आने वाले कुछ दिनों में देश के कई राज्यों में बारिश होने की संभावना है। ये राज्य दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश शामिल हैं। इसके साथ ही, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी भी हो सकती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने एक दिसंबर को प्रेस रिलीज जारी कर यह जानकारी दी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि 1 से 2 दिसंबर के दौरान पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में छिटपुट वर्षा होने की संभावना है। वहीं, 2 दिसंबर यानी आज उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में गरज/बिजली गिरने की संभावना है। इनके अलावा अंडमान निकोबार द्वीप समूह में भी आज भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो सकती है। विभाग ने कहा कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में 1 से 3 दिसंबर के बीच छिटपुट से व्यापक बारिश और बर्फबारी हो सकती है।
कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन के दक्षिण अफ्रीका में मिलने और उसके बाद दुनिया के 25 देशों में अब तक इसके प्रसार से दहशत का माहौल है। हालांकि, भारत में अब तक कोरोना के इन नए वेरिएंट की अब तक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन, भारत सरकार इसको लेकर अलर्ट मोड में है। शीतकालीन सत्र के दौरान आज कोरोना पर लोकसभा में चर्चा होगी। लेकिन, उससे पहले केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया राज्यों के साथ बैठक कर रहे हैं। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जा रही है। इस बैठक में एयरपोर्ट के स्वास्थ्य अधिकारी भी शामिल हो रहे हैं। बता दें कि अमेरिका और यूएई में कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन के पाए जाने के बाद अब यह संक्रमण दुनिया के 25 देशों में फैल चुका है। इधर, कोविड-19 के ओमीक्रोन स्वरूप ने बुधवार को विश्व की परेशानी और बढ़ा दी क्योंकि जापान ने यात्रा प्रतिबंधों को कड़ा कर दिया। वहीं, वायरस के नये स्वरूप से संक्रमण के मामले कुछ और स्थानों पर सामने आए हैं और नये साक्ष्य से यह स्पष्ट हो गया है कि यह स्वरूप सोचे गये समय से हफ्तों पहले से व्याप्त था।
गुजरात के गिर सोमनाथ में बीती रात लगातार हो रही बारिश और तेज हवाओं के कारण 13 से 15 बोटों के समुद्र में डूबने की आशंका जताई जा रही है। बोट पर कई मछुवारे भी सवार थे। मिली जानकारी के अनुसार उस वक्त नाव में सवार 8 से 10 मछुवारें अबतक लापता हैं। बता दें कि कल से ही खराब हो रहे मौसम को देखते हुए हवामान विभाग ने मछुवारों को समुद्र में नहीं जाने की चेतावनी दी थी। बता दें कि महाराष्ट्र और गुजरात के तटीय इलाकों में कल से ही लगातार बारिश हो रही है और IMD के अनुसार आने वाले 48 घंटे में यहां भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ मछुआरों के लिए भी 5 दिन की चेतावनी जारी की गई है। वहीं ओडिशा और आंध्र पर चक्रवाती तूफान 'जवाद' का साया मंडरा रहा है। अहमदाबाद में IMD की क्षेत्रीय निदेशक मनोरमा मोहंती ने कहा था कि गुजरात में 30 नवंबर से बारिश शुरू हो जाएगी। इसके साथ ही 30 नवंबर से 2 दिसंबर तक के लिए मछुआरों को उत्तर और दक्षिण गुजरात तट के लिए चेतावनी जारी की गई है।
वर्ल्ड एथलेटिक्स ने भारत की फर्राटा धाविका अंजू बॉबी जार्ज को वुमन ऑफ द ईयर के अवॉर्ड से नवाजा है। विश्व एथलेटिक्स ने उन्हें यह पुरस्कार उन्हें खेल को भारत में बढ़ावा और बहुत बड़ी संख्या में महिला को प्रेरित करने के लिए दिया गया है। अंजू से प्रेरित होने के बाद देश में कई महिला एथलीट उनके पदचिन्हों पर चलते हुए देश का नाम रोशन कर रही हैं। बता दें कि पूर्व ओलंपियन अंजू बॉबी जॉर्ज आज भी खेल में सक्रिय हैं। इंडियन एथलेटिक्स फेडरेशन की सीनियर वाइस प्रेसीडेंट अंजू ने साल 2016 में युवा लड़कियों के लिए ट्रेनिंग एकेडमी खोली जिसके तहत अंडर-20 पदक विजेताओं को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभार्ई। कई प्रतियोगिताओं में भारत का नाम रोशन करने वाली अंजू बॉबी जॉर्ज ने साल 2003 में विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप की लंबी कूद स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया था।
हिमाचल प्रदेश में मौसम बदल गया है। स्पिति के काज़ा में ताज़ा बर्फ़बारी हुई है। इसके अलावा ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ़ का दौर जारी है। मौसम के बदलाब से तापमान में भारी गिरावट आई है। परिणामस्वरूप ठंड बढ़ गई है। वंही मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक मौसम के ख़राब रहने की संभावना जताई है।
कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन के बढ़ते खतरे के बीच देशभर में आज करीब 9 हजार नए कोरोना केस मिले है। इसके साथ ही 267 मरीजों की मौत हो गई जबकि 10 हजार से ज्यादा मरीज कोरोना संक्रमण को मात देकर ठीक हो गए। बुधवार सुबह को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी किए आंकड़ों से यह जानकारी मिली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, सुबह आठ बजे तक बीते 24 घंटे में देशभर में कोरोना के कुल 8954 मिले हैं। इस अवधि में 267 कोरोना मरीजों की मौत हो गई जबकि 10207 कोरोना के मरीज स्वस्थ हो गए। मंत्रालय के अनुसार, बीते 24 घंटे में देश के भीतर 1520 एक्टिव केस घटे हैं, जिसके बाद अब कुल 99023 एक्टिव केस रह गए, जिनका इलाज जारी है। अभी तक के कुल आंकड़ों की बात करें तो देश में एक दिन में कोविड-19 के 8,954 नए मामले सामने आने के बाद देश में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3,45,96,776 हुई जबकि 267 मौतों के साथ कुल मृतकों की संख्या बढ़कर 4,69,247 तक पहुंच गई। देश भर में अभी तक कुल 3,40,28,506 लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं।
कोरोना वायरस के नए वेरिएंट 'ओमीक्रोन' को लेकर बढ़ती चिंता के बीच केंद्र सरकार चौकन्ना हो गई है। सरकार की ओर से हाई रिस्क वाले देशों से भारत पहुंचने वाले यात्रियों के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार की कोशिश है कि इन दिशा-निर्देशों का सख्ति से पालन हो। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी संशोधित दिशा-निर्देश बुधवार एक दिसंबर से अगले आदेश तक मान्य रहेंगे। ओमीक्रोन वेरिएंट को देखते हुए 28 नवंबर को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए थे। आदेश में कहा गया है कि सभी संबंधित आधिकारी इन संशोधित दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और क्षेत्र अधिकारियों को भी इन दिशा-निर्देशों के बारे में सूचित करें ताकि इनका सख्ती से पालन हो सके। गाइडलाइन्स के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय पैसेंजर को सफर की शुरुआत से पहले अपनी ट्रैवल हिस्ट्री और निगेटिव RT-PCR जांच रिपोर्ट केंद्र सरकार के एयर सुविधा पोर्टल पर डालनी होगी। नई संशोधित गाइडलाइंस के मुताबिक किसी भी अंतरराष्ट्रीय देशों से भारत आने वाले यात्रियों से उनकी पिछले 14 दिन की ट्रैवल हिस्ट्री का रिकॉर्ड मांगा जाएगा। इसका मतलब ये हुआ कि यात्रि इन 14 दिनों में किन-किन देशों की यात्रा की है। इस रिपोर्ट के जरिए सरकार यह देखेगी कि 'एट रिस्क' लिस्ट में शामिल देशों में तो नहीं गए। सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देश के मुताबिक 'कंट्री एट रिस्क' की सूचि से बाहर के देशों से आ रहे यात्रियों को भारत में उतरने के बाद एयरपोर्ट से बाहर जाने की इजाजत दी गई है। ऐसे पैसेंजर जो 'कंट्री एट रिस्क' के देशों की सूचि के अलावा किसी अन्य देश से आ रहे हैं तो वह 14 दिन तक अपनी हेल्थ को सेल्फ मॉनिटर करेंगे। विदेशों से आने वाले यात्रियों में से पैसेंजर का 5 प्रतिशत लोगों को एयरपोर्ट पर उतरने के बाद कोविड टेस्ट किया जाएगा। यह टेस्ट रेंडम तरीके से यात्रियों को चुनकर किया जाएगा। दिशा-निर्देश के मुताबिक 'एट रिस्क' लिस्ट वाले देशों से आने वाले यात्रियों का एयरपोर्ट पर उतरने के बाद कोरोना टेस्ट किया जाएगा। रिपोर्ट आने तक इन यात्रियों को एयरपोर्ट पर रुक कर ही इंतजार करना होगा। यदि टेस्ट का रिपोर्ट निगेटिव आता है तो उन्हें 7 दिन के होम क्वारंटाइन में रहने की इजाजत दी जाएगी। इसके बाद 8वें दिन फिर से टेस्ट करवाना होगा यदि वह रिपोर्ट भी निगेटिव आता है तो अगले 7 दिन उन्हें सेल्फ-मॉनिटरिंग में रहना होगा। केंद्र सरकार की सूचि में जो देश 'एट रिस्क' में शामिल हैं वह ब्रिटेन समेत सभी यूरोपीय देश, इजराइल, साउथ अफ्रीका, ब्राजील, बांग्लादेश, बोत्सवाना, चीन, मॉरीशस, न्यूजीलैंड, जिम्बाब्वे, सिंगापुर और हांगकांग है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि देश में कोरोना के नए वेरिएंट को फैलने से रोका जाए।
सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के लेटेस्ट रेट्स जारी कर दिए हैं। लगातार 27वें दिन तेल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। वहीं, इंटरनेटशल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आज भी गिरावट देखने को मिल रही है। देश की राजधानी दिल्ली में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 103.97 रुपये और डीजल का भाव 86.67 रुपये है। इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 3.91 फीसदी की गिरावट देखने को मिल रही है, जिसके बाद ब्रेंट क्रूड 70.57 डॉलर प्रति बैरल पर नजर आ रहा है। वहीं, WTI Crude की कीमतों में 0.48 फीसदी का इजाफा देखने को मिल रहा है, जिसके बाद डब्लूटीआई 66.50 डॉलर प्रति बैरल पर है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार आ रही गिरावट के वजह से जल्द ही पेट्रोल की कीमतों में भी कटौती देखने को मिल सकती है।
आम जनता पर महंगाई की मार बढ़ती ही जा रही है। 1 दिसंबर को सरकारी तेल कंपनियों ने गैस सिलेंडर के दाम में भी इजाफा कर दिया है। आज से गैस सिलेंडर 100 रुपये महंगा हो गया है। वहीं, पिछले महीने ये सिलेंडर 266 रुपये महंगा हो गया था। बता दें ये इजाफा सिर्फ कामर्शियल सिलेंडर पर हुआ है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी रसोई गैस के लिए पुराने वाले रेट्स ही चुकाने होंगे। आज की गई बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में 19 किलो वाले कामर्शियल सिलेंडर का दाम 2100 रुपये के भी पार पहुंच गया है। इसके अलावा दिल्ली में 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 899.50 रुपये है।
ट्विटर की कमान संभालते ही पराग अग्रवाल एक्शन में दिखने लगे हैं। ट्विटर के सीईओ पराग अग्रवाल ने मंगलवार को ट्विटर को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं। नए नियमों के मुताबिक कोई भी यूजर्स किसी अन्य की फोटो या वीडियो उनकी सहमति के बिना साझा नहीं कर पाएंगे। ट्विटर के अनुसार कंपनी ने यह कदम उत्पीड़न को देखते हुए बनाया है। ट्विटर का कहना है कि उत्पीड़न विरोधी नीतियों को और अधिक मजबूत बनाना है इस कारण ये कदम उठाया गया है। ट्विटर के नए नियमों के तहत जो व्यक्ति पब्लिक फीगर नहीं हैं, वह अपनी तस्वीर या वीडियो को हटाने के लिए कह सकते हैं जिनको शेयर करने के लिए उनकी सहमति नहीं ली गई है। हालांकि ट्विटर ने साफ कर दिया है कि पब्लिक फिगर वाले लोगों को यह सुविधा नहीं मिलेगी। ट्विटर की नई नीति में निजी जानकारी को उजागर करने की धमकी देना या दूसरों को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करना भी गोपनियता नीति में शामिल है। गौरतलब है कि ट्विटर के सह-संस्थापक जैक डॉर्सी ने सीईओ पद से अपना इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद भारतीय मूल के पराग अग्रवाल को नया सीईओ बनाया गया है। पराग आईआईटी-बंबई और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र रह चुके हैं। पराग अग्रवाल 2011 से ट्विटर में काम कर रहे हैं और 2017 से कंपनी के सीटीओ के पद पर थे।
आज देश की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहने वाले सीमा सुरक्षा बल का स्थापना दिवस है। यह हर साल 1 दिसंबर को मानाया जाता है। आज के दिन यानी 1 दिसंबर को BSF 57वां स्थापना दिवस मना रहा है। दरअसल आज के दिन ही 1965 में BSF का गठन किया गया था। बीएसएफ के स्थापना दिवस पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी समेत कई नेताओं ने जवानों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दी है। वहीं इस मौके पर BSF ने भी कू ऐप के माध्यम से कहा कि आज 1 दिसंबर 2021 है। आज के दिन हमें मातृभूमि के सेवा करते हुए 57 साल के हो गए हैं और यह अनंतकाल तक जारी रहेगा। देश की सेवा करना रक्षा और सम्मान की बात है। बता दें कि BSF यानी बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स की स्थापना पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ अंतराष्ट्रीय सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए किया गया था। इस फोर्स का गठन 1 दिसबंर 1965 को केएफ रुस्तमजी के कुशल नेतृत्व में 'किया गया था।
किसान आंदोलन में फूट की खबरों के बीच आज दिल्ली के सिंधु बॉर्डर पर 40 किसान संगठनों की होने वाली बड़ी बैठक रद्द हो गई है। किसानों की घर वापसी और MSP कमेटी के गठन के प्रस्ताव पर चर्चा होनी थी। जानकारी मिल रही है कि किसान संगठनों के बीच फूट पड़ गई है। पंजाब के ज्यादातर किसान आंदोलन खत्म करने के पक्ष में हैं। पंजाब के कई किसान संगठन आंदोलन की जीत के बाद धरना खत्म करने के पक्ष में हैं वहीं कई किसान संगठन एमएसपी कानून और मुकदमों की वापसी समेत अन्य मांगों को लेकर धरना जारी रखना चाहते हैं। वापसी के पक्ष वाले आम सहमति बनाने की कवायद कर रहे हैं। रणनीतियों को अंतिम रूप देने के लिए आज किसान संगठन अहम बैठक करनी थी। पंजाब के 32 संगठनों की कल हुई बैठक में आम सहमति बनी कि संसद से कृषि कानूनों की वापसी के साथ ही आंदोलन की जीत हो चुकी है। एमएसपी कानून बनने की प्रक्रिया में समय लगेगा इसलिए सरकार को एक समयसीमा देकर वापस लौटना चाहिए।
संसद सत्र का आज तीसरा दिन है। तीसरे दिन भी सदन के दोनों सदनों में हंगामे के आसार दिख रहे हैं। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को कहा कि लोकसभा में बुधवार को कोविड-19 महामारी पर एक अल्प अवधि की चर्चा के लिए समय आवंटित किया गया है। यह चर्चा नियम 193 के अंतर्गत होगी, जिसके तहत सदस्य कोविड-19 के नए स्वरूप ओमीक्रोन के बारे में जानकारी मांग सकते हैं। प्रह्लाद जोशी ने कहा कि लोकसभा में बुधवार को महामारी पर एक अल्प अवधि की चर्चा होगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को संसद में कहा कि अभी तक देश में कोरोना वायरस के नये स्वरूप ओमीक्रोन का कोई मामला सामने नहीं आया है और सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है कि यह देश में नहीं पहुंचे। वहीं दूसरे दिन राज्यसभा में विपक्षी दलों के 12 सदस्यों को मौजूदा संसद सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किये जाने के विरोध में मंगलवार को लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेस समेत अन्य कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया, वहीं उच्च सदन में सभापति के माफी मांगने के लिए कहने के बाद सदस्यों ने पूरे दिन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। वंही दिल्ली में आज 40 किसान संगठनों की होने वाली बैठक रद्द गई है। इसकी वजह से सामने आ रही है कि किसान संगठनों में फूट पड़ रही है।
जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया है। यह मुठभेड़ राजपुरा इलाके में बुधवार की सुबह शुरू हुई थी। ये मुठभेड़ अब खत्म हो गई है। जिन दो आतंकियों के शव बरामद हुए हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि मारे गए आतंकियों का संबंध जैश-ए-मोहम्मद से हो सकता है।
ओमीक्रोन ने एक बार फिर दुनिया के सभी देशों की चिंता बढ़ा दी है। भारत भी हर स्तर पर जाकर इस संक्रमण को देश तक आने से रोकने की कोशिश कर रहा है। इसी क्रम में यूपी, बिहार, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में गाइडलाइन जारी की गई है। महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। वहीं झारखंड में एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की जांच के लिए निगरानी टीमों की तैनाती की गई है साथ ही पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को कहा कि लोकसभा में बुधवार को कोविड-19 महामारी पर एक अल्प अवधि की चर्चा के लिए समय आवंटित किया गया है। यह चर्चा नियम 193 के अंतर्गत होगी, जिसके तहत सदस्य कोविड-19 के नए स्वरूप ओमीक्रोन के बारे में विवरण मांग सकते है। जोशी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि लोकसभा में बुधवार को महामारी पर एक अल्प अवधि की चर्चा होगी। बता दें कि इस वायरस के बारे में पिछले सप्ताह ही पता लगाया गया था। इस वेरिएंट की शुरुआत दक्षिण अफ्रीका में हुई थी। हालंकि इसके फैलने की रफ्तार अन्य वेरिएंट से ज्यादा तेज है और यह कुछ ही दिनों में पूरी 13 देशों में फैल गया है। इस नए वेरिएंट के बारे में फिलहाल ज्यादा जानकारी नहीं होने के कारण इसे रोकना मुश्किल हो रहा है और यह वैक्सीनेटेड लोगों को संक्रमित कर रहा है। कई महाद्वीपों में ओमीक्रोन वेरिएंट से संक्रमित होने के मामलों की पुष्टि हो चुकी है। जर्मनी, इटली, बेल्जियम, इजरायल और हांगकांग में भी इसके मामले सामने आए हैं।
आने वाले कुछ दिनों में देश के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। ये राज्य राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा और आंध्र प्रदेश हैं। इसके साथ ही, कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में बर्फबारी भी देखी जा सकती है। हालांकि, इस दौरान तमिलनाडु में बारिश के घटने की संभावना है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने यह जानकारी दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने जारी की गई एक प्रेस रिलीज में बताया कि 30 नवंबर यानी आज से 2 दिसंबर के दौरान अंडमान और निकोबार में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। वहीं, इसके अलावा 3 दिसंबर की रात से अगले 48 घंटों तक उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ वर्षा गतिविधि बढ़ने की संभावना है। विभाग ने कहा कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में 1 से 3 दिसंबर के बीच छिटपुट से व्यापक बारिश और बर्फबारी हो सकती है। ऐसा सबसे ज्यादा दो दिसंबर को होता दिखेगा। मौसम विभाग ने कहा कि दो दिसंबर को उत्तराखंड में छिटपुट भारी बारिश और बर्फबारी की संभावना है।
ट्विटर के सह-संस्थापक जैक डॉर्सी ने बीते दिन ट्वीट कर जानकारी दी कि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वहीं, उनकी जगह भारतीय मूल के पराग अग्रवाल ने ले ली है। पराग अग्रवाल सीईओ पद के लिए नियुक्त किए गए हैं। पराग अग्रवाल ने अब अपने ट्विटर अकाउंट का बायो अपडेट करते हुए खुद को कंपनी का सीईओ करार दिया है। दरअसल, जैक डोर्सी ने बीते दिन ट्वीट किया, "पता नहीं किसी ने सुना है या नहीं पर, मैंने ट्विटर से इस्तीफा दे दिया है।" जैक के पद को अब भारतीय अमेरिकन पराग अग्रवाल संभालेंगे। बता दें कि सीईओ बनने से पहले अग्रवाल ट्विटर के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर थे।
नए नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने भारतीय नौसेना के नए प्रमुख का पदभार संभाला लिया है। निवर्तमान नौसेनाध्यक्ष एडमिरल करमबीर सिंह ने एडमिरल आर हरि कुमारको भारतीय नौसेना की कमान सौंप दी है। केंद्र सरकार ने वाइस एडमिरल आर हरि कुमार को अगले नौसेना प्रमुख के रूप में नियुक्त किया था। हरि कुमार पहले नौसेना की पश्चिमी कमान के कमांडिंग एन चीफ के पद पर कार्यरत थे। निवर्तमान नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने कहा, 'बीते 30 महीनों के दौरान भारतीय नौसेना की कमान संभालना बड़ा सम्मान रहा। यह समय चुनौतियों भर रहा है। कोविड से लेकर गलवान संकट तक अनेक चुनौतियां आईं. एक बहुत योग्य नेतृत्व के हाथ में नौसेना को सौंप रहा हूं। ' नौसेना प्रमुख का पदभार संभालने के बाद एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा, एडमिरल करमबीर सिंह आज 41 साल तक देश सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो रहे हैं। हम उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन के लिए आभारी हैं। भारतीय नौसेवा हमेशा उनकी आभारी रहेगी।
कोरोना का नया वेरिएंट ओमिक्रोन तेजी से पांव पसार रहा है। यह खतरनाक वायरस काफी खतरनाक बताया जा रहा है। वायरस का नया वेरिएंट लगभग 14 देशों में पहुंच चुका है। तमाम कोशिशों के बाद भी इस वायरस ने इन देशों में पांव पसार चुका है। कई देशों ने इसके आगमन से पहले अपने-अपने यहां अलर्ट जारी कर दिया है। डेल्टा वेरिएंट का तांडव विश्व देख चुका है। ऐसे में सभी देश खास एहतियात बरत रहे हैं। ओमिक्रोन वेरिएंट को देखते हुए अमेरिकी सरकार के शीर्ष चिकित्सा सलाहकार एंथनी फाउची ने वायरस के नए वेरिएंट को लेकर खतरे की घंटी बजा चुके हैं। वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रोन का पहला केस पिछले हफ्ते दक्षिण अफ्रीका में मिला था। देखते ही देखते यह स्ट्रेन 14 देशों में फैल गया। नए वेरिएंट से वैसे लोग भी संक्रमित हो रहे हैं जिन्होंने कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज ले रखी है। कोरना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन को B.1.1.529 नाम दिया गया है। ओमिक्रोन वेरिएंट का वायरस जर्मनी, इटली, बेल्जियम, इजरायल और हांगकांग में भी इसके मामले सामने आए हैं। दक्षिण अफ्रीका से आने वाले यात्रियों की कड़ी निगरानी की जा रही है और लगातार जांच जारी है। थाईलैंड ने अफ्रीका के आठ देशों से यात्रियों के आने पर पाबंदी लगा दी है।
हिमाचल प्रदेश में मौसम फिर करवट लेने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने प्रदेश में तीन दिनों तक बारिश-बर्फबारी की संभावना जताई है। प्रदेश के कई मैदानी भागों में एक से तीन दिसंबर तक बारिश की संभावना है तो वहीं, मध्य पर्वतीय व उच्च पर्वतीय भागों में बारिश-बर्फबारी के आसार हैं। मौसम विभाग केंद्र ने दो दिसंबर को मध्य व उच्च पर्वतीय कुछ भागों के लिए येलो अलर्ट भी जारी किया है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम में यह बदलाव आने की संभावना है। 30 नवंबर को प्रदेश में मौसम साफ रहने का पूर्वानुमान है।
कोरोना के नए वेरिएंट आने से दुनियाभर में दहशत का माहौल है। ओमिक्रोन के मामले कई देशों में मिलने के बाद भारत सरकार इस पर एक्शन लेते हुए सोमवार को संशोधित गाइडलाइन जारी की है। इसके मुताबिक, वैक्सीनेशन के बावजूद जोखिम वाले देशों से आने वाले अंतरराष्ट्रीय पैसेंजर्स को एयपोर्ट पर पहुंचने के बाद कोरोना टेस्ट अनिवार्य होगा। 'जोखिम वाले देशों' के रूप में पहचाने जाने वाले देशों से भारत आने के लिए प्रस्थान से 72 घंटे पहले किए गए पूर्व-प्रस्थान COVID-19 परीक्षण के अलावा आगमन पर हवाई अड्डे पर अनिवार्य रूप से आगमन पर COVID-19 परीक्षण से गुजरना पड़ता है। इन परीक्षणों में पॉजिटिव पाए गए यात्रियों के लिए, उन्हें क्वारंटीन किया जाएगा और नैदानिक प्रबंधन प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज किया जाएगा। इसके अलावा उनके नमूने भी पूरे जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए जाएंगे। नकारात्मक पाए गए यात्री हवाई अड्डे से जा पाएंगे, लेकिन 7 दिनों के लिए घर से अलग रहना होगा। इसके बाद भारत में आगमन के 8वें दिन दोबारा परीक्षण किया जाएगा, इसके बाद 7 दिनों तक स्व-निगरानी होगी। गौरतलब है कि ओमिक्रोन के खतरे को देखते हुए केन्द्र सरकार की तरफ से रविवार को नई गाइडलाइन जारी की गई थी। कोरोना वायरस के अधिक संक्रामक स्वरूप ‘ओमिक्रोन’ को लेकर बढ़ती चिंता के बीच केंद्र ने रविवार को‘जोखिम’ श्रेणी वाले देशों से आने वाले या उन देशों से होकर भारत पहुंचने वाले यात्रियों के लिए आरटी-पीसीआर जांच अनिवार्य कर दी। साथ ही, तब तक यात्री को हवाई अड्डा छोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जब तक नमूने की जांच के नतीजे प्राप्त नहीं हो जाते। मंत्रालय ने कहा कि ‘जोखिम’ श्रेणी वाले देशों के अलावा अन्य देशों से आने वाले लोगों को हवाई अड्डे से जाने की अनुमति रहेगी, हालांकि ऐसे यात्रियों को भी 14 दिन तक स्वयं अपने स्वास्थ्य की निगरानी करनी होगी। मंत्रालय ने कहा कि अन्य देशों से आने वाले यात्रियों में से पांच फीसदी की जांच की जाएगी और संबंधित विमानन कंपनी को प्रत्येक उड़ान से आने वाले उन पांच फीसदी लोगों की पहचान करनी होगी, जिनका परीक्षण किया जाना चाहिए। हालांकि, इनके नमूने की जांच का खर्च मंत्रालय वहन करेगा। मंत्रालय ने कहा कि वायरस के ओमीक्रोन स्वरूप को ध्यान में रखते हुए मौजूदा दिशा-निर्देशों में संशोधन किया गया था। दक्षिण अफ्रीका में 24 नवंबर को वायरस के ओमीक्रोन स्वरूप के मिलने की खबर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को दी गयी थी।
हिमाचल प्रदेश में हाशिये पर चल रही पारम्परिक लाल चावल की फसल अब फिर से लहलहाने लगी है। जिस मर चुके लाल चावल की खेती के बारे में सोचना भी मुश्किल था, आज वो लहलहा रही है। विलुप्त हो रही लाल चावल की पारंपरिक खेती की तरफ एक बार फिर किसानों का रुझान बढ़ने लगा है। लाल चावल का उत्पादन सबसे ज़्यादा पहाड़ी क्षेत्रों पर होता है। जून-जुलाई माह में लगाई गई यह फसल अक्टूबर-नवंबर माह में तैयार हो जाती है। लाल चावल की फसल में विशेष पोषाहार तथा औषधीय तत्व हैं जिसके कारण इसकी अधिक मांग रहती है। माना जाता है कि मानव जाति की ओर से अपनी उत्पत्ति के आरंभिक काल के दौरान खाद्यान्न के रूप में उपयोग की जाने वाली लाल चावल की फसल लगभग 10 हजार वर्ष पुरानी आंकी जाती है। पर हरित क्रांति के दौर में किसानों ने नकदी और ज्यादा उत्पादन वाली फसलों की प्रजातियों को अपनाने से सदियों से उगाई जाने वाली पारंपरिक फसलें हाशिए पर चली गई। जनवितरण प्रणाली से अनाज के वितरण के कारण किसानों ने इन फसलों से किनारा कर लिया। अब स्वास्थ्य के प्रति संजीदगी, पर्यावरण परिवर्तन तथा जलवायु परिवर्तन की वजह से किसानों ने लाल चावल की फसल को फिर से उगाना शुरू कर दिया है। सुगंधित लाल चावल की फसल में विशेष पोषाहार तथा औषधीय तत्व हैं। इन्हें परंपरागत रूप में ब्लड प्रेशर, कब्ज, ल्यूकोरिया जैसे रोगों के उपचार में प्रयोग किया जा रहा है। इस समय लाल चावल की खेती पानी की बहुतायत वाले चिड़गांव, रोहड़ू, रामपुर, कुल्लू घाटी, सिरमौर तथा कांगड़ा जिला के ऊपरी क्षेत्रों में की जा रही है। राज्य में लोकप्रिय लाल चावल की किस्मों में रोहड़ू में छोहारटू, चंबा में सुकारा तियान, कांगड़ा में लाल झिन्नी तथा कुल्लू में जतू और मटाली किस्में किसानों द्वारा उगाई जाती हैं। किसानों की आर्थिकी को मजबूत करने में भी लाल चावल की खेती महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। प्रदेश में लाल चावल लगभग 200 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है, यानी आम चावल से कई गुना अधिक दर पर। जाहिर है ऐसे में यदि इसकी खेती का दायरा बढ़े तो ये किसानो की आर्थिकी में बड़ा बदलाव ला सकता है। लाल नहीं, भूरे रंग का होता है चावल इस चावल का असली रंग लाल नहीं, बल्कि भूरा होता है लेकिन फिर भी आम तौर पर इसे लाल चावल के नाम से ही जाना जाता है। सफेद चावल को पॉलिशिंग और रिफाइंड जैसे कई प्रोसेस से गुजरना पड़ता है लेकिन लाल चावल को रिफाइंड नहीं किया जाता। सिर्फ धान का छिलका हटाने के बाद पकाने के लिए यूज किया जाता है। हालांकि यह सफेद चावलों के मुकाबले पकने में ज्यादा समय लेते हैं लेकिन सेहत के लिहाज से यह काफी फायदेमंद है। दिखने में यह काफी हद तक ब्राउन राइस की तरह ही होते हैं। लाल चावल की किस्में हिमाचल प्रदेश के कई खजानों में से एक लाल चावल की कई प्रकार की किस्में हैं। इनमें शिमला जिले के छोहार्टू, चंबा जिले से सुकारा, झिंजन और कराड , कुल्लू जिले के जट्टू, देवल और मटली और कांगड़ा जिले के देसी धान, कालीझिनी,अछू और बेगमी को राज्य के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग ऊंचाई पर उगाया जाता है। लाल चावल की ये किस्में इंडिका और जपोनिका दोनों उप-प्रजातियों से संबंधित हैं। लाल चावल हिमाचल प्रदेश में सभी धार्मिक समारोहों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सेहत के लिए रामबाण है लाल चावल जो लोग अपनी सेहत को लेकर हमेशा अलर्ट रहते हैं वे अपने खानपान में हर चीज काफी सोच समझकर शामिल करते हैं। अगर हम चावल की बात करें तो बाजार में आजकल कई तरह की चावल की किस्में मौजूद हैं और अब लोग सामान्य चावल की बजाय लाल चावल खाना ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि विशेषज्ञों का मानना है कि लाल चावल में ज्यादा फाइबर और पोषक तत्व होते हैं। लाल चावल वजन घटाने से लेकर दिल को स्वस्थ रखने और डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद माना जाता है। डायबिटीज में लाभकारी फाइबर, प्रोटीन से भरपूर लाल चावल को टाइप-2 डायबिटीज मरीजों के लिए फायदेमंद है। इससे खून में ग्लूकोज की मात्रा नियंत्रित रहती है और ब्लड शुगर भी नहीं बढ़ता। कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल लाल चावल में कोलेस्ट्रॉल ना के बराबर होती है। साथ ही इससे शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है, जिससे कोलेस्ट्रॉल लेवल सही रहता है और दिल की बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। साथ ही यह ब्लड प्रेशर को कम करके हार्ट अटैक का रिस्क घटाते हैं। कैंसर से बचाव शोध के मुताबिक, इससे एमिनोब्यूटिरिक नामक तत्व होता है, जो शरीर में कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकता है। इससे कैंसर का रिस्क काफी हद तक कम हो जाता है। मजबूत हड्डियां हड्डियों के लिए भी लाल चावल काफी अच्छे होते हैं। इसमें मैग्नीशियम होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें मैग्निशियम और कैल्शियम भी भरपूर होता है, जो दांतों को मजबूत करने में मददगार है। वजन घटाने में कारगर लाल चावल भूख को कंट्रोल करते हैं, जिससे आप ओवरईटिंग करने से बच जाते हैं। साथ ही इससे मेटाबॉलिज्म बढ़ता है, जिससे वजन घटाने में काफी मदद मिलती है। वहीं, इसमें कैलोरी और फैट की मात्रा भी कम होती है। आंत से जुड़ी बीमारी जिन लोगों को आंत से जुड़ी कोई दिक्कत है उनके लिए भी लाल चावल का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है। नींद ना आना नींद ना आने की शिकायत और तनाव की शिकायत रहती है तो इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। इसमें कुछ ऐसे एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो तनाव और अनिद्रा की समस्या को दूर करते हैं। एलर्जी से राहत इसमें एंथोसायनिन यौगिक, एंटीऑक्सीडेंट, आयरन, मैंगनीज और फ्लेवोनोइड्स होता है। इससे ना शरीर में फ्री रेडिकल्स कम होता है, जिससे इंफ्लामेशन, एलर्जी की समस्या से राहत मिलती है। अस्थमा के लिए बेस्ट डाइट इसमें मैग्नीशियम होता है, जो शरीर के अंदर ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाती है। साथ ही यह श्वसन प्रणाली के लिए अच्छा है। ऐसे में अस्थमा मरीज डॉक्टर से सलाह लेकर इसे अपनी डाइट का हिस्सा जरूर बनाएं। पाचन में मदद करता है लाल चावल फाइबर का एक अच्छा स्रोत है और इस प्रकार कई पाचन क्रियाओं का इलाज करने में मदद करता है। घुलनशील और अघुलनशील फाइबर से भरपूर, लाल चावल शरीर से विषाक्त पदार्थों को आसानी से निकाल सकता है। 15 फार्मों में होगा बीज तैयार : वीरेंद्र कँवर कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर का कहना है कि प्रदेश में लाल चावल लगभग 200 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है जोकि सफेद चावल के मुकाबले पांच गुना ऊंची दर है। राज्य में इस समय लगभग 4122 किसान परिवार लाल चावल की खेती करते हैं। आगामी पांच सालों में लगभग 10 हजार किसानों को चावल की खेती के अंतर्गत कवर करने का लक्ष्य है। कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर का कहना है कि लाल चावल के साथ-साथ विभाग ने कुल्थ, राजमा व माह की दाल के उत्पादन को बढ़ाने के मद्देनजर 15 फार्मों में इसका बीज तैयार कर किसानों को देने की योजना बनाई है। वीरेंद्र कंवर का कहना है कि विभाग ने 15 फॉर्मों में लाल चावल के साथ प्रदेश की पारंपरिक दालों के बीजों का उत्पादन कर किसानों को देने की योजना बनाई गई है। रंग लाएं कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के प्रयास कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कुलपति प्रो. एचके चौधरी का कहना है कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने लाल चावल उगाने वाले किसानों को पारंपरिक लाल चावल किस्म ,छोहार्टू, को पौधा किस्मों और किसान अधिकार प्राधिकरण के संरक्षण के साथ पंजीकृत करने में मार्गदर्शन किया है। आठ साल पहले ये पहल शुरू हुई थी, पिछले एक वर्ष में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को संरक्षण, विकास, लोकप्रिय बनाने और लाल चावल के आगे प्रसार के नए प्रयासों के साथ इस मामले को फिर से आगे बढ़ाने में मदद की, जिसके परिणामस्वरूप राज्य का नाम रोशन हुआ। लाल धान की किस्मों के संरक्षण और विकास में उनके योगदान के लिए किसानों को दिया जाने वाला यह भारत का सर्वोच्च पुरस्कार है। प्रोफेसर चौधरी ने कहा कि शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल के छोहरा घाटी के पेजा, मसली, जंगला, दाबोली, कलोटी जैसे विभिन्न गांवों में लगभग 1000 हेक्टेयर क्षेत्र में लाल चावल की खेती की जा रही है। इसकी खेती पब्बर नदी के दोनों किनारों पर की जाती है, जिसे 1300 मीटर से 2100 मीटर तक खेती के लिए अनुकूलित किया जाता है और इसे जपोनिका लाल चावल के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है। छौहारा क्षेत्र के किसानों को मिला भारत का सर्वोच्च पुरस्कार रोहडू के छौहारा क्षेत्र के लाल चावल की खेती करने वाले किसानों को प्रतिष्ठित प्लांट जीनोम सेवियर अवार्ड से नवाज़ा गया है। लाल धान की किस्मों के संरक्षण और विकास में उनके योगदान के लिए किसानों को दिया जाने वाला यह भारत का सर्वोच्च पुरस्कार है। छौहारा क्षेत्र के लाल चावल न केवल अपने विशिष्ट स्वाद के लिए विख्यात है बल्कि इसमें मौजूद मिनरल्स व औषधीय गुणों के लिए सदियों से जाना जाता है। आमतौर पर बाजार में इसकी कीमत 200 से 300 रुपए प्रति किलो तक रहती है। रोहड़ू उपमंडल के छौहारा घाटी के पेजा, मसली, जंगला, दाबोली, कलोटी जैसे विभिन्न गांवों में लगभग 1000 हेक्टेयर क्षेत्र में लाल चावल की खेती की जाती है। इसकी खेती पब्बर नदी के दोनों किनारों पर की जाती है, जिसे 1300 मीटर से 2100 मीटर तक खेती के लिए अनुकूलित किया जाता है और इसे जपोनिका लाल चावल के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है।
2017 में फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा नेता बलदेव ठाकुर ने बगावत का बिगुल फूंका और चुनाव लड़ा। जैसा स्वाभाविक तौर पर होता है पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया। उस चुनाव में न तो बलदेव खुद जीते और न भाजपा को जीतने दिया। इसके बाद फिर वैसा ही हुआ जैसा सियासत में आम तौर पर होता है, यानी बलदेव की घर वापसी हो गई। हालहीं में उपचुनाव हुए और 2017 में जिन बलदेव ने पार्टी के समीकऱण बिगाड़े थे उन्हें ही पार्टी ने टिकट दे दिया। जाहिर है पार्टी को बलदेव जिताऊ दिख रहे थे। यानी सियासत में कुछ भी मुमकिन है। यहाँ निष्कासन के क्या मायने होते है ये फतेहपुर के इस प्रकरण से पता चलता है। अब बात करते है भाजपा के ताजा निष्कासन की, मतलब चेतन बरागटा की। हाल ही में हुए जुब्बल कोटखाई उपचुनाव में भाजपा ने चेतन का टिकट काटा, फिर चेतन ने बगावत की, पार्टी ने निष्कासित किया और दोनों हार गए। सबकुछ ठीक वैसा ही हुआ जैसा 2017 में फतेहपुर में हुआ था, बस अंतर ये है कि तब फतहेपुर में भाजपा लड़ कर हारी थी और जुब्बल कोटखाई में तो मानो भाजपा थी ही नहीं। अब इसके आगे भी शायद वो ही हो जो फतेहपुर में हुआ, यानी घर वापसी। जानकार चेतन बरागटा की जल्द घर वापसी तय मानकर चल रहे है, बस देखना ये है कि ये घर वापसी कब होती है या नहीं होती। हाल ही में हुए उपचुनाव में यूँ तो भाजपा सभी जगह परास्त हुई लेकिन सबसे बुरी स्थिति पार्टी के लिए जुब्बल - कोटखाई में रही। यहां पार्टी की जमानत जब्त हुई। पार्टी के हर मंथन में यहाँ टिकट आवंटन को लेकर सवाल उठे है। कहने को तो पार्टी ने करीब डेढ़ दशक से पार्टी से जुड़े नेता चेतन बरागटा के टिकट काटने का कारण परिवारवाद को बताया था, लेकिन ये तर्क किसी के गले से नहीं उतरा। ऐसा इसलिए क्यों कि चेतन ऐसे पहले नेता पुत्र नहीं है जो भाजपा में टिकट मांगने वालों में शामिल हो। भाजपा में ऐसे कई उदहारण है। चेतन तो पैराशूट से टिकट लेने भी नहीं आये थे, फिर उन्हें टिकट देने में क्या आपत्ति थी ? ये सवाल भाजपा के कार्यकर्ताओं के मन में भी था और अब भी है। इसी के चलते भाजपा का एक बड़ा तबका चेतन के समर्थन में था, जिसका खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ा। इस दौरान पार्टी ने चेतन और उनके समर्थकों को 6 वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया था। पार्टी के आला नेताओं के बयान भी आये जिनमें कहा गया कि ये निष्कासन वापस नहीं होगा। पर जानकार मान कर चल रहे है कि 2022 से पहले पार्टी में चेतन की वापसी तय सी है। वापसी होनी है तो देर नहीं करनी चाहिए ! बताया जा रहा है कि हार के बाद पार्टी के ज़ारी चिंतन - मंथन में जुब्बल कोटखाई में टिकट वितरण को हार का बड़ा कारण माना गया है, यानी पार्टी ने चेतन का टिकट काटकर चूक की है। अब जब 2022 का काउंटडाउन शुरू हो चूका है, ऐसे में पार्टी का एक वर्ग चेतन की जल्द वापसी का हिमायती बताया जा रहा है। 68 विधानसभा सीटों वाले हिमाचल प्रदेश में एक -एक सीट बेहद महत्वपूर्ण ही और ऐसे में पार्टी को जल्द तय करना होगा की चेतन की वापसी होगी या नहीं। यदि 'पार्टी विथ डिफ्रेंस' भाजपा 6 साल के लिए अपने दरवाजे चेतन के लिए बंद कर चुकी है तो भाजपा को अभी से 2022 के लिए जुब्बल कोटखाई में अपनी जमीन तैयार करनी होगी, ताकि उपचुनाव जैसी स्थिति टाली जा सके। पार्टी को जहन में रखना होगा कि उक्त क्षेत्र में कांग्रेस जमीनी तौर पर काफी मजबूत है, ऐसे में देरी उचित नहीं।
उपचुनाव में टिकट कटने के बाद खफा -खफा से दिखते रहे कांग्रेस नेता और भाजपा विधायक अनिल शर्मा के बेटे आश्रय शर्मा ने हाल ही गुपचुप सीएम जयराम ठाकुर से मुलाकात की है। इस मुलाक़ात के सियासी माहिर कई मायनें निकाल रहे है। अपने अस्तित्व की जंग लड़ रहा पंडित सुखराम का परिवार आखिर किसकी तरफ है, ये काफी लम्बे समय से बड़ा सवाल बना हुआ है। उपचुनाव के दौरान भी अनिल और आश्रय के दो अलग पार्टियों में होने से ये बिलकुल भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि आखिर पंडित सुखराम का निष्ठावान वोट किस प्रत्याशी की ओर जाएगा। भाजपा से विधायक अनिल शर्मा जहां उपचुनाव में भाजपा के प्रचार प्रसार नहीं कर रहे थे तो वहीं आश्रय जरूर प्रतिभा सिंह के लिए औपचारिक प्रचार प्रसार करते नज़र आए थे। अब आश्रय की मुख्यमंत्री के साथ मुलाक़ात चर्चा में है और अंदरखाते क्या चल रहा है कुछ कहा नहीं जा सकता। 2017 में पंडित सुखराम के परिवार ने भाजपा का दामन थामा था, पर फिर 2019 में पंडित सुखराम और आश्रय शर्मा कांग्रेस में लौट गए। वहीँ अनिल शर्मा भाजपा में तो है लेकिन लगातार नज़रअंदाजी का दंश झेल रहे है। हालांकि आश्रय शर्मा की भी कांग्रेस में ज्यादा सहज नहीं दिखते। यानी दो अलग -अलगे सियासी नावों में सवार ये परिवार लगभग हाशिए पर है। बीते दिनों अनिल शर्मा भी कह चुके है कि अब बाप -बेटा दोनों एक ही पार्टी में रहेंगे जिसके बाद से ही सबको इस परिवार के अगले कदम का इंतज़ार है। मंडी लोकसभा के उपचुनाव के लिए आश्रय लगातार कांग्रेस से टिकट मांगते रहे। उनके दादा पंडित सुखराम का भी यही मानना था कि टिकट के असली हकदार आश्रय ही है। पर जैसा लग रहा था वैसा ही हुआ और कांग्रेस ने आश्रय को टिकट ना देकर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह को टिकट दिया। हालाँकि इसके बाद उन्हें कांग्रेस द्वारा उपचुनावों के लिए प्रयवेक्षक नियुक्त किया गया। आश्रय ने प्रतिभा के लिए वोट मांगें ज़रूर मगर वो उपचुनावों में उतना एक्टिव नहीं दिखे। इस उपचुनाव में सदर मंडी से विधायक अनिल शर्मा के क्षेत्र से भाजपा को लीड मिली है। अनिल ने न तो भाजपा प्रत्याशी के लिए प्रचार किया और न ही वो मैदान में उतरे, बावजूद इसके उनके क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी को करीब तीन हज़ार की बढ़त मिली। जबकि मंडी संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाले दो मंत्रियों के गृहक्षेत्रों से भाजपा को लीड़ नहीं मिली है। चुनाव के दौरान अनिल शर्मा को भी सीएम जयराम ठाकुर ने पार्टी के लिए काम करने के लिए कहा था और उनके मान सम्मान को बरकरार रखने की बात कही थी। अब उपचुनाव के बाद आश्रय शर्मा के सीएम जयराम ठाकुर से मिलने के बाद कई कयास लग रहे है। हालांकि आश्रय इसे शिष्टाचार भेंट बता रहे है। बहरहाल ये तथाकथित शिष्टाचार भेंट भविष्य में क्या रंग लाती है, इसको लेकर चर्चा होना तो लाज़मी है।
वो दो नेता जो निष्ठावान सिपाही बने, पार्टी का झंडा तो बुलंद करते रहे मगर उनके मुताबिक़ बीते कुछ समय में उन्हें न तो मान मिला, न सम्मान। नौबत यहां तक आ गई कि दोनों को अपने पदों से इस्तीफे देने पड़े। हम बात कर रहे है भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष कृपाल परमार व पूर्व कार्यसमिति सदस्य पवन गुप्ता की। गुप्ता को डॉ राजीव बिंदल का करीबी माना जाता है और वे हालहीं में अनियमितताओ के चलते सुर्ख़ियों में आएं बघाट अर्बन कोआपरेटिव बैंक के चेयरमैन भी रहे है। इन दो नेताओं के इस्तीफों ने कहीं न कहीं ये साफ़ कर दिया कि भाजपा में कुछ ठीक नहीं चल रहा। हालांकि इनके इस्तीफे स्वीकार नहीं हुए और बाद में कृपाल परमार ने तो इस्तीफा वापस भी लिया और 26 नवंबर को कार्यसमिति की बैठक में शामिल भी हुए। दरअसल 2017 विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री का चेहरा बदलने से पश्चात ही कई भाजपाइयों के दिन फिर गए थे, तो कई हाशिये पर चले गए। अब तक तो ये नेता चुप्पी साधे हुए थे, मगर अब 2022 के नजदीक आते आते सब्र का बाँध टूटने लगा है, ये इन इस्तीफों से साफ़ दिखाई दे रहा है। इन दोनों नेताओं के इस्तीफों का कारण भी कुछ एक सा ही है। दोनों ने ही नज़रअंदाज़ किये जाने की बात कही। वहीं व्यापक तौर पर देखा जाएँ तो इन इस्तीफों के पीछे उपेक्षा तो बड़ा कारण माना जा रहा है, इसे प्रेशर पॉलिटिक्स के पैंतरे के तौर पर भी देखा जा रहा है। दरअसल उपचुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद जयराम सरकार और प्रदेश संगठन के खिलाफ विरोधियों को हमलावर होने का मौका मिला है। प्रेशर पॉलिटिक्स की बिसात पर स्पष्ट सन्देश दिया गया है कि एक वर्ग को उपेक्षित रखकर मिशन रिपीट का स्वपन साकार नहीं हो सकता। इस्तीफे के कारणों पर फर्स्ट वर्डिक्ट मीडिया ने इन दोनों से बातचीत की। कृपाल परमार के अनुसार उन्हें प्रायोजित तरीके से प्रताड़ित करवाया गया। तो पवन गुप्ता के अनुसार अफसरशाही सरकार पर हावी है और भ्रष्टचारियों को पनाह दे रही है। पेश है बातचीत के कुछ मुख्य अंश.... मैं प्रताड़ित होता रहा और मूकदर्शक बनें रहे संगठन और सरकार के मुखिया : परमार सवाल : इतने लम्बे समय से पार्टी के निष्ठावान सिपाही आप रहे है, अब अचानक ये इस्तीफा क्यों ? जवाब : पार्टी का निष्ठावान सिपाही होने के बावजूद लगातार मुझे प्रताड़ित किया जा रहा था, संगठन द्वारा भी और सरकार द्वारा भी। मैंने अपनी भावनाओं को, अपनी बात को पार्टी के हर स्तर पर रखने की कोशिश की, पर उसका कोई समाधान नहीं निकला। छोटे- मोटे कार्यकर्ताओं द्वारा भी विभिन्न तरीकों से मुझे प्रताड़ित करवाया गया। मैंने चीज़ें ठीक करने की बहुत कोशिश की, अंत तक चुप चाप सहता रहा पर जब चीज़ें नियंत्रण से बाहर हो गई तो मुझे ये इस्तीफ़ा देना पड़ा। सवाल : आप कह रहे है कि आपकी प्रताड़ना हुई, आपको ज़लील किया गया, ऐसे क्या वाक्य हुए जो आज आपको ये कहना पड़ रहा है ? जवाब : पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा बहुत सुनियोजित तरीके से बनाई गई रणनीति के तहत कुछ लोगों को हमारे पीछे लगा दिया गया। ऐसे लोग मेरे फेसबुक पर गलत और अभद्र कमैंट्स करते थे। मेरे साथ बुरा बर्ताव करते थे। मैंने कई बार पार्टी से उनकी शिकायत की लेकिन पार्टी खुद ही उन्हें प्रोटेक्ट करती रही। उनके खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर उन लोगों को पार्टी में प्रमोशन दिए गए। सवाल : हाल ही में हुए उपचुनाव में जिस तरह से आपका टिकट काटा गया या उसके अलावा जो भी आपके साथ हुआ इसका ज़िम्मेदार आप किसे मानते है ? क्या कोई व्यक्ति विशेष इसका ज़िम्मेदार है ? जवाब : मैं पिछले 35 सालों से पार्टी के लिए काम कर रहा हूँ। 1982 से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से मैं जुड़ा रहा हूँ। इसके बाद भाजपा युवा मोर्चा में मैने अपनी सेवाएं दी है और पिछले 22 -23 साल से में प्रदेश भाजपा का पदाधिकारी हूँ। 3 बार मैं प्रदेश का महामंत्री रहा हूँ और अभी प्रदेश का उपाध्यक्ष था। किसान मोर्चा का भी मैं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुका हूँ। राज्यसभा का सांसद भी मैं रह चूका हूँ। पार्टी का ऐसा कोई कार्य नहीं है जो मैंने नहीं किया परन्तु फिर भी मेरी अनदेखी हुई। इस सब के पीछे कई लोगों की मिली भगत है, ये सिर्फ किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है। सवाल : आपने ऐसे वक्त पर इस्तीफ़ा दिया जब प्रदेश में कार्यसमिति की बैठक होने वाली थी। ऐसा क्यों ? जवाब : 2017 में मैंने फतेहपुर से चुनाव लड़ा। कुछ लोग नहीं चाहते थे की मैं ये चुनाव लड़ूँ। कहीं न कहीं मैं उन लोगों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ था। हमारी रैलियों को जान बुझ कर खराब करने की कोशिश की गई। फिर एक कार्यकर्त्ता द्वारा हमें ज़लील करवाया गया, एक मंत्री ने हमारी प्रताड़ना की। ये सभी चीज़ें हमने सरकार और संगठन के सामने रखी, परन्तु फिर भी सरकार का मुखिया और संगठन का मुखिया मूकदर्शक बन कर देखते रहे। मेरे इस्तीफे की टाइमिंग प्लैन्ड नहीं थी, जब स्थिति बर्दाश्त के बाहर हो गई तो हमें इस्तीफ़ा देना पड़ा। सवाल : आपको पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल का करीबी माना जाता है, आपके अलावा एक अन्य कार्यसमिति के सदस्य ने भी इस्तीफ़ा दिया है। भाजपा में ये इस्तीफ़ा पॉलिटिक्स क्या किसी पोलिटिकल स्ट्रेटेजी के तहत शुरू हुई है ? जवाब : देखिये मैंने धूमल जी के साथ भी काम किया है और शांता जी के साथ भी। मैंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जगत प्रकाश नड्डा जी के साथ की है और केंद्र में मैंने नरेंद्र मोदी जी के साथ भी काम किया है। मैं काम करने वाला कार्यकर्ता हूँ, मैं सभी का करीबी हूँ किसी एक का नहीं। ये इस्तीफ़ा मेरा व्यक्तिगत इस्तीफ़ा है, इससे किसी और का कोई भी लेना देना नहीं है। भ्रष्टाचारियों को पनाह दे रही अफसरशाही : पवन गुप्ता सवाल - आपने हाल ही में पद से इस्तीफा दिया, क्या कारण रहे? जवाब - मैं चालीस सालों से भारतीय जनता पार्टी का सच्चा सिपाही रहा हूँ। पार्टी की नींव मजबूत करने के लिए मैंने जितना हो सकता था उतना प्रयास किया। मैं नगर परिषद सोलन में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर भी रह चुका हूँ और इसके अलावा 15 साल तक बघाट अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन पद पर भी रह चुका हूँ। मैं भाजपा कार्यकारी समिति का सदस्य व जिला सिरमौर का प्रभारी भी था। किन्तु बीते छह माह से यह महसूस हो रहा था कि जो अफसरशाही है वो सरकार पर हावी हो गयी है। मैं पुनः ध्यान में लाना चाहता हूँ कि हमने कुछ भ्रष्टचारियों के चेहरे बेनकाब करने के लिए जाँच करवा के जाँच रिपोर्ट सबमिट कर दी और उनको ससपेंड भी कर दिया था, लेकिन तीन दिन के अंदर उन्हें किसी वजह से रिवॉक किया गया। खैर, हम इस मामले को हाई कोर्ट ले गए, हाई कोर्ट में मामला लंबित है और यह छठीं मर्तबा है जब हमें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। यदि सरकार मदद करती तो आज हमे कोर्ट जाने की नौबत नहीं आती। इसके अलावा मैं बताना चाहूंगा कि सीएमओ ऑफिस में भी एक उच्च अधिकारी है जिसने दोषियों को बचाने का पूरा प्रयास किया है। मुझे दुखी मन से यह कहना पड़ रहा है कि जिस मामले को हमने सरकार व संगठन के सामने उजागर किया हमे वहाँ से भी कोई सहयोग नहीं मिला। अफसरशाही हावी हुई और मेरा बैंक चुनाव के नामकंन को भी रद्द कर दिया गया। मुझे हर सम्भव नीचा दिखाने का प्रयास किया जा रहा था। यही कारण है कि इस प्रताड़ना को मैं सहन नहीं कर पाया और अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। सवाल- क्या आपके कहने का यह तात्पर्य है कि सरकार दोषियों को पनाह दे रही है ? जवाब - दोषियों को अफसरशाही पनाह दे रही है। बस यह बात सही है कि संगठन व सरकार को हर बात मालूम है, इसके बाद भी आज कोई कार्यवाही सही तरीके से अमल में नहीं लायी गयी। इतनी बार बैंक से जुड़े इस मामले को उठाने के बाद भी कोई सहायता नहीं की गयी और दोषी व अफसरशाही अपने गलत मंसूबे पर कामयाब हुए। लेकिन मामला हाई कोर्ट में है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि बैंक के हित में ही फैंसला आएगा। सवाल- आप अफसरशाहों पर आरोप लगा रहें है। क्या आपको लगता है कि सरकार की अफसरों पर पकड़ नहीं है ? जवाब - मैं आज खुद को बहुत असहाय महसूस कर रहा हूँ। जब करप्शन बढ़ता है तो उसके जड़ें भी कई जगह तक जाती है और उसके सामने जो लोग ईमानदार होते है वो बोने हो जाते है, मैं इतना ही कहना चाहूंगा। सवाल - आप डॉ राजीव बिंदल को अपना गुरु मानते है, इस्तीफे से पहले क्या आपने उनसे मशवरा लिया था ? जवाब- डॉ बिंदल मेरे सहपाठी है और मेरे गुरु भी। डॉ बिंदल हर छोटे बड़े कार्यकर्ता से सीधा संवाद करते है। वो कद्दावर नेता है और वो प्रदेश स्तर के नेता है। मुझे लगता है कि मुझ जैसे छोटे से कार्यकर्ता को अपनी हर छोटी बड़ी बात उनसे साँझा करना पड़े, यह शोभा नहीं देता और यह जो इस्तीफे का कारण है यह मेरे दिल को लगी ठेस का नतीजा है। इसलिए इस मामले में मैंने अपनी गरिमा की लड़ाई खुद लड़ना उचित समझा। मुझे पद की लालसा नहीं है, मैं भाजपा का सच्चा सिपाही हूँ और पार्टी को मजबूत करने के लिए हमेशा आगे रहूँगा।
हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रयास से भारतीय खाद्य निगम ने धान खरीद को लेकर दो लाख क्विंटल का आंकड़ा पार कर लिया है। प्रदेश में एफसीआई द्वारा 9 खरीद केंद्रों पर कृषि उपज विपणन समिति के माध्यम से किसानों का धान खरीदा जा रहा है। विशेष बात यह है कि प्रदेश के किसानों से खरीदे गए धान का भुगतान भी 24 घंटे के भीतर ही करवाया जा रहा है। प्रदेश के करीब चार हजार किसानों को सीधे-सीधे लाभ पहुंचाते हुए उनके खातों में लगभग 38 करोड़ रुपए से अधिक की राशि हस्तांतरित की जा चुकी है। बता दें कि 15 अक्तूबर, 2021 से धान खरीद का कार्य सिरमौर, ऊना, कांगड़ा और सोलन जिला के विभिन्न खरीद केंद्रों पर प्रारंभ किया गया है। सिरमौर जिला में हरिपुर-टोहाना, काला अंब व पीपलीवाला, ऊना जिला में टकराला मंडी और टाहलीवाल, कांगड़ा जिला में फतेहपुर मंडी व इंदौरा स्थित त्योराह तथा सोलन जिला में नालागढ़ मंडी और मालपुर में यह खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से 24 नवम्बर, 2021 तक लगभग 2,14,311.95 क्विंटल धान की खरीद की जा चुकी है और इससे लगभग 4,474 किसानों को लाभ पहुंचा है। आंकड़ों के अनुसार सिरमौर जिला में अभी तक लगभग 1,01,808.78 क्विंटल, ऊना जिला में लगभग 19,612.16 क्विंटल, कांगड़ा जिला में लगभग 51,685.50 क्विंटल और सोलन जिला में लगभग 41205.52 क्विंटल धान की खरीद की गई है।
छोटी काशी मंडी में विकास को नये आयाम देने वाले भव्य-दिव्य शिव धाम का काम जोरों पर चल रहा है। मंडी के कांगणीधार में साढ़े नौ हेक्टेयर क्षेत्र में 150 करोड़ रुपये से बन रहा दिव्य शिवधाम भव्यता में किसी अजूबे से कम नहीं होगा। पहले चरण के काम पर 40 करोड़ रुपये खर्चे जा रहे हैं। इसमें पहाड़ी की कटिंग और जमीन को समतल बनाने के अलावा मंदिरों के स्तंभ खड़े का काम तेजी से चल रहा है। शिवधाम के प्रथम चरण का कार्य सितंबर 2022 से पहले पूरा कर लिया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से देश-दुनिया में मंडी धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से उभरेगा और दुनियाभर के पर्यटकों के लिए मंडी में पर्यटन गंतव्य का नया स्वरूप देखने को मिलेगा। बता दें, मुख्यमंत्री ने इस ड्रीम प्रोजेक्ट शिवधाम का 27 फरवरी, 2021 को मंडी में शिलान्यास किया था। उन्होंने इस सौगात से छोटी काशी मंडी को धार्मिक पर्यटन के आकर्षण का केंद्र बनाने का सपना साकार किया है। मंडी में शिव धाम से विकास को नए आयाम मिलेंगे। इस परियोजना से लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे। भव्य दिव्य शिव धाम, बेजोड़ होगा स्वरूप पर्यटन विभाग मंडी के उपनिदेशक एस.के.पराशर शिवधाम के स्वरूप की जानकारी देते हुए बताते हैं कि शिवधाम में प्रवेश के लिए कैलाश द्वार होगा। यहां श्रीगणेश मंडल के भी दर्शन होंगे, जिसमें भगवान गणेश की भव्य प्रतिमा स्थापित होगी। इसके अलावा गंगा कुंड होगा, शिव वंदना के नाम से ओरिएंटेशन सेंटर होगा। रुद्रा मंडल और डमरू मंडल होगा, जहां भगवान शिव के डमरू के दर्शन और डमरू मंडल के पास खाने पीने की वस्तुएं भी मिलेंगी। मानसरोवर कुंड, मोक्ष पथ, बिल्वपत्र कुंड, शिवस्मृति म्यूजियम तथा एक बड़ा शिवलिंग भी स्थापित होगा जिसे चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग से ही पर्यटक दूर से देख कर आकर्षित होंगे। वहीं शिवधाम में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन भी करवाए जाएंगे और भगवान शिव के साथ माता पार्वती, कार्तिकेय और गणेश भगवान की प्रतिमाएं भी होंगी। इसके अलावा यहां हर्बल गार्डन, नक्षत्र वाटिका, एमफी थियेटर होगा और सैकड़ों गाड़ियों के लिए पार्किंग सुविधा होगी। भोले की नगरी में शिव धाम की सार्थकता शैव मत से प्रभावित इस पहाड़ी रियासत की आधुनिक राजधानी की स्थापना बाबा भूतनाथ के मंदिर के निर्माण के साथ ही हुई है। इसके अलावा शिव नगरी मंडी में त्रिलोकीनाथ, महामृत्युंजय, पंचवक्त्र, अर्धनारीश्वर, नीलकंठ, शिव शंभू महादेव, एकादश रुद्र महादेव, रुद्र महादेव आदि अनेक शिव मंदिर हैं, जो बाबा भूतनाथ की नगरी को छोटीकाशी के रूप में पहचान दिलाते हैं। अब 12 ज्योतिर्लिंगों वाले शिवराम की स्थापना से छोटी काशी पर्यटन के मानचित्र पर नए आयाम स्थापित करेगी।
हिमाचल सरकार द्वारा बेटियों के विवाह पर प्रदान खुशियों के शगुन से प्रदेश के गरीब परिवारों में खुशहाली की मधुर धुन बज रही है। हिमाचल सरकार शगुन योजना के तहत गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह पर 31 हजार रुपये दे रही है। इसी कड़ी में मंडी जिले की सैंकड़ों लाभार्थियों ने भी गरीबों की मदद को चलाई शगुन योजना के लिए मुख्यमंत्री का तहेदिल से धन्यवाद किया है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा चलाई शगुन योजना से गरीब परिवारों की मदद हो रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग मंडी की जिला कार्यक्रम अधिकारी अंजु बाला ने बताया कि सरकार ने शगुन योजना इसी साल अप्रैल में शुरू की है। पहले साल में मंडी जिला के लिए 2 करोड़ का बजट दिया गया है। जिले में अब तक 361 लाभार्थियों को लगभग 1.12 करोड़ रुपये आबंटित किए जा चुके हैं। शगुन योजना से हमारी चिंताएं हुई खत्म:अभिभावक शगुन योजना की लाभार्थी पधर की चैहड़ गलू पंचायत के समखेतर गांव की दिशा कुमारी की शादी जुलाई 2021 में कोटरोपी में हुई है। उनके पिता ड्राइवरी करते हैं। दिशा की मां देवकी देवी का कहना है कि गरीबों की बेटियों को शादी पर 31 हजार का शगुन देकर मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर बड़े पुण्य का काम कर रहे हैं। बकौल देवकी ‘हम बड़े गरीब परिवार के हैं, बेटी की शादी के लिए पाई-पाई करके पैसे जोड़े थे, पर मन में चिंता थी कि गरीब मां बाप बेटी को शगुन में क्या दे पाते। सरकार ने 31 हजार का शगुन देकर हमारी वो चिंता हर ली।‘ शगुन योजना की एक और लाभार्थी पधर की डलाह पंचायत के रोहाना गांव की नैना देवी कहती हैं कि शगुन योजना में मिले 31 हजार से उनके परिवार को बड़ी मदद हुई है। साल 2021 के अप्रैल में उनकी शादी गडू्हीं गांव में हुई है। पति नालागढ़ में प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। नैना के पिता रमेश कुमार मिस्त्री का काम करते हैं। घर में माता-पिता,नैना और उनकी एक बहन और एक भाई हैं। रमेश कुमार बताते हैं कि रोहाना की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मीना देवी ने उन्हें शगुन योजना के बारे में बताया। बेटी की शादी के तुरंत बाद सीडीपीओ कार्यालय में आवेदन किया था और अब उनके खाते में 31 हजार रुपये आ गए हैं। पधर के ही शिंगार गांव की अंकिता की शादी जुलाई, 2021 में हुई है। उनके पिता दिहाड़ी-मजदूरी करते हैं। अंकिता की मां जैवंती देवी बताती हैं बेटी की शादी के बाद उन्होंने शगुन योजना में मदद के लिए अप्लाई किया। इसमें 31 हजार सीधे बैंक खाते में आए। इसे उन्हें बड़ा सहारा मिला है। ये शगुन बेटी के भविष्य के लिए काम आएगा। ऐसे करें आवेदन हिमाचल सरकार ने पहली अप्रैल, 2021 सेे शगुन योजना शुरू की है। इसमें प्रदेश के गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह पर 31 हजार रुपये का शगुन सरकार की ओर से प्रदान किया जाता है। शगुन की यह राशि बेटी की हिमाचल से बाहर शादी करने पर भी दी जाती है। योजना का लाभ लेने को शादी से दोे महीने पहले से लेकर शादी के बाद 6 महीने के भीतर आवेदन किया जा सकता है। धनराशि सीधे आवेदक के बैंक खाते में डाली जाती है। योजना के लाभ के लिए लड़की की उम्र 18 साल या इससे अधिक एवं वर की 21 साल या इससे ज्यादा होनी चाहिए। योजना का लाभ लेने को नजदीकी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, बाल विकास परियोजना कार्यालय अथवा जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय में संपर्क कर निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन किया जा सकता है। क्या कहते हैं जिलाधीश जिलाधीश मंडी अरिंदम चौधरी ने कहा कि हिमाचल सरकार की शगुन योजना जिले में गरीब परिवारों की बेटियों के लिए बड़ी मददगार बनी है। हमारा प्रयास है कि योजना का लाभ सभी पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग जिले में पूरे समर्पण से काम कर रहा है।
भविष्य में चीड़ की पेड़ों से गिरी हुई पत्तियाँ परेशानी नहीं बनेगी बल्कि इसे ईंधन बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। डॉ यशवंत सिंह परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्याल, नौणी के बेसिक साइन्स विभाग के वैज्ञानिक पिछले करीब दो वर्षों से इस विषय पर अनुसंधान कर रहे है। अब तक गन्ना व चावल से इथनॉल तैयार होता है। विश्वविद्यालय के विज्ञानियों का कहना है कि इस तकनीक को भविष्य में पराली पर भी इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक के विकसित होने से एथनाल बनाने के लिए खाद्य पदार्थों पर निर्भरता कम हो जाएगी। विवि के पीआरओ सुचेत अत्री ने बताया कि वर्तमान में एथानॉल गन्ना, चावल आदि जैसे खाद्य प्रदार्थों से बनाया जाता है। जबकि इस परियोजना में जैविक अपशिष्ट का इस्तेमाल कर इथनॉल बनाने पर महत्वपूर्व कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में अब तक इस अप्रयुक्त वन अपशिष्ट से ईंधन ग्रेड इथेनॉल का उत्पादन करने के लिए एक नई तकनीक विकसित करने का काम पूरा किया जा चुका है। यह है इथनोल बनाने की प्रक्रिया इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से विशेष माइक्रोब का इस्तेमाल कर प्रतिरोधी पत्तियों को घोल दिया जाता है और इसका किण्वन(जैव-रासायनिक क्रिया) का मानकीकरण कर इथेनॉल में बदल दिया जाता है। भारत सरकार की वर्ष 2025 तक वाहनों को चलाने के लिए पेट्रोल में 20% इथेनॉल का सम्मिश्रण पर स्विच करने के लक्ष्य से इस परियोजना को आने वाले भविष्य में अधिक मांग वाली नवीन प्रौद्योगिकी के रूप में देखा जाएगा। हिमाचल सरकार ने भी अभी हाल ही में एक इथनॉल प्लांट लगाने का निर्णय लिया है। विवि के इस अनुसंधान से चीड़ की पत्तियों का पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन का मार्ग मिलेगा और यह न केवल इस जैविक अपशिष्ट के उचित निपटान में मदद करेगा बल्कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी योगदान देगा क्योंकि एथानॉल बनाने के लिए खाद्य पदार्थों पर निर्भरता कम हो जाएगी। कोविड -19 महामारी के कारण इस परियोजना की प्रगति पर असर पड़ा है। बावजूद इसके जीबीपंत राष्ट्रीय संस्थान के निदेशक द्वारा इस प्रोजेक्ट में किए जा रहे कार्य की सराहना की गई है। परियोजना के अंतिम वर्ष में इस नवीन प्रौद्योगिकी को सफलतापूर्वक उद्योग में स्थानांतरित करने के लिए वित्त पोषण एजेंसी के साथ प्रौद्योगिकी के सत्यापन पर कार्य किया जाएगा। दो चरण की है प्रक्रिया इस माध्यम से एथनाल प्राप्त करने के लिए दो चरणों की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। पहले चरण में पत्तियों को सूक्ष्मजीवों की मदद से तोड़कर सेल्यूलोज (कार्बोहाइड्रेट) अलग किया जाता है और शुगर की फार्म में लाया जाता है। दूसरे चरण में शुगर से इथनॉल बनाया जाता है। यह इथेनाल वैसा ही होगा जैसा चावल व गन्ने से तैयार किया जाता है। विश्वविद्यालय के निदेशक, अनुसंधान डा. रविंद्र शर्मा ने बताया कि आने वाले वर्षों में इथनॉल का ईंधन के तौर पर उपयोग महत्वपूर्ण होता जाएगा। यह प्रदूषण कम करने मे भी सहायक होगा। प्रदूषण नियंत्रण में सहायक है इथनॉल इथनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है। इथनॉल के इस्तेमाल से वाहन से कार्बन मोनोआक्साइड उत्सर्जन 35 फीसद कम होता है। यह सल्फर डाइआक्साइड को भी कम करता है। इसमें 35 फीसद आक्सीजन होती है और इससे नाइट्रोजन आक्साइड उत्सर्जन में कमी आती है। इथनॉल को पेट्रोल में मिलाकर गाडिय़ों में ईंधन की तरह प्रयोग किया जा सकता है। इथेनॉल के लिए तीन प्लांट मंजूर बाईट कुछ माह पूर्व केंद्र सरकार की तरफ से हिमाचल प्रदेश के लिए इथेनॉल के 3 प्लांट मंजूर हुए हैं। इससे प्रदेश में 600 करोड़ रुपए का निवेश होगा। इसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से हिमाचल प्रदेश की 3 कंपनियों को शॉर्ट लिस्ट किया है। इस प्लांट को लगाए जाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से नई गाइडलाइन जारी की गई है। इसके तहत कंपनी को 5 फीसदी का शेयर ही लगाना होगा, जबकि शेष 95 फीसदी की फंडिंग बैंक से लिए जाने वाले ऋण से होगी। केंद्र सरकार की ओर से देश के 4 राज्यों के लिए इस तरह के पलांट मंजूर किए गए हैं, जिनमें से हिमाचल भी शामिल है। हिमाचल प्रदेश में 2 प्लांट कांगड़ा जबकि 1 प्लांट सोलन जिले में स्थापित किया जाएगा। इसमें से पहले प्लांट की क्षमता 1250 किलोलीटर, दूसरे की 150 किलोलीटर और तीसरे की क्षमता 200 किलोलीटर प्रतिदिन होगी। इससे प्रदेश में युवाओं को सीधे तौर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। सुलगते जंगलों से मिली शोध की प्रेरणा विश्वविद्यालय के बेसिक साइंस विभाग की अध्यक्ष डा. निवेदिता शर्मा इस परियोजना की मुख्य अन्वेषक हैं। अनुसंधान कार्य में रिसर्च एसोसिएट डा. निशा शर्मा ने भी साथ दिया। डा. निवेदिता ने बताया कि वह दो साल से इस पर शोध कर रही हैं। वनों की आग की घटनाओं से चिंतित होकर उन्हेंं शोध की प्रेरणा मिली, क्योंकि वनों की आग का एक बड़ा कारण नीचे गिरी चीड़ की पत्तियां भी हैं। उनका कहना है कि वह पेट्रोलियम पदार्थों के दोहन विषय पर भी कई कार्यशालाओं में भाग ले चुकी हैं, वहां से भी काफी प्रेरणा मिली।
चोखणा धार में जल जीवन मिशन के तहत पेयजल योजना का निर्माण किया जा रहा है जिसका लगभग 90 कार्य पूरा हो चुका है तथा शीघ्र इसका लोकार्पण कर दिया जाएगा। इस योजना पर 10 करोड़ 10 लाख रुपये खर्च किये जा रहे है। इस योजना से डंगार, दधोल, पडयालग, सेऊ तथा कसारू पंचायतों के हजारों लोगों को इसका लाभ मिलेगा। इस योजना के लिए सीर खड्ड से पानी उठाया जाएगा। इसके अतिरिक्त इस योजना के अंतर्गत चोखणा, छंदोह, छंजयार, मरयानी, पन्याली व जसवानी गांवों को भी जोड़ा जा रहा है ताकि योजना से लोगों को इसका लाभ शीघ्र मिल सके। इससे लोगों को गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत से भी राहत मिलेगी। कैबिनेट मंत्री राजेंद्र गर्ग ने कहा कि शुद्ध व पर्याप्त जल उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार वचनबद्ध है। उन्होंने बताया कि इन पंचायतों के लोगों को पीने के पानी के लिए माकन खड्ड सहित अन्य पानी के स्रोतों से पेयजल योजनाएं बनाई गई थी जो गर्मियों के मौसम में सूख जाती थी। इससे लोगों को गर्मियों के मौसम में पानी की किल्लत बढ़ जाती थी। इस योजना के तहत सीर खड्ड से अलग-अलग स्थानों पर टैंको में पानी डाला जाएगा। जबकि पुराने स्रोतों से भी पानी की बहाली पहले की भांति बनी रहेगी। जिससे लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी मिलता रहे। उन्होंने बताया कि छंजयार गांव के पुराने तालाब का शीघ्र ही जीर्णोद्धार किया जाएगा ताकि यहां के किसानों व पशुओं के लिए पानी की सुविधा बनी रहे। उन्होंने बताया कि छंजयार में 4 लाख रुपये की राशि से सामुदायिक भवन का निर्माण किया जा रहा है। भवन के निर्माण को पूर्ण करने के लिए आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त राशि उपलब्ध करवा दी जाएगी।
प्रदेश सरकार द्वारा 8 जिला मुख्यालयों में सड़क व अन्य ढांचागत विकास परियोजना आरम्भ की जा रही है। परियोजना के अंतर्गत भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बिलासपुर शहर को विकसित किया जाएगा। बीते दिनों यह जानकारी उपायुक्त बिलासपुर पंकज राय ने इस सम्बन्ध में 449 करोड़ रुपये की परियोजना की ड्राफ्ट रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए दी। इस हेतु हिमाचल प्रदेश सड़क व ढांचागत विकास काॅपरेशन द्वारा एलएनटी इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग कम्पनी को अधिकृत किया गया है तथा अंतिम कार्यसूची रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। कम्पनी द्वारा इस सम्बन्ध में कार्यसूची रिपोर्ट प्रस्तुत की गई जिसमें परियोजना के अंतर्गत लिए जाने वाले विभिन्न कार्यों के बारे में चर्चा की गई। बैठक में कम्पनी के अधिकारियों ने परियोजना की विस्तृत कार्यसूची के बारे में प्रस्तुति दी। बैठक में नगर निगम बिलासपुर के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व पार्षद तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा इस सम्बन्ध में दिए गए सुझावों को अंतिम ड्राफ्ट रिपोर्ट में सम्मिलित किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत शहर के अंदर विभिन्न सड़कें, एम्बुलैंस रोड़, ईको पार्क रोड़, नालों का तटीयकरण, पार्किंग, मूलभूत जन सुविधाओं आदि को विकसित किया जाएगा। परियोजना में बिलासपुर शहर व एम्स में ई-बस व ई-वैन सुविधा, विद्युत व संचार के केबल के लिए डक्टिंग का प्रस्ताव, चैक के सुधार आदि को शामिल किया जाएगा। विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों पर वाहनों के आवागमन को ध्यान में रखते हुए नए विकास के लिए पांच प्रमुख ऑफ स्ट्रीट पार्किंग सुविधाएं प्रस्तावित हैं। परियोजना के अंतर्गत शहर में लुहणू क्रिकेट ग्राउंड के समीप, चेतना चौक के समीप, गुरुद्वारा चौक के समीप, धौलरा मंदिर के समीप नई पार्किंग विकसित की जाएगी। शहर में स्ट्रीट लाईटों के लिए पोल के स्थान पर ब्रेकिट का प्रयोग किया जाएगा जिसे लोगों की सहमति से उनके घरों में लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि गुरूद्वारा चैक, वाॅर मैमोरियल, पूर्णम माॅल, नाला का नौण सड़क आदि क्षेत्रों के साथ-साथ विभिन्न पैदल रास्तों को भी परियोजना के अंतर्गत विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि परियोजना में जन सुविधाएं, अग्नि हाइड्रेंट प्वाइट, पार्क, प्ले ग्राउंड, फुट ओवर ब्रिज तथा व्यवसायिक माल डुलाई वाहनों की पार्किंग आदि को विकसित किया जाएगा।
जनजातीय क्षेत्र में विकास की गति धीमी न हो इसके लिए प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है। प्रदेश मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बीत दिनों जिला किन्नौर प्रवास के दौरान किन्नौर वासियों को करोड़ो की सौगात दी। उन्होंने 77 करोड़ रुपये लागत की 31 विकास परियोजनाओं के शिलान्यास एवं लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय ठाकुर सेन नेगी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वह न केवल एक महान प्रशासक और नेता थे, बल्कि जनजातीय संस्कृति के प्रमुख संवाहक भी थे। उन्होंने कहा कि यहां स्थापित संग्रहालय को और सुदृढ़ करने के लिए प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने प्रशासनिक कार्य प्रणाली को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जिला मुख्यालय में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी का एक पद सृजित करने की घोषणा की। किन्नौर में शोब्रांग में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने की घोषणा की गई है। इसके अतिरिक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भावानगर का दर्जा बढ़ाकर इसे नागरिक अस्पताल करने और राजकीय उच्च पाठशाला पानवी का दर्जा बढ़ाकर इसे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला करने की घोषणा की गई है। पटवार वृत्त कनम को तहसील पूह से हटाकर तहसील मुरंग के अधीन लाया जाएगा। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सांगला तहसील की ग्राम पंचायत सपनी में 1.43 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पेयजल आपूर्ति योजना सापनी के चरण 1 से 4 के संवर्धन कार्य का शुभारंभ, बटसेरी सम्पर्क सड़क पर बस्पा खड्ड पर 1.30 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 170 फीट लंबे बेलीपुल, शांगों गांव की सम्पर्क सड़क पर भाबा खड्ड पर 5.25 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 160 फीट लंबे बेली पुल, 3.18 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित टापरी (छोल्टू) पुनंग सड़क, 24 लाख रुपये की लागत से निर्मित उप-स्वास्थ्य केंद्र रूनाग, क्षेत्रीय अस्पताल रिकांपिओं में सामुदायिक सामाजिक जिम्मेवारी (सीएसआर) के अंतर्गत 92 लाख रुपये की लागत से स्थापित 250 एलएमपी क्षमता के पीएसए ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट, ग्राम पंचायत रिस्पा में 63 लाख रुपये की लागत से निर्मित पेयजल योजना स्किबा, मुरंग तहसील की ग्राम पंचायत रारंग में रारंग, खादरा स्वादेन और शिलापुर गांव के लिए 68 लाख रुपये की लागत से निर्मित पेयजल आपूर्ति योजना का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने निचार तहसील की ग्राम पंचायत रमनी में 83 लाख रुपये की लागत से पेयजल आपूर्ति योजना सोलब्रे से फ्राचीतंग के री-माॅडलिंग कार्य, एकलव्य आदर्श आवासीय पाठशाला निचार के लिए 99 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाली पेयजल आपूर्ति योजना, निचार एवं एकलव्य आदर्श पाठशाला निचार के लिए 11.46 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली मल निकासी योजना, निचार तहसील की छूटी हुई बस्ती मीरू के लिए 53 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाली पेयजल आपूर्ति योजना, निचार तहसील की ग्राम पंचायत बाड़ी में पेयजल आपूर्ति योजना बाड़ी के 1.47 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले री-माॅडलिंग कार्य, निचार तहसील की ग्राम पंचायत रूपी में 1.17 करोड़ रुपये की पेयजल आपूर्ति योजना रूपी, ग्राम पंचायत रूपी में 1.23 करोड़ रुपये की उठाऊ पेयजल आपूर्ति योजना गुरगुरी (मझगांव), ग्राम पंचायत मीरू में पेयजल आपूर्ति योजना चाओलिंग के 1.11 करोड़ रुपये के री-माॅडलिंग कार्य, निचार तहसील ग्राम पंचायत यांगपा में पेयजल आपूर्ति योजना भाबा घाटी के 2.38 करोड़ रुपये के री-माॅडलिंग कार्य, निचार तहसील की ग्राम पंचायत चगौन में पेयजल आपूर्ति योजना चगौन के 1.02 करोड़ रुपये के संवर्द्धन कार्य एवं एफएचटीसी के शेष घरों को पेयजल कनेक्शन प्रदान करने, कल्पा तहसील की ग्राम पंचायत खवांगी में खवांगी, उद्योग केंद्र से नीचे की ओर स्थित बस्ती और शारबो के लिए 1.68 करोड़ रुपये की पेयजल आपूर्ति योजना, कल्पा तहसील की ग्राम पंचायत कोठी में छूटी हुई बस्ती कोठी और चुंगलिंग के लिए 1.37 करोड़ रुपये की पाईप पेयजल आपूर्ति योजना, ग्राम पंचायत किलबा में किलबा और लिंगे गांव के लिए 86 लाख रुपये की पेयजल आपूर्ति योजना और सांगला तहसील की ग्राम पंचायत युला में 86 लाख रुपये की प्रवाह सिंचाई योजना रिसूरो से कुनिंदे का शिलान्यास किया। जयराम ठाकुर ने रिकांगपिओ में 2 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले सतर्कता पुलिस थाना, रिकांगपिओ में 1.47 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले राजस्व सदन, रिकांगपिओ में 1.88 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले ई.वी.एम. भंडारण गृह, भाबानगर में 7.22 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले स्टेडियम, पूह तहसील की ग्राम पंचायत रोपा में प्रवाह सिंचाई योजना रकेन के 74 लाख रुपये के री-माॅडलिंग कार्य, पूह तहसील में 94 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले अकपा उप-मंडल के सहायक अभियन्ता कार्यालय एवं आवास, मुरंग तहसील की ग्राम पंचायत चारंग में 86 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाली प्रवाह सिंचाई योजना निचला बेबग्या, रिकांगपिओ में 6.85 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले सीए स्टोर तथा ग्याबोंग में 14.51 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले पैकिंग एवं ग्रेडिंग गृह की भी आधारशिला रखी। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय अस्पताल, रिकांगपिओ में दो पीएसए 250 एलपीएम ऑक्सीजन संयंत्रों का लोकार्पण भी किया।
पिछले छह वर्ष से गुर्दे की बीमारी से पीड़ित अमनदीप, अपने इलाज व डायलिसिस के खर्च के लिए हमेशा चिंतित रहते थे। छोटी सी दुकान चलाने वाले अमनदीप के घर में इलाज का खर्च हमेशा चर्चा विषय बनता था क्योंकि प्राइवेट अस्पताल का खर्च जेब पर भारी पड़ता था। इसी पशोपेश के बीच दो साल पहले अमनदीप को हिमाचल प्रदेश सरकार की हिमकेयर योजना की जानकारी मिली। आसानी से उन्होंने अपने परिवार का कार्ड बनाया और अब वह क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में आकर फ्री डायलिसिस करवा रहे हैं। अमनदीप ने कहा कि हम गरीबों के लिए हिमकेयर जैसी योजना सही मायनों में संजीवनी का काम कर रही है, जिसमें इलाज का खर्च सरकार देती है। हिमकेयर का कार्ड बनवाकर इलाज के लिए पैसों की चिंता खत्म हो गई है। अब हफ्ते में दो बार डायलिसिस फ्री में होता है और दवाई भी निशुल्क मिलती है। अमनदीप की ही तरह जिला ऊना में हजारों गरीब परिवारों के लिए हिमकेयर योजना वरदान बन गई है। बीपीएल परिवारों के लिए कोई प्रीमियम नहीं हिमकेयर योजना के बारे में उपायुक्त ऊना राघव शर्मा ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत अस्पताल में भर्ती होने पर 5 लाख रूपए के निःशुल्क इलाज की सुविधा का प्रावधान है। इस योजना के अंतर्गत प्रीमियम की दरें विभिन्न श्रेणियों के आधार पर तय की गई है। उन्होंने बताया कि गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) और पंजीकृत रेहड़ी फड़ी वालों से प्रीमियम नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त एकल नारी, 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग, 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी सहायिकाएं, आशा कार्यकर्ता, मिड डे-मील वर्कर, दिहाड़ीदार (सरकारी, स्वायत संस्थानों, सोसाइटी, बोर्ड एवं निगम के कर्मचारी), अंशकालिक कार्यकर्ता (सरकारी, स्वायत संस्थानों, सोसाइटी, बोर्ड एवं निगम के कर्मचारी) संस्थानों, एवं अनुबंध कर्मचारी से केवल 365 रूपए और इनके अतिरिक्त जो व्यक्ति नियमित सरकारी कर्मचारी या सेवानिवृत कर्मचारी नहीं हैं, वे 1000 रूपए देकर योजना के अंतर्गत कार्ड बनवा सकते हैं। योजना में सभी तरह की आम बीमारियों को शामिल किया गया है, जिसमें लगभग 1800 उपचार प्रक्रियाएं हैं, जिसकी शुरुआत 1 जनवरी 2019 को हुई थी। एक जनवरी 2022 से फिर शुरू होगा पंजीकरण सीएमओ ऊना डॉ. रमण कुमार शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार की हेल्थ केयर योजना हिमकेयर के कार्ड का पंजीकरण पहली जनवरी, 2022 से दोबारा शुरू होने जा रहा है, जो 31 मार्च तक चलेगा। उन्होंने सभी से इस योजना के लाभ उठाने की अपील की है। सीएमओ ने कहा कि लाभार्थी विभाग की वेबसाइट पर जाकर भी स्वयं पंजीकरण-नवीनीकरण कर सकते हैं। 13,897 मरीजों को मिला नया जीवन योजना के बारे में छठे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने बताया कि हिमकेयर योजना के तहत जिला ऊना में अब तक 38,831 परिवारों का पंजीकरण किया गया है। इनमें से 13,897 मरीजों का इलाज सरकार ने अपने खर्च पर कर उन्हें नया जीवन दिया है, जिस पर 7.86 करोड़ रुपए व्यय किए गए हैं। सत्ती ने बताया कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हिमकेयर योजना के माध्यम से गरीब व बीमार व्यक्ति को निशुल्क इलाज की सुविधा प्रदान की है, ताकि धन के अभाव को कोई भी व्यक्ति इलाज से वंचित न रहे। इस योजना से न सिर्फ जिला ऊना के बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के मरीज़ लाभ उठाकर अपना फ्री इलाज करा रहे हैं।
राज्य में किसी भी बीमार व्यक्ति को दवाईयों के लिए परेशान न होना पड़े इसके लिए राज्य सरकार द्वारा निःशुल्क दवा योजना के अन्तर्गत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार करवाने के लिए आने वाले मरीजों को दवाईयां निःशुल्क उपलब्ध करवाई जा रही हैं। राज्य सरकार द्वारा यह निःशुल्क दवाईयां प्रदेश के सभी मेडिकल काॅलेजों सहित सभी स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से उपलब्ध करवाई जा रही हैं। राज्य सरकार की ओर से प्रदेश के सभी राजकीय स्वास्थ्य संस्थानों में लगभग 1374 दवाईयां निःशुल्क उपलब्ध करवाई जा रही है। इनमें क्षेत्रीय अस्पतालों, सिविल अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में 885 दवाएं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर 417 और स्वास्थ्य उप-केंद्र स्तर पर विभिन्न बीमारियों की 72 दवाएं निःशुल्क उपलब्ध करवाई जा हैं। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अभी तक निःशुल्क दवा योजना के अन्तर्गत राजकीय स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को अब तक 16,29,425 दवाइयों का वितरण विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से किया गया है। इस पहल के तहत एक अप्रैल, 2021 से नवम्बर माह तक जहां 10,63,153 दवाईयां विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों, स्वास्थ्य शिविरों, आंगनवाड़ी जनमंच आदि के माध्यम से वितरित की गई है। वहीं, इससे पहले प्रदेश भर में विभिन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में 5,66,272 दवाएं वितरित की जा चुकी हैं। राज्य सरकार द्वारा आम जनमानस को राजकीय स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क दवाईयां उपलब्ध करवाने के लिए पर्याप्त बजट भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा अब तक आवश्यक दवाओं की खरीद पर लगभग 216 करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई है। राज्य सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि स्वास्थ्य संस्थानों में बीमार व्यक्तियों को उपचार संबंधी दवाइयां निर्बाध रूप से मिलती रहे, इसके लिए समय-समय पर सभी आवश्यक कदम भी उठाए जा रहे है। इन दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए खरीद प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और जिलों के सभी 12 मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, 4 चिकित्सा अधीक्षक, 6 चिकित्सा महाविद्यालय, 9 क्षेत्रीय अस्पताल, 3 जोनल अस्पताल को ई-औषधि पोर्टल के माध्यम से दवाओं की खरीद के लिए अधिकृत किया है। इनके द्वारा समय-समय पर आवश्यक दवाईयों के खरीद आदेश सक्रिय रूप से तैयार किए जा रहे हैं और सभी स्वास्थ्य संस्थानों में इन निःशुल्क दवाओं की आपूर्ति समय पर सुनिश्चित की जा रहीं है। मुख्यमंत्री के संवेदनशील एवं दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को सर्व सुलभ करने के लिए अनेक योजनाएं बनाई है। राज्य सरकार ने 216 करोड़ रुपये की राशि व्यय कर निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध करवा सभी को गुणवत्तायुक्त उपचार प्रदान करने की अद्वितीय पहल की है। इसके अलावा सहारा, हिम केयर जैसी योजनाओं से आज विशेषज्ञ स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त कर लोग लाभान्वित हो रहे हैं।
भाजपा में अपने पद से इस्तीफा देने पर कृपाल परमार ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की है। कृपाल परमार का कहना है कि पिछले 4 साल से लगातार पार्टी व सरकार द्वारा अनदेखा व प्रताड़ित किया जा रहा था जिसकी वजह से वह पूरी तरह आहत थे। इसकी शिकायत हाईकमान से भी की गई है। कृपाल परमार का ये भी कहना है कि वह पार्टी के सच्चे सिपाही हैं और पार्टी छोड़ कर कभी नहीं जाएंगे। सरकार व संगठन की प्रताड़ना से परेशान होकर ही उन्हें अपना इस्तीफा देना पड़ा। पार्टी में जलालत कुछ इस कदर बढ़ गई थी कि पद छोड़ना ही उचित समझा। कृपाल का कहना है कि प्रदेश में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ षड्यंत्र हो रहा है और षड्यंत्र रच कर ही वरिष्ठ नेताओं को जलील करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि पार्टी में वरिष्ठ नेताओं को नजर अंदाज करने की परंपरा शुरू हो गई है जो बहुत गलत है। कृपाल परमार का कहना है कि पार्टी में इस बारे में बोला जाता है तो कोई भी सुनता नहीं है। अंत में पद से इस्तीफा देना ही एक तरीका बच जाता है। अब न मुख्यमंत्री सुनते हैं, न ही संगठन मंत्री हमारी बात सुनते हैं और न ही प्रदेश में कोई और। उपचुनाव में टिकट आबंटन को लेकर कृपाल परमार ने संगठन व सरकार का भी घेराव किया है। परमार का कहना है कि सरकार व संगठन ने वोग्स सर्वे करके पार्टी हाईकमान को गलत सूचना दी, जिसके चलते पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे नेताओं की ड्यूटी उपचुनाव में लगा दी जिन्होंने पार्टी को नुक्सान पहुंचाया। हार के कारणों की जांच की जिम्मेदारी ऐसे लोगों को दे दी जो खुद हार का कारण थे। जो नेता खुद चुनाव के प्रभारी थे वे अपनी गलती हाईकमान को कहां बताएंगे। अपराधी को ही जांच का जिम्मा दे दिया जाएगा तो चोर कैसे पकड़ा जाएगा।
प्रदेश की राजनीति गरमाई हुई है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ी से चल रहा है। प्रदेश के हर नेता बेबाकी से अपना विचार व्यक्त कर रहे है। ऐसे में शिमला ग्रामीण विधायक विक्रमादित्य सिंह भी लगातार सरकर को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। हाल ही में विधायक विक्रमादित्य सिंह ने उपचुनाव में बीजेपी की हुई हार को लेकर सरकार पर तंज कसा है। विक्रमादित्य सिंह का कहना है कि प्रदेश में उपचुनाव के बाद सरकार की आंख और कान खुलने शुरू हो गए हैं। उनका कहना है कि प्रदेश में भाजपा सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है और अगले साल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी। विक्रमादित्य सिंह का कहना है कि उपचुनाव परिणाम से साफ है कि प्रदेश में लोग भाजपा की नीतियों से परेशान हैं। बढ़ती महंगाई व बेरोजगारी चिंता की बात है। सरकार ने किसी भी वर्ग के लिए कोई भी राहत नहीं दी है। विक्रमादित्य सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार ने किसानों के संघर्ष के बाद मजबूरी में कृषि कानून वापस लेने का निर्णय लिया है। यह जीत किसानों की है।
हिमाचल प्रदेश में उपचुनाव के बाद से ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ हो गई है। आने वाले 2022 के चुनाव भी नजदीक है और विपक्ष लगातार सरकार का घेराव कर रही है। बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी को लेकर डलहौजी से कांग्रेस विधायक आशा कुमारी भाजपा सरकार पर खूब हमला बोला है। आशा कुमारी का कहना है कि उपचुनाव में हिमाचल प्रदेश की चार सीटों पर कांग्रेस को जीत मिलने से भाजपा को पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने पड़े हैं। इसका मतलब है कि भाजपा जानबूझकर लोगों को परेशान कर रही है। आशा कुमारी का कहना है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनेगी। आशा कुमारी ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर भी निशाना साधा है। आशा कुमारी का कहना है कि कांग्रेस पार्टी में सीएम कौन होगा, यह पार्टी हाईकमान तय करेगा। अगर कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री बनने की बात हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की ओर से कर रहा है तो मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और भाजपा को किस बात की चिंता हो रही है। मुख्यमंत्री अपने कुनबे को संभाले जो बिखरा पड़ा है। आशा कुमारी का कहना है कि जो योजनाएं स्वर्गीय वीरभद्र सिंह ने चलाई थी, उनके शिलान्यास और उद्घाटन करने के बाद प्रदेश सरकार उन योजनाओं को अपनी योजनाएं गिना रहे हैं, जो अपने आप में शर्मनाक है। आशा कुमारी का कहना है कि 2022 में प्रचंड बहुमत के साथ कांग्रेस पार्टी की सरकार बनेगी यह तय हो गया है। साथ ही उनका कहना है कि कांग्रेस पार्टी में मुख्यमंत्री के सपने देखने वाले लोग पार्टी के ही हैं और पार्टी की नीति, नीयत और विचारधारा साफ है। आशा कुमारी ने मुख्यमंत्री को अपने बिखरे कुनबे को संभालने की नसीहत भी दी है।
प्रदेश में उपचुनाव में मिली जीत के बाद मुकेश अग्निहोत्री सरकार पर जमकर निशाना साध रहे है। मुकेश अग्निहोत्री का कहना है कि राज्य सरकार की कांगड़ा में कोई दिलचस्पी नहीं है और इस सरकार में कांगड़ा उपेक्षा का शिकार हुआ है। विकास का कोई भी बड़ा कार्य प्रदेश में नहीं हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा है कि वह प्रदेश में उनके कार्यकाल में हुए कोई चार बड़े कार्य बता दें। महंगाई चरम सीमा पर है। सरकारी कर्मचारियों से संबंधित करुणामूलक आधार पर नौकरियां, पुरानी पेंशन बहाली के अलावा आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए पॉलिसी बनाने, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर सरकार विफल रही है। कांग्रेस सरकार इन मुद्दों पर काम करेगी। मुकेश अग्निहोत्री का कहना है कि प्रदेश सरकार का डबल इंजन अब हांफ चुका है और यह अब रिपेयर के काबिल भी नहीं बचा है। उनका कहना है की जनता ने उपचुनावों में चारों सीटें कांग्रेस की झोली में डाल दी हैं। जयराम सरकार से अब लोग तंग आ चुके हैं। पहले टीके ने ही पेट्रोल-डीजल सस्ता कर दिया नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहाेत्री का कहना है कि सेमीफाइनल हारने वाली टीम फाइनल में नहीं पहुंच सकती ताे भाजपा फाइनल कैसे जीत सकती है। उपचुनावों में कांग्रेस पार्टी की बंपर जीत के बाद अब भाजपा का जाना तय है। मुकेश अग्निहोत्री का कहना है कि कई दिनाें से हार पर मंथन के नाम बौखलाए प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रतिदिन नई बात रख रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि कांग्रेस के पहले टीके ने ही पेट्रोल-डीजल सस्ता कर दिया है। अब दूसरा टीका लगते ही 2022 विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने का भाजपाई अहंकार भी टूट जाएगा। चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था की चरमराई हालत पर भी मुकेश अग्निहोत्री ने सरकार को आड़े हाथो लिया है। मुकेश अग्निहोत्री का कहना है कि टांडा में 10 माह व हमीरपुर जिला में सवा साल से सीटी-स्कैन मशीन खराब है। चिकित्सालयाें में चिकित्सक तैनात नहीं किए जा रहे हैं। शिमला में कांग्रेस कार्यकाल की 400 कराेड़ की परियाेजना प्रभावित हैं। मनरेगा मजदूर दिहाड़ी को तरस रहे हैं। 15वें वेतन आयोग का पैसा नहीं मिल रहा है, इसे प्रधान व सचिव के डिजिटेल हस्ताक्षर के नाम पर राेका गया है। प्रदेश में बेरोजगारी 14.1 प्रतिशत पहुंच चुकी है और हिमाचल देशभर में बेरोजगारी के मामले में पांचवें स्थान पर है। चोर दरवाजे से भर्तियां जारी करके युवाओं का हक छीना जा रहा है।
भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में हर घर तक महासंपर्क अभियान चलाने का फैसला भी लिया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार ने कई काम किए हैं। इन्हें जनता तक पहुंचाने का काम कार्यकर्ता का था, लेकिन इसमें ही सफलता नहीं मिल सकी है। अब इसके लिए हर घर में दस्तक देने की मुहिम चलाई जाएगी। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने कहा है कि उपचुनाव हारने का कारण अति आत्मविश्वास व कांग्रेस का संवेदनाओं का सहारा लेना रहा है। किन्तु उपचुनाव का नतीजा भाजपा के लिए आंखें खोलने वाला है।इससे हमें लाभ हुआ है, और इस हार से सीखकर अब पार्टी 2022 की तैयारी करेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पन्ना कमेटी बनाई जा रही है जिसका 80 फीसद काम पूरा हो चुका है, दिसंबर तक इसका 100 फीसद काम पूरा कर लिया जाएगा। सुरेश कश्यप ने कहा कि 27 दिसंबर को प्रदेश सरकार के चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हिमाचल आ सकते हैं। उनका दौरा तय होने के बाद स्थान तय किया जाएगा। सुरेश कश्यप ने कहा कि सरकार व संगठन दोनों ही समन्वय के साथ काम करते रहेंगे। संगठन को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने की दृष्टि से भाजपा ने प्रदेश में विस्तारक योजना चलाकर कार्यकर्ताओं के डाटा को डिजिटल किया जा रहा है। पार्टी अपनी कमियों को दूर कर मिशन रिपीट के लिए प्रतिबद्ध है। सुरेश कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में प्रदेश में विकास के नए आयाम स्थापित हुए हैं। कई संस्थान प्रदेश में खुले हैं। गृहिणी सुविधा योजना के तहत महिलाओं को धुएं से निजात दिलाई है। जनमंच कार्यक्रम के तहत लोगों की अधिकतर समस्याओं का मौके पर निपटारा कर कार्यालयों के चक्कर काटने में राहत प्रदान की है। पार्टी के कार्यकर्ता अब घर -घर जाकर सरकार की उपलब्धियों से आमजन को अवगत करवाएंगे।
जयराम सरकार के चार साल पूरे होते -होते आखिरकार जेसीसी की बैठक भी हो ही गई। अपेक्षित था बैठक में मुख्यमंत्री कर्मचारियों के साथ संवाद भी करेंगे और कुछ ऐलान भी करेंगे। ऐसा हुआ भी और सही कहे तो इस बैठक में मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों को उम्मीद से बढ़कर दिया। मंच सँभालते ही जयराम ठाकुर एक के बाद एक कई बड़े ऐलान करते गए और तालियां बजती रही। पिछले चार सालों से अपनी मांगो को लेकर कर्मचारी विधायकों से लेकर मुख्यमंत्री तक सबकी दर पर पहुँच रहे थे और इसे आस में थे कि सरकार उनकी सुनेगी। पर छोटी मोटी मांगो को छोड़कर सरकार ज्यादा सुध ले नहीं रही थी। फिर जेसीसी की तिथि घोषित हुई और कर्मचारियों की आस प्रबल। आखिरकार चार साल बाद हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों पर सरकार मेहरबान हुई और एक साथ कई मांगें पूरी हो गई। जिस तरह सरकार ने तोहफों की बौछार कर्मचारियों पर की है वो काबिल ए तारीफ है। जेसीसी की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की घोषणाओं ने कर्मचारियों का दिल जीत लिया। अधिकांश कर्मचारी वर्ग का ख्याल जेसीसी की बैठक में रखा गया और कई वर्गों को आश्वस्त किया गया कि जल्द उनके पक्ष में भी सरकार निर्णय लेंगी। सीएम जयराम ठाकुर ने जेसीसी बैठक में साढ़े सात हजार करोड़ रुपये के वित्तीय लाभ देने की घोषणा की है। जो घोषणाएं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने की उनमें पंजाब सरकार के छठे वेतनमान की तर्ज पर कर्मचारियों को नए वेतनमान के लाभ देने का ऐलान भी शामिल है। कर्मचारियों को नया वेतनमान एक जनवरी 2016 से देय होगा। जनवरी 2022 का संशोधित वेतनमान फरवरी में दिया जाएगा। छठा वेतनमान मिलने से सबसे कम बेसिक वेतन वाले क्लर्क को तीन से साढ़े तीन हजार तक का लाभ होगा। डॉक्टर, वरिष्ठ अधिकारियों और एचएएस अधिकारियों को करीब 15 से 20 हजार रुपये तक का लाभ होगा। पेंशनरों को भी 1000 रुपये से लेकर 10 हजार तक का लाभ होगा। वेतनमान के लागू होने के बाद हिमाचल प्रदेश के वार्षिक बजट में कर्मचारियों के हिस्से का बजट 42 से बढ़कर 50 फीसदी हो जाएगा। इससे सरकार का 6000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय होगा। पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों को भी 1 जनवरी, 2016 से संशोधित पेंशन और अन्य पेंशन लाभ दिए जाएंगे। संशोधित वेतनमान और संशोधित पेंशन/पारिवारिक पेंशन पर महंगाई भत्ता और महंगाई राहत प्रदान की जाएगी। जेसीसी की बैठक में एनपीएस कर्मचारियों के लिए 2009 की अधिसूचना के अंतर्गत आने वाली फैमिली पेंशन 15 मई 2003 से देने की घोषणा भी की गई है। इस पर 250 करोड़ से ज्यादा खर्च होगा। अनुबंध काल घटाने की कर्मचारियों की बहुप्रतीक्षित मांग भी पूरी की गई है। अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण की अवधि को भी तीन से घटाकर दो साल कर दिया है। अनुबंध कर्मचारियों को यह लाभ 30 सितंबर से मिलेगा। स्टेनो टाइपिस्ट को 10 से सात साल में रेगुलर करने को आरएंडपी रूल्स में संशोधन किये जाएंगे। इसी के साथ दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों, अंशकालिक कामगारों, जल रक्षकों और जलवाहकों आदि के संबंध में नियमितीकरण/दैनिक वेतन भोगी के रूप में रूपान्तरण के लिए भी एक-एक वर्ष की अवधि कम की जाएगी। लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों के भुगतान के लिए 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जारी करने की भी घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री ने ऐलान किया है कि प्रदेश सरकार राज्य के जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी एवं अनुबंध कर्मचारियों को जनजातीय भत्ता देने पर भी विचार करेगी। अब पेंशन निधि चुनने की स्वतंत्रता एनपीएस कर्मचारियों को अब पेंशन निधि चुनने की स्वतंत्रता होगी, जिससे उनके निवेश पर बेहतर रिटर्न सुनिश्चित हो सकेगा। अब तक इन कर्मचारियों को सरकार द्वारा चुनी गई पेंशन निधि में ही निवेश अनिवार्य था। सभी एनपीएस कर्मचारियों को डीसीआरजी लाभ प्रदान किया जा रहा है और अब सरकार ने 15 मई, 2003 से 22 सितम्बर, 2017 तक इस लाभ से वंचित एनपीएस कर्मचारियों को ग्रेच्युटी प्रदान करने का निर्णय लिया है। ये मांगे हुई पूरी - राज्य के कर्मचारियों को 1 जनवरी, 2016 से नया वेतनमान प्रदान किया जाएगा - पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों को भी 1 जनवरी, 2016 से संशोधित पेंशन और अन्य पेंशन लाभ दिए जाएंगे - संशोधित वेतनमान और संशोधित पेंशन/पारिवारिक पेंशन पर महंगाई भत्ता और महंगाई राहत प्रदान की जाएगी - प्रदेश के कर्मचारियों को फैमिली पेंशन का लाभ - अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण की अवधि तीन वर्ष से घटाकर दो वर्ष की गई - दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों, अंशकालिक कामगारों, जल रक्षकों और जलवाहकों आदि के संबंध में नियमितीकरण/दैनिक वेतन भोगी के रूप में रूपान्तरण के लिए भी एक-एक वर्ष की अवधि कम की गई - लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों के भुगतान के लिए 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जारी करने की भी घोषणा की गई - एनपीएस कर्मचारियों को अब पेंशन निधि चुनने की स्वतंत्रता प्रदान की गई पुलिस कांस्टेबल का प्रोबेशन पीरियड अब भी 8 वर्ष हिमाचल प्रदेश में हुई जसीसी बैठक से अधिकतर कर्मचारी संतुष्ट है मगर एक तबका ऐसा भी है जो सरकार से ख़ासा नाराज़ है। हम बात कर रहे है हिमाचल प्रदेश पुलिस के कर्मचारियों की। प्रदेश पुलिस जवानों का मानना है कि सरकार उनके साथ पराया व्यवहार कर रही है। जहाँ सभी विभागों का अनुबंध कार्यकाल 3 वर्ष से घटाकर 2 वर्ष किया गया वहीं पुलिस कांस्टेबल का प्रोबेशन पीरियड अब भी 8 वर्ष ही रखा गया है। पुलिस कर्मचारियों ने सरकार से सवाल किये है कि आखिर प्रदेश के इन रक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों ? प्रदेश सरकार की इस अनदेखी से पुलिस जवान व उनके परिवार काफ़ी खफा है। एक तरफ सभी विभागों को सौगाते दी गयी वहीं दूसरी तरफ पुलिस को अनदेखा किया गया। पुलिस जवानो का कहना है कि उन्हें भी सरकार से आशाएं होती है। कोविड के समय यही जवान सड़कों पर खडे थे। किसी भी प्रकार की इमरजेंसी में पुलिस को ही सबसे पहले याद किया जाता है फिर सरकार क्यों इनको भूल जाती है ? रोष करने के पुलिस कॉन्स्टेबल्स ने अपनी मेस बंद रखने का एलान भी किया। दरसअल साल 2015 में सरकार द्वारा पुलिस कांस्टेबल का प्रोबेशन पीरियड 2 साल से बढ़ा कर 8 साल कर दिया गया था। इन कर्मचारियों ने अपनी मांगें कई बार सरकार के सामने रखने की कोशिश की मगर अब तक इनकी मांग को अम्लीजामा नहीं पहनाया गया। करुणामूलक आश्रितों का इंतज़ार जारी करूणामूलक आधार पर नौकरी की गुहार लगा रहे आश्रितों को अभी थोड़ा और इंतज़ार करना होगा। जेसीसी बैठक में अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि करुणामूलक आश्रितों को नौकरी प्रदान करने के लिए मुख्या सचिव की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया है। उस कमेटी के सुझाव आना अभी बाकी है। आगामी कैबिनेट की बैठक के दौरान ये सुझाव पहुंचेगे और उसी बैठक में करुणामूलक नौकरियों पर निर्णय लिए जाएगा। मुख्यमंत्री ने ये भी कहा की करूणामूलक नौकरी रिटायरमेंट के एक दिन पहले तक देंगे। उधर, चार माह से शिमला में क्रमिक अनशन कर रहे करूणामूलक संघ को उम्मीद है कि प्रदेश सरकार उनके दर्द को समझेगी और उनकी मांगों को पूरा करेगी। वर्ष 1990 में सरकारी कर्मचारियों के सुरक्षित भविष्य के लिए प्रदेश में एक नीति बनाई गई थी। इस नीति के अंतर्गत यदि किसी भी सरकारी कर्मचारी की नौकरी के दौरान मृत्यु हो जाती है तो, मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखकर आर्थिक रूप से कमजोर मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नौकरी दी जाती है ताकि कर्मचारी के परिवार को उसके जाने के बाद किसी भी तरह की दिक्क्तों का सामना न करना पड़े। सरकार ने इसके लिए वार्षिक आय सीमा का मापदंड तय किया हुआ है। इस आधार पर नौकरी के लिए कोई इंटरव्यू और लिखित परीक्षा नहीं देनी पड़ती। पर ये जितना आसान दिखता है उतना है नहीं, करुणामूलक आधार पर नौकरी पाने की प्रक्रिया बेहद जटिल है। इसके लिए आवेदक को हर जिले में विभाग संबंधित डिवीज़न में आवेदन करना पड़ता है, फिर फाइल चीफ़ ऑफिस होकर सर्कल कार्यालय पर जाती है। उसके बाद विभाग के हेड ऑफिस शिमला पहुंचती है। आम तौर पर कई ऑब्जेक्शन लगते है व फाइल वापस आ जाती है। ऐसे ही कई करूणामूलक आश्रित नौकरी की चाह में आवेदन कर चुके है पर इन्हे नौकरियां नहीं मिल रही। ये चाहता है करूणामूलक संघ -समस्त विभागों, बोर्डों, निगमों में लंबित पड़े करुणामूलक आधार पर दी जाने वाली नौकरियों के मामले जो 7/03/2019 की पॉलिसी में आ रहे हैं उनको वन टाइम सेटलमेंट के तहत एक साथ नियुक्ति दी जाएं। -करुणामूलक आधार पर नौकरी की पॉलिसी में संशोधन किया जाए व उसमें 62500 रुपये प्रति सदस्य सालाना आय सीमा शर्त को पूर्ण रूप से हटा दिया जाए। -योग्यता के अनुसार आश्रितों को बिना शर्त के सभी श्रेणियों में नौकरी दी जाएं। -5% कोटा शर्त को हटा दिया जाए ताकि विभाग अपने तौर पर नियुक्तियां दे सके। - जिन आवेदकों की आयु निकल गई है उन्हें वन टाइम सेटलमेंट दिया जाए। वरिष्ठता की मांग को लेकर बनेगी कमेटी जेसीसी नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता की मांग भी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में से एक मांग थी। ये मांग अभी तो पूरी नहीं पाई है लेकिन इस समस्या के निवारण के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया जाएगा व इसमें अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के साथ अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा और प्राथमिकता के आधार पर मामले को हल किया जाएगा। सरकार के इस ऐलान के बाद अब कर्मचारियों की नजर 26 जनवरी और हिमाचल दिवस पर रहेगी। इस बीच बजट सत्र भी आएगा जहां कर्मचारी इस मांग के पूरा होने की उम्मीद में होंगे। हिमाचल अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन ने हिमाचल के विभिन्न विभागों में भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अंतर्गत अनुबंध पर नियुक्त होने के बाद नियमित हुए कर्मचारियों को नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता देने की मांग करता रहा है। विभिन्न विभागों में अनुबंध पर नियुक्त हुए कर्मचारी लंबे समय से वरिष्ठता की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी यह मांग पूरी नहीं हो पाई है। अनुबंध से नियमित होने के बाद इन कर्मचारियों की अनुबंध काल की सेवा को उनके कुल सेवा काल में नही जोड़ा जा रहा है, जिसका कर्मचारी विरोध करते है। ये मसला शुरू हुआ 2008 में, जब बैचवाइज और कमीशन आधार पर लोकसभा आयोग और अधीनस्थ कर्मचारी चयन आयोग द्वारा कर्मचारियों की नियुक्तियां अनुबंध के तौर पर की जाने लगी l पहले अनुबन्ध काल 8 साल का हुआ करता था जो बाद में कम होकर 6 फिर 5 और फिर 3 साल हो गया। ये अनुबन्ध काल पूरा करने के बाद यह कर्मचारी नियमित होते है। अनुबंध से नियमित होने के बाद इन कर्मचारियों की अनुबंधकाल की सेवा को उनके कुल सेवा काल में नही जोड़ा जाता, जिस पर कर्मचारियों को आपत्ति है। इनका कहना है कि अनुबंध काल अधिक होने से पुराने कर्मचारियों को वित्तीय नुकसान के साथ प्रमोशन भी समय पर नहीं मिल पाती l अब मांग है कि उनको नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता प्रदान की जाए ताकि उन्हें समय रहते प्रमोशन का लाभ मिल सके। अनुबंध काल की सेवा का वरिष्ठता लाभ ना मिलने के कारण उनके जूनियर साथी सीनियर होते जा रहे हैं। भर्ती एवम पदोन्नति नियमों के अनुसार 50 प्रतिशत नियुक्तियां कमीशन और बैच के आधार पर बाकी प्रोमोशन के आधार पर भरी जाती हैं। किन्तुअनुबंधकाल की सेवा को कुल सेवाकाल में ना गिनने के कारण, अनुबंध से नियमित कई कर्मचारी अभी भी उसी पद पर हैं, जिस पद पर नियुक्त हुए थे, जबकि उनसे कनिष्ठ पद पर नियुक्त नियमित कर्मचारी दो प्रोमोशन तक ले चुके हैं। इसीसलिए कर्मचारियों का एक तबका मांग कर रहा है कि सरकार को भर्ती और पदोन्नति नियमो में बदलाव करके अनुबंधकाल की सेवा को कुल सेवाकाल में जोड़ना चाहिए। बहरहाल जेसीसी में मुख्यमंत्री ने कमेटी गठन के ऐलान कर इनकी उम्मीद जरूर बढ़ाई है और हिमाचल अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन का मानना है कि जल्द सरकार इनकी मांग को पूरा करेगी। सिर्फ आश्वासन नहीं दिया, मसले सुलझाए भी हिमाचल अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के नेताओं ने कहा कि पूर्व शांता सरकार ने कर्मचारियों की समस्याओं को समझा और जेसीसी का मंच देकर समस्याओं का समाधान किया। महासंघ अध्यक्ष अश्वनी ठाकुर ने कहा कि वर्तमान सरकार ने कर्मचारियों के मसले सुलझाने का आश्वासन ही नहीं दिया अपितु उनको सुलझाया भी गया। जब पूर्व कांग्रेस शासनकाल में कर्मचारियों का उत्पीड़न किया गया था। भविष्य में भी कई कर्मचारी लाभान्वित होंगे हिमाचल प्रदेश सर्व अनुबंध कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष अरुण भारद्वाज ने अनुबंध कार्यकाल को घटाकर 2 वर्ष करने के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि हम लम्बे समय से ये मांग कर रहे थे जो अब जाकर पूरी हुई है। सरकार की इस पहल से सिर्फ अभी नहीं भविष्य में भी कई कर्मचारी लाभान्वित होंगे। उम्मीद है ये सिर्फ आश्वासन नहीं है नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता की मांग को निरंतर उठाने वाले अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मुनीश गर्ग ने कहा की प्रदेश सरकार ने इस मसले को सुलझाने के लिए कमेटी के गठन की बात कही है और हमें ख़ुशी है की इसमें हमारे संगठन के पदाधिकारियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। हम सरकार से आग्रह करते है की जल्द से जल्द हमारी इस महत्वपूर्ण मांग को पूरा किया जाए। उन्होंने कहा की उम्मीद है कि इस बार ये सिर्फ आश्वासन नहीं बल्कि हकीकत होगा और हमारी मांग जल्द पूरी होगी। सरकार ने दिखाया बड़ा दिल हिमाचल प्रदेश नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर ने 2009 की अधिसूचना लागू करने के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा की उनका संगठन पिछले कई सालों से लगातार प्रदेश सरकार से इस अधिसूचना की मांग कर रहा था ताकि कर्मचारी कुछ हद तक अपने भविष्य को लेकर सुरक्षित महसूस करे। प्रदीप ठाकुर ने कहा की मांग पूरी होने पर महासंघ की और से वे मुख्यमंत्री का धन्यवाद करना चाहते है साथ ही वो उम्मीद करते है की जिस तरह प्रदेश सरकार ने ये मांग पूरी कर कर्मचारियों के प्रति बड़ा दिल दिखाया है, उसी तरह सरकार पुरानी पेंशन को भी बहाल करेगी। शिक्षक महासंघ ने किया स्वागत हिमाचल प्रदेश में जेसीसी बैठक में सरकार द्वारा नए वेतनमान देने की घोषणा के साथ अनुबंध काल को 3 वर्ष से घटाकर 2 वर्ष करने, दैनिक भोगी कर्मचारियों को 5 वर्ष की जगह 4 वर्ष में नियमित करने के साथ अन्य मांगों को जल्द पूरा करने के आश्वासन के लिए शिक्षक महासंघ के प्रान्त उपाध्यक्ष डॉ मामराज पुंडीर ने सरकार का आभार व्यक्त किया है। इसके साथ उन्होंने बताया कि लंबे समय से कर्मचारियों से जुड़ी बहुत सी मांगों को सरकार द्वारा पूरा कर दिया गया है, जबकि इसी कड़ी में शामिल बहुत ही मांगों को औपचारिकताएं पूरी करके पूरा करने का आश्वासन दिया है। बैठक में संगठन द्वारा 2 दिसंबर को होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में शिक्षकों की मांगों को हल करने का आग्रह किया। उम्मीद है सरकार हमारे दर्द को समझेगी करुणामूलक संघ हिमाचल प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार का कहना है की करुणामूलक आश्रितों को राजधानी शिमला में क्रमिक अनशन पर बैठे चार महीनों से अधिक का समय बीत गया है। आश्रितों ने जहां इतने दिनों तक कड़ा परिश्रम किया वहां कुछ दिन और सही। उम्मीद है कि प्रदेश सरकार हमारे दर्द को समझेगी और अब हमारी मांगों को पूरा करेगी। पदोन्नति कार्यकाल 3 वर्ष करने की घोषणा भी जल्द हो हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत तकनीकी कर्मचारी संघ ने संयुक्त सलाहकार समिति की बैठक करने के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया है। संघ ने अनुबंध काल 2 वर्ष करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार किया है। संघ ने नई पेंशन योजना के तहत 2009 की अधिसूचना कि घोषणा को पुरानी पेंशन बहाली की ओर एक सार्थक कदम बताया है, व सरकार से आग्रह किया है कि पुरानी पेंशन बहाल कर कर्मचारियों में समानता लाइ जाए। संघ के प्रदेश महामंत्री नेकराम ठाकुर ने कहा कि जूनियर टी मेट व हेल्परों का पदोन्नति कार्यकाल 5 से 3 वर्ष करने की घोषणा जो मुख्यमंत्री ने कि थी उसके लिए अभी कोई भी आदेश जारी नहीं हुए है। महामंत्री ने कहा कि उक्त फैसला सर्विस कमेटी की बैठक में होगा जिसके लिए अभी तक समय नहीं मिला है औरइसको आगे बढ़ाना निंदनीय है। इस पर जल्द से जल्द फैसला लिया जाए व मुख्यमंत्री इसमें हस्तक्षेप करें। कोविड से निपटना प्राथमिकता था, इसलिए वक्त लग गया मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के विकास में कर्मचारियों का उल्लेखनीय योगदान रहा हैं। कर्मचारियों की परिश्रम, समर्पण और प्रतिबद्धता के कारण ही हिमाचल आज देश के अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श के रूप में उभरा है। जनसंख्या और कर्मचारी अनुपात के मामले में भी हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है। कोविड-19 महामारी के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और हिमाचल भी इसका अपवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने इस महामारी से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और राज्य इस संकट से सफलतापूर्वक बाहर निकलने में सफल रहा है। कोरोना काल के दौरान कोविड से निपटना प्राथमिकता था इसलिए जेसीसी की बैठक करने में इतना समय लग गया। कर्मचारियों ने इतना संयम बरता इसकेलिए वे उनके धन्यवादी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जमीनी स्तर पर योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में कर्मचारियों ने अहम भूमिका निभाई है। हिमाचल पहाड़ी प्रदेश है और यहां की समस्याएं भिन्न हैं। सभी विभागों में कर्मचारियों ने अहम भूमिका निभाई। पहली डोज में हिमाचल का पहला स्थान है और दूसरी डोज 90 फीसदी लोगों को लगा दी है। बदले की भावना को दूर कर सरकार ने माना कि कर्मचारी हमारी रीढ़ है। सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कठिन परिस्थितियों में कर्मचारियों की जो मदद की जा सकती है, वह कर रहे हैं। प्रतिशोध और बदले की भावना से हमने कभी भी काम नहीं किया। सत्ता में आते ही यह कहा था कि हम बदले की भावना से काम नहीं करेंगे। एनपीएस कर्मचारियों को अन्य पेंशन लाभ में निवेश की छूट दी है। विभाग में 27 हजार पदों को भरने की अनुमति दी गई है। - जयराम ठाकुर, मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश।
राज्य सरकार प्रदेश के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। हिमाचल के छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए राज्य सरकार द्वारा विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं लागू की गई हैं। राज्य सरकार द्वारा 12वीं कक्षा के पश्चात राष्ट्र स्तरीय प्रतिस्पर्धा परीक्षाओं के लिए कोचिंग उपलब्ध करवाने हेतू मेधावी विद्यार्थियों के लिए मेधा प्रोत्साहन योजना क्रियान्वित की जा रही है। इसी क्रम में छोटी उम्र में प्रतिभा को चिन्हित कर उभारने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा राजकीय पाठशाला के विद्यार्थियों के लिए एक नई हिमाचल प्रदेश स्वर्ण जयंती मिडल मेरिट छात्रवृत्ति योजना लागू की जा रही है। इस योजना के अन्तर्गत राजकीय विद्यालय के छठी से आठवीं कक्षा के मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति उपलब्ध करवाई जा रही है। इस योजना के तहत लाभार्थियों का चयन एससीईआरटी सोलन द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को कक्षा छठी में चार हजार रुपये प्रतिमाह, कक्षा सातवीं में पांच हजार रुपये प्रतिमाह तथा कक्षा आठवीं में छः हजार रुपये प्रतिमाह की दर से छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा में राज्य भर में अधिकतम अंक प्राप्त करने वाले शीर्ष 100 विद्यार्थियों को, विभिन्न जिलों की औसत छात्र के आधार पर जिलावार आधार पर छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। योजना के तहत जिला बिलासपुर के पांच लाभार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी, जिला चम्बा के 12 विद्यार्थियों, जिला हमीरपुर के पांच विद्यार्थियों, जिला कांगड़ा के 14 विद्यार्थियों, जिला किन्नौर के एक विद्यार्थी, जिला कुल्लू के आठ विद्यार्थियों, जिला लाहौल-स्पीति के एक विद्यार्थी, जिला मंडी के 14 विद्यार्थियों, जिला ऊना के सात विद्यार्थियों तथा जिला शिमला, सिरमौर व सोलन प्रत्येक के 11-11 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए चयनित विद्यार्थी को निरंतर तीन वर्षों तक कक्षा आठवीं तक सरकारी पाठशाला में ही अध्ययनरत रहना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त संबंधित शैक्षणिक स्तर में उसे पाठशाला में कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति भी सुनिश्चित करनी होगी। केवल गंभीर चिकित्सीय कारणों की स्थिति में ही इस शर्त में छूट प्रदान की जाएगी।
शिमला के चौपाल की तहसील कुपवी के दुरदराज पंचायत घारचांदना के गांव शराड में चार मकान जलकर राख हो गए है। सूचना के अनुसार इस आगजनी से कोई भी जानी नुकसान नही हुआ है। जानकारी के अनुसार रात करीब 8 बजे के करीब पहले दुला राम के मकान में आग लगनी शुरू हुई थी, जिसके चलते साथ में बने अन्य मकान भी आग की चपेट में आ गए। सभी मकान काफी पुराने बताए जा रहें हैं। पुलिस व अग्निशमन दल रात को ही मौके पर पहुंच गए थे। लेकिन जब तक चौपाल से अग्निशमन दल घारचांदना पहुंचा तब तक सभी मकान लगभग जल कर नष्ट हो गए थे। इस आगजनी की घटना में लाखों रूपयों का नुक़सान हुआ है। फिलहाल आग लगने का कारण शॉट सर्किट बताया जा रहा है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।
हिमाचल प्रदेश के मध्यम और अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में एक दिसंबर को बारिश और बर्फबारी की चेतावनी जारी की गई है। प्रदेश के अन्य भागों में 30 नवंबर तक मौसम शुष्क रहने का पूर्वानुमान है। उधर, रविवार को केलांग का न्यूनतम तापमान-4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान शून्य तक पहुंच गया है। इससे कड़ाके की ठंड पड़ रही है। लाहौल-स्पीति जिले में पानी के स्रोत जमने लगे हैं। वहीं, रविवार को राजधानी शिमला और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटकों की भीड़ उमड़ी रही।
कोरोना वायरस के नए म्यूटेशन ओमिक्रोन के सामने आने के बाद से भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर रख रही है। रविवार को गृह सचिव ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में ऐसे देश जहां केस बढ़ रहे हैं या नए म्यूटेशन के संक्रमण के मामले सामने आए हैं। रिस्क वाले देशों से आने वाले यात्रियों की जीनोमिक सर्विलांस बढ़ाने का फैसला किया है। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर कड़ी निगरानी रखने की सलाह दी गई है। कोरोना के नए म्यूटेशन B.1.1529 जिसे डब्ल्यूएचओ ने ओमिक्रोन का नाम दिया और वेरिएंट ऑफ कंसर्न की श्रेणी में रखा है। इस म्यूटेशन ने न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि पिछले दो दिनों में कोरोना के इस नए वेरिएंट पर दो अहम बैठक हो चुकी है। शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी ने मौजूदा स्थिति और पब्लिक हेल्थकेयर मेजर के संदर्भ में भारत की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी और रविवार को गृह सचिव ने बैठक की।
दिल्ली में आज से सभी कक्षाओं के लिए स्कूल खुल जाएंगे। वर्क फ्राम होम भी खत्म हो गया है। दिल्ली सरकार ने इस बारे में लेटर जारी कर जानकारी दी है। शिक्षा मंत्री ने ट्वीट कर बताया कि राजधानी में स्कूल 29 नवंबर से खुलेंगे। दिल्ली में स्कूल प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण बंद कर दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट से लेकर सरकार तक सभी ने दिल्ली-एनसीआर में स्कूल को बंद करने पर सहमति जताई थी जिसके बाद बच्चों को प्रदूषण से बचाने के लिए स्कूलों को अगले आदेश तक के लिए बंद कर दिया गया था। हालांकि, बाद में सरकार ने बुधवार को जानकारी दी थी 29 नवंबर से सभी स्कूल खुल जाएंगे। इसी कड़ी में शिक्षा मंत्री ने बताया कि सभी कक्षाओं के लिए स्कूल सोमवार से खुलेंगे। उधर दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। पिछले हफ्ते कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में हर मौसम में होने वाले प्रदूषण पर वैज्ञानिक अध्ययन किया जाना चाहिए। इसके आधार पर सरकार को साल भर के लिए ठोस योजना बनानी चाहिए।
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनावई होगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की ओर से सख्त रवैया अपनाने के बाद दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को कम करने के उपायों पर कई फैसले लिए गए थे। प्रदूषण के मासले पर आज होने वाली सुनवाई में तीन जजों की बेंच करेगी। इस बेंच में सीजेआई एन वी रमना, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हैं। पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण के स्तर कम करने के लिए निर्माण से संबंधित सभी कार्यों पर रोक लगाने का आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि गैर-प्रदूषणकारी गतिविधियों जैसे प्लंबर, इंटीरियर डेकोरेशन, इलेक्ट्रीशियन के काम को बंद नहीं किया जाए। अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि जितने दिन काम बंद रहेंगे उतने दिन के पैसे राज्य सरकारों 'निर्माण कार्य मजदूरों' के लिए बनाए गए फंड से इन मजदूरों को पैसा देंगी। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से प्रदूषण से जुड़े कई अन्य मामलों को लेकर भी जवाब मांगा था।
कोरोना वायरस के नए वेरिएंट आने से दुनिया के सभी देश सतर्क हो गए हैं। नए वेरिएंट सामने आए के बाद पूरी दुनिया में एक बार फिर हलचल मच गई है। नया वेरिएंट ओमिक्रोन पहली बार दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था। ओमिक्रोन वेरिएंट के सामने आने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी चिंता जाहिर की है। नए वेरिएंट सामने आने के बाद अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने दक्षिण अफ्रीका से आने वाले यात्रियों को लेकर सतर्क हो गए हैं। दक्षिण अफ्रीका की यात्रा कर लौटे यात्रियों को एयरपोर्ट पर उतरते ही क्वारंटाइन किया जा रहा है। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान की ओर से बताया गया है कि ओमिक्रोन वेरिएंट वायरस अगर आपके शरीर में आता है तो इसके कुछ विशेष लक्षण नहीं देखे जा रहे हैं। एनआईसीडी के मुताबिक यह भी कहा गया है कि डेल्टा की तरह ओमिक्रोन से संक्रमित हुए कुछ लोग भी एसिम्टोमेटिक थे। ऐसे में एनआईसीडी ने माना कि ओमिक्रोन से संक्रमित व्यक्ति में कोई अलग तरह के लक्षण दिखाई नहीं दिए थे। वायरस की जांच को लेकर WHO ने अपने बयान में बताया है कि मौजूदा वक्त में SARS-CoV-2 PCR इस वेरिएंट को पकड़ने में सक्षम है। नए वेरिएंट को देखते हुए भारत के साथ-साथ कई अन्य देश भी सतर्क हो गए हैं। दक्षिण अफ्रीका से आने वाले यात्रियों को क्वारंटाइन में रहना होगा और टेस्ट करवाना होगा। बता दें कि ओमिक्रोन वेरिएंट के पहले मामले की पुष्टि 24 नवंबर को हुई थी। इस वायरस के सबसे पहले मरीज की पहचान दक्षिण अफ्रीका में हुई थी। कई देश ओमिक्रोन के प्रसार को रोकने के लिए हर संभव कोशिश में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में दक्षिण अफ्रीकी देशों से उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया है।
संसद का शीतकालीन सत्र आज यानि सोमवार से शुरू हो रहा है। केंद्र सरकार की ओर से विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले के बाद भी आज का सत्र हंगामेदार रहने की आशंका है। वहीं, पेगासस जासूसी विवाद, महंगाई, बेरोजगारी और चीन के अतिक्रमण जैसे मुद्दों को लेकर भी विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर लिया है। जानकारी के मुताबिक कृषि कानून निरसन विधेयक-2021 को लोकसभा में विचार किये जाने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इस विधेयक को लोकसभा में विधेयक पारित होने के बाद इसे राज्य सभा में लाया जाएगा। विधेयक उन तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए है, जिनके खिलाफ किसान एक साल से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। शीतकालीन सत्र शुरू होने के एक दिन पहले यानि रविवार को सरकार की ओर से सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में सरकार की ओर से विपक्षी दलों को भरोसा दिलाया गया है कि वह विपक्ष के सकारात्मक सुझावों पर विचार करने को तैयार है। सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में पीएम मोदी नहीं पहुंचे। वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने मीटिंग छोड़कर बाहर निकल गए।
कोरोना के नए स्ट्रेन मिलने से दुनियाभर में हड़कंप मचा हुआ है। इस पर मुंबई प्रशासन की तरफ से यह फैसला लिया गया है नए वेरिएंट ओमिक्रोन के बाद दक्षिण अफ्रीका से आ रही फ्लाइट्स पर बैन लगाया जाए। मुंबई की मेयर ने कहा- “कोरोना के नए वेरिएंट को लेकर मुंबई में चिंताएं हैं। दक्षिण अफ्रीका से आ रहे लोगों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद उनकी जीनोम सिक्वेंसिंग की जाएगी। विदेश जाने वाली फ्लाइट्स पर किसी तरह की रोक नहीं है। लेकिन यह फैसला पहले के अनुभवों को देखते हुए लिया गया है। इधर, कोरोना के नए स्ट्रेन के मचे हड़कंप और विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से आगाह किए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को शीर्ष अधिकारियों के साथ करीब डेढ़ घंटे तक बैठक की। इस बैठक के दौरान कोविड-19 की स्थित और टीकाकरण पर समीक्षा की गई। इस बैठक में कैबिनेट सचिव राजीव गौबा, पीएम के प्रधान सचिव पीके मिश्रा, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण और नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल मौजूद थे।
हिमाचल प्रदेश कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज में भी नंबर वन पर आ गया है। गोवा को पीछे छोड़ते हुए हिमाचल प्रदेश ने कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज़ का लक्ष्य हासिल का लिया है। हालांकि प्रदेश में अभी 90 फीसदी लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज लगी है। 10 फीसदी लोगों को टीका लगना बाकी है। ऐसे में दोनों राज्यों में यह अभियान तेजी से चल रहा है। बताया जा रहा है कि गोवा सिर्फ हिमाचल से एक फीसदी पीछे हुआ है। इससे पहले यह राज्य करीब 10 दिनों से आगे चल रहा था। इधर, प्रदेश सरकार ने संपूर्ण वैक्सीनेशन कार्यक्रम के चलते 5 दिसंबर को बिलासपुर में कार्यक्रम फाइनल कर दिया है। इसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा मौजूद रहेंगे। प्रदेश में लोगों को घर-घर वैक्सीन लगाने के कार्यक्रम को केंद्र सरकार ने सराहा है। प्रदेश में 49 लाख लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज लग चुकी है। केंद्र सरकार ने 4 दिसंबर तक 55.23 लाख लोगों को वैक्सीन लगाने का टारगेट दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने टारगेट पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के तीन हजार कर्मचारियों को फील्ड में उतारा है। इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्र में वैक्सीन लगाने के लिए अतिरिक्त स्टाफ मुहैया कराया गया है। शुक्रवार को आयोजित ग्रामसभाओं में 100 फीसदी वैक्सीनेशन का प्रस्ताव पारित किया गया। इन सभाओं में भी उपस्थित लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज लगाई गई।


















































