हाल ही मे ब्यास नदी फेरा नामक जगह पर डूबने से एक साथ हुई दो स्कूली बच्चों की मौत के बाद अब स्थानिय ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार व जिलाधीश काँगड़ा से इस स्थल को ब्लेक सपोट घोषित करके यहां हर किसी के बचाव हेतु उचित प्रबन्ध करने की मांग उठाई है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यहां उक्त दो स्कूली बच्चों की ही डूबने से मौत नही है बल्कि इससे पहले भी यहां दर्जनो युवा डूब कर अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठे है। नदी किनारे एकांत जगह होने के कारण कई बार स्कूल कॉलेज के छात्रों के अलावा अन्य युवा भी यहां बैठे रहते है। लिहाजा उसके बाद कई युवा यहां नदी की शांत लहरो को देखते हुए नहाने के लिए डुबकी लगाने हेतु कूद जाते है लेकिन यहां घुमावदार गहरे पानी मे जो भी नहाने के लिए कूदते है वह वापिस बाहर नहीं निकल पाते है। वहीं इस संदर्भ में डीसी कांगड़ा निपुण जिंदल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मीडिया के माध्यम से यह बात पता चली थी। जानकारी मिलते ही उन्होंने उक्त स्थान पर चेतावनी बोर्ड स्थापित करने के लिए एसडीएम देहरा को कह दिया है। जल्द ही उक्त स्थान पर चेतावनी बोर्ड लगा दिए जाएंगे। जब इस बारे में एसडीएम देहरा धनबीर सिंह ठाकुर से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि इस स्थान पर चेतावनी बोर्ड लगाने के लिए पँचायत को कह दिया गया है। जल्द ही पँचायत इस स्थान पर बोर्ड स्थापित कर देगी। Kangra News | Himachal Pradesh
जेबीटी बनाम बीएड केस में उच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद प्रदेश में जेबीटी प्रशिक्षुओं द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन किये गए। बीएड को जेबीटी पदों के लिए योग्य करार देने पर जेबीटी प्रशिक्षु भड़क उठे। हाल ही में प्रदेश हाईकोर्ट शिमला ने जेबीटी भर्ती मामलों पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षकों की भर्ती के लिए एनसीटीई की ओर से निर्धारित नियम एलिमेंटरी शिक्षा विभाग के साथ अधीनस्थ कर्मचारी चयन आयोग पर भी लागू होते हैं। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने याचिकाओं को स्वीकारते हुए प्रदेश सरकार को आदेश दिया कि वह 28 जून, 2018 की एनसीटीई की अधिसूचना के अनुसार जेबीटी पदों की भर्ती के लिए नियमों में जरूरी संशोधन करे। कोर्ट के इस फैसले से अब जेबीटी पदों के लिए बीएड डिग्री धारक भी पात्र होंगे। कोर्ट के इस फैसले से जेबीटी डीएलएड प्रशिक्षित बेरोजगार संघ बेहद खफा है। संघ का कहना है कि बीएड को जेबीटी का लाभ देना उनके हकों के साथ खिलवाड़ है। यदि ऐसा ही करना था तो इनकी दो साल की पढ़ाई का क्या औचित्य रहेगा। अपने हकों के लिए जेबीटी प्रशिक्षु प्रदेश के हर कोने में जमकर गरज रहे है। इन प्रशिक्षुओं की मांग है की बीएड वालों को जेबीटी का लाभ नहीं मिलना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो जेबीटी को समय पर इनके प्रशिक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा। प्रदेश में 40 हजार युवाओं ने जेबीटी और डीएलएड डिप्लोमा किया हुआ है। भर्ती में देरी की वजह से उन्हें अभी तक नौकरी नहीं मिली है। यदि बीएड भी जेबीटी भर्ती के लिए पात्र माने जाते हैं, तो उनका नंबर ही नहीं आएगा। भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में बदलाव होने से जिला के डाइट संस्थान व निजी शिक्षण संस्थानों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। इसके साथ ही बीएड अभ्यर्थी भी जेबीटी पदों में आएंगे, तो उनका नंबर कई सालों बाद आएगा। ऐसे में मांग की जा रही है कि आरएंडपी रूल्स से कतई छेड़छाड़ न की जाए। पिछले तीन सालों से यह विवाद चलता आ रहा है और इस कारण कमीशन और बैचवाइज दोनों प्रकार से भर्तियां रुकी हुई है। प्रदेश सरकार इस मसले पर जेबीटी के प्रशिक्षुओं के साथ नज़र आ रही है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जेबीटी प्रशिक्षुओं को आश्वासन दिया है कि जेबीटी के भर्ती नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा। वर्तमान नियमों से ही भर्ती होगी। अब तय हुआ है कि सरकार जेबीटी प्रशिक्षुओं के हक़ की लड़ाई लड़ेगी। सुप्रीम कोर्ट में सीधे जाने के बजाय राज्य हाईकोर्ट में ही रिव्यू पेटिशन फाइल की जाएगी। इस पुनर्विचार याचिका में राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले के कंटेंट को प्रयोग किया जाएगा। यदि फिर भी बात नहीं बनी तो राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी, लेकिन इतना तय है कि जेबीटी के भर्ती नियम नहीं बदले जाएंगे। पर समस्या यहां हल नहीं हुई। जेबीटी प्रशिक्षुओं का समर्थन करने से बीएड प्रशिक्षु सरकार से नाराज़ हो गए है। बीएड डिग्री धारक संगठन इस विषय पर सरकार का विरोध करने लगा है। संगठन के मंडी जिलाध्यक्ष भूपिद्र पाल ने कहा कि एनसीटीई के मानदंडों के अनुरूप 28 जून 2018 की अधिसूचना को प्रदेश सरकार आज तक लागू नहीं कर पाई है और अब कोर्ट के आदेश पारित होने के बाद भी सरकार बीएड डिग्री धारकों के हकों के खिलाफ कदम उठाने जा रही है, जोकि दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बीएड डिग्री धारकों का मानना है कि हाइकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते वक्त तमाम पहलुओं पर सुनवाई की है। कोर्ट के आदेश के बाद इसका जेबीटी डिग्री धारकों पर ज्यादा असर भी नहीं पड़ने वाला है क्योंकि फैसले में कहीं भी जेबीटी अभ्यर्थियों को प्राथमिक कक्षाओं को पढ़ाने के लिए मना भी नहीं किया है। सरकार लगभग 2000-3000 जेबीटी टेट पास लोगों के हित के लिए अगर हजारों बीएड डिग्री धारकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जा रही है तो इसका संगठन मुंह तोड़ जवाब देगा। बीएड डिग्रीधारक लता शर्मा, रूपाली शर्मा, शेखर, रजनीश शर्मा, अंजना ठाकुर, रश्मि शर्मा, प्रोमिला, विजय, आशा सोनी, माया, कांता इत्यादि का कहना है कि सरकार को जब एनसीटीई की सब शर्तें मान्य है तो बीएड वाली शर्त क्यों मान्य नहीं। Himachal Pradesh News | JBT Teachers
एचआरटीसी को हिमाचल प्रदेश की जीवन रेखा माना जाता है। आज हिमाचल के लगभग हर कोने तक एचआरटीसी की बसें पहुँचती है। हिमाचल के दूर दराज़ क्षेत्रों तक पहुँचने वाली इन बसों को सड़क तक पहुँचाने में पीस मिल कर्मचारियों का बड़ा योगदान रहता है। ये पीस मिल वर्कर एचआरटीसी में मकैनिक, कारपेंटर, इलेक्ट्रिशियन, टायर मैन, कुशन मेकर्स, बसों की सीटें बनाने वाले, वेल्डर एवं पेंटर के रूप में कार्य करते हैं। प्रदेश की जनता की सहायक एचआरटीसी बसों को सड़कों तक पहुँचाने वाले ये कर्मकारी सरकार से खूब खफा है। पीस मील कर्मचारियों का कहना है की सरकार उन्हें लगातार आश्वासन के झूले झूला रही है मगर उनकी मांगे पूरी नहीं कर रही। कर्मचारियों की सरकार के साथ हुई पहले की बातचीत के दौरान आश्वासन दिया गया था कि उन्हें अनुबंध पर लाने के लिए नीति बनाई जाएगी। इसके लिए 25 नवंबर तक का समय भी दिया गया था, लेकिन 25 नवंबर तक नीति न बनने के बाद अब पीस मील वर्करों ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। एचआरटीसी पीस मील कर्मचारी संघ धर्मशाला डिवीजन प्रधान संजीव कुमार ने बताया कि पांच व छह सालों के बाद भी उन्हें अनुबंध में नहीं लाया जा सका है। पीस मील वर्कर को अनुबंध में लाने की उम्मीद जेसीसी की बैठक में थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। लंबे समय से पीस मील कर्मचारी अपनी मांगों को उठा रहे हैं। कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन मांग को नहीं माना गया है। अंत में करीब एक हजार पीस मील कर्मचारियों को हड़ताल का सहारा लेना पड़ा। सुनील कुमार बताते है कि कर्मचारियों कि इस मांग के संबंध में 18 अक्तूबर 2021 को अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन के साथ हुई वार्ता में अक्तूबर 2021 के अंत तक इसके बारे में निर्णय लेने का आश्वासन मिला था। इसके उपरांत 16 नवंबर 2021 को प्रबंध निदेशक के साथ हुई बैठक जिसमें 26 नवंबर तक मामले को अंतिम रूप देने बारे आश्वासन मिला था। परिवहन मंत्री द्वारा समय-समय पर कर्मियों के साथ बैठक में सितंबर 2021 तक इन्हें अनुबंध पर लाने का आश्वासन दिया गया है। जबकि पूर्व में लगभग 450 पीसमील कर्मचारियों को अनुबंध पर लिया जा चुका है और शेष बचे 950 पीसमील कर्मचारि अब भी इंतज़ार कर रहे है। परंतु हर स्तर पर अनेक बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद इस समस्या का समाधान नहीं निकाला जा रहा जिस कारण पीस मील कर्मचारी अनिश्चितकालीन काम छोड़ो आंदोलन पर चले गए, जिससे कर्मशालाओं में बसों के रखरखाव व मरम्मत का कार्य प्रभावित हो रहा है तथा आने वाले समय में परिवहन व्यवस्था पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। संयुक्त समन्वय समिति भी साथ एचआरटीसी कर्मचारियों की संयुक्त समन्वय समिति भी पीस मील कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन कर रही है। संयुक्त समन्वय समिति के सचिव खेमेन्द्र गुप्ता ने एचआरटीसी प्रबंधन व सरकार को चेताया है कि अगर एचआरटीसी में कार्यरत कर्मचारियों को पीस मील से अनुबंध पर लाने की घोषणा जल्द नहीं की जाती है तो फिर एचआरटीसी के सभी कर्मचारियों द्वारा सरकार और एचआरटीसी प्रबंधन के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा। हिमाचल परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के अध्यक्ष प्यार सिंह ठाकुर भी मानते है कि सरकार व निगम प्रबंधन एचआरटीसी पीस मील कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने के लिए गंभीर नहीं है। बार-बार आश्वासनों का झुनझुना इन कर्मचारियों को दिया जा रहा है। परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति द्वारा पीस मील कर्मचारियों को अनुबंध पर लाने के लिए बहुत लंबे समय से मांग की जा रही है। संयुक्त समन्वय समिति ने सरकार व निगम प्रबंधन से अनुरोध किया है कि पीस मील कर्मचारियों को पूर्व निर्धारित नीति अनुसार ही शीघ्र अनुबंध पर लाने की औपचारिकताएं पूरी कर इन्हें अनुबंध पर लाया जाए अन्यथा निगम का प्रत्येक कर्मचारी इनके पक्ष में एक बड़े आंदोलन करने के लिए विवश होगा, जिससे होने वाली किसी भी प्रकार की हानि के लिए सरकार व निगम प्रबंधन जिम्मेदार होंगे। जयराम सरकार ने नहीं दी अब तक कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्ति हिमाचल प्रदेश में साल 2008 से पीस मील वर्करों की भर्ती की जा रही है, जब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री थे। उस वक्त इन कर्मचारियों के लिए 8 साल के बाद अनुबंध पर लाने की पॉलिसी बनाई गई थी। यानी 8 सालों तक सेवाएं देने के बाद इन कर्मचारियों को अनुबंध पर लाया जाता था और अनुबंध काल पूरा होने के बाद इन्हें बतौर नियमित कर्मचारी नियुक्ति दी जाती थी। तदोपरांत पिछली सरकार में परिवहन मंत्री रहे जीएस बाली द्वारा बनाई गई नीति के अनुसार आईटीआई डिप्लोमा धारकों को 5 साल बाद और गैर डिप्लोमा धारकों को 6 वर्षों के बाद अनुबंध पर लेने की नीति बनाई गई। कायदे से होना भी ऐसा ही चाहिए लेकिन समस्या यह है कि जयराम सरकार ने अपने कार्यकाल में ये अवधि पूरी कर चुके लोगों को अब तक कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्ति नहीं दी है। पीस मिल कर्मचारी की आवाज़ लगातार हुक्मरानो तक पहुंचाने वाले संगठन पीस मिल कर्मचारी संघ द्वारा सरकार से इन कर्मचारियों को अविलंब अनुबंध में शामिल करने की मांग लगातार उठाई जा रही है। एचआरटीसी पीस मिल कर्मचारी संघ का कहना है कि एचआरटीसी के 28 डिपुओं में कार्यरत पीस मिल कर्मचारियों की दुर्दशा पर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा। संघ का कहना है कि सरकार द्वारा इन कर्मचारियों को प्रति कार्य के आधार पर वेतन दिया जाता है जो नाममात्र वेतन है और उस आय से कर्मचारियों के लिए परिवार चलाना बहुत मुश्किल हाे जाता है। इसके कारण कर्मचारियों को परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है। 8 से 10 घंटे ड्यूटी, पर सुविधा नाममात्र पीस मिल कर्मचारी संघ का कहना है कि इनके लिए कोई सरकारी सुविधा उपलब्ध नहीं है। ये रेगुलर कर्मचारियों की तरह ही 8 से 10 घंटे ड्यूटी दे रहे है मगर रेगुलर कर्मचारियों की तरह सरकारी नौकरी के कोई भी लाभ इन्हें नहीं दिए जाते। कोरोना काल में भी इन कर्मचारियों ने अपनी पूरी सेवा दी है। बसों का मैकेनिकल कार्य किया और उनको रोड पर पहुंचाया। ये कर्मचारी अपनी नौकरी से नाखुश है क्योंकि इन्हें इनका मासिक वेतन भी कई बार पूरा नहीं दिया जाता। Himachal Pradesh News | Himachal Government Employee's News
हाल ही में हुई जेसीसी कि बैठक में कर्मचारियों का अनुबंध काल एक बार फिर घट गया है परन्तु अब भी अनुबंध सेवा काल को नियमित सेवा काल से जोड़ने की मांग पूरी नहीं हो पाई है। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि अन्य मांगों के साथ उनकी इस मांग को भी मुख्यमंत्री पूरा करेंगे परन्तु इनके हाथ निराशा लगी। मांग तो पूरी नहीं हुई बस इसे जल्द पूरा करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी के गठन की बात कही गई और वो भी अब तक नहीं हो पाया है। नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता लाभ नहीं मिलने पर अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन के तेवर कड़े हो गए हैं। संघ ने दो टूक कहा कि अनुबंध सेवाकाल दो वर्ष करने से भाजपा के वोट बैंक में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी बल्कि प्रदेश के 70 हजार से अधिक कर्मचारियों को वरिष्ठता लाभ नहीं देने पर सरकार को वर्ष 2022 के चुनावों में नुकसान उठाना पड़ेगा। संघ ने सरकार से पूछा है कि आठ से तीन वर्षों तक अनुबंध पर रहने वाले कर्मचारियों को किस बात की सजा दी जा रही है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष मुनीष गर्ग और महामंत्री अनिल सेन का कहना है कि अनुबंध सेवाकाल से वरिष्ठता का लाभ देने के लिए अगर कमेटी का गठन करना ही था तो एक महीने पहले ही इसका गठन क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि करीब 3 वर्ष पहले धर्मशाला के जोरावर मैदान में एनपीएस की रैली के दौरान मुख्यमंत्री ने ओपीएस पर कमेटी गठित करने की बात कही थी, लेकिन उस कमेटी का गठन आज तक नहीं हो पाया है। उन्होंने आशंका जाहिर की कि कहीं वरिष्ठता के मसले पर भी ऐसा ही न हो। संघ का कहना है कि एक ईमानदार कर्मचारी के लिए मानदेय से ज़्यादा मान सम्मान मायने रखता है, बस इसी मान सम्मान को ठेस पहुंचती है जब कोई जूनियर कर्मचारी सरकार की ढुलमुल और भेदभावपूर्ण नीतियां के कारण सीनियर हो जाए l पैमाना यदि कार्य कुशलता हो तो कोई आपत्ति नहीं पर यदि सरकार की नीति के चलते ऐसा हो, तो आपत्ति जायज है l संघ का कहना है कि सरकारें अनुबंध काल 8 से 6, 6 से 5, 5 से 3 और 3 से 2 वर्ष तो करती रहीं और वरिष्ठता नियमितीकरण की तारीख से देती रहीं। पर इसमें उन कर्मचारियों का क्या कसूर जिन्होंने 8 वर्ष, 6 वर्ष, 5 वर्ष और 3 वर्ष का लंबा अनुबंध काल काटा है। यह कर्मचारी वरिष्ठता न मिलने से सरकार से नाराज हैं। संघ के अनुसार इनकी संख्या करीब 70 हजार है। इसका खामियाजा प्रदेश सरकार को 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों में उठाना पड़ सकता है। इनकी मांग है कि सरकार को अति शीघ्र अनुबंध से नियमित कर्मचारियों को वरिष्ठता देने की घोषणा करनी चाहिए। ये है पूरा मसला दरअसल ये मसला शुरू हुआ 2008 में, जब बैचवाइज और कमीशन आधार पर लोकसभा आयोग और अधीनस्थ कर्मचारी चयन आयोग द्वारा कर्मचारियों की नियुक्तियां अनुबंध के तौर पर की जाने लगी l पहले अनुबन्ध काल 8 साल का हुआ करता था जो बाद में कम होकर 6 फिर 5 और फिर 3 साल हो गया। ये अनुबन्ध काल पूरा करने के बाद यह कर्मचारी नियमित होते है। अनुबंध से नियमित होने के बाद इन कर्मचारियों की अनुबंध काल की सेवा को उनके कुल सेवा काल में नही जोड़ा जाता, जो संगठन के अनुसार सरासर गलत है। इनका कहना है कि अनुबंध काल अधिक होने से पुराने कर्मचारियों को वित्तीय नुकसान के साथ प्रमोशन भी समय पर नहीं मिल पातीl अब मांग है कि उनको नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता प्रदान की जाए ताकि उन्हें समय रहते प्रमोशन का लाभ मिल सके। अनुबंध काल की सेवा का वरिष्ठता लाभ ना मिलने के कारण उनके जूनियर साथी सीनियर होते जा रहे हैं। मौलिक और समानता के अधिकार का हनन अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन का कहना है कि कुछ अनुबंध कर्मचारी 8 वर्ष के बाद नियमित हुए, कुछ 6 वर्ष के बाद, कुछ 5 वर्ष के बाद और वर्तमान में 3 वर्ष के बाद नियमित हो रहे हैं और अब आने वाले समय में 2 वर्ष में कर्मचारी नियमित होंगे। ऐसे में ये नीति कर्मचारियों के मौलिक और समानता के अधिकार का हनन है। भारत के संविधान में समानता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। कर्मचारियों को अलग अलग अंतराल में नियमित करने से असमानता फैली है। सरकार को नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता प्रदान करके इस असमानता को तुरंत खत्म करना चाहिए। संघ की मांग है कि नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता की मांग को पूरा करने के लिए जल्द से जल्द कमेटी का गठन किया जाए। Himachal Pradesh News | JCC Meeting News Updates
प्रदेश में बढ़ती महंगाई को लेकर विपक्ष लगातर सरकार का घेराव कर रहा है। पूर्व विधायक अजय महाजन ने महंगाई व बेरोजगारी पर सरकार को आड़े हाथ लिया है। अजय महाजन का कहना है कि बढ़ती महंगाई व बेरोजगारी से आम आदमी त्रस्त हो गया है। महंगाई कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। इससे साबित होता है कि प्रदेश सरकार की नीतियां जन विरोधी हैं। जनता त्रस्त है पर सरकार कोई भी जनकल्याण का फैसला नहीं ले रही है। अजय महाजन का कहना है कि जनता ज्यादा परेशान न हो यह सरकार अब कुछ ही दिनों की मेहमान है। कांग्रेस सत्ता में आते ही आम आदमी की परेशानी को दूर करने के लिए जन कल्याण की नीतियां बनाएगी और लोगों को महंगाई व बेरोजगारी की समस्याओं से निजात दिलाएगी। अजय महाजन का कहना कि हाल ही में हुई जेसीसी की बैठक में कर्मचारियों को कोई फायदा नहीं हुआ है। जिस छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। उसमें तो पहले ही पांच साल का विलंब हो चुका है। मुख्यमंत्री ने ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू न कर सिर्फ 2009 की नोटिफिकेशन को मानकर कर्मचारियों के हितों के साथ कुठाराघात किया है, 2009 की नोटिफिकेशन तो ओल्ड पेंशन स्कीम का ही एक हिस्सा है। हजारों आउटसोर्स कर्मचारी जो सरकारी कर्मचारी के बराबर काम करते हैं, इसके लिए कोई नीति न लाकर सरकार ने कर्मचारी हितैषी न होने का प्रमाण दिया है। अजय महाजन का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जनकल्याण के कार्य किए जिस कारण वह लोगों के दिलों में आज भी राजा की तरह राज करते हैं। जबकि भाजपा ने 2017 के विजन डॉक्यूमेंट में जो वादे कर्मचारियों से किए थे उन्हें ही पूरा करने में चार साल का विलंब कर दिया है। यही कारण है कि जनता ने उपचुनाव में चारों सीटें कांग्रेस को दिलवाकर बता दिया है कि सरकार की मशीनरी हांफ गई है। महंगाई व बेरोजगारी पर कोई लगाम नहीं है। Himachal Pradesh News | Himachal Politics
जेसीसी की बैठक के बाद पुलिस विभाग लगातार सरकार से अपनी मांगों को पूरा करने के लिए आवाज़ उठा रहा है। इसी बीच पुलिस विभाग की समस्याओं को नजरअंदाज करने को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सुजानपुर विधायक राजेंद्र राणा ने सरकार पर निशाना साधा है। राजेंद्र राणा का कहना है कि प्रदेश की जनता को हर तरफ से न्याय देने की जिम्मेदारी उठाए पुलिस विभाग की समस्याओं को सरकार नजरअंदाज न करे। अगर पुलिस विभाग को ही न्याय नहीं मिल रहा है तो यह सिस्टम की खामी नहीं, सरकार की नाकामी है। 7 रुपए प्रतिदिन की डाईट मनी देकर सरकार पुलिसकर्मियों से क्रूर मजाक कर रही है जो कि पुलिस कर्मियों के लिए न तर्कसंगत है न न्याय संगत और न ही सहन करने के काबिल है। लेकिन बीजेपी सरकार पुलिस की इस जायज मांग को लगातार नजरअंदाज कर रही है। राजेंद्र राणा का कहना है की पुलिस प्रशासनिक अधिकारी भी सरकार की घोर उपेक्षा को लेकर खासे नाराज हैं। सरकार पुलिस अधिकारियों की प्रमोशन को लेकर उपेक्षित व अडियल रुख अपनाए हुए है। राणा का कहना है कि पुलिस में एचपीएस स्तर के अधिकारियों की प्रमोशन 11 साल से लगातार रुकी है। पुलिस प्रमुख संजय कुंडू की अध्यक्षता में सिस्टम में चल रहे असंतुलन को लेकर सरकार को गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद भी सरकार मूक और मौन बनी हुई है। आलम यह है कि डीएसपी व एडिशनल एसपी स्तर के 189 अधिकारी वर्षों से अपनी प्रमोशन की राह देख रहे हैं। इनमें डायरेक्ट भर्ती हुए डीएसपी, एडिशनल एसपी व प्रमोट होकर आए कांस्टेबल व सब-इंस्पेक्टर से डीएसपी बने अधिकारियों की फौज सरकार की ओर टकटकी लगाए हुए देख रही है। राणा का कहना है कि विजिलेंस, सीआईडी, स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल सेंटर में अनुभव प्राप्त अधिकारियों की दरकरार है लेकिन सरकार इस समस्या से अनजान बनकर नई पोस्ट क्रिएट नहीं कर रही है। इस कारण से जुगाड़ व सिफारिश के आधार पर अधिकारियों को तैनात किया जा रहा है, जबकि लम्बा अनुभव रखने वाली पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों की फौज सरकार की इस घोर उपेक्षा से कुंठित व प्रताड़ित महसूस कर रही है। मौजूदा दौर में 34 एडिशनल एसपी के पदों की जरूरत है और जब यह पोस्टें क्रिएट होंगी तो इनकी प्रमोशन का रास्ता खुलेगा। इसलिए सरकार पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों की इस मांग व जरूरत को ध्यान में रखते हुए तुरंत कार्रवाई अमल में लाए। वहीं राजेंद्र राणा ने सवर्ण समाज की समस्या का भी सरकार को घेरते हुए कहा है कि इस मसले को जल्द हल करें अन्यथा सवर्ण समाज का बढ़ता आक्रोश समूचे समाज को तनावग्रस्त कर रहा है। सरकार अपनी जवाबदेही व जिम्मेदारी से लगातार भाग रही है। राणा का कहना है कि सवर्ण आयोग की मांगों को लेकर सरकार ने इस वर्ग से वायदा किया था लेकिन अब सरकार वायदा खिलाफी कर रही है। Himachal Pradesh News | Himachal Politics
उपचुनाव में जीत हासिल करने के बाद कांग्रेस पार्टी लगातार सरकार के खिलाफ हल्ला बोल रही है। खाद्य सामान, पेट्रोल डीजल में लगातार हो रही वृद्धि और बढ़ती महंगाई के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस ने जन जागरण अभियान के तहत प्रदेश भर में हल्ला बोल है। इसी बीच कांग्रेस के नेता लगातार सरकार पर तंज कस रहे है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर का कहना है की जीत से उत्साहित होकर कांग्रेस चुप नहीं बैठी है और कांग्रेस पूरे प्रदेशभर में जन जागरण यात्रा के माध्यम से जनता को सरकार की गलत नीतियों से अवगत करवा रहे हैं। साथ ही सरकार के दुष्प्रचार से भी बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। राठौर का कहना है कि पूरे प्रदेश में 22 विधानसभा क्षेत्रों को चुना गया है और जल्द ही जन जागरण अभियान का दूसरा चरण भी शुरू किया जाएगा। कांग्रेस का सदस्यता अभियान भी जोरों शोरों से चल रहा है। भाजपा सरकार की ओर से कर्मचारियों के लिए की जा रही घोषणाओं पर भी कुलदीप राठौर ने तंज कसा है। कुलदीप राठौर का कहना है कि अंतिम वर्ष में सरकार द्वारा कर्मचारियों और दूसरे वर्ग को खुश करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन प्रदेश की जनता समझदार है और जनता समझती है कि इन घोषणाओं को जमीनी स्तर पर अमल में नहीं लाया जाएगा। यह सिर्फ लोगों को भ्रमित करने के लिए किया जा रहा है। कुलदीप राठौर का कहना है कि कांग्रेस पार्टी के लिए पूरा प्रदेश एक है लेकिन भाजपा ने प्रदेश को बांटने का काम किया है। राठौर का कहना है कि पुलिसकर्मियों के साथ जयराम राज में नाइंसाफी हुई है और सरकार को चाहिए था कि पुलिस की समस्याओं पर गौर किया जाता, क्योंकि इस तरह की घटनाओं से जनता का मनोबल भी गिरता है। Himachal Pradesh News | Himachal Politics
अपनी मांगों को लेकर कई कर्मचारी वर्ग लगातार सरकार से गुहार लगा रहे है। कर्मचारिओं की मांगों को मुद्दा बनाकर विपक्ष भी सरकार को घेरने में लगा है। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव केवल सिंह पठानिया का कहना है कि आज प्रदेश के हर वर्ग के कर्मचारी अपने हक की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतर आए हैं और प्रदेश सरकार की नजर इन कर्मचारियों पर नहीं बल्कि अपनी नाकामी को छुपाने के लिए पुलिस बल का प्रयोग करके इन कर्मचारियों की आवाज को दबाने में लगी है। केवल सिंह पठानिया का कहना है कि प्रदेश सरकार को प्रदेश के आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सम्मान देना चाहिए था जिन्होंने कोरोना काल में आगे आकर अपने और अपने परिवार को जोखिम में डाल कर जनता की सेवा की थी, लेकिन प्रदेश सरकार ने अपनी घटिया मानसिकता का परिचय देकर सम्मान देने के बजाय लाठियां बरसाई। इस सरकार को अब सत्ता में रहने का कोई हक नहीं है। पठानिया का कहना है कि सचिवालय के घेराव को पहुंचे भारतीय मजदूर संघ के कार्यकर्ताओं को लाठियां खानी पड़ी, मजदूर संघ के कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस कर्मियों ने धक्कामुक्की की और इस दौरान महासंघ के महासचिव और एक महिला आशा वर्कर कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल भी हो गए। प्रदेश के नौजवान बेरोजगारों को भी परीक्षा देने के लिए सरकार की नाकामी से भारी तकलीफों का सामना करना पड़ा। अगर सरकार ने समय रहते इन कर्मचारियों की मांगों पर गौर किया होता तो किसी को भी किसी भी प्रकार की तकलीफ का सामना नहीं करना पड़ता। इस धरने से प्रदेश की आम जनता भी अछूती नहीं रही कही न कही आम जनमानस को भी धरने की वजह से कई लोगों को परेशान होना पड़ा है। केवल सिंह पठानिया का कहना है कि प्रदेश के कर्मचारी वर्ग अपने हक के लिए आवाज उठा रहा है और सरकार पुलिस द्वारा मजदूर संघ के पदाधिकारियों सहित कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज करने में लग गई। एफआईआर तो उन लोगों पर होनी चाहिए जिनके द्वारा ये सब हुआ इसकी जिम्मेवार सरकार में बैठे सीएम, मंत्री और विधायक हैं। himachal Pradesh News | Himachal Politics
उपचुनाव में चारो सीटों पर मिली जीत के बाद प्रदेश में कांग्रेस (Congress) की जन जागरण अभियान के तहत निकाली पदयात्रा को लेकर उद्योग एवं परिवहन मंत्री बिक्रम सिंह ने कांग्रेस पर जुबानी हमला बोला है। बिक्रम सिंह का कहना है कि कांग्रेस ने इस तरह की पदयात्रा यूपी में भी की थी लेकिन वहां पर एक भी सीट कांग्रेस को नहीं मिल पाई थी। हिमाचल में उपचुनाव जीतने के बाद कांग्रेस अति उत्साहित है। बिक्रम सिंह का कहना है कि 2022 के चुनावों में भाजपा सुधार करते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अगुवाई में सरकार बनाएगी। उपचुनावों में मिली हार से उन्हें सुधार करने का मौका मिला है और वह इसमें निश्चित तौर पर सुधार करेंगे। वहीं बिक्रम सिंह का कहना है कि इन्वैस्टर मीट की ग्राऊंड ब्रेकिंग सेरेमनी को लेकर भी विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। इन्वैस्टर मीट जैसा इवेंट हिमाचल में इससे पहले हुआ ही नहीं है। उद्योग मंत्री का कहना है कि जो लोग आलोचना कर रहे हैं उनकी सरकार लंबे समय तक प्रदेश में रही हैं, क्या कभी वह इस तरह का इवेंट करवा पाए हैं। आलोचना करने वाले लोग 5 से 10 लोग भी इकट्ठा नहीं कर पाए हैं। विधानसभा में जब सवाल उठाए गए तो तथ्यों के साथ सरकार ने जवाब दिया है कि इन ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी से कितने लोगों को लाभ मिला है। बिक्रम सिंह का कहना है कि हिमाचल में पहली बार प्राइवेट सेक्टर में हिमाचल के युवाओं को तवज्जो मिली है। प्रदेश में प्रस्तावित इस ग्राऊंड ब्रेकिंग सेरेमनी में 15000 करोड़ रुपए की इन्वेस्टमेंट होगी। Himachal News | Himachal Politics
कोरोना के डेल्टा वैरिएंट ने जो बुरी यादें लोगो को दी वो धुंधलाई भी नहीं थी कि कोरोना का नया और अधिक संक्रामक वैरिएंट सामने आ गया। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन (Omicron) ने एक बार फिर दुनिया में सनसनी फैला दी है। अब तक 20 से अधिक देशों में इसके मामले पाए जाने की पुष्टि हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस वैरिएंट को वैरिएंट ऑफ कन्सर्न की लिस्ट में रखा गया है। बताया जा रहा है कि ओमिक्रॉन डेल्टा वैरिएंट से भी ज्यादा संक्रामक है। एक्सपर्ट्स का कहना है की ओमिक्रॉन मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज थैरेपी, वैक्सीनेशन या नेचुरल इंफेक्शन से होने वाले इम्यून रिस्पॉन्स को भी बेअसर कर सकता है। अब तक हुए अध्ययनों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि कोरोना के इस वैरिएंट में 32 से अधिक म्यूटेशन देखे गए हैं जो इसे अब तक का सबसे संक्रामक वैरिएंट बनाते हैं। सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में देखे गए कोरोना के इस वैरिएंट ने तेजी से अपने पैर फैलाने शुरू कर दिए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने इस नए वेरिएंट को B.1.1.529 यानी ओमिक्रॉन नाम दिया है। सबसे पहले कहाँ मिला ओमिक्रोन सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने अपने देश में इस नए वेरिएंट के होने की पुष्टि की थी। बाद में इजराइल और बेल्जियम में भी यह नया वेरिएंट पाया गया। इसके अलावा बोत्सवाना और हांगकांग ने भी अपने यहां वेरिएंट के मौजूद होने की पुष्टि की। भारत में भी इस वैरिएंट के मामले सामने आ चुके है। वैज्ञानिकों को ऐसे मिला ओमिक्रॉन दक्षिण अफ्रीका की सबसे बड़ी निजी टेस्टिंग लैब लांसेट की विज्ञान प्रमुख रकेल वियाना के लिए वह जिंदगी का सबसे बड़ा झटका था। उनके सामने कोरोनावायरस के आठ नमूनों के विश्लेषण थे, और इन सभी में अत्याधिक म्यूटेशन नजर आ रहा था, खासकर उस प्रोटीन की मात्रा तो बहुत ज्यादा बढ़ी हुई थी जिसका इस्तेमाल वायरस इंसान के शरीर में घुसने के लिए करता है। रकेल वियाना के अनुसार उसे देखकर उन्हें बड़ा झटका लगा था। उन्होंने पूछा भी कि कहीं प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ तो नहीं हो गई है लेकिन जल्दी ही वो झटका एक गहरी निराशा में बदल गया क्योंकि उन नमूनों के बहुत गंभीर नतीजे होने वाले थे। इसके बाद वियाना ने जोहानिसबर्ग स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्यूनिकेबल डिजीज (NICD) स्थित अपने एक सहयोगी वैज्ञानिक डेनियल एमोआको को फोन किया। एमोआको जीन सीक्वेंसर हैं। 20-21 नवंबर को एमोआको और उनकी टीम ने वियाना के भेजे आठ नमूनों का अध्ययन किया। उन सभी में समान म्यूटेशन पाई गई। कितना घातक है ओमिक्रोन वैज्ञानिक अध्ययनों में इस बात का खुलासा हुआ है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट सबसे घातक डेल्टा वेरिएंट से भी खतरनाक है। चिंता की बात यह है कि जो लोग कोविड टीकाकरण की दोनों खुराक ले चुके हैं, वह भी इस वेरिएंट की चपेट में आ सकते हैं। अब तक के वैज्ञानिक विश्लेषण से यह भी पता चला है कि नया वेरिएंट डेल्टा सहित किसी भी अन्य वेरिएंट की तुलना में तेजी से फैल रहा है। ओमिक्रॉन वेरिएंट में अब तक K417N, E484A, P681H और N679K जैसे म्यूटेशनों का पता चला है जो रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली को पूरी तरह से तोड़ देते हैं। ऐसे में लोगों को अधिक सावधान रहने की जरूरत है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने इसे 'वैरिएंट ऑफ कन्सर्न' माना है और पिछले सभी वेरिएंट से ज्यादा तेजी से फैलने वाला बताया है। उन लोगों को भी यह संक्रमित कर सकता है जो पहले संक्रमित हो चुके हैं या वैक्सीन लगवा चुके हैं। हो सकता है कि स्थिति गंभीर भी कर दे। साइंटिस्ट भी अभी इस बात को लेकर दुविधा में है कि इस नए वेरिएंट के खिलाफ वैक्सीन कितना असर करेगी। ओमीक्रोन के स्पाइक प्रोटीन में 32 से ज्यादा म्यूटेशन्स हैं और ACE2 रिसेप्टर, जिसके रास्ते संक्रमण व्यक्ति को संक्रमित करता है, उसमें 10 से ज्यादा म्यूटेशन्स हैं। डेल्टा वेरिएंट के महज 2 म्यूटेशन थे। कम म्यूटेशन के बाद भी डेल्टा ने सेकंड वेव के दौरान कहर बरपाया था। ऐसे में ओमीक्रोन 10 वैरिएंट के साथ स्थिति को और खराब कर सकता है। WHO के अनुसार, शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि ओमिक्रॉन वैरिएंट से लोगों में रीइंफेक्शन का खतरा भी बढ़ सकता है। यानी कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके लोग भी इस नए वैरिएंट की चपेट में आ सकते हैं। इस पर अभी बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। अधिक जानकारी मिलने में थोड़ा समय लग सकता है। तब तक लोगों को संभलकर रहने की सलाह दी गयी है। कैसे होता है वायरस का म्यूटेशन? एक वायरस का पहला काम किसी के शरीर में प्रवेश के बाद खुद को जीवित रखना होता है और नेचर के हिसाब से वो शरीर में जाकर अपने आकार को बदलता है। वायरस अपना स्वरूप बदलते रहते हैं, जिसके कारण उनके नए-नए वेरिएंट बनते रहते हैं। आमतौर पर नए स्ट्रेन या वेरिएंट के काम करने के तरीके में कोई ज्यादा बदलाव नहीं आता। एक बार होस्ट यानी किसी शरीर में पहुंचने के बाद वायरस तेजी से अपने आरएनए की कॉपी बनाने लगता है, जिससे कि उसकी संख्या बढ़ती रहती है। कई बार जब वायरस अपनी संख्या बढ़ा रहा होता है तो उसमें गलती से या रेंडमली आरएनए के कॉपी ने गड़बड़ी आ जाती है, इसे ही वैज्ञानिक म्यूटेशन कहते हैं। इसके कारण उसका स्वरूप बदल जाता है और एक नया स्ट्रेन सामने आ जाता है। SARS-CoV-2 पहली बार पहचाने जाने के बाद से लगातार खुद को बदल रहा है। ओमीक्रोन जिसे पहले B.1.1.1.529 के रूप में जाना जाता है। ये इस वायरस का तेरवां प्रकार है। वायरस के आनुवंशिक कोडिंग में कुछ त्रुटियों के कारण म्यूटेशन होता है। आमतौर पर यह स्थिति तब आती है जब वायरस रेप्लीकेट कर रहा होता है। कभी-कभी आनुवंशिक कोड में ये परिवर्तन वायरस में एक प्रोटीन को बदल देते हैं जिससे वायरस की प्रकृति में बदलाव आ जाता है। यही कारण है कि म्यूटेशन के बाद वायरस अधिक संक्रामक और घातक हो जाते हैं। वैज्ञानिक मानते है कि ओमिक्रॉन के मामले में भी संभवत: ऐसा ही कुछ हुआ होगा। इसलिए पड़ा ओमीक्रोन नाम कोरोना वायरस में अब तक कई म्युटेशन हो चुके है और ओमीक्रोन SARS-CoV-2 का 13वां वैरिएंट है। कोरोना के वैरिएंट्स का नाम आसान बनाने के लिए उन्हें ग्रीक लेटर्स के हिसाब से बुलाया जाता है। जैसे अल्फा, बीटा, गामा व डेल्टा। कोरोना वायरस के नए वैरिएंट का नाम ओमिक्रॉन रखा गया है। ग्रीक अक्षरों में यह 15वें नंबर पर आता है। कोरोना के 12 वैरिएंट मौजूद हैं। यानी ये 13वां होना चाहिए था। मू (Mu) वैरिएंट के बाद 13वें नंबर पर नू (Nu) या 14वें नंबर पर शी (Xi) नाम देना चाहिए था। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस दक्षिण अफ्रीका से निकले नए वैरिएंट का नाम 15वें ग्रीक अक्षर ओमिक्रॉन (Omicron) पर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता तारिक जसारेविक के अनुसार नू (Nu) और शी (Xi) बेहद कॉमन अक्षर हैं। कई देशों में इनका उपयोग नाम के आगे या पीछे होता है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि शी (Xi) अक्षर का उपयोग इसलिए नहीं किया गया क्योंकि यह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) का नाम है। WHO का नियम है कि वायरस का नाम किसी व्यक्ति, संस्था, संस्कृति, समाज, धर्म, व्यवसाय या देश के नाम पर नहीं दिया जाता है, ताकि किसी की भावना आहत न हो। जहां तक बात रही नू (Nu) अक्षर इंग्लिश के न्यू (New) शब्द से मिलता-जुलता है। इनका उच्चारण भी लगभग एक जैसा है। लोग उच्चारण के समय कन्फ्यूज न हो इसलिए इस 13वें ग्रीक अक्षर का उपयोग कोरोना के नए वैरिएंट का नाम देने में नहीं किया गया,क्योंकि लोग न्यू वैरिएंट और नू वैरिएंट में कन्फ्यूज हो सकते हैं। कितनी असरदार है वैक्सीन? लैंसेट की एक हालिया रिसर्च में सामने आया है कि अप्रैल-मई 2021 में भारत में कोविड की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार डेल्टा वेरिएंट पर कोविशील्ड वैक्सीन काफी प्रभावी रही थी। इस रिसर्च के मुताबिक पूरी तरह वैक्सीनेटेड लोगों पर वैक्सीन की एफिकेसी 63 फीसदी रही, जबकि डेल्टा से होने वाली मध्यम से गंभीर बीमारी के खिलाफ वैक्सीन की एफिकेसी 81 फीसदी रही। वहीं, ओमिक्रॉन पर मौजूदा वैक्सीनों के असर को लेकर फिलहाल कोई रिसर्च मौजूद नहीं है, लेकिन इस वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में 30 से अधिक म्यूटेशन की वजह से इस पर मौजूदा वैक्सीनों के बहुत कम प्रभावी रहने की आशंका है। अधिकतर वैक्सीन स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ ही एंटीबॉडीज तैयार करती हैं, लेकिन ओमिक्रॉन के स्पाइक प्रोटीन में तेज म्यूटेशन की क्षमता से मौजूदा वैक्सीन इसके खिलाफ बेअसर हो सकती हैं। हालांकि ओमिक्रॉन पर मौजूदा वैक्सीन की एफिकेसी के आकलन को लेकर रिसर्च जारी है और इस नए वैरिएंट पर वैक्सीन कितनी कारगर होगी, इसके बारे में कुछ दिनों में पता चल पाएगा। क्या RT-PCR से पता चला पाएगा? वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने बताया है कि इस वैरिएंट को लेकर एक अच्छी बात ये है कि दुनिया में इस्तेमाल किए जा रहे RT-PCR टेस्ट के जरिए इसका पता लगाया जा सकता है। हालाँकि कई वैज्ञानिकों का मानना है की RT-पीसीआर से इसका पता लगा पाना बेहद कठिन है। वैज्ञानिकों के मुताबिक आरटी-पीसीआर टेस्ट से ही इस बात की पुष्टि हो सकती है कि व्यक्ति को संक्रमण है या नहीं, लेकिन ये टेस्ट यह पता नहीं लगा सकता कि रोगी को कोरोना वायरस का कौन सा वेरिएंट है। इसका पता लगाने के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग स्टडी करनी होगी। लेकिन यहां पर भी एक पेंच है। सभी संक्रमित नमूनों को जीनोम अनुक्रमण के लिए नहीं भेजा जाता है, क्योंकि यह एक धीमी, जटिल और महंगी प्रक्रिया है। आम तौर पर सभी सकारात्मक नमूनों का केवल एक बहुत छोटा सा हिस्सा लगभग 2 से 5 प्रतिशत ही जीनोम के लिए भेजा जाता है। ये है लक्षण ओमिक्रॉन के लक्षण के बारें में WHO का कहना है कि अभी तक किसी तरह के खास लक्षण सामने नहीं आए हैं, लेकिन साउथ अफ्रीका की डॉ. एंजेलिक कोएट्जी जिसने सबसे पहले COVID-19 ओमीक्रोन वैरिएंट को रिपोर्ट किया था उनके अनुसार ओमिक्रॉन के “असामान्य लेकिन हल्के” लक्षण देखे जा रहे हैं। डॉ. एंजेलिक कोएट्जी का कहना है कि ओमिक्रॉन के लक्षण डेल्टा से अलग हैं। कोरोना के दूसरी वैरिएंट से इंफेक्ट होने पर स्वाद और सूंघने की क्षमता पर असर पड़ता था, लेकिन ओमिक्रॉन के मरीजों में ये लक्षण नहीं देखा जा रहा है। साथ ही गले में खराश तो रहती है, लेकिन कफ की शिकायत देखने को नहीं मिल रही है। बचाव वैक्सीनेशन जरूर करवाएं जरूरी है कि हर कोई अपना वैक्सीनेशन करवाएं। भारत में बड़ी ही तेजी से वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में जरूरत है कि हर कोई कोरोना वैक्सीन लगवाए और अपने घर-परिवार या दोस्तों को इस बारे में बताए। कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी है। ऑमिक्रोन से दूरी, मास्क है जरूरी कोरोना की पहली लहर के साथ ही विशेषज्ञों और डॉक्टर्स ने ये साफ कर दिया था कि मास्क बेहद जरूरी है। घर से बाहर जाते समय, दफ्तर में, बाजार में, किसी से मिलते समय आदि। मतलब हमें खुद भी मास्क पहनना है और बच्चों को भी पहनाना है। हो सके तो एक सर्जिकल और दूसरा कपड़े वाला मास्क पहनकर आप डबल मास्किंग भी कर सकते हैं। सामाजिक दूरी बनाकर रखें कोरोना के इस नए वैरिएंट से बचना है, तो हर किसी को पहले की तरह ही एक-दूसरे से सामाजिक दूरी बनाकर रखनी पड़ेगी। बेवजह घर से बाहर जाने से बचें, भीड़ वाली जगहों से खुद को दूर रखें, दुकान पर भीड़ करने से बचें, दफ्तर जा रहे हैं तो अलग रहें आदि। हैंड हाइजीन का ख्याल रखें हमें अपने हाथों को साबुन और सैनिटाइजर से साफ करते रहना चाहिए। पानी और साबुन से 20 मिनट तक अपने हाथों को धोएं, घर में जाते समय सैनिटाइजर करें, घर जाकर नहाना भी एक बेहतर विकल्प है आदि। India News | Corona Update | Himachal Pradesh
2022 विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और दोनों राजनैतिक दलों के साथ -साथ टिकट के चाहवान भी मैदान में डटे है। यूं तो हर सीट पर रोचक घमासान तय है और अभी से खींचतान भी चरम पर है, पर सोलन निर्वाचन क्षेत्र की कहानी अलग भी है और अजब भी। यहां कांग्रेस के पास 80 पार कर चुके कर्नल का कोई विकल्प नहीं दिखता तो भाजपा के डॉक्टर अपनों के मर्ज का ही सबब बने हुए है। कर्नल के नेतृत्व में कांग्रेस लगातार अच्छा कर रही है, बावजूद इसके उनके विरोधियों की खासी तादाद है। पर वर्तमान में कोई ऐसा नहीं दिखता जो कर्नल के टिकट को चुनौती दे रहा हो। उधर भाजपा में डॉ राजेश कश्यप को अपने ही पूरी तरह नहीं स्वीकार रहे। विरोधी इसी ताक में है कि कोई मौका हाथ लगे और डॉक्टर को चित कर दे। पार्टी इसका खामियाजा भी उठा रही है। सोलन की वर्तमान सियासत को समझने के लिए बीते दो दशक पर नज़र डालना जरूरी है। वर्ष 2000 में सोलन विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ था और उस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी डॉ राजीव बिंदल ने जीत दर्ज की थी। ये पहली बार था जब बिंदल विधानसभा पहुंचे थे, यानी ये प्रदेश की सियासत में बिंदल की एंट्री थी। इसके बाद 2003 और 2007 में भी बिंदल जीते और सोलन निर्वाचन क्षेत्र भाजपा का मजबूत गढ़ बना गया। बिंदल ने आते ही तमाम विरोधी भी साइडलाइन कर दिए और इस दौरान सोलन में कांग्रेस भी कमजोर होती गई। फिर बदले परिसीमन के बाद सोलन निर्वाचन क्षेत्र आरक्षित हो गया और 2012 के विधानसभा चुनाव में बिंदल चेहरा नहीं रहे। बिंदल ने नाहन को कर्मभूमि बनाया और पार्टी ने कुमारी शीला को चेहरा। वहीं कांग्रेस ने दो बार शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे कर्नल धनीराम शांडिल को मैदान में उतारा। नतीजे आये और शांडिल की जीत के साथ ही कांग्रेस ने जीत का सूखा खत्म किया। तब से अब तक सोलन निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा लगातार कमजोर होती दिखी है। बिंदल के बाद जिस एक अदद चेहरे की जरुरत पार्टी को है उसे लेकर अब भी संशय की स्थिति है। 2017 के विधानसभा चुनाव में जहां कांग्रेस ने फिर कर्नल धनीराम शांडिल पर भरोसा जताया था तो भाजपा ने आईजीएमसी में बतौर चिकित्सक सेवाएं देते रहे डॉ राजेश कश्यप को मैदान में उतारा। तब कुमारी शीला और तरसेम भारती भी दावेदार थे लेकिन डॉ राजेश कश्यप की पैराशूट लैंडिंग ने सबके अरमानो पर पानी फेर दिया। माना जाता है कि टिकट के लिए उनकी राह प्रशस्त करने में तब डॉ राजीव बिंदल की भी अहम भूमिका रही थी। हालांकि बिंदल के करीबी ही टिकट आवंटन को लेकर नाराज़ थे। खेर नजदीकी मुकाबले में डॉ राजेश कश्यप हार गए और कर्नल धनीराम शांडिल लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचे। इस चुनाव के बाद सोलन भाजपा में बहुत कुछ बदला और पार्टी दो धड़ों में बंटी दिखी है। चुनाव के बाद कश्यप आहिस्ता-आहिस्ता सोफट गुट के नजदीक हो गए। वहीं महेंद्र नाथ सोफत जिन्हे बिंदल का धुर विरोधी माना जाता है। इसी गुटबाजी का नतीजा है कि इसी वर्ष हुए जिला परिषद और सोलन नगर निगम चुनाव भी भाजपा के लिए प्रतिकूल रहे है और वर्तमान स्थिति में पार्टी के लिए 2022 की राह भी आसान होने वाली नहीं है। शीला और तरसेम, सक्रियता और पकड़ दोनों बढ़ाने होंगे ! भले ही सोलन भाजपा में एक बड़ा तबका डॉ राजेश कश्यप के विरोध में दिख रहा हो लेकिन सवाल ये है कि 2022 में यदि डॉ राजेश कश्यप नहीं तो कौन ? जिला परिषद् चुनाव में सलोगड़ा वार्ड से कुमारी शीला भाजपा उम्मीदवार थी। लगातार तीन चुनाव जीत चुकी कुमारी शीला जीत का चौका लगाने का दावा कर रही थी लेकिन जनता का आशीर्वाद उन्हें नहीं मिला। ये हार कुमारी शीला के लिए बड़ा झटका है। शीला अगर जीत जाती तो 2022 के लिए उनका दावा भी मजबूत होता, किन्तु ऐसा हुआ नहीं। शीला अधिक सक्रीय भी नहीं दिख रही है। ऐसी ही स्थिति 2017 तक पार्टी में प्रो एक्टिव दिखते रहे तरसेम भारती की है। पहले ख़राब स्वास्थ्य ने तरसेम को सक्रिय राजनीति से दूर रखा। अब भी वे अधिक सक्रिय नहीं दिखते और न ही पार्टी के जमीनी संगठन में उनकी स्वीकार्यता और पकड़ दिखती है। इन दोनों नेताओं को यदि 2022 के लिए अपना दावा मजबूत करना है तो सक्रियता भी बढ़ानी होगी और दमखम भी दिखाना होगा। वर्तमान स्थिति में तो ये डॉ राजेश कश्यप को ज्यादा टक्कर देते नहीं दिखते। क्या दो भाइयों में होगा टिकट के लिए मुकाबला ? भाजपा के सामने एक अन्य विकल्प पूर्व सांसद वीरेंद्र कश्यप भी हो सकते है। कश्यप दो बार शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे है। रोचक बात ये है कि डॉ राजेश कश्यप और वीरेंद्र कश्यप भाई है। पर वीरेंद्र कश्यप 2019 लोकसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद से ही लगभग साइलेंट है। जानकार मानते है कि सियासत महाठगिनी है और 2022 में टिकट के लिए दो भाई भी अगर दौड़ में दिखे तो शायद किसी को हैरानी न हो। कश्यप फेस, पर तालमेल बैठाने में फेल सोलन की सियासत में फिलवक्त डॉ राजेश कश्यप ही भाजपा का प्राइम फेस है। सरकार में कामकाज करवाने का रसूख कश्यप का ही माना जाता है लेकिन जमीनी संगठन में ही उन्हें लेकर स्वीकार्यता नहीं दिखती। दरअसल भाजपा के संगठन में बिंदल के निष्ठावानों की भरमार है। ऐसे में डॉ कश्यप के साथ संगठन पूरी तरह कदमताल करता नहीं दिखता। वहीँ कश्यप भी अब तक संगठन में उस तरह की जमीनी पैठ नहीं बना पाए जैसी समर्थकों को उनसे उम्मीद थी। इसी तालमेल की कमी का खामियाजा पार्टी जिला परिषद और नगर निगम चुनाव में भुगत चुकी है। हालात नहीं बदले तो निजी तौर पर डॉ राजेश कश्यप के लिए भी आगे की राह बेहद मुश्किल होगी। शांडिल का विकल्प नहीं 81 पार कर चुके डॉ कर्नल धनीराम शांडिल इस वक्त सोलन कांग्रेस का सबसे बड़ा और मजबूत चेहरा है। 2012 में शांडिल ने ही सोलन में कांग्रेस की वापसी करवाई थी और अब भी वे ही सोलन निर्वाचन क्षेत्र में एकछत्र नेता है। 2022 में भी संभवतः शांडिल ही कांग्रेस का चेहरा होंगे क्यों कि उनका विकल्प पार्टी के पास नहीं दिखता। वीरभद्र सरकार में मंत्री रहे शांडिल को गांधी परिवार का करीबी माना जाता है और यदि पार्टी की सत्ता वापसी होती है तो उन्हें कोई महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी भी दी जा सकती है। पर ये जहन में रखना भी जरूरी है कि 2022 विधानसभा चुनाव के वक्त शांडिल की उम्र 82 पार होगी और उनका विकल्प न होना पार्टी के अच्छी स्थिति नहीं है। गिले शिकवे मिटाकर होगी राह आसान वीरभद्र सरकार में मंत्री रहते हुए कर्नल धनीराम शांडिल ने साढ़े चार सौ करोड़ से अधिक के काम करवाए थे, हालांकि इसके बावजूद शांडिल प्रभावशाली जीत दर्ज नहीं कर सके। कई मौकों पर शांडिल पार्टी के एक गुट पर 2017 में उनके विरोध में काम करने की बात कह चुके है। जिला परिषद् चुनाव में सिरिनगर वार्ड के टिकट के लिए वरिष्ठ नेता रमेश ठाकुर और कर्नल में खुलकर ठनी और उस दौरान शांडिल ने रमेश ठाकुर की पत्नी लीला देवी का टिकट कटवाया। बावजूद इसके लीला देवी जीत दर्ज करने में कामयाब रही। रमेश ठाकुर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीबी मानते जाते है, पर अब वीरभद्र सिंह के निधन के बाद बदली स्तिथि में राजनैतिक समीकरण भी बदल सकते है। कंडाघाट ब्लॉक में ठाकुर का अच्छा प्रभाव है और 2022 में यदि पार्टी को बेहतर करना है तो कर्नल और ठाकुर को साथ आना होगा। बेदाग़ भी और गुटबाजी से भी दूर है शांडिल डॉ कर्नल धनीराम शांडिल, हिमाचल की सियासत का वो बेदाग़ नाम जिस पर विरोधी भी कभी कीचड़ नहीं उछाल पाएं। वीरभद्र सरकार के खिलाफ वर्ष 2016 में भाजपा एक चार्जशीट लाई जिसमे कांग्रेस के मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप थे। तब भाजपा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, बेटे विक्रमादित्य सिंह, प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू, 10 मंत्रियों, 6 सीपीएस और 10 बोर्ड-निगम-बैंकों के अध्यक्ष-उपाध्यक्षों समेत कुल 40 नेताओं और एक अफसर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। पर उस चार्जशीट में भी कर्नल धनीराम शांडिल का नाम नहीं था। यानी विपक्ष भी कभी उनकी ईमानदारी पर सवाल नहीं उठा पाया। एक बात और कर्नल शांडिल की खूबी है, वो है उनकी गुटबाजी से दुरी। प्रदेश कांग्रेस में कई धड़े है, पर शांडिल किसी भी गुट में शामिल नहीं है। ऐसे में शांडिल से पार पाने को भाजपा को संगठित भी होना होगा और पूरी ताकत भी झोंकनी होगी। Himachal Pradesh | Solan News | Himachal Politics
इशारों इशारों में एलान हो चूका है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर 2022 विधानसभा चुनाव के समर में उतरने को तैयार है। राठौर अपनी सियासी जमीन तलाशने में जुटे है और दो निर्वाचन हलकों में उनके चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है, पहला ठियोग और दूसरा शिमला शहरी सीट। विरोधी कभी मजबूर कहकर जिन कुलदीप राठौर का उपहास उड़ाते थे वो अब बेहद मजबूत दिख रहे है। चुनाव लड़ने के सवाल पर कुलदीप कहते है कि जिस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत जब्त हुई थी वहां से ही चुनाव लड़ेंगे। अब दिलचस्प बात ये है कि 2017 में ठियोग और शिमला शहर, दोनों जगह कांग्रेस की जमानत जब्त हुई थी। ठियोग से कांग्रेस प्रत्याशी दीपक राठौर, तो शिमला शहर से हरभजन सिंह भज्जी की जमानत जब्त हुई थी। यानी राठौर ने दोनों विकल्प खुले रखे है। ठियोग विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस की कद्दावर नेता विद्या स्टोक्स का चुनावी क्षेत्र रहा है। पर पिछले चुनाव में पार्टी आलाकमान ने यहाँ से मैडम स्टोक्स का टिकट काटकर दीपक राठौर को उम्मीदवार बनाया था। कहते है राठौर पार्टी आलकमान के नजदीकी है जिसके बुते ही उन्हें टिकट मिला था। तब दीपक राठौर टिकट तो ले आये पर जीत नहीं सके। ख़ास बात ये है की उस चुनाव में राठौर की जमानत जब्त हुई थी। ठियोग की जनता ने कम्युनिस्ट राकेश सिंघा को अपना विधायक चुना था। हालांकि राठौर पिछले चुनाव हारने के बाद से ही क्षेत्र में सक्रिय जरूर है। पर यदि कुलदीप सिंह राठौर ठियोग से चुनाव लड़ने का मन बनाते है तो दीपक राठौर को दूसरा मौका मिलना मुश्किल होगा। पर यहाँ कुलदीप राठौर को ये भी जहन में रखना होगा कि यदि माकपा विधायक राकेश सिंघा फिर से मैदान में उतरते है तो मुकाबला आसान नहीं होने वाला। जानकार मान कर चल रहे है कि सिंघा के अगले कदम पर ही कुलदीप की चुनावी चाल निर्भर करेगी। शिमला शहर की बात करें यहां पिछले चुनाव में पार्टी ने हरीश जनारथा की दावेदारी को नकार हरभजन सिंह भज्जी को टिकट दिया था। नतीजन पार्टी के एक गुट में नाराजगी थी और भज्जी की जमानत भी नहीं बच सकी। अब भी शिमला शहर में कांग्रेस कई गुटों में बंटी है और ये अंतर्कलह शिमला शहर में पार्टी का पुराना मर्ज रहा है। शिमला शहर में बीते कई चुनाव में कांग्रेस के अपने ही बतौर बागी पार्टी प्रत्याशी का खेल बिगाड़ते आ आ रहे है। ऐसे में राठौर के लिए भी शिमला शहर आसान सीट नहीं रहने वाली। हाँ टिकट के लिए उनका दावा जरूर मजबूत रहेगा क्यों की बतौर प्रदेश अध्यक्ष उनके योगदान के बुते उनका सियासी कद निसंदेह बढ़ा है। Himachal Politics | Shimla News | Theog News |
सरकार को उम्मीद थी कि जेसीसी की बैठक के बाद स्थिति बेहतर होगी। आर्थिक व्यय ज़रूर बढ़ेगा पर कर्मचारियों को साधने में कामयाबी मिलेगी। कर्मचारी भी खुश होंगे और विरोधी भी खामोश हो जाएंगे। पर हुआ कुछ और। जिन कर्मचारियों को सरकार ने सौगातें दी वो तो आधे अधूरे संतुष्ट हुए पर जिनके लिए सरकार कुछ नहीं कर पाई उनका गुस्सा दोगुना हो गया। प्रदेश में चार साल के लम्बे अंतराल के बाद भाजपा सरकार द्वारा कर्मचारियों के लिए जेसीसी की बैठक का आयोजन किया गया। कर्मचारियों की उम्मीदें आसमान छू रही थी। कर्मचारियों को लगा कि जो पिछले चार साल में नहीं हो पाया वो शायद अब हो जाए। उनकी सभी मांगे शायद सरकार पूरी कर दे। सरकार ने कोशिश भी की। कई मांगों को पूरा करने की घोषणा की गई। जेसीसी बैठक में मुख्यमंत्री ने पंजाब की तर्ज पर कर्मचारियों के लिए बहुप्रतीक्षित नए वेतनमान की घोषणा की, अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण की अवधि भी तीन वर्ष से घटाकर दो वर्ष करने की घोषणा हुई, सभी पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनभोगियों को एक जनवरी 2016 से संशोधित पेंशन और अन्य संबंधित लाभ की घोषणा जैसी कई अन्य छोटी बड़ी मांगें पूरी करने की घोषणाएं हुई। पर कर्मचारी पूरी तरह संतुष्ट हुए ऐसा बिलकुल नहीं कहा जा सकता। तर्क दिए गए की जिस छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की बात सरकार ने कही है उसमें तो पहले ही पांच साल का विलंब हो चुका है। ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू न कर सिर्फ 2009 की नोटिफिकेशन की घोषणा करना कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है और अनुबंध काल घटाने की घोषणा तो भाजपा अपने 2017 के दृष्टि पत्र में ही कर चुकी थी। जेसीसी की बैठक से लम्बे समय से नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता की मांग कर रहे कर्मचारी निराश घर लौटे, करुणामूलक आश्रितों का अनशन भी नहीं टूटा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भी नीति नहीं बन पाई। बड़ा बवाल तो उनकी तरफ से किया गया जिनकी मांगों का ज़िक्र तक मुख्यमंत्री करना भूल गए। बैठक के बाद सरकार के लिए सॉफ्ट कॉर्नर रखने वाले भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले प्रदेश के आशा वर्करों, आंगनबाड़ी वर्करों और कई संगठनों ने शिमला में विशाल रैली निकाली और सचिवालय गेट पर घंटों जमकर प्रदर्शन किया। पीस मिल कर्मचारी हड़ताल पर बैठ गए और यहां तक की पुलिस कर्मचारियों ने भी मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर लिया। यानी की मोटे तौर पर देखा जाए तो सरकार की मुश्किलें कम होने के बजाए और अधिक बढ़ गई। अब मुख्यमंत्री द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पीस मिल वर्कर समेत असंगठित क्षेत्रों के कर्मचारियों व अन्यों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने के लिए सभी विभागों को इन मांगों को अध्ययन करने के निर्देश दिए गए। पुलिस के कर्मचारियों की समस्या का हल निकालने की बात भी मुख्यमंत्री द्वारा कही गई है। पर असल सवाल ये है कि इन समस्याओं के हल के लिए सरकार आखिर वित्तीय सहायता लाएगी कहां से। आर्थिक तंगी बड़ी चुनौती कर्मचारियों की नाराज़गी मात्र ही सरकार की मुख्य समस्या नहीं है। सरकार ने कर्मचारियों की जेसीसी बैठक तो करवा ली, लेकिन बैठक में लिए गए फैसलों को धरातल पर उतारने के लिए 18 से 20 हजार करोड़ रुपये की रकम जुटाना 62 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी सरकार के लिए चुनौती होगा। इन फैसलों से इतर सड़कों पर उतर चुके असंतुष्ट कर्मचारियों और कामगारों को न्यायोचित वित्तीय लाभ देना भी आसान नहीं होगा। अगले वित्तीय वर्ष में केंद्र से लगभग 12 हजार करोड़ रुपये कम ग्रांट मिलेगी। राजस्व घाटा अनुदान, जीएसटी प्रतिपूर्ति आदि में कटौती हो रही है। नए वेतन अगर छह हजार करोड़ रुपये चाहिए तो इसके एरियर के लिए 12 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा रकम देनी होगी। एरियर की ज्यादा किश्तें बनाई तो भी कर्मचारी संतुष्ट नहीं होंगे। चुनावी साल से पहले पंजाब के बाद हिमाचल को नए वेतनमान देने की बाध्यता है। ऐसे में सरकार ये सब कैसे मैनेज करती है ये भी बड़ा सवाल है। सरकार कर्मचारियों की मांगें पूरी करनी की कोशिश कर रही है मगर इन मांगों को पूरा करने के लिए सरकार के पास संसाधनों की कमीं है ये स्पष्ट है। हर कर्मचारी को संतुष्ट कर पाना संभव भी नहीं लगता। सरकार नहीं कर्मचारी हितेषी कर्मचारियों की बढ़ती नाराज़गी के चलते विपक्ष को सरकार के खिलाफ मुद्दा मिल गया है। कांग्रेस के नेताओं के अनुसार मुख्यमंत्री कर्मचारी हितैषी नहीं है और जेसीसी की बैठक से कर्मचारियों को कोई फायदा नहीं हुआ है। कर्मचारियों को ये यकीन दिलाने की कोशिश की जा रही है की जो अब तक नहीं हुआ वो आगे भी नहीं होगा। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता व शिलाई से विधायक हर्षवर्धन चौहान ने तो ये तक कह दिया की जेसीसी की बैठक के बाद अराजकता फ़ैल गई है। कर्मचारियों के मुद्दों पर अपनी सियासी रोटियां खूब सेकी जा रही है। खैर वजह कोई भी हो मगर कर्मचारियों की बात हो रही है ये बड़ी बात है । उम्मीद्द है कि अब इस सियासी दबाव के बीच कर्मचारियों का बेड़ा पार हो जाए। मुख्य लंबित मांगे -पुरानी पेंशन बहाल की जाए - नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता प्रदान की जाए - करुणामूलक आश्रितों को वन टाइम सेटलमेंट के तहत नौकरियां दी जाए - पुलिस कॉन्स्टेबलों के प्रोबेशन पीरियड को घटाने की मांग - एचआरटीसी के पीस मिल कर्मचारियों को अनुबंध पर लाने की मांग - आशा वर्करों, आंगनबाड़ी, आउटसोर्स, सिलाई-कढ़ाई कर्मचारियों को सरकार के नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर वित्तीय लाभ देने की मांग | Himachal News Updates | Himachal Pradesh Govt. Employees News
कौन डटा रहेगा और किसे कुर्सी का मोह त्याग आगे बढ़ना होगा कुछ कह नहीं सकते। पर बदलाव होगा ये निश्चित है। स्वयं मुख्यमंत्री भी ये कह चुके है कि उपचुनाव की उस करारी शिकस्त के बाद अब वो होगा जो मंज़ूर-ए-आलाकमान होगा। कयासों की सुई अब संगठन और मंत्रिमंडल पर आकर टिक गई है। हालांकि कौन रहेगा और किसकी विदाई होगी अभी कुछ कह नहीं सकते। नगर निगम चुनाव और उपचुनाव में मिली हार के बाद, प्रेशर पॉलिटिक्स का दंश झेल रही भाजपा और भी कई मुसीबतों से गुज़र रही है। पार्टी विद डिसिप्लिन में व्यापक बदलाव की दरकार भी है और सुगबुगाहट भी। पहले तो मुख्यमंत्री तक बदलने के कयास लग रहे थे मगर अब माहौल थोड़ा ठंडा है तो ऐसा कुछ होता नहीं दिखाई दे रहा। पर मंत्रिमंडल के नॉन परफार्मिंग मंत्रियो पर अब भी बदलाव की तलवार लटक रही है। इस पर मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा भी खूब चर्चा में है। प्रदेश मंत्रिमंडल के कई मंत्री ऐसे है जो खुद को साबित करने में विफल रहे है। कई मौकों के बावजूद भी जो न तो अपना दमखम दिखा पाए और न ही अपनी साख बचा पाए। कई अपने शब्दों को लेकर विवादों में रहते है और कई अपने बर्ताव को लेकर। उपचुनाव में पार्टी ने जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर को मंडी संसदीय सीट के लिए, बिक्रम ठाकुर को फतेहपुर के लिए, और मंत्री सुरेश भारद्वाज को जुब्बल कोटखाई उपचुनाव के लिए प्रभारी नियुक्त किया था। इनके आलावा मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर और मंत्री राम लाल मारकंडा पर भी अपने -अपने क्षेत्रों से लीड दिलवाने का जिम्मा था। पर ये सभी असफल रहे। हार मिली या जीत कम से कम उपचुनाव में ये मंत्री फील्ड पर दिख रहे थे। इनके अलावा कुछ ऐसे मंत्री भी है जिनका उपचुनाव के दौरान कोई ख़ास प्रभाव देखने को नहीं मिला। जैसे की मंत्री राजेंदर गर्ग, सरवीण चौधरी, और मंत्री सुखराम चौधरी। भाजपा की तीन दिवसीय कार्यसमिति की बैठक के बाद ये तर्क दिया गया भाजपा के कार्यकर्ता व नेताओं में अतिआत्मविश्वास था और इसीलिए भाजपा उपचुनाव हारी। हालाँकि असल में आत्मविश्वास वाली स्थिति भी सिर्फ मंडी में देखने को मिल रही थी। लग रहा था मानों कार्यकर्ताओं को केवल मुख्यमंत्री पर भरोसा है। परिणाम भी कुछ ऐसे ही बाहर आए। शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर के जिला कुल्लू की चारों सीटों पर भाजपा पिछड़ी। मंत्री के अपने निर्वाचन क्षेत्र में भी पार्टी को लीड नहीं मिली। यानि मंडी संसदीय उपचुनाव के इम्तिहान में गोविन्द सिंह ठाकुर पूरी तरह फेल हो गए। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यदि मंत्री के जिला में पार्टी अच्छा करती तो जीत हार का अंतर खत्म किया जा सकता था। तकनीकी शिक्षा मंत्री डा. रामलाल मारकंडा के क्षेत्र में भी स्थिति कुछ ऐसी ही थी। मंत्री अपने हलके व गृह जिले में भाजपा की साख नहीं बचा पाए। लाहौल स्पीति में कांग्रेस प्रत्याशी को बढ़त मिली। लाहुल स्पीति के विधायक एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री डा. रामलाल मारकंडा जिला परिषद के चुनाव में भी कुछ अच्छा नहीं कर पाए थे। जिला परिषद् के चुनाव में भी भाजपा को हार मिली थी। इस पर मंत्री का लड़ाई वाला वायरल वीडियो भी एक ऐड ऑन फैक्टर है। बात विवादों की हो तो ज़िक्र मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर और मंत्री सुरेश भारद्वाज का भी ज़रूरी है। अपने बयानों को लेकर दोनों ही खूब चर्चा में रहते है। मंत्री महेंद्र ठाकुर को मंडी संसदीय उपचुनाव का प्रभारी बनाया गया था। पर वे भी चुनाव प्रचार प्रसार में अधिक प्रभावशाली नहीं दिखे। वहीं मंत्री सुरेश भारद्वाज के हलके में जो हुआ उसे तो भूलना भी असंभव है। जुब्बल कोटखाई की हार को भाजपा के इतिहास का काला अध्याय कहा गया। यहां देश की सबसे बड़ी पार्टी के प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई। यहां संगठन भी टूटा और कार्यकर्त्ता भी पार्टी से रूठ गया। स्थिति सुधरने के बजाए दिन प्रति दिन बिगड़ती चली गई। चुनाव प्रभारी सुरेश भारद्वाज अपने कार्यकर्ताओं को मनाने में पूरी तरह विफल रहे और नतीजा अब सभी के सामने है। फतेहपुर के चुनाव प्रभारी, उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर व सेह प्रभारी वन मंत्री राकेश पठानिया ने भी फेल हुए है। विशेषकर बिक्रम ठाकुर के लिए ये बड़ी हार है। इससे पहले पालमपुर नगर निगम चुनाव में भी मंत्री प्रभारी थे और भाजपा को करारी शिकस्त मिली थी। अब इन मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड पर क्या रिपोर्ट आती है इसपर सबकी निगाहें टिकी हुई है। बिंदल की वापसी के पक्ष में एक तबका कई मंत्रियों के एग्ज़िट के साथ साथ कुछ की मंत्रिमण्डल में एंट्री होने की सुगबुगाहट भी है। एक बड़ा तबका चाहता है कि भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व नाहन से विधायक डॉ राजीव बिंदल ककी संगठन या मंत्रिमंडल में वापसी हो। इसको लेकर प्रेशर पॉलिटिक्स की शुरुआत भी हो चुकी है। बिंदल के समर्थकों के इस्तीफे आना भी शुरू हुए है। ये सच है कि बिंदल भी बतौर प्रभारी अर्की उपचुनाव और सोलन नगरनिगम चुनाव में अच्छा नहीं कर पाए पर उनकी ज़मीनी पकड़ पर कोई संशय नहीं है और उनके समर्थकों का दबाव तो है ही। अब बिंदल की एंट्री होती है तो किसके स्थान पर होगी ये बड़ा सवाल है और अगर नहीं होती तो उन्हें मैनेज कैसे किया जाए ये भी बड़ा सवाल है। | Himachal Politics | Himachal News
हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के मंडी-धर्मशाला, कुल्लू-मंडी, मंडी-शिमला और शिमला-रामपुर के लिए सोमवार से हेली टैक्सी सेवाएं शुरू हो रही हैं। इससे प्रदेश में पर्यटन भी रफ्तार पकड़ेगा। ये चारों रूट पहली बार शुरू किए गए हैं। हेली टैक्सी (Heli - Taxi) की सेवा से अब मंडी और रामपुर को भी जोड़ दिया गया है। गगल पवन हंस स्टेशन मैनेजर नैंसी धीमान ने कहा कि हेली टैक्सी के लिए रविवार से बुकिंग शुरू हो गई है। पवन हंस ने अपनी सेवाओं से अब मंडी-कुल्लू व रामपुर को भी जोड़ा है। धर्मशाला-शिमला आने वाली उड़ान अब वाया मंडी होकर आएगी। हेली टैक्सी वापसी भी इसी रूट से करेगी। कुल्लू-शिमला उड़ान के साथ ही अब मंडी जिला को भी जोड़ा गया है। Heli taxi service will start on these routes of the state from today | Himachal Pradesh
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के करीब 300 रेजिडेंट डॉक्टर आज 2 घंटे की हड़ताल पर है। जिसके कारण प्रदेशभर से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वार्डों में न तो सुबह मरीजों की जांच को लेकर डॉक्टरों का राउंड हुआ और न ही ओपीडी में समय पर उपचार हुआ। हालांकि आईजीएमसी की ओपीडी में वरिष्ठ डॉक्टर मरीजों को देख रहे थे। डॉक्टर नीट पीजी की काउंसलिंग को अस्थायी तौर पर आगे बढ़ाने के बाद देशभर में फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के समर्थन में आईजीएमसी की रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन भी हड़ताल कर रही है।अस्पताल के 300 रेजिडेंट डॉक्टर आज सुबह साढ़े नौ से साढ़े ग्यारह बजे तक हड़ताल पर रहे। वरिष्ठ डॉक्टरों के साथ रेजिडेंट डॉक्टर हेल्प करते हैं। ऐसे में उनके 2 घन्टे तक ड्यूटी में न होने से दूर दराज से आए मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि उनकी मांग न मानी गई तो हड़ताल बढ़ाई जा सकती है। Shimla News
हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मनाली, सोलंगनाला, फातरू, कोठी, गुलाबा, पलचान तथा जलोड़ी दर्रा में इस सर्दी की पहली बर्फबारी हुई है। शिमला के कुफरी और नारकंडा में भी सीजन का पहला हिमपात हुआ है। कुल्लू जिले के कई इलाकों में हुई ताजा बर्फबारी से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। कई बस रूट प्रभावित हुए हैं। जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति में बर्फबारी से सड़क मार्ग बंद हो गए हैं। सफेद चांदी से लकदक हुए घाटी के स्नो प्वाइंटों से चार माह से सुस्त चल रहे कुल्लू-मनाली के पर्यटन कारोबार को गति मिलेगी। बर्फबारी से शिमला, कुफरी और नारकंडा में सैलानियों की आमद में भारी इजाफा होने की उम्मीद है। सिरमौर जिले के चूड़धार में भी ताजा हिमपात हुआ है। निचले इलाकों में बारिश हो रही है। जनजातीय जिला किन्नौर और आउटर सिराज के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी का क्रम जारी है। Himachal Pradesh News
धीरे धीरे प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावो की गर्मी बढ़ती दिखाई दे रही है। अर्की विधानसभा का उपचुनाव आप सभी लोगों के सहयोग से जीत लिया, अब 2022 का मुख्य चुनाव भी आप लोगों के सहयोग से भारी मतों से जीतेंगे यह बातें आज ब्लॉक कांग्रेस अर्की के अध्यक्ष सतीश कश्यप ने पंचायत कांग्रेस कमेटी दाड़लाघाट, बरायली व रौडी के कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से अपील की कि जैसे इस उपचुनाव में कार्यकर्ताओं ने कार्य किया वैसा ही कार्य खूब मेहनत के साथ 2022 में करें।उन्होंने कहा कि 2022 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है।इस अवसर पर उन्होंने तीनों पंचायतों में पंचायत कांग्रेस कमेटी का भी गठन किया।जिसमें दाड़लाघाट पंचायत से मनोज गौतम, रौडी से प्रेम केशव व बरायली पंचायत से कमलेश गौतम को प्रधान बनाया गया।बाकी कार्यकारिणी बनाने के लिए इन प्रधानों को अधिकृत किया। उन्होंने नवनिर्वाचित पंचायत कांग्रेस के प्रधानों को बधाई दी। इस अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता लाला शंकर दास, मोहन सिंह ठाकुर, जगदीश ठाकुर, राजेश गुप्ता, सुरेंद्र ठाकुर, राजेश शर्मा, प्यारेलाल, बाबूराम, मनशा राम, अमरदेव, जसवंत सोनी, जयसिंह, सोहनलाल, उमेश, ललित, जयदेव, सत्यप्रकाश, दीपक, पवन, विक्रम व तीनो पंचायतों के कार्यकर्ता उपस्थित रहे। Darlaghat Solan News
देश में 50 प्रतिशत से अधिक आबादी के पूर्ण टीकाकरण किए जाने को कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण पड़ाव करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि इस गति को बनाए रखना अहम है। साथ ही बचाव के सभी उपायों का पालन करते रहना भी जरूरी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने रविवार को बताया था कि देश में 50 प्रतिशत से अधिक पात्र वयस्क आबादी का पूर्ण टीकाकरण हो चुका है। मोदी ने मांडिवया के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा कि भारत के टीकाकरण अभियान ने एक और अहम पड़ाव पार किया है। कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए इस गति को बरकरार रखना महत्वपूर्ण है। India Corona Vaccine News Update
अग्रवाल सभा सोलन (Solan) की एक महत्वपूर्ण बैठक वैद्य रमेश बिंदल कीअध्यक्षता में सम्पन्न हुई। इस बैठक में दिनेश गर्ग को सर्वसम्मति से सभा का नया प्रधान व सतीश बंसल को वरिष्ठ उपप्रधान चुना गया। इससे पहले सभा के निवर्तमान प्रधान माया राम गर्ग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। इसके पश्चात बैठक में मौजूद सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से सभा के नये प्रधान का चुनाव किया गया । सभा के नव निर्वाचित प्रधान दिनेश गर्ग व वरिष्ठ उपप्रधान सतीश बंसल ने सभा की कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है। सभा का मुख्य संरक्षक सर्वश्री विनोद गुप्ता, रमेश बिंदल, पवन गुप्ता, रमेश बंसल, विक्रम अग्रवाल, अमरनाथ बंसल, रमेश सिंगला, मायाराम गर्ग,सांवल मल व राधेश्याम गोयल को बनाया गया है जबकि रविन्द्र गुप्ता को सलाहकार बनाया गया है। सुशील बंसल व राम अवतार को उप प्रधान, राकेश अग्रवाल को महासचिव, राजीव गुप्ता को कोषाध्यक्ष, भूपेन्द्र बंसल व सुनील कुमार को सचिव, राहुल गोयल व राकेश अग्रवाल को संयुक्त सचिव बनाया गया है। इसके अलावा पवन गोयल, राजन अग्रवाल, मनोज गुप्ता, टिक्का राम, पवन गर्ग, भीष्म गर्ग, नरेश गर्ग, मदन गुप्ता, अश्विनी सिंगला व मनीष अग्रवाल को कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया है। Solan News
उत्तर प्रदेश के मथुरा में अखिल भारत हिंदू महासभा जैसे कुछ संगठनों ने आज शाही ईदगाह मस्जिद में जलाभिषेक करने का एलान किया था। लेकिन अब जलाभिषेक को दिल्ली शिफ्ट कर दिया गया है। हालांकि इस जानकारी के बाद मथुरा में प्रशासन ने 144 धारा लगा दी है। मथुरा के शाही ईदगाह मस्जिद और उसके आस पास सुरक्षाकर्मियों का कड़ा पहरा लगा दिया गया है। मस्जिद और उसके आस पास उत्तर प्रदेश पुलिस, पीएसी के जवान और आरएएफ के जवान तैनात किए गए हैं। कल अखिल भारत हिंदू महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष राजश्री चौधरी ने जलाभिषेक का प्रोग्राम मथुरा की जगह आज 12 बजे दिल्ली के जंतर मंतर पर करने की घोषण की थी। मस्जिद की तरफ जाने वाले हर शख्स का पहले पहचान पत्र चेक किया जा रहा है, फिर उसकी बकायदा तलाशी ली जा रही है। उसके बाद ही मस्जिद की तरफ जाने दिया जा रहा है। मथुरा पुलिस सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रख रही है। एसएसपी मथुरा के मुताबिक अब तक सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट करने पर 4 अलग अलग एफआइआर दर्ज हो चुकी है। आज श्री कृष्ण जन्म भूमि स्थान और शाही ईदगाह मस्जिद परिसर के आस पास गाड़ियों की आवा जाहि बाधित रहेगी, बकायदा इसके लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की गई है। मथुरा पुलिस प्रसाशन के अनुसार सोशल मीडिया और अलग अलग जगहों से जानकारी मिली थी कि कुछ संगठन 6 दिसंबर और इसके आस पास की तारीखों में यहां कुछ यात्रा वगैरह निकालने की तैयारी कर रहे हैं। प्रशासन से इसकी कोई इजाजत नहीं ली गई थी और प्रशासन से इजाजत मांगी जाती तो भी ऐसी किसी यात्रा वगैरह की इजाजत हम देते नहीं। मथुरा एसएसपी ने बताया कि हमने ईदगाह मस्जिद के आस पास लोकल हमारी पुलिस बल उसके अलावा दूसरे जिलों से भी पुलिस बुलाई है, उसे तैनात किया है. आरएएफ और पीएसी के जवान भारी तादात में तैनात किए हैं। Mathura Uttar Pradesh News
सोने और चांदी के दाम में आज ज्यादा घटत-बढ़त नहीं देखी जा रही है। सोने के दाम में सुबह ट्रेड खुलने के बाद लगभग स्थिर कारोबार हो रहा है और चांदी भी मामूली तेजी के साथ कारोबार कर रही है। सोने के दाम में आज जो मामूली गिरावट आई है उसके पीछे डॉलर की बढ़ती कीमत को कारण माना जा सकता है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने का फरवरी वायदा 0.02 फीसदी नीचे यानी 47,895 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। चांदी के दाम मार्च वायदा पर 0.10 फीसदी की तेजी के साथ 61,575 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से देखे जा रहे हैं। सुबह बुलियन मार्केट खुलने के बाद फरवरी वायदा पर सोना 27 रुपये या 0.6 फीसदी की गिरावट के साथ एमसीएक्स पर 47,953 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ था। वहीं चांदी में मार्च वायदा पर 68 रुपये या 0.11 फीसदी की तेजी के बाद 61,606 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बने हुए थे। स्पॉट गोल्ड में 1782.95 डॉलर प्रति औंस के रेट हैं जबकि यूएस गोल्ड फ्यूचर्स में सपाट कारोबार देखा गया और ये 1783.60 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहे हैं। | Gold Silver Prices India
भारत और रूस की दशकों पुरानी दोस्ती को और मजबूत करने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज दिल्ली आ रहे हैं। कोरोना संकट की वजह से पुतिन का ये भारत दौरा बेहद छोटा यानी महज कुछ घंटों का रखा गया है, लेकिन इसका असर ना सिर्फ दोनों देशों के सबंधों पर होगा बल्कि इससे चीन और पाकिस्तान जैसे भारत के पड़ोसी देशों को भी बड़ा संदेश जाएगा। रूसी राष्ट्रपति पुतिन दोपहर बाद दिल्ली पहुंचेंगे और महज़ 6-7 घण्टे के लिए भारत में होंगे। इस दौरान दोनों मुल्कों के बीच कई स्तर पर बातचीत होगी। पहले दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच टू प्लस टू वार्ता होगी और इसके बाद शाम 5.30 बजे दिल्ली के हैदराबाद हाउस में राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 21वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सुरक्षा कारणों की वजह से राष्ट्रपति पुतिन के भारत पहुंचने के समय का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन अनुमान के मुताबिक रूसी राष्ट्रपति दोपहर दो बजे भारत पहुंचेंगे और रात 9.30 बजे अपने वतन वापस लौट जाएंगे। Russian President Putin will come to India today, will meet PM Narendra Modi
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) 18 दिसंबर को गंगा एक्सप्रेस वे का शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री इस एक्सप्रेस-वे के साथ कई अन्य सौगात भी दे सकते हैं। वहीं, इस मौके पर शहीद संग्रहालय समेत अन्य कार्यों का भी लोकार्पण किया जा सकता है। मेरठ से प्रयागराज तक 594 किमी लंबा छह लेन का गंगा एक्सप्रेस-वे बनाया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि गंगा एक्सप्रेस-वे देश का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे होगा। जानकारी के मुताबिक यूपीडा ने पूरे प्रोजेक्ट को 12 पैकेज और 4 ग्रुप में बांटा है। वहीं, एक ग्रुप में तीन पैकेज को शामिल किया गया है।
सड़कें ऐसा घाव हैं जिसकी टीस हर समय उठती है।आए दिन अनेक दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने के दावे में सरकार कितनी सच्ची है ,इस बात की कहानी शालाघाट-दाड़लाघाट से भराडीघाट तक नेशनल हाईवे की सड़कें खुद-ब-खुद बताती हैं। हकीकत यह है कि यहां की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। यही हाल नेशनल हाईवे-205 हिमफेड खाद डिपू स्यार के समीप सड़क का है। सड़क की खस्ता हालत के चलते वाहन चालक परेशान है। यही नहीं जगह-जगह पड़े गड्ढों से हादसे की भी आशंका बनी हुई है। इस सड़क पर उद्योग होने से भारी-भरकम वाहनों का आना जाना लगा रहता है। इससे सड़क जल्द क्षतिग्रस्त हो जाती है।सड़क पर जगह-जगह पड़े गड्ढों से वाहन चालकों को तो क्या पैदल चलने वाले भीदिक्कत झेलनी पड़ रही है। स्थानीय निवासी जगदीश ठाकुर,अनिल गुप्ता, प्रेम केशव, विनोद कंवर,सुरेंद्र वर्मा, नीरज कपिला, सुमन गौतम, प्रदीप, रवि, जयदेव, कमल कौंडल, जियालाल, राजेश, मनोज गौतम, दीपक गजपति, जय सिंह ठाकुर, सुरेंद्र ठाकुर, सुमन गुप्ता, किशोरी, पवन, कमलेश सहित अन्य लोगों ने बताया कि शालाघाट से लेकर दसेरन लिंक रोड़,भराडीघाट,चमाकडीपुल, दाड़लामोड़, छामला, स्यार, धमोग, चंदेल सर्विस स्टेशन सहित दाड़लाघाट बाजार सड़क की हालत बदतर हो गई है।सबसे ज्यादा मुश्किल सड़क में चलने वाले लोगों को हो रही है।इसके अलावा राहगीरों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।सड़क खराब होने के कारण हिमफेड खाद डिपू स्यार के समीप सड़क सहित अन्य मार्गों की मरम्मत निर्माण कार्य कुछ समय पूर्व किया गया था पर कुछ समय मे ही मरम्मत निर्माण गड्ढों में तब्दील हो गई। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जल्द से जल्द इन गड्ढों को ठीक करवाया जाए या तो पंचिंग दोबारा से की जाए। आपको बता दें जब इस बारे प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुरेश शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि आज ही वहां पर सड़क की स्थिति को देखने के लिए लेबर भेज दी है एक हफ्ते के अंदर इस सड़क को ठीक कर दिया जाएगा। Darlaghat Solan News
देश में पहाड़ी इलाकों के साथ-साथ मैदानी इलाकों में मौसम करवट लेते दिख रहा है जिसका कारण पश्चिम विक्षोभ माना जा रहा है। बीते दिन बादल छाए रहे तो कई जगह ठंड रही। मौसम विभाग का मानना है कि अगले 24 घंटे में दिल्ली-एनसीआर में बादल छाए रहेंगे। साथ ही इस हफ्ते से तापमान में लगातार कमी दर्ज की जाएगी। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटे में हवा में नमी का स्तर 54 से 95 देखने को मिला जिसके चलते लोगों को कोहरे का सामना करना पड़ा। वहीं, विभाग के मुताबिक, अगले 24 घंटे में अधिकतम तापमान 25 और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया जा सकता है। विभाग का कहना है कि हफ्ते के अंत तक तापमान में भारी गिरावट देखी जा सकती है और न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बीते दिन कई इलाको में हल्की बूंदाबांदी हुई। वहीं, मसूरी में ओलावृष्टि भी देखने को मिली जिसके चलते तापमान में गिरावट दर्ज हुई। विभाग का मानना है कि अगले 24 घंटों में भी ठंड का अहसास हो सकता है। India Weather News Update
देश में बीते दिन ओमिक्रोन (Omicron) के 17 मामले दर्ज हुए, जिसके बाद अब कुल संख्या 21 हो गई है। रविवार को दर्ज 17 मामलों में 9 राजस्थान की राजधानी जयपुर से, 7 महाराष्ट्र के पुणे से और एक मामला दिल्ली में दर्ज हुआ है। राजस्थान के चिकित्सा सचिव वैभव गालरिया ने बताया कि संक्रमित लोगों की जीनोम सीक्वेंसिंग से नौ लोगों के कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रोन से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। वहीं, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य अधिकारी ने पुणे जिले में सात लोगों के ओमिक्रोन से संक्रमित होने की पुष्टि की है। India News
देश में जानलेवा कोरोना वायरस का प्रकोप बरकरार है। देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के 8 हजार 306 नए केस सामने आए हैं। वहीं, 211 लोगों की मौत हो गई। देश में अबतक कोरोना के ओमिक्रोन वेरिएंट के 21 मामले सामने आ चुके है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या 98 हजार 416 है। वहीं, इस महामारी से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 4 लाख 73 हजार 537 हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक, कल 8834 रिकवरी हुईं, जिसके बाद अभी तक 3 करोड़ 40 लाख 69 हजार 608 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं। बता दें कि राष्ट्रव्यापी टीकाकरण मुहिम के तहत अभी तक कोरोना वायरस रोधी टीकों की 127 करोड़ से ज्यादा खुराक दी जा चुकी हैं। कल 24 लाख 55 हजार 911 डोज़ दी गईं, जिसके बाद अबतक वैक्सीन की 127 करोड़ 93 लाख 9 हजार 669 डोज़ दी जा चुकी हैं। #India #Corona #Update #News
एचपीएसबील पेंशनर्ज वेलफेयर एसोसिएशन कुनिहार उप इकाई की मासिक बैठक सभा के वित्त सचिव रूपेंद्र कौशल की अध्यक्षता में आयोजित की गई।बैठक मे इकाई अध्यक्ष रतन तनवर ने सदस्यों को इकाई तथा प्रदेशिक स्तर पर सभा की गतिविधियों के बारे विस्तारपूर्वक जानकारी दी। बैठक में सभी उपस्थित सदस्यों ने बोर्ड प्रबन्धको से 1 जनवरी 2016 से दिया जाने वाला संशोधित वेतनमान व पेंशन स्केल अतिशीघ्र जारी करने का आग्रह किया क्योंकि प्रदेश सरकार इसे पहले ही जारी कर चुकी है। बैठक में सदस्यों ने पेंशनरों को भी विद्युत भत्ता और एल टी सी देने मांग की। इसके साथ ही प्रबंधक वर्ग से फील्ड स्टाफ जल्द भरने का आग्रह किया क्योंकि उनके बगैर लोगो की समस्याओं का समय पर निराकरण नही हो रहा है जिसकी वजह से बोर्ड की जनता में बदनामी हो रही है। Kunihar solan News
इंदौरा वन विश्राम गृह में घरेलू गैस सिलिंडर बाटने पहुँची विधायक रीता धीमान के कार्यक्रम में इंदौरा की पँचायत बकराड़वा रानी देवी (कांग्रेस समर्थित) को विधायक रीता धीमान व मण्डल अध्यक्ष बलवान सिंह ने मंच पर प्रधान के गले मे भाजपा पार्टी का हार पहनाया ओर कांग्रेस पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल होने पर भाजपा मंडल के पदाधिकारियों ओर प्रधान का जोर शोर से स्वागत किया गया जिसके बाद भाजपा इंदौरा ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने की जानकारी लॉगो को मिली | प्रधान ने मामले में वाहवाही लूटनी चाही लेकिन ठीक कुछ घण्टो बाद ही प्रधान रानी देवी ने भाजपा मंडल पर जबरन गले मे हार पहनाकर भाजपा में शामिल करने की अफवाह का विरोध कर डाला और बाकायदा वीडियो जारी कर भाजपा मंडल पर धोखे से हार पहनाने का आरोप भी जड़ डाला। वही कार्यक्रम में पहुँची बकराड़वा पँचायत की प्रधान ने अपने गांव पहुँच पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि विधायक के कार्यक्रम में मुझे धोखे से गले मे माला पहनाई गई और भाजपा ने सोची समझी साजिश के तहत मुझे भाजपा पार्टी में शमील करने का ड्रामा रच दिया जिसका व पुरजोर से विरोध करती है उन्होंने कहा कि व शुरू से कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़ी है ओर भविष्य में भी कांग्रेस परिवार के साथ जुडी रहेगी |
हिमाचल प्रदेश विद्युत बोर्ड सेवानिवृत्त वेलफेयर एसोसिएशन दाड़लाघाट एवं नम्होल यूनिट 17 दिसंबर को अपना स्थापना दिवस मनाएगा। महासचिव प्रेम केशव ने बताया इस मौके पर मासिक बैठक का आयोजन भी किया जायेगा। सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों द्वारा इस दिन सभी पुरानी मांगों के बारे में एक बार फिर प्रदेश सरकार को चेताया जाएगा। इस दिवस के दौरान वरिष्ठ सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मानित भी किया जाएगा। यूनिट के अध्यक्ष सुखराम नड्डा ने सभी वरिष्ठ नागरिकों एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों से आग्रह किया है 17 दिसम्बर को प्रातः 11 बजे नम्होल पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में ज्यादा से ज्यादा संख्या में आकर इस आयोजन को सफल बनाने की अपील की है। HPSEB Himachal News
05 दिसम्बर, 2021 अर्थात कल रविवार को हिमाचल प्रदेश एक ओर ऐतिहासिक उपलब्धि का गवाह बनेगा। हिमाचल के लिए इस दिन बिलासपुर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की ओपीडी का शुभारम्भ किया जाएगा वहीं कोविड-19 से बचाव के लिए दूसरी डोज़ के टीकाकरण का शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने पर राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया जाएगा। यह जानकारी अतिरिक्त उपायुक्त सोलन ज़फ़र इकबाल ने आज यहां दी। ज़फ़र इकबाल ने कहा कि केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डाॅ. मनसुख मांडविया, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा तथा हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की गरिमामयी उपस्थिति में यह कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री अनुराग ठाकुर भी समारोह में उपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा कि सोलन जिला में इस कार्यक्रम को 02 स्थानों पर एलईडी स्क्रीन के माध्यम से दिखाने की व्यवस्था की गई है। सोलन में नगर निगम सोलन के सभागार में तथा नालागढ़ में ट्रक ऑपरेटर यूनियन नालागढ़ के सभागार में एलईडी स्क्रीन के माध्यम से कार्यक्रम का लाईव प्रसारण किया जाएगा। अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि कार्यक्रम को दूरदर्शन के डीडी हिमाचल चैनल सहित डीटीएच टाटा स्काई चैनल नम्बर 1925, एयरटेल चैनल नम्बर 1963, फास्टवे के चैनल नम्बर 207 तथा जनता टीवी चैनल पर देखा जा सकेगा। Himachal News | Himachal Pradesh Samachar
हिमाचली (Himachal Pradesh) चुनावों में अपनी अदभुत चुनावी प्रतिभा को लोहा मनवा चुके सुजानपुर के विधायक व प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष राजेंद्र राणा को अब अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से चंडीगढ़ नगर निगम में चुनाव कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया है। पंजाब व चंडीगढ़ कांग्रेस के इंचार्ज हरीश चौधरी ने तत्काल प्रभाव से राजेेंद्र राणा को यह प्रभार संभालने की नोटिफिकेशन जारी की है। राजेंद्र राणा हिमाचल में हुए सोलन नगर निगम के बाद विधानसभा उपचुनावों में फतेहपुर के चुनाव प्रभारी रह चुके हैं। दोनों ही स्थानों पर विकट परिस्थितियों के बावजूद राणा की रणनीति के चलते कांग्रेस की जीत प्रचंड बहुमत से हुई है। चुनावी विधा में टास्क मास्टर साबित हो चुके राणा की इसी विशेषता के कारण अब उन्हें चंडीगढ़ नगर निगम के 35 वार्डों का चुनाव को ऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया है। बतौर अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कॉर्डिनेटर अब राजेंद्र राणा नगर निगम चंडीगढ़ में कांग्रेस के लिए काम करेंगे। चंडीगढ़ में 15 फीसदी हिमाचली रहते हैं। जिनके हितों और हकों के लिए हर दम सक्रिय रहने वाले राजेंद्र राणा की चंडीगढ़ की जनता के साथ-साथ इस वर्ग पर गहरी पैठ है। इसी के मद्देनजर अब राणा को एआईसीसी ने यह प्रभार सौंपा है। चंडीगढ़ नगर निगम के चुनाव पंजाब व चंडीगढ़ में विशेष महत्व रखते हैं। पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले 24 दिसंबर को होने वाले चुनावों में कांग्रेस हर सूरत काबिज होना चाहती है। पिछले 2 टर्म से चंडीगढ़ नगर निगम पर बीजेपी का कब्जा है। अब देखना यह है कि हिमाचल के दो चुनावों में टास्क मास्टर साबित हुए राणा चंडीगढ़ नगर निगम पर कांग्रेस को कैसे काबिज करवाते हैं। चंडीगढ़ नगर निगम के चुनावों के नोमिनेशन के आखिरी रोज 4 दिसंबर को जारी हुई इस नोटिफिकेशन ने अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में राणा का सियासी कद और बढ़ाया है। जिसने अब राणा को एक बार फिर खुद को साबित करने के लिए नई चुनौती पेश की है। कोई भी चुनाव किसी भी पार्टी नेता के लिए चुनौती रहता है। लेकिन जनता के विश्वास व भरोसे पर हमेशा खरे साबित होने वाले नेता हर चुनौती से पार पा लेते हैं। मुझे जो जिम्मेदारी दी है मैं उस पर 100 फीसदी खरा उतरने के लिए दिन-रात मेहनत करते हुए प्रयास करुंगा। मुझे विश्वास है कि जनता के विश्वास के कारण कांग्रेस चंडीगढ़ नगर निगम के चुनावों में जीतेगी। Himachal News
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा है कि इतिहास हमारी सभ्यता, संस्कृति और साहित्य का अभिन्न अंग है और यह तथ्यों पर आधारित होना चाहिए। इसे हम नजरअंदाज नहीं कर सकते। राज्यपाल ने शनिवार को हमीरपुर के निकट ठाकुर जगदेव चंद ठाकुर स्मृति शोध संस्थान में आजादी का अमृत महोत्सव के तहत "भारतीय स्वाधीनता आंदोलन: वृत्तांत, स्मृतियां एवं नेपथ्य-नायक" विषय पर आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद एवं वेबीनार के उदघाटन सत्र को संबोधित किया। यह दो दिवसीय परिसंवाद भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद और केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला तथा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के इतिहास विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया। इस अवसर पर देश भर के विद्वानों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी हमारे इतिहास के कई महत्वपूर्ण विषयों को अभी तक स्पर्श ही नहीं किया गया है, ऐसे विषयों पर कई बार हम चर्चा करने से भी डरते हैं। इस दिशा में नेरी में आयोजित यह परिसंवाद निःसंदेह एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं की सही डाॅक्यूमेंटेशन एवं तथ्यात्मक जानकारी आज की पीढ़ी तक पहुंचाई जानी चाहिए। उन्होंने हमारी समृद्ध संस्कृति और संस्कारों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत के इतिहास के संकलन की आवश्यकता पर भी बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि हमारा देश आजादी के बाद ही राष्ट्र नहीं बना था, बल्कि यह तो हजारों वर्ष से एक राष्ट्र के रूप में अपने पहचान बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश भारतीय इतिहास में कई तरह की भ्रांतियां पैदा हुई हैं, जिनका निवारण करना वर्तमान इतिहासकारों एवं शोधार्थियों की जिम्मेदारी है। राज्यपाल ने उम्मीद जताई कि नेरी में आयोजित परिसंवाद में व्यापक अमृत-मंथन के बाद कुछ नया निकलकर आएगा जोकि देश को एक नई दिशा की ओर अग्रसर करेगा। राज्यपाल ने कहा कि आज हमारा देश जहां अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, वहीं गोवा भी अपनी मुक्ति का 60वां वर्ष मना रहा है। उन्होंने बताया कि भारत की आजादी के 14 वर्षों के उपरांत गोवा पुर्तगाली शासन से मुक्त हुआ था। उन्होंने कहा कि गोवा की मुक्ति के लिए पंडित दीन दयाल उपाध्याय और अन्य महापुरुषों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। इनमें उन्होंने जिला कांगड़ा के राम सिंह का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गोवा में आज भी लोकसंस्कृति जीवंत है। Shimla News
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा आयुष मंत्री डाॅ. राजीव सैजल ने कहा कि जनप्रतिनिधि का मुख्य ध्येय लोक कल्याण तथा समाज सेवा होना चाहिए ताकि आमजन को समय पर सहायता प्रदान की जा सके। डाॅ. सैजल आज सोलन विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत जौणाजी के फ्लाई, कनाह तथा दरांह-मनूह में 21 लाख रुपए की लागत से निर्मित 03 सामुदायिक भवनों का लोकार्पण करने के उपरान्त उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित कर रहे थे। ग्राम पंचायत जौणाजी के दरांह-मनूह में 15 लाख रुपए, फ्लाई में 03 लाख रुपए तथा कनाह में 03 लाख रुपए की लागत से एक-एक सामुदायिक भवन निर्मित किया गया है। डाॅ. सैजल ने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को विकास कार्यों के माध्यम से जनता के ऋण को उतारने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास के लाभ जन-जन तक पहुंचाना ही प्रदेश सरकार का लक्ष्य है। आयुष मंत्री ने कहा कि विकास एक सत्त प्रक्रिया है। कोई भी विकास कार्य जनता के सहयोग के बिना सम्पन्न नहीं होता। उन्होंने कहा कि लोकतन्त्र में जनता अपने प्रतिनिधियों को बड़ी उम्मीदों के साथ चुनती है और आमजन की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए जन प्रतिनिधियों को दिन-रात मेहनत करनी चाहिए। जनता के आशीर्वाद से ही जनप्रतिनिधि विकास को नई दिशा प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने की पहल की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कुशल नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने नवीन योजनाएं आम्भ की हैं। इनके व्यापक स्तर पर बेहतर परिणाम आए हैं। उन्होंने कहा कि जनमंच के माध्यम से प्रदेश सरकार लोगों के घरद्वार पर पहुंचकर जनसमस्याओं का हल कर रही है। हिमाचल गृहिणी सुविधा योजना के माध्यम से राज्य की हर महिला को संबल मिला है। योजना के माध्यम से प्रत्येक पात्र परिवार को निःशुल्क गैस कुनैक्शन प्रदान किया गया है। इससे जहां पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला है वहीं महिलाओं को धुएं से भी राहत मिली है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कोविड के संकट से निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने व्यापक पग उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 टीकाकरण की पहली डोज लगाने में हिमाचल पूरे देश में प्रथम रहा है। डाॅ. सैजल ने इस अवसर पर आश्वासन दिया कि क्षेत्र की विभिन्न मांगों को चरणबद्ध आधार पर शीघ्र पूरा किया जाएगा। इससे पूर्व बीडीसी सोलन के उपाध्यक्ष लक्ष्मी ठाकुर ने मुख्यातिथि का स्वागत किया और क्षेत्र की विभिन्न मांगे उनके समक्ष प्रस्तुत की। बीडीसी सोलन के अध्यक्ष भीम सिंह, प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी के सदस्य रविन्द्र परिहार, भाजपा जिला महामंत्री नंदराम कश्यप, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष शीला, भाजपा मंडल सोलन के अध्यक्ष मदन ठाकुर, महामंत्री संजीव सूद, उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र ठाकुर, चंद्रकांत शर्मा, ग्राम पंचायत मशीवर के प्रधान नरेन्द्र ठाकुर, ग्राम पंचायत प्रधान जौणाजी की प्रधान जयवंती कश्यप, उप प्रधान अमरदत शर्मा, बीडीसी सदस्य किरण, ललिता, उपभोक्ता विपणन समिति के निदेशक कान्ति स्वरूप शर्मा, ग्राम पंचायत कोठों के उप प्रधान सुनील ठाकुर, भाजपा अन्य पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला अध्यक्ष संतोष भारद्वाज, भाजपा तथा भाजयुमो के अन्य पदाधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे। Solan News
एहसास क्लब कुनिहार के सौजन्य से हिम एकादश ओपन क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन महाराजा पदमसिंह स्टेडियम कुनिहार (तालाब) में करवाया जा रहा है। जानकारी देते हुए क्लब के सदस्य हरजिंदर ठाकुर ने बताया कि इस प्रतियोगिता का शुभारम्भ रविवार 5 दिसम्बर से होगा जिसमे स्थानीय टीमो सहित अन्य क्षेत्रो से भी बेहतरीन टीमें भाग लेंगी। प्रतियोगिता के फाइनल में विजेता टीम को 51 हजार व ट्राफी तथा उप विजेता टीम को 31 हजार व ट्राफी के साथ सम्मानित किया जाएगा। एहसास क्लब के सभी सदस्यों ने क्रिकेट प्रेमियों से अपील की है कि क्रिकेट प्रतियोगिता का आनन्द लेने के लिए अधिक से अधिक संख्या में पधारे ताकि साथ साथ खिलाड़ियों का मनोबल भी बढ़े। Kunihar Solan News
राज्य एकल खिड़की स्वीकृति एवं अनुश्रवण प्राधिकरण की 20वीं बैठक शनिवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में नए औद्योगिक उद्यम स्थापित करने और वर्तमान इकाईयों के विस्तार के 19 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई, जिनमें लगभग 1,376.93 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जिससे लगभग 2,266 व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त होगा। इससे यह प्रदर्शित होता है कि आर्थिक मंदी के बावजूद राज्य निवेश को निरंतर आकर्षित कर रहा है। प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत प्रस्तावों में जिला शिमला के ठियोग के मोहाल गजेड़ी में मै. न्यू वजीर चन्द फ्रूट्स (एनडब्ल्यूसी) को सीए स्टोर स्थापित करने, जिला सोलन के नालागढ़ के गांव खेड़ा निहला में मै. लामी ट्यूबस प्राईवेट लिमिटेड को लेमिनेटिड ट्यूबस और एफएफएस ट्यूबस का निर्माण करने, जिला सोलन के नालागढ़ स्थित किरपालपुर में मै. एमजी पेट्रोकेम प्राईवेट लि. को इथनाॅल, पशु चारा व कार्बनडाईऑक्साइड उत्पादन करने, जिला सोलन के नालागढ़ स्थित किरपालपुर में मै. हाईगेना लाइफ साइसिंज प्राईवेट लि. को इथनाॅल, पशु चारा और कार्बनडाईऑक्साइड का उत्पादन करने, जिला सोलन की तहसील नालागढ़ के किरपालपुर में मै. आरएसए एनर्जी प्राईवेट लि. को इथनाॅल, पशु चारा और कार्बनडाईऑक्साइड का उत्पादन करने, जिला सोलन के नालागढ़ स्थित किरपालपुर में मै. भारत स्पिरिट् को इथनाॅल का उत्पादन करने, जिला सोलन के बद्दी स्थित गांव कालूझण्डा के मै. इवेट्स ग्लास एंड पाॅलिमर प्राईवेट लि. को पैट बोतल, लामी ट्यूब और पीवीसी केबल का निर्माण करने, जिला सोलन के नालागढ़ स्थित गांव खेड़ा निहला के मै. प्रो फ्लैक्सी पैकिंग प्राईवेट लि. को प्लासटिक ट्यूब का निर्माण करने, जिला सोलन के बद्दी स्थित गांव धर्मपुर में मै. ओकाया इवी प्राईवेट लि. को विद्युत वाहनों से संबंधित सामान और उपकरण बनाने, जिला सोलन की तहसील बद्दी स्थित गांव भोर्ड के मै. ईर फार्मा को इजेक्शन व सिरिंज का निर्माण करने, जिला सिरमौर के काला अम्ब स्थित औद्योगिक क्षेत्र जौहरों में मै. जर्मन फार्मूलेशन को टेबलेट, तरल इंजेक्शन और हैंड सेनेटाइजर इत्यादि का निर्माण करने, जिला सिरमौर के कालाअम्ब स्थित गांव पिपलवाला में मै. नितिन लिक्कर्ज को आइएमएफएल लिक्कर्ज व देसी शराब का उत्पादन करने और जिला सोलन की तहसील नालागढ़ के गांव अधुवाल में मै. जैन शाॅलस को डाइड फेबरिक का निर्माण करने के प्रस्तावों को अनुमति प्रदान की। प्राधिकरण ने जिन विस्तार प्रस्तावों को अनुमति प्रदान की उनमें जिला सोलन की तहसील कसौली के गांव व डाकघर जाबली में मै. कोस्मो फेराइटस लि. को फेराइट कोर, फेराइट पाॅउडर और ट्रांसफार्मर का निर्माण करने, जिला सोलन की तहसील बद्दी स्थित गांव थाना में मै. श्री नैना पैकेजिंग को कोरोगेटिट बाॅक्स का निर्माण करने, जिला सिरमौर के पावंटा साहिब के औद्योगिक क्षेत्र गोंदपुर में मै. एएस पैकर्ज यूनिट-2 को कार्टन और मोनोकार्टन, लेबल व प्लासटिक केपस इत्यादि का निर्माण करने, जिला सोलन में तहसील बद्दी स्थित गांव बलयाणा में मै. हिन्दुस्तान यूनिलिवर लि. को साबुन की टिक्कियां का उत्पादन करने, जिला सोलन तहसील बद्दी स्थित गांव संधोली में मै. मोंडेलेज इंडिया फूड्स प्राईवेट लि. को बोर्नविटा, चाॅकलेट व क्रुम्ब का उत्पादन करने के लिए औद्योगिक इकाई का विस्तार करने, जिला सोलन तहसील बद्दी के गांव संधोली में मै. मोंडेलेज इंडिया फूड्स प्राईवेट लि.- इकाई-2 को फाइव स्टार, जेम्स, मौलडेड चाॅकलेट व क्रुम्ब का उत्पादन करने के लिए औद्योगिक इकाई का विस्तार करने के प्रस्ताव शामिल हैं। निदेशक उद्योग राकेश कुमार प्रजापति ने बैठक का संचालन किया। उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह और ऊर्जा मंत्री सुख राम चैधरी बैठक में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए, जबकि मुख्य सचिव राम सुभग सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव आर.डी. धीमान व जे.सी. शर्मा, प्रधान सचिव ओंकार शर्मा और अन्य अधिकारी बैठक में उपस्थित थे। Shimla News
बढ़ते प्रदूषण के कारण दिल्ली-एनसीआर में हाहाकार मचा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट भी सरकारों को इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम ना उठाने के लिए फटकार लगा रहा है। इस बीच हरियाणा सरकार ने एनसीआर में बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को देखते हुए दिल्ली से सटे अपने चार जिलों के सभी स्कूलों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया है। हरियाणा के एनसीआर जिलों में वायु गुणवत्ता के प्रबंधन के उपायों पर सरकार के आदेश के बाद अगले आदेश तक गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में स्कूल बंद रहेंगे। वहीं केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से निपटने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया है। साथ ही, 40 फ्लाइंग स्क्वाड भी बनाए गए हैं, जो प्रदूषण फैला रहे उद्योगों और निर्माण कार्यों पर सीधी कार्रवाई करेंगे। कोर्ट ने इस पर संतोष जताते हुए कहा कि इन उपायों पर अमल किया जाए। गौरतलब है कि कल हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को यह चेताया था कि वह कुछ करे, नहीं तो कोर्ट अपनी तरफ से आदेश देगा।
सोने और चांदी की कीमतों में आज तेजी देखने को मिल रही है। कई दिनों के लगातार गिरावट के बाद आज गोल्ड महंगा हो गया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर आज सोना 0.5 फीसदी की तेजी के साथ 47,625 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर है। वहीं, गुरुवार को सोने की कीमतों में करीब 1 फीसदी यानी 500 रुपये की गिरावट देखने को मिली थी। इसके अलावा सिल्वर 0.20 फीसदी की तेजी के साथ 61234 रुपये प्रति किलोग्राम है। ग्लोबल मार्केट की बात करें तो यहां पर सोने की कीमतों में गिरावट है। यहां सोना एक महीने के निचले स्तर पर पहुंचकर 1,771.04 डॉलर प्रति औंस पर है। अन्य कीमती धातुओं में हाजिर चांदी 0.1 फीसदी बढ़कर 22.40 डॉलर प्रति औंस हो गई, जबकि प्लैटिनम 0.3 फीसदी गिरकर 934.99 डॉलर हो गया।
कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन के बेंगलुरु में दो नए नए मामले मिलने के बाद एक तरफ जहां राज्य के मुख्यमंत्री ने बैठक बुलाई है तो वहीं दूसरी तरफ देश के अन्य हिस्सों में भी इसके कई संदिग्ध मरीज मिले हैं। इन सभी का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया है। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि राज्य में ओमिक्रोन के संदिग्ध मरीजों की संख्या अब बढ़कर 28 हो चुकी है। उन्होंने बताया कि हाई रिस्क देशों से भारत लौटे जिन लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई और उनके संपर्क में आए लोगों की टेस्ट कर उनके सैंपल जीनोम सिक्वेसिंग के लिए भेजे गए हैं। मुंबई में 10-11-2021 से लेकर 2-12-2021 तक 2868 यात्री मुंबई पहुंचे थे। इनमें से 485 यात्रियों का कोरोना टेस्ट किया गया है जो अंतरराष्ट्रीय उदानों से मुंबई में आये थे। 485 में से 9 यात्रीयों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। फिल्हाल सभी यात्रियों को अस्पताल में भर्ती किया गया है। वहीं इनके रिपोर्ट जीनोम सेक्वेन्सिंग परिक्षण के लिए भेज दिये गए है। इन सभी की जीनोम अनुक्रमण पर रिपोर्ट दो दिनों में आने की उम्मीद है और इस रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के अटल टनल में लगातार बर्फबारी हो रही है। रोहतांग दर्रा व बारालाचा में भारी बर्फबारी हुई है। बर्फबारी से नेशनल हाईवे-505 ग्रांफू से लोसर, नेशनल हाईवे-03 दारचा से सरचू समेत 45 सड़कें बंद हो गई हैं। प्रदेशभर में 164 बिजली ट्रांसफार्मर भी ठप हो गए हैं। कड़ाके की ठंड में लोगों को बिजली के बिना दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तीन दिन से खराब चल रहे मौसम से जिला कुल्लू और लाहौल-स्पीति में दुश्वारियों के साथ जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। बर्फबारी के कारण अटल टनल में निगम की बसों के साथ पर्यटकों की आवाजाही बंद कर दी गई है। पुलिस ने सिर्फ स्थानीय लोगों को फोर बाई फोर वाहनों की अनुमति दी है। पहाड़ों में हो रही बर्फबारी से कुल्लू-मनाली के विंटर सीजन को बढ़ावा मिलेगा। बता दें कि छह दिसंबर तक प्रदेश में मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान है। राजधानी शिमला में ठंडक बढ़ गई है। जलोड़ी दर्रा के साथ माता बूढ़ी नागिन के कपाट पांच माह के लिए बंद कर दिए गए हैं।
ओमिक्रोन के देश में लगातार बढ़ते खतरे और बेंगलुरु में मिले दो नए मरीज के बाद एक बार फिर से केन्द्र सरकार ने राज्यों को अलर्ट किया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने शुक्रवार को राज्यों के मुख्य सचिवों को चिट्ठी लिखकर उन सभी से सतर्क रहने की सलाह दी है। इसके साथ ही, कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें और ज्यादा कड़ाई से जांच करें। राज्य सरकार को केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण की तरफ से ज्यादा से ज्यादा जीनोम सिक्वेंसिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, क्लस्टर पर भी नजर बनाए रखने को कहा गया है। साथ ही, वैक्सीनेशन में तेजी लाने और कोविड के सही व्यवहार का पालन करवाने को कहा गया है। इससे पहले बेंगलुरु में ओमिक्रोन के 2 नए मरीज मिले है। इसके साथ ही, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत कई जगहों पर संदिग्ध ओमिक्रोन के मरीज मिले और उनके सैंपल जीनोम सिक्वेसिंग के लिए भेजा जा चुका है। दिल्ली के लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल में विदेश से आए 8 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इन सभी लोगों के सैंपल जीनोम सिस्वेंसिंग के लिए भेज दिया गया है। दिल्ली के एलएनजेपी अस्पातल में पिछले दो दिनों में विदेश से आए 12 लोगों को एडमिट कराया गया है जिसमें से 8 लोग पॉजिटिव पाए गए है और इनके सैंपल व्होल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेज दिए गए है ताकि वैरिएंट का पता लग सके। वहीं बाकी चार के सैंपल दोबारा टेस्ट के लिए भेजे गए हैं।
पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और कांग्रेस (Congress) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की उपस्थिति में शुक्रवार को यहां कांग्रेस में शामिल हो गए। सिद्धू के खिलाफ आर्म्स एक्ट के दो केस दर्ज हैं, जिनकों लेकर अब विपक्ष कांग्रेस पर हमलावर है। कांग्रेस में शामिल होने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने मूसेवाला को युवा प्रतीक और एक “अंतरराष्ट्रीय हस्ती’’बताया। उन्होंने कहा, “सिद्धू मूसेवाला हमारे परिवार में शामिल हो रहे हैं। मैं कांग्रेस में उनका स्वागत करता हूं।” आर्म्स एक्ट को लेकर सवाल पूछने पर सिद्धू ने कहा कि अभी ये मामले कोर्ट में हैं। मूसेवाला का असली नाम शुभदीप सिंह सिद्धू है और वह मानसा जिले के मूसा गांव के रहने वाले हैं। उनकी मां एक गांव की मुखिया हैं। गायक को इससे पहले अपने गानों में हिंसा और बंदूक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था। News Punjab
राजकीय प्राथमिक पाठशाला बगार शिक्षा खंड कोटखाई के चौथी कक्षा के छात्र आरव शर्मा ने राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कविता वाचन संगोष्ठी मेंप्रथम स्थान प्राप्त किया। आरव ने पूरे देश देश में हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) व जिला शिमला का नाम रोशन किया है। आरव ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने विद्यालय की अध्यापिका निशा शर्मा व अपने माता पिता को दिया है। बता दें कि निशा शर्मा राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित अध्यापिका हैं। वंही इस अवसर पर डिप्टी डिरेक्टर एलिमेंट्री एजुकेशन शिमला ने आरव शर्मा एवं उनकी अध्यापिका को इस विशेष उपलब्धि के लिए बधाई दी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने लोकसभा मे सभापति के सामने शिमला ज़िला में स्थापित हवाई अड्डे के मुद्दे को उठाया। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि शिमला शहर एक ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है और पूरे विश्व के मानचित्र पर पहचान रखता है, जब से कोविड का कठिन समय देश मे आया था तब से इस हवाई अड्डे पर हवाई सेवाएं रोक दी गयी थी। 2020 से अभी तक शिमला के हवाई अड्डे पर कोई विमान नहीं उतरा है, जिससे इस क्षेत्र के पर्यटन पर भी बड़ा असर पड़ा है। सुरेश कश्यप ने लोकसभा में बताया कि शिमला में एयर अलायन्स का एटीआर 42 एयरक्राफ्ट आता था जो आते समय 30 से 35 यात्रियों को लाता था और वापसि पर 8 से 10 यात्रियों को ले जाता था। उन्होंने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से सिफारिश करते हुए कहा कि शिमला के लिए हवाई सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करना चाहिए, जिससे इस क्षेत्र को फायदा पहुंचेगा। सांसद सुरेश कश्यप ने कुछ समय पहले शिमला हवाई अड्डे की एक बैठक भी ली थी। जहाँ उन्होंने इस संदर्भ में सभी समस्याओं पर चिंतन भी किया था, कश्यप ने कहा था कि जल्द ही वह लोकसभा में इस मुद्दे को उठाएंगे। शिमला के लिए इस प्रकार की सुविधा की लंबित मांग है और इससे जनता को बड़ी सुविधा मिलेगी।
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ग्रांफू-काजा-समदो मार्ग जल्द ही देश का तीसरा सबसे अधिक ऊंचाई पर बनने वाला डबल लेन मार्ग होगा। इससे पहले लद्दाख में 17673 फीट की ऊंचाई पर नोबरा और 17582 फीट की ऊंचाई पर मनाली-लेह सड़क मार्ग का निर्माण किया गया है। यह सड़क 10600 फीट की ऊंचाई पर समदो से शुरू होकर 14931 फीट ऊंचे कुंजम दर्रा से होते हुए 10700 फीट ऊंचे ग्रांफू में मिलेगी। हिमाचल प्रदेश के साथ लगते चीन बॉर्डर से सटे देश के सैन्य ठिकानों को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार 202 किलोमीटर लंबे ग्रांफू-काजा-समदो मार्ग को डबललेन करने जा रही है। इसकी कुल चौड़ाई करीब 60 फीट होगी। साल 2022 में लोसर से बातल के बीच सड़क चौड़ा करने का काम शुरू हो जाएगा। चीन बॉर्डर से सटे समदो और कौमिक में भारतीय सेना और आईटीबीपी के बेस कैंप मौजूद हैं। वर्तमान में ग्रांफू से लोसर के बीच 65 किलोमीटर के दायरे में सड़क की हालत बेहद खराब है। इस बीच वाहनों की अधिकतम गति महज 15 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा तक रहती है। डबललेन बन जाने से यह दूरी महज तीन घंटे में पूरी होगी।
सोने की कीमतों (Gold prices) में आज गिरावट देखी गई है और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर गोल्ड फ्यूचर्स का रेट देखें तो ये 0.2 फीसदी सस्ता होकर 47,791 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। सुबह 11.30 बजे के दाम पर नजर रखें तो सोने का फरवरी वायदा 0.36 फीसदी की गिरावट के बाद 47,701 रुपये पर ट्रेड हो रहा था। इसके अलावा चांदी का मार्च वायदा 0.30 फीसदी की गिरावट के साथ 61123 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रहा है। गोल्ड अपने रिकॉर्ड लेवल से 8000 रुपये नीचे आ चुका है। पिछले साल सोना 56,000 रुपये की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा था और इस समय सोना 48,000 रुपये से नीचे आ चुका है यानी ये पीली धातु इस दौरान सीधे-सीधे पूरे 8 हजार रुपये से ज्यादा सस्ती हो चुकी है। ग्लोबल बाजार में देखें तो डॉलर की तेजी के आधार पर सोने में बड़ी गिरावट आने की संभावना थी लेकिन कोरोना वायरस के ओमिक्रोन वेरिएंट इफेक्ट के चलते सोने की कीमतों में बहुत ज्यादा कमजोरी नहीं देखी गई। स्पॉट गोल्ड की कीमतों में 0.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और ये 1780.36 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा है। वहीं स्पॉट सिल्वर में 0.3 फीसदी की तेजी देखी गई और ये 22.37 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।
जिला किन्नौर (KINNAUR) में मौसम ने करवट ले ली है। दूसरे दिन भी जिला में आसमान में काले बादल छाए रहे। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने की संभावना बनी हुई है। समूचा क्षेत्र बादलों की चपेट में आने से तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज हुई है। रात के समय तापमान माईनस में जाने से जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में पानी जमना भी शुरू हुआ है। हालांकि लंबे समय से बारिश नहीं होने से सूखा पड़ने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में यहां के किसान-बागवान बारिश व बर्फबारी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ताकि किसान खेतों में बिजाई का कार्य शुरू कर सके। वही बर्फ सेब के पेड़ पौधों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा।
मतदाताओं को मतदान के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से निर्वाचन आयोग हिमाचल प्रदेश द्वारा एक अलग मुहिम चलाने का निर्णय लिया गया है। राज्य सचिवालय में मीडिया से मुखातिब मुख्य निर्वाचन अधिकारी सी पालरासु ने कहा कि 2022 में प्रदेश में होने वाले आम चुनाव के लिए आयोग द्वारा तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जिसके तहत नए मतदाताओं के पहचान पत्र बनाने का कार्य गत एक माह से चल रहा है। उन्होंने कहा कि अभी प्रदेश में कुल 53 लाख मतदाता है जिसमें 27 लाख पुरुष व 26 लाख महिला मतदाता है। इसके अलावा युवा मतदाताओं को मतदान करने व मतदाता पहचान पत्र बनाने के लिए विभिन्न माध्यमों से जागरूक कर रहे है। इसी के चलते शिमला में 8 दिसम्बर को साईकल रैली प्रतियोगिता के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रतियोगिता को 3 वर्गों में बंटा गया है। जिसमें 1 लाख 5 हजार तक का कैश प्राइज रखा गया है। इस प्रतियोगिता को आयोजित करने का उदेशय युवा पीढ़ी को मतदान के महत्व को समझाना है ताकि स्वस्थ लोकतंत्र के निर्माण में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। सी पालरासु ने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से भी मतदाताओं के पहचान पत्र बनाये जा रहे हैं, जिसमे बिलासपुर जिला के मतदाताओं ने सबसे ज्यादा प्रयोग किया है।
मौसम विभाग ने बुधवार को साइक्लोन 'जवाद' के आने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार 12 घंटे में अंडमान सागर में कम दबाव का क्षेत्र बनेगा। 2 दिसंबर को यह गहरे दबाव में तब्दील होगा जो 4 दिसंबर की सुबह आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों से टकरा सकता है। चक्रवात के कारण दक्षिण बंगाल के लगभग सभी जिलों में बहुत तेज बारिश होने की संभावना है। जिसके मद्देनजर पश्चिम बंगाल सरकार ने किसानों को अभी ही खेतों में पड़े मकई को काटने और बांधने की चेतावनी जारी की है, क्योंकि तेज बारिश से फसलों को ज्यादा नुकसान हो सकता है। मौसम विभाग की मानें तो तूफान का असर छत्तीसगढ़ पर भी पड़ सकता है। वहीं आईएमडी के मृत्युंजय महापात्र ने 3 दिसम्बर से ओड़िशा के तटीय जिले में बारिश होने की जानकारी दी है। उन्होंने समुद्र में जाने वाले सभी मछुआरों को 2 दिसंबर तक वापस आ जाने के लिए अनुरोध किया है। वहीं चक्रवात 'जवाद' के खतरे को देखते हुए रेलवे ने एहतियाती उपाय और यात्रियों की सुरक्षा के लिए कई ट्रेनों को रद्द करने का फैसला किया है। यह ट्रेनें 3 और 4 दिसंबर के लिए रद्द कर दिया गया है।


















































