक तमाम मुख्यमंत्रियों की अपनी एक अलग शैली, एक अलग दृष्टिकोण रहा है। सभी ने अपने अपने अंदाज में हिमाचल को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। कोई सड़कों वाला मुख्यमंत्री कहलाया, कोई पानी वाला, तो किसी ने शिक्षा को तवज्जो दी। अलबत्ता सुखविंदर सिंह सुक्खू को कार्यकाल संभाले अभी चार माह भी नहीं बीते है लेकिन सुक्खू के कई ऐसे निर्णय है जो अभी से उन्हें एक अलग कतार में खड़ा करते है। मसलन प्रदेश के यतीम अब 'चिल्ड्रन ऑफ़ स्टेट' है और हिमाचल देश का एक ऐसा राज्य है जो 'ग्रीन स्टेट' बनने के मिशन पर ईमानदार प्रयास करता दिख रहा है। बहरहाल सफर लम्बा है और चुनौतियां बेशुमार, निर्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी हो सकता है लेकिन इसमें कोई डॉ राय नहीं है कि बतौर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी कार्यशैली से छाप छोड़ रहे है।" 'पूत के पाँव पालने में दिख जाते है', बेशक प्रदेश की सुक्खू सरकार को सत्ता में आएं अभी चार महीने भी नहीं बीते हो लेकिन सरकार नीति और नियत को लेकर एक सकारात्मक माहौल जरूर है। चुनौतियां भरपूर है और आर्थिक स्थिति पतली, बावजूद इसके बेतहाशा कर्ज और सीमित संसाधनों के साथ भी सुख की सरकार प्रदेश को उन्नति के पथ पर बढ़ाने के लिए अग्रसर दिखती है। अपने अल्प कार्यकाल में सरकार कई अहम फैसले ले चुकी है और कई सरकार की नीतियों में एक दूर्गामी सोच साफ़ देखने को मिल रही है। चाहे ग्रीन हिमाचल की राह पर आगे बढ़ने का फैसला हो या पर्यटन के लिए आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में कदम, इसमें कोई संशय नहीं है कि सुक्खू सरकार सही राह पर आगे बढ़ती दिख रही है। सुक्खू कैबिनेट की बैठकों में लिए गए सरकार के फैसलों हो या बजट में किए गए प्रावधान, कहीं न कहीं ये उम्मीद जरूर जगी है कि ये सरकार सिर्फ बातें नहीं करती बल्कि उन पर अमल करने को भी प्रतिबद्ध है। निसंदेह सीमित वित्तीय संसाधन बड़ी बाधा है पर सरकार की नियत को लेकर कोई शक ओ शुबा नहीं दिखता। प्रभावित करती ही सीएम की साफगोई और सादगी : सीएम सुक्खू की एक बात बेहद प्रभावित करती है और वो है प्रदेश की आर्थिक स्थिति के बारे में मुख्यमंत्री का खुलकर जनता को बताना। सीएम सुक्खू प्रदेश की खराब आर्थिक स्थिति की बात स्वीकार भी कर रहे है और जनता का समर्थन भी मांग रहे है। नए मुख्यमंत्री की इस स्पष्टवादिता से लोग खासे प्रभावित भी दिख रहे है। बहरहाल आगाज अच्छा है पर निसंदेह सुक्खू सरकार को उन सभी अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा जो जनता उनसे बांधे बैठी है। इसी तरह आल्टो कार से विधानसभा पहुंचना हो या फिर लाव लश्कर को छोड़कर शिमला माल रोड पर सुबह की सैर के लिए साधारण व्यक्ति की तरह निकल जाना, मुख्यमंत्री सुक्खू अपनी सादगी से जनता पर छाप छोड़ रहे है। मुख्यमंत्री से मिलने जो भी आता है, ये सुनिश्चित किया जाता है कि खाली हाथ वापस नहीं लौटे। सामान्य व्यक्ति की तरह रहते हुए सीएम सुक्खू ने विधायक रहते हुए कभी अपने साथ पीएसओ नहीं रखा था। अब प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद भी उनकी सादगी बरक़रार है। लिए कई बड़े अहम फैसले : अपने छोटे से कार्यकाल में सुक्खू सरकार ने ऐसे कई बड़े फैसले लिए है जो हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2032 तक भारत का सबसे समृद्ध राज्य बनाने के सरकार के सपने को सींचता दिखाई देते है। गुड गवर्नेंस को लेकर सरकार संजीदा है। सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने का प्रयास किया गया, जहां पेपर में गड़बड़ी पाई गई, वहां पेपर को कैंसल किया गया। इसके चलते कर्मचारी चयन आयोग को भंग किया गया ओर आरोपियों की गिरफ्तारी भी जारी है। इसके अलावा सरकार प्रदेश हरित राज्य बनाने की ओर भी आगे बढ़ रही है। सुक्खू सरकार ने साल 2026 तक हिमाचल को ग्रीन स्टेट बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए प्रदेश में वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदला जाएगा। इसके लिए सीएम ने ई-बस, ई-ट्रक की खरीद पर 50 लाख तक और ई-टैक्सी की खरीद पर 50 फीसदी सब्सिडी देने का ऐलान किया है। वहीं जिन 10 गारंटियों के सहारे कांग्रेस सत्ता में आई थी उनमें से दो को पूरा करती हुई भी सरकार दिखाई दी है। प्रदेश के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन दे दी गई और महिलाओं को 1500 चरणबद्ध तरीके से देने पर भी काम किया जा रहा है। दिल छू रहा सरकार का मानवीय चेहरा : यहाँ सुक्खू सरकार के उस मानवीय चेहरा का जिक्र भी जरूरी है जिसने हरआम और ख़ास व्यक्ति के मन को छुआ है। सीएम बनने पर सुखविंदर सिंह सुक्खू सबसे पहले अनाथ बच्चों, निराश्रित महिलाओं और बुजुर्गों के लिए बड़ी योजना लेकर आए, जिसे सुखाश्रय कोष का नाम दिया गया है। सुखाश्रय योजना का लाभ प्रदेश के करीब 6 हजार अनाथ बच्चों को होगा। वहीं 27 साल तक सरकार इन बच्चों की पढ़ाई से लेकर दूसरी हर जरूरतों को पूरा करेगी। आय बढ़ाने को बढ़ाये कदम : प्रदेश की आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए सरकार ने आय बढ़ाने पर भी काम किया है। नई एक्साइज पालिसी के तहत शराब के ठेकों की नीलामी की गई। वहीं सरकार ने बजट में शराब की हर बोतल पर दूध सेस लगाने का ऐलान किया है जिससे 120 करोड़ से अधिक का राजस्व मिलेगा। इसके अलावा सरकार ने जलविद्युत परियोजनाओं पर वाटर सेस वसूलने का निर्णय लिया है इससे सरकार का रेवेन्यू बढ़ेगा।
The Department of Computer Science and Engineering in the School of Engineering, Design, and Automation (SEDA) organized a 2-days workshop on “Big Data Analytics Tools” for the students of B.Tech. CSE. Mr.Rocky Bhatia, Solutions Architect at Adobe, was the resource person of the Workshop, holding expertise in data engineering, system design, architecture, cloud tech, data science, and other technology areas. The objective of the Workshop was to make the students comfortable with the tools and techniques required in handling large amounts of datasets. Dr. Vikrant Sharma, Professor, and Dean-SEDA welcomed all the participants and experts of the Workshop. The contents covered in the Workshop included: Introduction to Big Data, Distributed Computing, HDFS Architecture, Blocks, Replication, Map Reduce, Hadoop, Hive Query Language, YARN, NoSQL, HBase, Oozie, Real-time Data Mining using Spark Streaming, Elastic Search, Kibana, Kafka. It was an interactive session where students actively participated in hands-on training and enquired curiously about career options in the data science domain. Sh. Gurdeep Singh Sihra, the Pro-Chancellor, of GNA University congratulated all the participants for completing the course and also to organizers of the event. He said, “This event is simply the beginning for providing solutions to make a better future and advised the students to take pride in being a part of this prestigious course and wished all the participants great success.” Dr.V.K. Rattan, the Vice–Chancellor, of GNA University appreciated all the participants and encouraged them to be part of such events as this is one of the emerging technologies and highly in demand. Dr. Monika Hanspal, Dean of Academics, GNA University interacted with participants, highlighted the significance of Big Data, and expressed that these technologies and hands-on practices will make students industry ready. Dr. Hemant Sharma, the Pro Vice-Chancellor thanked Dr. Anurag Sharma, Professor, Head CSE, and organizers for organizing such a great event and ensured all the participants that such events will be planned soon.
G20 is a group European Union and 19 countries (Argentina, Australia, Brazil, Canada, China, France, Germany, India, Indonesia, Italy, Japan, Republic of Korea, Mexico, Russia, Saudi Arabia, South Africa, Turkey, UK, and US). The G20 Summit takes place annually, under the leadership of a different or rotating Presidency. Initially focused on macroeconomic problems, the G20 Summit later extended its agenda to include trade, sustainable development, health, agriculture, energy, environment, climate change, and anti-corruption. As India won the G20 presidency in 2023 (Millets years), which resulted in many international-level events taking place in India at various locations. IIT Ropar hosted the G20's 2nd Working Education Group Meeting at Khalsa College in Amritsar from March 15 to March 17, 2023. Among all the entries from Pan India for the expo, only a few got selected to present their work in front of G20 delegates. It’s a proud moment for Himachal Pradesh and Jaypee University of Information Technology, Waknaghat, that our sustainable research work on “Pine needles’ conversion to biofuel for rural empowerment” got selected there. The Directorate of Research Innovation and Development (DRID) team at JUIT is working on many environmental issues in Himachal Pradesh including Pine Pine needles to bio briquettes. At this event, our JUIT’s Vice Chancellor Prof. (Dr.) Rajendra Kumar Sharma was invited with the team members working on the project Prof. Dr. Ashish Kumar and Anup Kumar Sinha (Project Associate). At the event, we got a chance to interact with national and international-level delegates. The team (Anup, Dr. Ashish from civil Engineering, and Dr. Sudhir from Biotechnology and Bioinformatics) is working on this project and developed a cost-effective bio-briquetting technology from Pine needles with calorific value, burning rate, ignition time near to hardwood coal.
हिमाचल के क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक अच्छी खबर है। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम धर्मशाला में इस वर्ष होने वाले आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप के मैच करवाए जा सकते है। विश्व भर के खूबसूरत क्रिकेट स्टेडियम में शुमार धर्मशाला के एचपीसीए क्रिकेट स्टेडियम को वर्ल्ड कप मैचों के आयोजन को लेकर शॉर्टलिस्ट किया गया है। वर्ल्ड कप की शुरूआत 5 अक्तूबर को होगी जबकि फाइनल मुकाबला 19 नवम्बर को खेला जाएगा। दुबई में हुई आईसीसी की बैठक में विश्व कप के मैचों की तिथियां और भारत के स्टेडियमों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले के आयोजन को लेकर अहमदाबाद स्थित नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम को चिन्हित किया गया है तो अन्य मैचों के आयोजन को लेकर बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, धर्मशाला, गुवाहाटी, हैदराबाद, लखनऊ, इंदौर और राजकोट को शॉर्टलिस्ट किया गया है। धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम फाइनल होता है तो इससे दर्शकों को वर्ल्ड कप मैचों का आनंद लेने का भी मौका मिलेगा। बता दें की इससे पहले मार्च 2016 में धर्मशाला स्टेडियम में टी-20 क्रिकेट विश्व कप के मैचों का आयोजन किया गया था। यहां पर भारत और पाकिस्तान के बीच मैच भी प्रस्तावित था, लेकिन लोगों के विरोध के चलते यहां से मैच कोलकाता शिफ्ट कर दिया गया था। इसके अलावा धर्मशाला स्टेडियम में पुरुष और महिला टी-20 विश्व के कप के नौ मुकाबले खेले गए थे।
हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र में वाटर सेस का बिल पास होने से पड़ोसी राज्य पंजाब व हरियाणा की सरकारें इससे नाराज हो गईं है। पंजाब सरकार ने इस संबंध में विधानसभा में निंदा प्रस्ताव भी पास किया है। वहीं हरियाणा सरकार ने भी इस फैसले का विरोध जताया है । दरअसल हिमाचल सरकार इस टैक्स के सहारे 1200 करोड़ रुपये का राजस्व इकट्ठा कर प्रदेश की आर्थिक स्थिति को बेहतर करना चाह रही थी। मगर पंजाब व हरियाणा ने विधानसभा में एक संकल्प प्रस्ताव पारित कर हिमाचल सरकार के वाटर सेस पर आपत्ति जताई है। पंजाब का मानना है कि हिमाचल में वाटर सेस लगने से उन्हें कम से कम 500 करोड़ रुपए सालाना का नुकसान होगा. कारण ये है बीबीएमबी यानी भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड की बिजली परियोजनाओं से पंजाब व हरियाणा भी जुड़े हुए हैं। वहीं, हरियाणा सरकार का कहना है कि हिमाचल के वाटर सेस से उसे भी 336 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। वहीँ इन 2 राज्यों की सरकारों के विरोध के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार द्वारा वसूले जाने वाले वोटर सेस का पंजाब और हरियाणा को कोई नुकसान नहीं होगा। मुख्यमंत्री सुक्खू ने फिर कहा कि पंजाब, हरियाणा और हिमाचल भाई-भाई हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार हिमाचल प्रदेश में 172 हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट से वाटर सेस वसूलेगी।
कांग्रेस सासंद राहुल गांधी को 2019 में दर्ज 'मोदी सरनेम' वाले आपराधिक मानहानि के मामले में गुजरात के सूरत की जिला कोर्ट ने दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई। हालांकि, बाद में राहुल गांधी को कोर्ट से जमानत मिल गई यह मामला राहुल गांधी द्वारा दिए गए ‘मोदी उपनाम' संबंधी टिप्पणी से जुड़ा है। राहुल गांधी को 30 दिनों के लिए जमानत देते हुए और निर्णय के खिलाफ अपील उच्च न्यायालय में करने की अनुमति दी गई। इससे पहले 17 मार्च को कोर्ट ने इस मामले में सभी दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। दरअसल 2019 लोकसभा चुनाव के लिए कर्नाटक के कोलार में एक रैली में राहुल गांधी ने कहा था, कैसे सभी चोरों का उपनाम मोदी है? इसी को लेकर भाजपा विधायक व गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि राहुल ने अपनी इस टिप्पणी से समूचे मोदी समुदाय की मानहानि की है। राहुल के खिलाफ आईपीसी की धारा 499 और 500 (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, राहुल गांधी ने कोर्ट के अंदर अपने बयान में कहा था कि वह अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हैं। अक्तूबर 2021 में बयान दर्ज कराने के लिए अदालत पहुंचे राहुल ने खुद को निर्दोष बताया था।
Himachal govt under CM Sukhu during the budget session has recognized the importance of adopting sustainable practices to protect its environment while meeting its energy needs. The state government's target is to transform into a green state by March 31, 2026. The state's recent budget indicates a major shift toward a more green and sustainable approach. As a result of these efforts, Himachal Pradesh can emerge as a model green energy state in India, showing how a commitment to sustainability can promote economic growth while also protecting the environment. Major policies for a green state in the latest budget: Hydro-electric and solar energy project of more than 1500 MW goal for FY 2023-24. Two green panchayats intend to be formed in every district of HP. This will make energy more affordable and the problem of electricity shortages will be reduced. To build a "model state for electric vehicles," HRTC diesel buses will be converted to electric buses. This year, the "Green Hydrogen Policy" will be formulated, and local Himachalis can get up to 50% in subsidies to install solar power plants, charging stations, and purchase new electric cars. HP’s potential path for carbon neutrality: Himachal Pradesh has the potential to generate over 28,900 MW of clean energy via hydro, solar, and wind energy, which can produce clean energy while maintaining ecological balance and social issues. (Ministry of New and Renewable Energy). Despite being a hilly state, Himachal has a great opportunity to convert available resources into clean energy that can meet around 14% of the state's energy needs. In addition, Himachal has several well-established government-funded and private universities, providing an excellent opportunity for R&D work in the field of green energy. Lastly, advancing toward an ecologically sound, green energy future can show leadership and will set an example for other states and nations by demonstrating the feasibility and benefits of the shift. These factors combined make Himachal an ideal choice for becoming a green energy state, paving the way for a less polluted, self-sustaining, and providing sustainable model for other states. Challenges for Himachal in becoming a "Green Energy State": Several problems can restrict Himachal Pradesh from becoming a green energy state. Being a hilly state, Himachal has limited potential for solar energy given that large-scale solar farms require an extensive size of the flat territory. In addition, the natural conditions provide a decent quantity of sunlight but in a limited area, and in addition limited solar energy can be turned into light during the monsoon and winter seasons in the majority of the area. Furthermore, hydropower advances necessitate the large-scale relocation of locals. As a result, various pushbacks have been reported in some areas. Most importantly, the state government's existing cumulative debt is very high, with limited income production capacity due to the majority of government funds being spent on social and general services. These factors, when coupled with financial strain, may pose major challenges to Himachal Pradesh's shift to a sustainable and green energy state. The following are major challenges: The cumulative debt of Rs. 83,789/- Crs on the state govt. Significant budgetary allocations to public and social services. Due to limited green energy resources, the likelihood of a green energy state is low. Possibility to become a green energy state till 2026: Himachal Pradesh has several advantages that make it a perfect fit for turning into a green state. Based on government reports, Himachal has the potential to produce approximately 56.5 Gigawatts of green energy. However, the state's electricity demand in 2021 was 400 Gigawatts. Since power demands rise year after year, the state government must consider further options in this area. Among them is hydro energy, whose policy will be developed this year and will require intensive R&D to achieve the same significant relief in the power production sector. In particular, promoting the development of locally sourced clean energy to enable villages, cities, and towns to become self-sufficient. The current administration has made major attempts to attain "Green state status". However, becoming a green state in such a short frame doesn't appear possible.
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने बीते दिनों अपना पहला बजट पेश किया। बजट को लेकर डिसएबल हेल्पलाइन फाउंडेशन के जिला कोऑर्डिनेटर राजन वर्मा ने कहा कि दिव्यांगों को बजट में अनदेखा किया गया है। सुख की सरकार में हर वर्ग को कुछ ना कुछ दिया गया लेकिन दिव्यांगों को दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सबसे पिछड़ा हुआ वर्ग दिव्यांग है, दिव्यांग वर्ग ने भी सरकार से बहुत आस लगाई हुई थी की सुख की सरकार दिव्यांगों को भी मुख्यधारा से जुड़ने का प्रयत्न करेगी लेकिन दिव्यांगों को निराशा हाथ लगी है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों ने कई बार सरकार को अपनी समस्याओं s अवगत कराया और सरकार ने भी आश्वासन दिया था कि इस बजट में दिव्यांगों के लिए कुछ ना कुछ प्रबंध करेंगे लेकिन जब बजट पास हुआ तो दिव्यांगों का ज़िक्र तक भी नहीं किया गया। दिव्यांगों ने धर्मशाला से लेकर शिमला तक पैदल यात्रा करते हुए सुखविंदर सिंह सुक्खू से मिले ताकि उनकी उचित मांगे पूरी की जाए, फिर भी 2023 के बजट में हिमाचल प्रदेश की सरकार ने दिव्यांगों को दरकिनार कर दिया गया।
हिमाचल प्रदेश में आज फिर से मौसम खराब रहने वाला है। पिछले 3 दिन से प्रदेश में बारिश और ओलावृष्टि हो रही है। इससे मौसम में जहां ठंडक का अहसास हुआ, वहीं तापमान में गिरावट आई है। मौसम विभाग के अनुसार 21 मार्च तक मौसम इसी तरह खराब रहेगा और आज भी अधिकतर जिलों में बारिश और ओलावृष्टि होगी। प्रदेश के10 जिलों में बारिश और ओलावृष्टि का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस समय प्रदेश में सबसे ज्यादा केलांग के तापमान में 5.7 डिग्री की गिरावट आई।मौसम में हुए इस बदलाव से जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली, वहीं बागवानों की परेशानी बढ़ गई है।यह समय सेब की फ्लावरिंग का है। ऐसे में ओलावृष्टि सेब समेत तैयार फसलों को बर्बाद करके रख देगी। समय से बारिश बर्फ बारी नहीं होने की वजह से प्रदेश में सूखे की स्थिति बन गई थी। बीते दिनों हुई बारिश से राहत मिली है। यह बारिश आने वाली फसलों के लिए भले ही फायदेमंद साबित होगी, लेकिन ओलावृष्टि तैयार फसल का नुकसान कर रही है। अभी अगले 2 दिन तक ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है, जो मटर, फूलगोभी, बीन, शिमला मिर्च, टमाटर, हरी मिर्च के लिए नुकसान पहुंचाएगी। 2 जिलों को छोड़ प्रदेशभर में पड़ेंगी बौछारें मौसम विभाग के अनुसार, किन्नौर और लाहौल स्पीति में 21 मार्च तक मौसम सामान्य रहेगा। वहीं मौसम के अचानक करवट लेने से पर्यटक की आमद भी बढ़ने लगी है। सैलानी मौसम की जानकारी लेकर ही हिमाचल का रुख कर रहे हैं। इस वीकेंड पर शिमला, कुफरी, नारकंडा, कुल्लू, मनाली के लिए पर्यटक के आने की संभावना है। वहीं सोलन जिले में मैदानी एरिया बद्दी-नालागढ़ में काफ़ी समय बाद बारिश हुई है। इस बारिश से जिले में लगातार बढ़ रहे तापमान में जहां भारी गिरावट आई, वहीं लोगों को गर्मी से राहत मिली। वहीं मौसम विभाग ने आगामी 2 दिनों में हल्की बारिश की संभावना जताई है। बीती रात से हो रही बारिश के बाद आज सुबह से ही मौसम काफ़ी ठंडा रहा।वहीं अधिकतम तापमान 22 डिग्री और न्यूनतम तापमान 15 डिग्री से नीचे पहुंच गया है।
On March 17th, the newly formed Sukhu govt. laid out their primary policies aimed at supporting the state's move to renewable energy and making Himachal a "Green Energy State" during its budget proceeds. With the state's enormous potential for green energy production, the government has been developing the foundation for Himachal to become a power-efficient and low-fossil-fuel emitter state. The state government has announced that it will engage in several green energy programs to meet the state's energy demand from renewable energy sources. The main focus of the govt will be reducing air, sound, and related pollution. Several initiatives selected by the state government for becoming a green energy state till 2026: Solar schemes: Target of 500 MW for FY 2023-24. Green Panchayats Scheme: 2 panchayats will be selected from each distt. to set up as green panchayats on a trial basis. HP will be developed as a "model state for electric vehicles". Green corridors will be created along main highways which pass through major cities and towns. HRTC dept. will be transformed into "Electric state transport dept.". A "Green Hydrogen Policy" will be developed to pave way for the state to develop a viable green energy source for the future. Hydro-power plant setup will be accelerated with this year's goal of 1000 MW energy. Further, a policy to attract private investment in these projects will be formed. Pangi: To address the shortage of power, the government will install a solar-powered battery storage device. Major programs to start this year: Rs. 2000 Cr, “HP power sector development program” through World Bank help will start this year. 200 MW solar projects will be set up under the program. The project will be spread within 13 major cities/towns, with 11 substations and two power lines provision. Rs 1000 Cr to be spent on converting 1500 HRTC diesel buses to E-buses in a phased manner. With HPTCL investment of Rs. 464 Cr: 6 EHV sub-station, 5 transmission lines, and a centralized control center will be set up. Centralized cells for the sale/purchase of green energy will be set up to maximize the revenue. Subsidies declared to encourage the use of green energy for coming years during the budget session: Subsidy for solar plants: Locals will get a 40% subsidy to build a 250KW-2MW solar plant on leased or owned property. E-vehicle subsidy: PVT bus and truck operators: 50% subsidy (up to 50 lacs) for the acquisition of a new vehicle. Set up of charging station: 50% subsidy proposal, but a final policy to be laid down in collaboration with the state energy board.
CM Sukhu while discussing environmental issues during the budget session stated that "Himachal's forest wealth is around 65% of the state's area" which is one of the highest among Indian states percentage-wise. Additionally, he mentioned that pine forests are the area most commonly affected by forest fires. The Forest Department has worked to minimize the number of fires during the summer season, which has helped reduce the number of fires. State's CM also shed some light on the multidimensional hazards faced by the hill state of Himachal. As per the High level, committee organized by the state govt earlier, 33 hazards are recognized which can occur in the state, out of which Himachal is affected by 25. CM Sukhu also stressed climate change and other anthropogenic activities can accelerate and worsen these hazards. State government initiatives to lessen environmental risks: For fire-prone areas: Construction of fire lines and water reservoirs, recruiting fire watchers, and conducting awareness drives. For landslide-prone areas: Disaster response teams for assistance during dangers. Opposition on Fire-watcher issues and CM response: Shri Lakhanpal (Opposition MLA) stated that there is an issue with the Fire-watcher number and their salaries are also delayed for extended periods of time. In response, CM Sukhu said Fire-watchers are essential in reducing fire incidents and that they were previously referred to as Rakhas by locals. He also assured that the Fire-watcher's salary would be paid on schedule and that a policy will be developed in this respect. He also made sure to hold a meeting with the forest department in this respect to address the problem of the required number of fire watchers as well as whether this service must be continued or not. Budget allocation for environmental and associated programs for FY 2023-24: State govt Contributions: Fire-incidence reduction fund: Rs 2.14 Cr under FMS state plan and Rs 4.07 Cr under CAMPA head. Disaster relief Fund: Rs 226.51 Cr. Fasal bima yojana, Crop diversification scheme, Mandi arbitrage fund, and Horticulture development project: Rs 208.42 Cr. Central govt contribution (proposed): NDRF fund for disaster management: Rs. 400 Cr. Swach Bharat Abhiyan: Rs34.47 Cr. Gram Swaraj Yojna (for rural upliftment): Rs. 43 Cr.
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन की कार्यवाही से पहले बीजेपी विधायक दल ने सदन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की अगुवाई में बीजेपी विधायक ताला और जंजीर लेकर विधानसभा में पहुंचे। इस दौरान विधायकों ने सदन के बाहर जमकर नारेबाजी भी की। बीजेपी विधायक दल के नेता जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार को ताले वाली सरकार का नाम दिया। इसके बाद बीजेपी विधायकों ने विधानसभा में मुख्यमंत्री के कार्यालय के बाहर भी जमकर नारेबाजी की। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार प्रदेशभर में ताले वाली सरकार के नाम से मशहूर हो रही है।उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद सिर्फ और सिर्फ ताला लगाने का काम किया जा रहा है।पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि सदन की कार्यवाही के दूसरे दिन नियम 67 के तहत चर्चा हुई है।इस चर्चा में भी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बिना तथ्यों के जवाब दिए है और बातों को घुमाने की कोशिश की। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि संस्थान बंद करने के खिलाफ बीजेपी विधायक दल चुप नहीं बैठेगा और लगातार जनता की आवाज मुखरता से उठाएंगे।
जिला सोलन में गुरुवार सुबह दर्दनाक सड़क हादसा पेश आया है। कार हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई है। हादसा कसौली-परवाणू लिंक रोड पर जंगेशु गांव के पास हुआ है। मिली जानकरी के मुताबैक एक हुंडई HP12H- 6577 कार 200 मीटर खाई में जा गिरी। वहीं कसौली थाना में सुबह करीब साढ़े 6 बजे हादसे की सूचना पहुंची। SHO थाना टीम लेकर मौके पर पहुंचे। पुलिस को घटनास्थल से मृतकों के मोबाइल मिले हैं, जिनसे उनकी पहचान हुई। मृतकों में सूरज ठाकुर पुत्र राजेंद्र ठाकुर निवासी गांव अभीरपुर, नालागढ़ जिला सोलन, शुभम निवासी नालागढ़ और संगम निवासी कुरुक्षेत्र हरियाणा शामिल हैं। पुलिस ने शवों और हादसाग्रस्त कार को कब्जे में लेकर मृतकों के परिजनों को सूचित कर दिया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।
Himachal CM Sukhu has said that “He was responding to the suggestion made by MLA Lakhanpal during the budget session to safeguard the forest riches from fire, flood, and landslides.” Himachal government is planning to bring a concrete policy to save the forests. Additionally, a new scheme to provide a 50 % subsidy to those who want to set up the pine needle industry. The Pine leaves will be used for manufacturing various products such as plates, cups, paper, and other biodegradable articles. The final policy and procedure for setting up of pine-based industry will be formulated soon. This policy can help provide additional income to lower to middle-income Himachal households and can help boost the overall GPD of the state if the policy is implemented correctly. Apart from generating employment, this move can also become helpful in reducing forest fire incidences, as Pine forests are most affected by forest fires in Himachal. But, the impact of taking a large number of pine needles from forest floors is still unknown. On one side, this move can help reduce forest fire; on the other, it can increase weed and insect infestation incidences in Pine forests. It can also affect the nutrient status of the forest soil and increase soil erosion by the removal of organic carbon from the forest floor. Overall, it is a good move by the state govt to boost the economy of Himachal households, but it will require proper inspection by forest departments also. So, that forest should also not suffer from it.
दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। AIIMS के डॉक्टर्स ने मां के गर्भ में पल रहे बच्चे के अंगूर जितने छोटे दिल की सफल सर्जरी की। डॉक्टरों ने बैलून डाइलेशन सर्जरी करके बच्चे के दिल के बंद वाल्व को खोला। सबसे हैरान करने वाली बात है कि इस सर्जरी को डॉक्टरों ने सिर्फ 90 सेकेंड में पूरा किया। मां व बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। गौरतलब है की 28 साल की महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। महिला की पिछली तीन प्रेग्नेंसी लॉस हो गई थीं। डॉक्टरों ने महिला को बच्चे की हार्ट कंडीशन के बारे में बताया था और इसे सुधारने के लिए ऑपरेशन की सलाह दी थी, जिसे महिला व उसके पति ने मान लिया। टीम ने बताया कि जब बच्चा मां के गर्भ में होता है, तब भी कुछ गंभीर तरीकों के हार्ट डिजीज का पता लगाया जा सकता है। अगर इन्हें गर्भ में ही ठीक कर दिया जाए तो जन्म के बाद बच्चे का स्वास्थ्य बेहतर रहने की संभावना बढ़ जाती है और बच्चे का सामान्य विकास होता है। बच्चे पर की गई सर्जरी का नाम बैलून डाइलेशन है। यह प्रोसिजर अल्ट्रासाउंड गाइडेंस में किया जाता है। टीम के सीनियर डॉक्टर ने बताया कि ऐसा ऑपरेशन गर्भ में पल रहे बच्चे की जान के लिए खतरनाक भी हो सकता है इसलिए इसे बहुत संभल कर परफॉर्म करना होता है।
दिल्ली मेट्रो में कोच के अंदर रील और वीडियो बनाने पर रोक लगा दी गई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन डीएमआरसी ने मेट्रो ट्रेन के कोच के अंदर इंस्टाग्राम बनाने वाले लोगों को चेतावनी जारी कर कहा है कि यात्री मेट्रो कोच के अंदर वीडियो ना बनाएं। डीएमआरसी ने मेट्रो के अंदर इंस्टा रील्स, डांस वीडियोस बनाने पर रोक लगा दी है। गौरतलब है कि मंगलवार को दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने अपने एक ट्वीट में लिखा है कि यात्रा करें, समस्या न पैदा करें। डीएमआरसी ने एक ग्राफिक भी सभी से साझा की है। उसमे लिखा है कि, दिल्ली मेट्रो में लोग यात्री ही बने रहें, उपद्रवी न बनें। इसके अलावा, दिल्ली मेट्रो ने इंस्टा रील्स, डांस वीडियो फिल्माने पर रोक पूरी तरह से रोक लगा दी है।
दिल्ली की एक्साइज पॉलिसी को लेकर लंबे समय से जद्दोजहद थी। इसको लेकर अब एक नया अपडेट है। दिल्ली सरकार ने ‘पुरानी’ एक्साइज पॉलिसी को ही अगले 6 महीने तक के लिए बढ़ा दिया है। इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जल्द से जल्द नई पॉलिसी तैयर करें। अगले 6 महीने तक पुरानी एक्साइज पॉलिसी ही चलेगी। इन 6 महीनों पांच दिन ड्राइ डे होंगे। इस दौरान महावीर जयंती, गुड फ्राइडे, बुद्ध पूर्णिमा, ईद उल फितर और ईद उल जुहा को ड्राइ डे रहेगा और दिल्ली में सभी शराब की दुकानें बंद रहेंगी। गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ने नई एक्साइज पॉलिसी तैयार की थी, जिसको लेकर खूब विवाद हुआ। इसी पॉलिसी से जुड़े कथित घोटाले को लेकर दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया इन दिनों सीबीआई की हिरासत में हैं। नई पॉलिसी को लेकर विवाद होने के बाद उस पॉलिसी को वापस लेकर एक बार फिर से पुरानी एक्साइज पॉलिसी लागू कर दी गई थी। अब एक और नई एक्साइज पॉलिसी तैयार होने तक अगले 6 महीने यही पुरानी पॉलिसी जारी रहेगी।
हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर से मौसम करवट बदलेगा। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने कल से अगले 2 दिन तक कुछ शहरों में ओलावृष्टि होने का येलो अलर्ट जारी किया है। यह चेतावनी किन्नौर और लाहौल स्पीति को छोड़कर सभी 10 जिलों को दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के मध्यम और अधिक ऊंचाई वाले कुछ इलाकों में आज भी बारिश होने का पूर्वानुमान है।17-18 मार्च को प्रदेश के ज्यादातर क्षेत्रों में बारिश हो सकती है। कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि और अंधड़ की चेतावनी दी गई है।इसी के चलते मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि प्रदेश में इन दिनों सेब की फ्लावरिंग हो रही है। फ्लावरिंग पर ओलावृष्टि नुकसानदायक होती है। गौरतलब है कि प्रदेश में इस बार सर्दियों में ही सूखे जैसे हालात बन गए हैं। बीते साल नवंबर और दिसंबर में भी बहुत काम बारिश हुई है। इस साल एक जनवरी से 28 फरवरी के बीच भी बहुत काम बारिश हुई है, ऐसे में बारिश किसानों के लिए संजीवनी का काम करेगी।
लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती को 'नौकरी के बदले ज़मीन' मामले में सीबीआई कोर्ट से ज़मानत मिल गई है। कोर्ट ने सभी को 50-50 हज़ार रुपये के निजी मुचलके पर ज़मानत दी है। लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और अन्य 14 के खिलाफ सीबीआई ने "नौकरी के बदले जमीन" मामले में आपराधिक षडयंत्र रचने और भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है। इस मामले में आज लालू प्रसाद के परिवार की दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेशी हुई। लालू यादव पेशी के लिए व्हीलचेयर पर सीबीआई कोर्ट पहुंचे। यह मामला लालू प्रसाद के परिवार को तोहफे में जमीन देकर या जमीन बेचने के बदले में रेलवे में कथित तौर पर नौकरी पाने से संबंधित है। यह मामला तब का है, जब लालू प्रसाद 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे।
The National Cricket Academy (NCA) is holding a camp for U-16 boys at various venues from April 17 to May 11, 2023, and players must report on April 16, 2023 (afternoon) at the camp location. The Himachal Pradesh Cricket Association (HPCA) has selected six players for the given camps: Naunihaal from Solan distt.: Mumbai venue (Team A), Anush Dhiman from Kangra distt.: Mumbai venue (Team A), Siddhak Dhillon from Bilaspur distt.: Surat venue (Team C), Aditya Kataria from Bilaspur distt.: Vijayawada venue (Team D), Akshay Vashisht from Solan distt.: Vijayawada venue (Team D) and Vaasta Garg from Hamirpur: Anantpur venue (Team E). HPCA will check the physical fitness of the above players before the camp at the HPCA Cricket Stadium in Dharamshala, and then they will be permitted to attend the camp.
हिमाचल विधानसभा का बजट सेशन मंगलवार को शुरू हो गया। सत्र के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ऑल्टो गाड़ी से विधानसभा पहुंचे। इस दौरान गाड़ियों का काफिला हमेशा की तरह उनकी ऑल्टो कार के आगे पीछे रहा। सेशन की शुरुआत के साथ मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने अपने मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों का परिचय कराया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने करसोग के पूर्व विधायक दिवंगत मनसा राम का शोकोद्गार प्रस्ताव सदन में लाया। वहीं हिमाचल विधानसभा में बजट सत्र के पहले ही दिन सदन में खूब हंगामा बरपा। भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने नियम 67 के तहत विधायक क्षेत्र विकास निधि रोकने को लेकर सदन में स्थगन प्रस्ताव लाया और इस चर्चा की मांग की। इस प्रस्ताव के बाद सदन में खूब हंगामा हुआ और विपक्ष ने सदन में वॉकआउट किया। विधानसभा स्पीकर ने विपक्ष के काम रोको प्रस्ताव को निरस्त किया। विपक्ष के प्रस्ताव पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने कहा कि विपक्ष ने काम रोको का प्रस्ताव लाया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। विधायक क्षेत्र विकास निधि रोकने के लिए काम रोको प्रस्ताव की जरूरत नहीं बल्कि इस पर चर्चा मांगी जा सकती थी।
हिमाचल प्रदेश में कोरोना वायरस के मामले फिर से बढ़ना शुरू हो गए हैं। बीते कल आईजीएमसी शिमला में कोरोना का मामला सामने आया है जिसमें आईजीएमसी में दाखिल 75 वर्षीय कोरोना पॉजिटिव मरीज की मौत हो गई है। प्रदेश में करीब 100 दिनों के बाद किसी कोरोना संक्रमित की मौत हुई है। मिली जानकारी के अनुसार हमीरपुर जिला के रहने वाले 75 वर्षीय बुजुर्ग मरीज का कोविड टेस्ट किया गया था। जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। बताया जा रहा है कि गंभीर स्थिति में मरीज को अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में दाखिल किया गया और सुबह के वक्त मरीज की मौत हो गई। वही, जिला शिमला में बीते कल एक नया कोरोना केस सामने आया है। इसी के साथ ही अब सक्रिय केसों की संख्या छह हो गई है। कुछ कोरोना संक्रमित के मरीज ठीक भी हुए है बीते कल स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न अस्पतालों में 414 मरीजों के कोरोना सैंपल लिए गए थे , इसमें 19 कोरोना के मामले पॉजिटिव पाए गए हैं। हिमाचल के अस्पतालों में उपचाराधीन मरीजों की संख्या 60 हो गई है। मिली जानकारी के अनुसार जिला सोलन में 25, कांगड़ा नौ, हमीरपुर आठ, मंडी सात, शिमला छह, ऊना, सिरमौर, कुल्लू, किन्नौर और चंबा में एक-एक कोरोना मरीज उपचाराधीन है। बीते फरवरी महीने में जहां हिमाचल कोरोना मुक्त हो गया था तब लोग भी राहत कि साँस लेने लगे थे वहीं अब प्रदेश में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।
राज्य सरकार ने पहली से आठवीं कक्षा तक के सभी लड़कों व लड़कियों को निःशुल्क स्कूल वर्दी के लिए 600 रुपये प्रति विद्यार्थी प्रदान करने का निर्णय लिया है। इससे प्रदेश के लगभग 5.25 लाख विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। यह जानकारी मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दी। उन्होंने कहा कि वर्दी की यह राशि विद्यार्थी अथवा उनकी माता के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से अंतरित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के माता-पिता का आर्थिक बोझ कम करने के दृष्टिगत यह निर्णय लिया गया है और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से राशि सीधे लाभार्थी को भेजने से इसमें पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सदैव तत्पर है और उन्हें लाभान्वित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए कृतसंकल्प है और इसके दृष्टिगत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में चरणबद्ध ढंग से राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं। इन मॉडर्न स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के साथ ही विद्यार्थियों को उचित शैक्षणिक वातावरण और विभिन्न गतिविधियों के लिए पर्याप्त स्थान भी उपलब्ध करवाया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश का बजट सत्र कल से शुरू होगा। प्रदेश की 14वीं विधानसभा का दूसरा सत्र शुरू होने जा रहा है। बजट सत्र में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू बतौर वित्त मंत्री 17 मार्च को अपने कार्यकाल का पहला बजट पेश करेंगे। स्तर की शुरुआत मंगलवार को 11:00 बजे पूर्व मंत्री मनसा राम के देहांत पर शोकोद्गार से होगी। इसके बाद प्रश्नकाल होगा। प्रश्नकाल के शुरू होते ही विपक्ष सरकार को घेरने के लिए सारा काम रोककर स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा मांगने की रणनीति बना सकता है। वहीं विपक्ष की नज़र इस बार अर्थीक संकट से गुज़र रही प्रदेश सरकार के बजट पर रहेगी। बजट में राजस्व और राजकोषीय घाटा कितना होगा इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। वहीं इसी कड़ी में भाजपा आज विलीज पार्क में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की उपस्थिति में एक बैठक का आयोजन करेगी। भाजपा सत्र के शुरुवाती प्रश्नकाल में ही काम रोको प्रस्ताव पर खड़ी हो सकती है। भाजपा का मुख्य एजेंडा हिमाचल प्रदेश में सैकड़ों संस्थानों को डीनोटिफाई करने के बारे में हो सकता है।
घरेलू शेयर बाजार की चाल आज प्री-ओपनिंग में थोड़ी लड़खड़ाती दिखाई दी थी पर बाजार खुलते समय निफ्टी हरे निशान में लौट आया। सेंसेक्स की गिरावट भी कम हुई और ये 100 अंक गिरकर ही खुला है। अमेरिकी बाजारों में सिलिकॉन वैली बैंक संकट को लेकर जो उथलपुथल मची है वो भारतीय शेयर बाजार पर बहुत ज्यादा नकारात्म असर फिलहाल तो नहीं डाल रही है, बीएसई का 30 शेयरों वाला इंडेक्स सेंसेक्स आज 101.36 अंक या 0.17 फीसदी की गिरावट के बाद 59,033.77 पर खुला है। वहीं एनएसई का 50 शेयरों वाला इंडेक्स निफ्टी 9 अंक की मामूली बढ़त के बाद 17,421.90 पर खुलने में कामयाब रहा है। सेंसेक्स के 30 में से केवल 3 ही शेयर गिरावट के सात कारोबार कर रहे हैं और 27 शेयरों में तेजी देखी जा रही है। वहीं निफ्टी के 50 में से 47 शेयरों में उछाल बना हुआ है और 3 शेयरों में कमजोरी देखी जा रही है।
केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की मांग का विरोध किया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में केंद्र ने कहा है कि ऐसा करना भारत की सामाजिक मान्यताओं और पारिवारिक व्यवस्था के खिलाफ होगा। इसमें कई तरह की कानूनी अड़चनें भी आएंगी। इस साल 6 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक शादी के मसले पर केंद्र को नोटिस जारी किया था। साथ ही अलग-अलग हाई कोर्ट में लंबित याचिकाओं को अपने पास ट्रांसफर करा लिया था। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (13 मार्च) को होने वाली सुनवाई से पहले केंद्र ने सभी 15 याचिकाओं पर जवाब दाखिल किया है। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने कहा है कि भारत में परिवार की अवधारणा पति-पत्नी और उन दोनों की संतानें हैं। समलैंगिक विवाह इस सामाजिक धारणा के खिलाफ है। संसद से पारित विवाह कानून और अलग-अलग धर्मों की परंपराएं इस तरह की शादी को स्वीकार नहीं करतीं।
सिक्किम में 900 टूरिस्ट शनिवार शाम को भारी स्नोफॉल के कारण फंस गए। ये सभी नाथुला और त्सोमगो झील से गंगटोक लौट रहे थे। सिक्किम पुलिस ने बताया कि ये टूरिस्ट 89 वाहनों में सवार हैं। इनकी मदद के लिए सेना और पुलिस पहुंच गई है। अभी तक 15 वाहनों को निकाला गया है। जहां ये वाहन फंसे हैं वहां से गंगटोक की दूरी 42 किलोमीटर है। टूरिस्ट को रात में सेना के कैंप में ठहराने की व्यवस्था की जा रही है। बर्फ को धीरे-धीरे साफ किया जा रहा है और सैलानियों को निकाला जा रहा है। अधिकारी ने बताया कि कुछ सैलानियों को पास के सेना के शिविरों में रखा जा सकता है। पूर्वी सिक्किम में भारी बर्फबारी के चलते प्रशासन ने कुछ दिन पहले ही नाथुला और त्सोमगो झील के लिए पासी जारी करना बंद कर दिया था।
हिमाचल प्रदेश फिर से कोरोना के मामलों में वृद्धि होने लगी है। मौजूदा समय में प्रदेश में कोरोना के 50 एक्टिव केस हैं। इनमें 23 अकेले सोलन जिला के हैं। यह पुरे प्रदेश में सबसे ज्यादा हैं। वहीं बाकि जिला में अभी एक्टिव केस सिंगल डिजिट में हैं। फ़िलहाल चंबा, बिलासपुर और लाहौल स्पीति में कोरोना का एक भी केस नहीं है। हमीरपुर में 4, कांगड़ा में 6, किन्नौर, उना और कुल्लू में 1-1, मंडी में 5, शिमला में 8 कोरोना के एक्टिव केस हैं। कोरोना वायरस से सोलन जिले में आज तक 314 लोगों की जान जा चुकी है। पिछले 24 घंटे में भी जिले के धर्मपुर ब्लॉक में 4 नए पॉजिटिव केस मिल चुके हैं। वहीं अभी जिले में कोरोना टेस्ट के लिए सैंपलिंग भी कम हो रही है। कोरोना से बचाव के लिए लगाई जा रही बूस्टर डोज भी इन दिनों सोलन में खत्म है।
As per the Government of India's (GOI) Ease of Living Reforms, the Himachal government will make various citizen-related services time-bound, with a more transparent systems and procedures. This is a new initiative taken by the newly formed Sukhu-led Congress government in order to make people's lives easier and government processes more efficient. It will simplify the registration process for necessary amenities (ration card, driver's license, electricity, water connection, and so on) and other welfare schemes. The initiative may provide some relief to locals by reducing corruption and making government institutions more trustworthy in the eyes of the general public.
Recent sightings of stubble burning have been reported in Hoshiarpur region of Punjab. Stubble burning is a recurring annual problem in the northern Indian states of Punjab, Haryana and UP, which are major wheat and paddy producers. As per the ICAR data, these three states generate around 23 million tonnes of crop residue every year. This occurrence is not only a major contributor to air pollution and climate change but also has negative impacts on soil health, agriculture productivity, and human health. Moreover, the burning of crop residues reduces soil fertility and microbial activity, and leads to soil erosion. This, in turn, affects agricultural productivity and the livelihoods of farmers. Additionally, the smoke from burning crop residues reduces visibility on roads, leading to accidents and other hazards. To address the problem of stubble burning, the Indian government and state govts has taken several measures such as 'PM-Ash scheme', providing financial incentives to farmers, setting up of 'happy seeders' and educating farmers about the harmful effects of stubble burning. While these measures have helped to some extent in reducing stubble burning, much more is required to be done to address the issue. It is imperative for the government to take more stringent actions and engage in better implementation of policies to curb this dangerous practice and promote sustainable agricultural practices. The health and well-being of millions of Indians depend on it, and the future of the country's agriculture sector is at stake.
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला के परवाणू में ट्रैफिक चेकिंग के दौरान पुलिस ने कसौली के तीन युवकों से 3.32 ग्राम चिट्टा बरामद किया है।वहीं पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मिली जानकारी के अनुसार पुलिस थाना परवाणू की टीम जब ट्रैफिक चैकिंग पर थी तो सूरज, हरप्रीत, गौरव शर्मा कसौली निवासी से कुल 3.32 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। पुलिस के अभियान के दौरान आए दिन चिट्टा, चरस और अवैध शराब के मामले दिन- प्रतिदिन सामने आ रहे हैं। SP सोलन वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि पुलिस ने जिला में नशा तस्करों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया है।वहीं नशे के खिलाफ अभियान में जगह-जगह नाके लगाकर चेकिंग की जा रही है। इसी अभियान के तहत परवाणू में तीन लोगों को चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया है।पुलिस थाना परवाणू में मादक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
भारत की वो पहली महिला जो समाज की बंदिशों को पीछे छोड़ अपने सपनों को छूने में कामयाब हुई, वो महिला जो आने वाली कई पीढ़ियों के लिए मिसाल बनी, वो महिला जिन्हे भारत की पहली महिला वकील बनने का गौरव प्राप्त है l आज हम आपको बताएंगे एक ऐसी महिला की कहानी जिन्हे आज भी महिलाओं के लिए एक आदर्श के तौर पर याद किया जाता है l भारत की पहली महिला वकील,(वास्तव में, किसी भी ब्रिटिश विश्वविद्यालय में अध्ययन करने वाली पहली भारतीय राष्ट्रीय) कॉर्नेलिया सोराबजी l कॉर्नेलिया सोराबजी ने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद ऑक्सपोर्ड से वकालत की पढ़ाई की थी l खास बात तो ये है कि आजादी के पहले जब कॉर्नेलिया ने वकालत की उस समय भारत में किसी भी महिला का उच्च शिक्षा में पढ़ना इतना आसान नहीं था। लेकिन कॉर्लेनिया ने वकालत की पढ़ाई कर सारे बंधनों को तोड़ा। जन्म व शुरूआती जीवन कार्नेलिया सोराबजी का जन्म 15 नवम्बर 1866 को नासिक के एक पारसी परिवार में हुआ था। सोराबजी समाज सुधारक होने के साथ-साथ एक लेखिका भी थीं। कार्नेलिया के लिए कहा जाता है कि इनकी वजह से देश में महिलाओं को वकालत का अधिकार मिला था। 1892 में नागरिक कानून की पढ़ाई के लिए विदेश गयीं और 1894 में भारत लौटीं. उस समय समाज में महिलाएं मुखर नहीं थीं और न ही महिलाओं को वकालत का अधिकार था, मगर कॉर्नेलिया में वकील बनने के जूनून को कोई नहीं दबा पाया l सोराबजी के पिता एक मिशनरी थे, कहते है कि बंबई विविद्यालय को एक महिला को डिग्री कार्यक्रम में दाखिला देने के लिए मनाने में उनके पिता की अहम भूमिका थी l सोराबजी की मां एक प्रभावशाली महिला थीं और उन्होंने कई सामाजिक कार्यों में हिस्सा लिया था l उन्होंने पुणे में कई गर्ल्स स्कूल भी खोले l सोराबजी के कई शैक्षिक और करियर संबंधी फैसलों पर उनकी मां का प्रभाव रहा l सोराबजी का छह जुलाई 1954 को देहांत हो गया. अपने अधिकार के लिए किया संघर्ष परीक्षा में सबसे ज्यादा अंक पाने के बावजूद उन्हें महिला होने के नाते स्कॉलरशिप से दूर रखा गया। ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके लिए ऑक्सफोर्ड जाकर पढ़ना मुश्किलों भरा था। तब कुछ अंग्रेज महिलाओं की मदद से उनके लिए फंड का इंतजाम किया गया और कॉर्नेलिया वकालत की पढाई के ऑक्सफोर्ड पहुंची। 1892 में कॉर्नेलिया ने बैचलर ऑफ सिविल लॉ की परीक्षा पास करने वाली पहली महिला बनीं। लेकिन कॉलेज ने उन्हें डिग्री देने से मना कर दिया। क्योंकि उस काल में महिलाओं को वकालत के लिए रजिस्टर करने और प्रेक्टिस की इजाजत नहीं थी। लेकिन कॉर्नेलिया ने हार नही मानी। भारत लौटकर वापस आने के बाद वो महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए मदद करने लगीं। काफी अथक परिश्रम के बाद कार्नेलिया को सफलता हाथ लगीं। वकालत के दौरान कार्नेलिया ने 600 से ज्यादा महिलाओं को कानूनी सलाह दी। 1922 में लंदन बार ने महिलाओं को कानून की प्रैक्टिस करने की आज्ञा दी। तब कार्नेलिया को कानून की डिग्री हासिल हुई। कार्नेलिया कलकत्ता हाईकोर्ट में बैरिस्टर बन कानून की प्रैक्टिस करने वाली पहली महिला बनीं। कानूनी करियर 1894 में भारत लौटने पर, सोराबजी ने पर्दानाशीन महिलाओं की ओर से सामाजिक और सलाहकार कार्य में शामिल हो गयीं, जिन्हें बाहर पुरुष दुनिया के साथ संवाद करने से मना किया गया था, कई मामलों में इन महिलाओं की काफी संपत्ति होती थी, लेकिन उनकी रक्षा के लिए आवश्यक कानूनी विशेषज्ञता तक पहुंच नहीं थी। सोराबजी को काठियावाड़ और इंदौर के शासकों के ब्रिटिश एजेंटों से पर्दानशीन की ओर से अनुरोध करने के लिए विशेष अनुमति दी गई थी, लेकिन वह एक महिला के तौर पर अदालत में उनकी रक्षा करने में असमर्थ थीं, उन्हें भारतीय कानूनी व्यवस्था में पेशेवर ओहदा प्राप्त नहीं था। इस स्थिति का समाधान करने की उम्मीद में, सोराबजी ने 1897 में बॉम्बे यूनिवर्सिटी की एलएलबी परीक्षा के लिए खुद को प्रस्तुत किया और 1899 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वकील की परीक्षा में भाग लिया। फिर भी, उनकी सफलताओं के बावजूद, सोरबजी को वकील के तौर पर मान्यता नहीं मिली l एक लम्बी जद्दोजहद के बाद 1924 में महिलाओं को वकालत से रोकने वाले कानून को शिथिल कर उनके लिए भी यह पेशा खोल दिया गया। 1929 में कार्नेलिया हाईकोर्ट की वरिष्ठ वकील के तौर पर सेवानिवृत्त हुयीं पर उसके बाद महिलाओं में इतनी जागृति आ चुकी थी कि वे वकालत को एक पेशे के तौर पर अपनाकर अपनी आवाज मुखर करने लगी थीं। यद्यपि 1954 में कार्नेलिया का देहावसान हो गया, पर आज भी उनका नाम वकालत जैसे जटिल और प्रतिष्ठित पेशे में महिलाओं की बुनियाद है। लंदन में है प्रतिमा 2012 में, लंदन के लिंकन इन में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया गया था l
एक ऐसी राजकुमारी जो देश को आज़ाद करवाने के लिए तपस्वी बन गयी, एक प्रख्यात गांधीवादी, स्वतंत्रता सेनानी और एक सामाजिक कार्यकर्ता बनी, महात्मा गाँधी से प्रभावित हो कर आज़ादी के आंदोलन से जुडी, जेल गई। आज़ादी के बाद हिमाचल से सांसद चुनी गई और दस साल तक स्वास्थ्य मंत्री रही। देश की पहली महिला कैबिनेट मंत्री होने का सम्मान भी उन्हें प्राप्त है। वो महिला थी राजकुमारी अमृत कौर। ये बहुत कम लोग जानते है की अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बनाने में राजकुमारी अमृत कौर का बड़ा हाथ है। शिमला के समर हिल में एक रेस्ट हाउस है, राजकुमारी अमृत कौर गेस्ट हाउस जो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के स्टाफ के लिए है। देशभर में सेवाएं दे रहे एम्स के डॉक्टर, नर्स व अन्य स्टाफ यहाँ आकर छुट्टियां बिता सकते है, वो भी निशुल्क। दरअसल, ये ईमारत 'मैनरविल' स्वतंत्र भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर का पैतृक आवास थी। इसे अमृत कौर ने एम्स को डोनेट किया था। आज निसंदेह एम्स देश का सबसे बड़ा और सबसे विश्वसनीय स्वास्थ्य संस्थान है। इस एम्स की कल्पना को मूर्त रूप देने में राजकुमारी अमृत कौर का बड़ा योगदान रहा रहा है। उनके स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए ही एम्स बना, वे एम्स की पहली अध्यक्ष भी बनाई गई। उस दौर में देश नया - नया आज़ाद हुआ था और आर्थिक तौर पर भी पिछड़ा हुआ था। तब एम्स की स्थापना के लिए राजकुमारी अमृत कौर ने न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिम जर्मनी, स्वीडन और अमेरिका जैसे देशों से फंडिंग का इंतजाम भी किया था। एम्स की वेबसाइट पर भी इसके निर्माण का श्रेय तीन लोगों को दिया गया है, पहले जवाहरलाल नेहरू, दूसरी राजकुमारी अमृत कौर और तीसरे एक भारतीय सिविल सेवक सर जोसेफ भोरे। एम्स की ऑफिसियल वेबसाइट पर लिखा है कि भारत को स्वास्थ्य सुविधाओं और आधुनिक तकनीकों से परिपूर्ण देश बनाना पंडित जवाहरलाल नेहरू का सपना था और आजादी के तुरंत बाद उन्होंने इसे हासिल करने के लिए एक ब्लूप्रिंट तैयार किया। नेहरू का सपना था दक्षिण पूर्व एशिया में एक ऐसा केंद्र स्थापित किया जाए जो चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को गति प्रदान करे और इस सपने को पूरा करने में उनका साथ दिया उनकी स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर ने। राजपरिवार में जन्मी, करीब 17 साल रही महात्मा गांधी की सेक्रेटरी लखनऊ, 2 फरवरी 1889, पंजाब के कपूरथला राज्य के राजसी परिवार से ताल्लुख रखने वाले राजा हरनाम सिंह के घर बेटी ने जन्म लिया, नाम रखा गया अमृत कौर। बचपन से ही बेहद प्रतिभावान, इंग्लैंड के डोरसेट में स्थिति शेरबोर्न स्कूल फॉर गर्ल्स से स्कूली पढ़ाई पूरी की। किताबों के साथ -साथ खेल के मैदान में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। हॉकी से लेकर क्रिकेट तक खेला। स्कूली शिक्षा पूरी हुई तो परिवार ने उच्च शिक्षा के लिए ऑक्सफ़ोर्ड भेज दिया। शिक्षा पूरी कर 1918 में वतन वापस लौटी और इसके बाद हुआ 1919 का जलियांवाला बाग़ हत्याकांड। इस हत्याकांड ने राजकुमारी अमृत कौर को झकझोर कर रख दिया और उन्होंने निश्चय कर लिया कि देश की आज़ादी और उत्थान के लिए कुछ करना है, सो सियासत का रास्ते पर निकल पड़ी। राजकुमारी अमृत कौर महात्मा गाँधी से बेहद प्रभावित थी। उस समय उनके पिता हरनाम सिंह से मिलने गोपालकृष्ण गोखले सहित कई बड़े नेता आते थे। उनके ज़रिए ही राजकुमारी अमृत कौर को महात्मा गांधी के बारे में अधिक जानकारी मिली। हालांकि उनके माता-पिता नहीं चाहते थे कि वो आज़ादी की लड़ाई में भाग लें, राजकुमारी अमृत कौर तो ठान चुकी थी। वे निरंतर महात्मा गांधी को खत लिखती रही। 1927 में मार्गरेट कजिन्स के साथ मिलकर उन्होंने ऑल इंडिया विमेंस कांफ्रेंस की शुरुआत की और बाद में इसकी प्रेसिडेंट भी बनीं। इसी दौरान एक दिन अचानक राजकुमारी अमृत कौर को एक खत मिला, ये खत लिखा था महात्मा गांधी ने। उस खत में महात्मा गांधी ने लिखा,'मैं एक ऐसी महिला की तलाश में हूं जिसे अपने ध्येय का भान हो। क्या तुम वो महिला हो, क्या तुम वो बन सकती हो? ' बस फिर क्या था राजकुमारी अमृत कौर आज़ादी की लड़ाई से जुड़ गईं। इस दौरान दांडी मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने की वजह से जेल भी गईं। वे करीब 17 सालों तक महात्मा गांधी की सेक्रेटरी रही। महात्मा गांधी के प्रभाव में आने के बाद उन्होंने भौतिक जीवन की सभी सुख-सुविधाओं को छोड़ दिया और तपस्वी का जीवन अपना लिया। ब्रिटिश हुकूमत ने लगाया था राजद्रोह का आरोप अमृत कौर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रतिनिधि के तौर पर सन् 1937 में पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत के बन्नू गईं। ब्रिटिश सरकार को यह बात नागवार गुजरी और राजद्रोह का आरोप लगाकर उन्हें जेल में बंद कर दिया गया। उन्होंने सभी को मताधिकार दिए जाने की भी वकालत की और भारतीय मताधिकार व संवैधानिक सुधार के लिए गठित ‘लोथियन समिति’ तथा ब्रिटिश पार्लियामेंट की संवैधानिक सुधारों के लिए बनी संयुक्त चयन समिति के सामने भी अपना पक्ष रखा। अखिल भारतीय महिला सम्मेलन की सह-संस्थापक महिलाओं की दयनीय स्थिति को देखते हुए 1927 में ‘अखिल भारतीय महिला सम्मेलन’ की स्थापना की गई। कौर इसकी सह-संस्थापक थीं। वह 1930 में इसकी सचिव और 1933 में अध्यक्ष बनीं। उन्होंने ‘ऑल इंडिया विमेंस एजुकेशन फंड एसोसिएशन’ के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया और नई दिल्ली के ‘लेडी इर्विन कॉलेज’ की कार्यकारी समिति की सदस्य रहीं। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें ‘शिक्षा सलाहकार बोर्ड’ का सदस्य भी बनाया, जिससे उन्होंने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान इस्तीफा दे दिया था। उन्हें 1945 में लंदन और 1946 में पेरिस के यूनेस्को सम्मेलन में भारतीय सदस्य के रूप में भेजा गया था। वह ‘अखिल भारतीय बुनकर संघ’ के न्यासी बोर्ड की सदस्य भी रहीं। कौर 14 साल तक इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी की चेयरपर्सन भी रहीं। देश की पहली स्वास्थ्य मंत्री बनी कौर जब देश आज़ाद हुआ, तब उन्होंने हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। राजकुमारी अमृत कौर सिर्फ चुनाव ही नहीं जीतीं, बल्कि आज़ाद भारत की पहली कैबिनेट में हेल्थ मिनिस्टर भी बनीं। वे लगातार दस सालों तक इस पद पर बनी रहीं। वर्ल्ड हेल्थ असेम्बली की प्रेसिडेंट भी बनीं। इससे पहले कोई भी महिला इस पद तक नहीं पहुंची थी। यही नहीं इस पद पर पहुंचने वाली वो एशिया से पहली व्यक्ति थीं। स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद उन्होंने कई संस्थान शुरू किए, जैसे इंडियन काउंसिल ऑफ चाइल्ड वेलफेयर, ट्यूबरक्लोसिस एसोसियेशन ऑफ इंडिया, राजकुमारी अमृत कौर कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग, और सेंट्रल लेप्रोसी एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट। इन सभी के अलावा नई दिल्ली में एम्स की स्थापना में अमृत कौर ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। टाइम मैगज़ीन ने दी वुमन ऑफ द ईयर लिस्ट में जगह दुनिया की मशहूर टाइम मैगज़ीन ने 2020 में बेटे 100 सालों के लिए वुमन ऑफ द ईयर की लिस्ट ज़ारी की थी। भारत से इस लिस्ट में दो नाम हैं, एक पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिन्हें साल 1976 के लिए इस लिस्ट में रखा गया। लिस्ट में शामिल दूसरा नाम है राजकुमारी अमृत कौर का, जिन्हें साल 1947 के लिए इस लिस्ट में जगह दी गई है।
A day after the Central Bureau of Investigation questioned former Bihar Chief Minister Rabri Devi at her home in Patna in connection with an alleged land-for-jobs scam, the probe agency today reached her daughter Misa Bharti's Pandara Roadhouse to question former union railway minister Lalu Prasad Yadav in the same case. The CBI case, which names the Yadav couple and their daughters Misa and Hema, among others, is based on accusations that Mr. Yadav and his family members bought land at cheap rates in exchange for jobs during his tenure as Union Railway Minister from 2004 to 2009. Besides the veteran politician, his wife, and his daughters, the FIR, registered in May 2022, names 12 people who allegedly got jobs in exchange for land. In July last year, Mr. Yadav's aide and former Officer on Special Duty (OSD) Bhola Yadav was arrested by the CBI in the case.
Five people were killed and four were injured today after a four-wheeler ran over them in Himachal Pradesh's Solan district. The accident took place near a petrol pump in Dharampur. As per the eyewitnesses, the injured persons were immediately given primary treatment before they were rushed to the hospital. "The four-wheeler rammed into a queue of nine persons, leaving five dead and four injured," Additional Superintendent of Police (ASP) Ashok Kumar Rana said, adding that two persons, gravely injured, have been referred to the Postgraduate Institute of Medical Education and Research (PGIMER) in Chandigarh. "The deceased persons have been identified as Guddu Yadav, Raja, Nippu, Moti Lal Yadav, Sunny Deval," police said.
प्रदेश में भाजपा जिला स्तरीय आक्रोश रैलियों का आयोजन कर रही है। उसी क्रम में ऊना जिला में 11 मार्च को आक्रोश रैली का आयोजन किया जाएगा। इस रैली में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री प्रो प्रेम कुमार धूमल भाग लेंगे। प्रो प्रेम कुमार धूमल के साथ इस कार्यक्रम में पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती, राजेश ठाकुर, राम कुमार, पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर और बलबीर चौधरी भी विशेष रूप में उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम में सभी 2022 के प्रत्याशी, जिला अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष, जिला एवं मंडल के महामंत्री एवं मोर्चे प्रकोष्टो के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता भी भाग लेगें।
सोमवार को राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में कैबिनटे की बैठक का आयोजन किया गया। कैबिनेट में कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह के आलावा सभी मंत्री मौजूद रहे। बैठक में वर्ष 2023-24 के लिए नई आबकारी नीति को मंजूरी प्रदान की गयी। नई आबकारी नीति के तहत खुदरा आबकारी दुकानों की नीलामी-सह-निविदा को स्वीकृति प्रदान की गई, जिसका उद्देश्य सरकारी राजस्व में पर्याप्त वृद्धि, शराब के मूल्य में कमी तथा पड़ोसी राज्यों से इसकी तस्करी पर अंकुश लगाना है। शराब के ठेकों पर 5 लीटर क्षमता की केग बीयर बेची जाएगी। इससे उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलेगा। बागवानों को लाभाविन्त करने के लिए फलों के सम्मिश्रण से शराब की भी एक नई वैरायटी शुरू करने का फैसला लिया गया। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एल-3 एल-4 एल-5 लाइसेंस धारक होटल मालिकों को मिनी बार चलाने की अनुमति दी जाएगी।
मुख्यमंत्री सुखविदर सिंह सुक्खू ने शिमला के पीटरहॉफ में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता व श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल समारोह में विशेष रूप से उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समाज को दिशा देने में महिलाओं का सदैव ही उल्लेखनीय योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाएं माता, बेटी, पत्नी तथा बहन के रूप में अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करती हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष सरोजनी नायडू से लेकर देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने महिलाओं को नेतृत्व करने की प्रेरणा दी। राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी के सशक्त नेतृत्व में भारत ने अंतरराष्ट्रीय फलक पर अलग पहचान बनाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभा पाटिल देश की प्रथम राष्ट्रपति बनीं और आज द्रौपदी मुर्मु इस पद को सुशोभित कर रही हैं। यह सभी विभूतियां महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के सशक्तिकरण से आगे बढ़कर उनके भीतर छिपी प्रतिभा को सम्मान देने का अवसर है। किसी भी कालखंड में सामाजिक परिवर्तन में महिलाओं का सर्वाधिक योगदान रहा है। सीएम सुक्खू ने भारतीय समाज को जीवंत रखने में भी महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राज्य में महिलाओं में आत्मसम्मान की भावना विकसित करने पर केंद्रित विभिन्न योजनाएं आरम्भ की जाएंगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि है और हमारे समाज में महिलाओं को उचित सम्मान की समृद्ध परम्परा है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर हिमाचल प्रदेश महिला विकास प्रोत्साहन पुरस्कार की राशि 21 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपए तथा जिला स्तरीय पुरस्कारों की राशि पांच हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपए करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने सुख-आश्रय कोष की वेबसाइट तथा हिम-पूरक पोषाहार पुष्टि एप का विधिवत शुभारंभ भी किया।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू के मणिकर्ण में रात को हुए हुड़दंग के बाद अब स्थिति शांतिपूर्ण है और कानून व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है। यह बात मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में मणिकर्ण झड़प पर पर कही। ख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा ये मामला धार्मिक व राजनीतिक नही है। बल्कि कुछ युवा साथी आपस में भिड़े उसके बाद सोशल मीडिया में कुछ चीजें वायरल हुई और माहौल तनावपूर्ण बन गया। उन्होंने कहा कि बीती रात को, स्थानीय लोगों एवं श्रद्धालुओं के बीच कहासुनी के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया लेकिन पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में कर लिया है। सीएम ने कहा कि पंजाब एवं हिमाचल का आपसी भाईचारा है इसलिए सरकार पंजाब के श्रद्धालुओं की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह गंभीर है और हुडदंगियो पर भी सरकार नजर बनाएं हुए हैं। गौरतलब है कि पर्यटन नगरी मनाली के ग्राीन टैक्स बैरियर के बाद रविवार रात करीब 12:00 बजे मणिकर्ण में पंजाब से आए पर्यटकों ने खूब हुड़दंग मचाया है। इन लोगों ने स्थानीय लोगों से मारपीट की और पथराव व डंडों से 10 से अधिक वाहनों को नुकसान पहुंचाया है। गाड़ियों के शीशे और लाइटें तोड़ दी हैं। इसमें कई पर्यटकों के वाहन भी शामिल है। घटना में पांच से छह लोगों को हल्की चोटें आई है। घटना की सूचना के बाद रात को ही अतिरिक्त पुलिस बल मणिकर्ण रवाना हो गया था। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्जकर छानबीन शुरू कर दी है।
प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में तैनात मुख्य शिक्षकों को पदोन्नति पर दी जाने वाली इंक्रीमेंट शीघ्र बहाल करने के राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने आवाज बुलंद की है। संघ का कहना है कि मुख्य शिक्षकों को पदोन्नति पर दी जाने वाली इंक्रीमेंट जो कि जेबीटी शिक्षक को 25-25 साल की सेवा उपरांत मुख्य शिक्षक बनने पर मिलती थी, जिसे जनवरी 2022 को लागू वेतनमान में छीना गया है, उसको तुरंत प्रभाव से बहाल किया जाए। इसके अलावा जेबीटी शिक्षकों के वेतनमान में भारी विसंगति है व राइडर पर रहे शिक्षकों पर कोई स्पष्ट निर्देश न होने के कारण 2016 के उपरांत नियमित जेबीटी शिक्षक नए वेतनमान के लाभ से वंचित रह गए हैं। संघ के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश शर्मा का कहना है कि शीघ्र ही संघ का प्रतिनिधिमंडल प्राथमिक शिक्षकों की विभिन्न मांगों को लेकर मंत्री रोहित ठाकुर से मिलेगा व उन्हें अपनी मांगों से अवगत करवाएगा। इसके अलावा शिक्षा निदेशक को भी मांग पत्र प्रदान किया जाएगा। जेबीटी से एलटी की तर्ज पर अन्य सी एंड वी के पदों पर भी योग्यता पूरी करने वाले जेबीटी शिक्षकों को पदोन्नति लाभ प्रदान करने की संघ मांग करता है तथा इन सभी में जेबीटी से तुरंत पदोन्नति की जाए।
हिमाचल प्रदेश के जेबीटी प्रशिक्षुओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।जेबीटी प्रशिक्षु प्रदेश के अलग-अलग कोनों में प्रदर्शन कर रहे है। दरससल प्रदेश के जिन जिलों में पहली बार काउंसिलिंग के दौरान जेबीटी के पद खाली रह गए हैं वहां पर दूसरे राउंड में काउंसिलिंग शुरू कर दी गई है, लेकिन एक बार फिर से इस भर्ती का विरोध शुरू हो गया है। कारण यह है कि हमीरपुर, शिमला सहित अन्य जिलों में भर्ती के लिए जो नोटिफिकेशन जारी हुई है उसके मुताबिक बीएड को भी इसमें पात्र माना गया है।यानी जेबीटी के साथ बीएड वाले अभ्यर्थी भी इस काउंसिलिंग में भाग ले सकते हैं। ऐसे में एक बार फिर पूरे प्रदेश में इसका विरोध शुरू हो गया है और जेबीटी प्रशिक्षु इस नोटिफिकेशन के विरोध में खड़े हो गए हैं। जेबीटी प्रशिक्षुओं का कहना है कि अगर सरकार निर्णय को वापस नहीं लेती है तो पूरे प्रदेश में आंदोलन किया जाएगा। जेबीटी प्रशिक्षुओं ने बताया कि वर्तमान में चल रही जेबीटी भर्ती में बीएड को शामिल करने का निर्णय सरकार ने गलत तरीके से लिया है। यह निर्णय जेबीटी के अधिकारों का हनन करने के लिए लिया गया है। पिछले पांच साल से जेबीटी प्रशिक्षु शोषण का शिकार हो रहे हैं। प्रदेश में करीब 40 हजार जेबीटी प्रशिक्षित हैं और वर्तमान में 5000 प्रशिक्षु जेबीटी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सरकार का नकारात्मक रवैया जेबीटी प्रशिक्षुओं के लिए हानिकारक है। प्रशिक्षुओं का कहना है कि सरकार ने बीएड को जेबीटी के पदों पर नियुक्ति के लिए पात्र माना है, इस निर्णय को सरकार वापस ले। अगर सरकार इस निर्णय को वापस नहीं लेती है तो पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन किया जाएगा और साथ ही पूरे प्रदेश में कक्षाओं का बहिष्कार कर प्रशिक्षण संस्थान बंद कर दिए जाएंगे।
हिमाचल में चुनाव के दौरान पुरानी पेंशन बहाली के साथ साथ आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थाई नीति का मामला खूब गरमाया था। जयराम सरकार ने इन कर्मचारियों की मांग पूरी करने के लिए कैबिनेट सब कमेटी का गठन किया, कई दफा इन कर्मचारियों का डाटा मंगवाया, न जाने कितनी बैठकें की मगर आउटसोर्स कर्मचारियों का दामन खाली ही रहा। आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए पालिसी बनाने में पूर्व सरकार पूरी तरह नाकामयाब रही थी। अब इन कर्मचारियों को उम्मीद है कि नई सरकार इनके लिए कुछ करेगी और इनका भविष्य भी कुछ सुरक्षित होगा। हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ के अनुसार नई सरकार के कार्यकाल में अब तक आउटसोर्स कर्मचारियों को सिर्फ निष्कासन ही मिला है। हाल ही में हिमाचल प्रदेश जलशक्ति विभाग धर्मपुर मंडल में कार्यरत 169 आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया। इन आउटसोर्स कर्मचारियों को पूर्व सरकार ने रखा था। बीते चार पांच साल से सेवाएं दे रहे थे। हैरानी की बात है कि निकालने से पहले उन्हें नोटिस भी नहीं दिए गए हैं। सिर्फ फ़ोन कर बताया गया कि उनका अनुबंध खत्म है और सरकार से कोई आदेश नहीं आए हैं कि उनका एग्रीमेंट आगे बढ़ाना है। ठेकेदार का टेंडर 31 दिसंबर 2022 को समाप्त हो गया है। ऐसा ही कुछ लोक निर्माण विभाग में भी किया गया। अचानक इतने लोगों की नौकरी चले जाने के बाद प्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारी घबराए हुए है। हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के समक्ष भी ये मसला उठाया है। आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष शैलेन्द्र शर्मा का कहना है कि आउटसोर्स कर्मचारियों का इस तरह निष्कासन अन्याय है। उन्होंने कहा कि नीति बनने तक किसी भी कर्मचारी को इस तरह नौकरी से नहीं निकाला जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग कि है कि इन सभी कर्मचारियों को वापस नौकरी पर रखा जाए और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थाई नीति बनाई जाए। प्रदेश में करीब 40 हजार आउटसोर्स कर्मचारी: हिमाचल प्रदेश के करीब 40 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों को उम्मीद है कि प्रदेश सरकार उनके लिए कोई सशक्त नीति बनाएगी। प्रदेश के अधिकांश सरकारी विभागों में आउटसोर्स कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इनके लिए आज तक किसी सरकार ने कोई नीति का प्रावधान नहीं किया है। बता दें कि ये आउटसोर्स कर्मचारी वे कर्मचारी हैं जिनको सरकारी विभागों में कॉन्ट्रैक्ट आधार पर रखा जाता है। यानी कि ये सरकारी विभाग में तो हैं पर सरकारी नौकरी में नहीं हैं। इनकी नियुक्तियां या तो ठेकेदारों के माध्यम से की जाती है या किसी निजी कंपनी के माध्यम से। ये कर्मचारी काम तो सरकार का करते है मगर इन्हें वेतन ठेकेदार या कंपनी द्वारा मिलता है। न तो इन्हें सरकारी कर्मचारी होने का कोई लाभ प्राप्त होता है न ही एक स्थिर नौकरी। इन्हें जब चाहे नौकरी से निकाला जा सकता है। सरकार द्वारा वेतन तो दिया जाता है मगर ठेकेदार की कमिशन के बाद इन तक तक पहुंच पाता है। शोषण कम करने को सरकार बनाए ठोस नीति: महासंघ हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ का कहना है कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में हजारों कर्मचारियों को आउटसोर्स पर रखा गया है लेकिन पिछली सरकार द्वारा इनके नियमतिकरण के लिए कोई नीति नहीं बनाई गई है और न ही इनके शोषण को कम करने के लिए भी कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए हैं। नामात्र वेतन पे भी इनसे अधिक से अधिक काम लिया जाता हैं।
प्रदेश में अभी नई सरकार को आए कुछ समय ही बीता है मगर अभी से प्रदेश के कर्मचारियों ने सरकार के आगे अपनी मांगो का भंडार लगा दिया है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि पिछली सरकार जो न कर पाई वो नई सरकार कर दिखाएगी। आशावान कर्मचारियों की लम्बी फेहरिस्त में एनएचएम कर्मचारी भी शामिल है।राज्य स्वास्थ्य समिति (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) अनुबंध कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के अनुसार एनएचएम कर्मचारी विभिन्न स्वास्थ्य समितियों के तहत 24 वर्ष से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज तक किसी भी सरकार द्वारा इन कर्मचारियों के लिए नियमितिकरण की कोई स्थायी नीति नहीं बनाई गई है। राज्य स्वास्थ्य समिति (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) अनुबंध कर्मचारी संघ हिमाचल प्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष सतीश कुमार एवं प्रदेश प्रेस सचिव राज महाजन ने संयुक्त बयान में बताया कि हाल ही में प्रदेश को स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय स्तर पर क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम में बेहतर कार्य करने के लिए प्रथम पुरस्कार मिला है। इसके लिए सरकार एवं विभाग दोनों ही बधाई के पात्र हैं, लेकिन इस बेहतर परिणाम के लिए सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग में ब्लाक स्तर, जिला स्तर, प्रदेश स्तर पर एवं हर स्वास्थ्य संस्थान में रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करने वाले हर उस कर्मचारी का योगदान है, जो पिछले 24 वर्षों से अनुबंध पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत अपना कार्य पूरी निष्ठा एवं लगन से कर रहा है। सतीश कुमार का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत रहे इन कर्मचारियों में से लगभग चार कर्मचारियों की नौकरी के दौरान मौत हो चुकी है तथा लगभग 56 लोग बिना किसी बैनेफिट के लिए रिटायर हो चुके हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों द्वारा क्षय रोग, एचआईवी एड्स, शिशु स्वास्थ्य, कोविड-19 जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के तहत अपना योगदान दिया जा रहा है। किसी सरकार ने न तो आज तक इन कर्मचारियों का नियमितीकरण किया और न ही इन्हें रेगुलर स्केल का लाभ दिया जा रहा है। केंद्र के कर्मचारी है तो सातवां वेतन आयोग क्यों नहीं मिला : राज्य स्वास्थ्य समिति ( नेशनल हेल्थ मिशन ) अनुबंध कर्मचारी महासंघ के उप प्रधान डॉ अनुराग शर्मा का कहना है कि सरकार हमारी मांगें ये कह कर टाल देती है कि हम केंद्र सरकार के कर्मचारी है। पर अगर हम केंद्र सरकार के कर्मचारी है तो हमें सातवां वेतन आयोग मिलना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं है। हमें भले ही केंद्र प्रायोजित स्कीमों के अंतर्गत नियुक्ति दी गई हो मगर इन परियोजनाओं के लिए केंद्र सिर्फ पैसा देता है। स्वास्थ्य राज्य का मसला होता है। हमें राज्य स्वास्थ्य समिति के तहत रखा गया था जिसके चेयरमैन मुख्य सचिव है। हमें राज्य सरकार के लिए नियुक्त किया गया है और हम काम भी राज्य सरकार का करते है न कि केंद्र सरकार के लिए, तो मसले भी राज्य सरकार को ही हल करने होंगे।
होली से पहले पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में भाजपा ने भगवा लहराया है। त्रिपुरा और नागालैंड में सत्ताधारी गठबंधन ही जीता है और मेघालय में सत्ता के लिए पुराने साथी फिर गठबंधन को साथ आ गए हैं। निसंदेह ये भाजपा के लिए बड़ी जीत है। दरअसल 'पूर्वोत्तर के अंतर्गत आठ राज्य आते हैं। इनमें त्रिपुरा, मेघालय, नगालैंड, असम, मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं। 2014 तक इनमें से ज्यादातर राज्यों में या तो कांग्रेस या फिर लेफ्ट का राज हुआ करता था। एक दौर ऐसा भी था जब बीजेपी को हिंदी भाषी पार्टी बोलकर ही खारिज कर दिया जाता था। इसके बाद कहानी बदलने लगी। एक-एक करके इन आठ में से छह राज्यों में भाजपा ने या तो अकेले दम पर सरकार बनाई या फिर सरकार का हिस्सा बनी। अब ये आंकड़ा सात पहुँच सकता है। सिर्फ मिजोरम में एमएनएफ की सरकार है। भाजपा ने कोशिश तो 2014 से पहले भी की, लेकिन उसे सफलता सिर्फ 2003 में मिली जब अरुणाचल में बीजेपी की सरकार बनी थी। तब कांग्रेस के एक दिग्गज नेता ने पार्टी के अंदर ही बगावत की थी और कई नेता बीजेपी में शामिल हो गए थे। उस वजह से पहली बार किसी पूर्वोत्तर राज्य में बीजेपी की सरकार बनी थी, लेकिन उसके बाद बीजेपी के लिए पूर्वोत्तर में सियासी सूखा ही रहा और जमीन पर समीकरण 2014 के बाद बदलने शुरू हुए। पूर्वोत्तर में बीजेपी की ग्रोथ के कई कारण है जिनमें से एक सरकारी योजनाओं का जमीन पर पहुंचना भी है। बीजेपी ने पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए नॉर्थ-ईस्ट डेवलपमेंट अलायंस यानी नेडा का गठन किया है। इसके संयोजक असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा हैं। साल 2015 में इसका गठन किया गया और इसका मक़सद था कि बीजेपी पूर्वोत्तर राज्यों में उन क्षेत्रीय दलों को एक साथ लाए जो कांग्रेस से खुश नहीं हैं। 2016 में बीजेपी ने 15 साल से चले आ रहे कांग्रेस के शासन को असम में ख़त्म करके अपनी सरकार बनाई। 2018 में 30 साल से काबिज लेफ़्ट सरकार को हटाकर पहली बार बीजेपी ने त्रिपुरा में सरकार बनाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद 2017 के बाद से 47 बार नार्थ-ईस्ट जा चुके हैं। चुनाव से पहले उन्होंने त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में 3 बड़ी रैलियां कीं। नार्थ-ईस्ट के 8 राज्यों में हर 15 दिन में कोई न कोई केंद्रीय मंत्री जरूर पहुंचता है। केंद्र सरकार ने 2024-25 के लिए नार्थ ईस्ट का बजट 5892 करोड़ किया है, ये 2022-23 के मुकाबले 113% ज्यादा है। नेडा का गठन ही बताता है कि बीजेपी के लिए पूर्वोत्तर राज्य कितने अहम रहे हैं। पूर्वोत्तर के राज्यों की आबादी में आदिवासियों की बहुलता है और ईसाई अल्पसंख्यकों की तादाद यहां ज्यादा है, ऐसे में जब इन राज्यों में बीजेपी जीतती है तो उसके लिए इस नैरेटिव को काउंटर करना और आसान हो जाता है कि वह अल्पसंख्यक विरोधी है। अब जीत के बाद बीजेपी ये कह सकती है कि वह अगर अल्पसंख्यक विरोधी होती, तो उसे ये जीत ना मिलती। साथ ही यहाँ 26 लोकसभा सीटें हैं, जो बाकी भारत के मध्य आकार के एक राज्य के बराबर है। भाजपा ने पूर्वोत्तर के चुनावों को इसलिए इतना ज्यादा महत्व दिया, क्योंकि वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यहां की 26 लोकसभा सीटें उसके लिए बहुत अहम हैं। लोकसभा चुनाव में अगर अन्य राज्यों में उसके खिलाफ सत्ता विरोधी रुझान हुआ तो पूर्वोत्तर से उसकी भरपाई की जा सकती है। वहीँ दशकों से कांग्रेस के गढ़ रहे पूर्वोत्तर कांग्रेस का सफाया हो गया है। त्रिपुरा में भले ही उसे कुछ सीटें मिली हैं जो कि सांत्वना पुरस्कार से ज्यादा कुछ नहीं है, लेकिन कुल मिलाकर पूर्वोत्तर के इलाके में कांग्रेस लगातार हार रही है। बात ये है कि तीनों ही राज्यों में देश की सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस की स्थिति सबसे ज्यादा खराब हुई है। तीनों ही राज्यों से कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। वह भी तब जब 2016 तक नॉर्थ ईस्ट के ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस और लेफ्ट का ही कब्जा था। त्रिपुरा कभी वामपंथी दलों का गढ़ रहे त्रिपुरा में भाजपा गठबंधन ने लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में सफलता हासिल की है। गठबंधन को राज्य में 33 सीटों पर जीत मिली है। अकेले भाजपा को त्रिपुरा की 60 सदस्यीय विधानसभा में 32 सीटों पर सफलता मिली है। यहाँ कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन को बड़ा झटका लगा। कांग्रेस ने तीन सीटों पर जीत हासिल की, जबकि लेफ्ट के खाते में 11 सीटें आईं। मतलब गठबंधन करने के बावजूद दोनों को कुछ खास फायदा नहीं मिला। हालांकि, पहली बार चुनाव लड़ रही टिपरा मोथा ने बड़ी कामयाबी हासिल की। इनके 42 में से 13 प्रत्याशियों ने चुनाव में जीत दर्ज की। त्रिपुरा में भाजपा की सहयोगी आईपीएफटी को टिपरा मोथा पार्टी के कारण भारी नुकसान हुआ है। नतीजों को देखा जाए तो यहाँ भाजपा जीतने में तो कामयाब रही मगर पार्टी का वोट शेयर घटा है। भाजपा को 38.97 फीसदी वोट हासिल हुए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को 43.59 फीसदी वोट शेयर के साथ 36 सीटों पर सफलता मिली थी। नगालैंड इस बार नगालैंड की 59 सीटों पर चुनाव हुए। यहां जुन्हेबोटो की आकुलुटो सीट से भाजपा प्रत्याशी और निर्वतमान विधायक काजहेटो किन्मी निर्विरोध चुनाव जीत चुके थे। ऐसे में इस सीट पर चुनाव नहीं हुए। भारतीय जनता पार्टी और नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) का गठबंधन हुआ। इसके तहत एनडीपीपी ने 40 और भाजपा ने 20 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इसके अलावा कांग्रेस और एनपीएफ अलग-अलग चुनाव लड़े। कांग्रेस ने 23 और एनपीएफ ने 22 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। 19 निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी चुनाव में ताल ठोकी थी। 2018 में यहां विधानसभा के सभी 60 सदस्य सरकार का हिस्सा बन गए थे। मतलब कोई भी विपक्ष में नहीं था। इस बार भी यहां भाजपा गठबंधन ने बड़ी जीत हासिल की। भाजपा के 20 में से 13 उम्मीदवार चुनाव जीत गए। वहीं, एनडीपीपी के 40 में से 25 प्रत्याशी विजयी हुए। कांग्रेस यहां एक भी सीट नहीं जीत पाई। एनपीपी के पांच उम्मीदवार चुनाव जीत गए। यहां एनसीपी ने भी बड़ा खेल किया। एनसीपी के सात प्रत्याशी चुनाव जीत गए हैं। चार निर्दलीय, दो लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और एनपीएफ, आरपीआई के दो-दो उम्मीदवार चुनाव जीतने में कामयाब रहे। रोचक बात ये भी है कि नगालैंड के इतिहास में आज तक एक भी महिला चुनकर विधानसभा नहीं पहुंची थीं। अब तक नगालैंड से मात्र एक महिला सांसद रानो साइजा चुनी गई थीं। वह 1977 में छठी लोकसभा में चुनकर संसद पहुंची थीं। पर इस बार नागालैंड की जनता ने चार महिला प्रत्याशियों में से दो- दीमापुर तृतीय विधानसभा से हेकानी जखालू और अंगामी सीट से सलहूतुनू क्रुसे को चुनकर विधानसभा में भेजा है। मेघालय सबसे रोमांचक मुकाबला मेघालय में हुआ। यहां 60 में से 59 सीटों पर चुनाव हुए थे। एक सीट पर एक प्रत्याशी की मौत के चलते चुनाव रद्द हो गया। 59 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने आज सभी को हैरान कर दिया। किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। एनपीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इनके 25 प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। दूसरे नंबर पर यूडीपी रही। इनके 11 उम्मीदवार चुनाव जीत गए। भाजपा के तीन, टीएमसी के पांच, कांग्रेस के पांच, एचएसपीडीपी, पीडीएफ के दो-दो उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। दो निर्दलीय विधायक भी चुने गए। वाइस ऑफ द पीपल पार्टी के चार उम्मीदवार चुनाव जीत गए।
3 मार्च साल 2021, हिमाचल प्रदेश के कई कर्मचारी नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के बैनर तले पेंशन व्रत पर बैठे थे। मांग थी पुरानी पेंशन बहाली की। व्रत टूटा मगर पुरानी पेंशन बहाली की मांग पूरी नहीं हुई। संघर्ष जारी रहा और ठीक एक साल बाद 3 मार्च साल 2022 को हिमाचल में कर्मचारियों ने विशाल धरना प्रदर्शन किया, ऐसा धरना जो शायद ही हिमाचल में पहले कभी कर्मचारियों ने किया होगा। तीन मार्च को शिमला के टूटीकंडी में सभी कर्मचारी एकत्रित हुए और आगे बढ़ते हुए 103 टनल के पास एनपीएस कर्मचारियों ने हल्ला बोला। इस दौरान कर्मचारियों द्वारा यातायात बंद किया गया। पुलिस के जवानों ने कर्मचारियों को जब हटाने की कोशिश की तो कर्मचारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद प्रदर्शन में शामिल एनपीएस कर्मियों पर एफआईआर दर्ज की गई। कर्मचारियों की ये नाराजगी तत्कालीन सरकार को भारी पड़ी और विधानसभा चुनाव में तख़्त और ताज बदल गए। कांग्रेस ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में ओपीएस बहाली का वादा किया और कर्मचरियों ने एतबार। अब 3 मार्च ही वो तारीख बन चुकी है जब प्रदेश की सुक्खू सरकार ने कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली संबंधित एसओपी को मंजूरी देकर कर्मचारियों को सबसे बड़ा तोहफा दिया है। आखिरकार एक लम्बे संघर्ष के बाद प्रदेश के कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग पूरी हो गई। प्रदेश सरकार द्वारा चौथी कैबिनेट की बैठक में पुरानी पेंशन बहाली की एसओपी को मंज़ूरी दे दी गई है। 1 अप्रैल, 2023 से पुरानी पेंशन लागू करने का फैसला लिया गया है। जिस मसले ने प्रदेश की चुनावी हवा का रुख बदल कर रख दिया था, अब वो मसला पूरी तरह हल हो गया है। चुनाव से पहले कांग्रेस द्वारा जनता को दी गई गारंटियों में से पुरानी पेंशन बहाली पहली गारंटी थी, जो अब पूरी हो गई है। प्रदेश की नई सरकार ने कर्मचारियों की पेंशन की सबसे बड़ी टेंशन को खत्म कर दिया है। हिमाचल में करीब सवा लाख कर्मचारी इस समय एनपीएस के दायरे में आते हैं और इनको इसका लाभ मिलने वाला है। इस फैसले से प्रदेश सरकार पर सालाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। वहीँ हिमाचल के 1.36 लाख कर्मचारियों का एक अप्रैल से नेशनल पेंशन सिस्टम फंड कटना भी बंद हो जाएगा। इन कर्मचारियों को कैबिनेट ने जीपीएफ के तहत लाने का फैसला लिया है। एनपीएस में रहने के इच्छुक कर्मियों को लिखित में विकल्प देने की पेशकश की गई है। भविष्य में जो नए कर्मचारी सरकारी सेवा में नियुक्त होंगे, वे पुरानी पेंशन व्यवस्था में आएंगे। जिन एनपीएस कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति 15 मई, 2003 के बाद हुई है, उनको भावी तिथि से पुरानी पेंशन दी जाएगी। नियमों में आवश्यक संशोधन के बाद एनपीएस में सरकार और कर्मचारियों द्वारा जारी अंशदान 1 अप्रैल, 2023 से बंद हो जाएगा। कैबिनेट ने वित्त विभाग को इस संबंध में नियमों में बदलाव करने और आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा है। कैबिनेट ने केंद्र सरकार से प्रदेश की 8,000 करोड़ रुपये एनपीएस राशि लौटाने का प्रस्ताव भी पारित किया है। सरकार ने लौटाया कर्मचारियों का आत्मसम्मान : प्रदीप ठाकुर पेंशन बहाल करने के लिए हिमाचल प्रदेश नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री व समस्त कैबिनेट का धन्यवाद किया है। संगठन के अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर तथा अन्य सभी पदाधिकारियों ने सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि पुरानी पेंशन बहाली का जो वादा कांग्रेस पार्टी ने चुनावों के वक्त कर्मचारियों के साथ किया था, वो अब पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व तक ने पेंशन बहाली का समर्थन किया था। प्रियंका गांधी, भूपेश बघेल व अन्य राष्ट्रीय नेताओं ने भी कर्मचारियों की पेंशन बहाली के वादे किये थे। प्रियंका गांधी तो स्वयं कर्मचारियों के धरने पर भी पहुंची थी। कांग्रेस ने कर्मचारियों को विश्वास दिलाया और कर्मचारियों ने भी कांग्रेस का साथ दिया। नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ द्वारा सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा गया कि सरकार ने कर्मचारियों का बुढ़ापा सुरक्षित करके उन्हें जहां आर्थिक रूप से सुरक्षित किया है, वहीँ उनका आत्मसम्मान उन्हें वापस लौटाया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी भविष्य में प्रदेश में आने वाली हर चुनौती का सामना करने के लिए हमेशा सरकार के साथ खड़े रहेंगे और प्रदेश की प्रगति के लिए कर्मचारी हर संभव योगदान देंगे।
हिमाचल प्रदेश के कॉलेजों में अस्सिटेंट प्रोफेसरों के पर्सनैलिटी इंटरव्यू 15 मार्च से शुरू करवाए जाएगे । हिमाचल लोक सेवा आयोग 15 मार्च से लेकर 25 मार्च तक कॉलेज कैडर के अलग-अलग डिपार्टमेंट और सब्जेक्ट के प्रोफेसरों के लिए इंटरव्यू लेगा। इसके लिए आयोग ने शेड्यूल तैयार कर लिया है। सोशोलॉजी सब्जेक्ट में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए 15 से लेकर 17 मार्च तक इंटरव्यू होंगे। म्यूजिक वोकल में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए लिए 15 से लेकर 18 मार्च तक इंटरव्यू होंगे। असिस्टेंट प्रोफेसर इंग्लिश पद के लिए 15 से 25 मार्च तक इंटरव्यू होंगे। कॉलेजों में जियोग्राफी अस्सिटेंट प्रोफेसर का पद भी भरा जाएगा। इसके लिए भी 20 से 23 मार्च तक इंटरव्यू करवाए जायेंगे । बिजली बोर्ड में अस्सिटेंट इंजीनियर इलेक्ट्रिकल के लिए भी 15 मार्च से 24 मार्च तक इंटरव्यू प्रोसेस चलेगा। ईमेल और SMS के अलावा पात्र उम्मीदवारों को कॉल लेटर भी जारी कर दिए गए हैं। फोन नंबर 0177-2624313 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला आने वाले सैलानियों का सफर अब मंहगा होने वाला है। अब नगर निगम टूरिस्ट गाड़ियों पर ग्रीन टैक्स लगाने की तैयारी कर रहा है। मनाली की तर्ज पर यह फीस गाड़ियों से वसूली जाएगी। छोटी गाड़ियों से 200 रुपए, इनोवा से 300 और बस, ट्रक व बड़े वाहनों से 500 रुपए वसूले जाएंगे। दरअसल जब से मुख्यमंत्री सुक्खू ने नगर निगम को आय बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, तब से योजनाएं बनाई जा रही हैं। नगर निगम द्वारा पेश किए जाने वाले बजट में ग्रीन फीस का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। प्रदेश सरकार से मंजूरी मिलते ही शिमला में सैलानियों को ग्रीन फीस देनी होगी। वहीँ नगर निगम इस महीने बजट पेश करेगा, जिसमें ग्रीन फीस का प्रस्ताव भी शामिल होगा। सरकार से मंजूरी मिलते ही अप्रैल महीने में यह फीस सैलानियों को देनी पड़ेगी। इस फीस से नगर निगम और सरकार को सलाना करोड़ों रुपए मिलेंगे। शिमला में हर साल 2 से 3 करोड़ टूरिस्ट आते हैं। सबसे ज्यादा टूरिस्ट पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, गुजरात और यूपी के आते हैं। इन सैलानियों को ही अब एंट्री फीस के तौर पर पैसे देने पड़ेंगे। MC कमिश्नर आशीष कोहली का कहना है कि नगर निगम द्वारा 2013 में भी ग्रीन टैक्स लगाया गया था, लेकिन किसी कारण इसे बंद कर दिया। इस बार फिर से बजट में यह प्रस्ताव रखा जाएगा। शिमला से पहले मनाली में बाहरी राज्यों के वाहनों की एंट्री पर ग्रीन फीस की वसूली की जा रही है। यहां वाहनों में लगे फास्टैग से फीस ली जा रही है। बैरियर लगाकर गाड़ियां रोकने की जरूरत नहीं पड़ती। फास्टैग से चंद सेकेंड में यह फीस कट जाती है। जिनके पास फास्टैग नहीं है, उनसे नकद फीस वसूली जाती है।
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के नेरचौक व थुनाग के 2 युवकों से गोहर पुलिस ने चिट्टा बरामद किया है। आरोपियों को गिरफ्तार करके उनके खिलाफ NDPS एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।वही पुलिस थाना गोहर के प्रभारी निर्मल सिंह ने मामले की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आरोपियों से 40 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया है। जानकारी के अनुसार चैलचौक जासन के भीतर नाके पर ऑल्टो कार नम्बर HP65-8303 को चैकिंग के लिए रोका गया थ।आरोपियों की पहचान साहिल कुमार पुत्र लाल चंद निवासी गांव भंगरोटू तहसील बल्ह जिला मंडी व सूरज मणि पुत्र बेस राम निवासी गांव सेगला तहसील थुनाग जिला मंडी के रूप में हुई।
हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार सुबह हरियाणा की टूरिस्ट बस का एक्सीडेंट हो गया।यह हादसा चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पर बिलासपुर के पास हुआ।जबली के पास कुनाला में बस बीच सड़क में पलट गई।जानकारी के अनुसार, हरियाणा से मनाली जा टूरिस्ट बस HR38A-B0007 संतुलन बिगड़ने के कारण बस बीच सड़क में पलट गई। इस हादसे में 40 लोगों होने की सूचना है जबकि एक युवती की हादसे के दौरान मौके पर ही मौत हो गई। वहीं राहगीरों ने बचाव अभियान चलाते हुए घायलों को बस से निकाला और बिलासपुर क्षेत्रीय अस्पताल में पहुंचाया। एक यात्री की हालत गंभीर होने के चलते उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया है।हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने चालक के खिलाफ लापरवाही से ड्राइविंग करने का मामला दर्ज किया है। फिलहाल हादसे की जाँच अभी जारी है।


















































