भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशानुसार सोलन जिला के पांचों विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों 50-अर्की,51-नालागढ़,52-दून,53-सोलन (अनूसूचित जाति) तथा 54-कसौली (अनुसूचित जाति) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के सभी मतदान केन्द्र प्रथम सितंबर को खुले रहेंगे। यह जानकारी आज यहां इस संबंध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सोलन विवेक चंदेल ने दी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय ‘मतदाता सत्यापन कार्यक्रम’ (ईवीपी) के दृष्टिगत लिया गया है। निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार प्रथम सितंबर, 2019 से 30 सितंबर 2019 तक मतदाता सत्यापन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। विवेक चंदेल ने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शत-प्रतिशत त्रुटिरहित मतदाता सूचियां तैयार करने में मतदाताओं की अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित बनाना है। कार्यक्रम के तहत वर्ष 2020 तक मतदाता सूची एवं पंजीकरण में सुधार लाना तथा सभी पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ना और मतदाता सूची में किसी भी प्रकार के त्रुटि को सही करना है। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी ने कहा कि जिला के पांचों निर्वाचन क्षेत्रों के सभी मतदान केन्द्र इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रथम सितंबर, 2019 को खुले रहेंगे। इस दिन सभी बूथ लेवल अधिकारी अपने-अपने मतदान केन्द्रों पर उपस्थित होकर ‘मतदाता सत्यापन कार्यक्रम’ के तहत मतदाताओं की सहायता करेंगे। विवेक चंदेल ने कहा कि मतदाता नैशनल वोटर्ज सर्विस पोर्टल (एनवीएसपी) पर ऑनलाइन अपने वोट से संबंधित सभी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मतदाताओं की सुविधा के लिए निर्वाचन आयोग ने एनवीएसपी का मोबाइल वर्जन ऐप भी आरंभ किया है। विवेक चंदेल ने आग्रह किया कि सभी इस मोबाइल वर्जन को ऑनलाइन डाउनलोड करें और इसका लाभ उठाएं। उन्होंने जिला के सभी अधिकारियों से आग्रह किया कि वे मतदाता सत्यापन कार्यक्रम के लिए ऐप के माध्यम से अपने कार्यालय तथा अपने परिवार के सदस्यों की मतदाता सूची का सत्यापन करें ताकि कार्यक्रम के लक्ष्य को शत-प्रतिशत हासिल किया जा सके।कार्यक्रम के तहत,संबंधित बूथ स्तर के अधिकारी द्वारा मतदाताओं के घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन किया जाएगा। प्रथम जनवरी,2020 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नए मतदाताओं को मतदाता सूची में सम्मिलत किए जाने के लिए पत्र -6 भरा जाएगा। जो मतदाता, मतदाता सूची में पंजीकृत नहीं है उन्हें भी मतदाता सूची में पंजीकृत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त इस अवधि में मतदाता सूची की अन्य त्रुटियों को दूर किया जाएगा एवं आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। विवेक चंदेल ने सभी नागरिकों तथा पंजीकृत मतदाताओं से आग्रह किया कि इस कार्यक्रम के दौरान संबंधित बूथ लेवल अधिकारी को अपना भारतीय पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार, राशन कार्ड, सरकारी या अर्ध सरकारी कर्मचारियों का पहचान पत्र, बैंक पासबुक, किसान पहचान पत्र की छाया प्रति उपलब्ध करवाएं ताकि बूथ स्तर के अधिकारी सभी मतदाताओं का सत्यापन करना सुनिश्चित कर सकें। मतदाता, निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (उपमंडलाधिकारी) कार्यालय में जाकर भी उपरोक्त दस्तावेजों को जमा करवा कर मतदाता सूची में विद्यमान अपनी तथा अपने परिवार की जानकारी सत्यापित कर सकता है। इस अवसर पर जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक मनोज चौहान, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एनके गुप्ता, तहसीलदार निर्वाचन राजेंद्र शर्मा, खंड विकास अधिकारी सोलन ललित दुल्टा, नायब तहसीलदार निर्वाचन महेंद्र ठाकुर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
पूर्व मंत्री व विधायक श्री नैना देवी जी विधानसभा क्षेत्र रामलाल ठाकुर ने शनिवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहां की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में नेशनल हाईवे बनाने के कार्य को बंद करने के आदेश नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को दे रहे हैं। वही सदन में मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि हिमाचल में नेशनल हाईवे बनाने का कार्य जोरों पर चला है। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री को याद दिलाना चाहते हैं कि विधानसभा व देश की संसद लोकतंत्र का मंदिर होते है, तो कम से कम मंदिर में झूठ नहीं बोला जाता है। उन्होंने कहा जितने भी फोरलेन का काम हिमाचल प्रदेश में चल रहे है उनमें सेंट्रल डेविएशन की भारी कमी पाई जा रही है और जब भूमि अधिग्रहण हुआ तब भी यह अटैंडीफाई नहीं किया गया की रोड की सेंट्रल लाइन कौन होगी और कहां से होगी। इतने बड़े पैमाने पर किसानों की जमीनों को लेकर जो धांधलिया भूमि अधिग्रहण कार्यालय के माध्यम से की गई है उनकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। रामलाल ठाकुर ने कहा कि जो कंपनियां फोरलेन का कार्य पूर्व में छोड़कर गई है उन्होंने पुराने ठेकेदारों के भुगतान नहीं किए। सिर्फ बिलासपुर में 40 से 42 करोड़ की देनदारी संभावित मानी जा रही है। अब जो नई कंपनी काम करने आ रही है वह पैसा कहां से लाएगी? इसका नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने अभी तक कोई प्रावधान नहीं किया है।
प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोलन द्वारा सैनिकों के,आश्रितों के, उम्मीदवारों के लिए भाषा अध्यापकों के 7 पद भरे जाएंगे। यह जानकारी आज यहां उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा,सोलन श्रवण कुमार ने दी। उन्होंने कहा कि इस भर्ती के लिए काउंसलिंग 17 सितंबर को उनके कार्यालय में आयोजित की जाएगी। इनमें से 2 पद सामान्य वर्ग, 2 पद अनुसूचित जाति एवं 3 पद अनुसूचित जनजाति के लिए है। इन पदों के लिए सोलन जिला के विभिन्न रोजगार कार्यालयों से नाम प्राप्त हो गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी पात्र उम्मीदवारों को काउंसलिंग के लिए पत्र भेज दिए गए हैं। यदि किसी पात्र उम्मीदवार का नाम रोजगार कार्यालय द्वारा छूट गया है तो ऐसे उम्मीदवार अपने समीप के रोजगार कार्यालय से 15 सितंबर, 2019 तक अपना नाम उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा सोलन को भिजवा सकते हैं। जो उम्मीदवार निर्धारित तिथि व समय पर उपस्थित नहीं होंगे तो वे भविष्य में इन पदों के लिए अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत नहीं कर सकेंगे।उपनिदेशक ने कहा कि काउंसलिंग में उम्मीदवारों को अपने साथ आवश्यक योग्यता प्रमाण पत्र, अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण प्रमाण पत्र, रोजगार कार्यालय प्रमाण पत्र, सक्षम अधिकारी द्वारा जारी हिमाचली प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, सैनिकों के आश्रित प्रमाण पत्र, संबंधित श्रेणी का प्रमाण पत्र एवं नवीनतम सत्यापित फोटो साथ लाना जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि अधिक जानकारी के लिए उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा सोलन के कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोलन द्वारा शास्त्री अध्यापकों की बैचवाईज भर्ती के लिए काउंसलिंग 18 सितंबर, 2019 को की जाएगी। यह जानकारी एक सरकारी प्रवक्ता ने दी। उन्होंने कहा कि शास्त्री अध्यापकों के 13 पदों के लिए यह काउंसलिंग उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा सोलन के कार्यालय में की जाएगी।काउंसलिंग में उम्मीदवारों को अपने साथ शैक्षणिक व व्यवसायिक योग्यता के मूल प्रमाण पत्र,अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण प्रमाण पत्र,रोजगार कार्यालय प्रमाण पत्र,हिमाचली प्रमाण पत्र,चरित्र प्रमाण पत्र,जाति प्रमाण पत्र,संबंधित श्रेणी का प्रमाण पत्र एवं नवीनतम सत्यापित फोटो साथ लाना जरूरी होगा। उमीदवारो की सूची सोलन जिला के विभिन्न रोजगार कार्यालयों से प्राप्त की गई है। सभी पात्र उम्मीदवारों को काउंसलिंग के लिए पत्र भेज दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी पात्र उम्मीदवार का नाम रोजगार कार्यालय द्वारा छूट गया है तो ऐसे उम्मीदवार अपने समीप के रोजगार कार्यालय से 16 सितंबर, 2019 तक अपना नाम उपनिदेशक,प्रारंभिक शिक्षा सोलन को भिजवा सकते हैं।और अधिक जानकारी के लिए उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा सोलन के कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
प्राचीन शिवमंदिर दाड़लाघाट में 1 सितंबर से 11 सितंबर तक शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा में आचार्य भगत राम नड्डा शिव महापुराण की अमृतमयी कथा का गुणगान एवं व्याख्यान करेंगे। बाबा महन्त श्री जयदेव गिरी जी महाराज ने बताया कि शिव मंदिर में आयोजित हो रही शिवकथा के महायज्ञ में अपनी आहुति डालने एवं पुण्य के भागी बनने हेतु दाड़लाघाट व आसपास के सभी क्षेत्र के श्रद्धालु सादर आमंत्रित हैं।
बी एल सेंट्रल पब्लिक स्कूल कुनिहार में बड़ी धूमधाम से छोटे बच्चो का 24वां वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह मनाया गया I अमर सिंह ठाकुर निर्देशक HPMC ने इस समारोह में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की I इस मौके पर सोनिया ठाकुर मेम्बर महिला मोर्चा हिमाचल प्रदेश, सुनीता ठाकुर प्रधान ग्राम पंचायत हाटकोट, कौशल्या कँवर अध्यक्ष सम्भव समिति कुनिहार विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकित की I मंच का संचालन करते हुए शिवानी शर्मा ने सर्वप्रथम अतिथि महोदय का भव्य स्वागत किया, और कार्यक्रम की शुरुवात माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की गई I उसके बाद एन एस एस की छात्राओं ने स्वागत गीत पेश किया I नर्सरी से दूसरी कक्षा के बच्चों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया I इसमें मुख्य रूप से हिमाचल दर्शन, देश भक्ति, हिमाचली नाटी, नृत्य आदि आकर्षण का केंद्र रहे I स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने मुख्यअतिथि, विशिष्ट अतिथियों और अभिभावकों का स्वागत किया और समृति चिन्ह देकर उन्हें सम्मानित किया I मुख्यातिथि ने अपने संबोधन में विद्यालय को इस वार्षिक समरोह के लिए बधाई दी और कहा की ये शिक्षण संस्थान एक मंदिर है I उन्होंने विद्यालय के सभी बच्चों को शुभकामनाये दी व उज्जवल भविष्य की कामना की I मुख्यातिथि ने नर्सरी से दूसरी कक्षा तक के छात्रों को, पिछले सत्र में A ग्रेड प्राप्त करने वाले सभी बच्चों को और सांकृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी छात्रों को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया I कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य पदम् नाभम ,मुख्याध्यापिका सुषमा शर्मा ने मुख्यातिथि ,विशिष्ट अतिथियों, सभी अभिभावकों का इस समारोह में आने के लिए धन्यवाद व्यक्त किया I इस अवसर पर उप प्रधानाचार्य किरण जोशी, पीटीए अध्यक्ष रंत्तन तंवर, जय पाल, पीटीए सदस्य रंजना , भीमा, तेग राम, कनिष्ट अभियन्ता बिजली विभाग विकास ठाकुर, प्रोफ़ेसर नूतन कँवर, प्रतिभा कँवर, विद्यालय मुख्य सलाहकार रोशन लाल, अमर सिंह परिहार, हंस राज ठाकुर, सुरेश जोशी, राजेंद्र जोशी ,ओम प्रकाश भारद्वाज ,विद्यालय का समस्त अध्यापक वर्ग व् सभी बच्चे मौजूद रहे I
पंजाबी महासभा सोलन ने बैठक का आयोजन किया I संस्था के अध्यक्ष विजय पूरी ने बैठक की अध्यक्षता की I इस मौके पर संस्था द्वारा निकट भविष्य में आयोजित किए जाने वाले समाजिक कार्यों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई | वहीँ संस्था के विस्तार के लिए कई नए सदस्यों को संस्था के साथ जोड़ा गया I नए सदस्यों में ग्रीन हिल्स इंजिनीयरिंग कॉलेज के चेयरमैन किरपाल सिंह पसरीचा ,डा अशोक हांडा,रमिंदर बावा,अनिल बाली,इंदु साहनी,राजेश स्तेजा,गौरव साहनी और अमित आनंद को पुष्प कर संस्था में शामिल किया गया I सभी नए सदस्यों ने संस्था का सदस्य बनने पर ख़ुशी जताई और आश्वासन दिया कि वह भविष्य में संस्था द्वारा समाज की भलाई के लिए किए जा रहे कार्यों में बढ़ चढ़ कर भाग लेंगे I इस मौके पर संस्था के चेयरमैन मनोज साहनी,महासचिव विकास जेठी,भरत साहनी,अमन सेठी,विक्रम बेदी,जतिन साहनी,शोभित बहल कमल विग,जय नंदा,शोभित बहल,गगन सूरी,अनुज सूरी,कीर्ति कौशल और नितिन भसीन मौके पर मौजूद रहे | .
हिडिम्बा देवी मंदिर उत्तर भारत में हिमाचल प्रदेश राज्य के मनाली में स्थित है। यह एक प्राचीन गुफा मंदिर है, जो भारतीय महाकाव्य महाभारत के भीम की पत्नी हिडिम्बी देवी को समर्पित है। यह मनाली में सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है। इसे ढुंगरी मंदिर (Dhungiri Temple) के नाम से भी जाना जाता है। मनाली घूमने आने वाले सैलानी इस मंदिर को देखने जरूर आते हैं। यह मंदिर एक चार मंजिला संरचना है जो जंगल के बीच में स्थित है। स्थानीय लोगों ने मंदिर का नाम आसपास के वन क्षेत्र के नाम पर रखा है। हिल स्टेशन में स्थित होने के कारण बर्फबारी के दौरान इस मंदिर को देखने के लिए भारी संख्या में सैलानी यहां जुटते हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस मंदिर में देवी की कोई मूर्ति स्थापित नहीं है बल्कि हिडिम्बा देवी मंदिर में हिडिम्बा देवी के पदचिह्नों की पूजा की जाती है।’हिडिम्बा देवी मंदिर का निर्माण हिमालय पर्वतों के कगार पर डुंगरी शहर के पास एक पवित्र देवदार के जंगल के बीच में कराया गया है। माना जाता है कि भीम और पांडव मनाली से चले जाने के बाद हिडिम्बा राज्य की देखभाल के लिए वापस आ गए थे। ऐसा कहा जाता है कि हिडिम्बा बहुत दयालु और न्यायप्रिय शासिका थी। जब उसका बेटा घटोत्कच बड़ा हुआ तो हिडिम्बा ने उसे सिंहासन पर बैठा दिया और अपना शेष जीवन बिताने के लिए ध्यान करने जंगल में चली गयी। हिडिम्बा अपनी दानवता या राक्षसी पहचान मिटाने के लिए एक चट्टान पर बैठकर कठिन तपस्या करती रही। कई वर्षों के ध्यान के बाद उसकी प्रार्थना सफल हुई और उसे देवी होने का गौरव प्राप्त हुआ। हिडिम्बा देवी की तपस्या और उसके ध्यान के सम्मान में इसी चट्टान के ऊपर इस मंदिर का निर्माण 1553 में महाराजा बहादुर सिंह ने करवाया था। मंदिर एक गुफा के चारों ओर बनाया गया है। मंदिर बनने के बाद यहां श्रद्धालु हिडिम्बा देवी के दर्शन पूजन के लिए आने लगे। हिडिम्बा मंदिर पांडवों के दूसरे भाई भीम की पत्नी हिडिम्बा को समर्पित है। हिडिम्बा एक राक्षसी थी जो अपने भाई हिडिम्ब के साथ इस क्षेत्र में रहती थी। उसने कसम खाई थी कि जो कोई उसके भाई हिडिम्ब को लड़ाई में हरा देगा, वह उसी के साथ अपना विवाह करेगी। उस दौरान जब पांडव निर्वासन में थे, तब पांडवों के दूसरे भाई भीम ने हिडिम्ब की यातनाओं और अत्याचारों से ग्रामीणों को बचाने के लिए उसे मार डाला और इस तरह महाबली भीम के साथ हिडिम्बा का विवाह हो गया। भीम और हिडिम्बा का एक पुत्र घटोत्कच हुआ, जो कुरुक्षेत्र युद्ध में पांडवों के लिए लड़ते हुए मारा गया था। देवी हिडिम्बा को समर्पित यह मंदिर हडिम्बा मंदिर के नाम से जाना जाता है। हिडिम्बा देवी मंदिर की खासियत यह है कि इस मंदिर का निर्माण पगोडा शैली (Pagoda Style) में कराया गया है जिसके कारण यह सामान्य मंदिर के काफी अलग और लोगों के आकर्षण का केंद्र है। यह मंदिर लकड़ी से बनाया गया है और इसमें चार छतें हैं। मंदिर के नीचे की तीन छतें देवदार की लकड़ी के तख्तों से बनी हैं और चौथी या सबसे ऊपर की छत का निर्माण तांबे एवं पीतल से किया गया है। मंदिर के नीचे की छत यानि पहली छत सबसे बड़ी, उसके ऊपर यानि दूसरी छत पहले से छोटी, तीसरी छत दूसरे छत से छोटी और चौथी या ऊपरी छत सबसे छोटी है, जो कि दूर से देखने पर एक कलश के आकार की नजर आती है। हिडिम्बा देवी मंदिर 40 मीटर ऊंचे शंकु के आकार का है और मंदिर की दीवारें पत्थरों की बनी हैं। मंदिर के प्रवेश द्वार और दीवारों पर सुंदर नक्काशी की गई है। मंदिर में एक लकड़ी का दरवाजा लगा है जिसके ऊपर देवी, जानवरों आदि की छोटी-छोटी पेंटिंग हैं। चौखट के बीम में भगवान कृष्ण की एक कहानी के नवग्रह और महिला नर्तक हैं। मंदिर में देवी की मूर्ति नहीं है लेकिन उनके पदचिन्ह पर एक विशाल पत्थर रखा हुआ है जिसे देवी का विग्रह रूप मानकर पूजा की जाती है। मंदिर से लगभग सत्तर मीटर की दूरी पर देवी हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच को समर्पित एक मंदिर है।हर साल श्रावण के महीने में मंदिर में हिडिम्बा देवी मंदिर में एक उत्सव का आयोजन किया जाता है। माना जाता है कि यह उत्सव राजा बहादुर सिंह की याद में मनाया जाता है जिसने इस मंदिर का निर्माण कराया था। इसलिए स्थानीय लोगों ने इस मेले का नाम रखा है- बहादुर सिंह रे जातर (Bahadur Singh Re Jatar)। इसके अलावा यहां 14 मई को हिडिम्बा देवी के जन्मदिन के अवसर पर एक अन्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान स्थानीय महिलाएं डूंगरी वन क्षेत्र में संगीत और नृत्य के साथ जश्न मनाती हैं। कहा जाता है कि मंदिर लगभग 500 साल पुराना है। श्रावण मास में आयोजित होने वाले मेले को सरोहनी मेला (Sarrohni Mela) के नाम से जाना जाता है। यह मेला धान की रोपाई पूरा होने के बाद आयोजित होता है। इसके अलावा नवरात्र के दौरान भी मंदिर में दशहरा महोत्सव का आयोजन होता है जिसमें दर्शन के लिए भक्तों की लंबी लाइन लगती है।
वो 1 सितम्बर 1972 का दिन था। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ यशवंत सिंह परमार उस दिन सोलन में मौजूद थे। डॉ परमार ओल्ड डीसी ऑफिस चौक या क्रांति चौक पर जैसे ही पहुंचे तो उपस्थित लोगों ने जबरदस्त नारेबाजी और तालियां बजाकर डॉ परमार का अभिनन्दन किया। तब डॉ परमार ने कहा था 'ये स्वागत मेरा है या नए ज़िले का।' जी हाँ उस दिन सोलन को ज़िले का दर्जा दिया गया था और आज सोलन 47 वर्ष का हो चूका है। 47 वर्षों के इस सफर में सोलन ने बहुत कुछ हासिल किया है तो बहुत लम्बा सफर तय करना फिलहाल शेष है। जानते है सोलन के इस सफर के बारे में : मशरूम सिटी ऑफ़ इंडिया: जिला मुख्यालय सोलन को मशरूम सिटी ऑफ़ इंडिया का तमगा भी प्राप्त है। सोलन में मशरूम अनुसन्धान निदेशालय भी जहाँ मशरूम पर शोध होता है। बीत कुछ दशकों में मशरूम उत्पादन से यहाँ के किसानो की तकद्दीर बदल गई है। सिटी ऑफ़ रेड गोल्ड: हिमाचल प्रदेश में हर वर्ष लगभग डेढ़ लाख मेट्रिक टन टमाटर का उत्पादन होता है। इसका करीब 40 फीसदी उत्पादन सिर्फ सोलन में होता है। सोएं में उगने वाला हिम सोना टमाटर न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी एक्सपोर्ट होता है। एजुकेशन हब ऑफ़ हिमाचल: सोलन की पहचान प्रदेश के एजुकेशन हब के तौर पर होती है। यहाँ 9 विवि है। देश के जाने माने स्कूल लॉरेंस सनावर और पाइनग्रोव भी सोलन में ही स्थित है। इसके अतिरक्त यहाँ प्रदेश की इकलौती सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी और उर्दू भाषा एवं प्रशिक्षण संस्थान भी है। इसके अतिरक्त जिला में 9 विवि, 769 प्राथमिक विधालय, 142 माध्यमिक विधालय, 60 उच्च विधालय व 127 वरिष्ठ माध्यमिक विधालय है। देश का फार्मा हब है सोलन: हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल एरिया बीबीएन सोलन में आता है। इस क्षेत्र में छोटे बड़े करीब ढाई हज़ार उद्योग है। इसके अलावा परवाणू में भी करीब 500 उद्योग है। कुल जीडीपी में एक चौथाई योगदान सोलन का: प्रदेश की कुल जीडीपी में सोलन का योगदान 25 प्रतिशत से भी अधिक है। सोलन का पर कैपिटा इनकम भी तीन लाख 90 हज़ार से अधिक है, जो प्रदेश में अव्वल है। अनुसूचित जाति / जनजाति का प्रदेश स्तरीय कार्यालय सोलन में स्थित है। वादे, जिन्हें पूरा होने का इंतज़ार है ... जिला मुख्यालय सोलन प्रदेश की सबसे बड़ी नगर परिषद् है। अब तक सरकार ने इसे नगर निगम बनाने की जहमत नहीं उठाई। इससे पहले स्मार्ट सिटी के चयन में भी सोलन को तरजीह नहीं दी गई थी। टमाटर आधारित फ़ूड प्रोसेसिंग प्लांट और कोल्ड स्टोरेज की मांग कई दशकों से लंबित है। परवाणू और बीबीएन क्षेत्र को रेलमार्ग से जोड़ने का वादा किसी भी सरकार ने पूरा नहीं किया। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कभी भी जरूरी कदम नहीं उठाये गए। जिला सोलन में पर्यटन सिर्फ कसौली और चायल तक ही सिमट कर रह गया है। जबकि अन्य क्षेत्रों में भी पर्यटन की अपार संभावनाएं है। जिला सोलन का क्षेत्रफल 1935 वर्ग किलोमीटर है। सोलन में 4 मंडल, 5 तहसीलें व 211 पंचायतें है। 2011 सेन्सस के अनुसार सोलन की आबादी 5 लाख 77 हज़ार है।
-अब तक 6 नेता बने है हिमाचल के मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने अब तक के अपने सफर में 6 मुख्यमंत्री देखे है। वर्तमान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जहाँ पहली दफा मुख्यमंत्री बने है तो पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह 6 बार ये पद संभाल चुके है। जो 6 नेता अब तक मुख्यमंत्री बने है उनमें से तीन कांग्रेस से तो दो भजपा से रहे। जबकि शांता कुमार एक मर्तबा जनता पार्टी से मुख्यमंत्री बने तो दूसरी मर्तबा भारतीय जनता पार्टी से। एक और इत्तेफ़ाक़ है कि जहाँ कांग्रेस के तीनों मुख्यमंत्रियों का ताल्लुख ऊपरी हिमाचल से रहा है तो भाजपा के तीन मुख्यमंत्री निचले हिमाचल से चुनकर आये। एक और दिलचस्प बात है।प्रदेश के तीन मुख्यमंत्री ऐसे है जो मुख्यमंत्री बनने के बाद विधानसभा का चुनाव हारे है। 1990 के चुनाव में वीरभद्र सिंह ने जुब्बल कोटखाई और रामपुर सीटों से चुनाव लड़ा था। वीरभद्र रामपुर से तो जीत गए पर जुब्बल कोटखाई में उनसे पहले सीएम रहे ठाकुर रामलाल ने उन्हें पटखनी दे दी। इस बाद 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में तब के मुख्यमंत्री शांता कुमार को भी जनता ने नकार दिया। वहीँ 2017 में दो बार मुख्यमंत्री रहे प्रो प्रेम कुमार धूमल सीएम कैंडिडेट होने के बावजूद चुनाव नहीं जीत सके। सुजानपुर की जनता ने सीएम प्रत्याशी को ही घर बैठा दिया। पहले आम चुनाव से लेकर 1977 तक प्रदेश निर्माता डॉ यशवंत सिंह परमार सीएम रहे। उनके बाद ठाकुर रामलाल मुख्यमंत्री बने। रामलाल सरकार सिर्फ तीन माह में बर्खास्त कर दी गई और इसके बाद शांता कुमार के रूप में प्रदेश को पहला गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री मिला।1980 में तिगड़मबाज़ी के बुते ठाकुर रामलाल फिर मुख्यमंत्री बने। पर 1983 आते- आते भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे ठाकुर रामलाल को इस्तीफा देना पड़ा और हिमाचल की सियासत में एंट्री हुई वीरभद्र सिंह की। तब से अब तक जब भी कांग्रेस को सत्ता मिली सीएम वीरभद्र ही बने। इस दरमियान 1990 में एक बार फिर शांता कुमार सीएम बने। पर 1998 में जब भाजपा सत्ता में आई तो चेहरा शांता नहीं प्रो प्रेम कुमार धूमल थे। इसके बाद धूमल 2007 से 2012 तक भी सीएम रहे। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी भजपाईयों की बरात के दूल्हे धूमल ही थे, पर जनता ने उन्हें जीत का नेक नहीं दिया। भाजपा तो चुनाव जीत गई पर धूमल हार गए। इसके बाद एंट्री हुई वर्तमान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की। ये सभी नेता जो हिमाचल का मुख्यमंत्री बन सके, इनके राजनैतिक सफर के बारे में रोचक पहलु जानने के लिए पढ़ते रहे हमारी ख़ास श्रंखला हिमाचल के मुख्यमंत्री।
सरकार ने पब्लिक सेक्टर 10 बैंकों के विलय की घोषणा की है। इन 10 बैंको के विलय से 4 बैंक बनेंगे। साथ ही सरकार ने इन सभी 10 बैंकों को 55,250 करोड़ रुपये दिये जाने की भी घोषणा की है , जिसमे से अकेले पंजाब नेशनल बैंक को 16,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। जिन बैंकों का विलय हो रहा है, वे समान तकनीकी प्लेटफॉर्म पर ऑपरेट होंगे। पंजाब नेशनल बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक का एक में विलय होगा। इस तरह ये बैंक मिलकर देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक बनाएंगे और इनका बिजनेस 17.95 लाख करोड़ होगा। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, आंध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक मिलकर एक बैंक का गठन होगा, जो देश का पांचवां सबसे बड़ा पीएसयू बैंक होगा। इसका बिजनेस 14.59 लाख करोड़ होगा। इंडियन बैंक का विलय इलाहाबाद बैंक के साथ किया जाएगा और इस तरह यह देश का सातवां सबसे बड़ा पीएसयू बैंक बन जाएगा। इसका बिजनेस 8.08 लाख करोड़ होगा। केनरा बैंक और सिंडिकेट बैंक का भी विलय किया जाएगा, जो देश का चौथा सबसे बड़ा पीएसयू बैंक होगा। इसका बिजनेस 15.20 लाख करोड़ होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन दस बैंकों के कर्मचारियों को आश्वस्त किया है कि विलय के कारण उनकी नौकरी नहीं जाएगी। इस तरह बंटेगा 10 बैंकों में कुल 55,250 करोड़ : पंजाब नेशनल बैंक- 16,000 करोड़ रुपये यूनियन बैंक ऑफ इंडिया- 11,700 करोड़ रुपये बैंक ऑफ बड़ौदा- 7,000 करोड़ रुपये केनरा बैंक- 6,500 करोड़ रुपये इंडियन बैंक- 2,500 करोड़ रुपये इंडियन ओवरसीज बैंक- 3,800 करोड़ रुपये सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया- 3,300 करोड़ रुपये यूको बैंक- 2,100 करोड़ रुपये यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया- 1,600 करोड़ रुपये पंजाब एंड सिंध बैंक- 750 करोड़ रुपये
भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशानुसार जिला की 53-सोलन (अनूसूचित जाति) तथा 54-कसौली (अनुसूचित जाति) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों के सभी मतदान केन्द्रों में ‘मतदाता सत्यापन कार्यक्रम’ प्रथम सितंबर, 2019 से से 30 सितंबर 2019 तक चलाया जाएगा। यह जानकारी निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं उपमंडलाधिकारी सोलन रोहित राठौर ने दी। उन्होंन कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2020 तक मतदाता सूची एवं पंजीकरण में सुधार लाना तथा सभी पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ना है। उन्होंने कहा निर्वाचन क्षेत्रों के सभी मतदान केन्द्र प्रथम सितंबर, 2019 को खुले रहेंगे इस दिन सभी बूथ लेवल अधिकारी अपने-अपने मतदान केन्द्रों पर उपस्थित होकर ‘मतदाता सत्यापन कार्यक्रम’ का शुभारम्भ करेंगे। उन्होंने कहा कि इन 30 दिनों कि अवधि में बूथ स्तर के अधिकारी अपने मतदान केन्द्र की मतदाता सूची में पंजीकृत सभी मतदाताओं से संबंधित प्रविष्टियों का सत्यापन करने के साथ-साथ अपात्र मतदाताओं का अपमार्जन, छूटे हुए पात्र मतदाताओं का पंजीकरण तथा भावी मतदाताओं के सम्बन्ध में भी जानकारी एकत्र करेंगे। निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ने सभी नागरिकों तथा पंजीकृत मतदाताओं से आग्रह किया जाता है कि इस कार्यक्रम के दौरान संबंधित बूथ लेवल अधिकारी को भारतीय पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार, राशन कार्ड, सरकारी या अर्ध सरकारी कर्मचारियों का पहचान पत्र, बैंक पासबुक, किसान पहचान पत्र की छाया प्रति उपलब्ध करवाएं ताकि बूथ स्तर के अधिकारी सभी मतदाताओं का सत्यापन करना सुनिश्चित कर सकें। मतदाता निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (उपमंडलाधिकारी) कार्यालय में जाकर भी उपरोक्त दस्तावेजों को जमा करवा कर मतदाता सूची में विद्यमान अपनी तथा अपने परिवार की जानकारी सत्यापित कर सकता है।
यद्यपि...! कुछ बातें तार्किक न लगे लेकिन आस्था और लोकगाथाओं को चुनौती नहीं दी जाती। ऐसी ही एक लोककथा है नाहन के आम बागों की। संत-महात्माओं की तपोस्थली रहा नाहन शहर ‘आम’ के लिए मशहूर है। पर यहाँ स्थित आम के बागीचों के पीछे भी एक रहस्य है, एक किद्वंतीके अनुसार कालिस्थान मंदिर में तपस्या करने वाले एक महान तपस्वी ने नाहन के आसपास नौ लाख आम के वृक्षों की उत्पति अपने कमंडल के जल छिड़काव से कर दी थी। एक लोकगाथा के अनुसार नाहन स्थित कालिस्थान मंदिर के एक तपस्वी आम के आचार के बड़े शौकीन थे। अनुयायी महाराज के लिए शहर में जाकर भिक्षा में आचार की मांग करते थे। इसी दौरान एक दिन अनुयायी, एक घर में आचार की मांग करने पहुंचा। इस पर उस घर में मौजूद महिला ने गुस्से में आकर कहा कि ‘रोज आचार मांगने आ जाते हो। इतना आचार कहां से लाएं। यदि तुम्हारे महाराज को आम के आचार का इतना ही शौक है, तो क्यों नहीं वे अपने आम के पेड़ उगा लेते ?’’ अनुयायियों ने घटना का वृतांत अपने गुरू महाराज को सुनाया। इस पर गुरू महाराज ने प्रण किया कि वे अपने आम के पेड़ों का ही आचार खाएंगे। उन्होंने अपनी तपस्या के बल पर कमंडल से जल छिड़क दिया और जहाँ- जहाँ तक जल की बूंदे गिरी वहां पर आम के वृक्ष उग आए। कहा जाता है पूरे नौ लाख आम के वृक्ष उग गए। नाहन के आसपास कई आम के बाग हैं, जैसे जाबल का बाग, विक्रम बाग, खद्दर का बाग इत्यादि। अब इनकी उत्पति कैसे हुई ये तो अतीत में छिपा है, वर्तमान है तो बस इन वृक्षों पर लगे मीठे आम।
पुलिस अधीक्षक साक्षी वर्मा ने बिलासपुर जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय उच्च मार्ग-205 तथा साथ लगते कुछ अन्य राज्य मार्ग पर जाम की समस्या का मिनटों में हल करने का ऐलान किया है। एसपी साक्षी वर्मा द्वारा तैयार किए गए खाके के अनुसार कैंचीमोड़ से लेकर सलापड़ पुल तक नेशनल हाईवे को छह बीटस में बांटा गया है तथा इसमें पुलिस विभाग के कर्मचारी मोटर साइकिलों पर सदा तैयार रहेंगे। यदि किसी भी वजह से सड़क बाधित होती है या जाम की समस्या उत्पन्न होती है तो सूचना मिलते ही पुलिस कर्मचारी मौके पर पहुंचेगे तथा समस्या का निदान करेंगे। ऐसे में यातायात में फंसे लोगों को कुछ ही क्षणों में राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि पुलिस विभाग द्वारा इसी मार्ग में विभिन्न जगह पर स्थानीय फोन नंबरों का डिस्पले ,बोर्डों के माध्यम से किया जाएगा। जिससे पर्यटक या अन्य बाहरी राज्यों से आने वाले लोग भी सड़क की समस्या को तुरंत पुलिस विभाग के नियंत्रण कक्ष तक पहुंचा सकेंगे। और गरामोड़ा से सलापड़ तक बीटस के हिसाब से पुलिस कर्मियों की तैनाती की जाएगी। इन बीटस में नौणी से ब्रम्हपुखर,सलापड़ से घागस, घागस से नौणी, नौणी से कल्लर, कल्लर से गंभर और गंभर से कैंची मोड़ शामिल है। नौणी से लेकर कल्लर तक दुर्घटनाओं के मामले में यह मार्ग संवेदनशील है। लिहाजा यहां पर विभाग का विशेष फोक्स रहेगा। मौके पर पुलिस कर्मी त्वरित प्रभाव से पहुंचे, इसके लिए विभाग की ओर से नई मोटर साईकिल खरीदी जाएंगी। . .
नाहन कोठी, पंचकुला शहर में स्थित एक ऐतिहासिक और प्राचीन ईमारत है। पंचकुला के सैक्टर 12-ए में स्थित है नाहन कोठी, एक रियासतकालीन ईमारत। इसका निर्माण करीब 160 वर्ष से पूर्व किया गया था। लाल रंग की यह कोठी महाराजा सिरमौर फतह प्रकाश के पुत्रों सुरजन सिंह और बीर सिंह द्वारा बनवाई गई थी। यह कोठी पंचकुला के ‘राइल्ली’ नामक गांव में स्थित है जो वर्तमान में पंचकुला के सैक्टर 12-ए में पड़ता है। लंबे समय से इस भवन को हैरिटेज भवन घोषित करने और इसके संरक्षण के प्रयास चले रहे हैं।
जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त राजेश्वर गोयल ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदाता सूचियों का विशेष पुनरीक्षण किया जा रहा है। उन्होने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत 1 सितम्बर से 30 सितम्बर तक बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर बीएलओ. एप्प के माध्यम से प्रत्येक मतदाता की प्रिविष्टियो की जांच-पडताल करेंगे। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के अन्तर्गत कोई भी नागरिक भारतीय पासपोर्ट/ड्राइविंग लाइसेंस/आधार/राशन कार्ड/सरकारी/अर्ध-सरकारी पहचान पत्र/बैंक पासबुक/ किसान पहचान पत्र की प्रति सम्बन्धित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एसडीएम.) कार्यालय में जमा करवा कर मतदाता सूची में विद्यमान विंसगतियों को ठीक करवा सकता है। और ये भी बताया कि इस कार्यक्रम के दौरान नागरिक स्वंय भी मतदाता हेल्पलाइन मोबाईल एप्प/एनवीएसपी. पोर्टल/ लोकमित्र केन्द्र पर जाकर प्रविष्टियों को सत्यापित कर सकता है। जिला के सभी बूथ लेवल अधिकारी 1 सितम्बर को अपने-अपने मतदान केन्द्रों पर उपस्थित रहेंगे तथा बीएलओ. मोबाईल एप्प के माध्यम से मतदाताओं के नामों की प्रविष्टियों को सत्यापित करेंगें। उन्होने बताया कि सभी विभागों, जिनके भवनों में मतदान केन्द्र स्थापित हैं, को 1 सितम्बर को कार्यालय/पाठशाला खुली रखने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जिला के सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे मतदाता सूची में अपना विवरण जैसे फोटो, पता व जन्म तिथि जरूर दर्ज़ करवाए । उन्होने सभी राजनैतिक दलों/पंचायत प्रतिनिधियों/महिला/युवक मण्डलों से भी आग्रह किया कि इस कार्यक्रम की जानकारी समस्त मतदाताओं तक पहुंचाने में अपना सहयोग दें।
प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत डाहड के गांव वाला मे जागरुकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विषय वाद विशेषज्ञ अशोक चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना में किसानों को 60 साल की आयु पूरी करने पर 3 हजार रुपए मासिक पेंशन मिलेगी। उन्होंने बताया कि किसान की मृत्यु होने की स्थिति में उसकी पत्नी को 15 सौ रुपए की मासिक पेंशन मिलेगी और जिस किसान के पास दो हेक्टेयर तक कृषि भूमि होगी वे इस योजना के पात्र होंगे। उन्होंने कहा कि 18 से 40 वर्ष की आयु के किसानों के लिए यह एक स्वैच्छिक और योगदान आधारित पेंशन योजना है। इस योजना को छोटे किसानों के लिए बनाया गया है । इसलिए इसमें जमीन की सीमा है। उन्होंने किसानों से आवेदन किया कि इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना का नामांकन लोकमित्र केंद्रों के माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष की आयु से योजना में शामिल होने वाले किसान को 55 रुपए और 40 वर्ष की उम्र में योजना में आने वाले किसान को 200 रुपए की मासिक किस्त देनी होगी। इस योजना में तिमाही या छमाही किस्त देने का भी प्रावधान है। उन्होने बताया कि किसान के योगदान के बराबर ही सरकार भी अपनी ओर से योगदान देगी। उन्होंने इस योजना की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किसान की 60 वर्ष की आयु के बाद मृत्यु हो जाती है, तो पति या पत्नी को पारिवारिक पेंशन के रूप में 50 प्रतिशत यानी 1,500 रुपए की मासिक पेंशन मिलेगी। इस योजना में जो किसान किसी प्रकार की पेंशन ले रहे है या अन्य किसी प्रकार की पेंशन से जुड़े हुए है। वह यह योजना के लिए पात्र नही है। इस शिविर में सौ किसानों के अतिरिक्त पंचायत प्रतिनिधि भी उपस्थिति रहे। .
वो 14 फरवरी 1980 का दिन था। तब तक शांता कुमार के 22 विधायक ठाकुर रामलाल के खेमे में जा चुके थे और शांता कुमार समझ चुके थे कि अब हाथ पैर मारने का फायदा नहीं है। सो उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया था। अपने कार्यालय से उन्होंने अपनी पत्नी को फ़ोन किया, उन्हें बुलाया और दोनों सिनेमा देखने चले गए। फिल्म थी जुगनू। इस्तीफा देकर फिल्म देखने जाने वाला मुख्यमंत्री हिन्दुस्तान के इतिहास में शायद ही दूसरा कोई हो। दूसरा कोई हो भी नहीं सकता, शांता सिर्फ एक ही हो सकते है। शांता के राजनैतिक करीयर का आगाज़ वर्ष 1964 में हुआ। शांता ने पंचायत चुनाव लड़ा और पंच बन गए। ये बस शुरुआत थी। वर्ष 1967 आया और शांता ने जिला कांगड़ा के पालमपुर से अपना पहला चुनाव लड़ा लेकिन चुनाव हार गए। पर इसके बाद धीरे धीरे शांता विपक्ष का चेहरा बनते गए। 1972 का साल आया और शांता एक बार फिर विधानसभा चुनाव के रण में उतरे। इस बार क्षेत्र था जिला कांगड़ा का खेरा। इस मर्तबा शांता चुनाव जीत गए और विधानसभा में विपक्ष की आवाज़ के तौर पर उन्हकी पहचान स्थापित हो गई। कुछ समय बाद देश में इमरजेंसी लगी और राजनैतिक हालात बदल गए। शांता कुमार को भी नाहन जेल में बंद कर दिया गया जहाँ उनका साहित्यकार अवतार देखने को मिला। जेल में रहते हुए शांता कुमार ने कई उपन्यास लिखे, जिसका श्रेय वे कांग्रेस को देते है। 1977 का साल आया और हिमाचल में एक बार फिर विधानसभा चुनाव हुए। जनता पार्टी को 53 सीटों पर प्रचंड जीत मिली और शांता कुमार पहली बार मुख्यमंत्री बने। इस मर्तबा वे जिला कांगड़ा की सुलह सीट से जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे थे। बतौर मुख्यमंत्री अपने पहले कार्यकाल में शांता कुमार ने कई महत्वपूर्ण कार्य किये। अंत्रोदय योजना के जरिये उन्होंने गरीबों के बीच अपनी पैठ बनाई। गांव- गांव तक पानी के हैंडपंप पहुंचाए और पानी वाला मुख्यमंत्री कहलाये। सब कुछ ठीक चल रहा था, पर पूर्व मुख्यमंत्री ठाकुर रामलाल भला चुप बैठने वाले कहाँ थे। रामलाल की तिगड़मबाज़ी रंग लाई और फरवरी 1980 में शांता के 22 विधायकों ने उनका साथ छोड़ दिया। अतः शांता कुमार को इस्तीफा देना पड़ा। वर्ष 1980 में ही भारतीय जनता पार्टी का गठन भी हुआ। अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, भैरों सिंह शेखावत के साथ शांता कुमार ने उस दौर में पार्टी में मुख्य चेहरों में शुमार थे। इसके बाद 10 वर्षों तक शांता कुमार ने भाजपा को हिमाचल में खड़ा करने का काम किया। 1989 में वे संसद भी पहुंचे और उसके बाद 1990 के विधानसभा चुनाव में भजपा का सीएम फेस रहे। चुनाव में भाजपा को प्रचंड जीत मिली और शांता एक बार फिर मुख्यमंत्री शांता हो गए। दिसंबर 1992 में बावरी काण्ड के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव ने शांता की सरकार को बर्खास्त कर दिया जिसके बाद 1993 में फिर चुनाव हुए। 1990 में जिस भाजपा को प्रचंड जीत मिली थो वो 1993 में मजह 8 सीटों पर सिमट कर रह गई। खुद शांता कुमार भी चुनाव हार गए। हार का कारण ये नहीं था कि उन्होंने काम नहीं किया, बल्कि शांता अपने काम की वजह से ही हारे। कांग्रेस के रोटी-कपडा- मकान के घिसे पीटे नारे को लोगों ने शांता के आत्मनिर्भर हिमाचल के नारे पर तरजीह दी। इसका कारण था कर्मचारियों की नाराज़गी। हिमाचल में आज भी सत्ता का रास्ता कर्मचारियों के वोट तय करते है। शांता कुमार ने बतौर मुख्यमंत्री निजी क्षेत्र को प्रदेश में हाइड्रो प्रोजेक्ट लगाने की अनुमति दी थी। तब किन्नौर के बापसा में एक हाइड्रो प्लांट लगा था। इसी के विरोध में सरकारी कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। शांता भी उसूलों के पक्के थे सो नो वर्क नो पे का फ़रमार जारी कर दिया। 29 दिन चली इस हड़ताल का पैसा कर्मचारियों को नहीं दिया गया। साथ ही इस दौरान करीब 350 कर्मचारियों को उन्होंने बर्खास्त कर दिया। सो जब अगला चुनाव आया तो कर्मचारियों ने भी शांता कुमार से बराबर बदला लिया। हिमाचल प्रदेश को हर वर्ष करीब दो हज़ार करोड़ रुपये पानी की रॉयल्टी से मिलते है। ये शांता कुमार की ही देन है। जब पहली बार उन्होंने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया था तो विपक्ष ने जमकर खिल्ली उड़ाई थी। पर कांग्रेस की केंद्र सरकार को ये बात समझ आ गई और हिमचाल को उसका हक़ मिला। मोदी की पसंद नहीं थे शांता 1993 चुनाव की हार के बाद शांता कुमार प्रदेश की सियासत में वापसी नहीं कर सके।1998 चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी हिमाचल के प्रभारी थे जिनसे शांता की बनती नहीं थी। मोदी की पसंद प्रो प्रेम कुमार धूमल थे और चुनाव से पहले भाजपा ने धूमल को सीएम फेस घोषित कर दिया। इसके बाद पंडित सुखराम के समर्थन से धूमल ने पांच वर्ष सत्ता सुख भोगा। शांता कुमार और नरेंद्र मोदी के बीच हमेशा एक लकीर रही है। गोधरा दंगों के बाद शांता कुमार ने नरेंद्र मोदी के बारे में कहा था कि अगर मैं गुजरात का मुख्यमंत्री होता तो त्यागपत्र दे देता।
डीएवी अंबुजा विद्या निकेतन दाड़लाघाट में राष्ट्रीय खेल दिवस बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया गया। इस दौरान बच्चों के लिए विभिन्न खेलों का आयोजन किया गया। बच्चों ने खेल दिवस के मौके पर विभिन्न खेलों में अपने हुनर को दिखाया। इन खेलों में हर्डल रेस आकर्षण का केंद्र रही। इसके साथ ही स्कूल में चिल्ड्रन साइंस कांग्रेस 2019 में ऑनलाइन पंजीकरण हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में जिला सोलन के 72 से अधिक स्कूलों के शिक्षकों ने भाग लिया।इस में मुख्य रूप से राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल मंजयाट के प्रधानाचार्य डॉक्टर हेतराम वर्मा व दाड़लाघाट सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रधानाचार्य इंदु शर्मा तथा डीएवी अंबुजा के प्रधानाचार्य मुकेश ठाकुर और सोलन जिला के विज्ञान समन्वयक अमरीश उपस्थित रहे। अन्य गतिविधियों में स्कूल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फिट इंडिया मूवमेंट का लाइव टेलीकास्ट सुबह 10:00 बजे से विभिन्न कक्षा के विद्यार्थियों को दिखाया गया। स्कूल प्रबंधन समिति के चेयरमैन अनुपम अग्रवाल तथा प्रधानाचार्य मुकेश ठाकुर ने विभिन्न गतिविधियों के सफलतापूर्वक संचालन हेतु विद्यार्थियों तथा शिक्षकों को शुभकामनाएं दी।
राजकीय महाविद्यालय दाड़लाघाट में एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा एचआईवी और एड्स पर एक जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। रैली को प्रधानाचार्य जनेश कपूर, ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान रैली में छात्रों ने एचआईवी जागरूकता के बारे में नारे लगाए और लोगों को एचआईवी एड्स के बारे में जागरूक करने के लिए विभिन्न पोस्टर प्रदर्शित किए। रैली की अगुवाई एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी मनीला गुप्ता और संदीप कुमार की देखरेख में आयोजित की गई। इसके अलावा,छात्रों को आशा कार्यकर्ता अनीता कुमारी और रीना ठाकुर द्वारा एचआईवी,व्यक्तिगत स्वच्छता और सहरसा योजना के बारे में बताया गया। इस मोके पर महाविद्यालय के समस्त स्टाफ सदस्यों सहित बच्चे उपस्थित रहे।
राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष अशोक शर्मा की अध्यक्षता में आज उपमंडलाधिकारी कार्यालय नालागढ़ में गौवंश संवर्धन तथा बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़(बीबीएन) क्षेत्र को बेसहारा पशुओं से मुक्त करने के लिए बैठक आयोजित की गई। उपमंडलाधिकारी नालागढ़ प्रशांत देष्टा इस बैठक में विशेष रूप से उपस्थित रहे। अशोक शर्मा ने कहा कि बीबीएन क्षेत्र को बेसहारा पशुओं से मुक्त करने के लिए पशुपालन विभाग सहित अन्य विभागों का सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सभी विभागों को उचित दायित्व सौंपे गए हैं। उन्होंने कहा कि बेसहारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए आम लोगों को भी प्रशासन को सहयोग प्रदान करना होगा। उन्होंने स्थानीय प्रशासन व निकायों को निर्देश दिए कि विभिन्न मार्गों पर लावारिस अवस्था में प्राप्त पशुओं को गौशालाओं में पहुंचाना सुनिश्चित करें।उन्होंने कहा कि गौशालाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए गौशाला संचालक गौवंश के गोबर, मूत्र एवं दूध से बनने वाले उत्पादों को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है तथा पहाड़ी गाय का इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने बैठक में हांडाकुंडी में एचपीएसआईडीसी द्वारा 114 बीघा भूमि पर निर्मित की जा रही गौशाला परियोजना की भी समीक्षा की। उपमंडलाधिकारी प्रशांत देष्टा ने सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह हांडाकुंडी में बनने वाली गौशाला और बीबीएन को बेसहारा पशुओं से मुक्त करने के लिए समर्पित होकर कार्य करें ताकि लक्षित कार्य को तय समय के भीतर पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि बेसहारा पशु सभ्य समाज की पहचान नहीं है। इनसे जहां सड़क दुर्घटनाएं हो रही है वहीं ये पशु किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हांडाकुंडी में फेसिंग का कार्य शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। बैठक में तहसीलदार नालागढ़ ऋषभ शर्मा, खंड विकास अधिकारी राजकुमार, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय पाठक, डॉ. राजीव वालिया, पुलिस उप निरीक्षक शिवराम किशन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, गौशालाओं के संचालक उपस्थित थे।
हिमाचल प्रदेश पुलिस का नशा तस्करों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। वहीं वीरवार रात को लगभग 3 बजे के करीब पुलिस ने जिला सोलन के कुठाड़ में 16.6 ग्राम चिट्टा व इलेक्ट्रॉनिक तराजू बरामद किया है। मामले की पुष्टि करते हुए परवाणू के डीएसपी योगेश रोल्टा ने बताया कि आरोपी की पहचान 29 वर्षीय कनैता के रहने वाले विक्रम सिंह के तौर पर की गई है। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि युवक के पास इतना चिट्टा कहां से पहुंचा।
हिप्र पुलिस पेंशनर्ज वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान धनीराम तनवर,सन्तराम चन्देल,रूपराम ठाकुर,पतराम पंवर,केदारनाथ ठाकुर,जगदीश चौहान,रतीराम शर्मा,दीपराम ठाकुर,राजेन्द्र शर्मा,अमरचन्द पाल इत्यादि पेंशनरों ने अपने संयुक्त बयान में कहा है कि प्रदेश सरकार वर्ष 2003 के बाद के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन देने में आर्थिक कारणों से असमर्थ है। तो इंसानियत का तकाजा है कि देश व प्रदेश के मन्त्रीगण, एम पी व विधायकों चाहे वह किसी भी पार्टी का हो प्रदेश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए स्वेच्छा से अपनी पेंशन बन्द करवानी चाहिए।उन्होंने कहा कि जब सभी विभागों के कर्मचारियों को 35- 40 साल नौकरी करने के बाद भी पेंशन नही मिलेगी, तो शपथ ग्रहण करने के बाद या अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा होने पर भी यह माननीय पेंशन के कैसे हकदार हुए। पेंशनर्ज ने कहा कि जब इन्हें अपने वेतन भत्ते बढ़ाने होते हैं तो तब इन्हें देश व प्रदेश की आर्थिक स्थिति नजर नही आती। व सभी पार्टियों के नेतागण एक स्वर में भेजे थपथपा कर बिल पास कर देते हैं। पेंशनरों के लिए कई सालों से 5,10, व 15 प्रतिशत का भत्ता मूल वेतन में नही दे रहे हैं जबकि प्रत्येक पेंशनर ने अपनी जवानी के 35,40 साल देश के विकास के लिए अपना योगदान दिया है। इसी तरह पुलिस पेंशनरों की 4 साल से किसी भी मांग पर सरकार व पुलिस विभाग विचार नही कर रहा है और न लम्बे समय से पेंशनरों के मैडिकल बिलों का भुगतान हो रहा है। पेंशनरों ने कहा है कि सरकार को समझना चाहिए कि पेंशनर भी इसी देश की जनसंख्या का हिस्सा है जो सरकार बनाने में अहम रोल अदा करता है। उन्होंने सरकार से उपरोक्त मांगों को पूरा करने की दरख्वास्त की है ।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दाड़लाघाट ने ममलीग मे सम्पन्न हुई जिला स्तरीय अंडर-19 सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के अंतर्गत सुगम संगीत प्रतियोगिता में विद्यालय के होनहार छात्र पीयूष ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। तथा इसी प्रकार वाद्य वृंद संगीत में भी इस विद्यालय के बच्चों ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराते हुए दूसरा स्थान प्राप्त किया है। सुगम संगीत में विजेता रहे पीयूष का साथ हारमोनियम और तबले मैं रवीन्द्र और राहुल ने बखूबी दिया। जबकि वाद्य वृंद प्रतियोगिता में रवींद्र व साथियों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर पहाड़ी धुनों की मधुर तानों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इस प्रकार विद्यालय के छात्र पीयूष का राज्य स्तरीय प्रतियोगिता हेतु चयन हुआ है। विद्यालय की प्रधानाचार्य इंदु शर्मा ने बच्चों की उपलब्धि पर उन्हें और उनका मार्गदर्शन करने के लिए भोपाल सिंह डीपीई तथा अनिल शर्मा व कमलेश को बधाई दी है।उन्होंने बच्चों से राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में भी इसी प्रकार विजयी रहने की अपेक्षा की है।
हिमाचल प्रदेश विद्युत बोर्ड सोलन से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रथम सितंबर, 2019 को 132 केवी गिरी-सोलन सर्किट से संबद्ध विभिन्न विद्युत लाईनों का आवश्यक मुरमम्मत व रखरखाव कार्य किया जाना है। यह जानकारी विद्युत बोर्ड के वरिष्ठ अधिशाषी अभियंता केसी रघु ने आज यहां दी। उन्होंने कहा कि इसके लिए देहूंघाट, रबौण, हाउसिंग बोर्ड, नेगी कॉलोनी, वशिष्ठ कॉलोनी, राधास्वामी सत्संग व इसके आसपास के क्षेत्रों में प्रथम सितंबर, 2019 को प्रातः 9.00 बजे से सांय 6.00 बजे तक विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। उन्होंने इस दौरान लोगों से सहयोग की अपील की है।
प्रदेश सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग निदेशालय द्वारा विभिन्न कंप्यूटर प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए पात्र उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित करने की तिथि 5 सितंबर, 2019 तक बढ़ा दी है। यह जानकारी आज यहां जिला कल्याण अधिकारी सोलन बीएस ठाकुर ने दी। उन्होंने कहा कि यह आवेदन पोस्ट ग्रेजुऐट डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन्स (पीजीडीसीए) तथा डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन्स एवं डेस्क टॉप पब्लिशिंग (डीसीए-डीटीपी) के एक वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए आमंत्रित किए गए हैं। पीजीडीसीए पाठ्यक्रम के लिए योग्यता स्नातक तथा डीसीए-डीटीपी पाठ्यक्रम के लिए योग्यता दस जमा दो निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि इन पाठ्यक्रमों के लिए प्रदेश के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग से संबंधित एवं विधवा, एकल नारी व विशेष रूप से सक्षम उम्मीदवार पात्र हैं। उम्मीदवार की आयु 18 से 35 वर्ष के मध्य होनी चाहिए तथा उम्मीदवार बीपीएल परिवार से संबंधित होना चाहिए अथवा परिवार की वार्षिक आय दो लाख रुपये से कम होनी चाहिए। प्रशिक्षण के इच्छुक उम्मीदवार सादे कागज पर जिला कल्याण अधिकारी सोलन अथवा संबंधित तहसील कल्याण अधिकारी कार्यालय में 5 सितंबर, 2019 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के साथ दसवीं, 12वीं, स्नातक उतीर्ण प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, बीपीएल प्रमाण पत्र, तहसीलदार द्वारा जारी प्रार्थी के माता-पिता की वार्षिक आय प्रमाण पत्र तथा हिमाचली प्रमाण पत्र की सत्यापित प्रतियां संलग्न करनी होंगी।उन्होंने कहा कि उतीर्ण प्रशिक्षणार्थियों को 6 माह के लिए सरकारी अथवा गैर सरकारी सस्थानो में कंप्यूटर एप्लीकेशन में प्रवीणता प्राप्त करने के लिए रखा जाएगा। यह अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान विभाग द्वारा 1000 रुपये प्रति माह छात्रवृति भी प्रदान की जाएगी। विशेष रूप से सक्षम को 1200 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी। अधिक जानकारी के लिए जिला कल्याण अधिकारी सोलन के दूरभाष नंबर 01792-223742 अथवा संबंधित तहसील कल्याण अधिकारी के कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।
राजकीय छात्रा वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सोलन के ‘युवा संसद’ में भाग लेने पहुंचे विद्यार्थियों ने शिमला स्थित विधानसभा का अवलोकन किया। यह जानकारी विद्यालय के अंग्रेजी विषय के प्रवक्ता अनिल कुमार वर्मा ने दी। उन्होंने कहा कि विद्यालय की 10वीं, 11वीं तथा 12वीं कक्षा की छात्राओं ने प्रदेश विधानसभा की दर्शक दीर्घा में बैठकर विधानसभा की कार्यवाही देखी। उन्होंने कहा कि छात्राओं ने व्यवहारिक रूप से पूरी प्रक्रिया का अवलोकन किया और यह जाना कि किस प्रकार प्रदेश विधानसभा में राज्यहित के मामलों पर सारगर्भित चर्चा की जाती है। इस दौरान छात्राओं को प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल सहित वरिष्ठ मंत्रियों एवं विधायकों से मिलने का अवसर भी प्राप्त हुआ।मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस अवसर पर छात्राओं का विधानसभा परिसर में स्वागत किया और उनसे आग्रह किया कि अपने छात्र जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ें। उन्होंने लक्ष्य प्राप्त करने के लिए छात्राओं को एकाग्रता के साथ कठिन परिश्रम करने की सलाह दी। उन्होंने छात्राओं का आह्वान किया कि वे अपने क्षेत्र में स्वच्छता के दूत बनें और लोगों को स्वच्छ रहने के लिए जागरूक बनाएं। उन्होंने छात्राओं से आग्रह किया कि नशे जैसे अभिशाप को हराने के लिए एकजुट होकर कार्य करें। उन्होंने विद्यालय के अध्यापकों से आग्रह किया कि वे छात्राओं को केंद्र व प्रदेश सरकार की कल्याणकारी नीतियों की जानकारी दे ,ताकि छात्राएं अपने घर एवं आसपास के क्षेत्रों में लोगों को इनसे अवगत करवा सकें। प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने इस अवसर पर छात्राओं को हिमाचल प्रदेश विधानसभा के गौरवमयी इतिहास एवं परम्पराओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा को अपनी कार्यप्रणाली के लिए पूरे देश में जाना जाता है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा ई-विधान प्रणाली को लागू करने वाली पहली अत्याधुनिक कागज रहित विधानसभा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विधायकों के लिए ई-निर्वाचन क्षेत्र प्रबंधन भी आरंभ किया गया है। इस प्रणाली के लागू होने से विधायकों, अधिकारियों व जनता के मध्य बेहतर संवाद कायम करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि लड़कियां आज विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही है और केंद्र व प्रदेश सरकार के विभिन्न कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण की दिशा में कारगर सिद्ध हो रहे हैं।छात्राओं ने विधानसभा में अपने अनुभव के विषय में जानकारी दी विधानसभा के भीतर नेताओं की चर्चा उन्होंने पहली बार देखी। छात्राओं के इस समूह के साथ राजनीति शास्त्र की प्रवक्ता रेणुका मेहता, जीव विज्ञान की प्रवक्ता हितैषी शर्मा एवं प्रवक्ता सीताराम ठाकुर भी उपस्थित थे।
इन्नर व्हील क्लब सोलन मिड्टाउन की सदस्यों ने वीरवार को चम्बाघाट में स्थित झुग्गी झोपड़ियों के लोगों और बच्चों को कपड़े,जूते,रोज़ मर्रा की ज़रूरत का सामान और खाने की चीज़ें बाँटी। क्लब के प्रधान सविता भल्ला ने बताया कि संस्था ज़रूरतमंदों की मदद करती है। क्लब के इस साल के मुहिम मिशन ममता-ओरफ़न फ़्री इंडिया को मद्देनज़र रखते क्लब ने ऑटो रिक्शायों पर जागरूकता बैनर लगाए ताकी लोग अनाथ बच्चों की किसी भी प्राकार से मदद करें। इस कार्यक्रम में सविता भल्ला,शैली पहुजा,रेणु शर्मा,रैना गुप्ता,मोनिका बंसल,अंजू पब्याल,सुनीता अग्रवाल और अलका वर्मा शामिल रही।
कुनिहार लोक निर्माण विभाग सब डिवीजन के तहत कुनिहार नालागढ़ मार्ग पर बने कुणी व गम्बर पूल की भार क्षमता की जांच शुक्रवार को होनी थी।परन्तु कुणी पुल पर ही जांच मशीनरी में खराबी आ गई। उक्त मशीनरी से युक्त ट्राला पुल पर एक ओर झुक गया व टायर हवा में उठ गए जिसके चलते जांच नहीं हो सकी। विदित रहे कि इस मार्ग पर बने पुलों की कंडीशन काफी दयनीय है व कुछ वर्ष पूर्व विभाग ने अपने कर्मचारी को यंहा नियुक्त करके पुल पर से एक समय मे एक वाहन निकालने की हिदायत जारी की थी।हैदराबाद के इंजीनियर इन पुलों की जांच के लिए सुबह 10 बजे कुणी पुल पहुंचे ।आठ सदस्यीय दल अपने उपकरणों को पुल पर निरीक्षण के लिए अभी लगा ही रहे थे कि उपकरणों से लैस गाड़ी एक ओर झुक गई व गाड़ी के अगले टायर हवा में उठ गए।हालांकि 10 बजे से पुल की जांच कर रही इंजीनियरों ने काफी जद्दोजहद के बाद करीब 2 बजे मशीनरी को पुल से हटाया, पर जांच अधूरी रह गई। सब डिवीजन कुनिहार के सहायक अभियंता राज कुमार शर्मा ने बातचीत में बताया कि भार क्षमता जांचने वाली मशीनरी के सेंसर्स में जांच के दौरान खराबी आ गई व पुलों का निरीक्षण नही हो पाया।गाड़ी को फिलहाल सड़क के साथ खड़ा कर दिया है व चंडीगढ़ या दिल्ली से एक्सपर्ट टीम आ कर मशीनरी को ठीक करेगी व पुलों की जांच की जाएगी।
University’s team meets delegation from 17 African Nations The Dr YS Parmar University of Horticulture and Forestry (UHF), Nauni has set sights on achieving working international collaborations in the field of horticulture, forestry and allied disciplines to broaden the learning environment of students and faculty working in the university. The move is part of the university’s initiative to strengthen its global linkages and partnership in order to achieve its goal of competing with the leading institutions of repute in the field. As part of this initiative towards forging new partnerships, a three-member team of the university lead by Vice-Chancellor Dr Parvinder Kaushal attended the India Africa Higher Education and Skill Development Summit held at New Delhi earlier this week. The summit was organized by Confederation of Indian Industry (CII), and was attended by over 75 delegates from 17 African countries. Several university and institutes from India also took part in the event. Besides Dr Kaushal, the UHF team also included Dr Rajesh Bhalla and Dr Kulwant Rai, who held discussions with the delegates from several African countries and discussed the possibility of a formal tie-up for collaborative research, student and faculty exchange. Several countries including Ghana, Ethiopia, Nigeria, Kenya and Sudan showed keen interest in developing an alliance with the university for agri-horticulture, forestry and allied disciplines. “International linkages are key to the development of any institution and the university has decided to strengthen this area and forge new international partnership. The major areas for collaboration will be in the area of academic and research and students and faculty exchange,” said Dr Kaushal. He added that UHF received a very positive response in the summit with representatives from most countries showing keen interest to collaborate with the university. “The university will soon be getting in touch with the embassies of these countries in India for signing Memorandum of Understanding for collaborating in our many areas of expertise. The university will welcome any foreign partnership as it not only allows us to showcase our skills and expertise but also gives valuable exposure to our scientists and students. Further, to usher in a new era in international academic and research collaboration, the university will look to start certificate, diploma and degree level vocational courses and need-based region-specific international programmes to cater to the specific needs of any foreign partner” said Dr Kaushal. The university delegation also met the representatives from the National Skill Development Council and discussed the possibility of funding support for vocational courses. The NSDC members were of the view that funding support can be provided for trainer’s training with scope for introducing subjects of Horticulture and Forestry as skill development ventures
विकास खंड कुनिहार की ग्राम पंचायत दानोघाट के प्रधान,उपप्रधान व समस्त पंचायत सदस्यों ने उपायुक्त सोलन को त्यागपत्र देकर खलबली मचा दी है। ग्राम पंचायत प्रधान,उपप्रधान व सात पंचायत सदस्यों का आरोप है कि पंचायत सचिव दानोघाट तेजेन्द्र वर्मा की कार्य प्रणाली संतोष जनक नहीं है। तेजेन्द्र वर्मा पिछले एक वर्ष से पंचायत के विकास कार्य में बाधा पहुंचाते आ रहे है और हमें समय पर कार्य की अदायगी नहीं की जाती जिसके कारण हम कोई भी कार्य पूर्ण नहीं कर पा रहे है। पिछले छ माह से पंचायत बैठक कभी भी समय पर नहीं हुई है सचिव अपनी मर्जी से बैठक की तिथि से आगे पीछे करते है। दिनांक 27 अगस्त 2019 को भी पंचायत बैठक थी लेकिन सचिव ने कार्यवाही में सभी वार्ड सदस्य के हस्ताक्षर करवाए और 12 बजे से पहले बैठक छोड़ कर चले गए। जिसके कारण पंचायत के सभी प्रस्ताव नहीं लिखे गये इसके व्यवहार से दुखी होकर सभी पंचायत प्रतिनिधि उपायुक्त सोलन को अपना त्याग पत्र दे रहे है। पंचायत सचिव द्वारा ग्राम पंचायत दानोघाट में गांवों में विकास कार्य कराने मेें स्थानीय लोगों व पंचायत प्रतिनिधियों का सहयोग नहीं किया जा रहा है।उच्चाधिकारियों से कई बार शिकायत करने के बाद पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई न होेने का आरोप लगाया।पंचायत प्रतिनिधि सदस्यों ने त्यागपत्र की कापी डीपीओ सोलन व बीडीओ कुनिहार को भेज दी है। ग्राम पंचायत दानोघाट में प्रधान,उपप्रधान समेत 7 सदस्य है, जिसमें पूरी कार्यकारणी ने पंचायत सचिव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।उपायुक्त सोलन में त्यागपत्र के साथ पहुंचे समस्त पंचायत कार्यकरणी का कहना है कि पंचायत सचिव तेजेन्द्र वर्मा की कार्य प्रणाली संतोष जनक नहीं है ओर मनमर्जी व अपने रवैये से विवश होकर दानोघाट पंचायत के प्रधान,उपप्रधान व समस्त 7 सदस्यों ने अपने अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ रहा है।त्यागपत्र देने वालों में पंचायत प्रधान रामदेई,उपप्रधान राजेश कुमार,पंचायत सदस्य मस्तराम,निर्मला देवी,नर्वदा देवी,बिमला देवी,नर्वदा देवी,देवेंद्र कुमार,लता शामिल हैं। बॉक्स.... जब इस बारे विकास खंड अधिकारी कुनिहार विवेक पॉल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस तरह की कोई भी शिकायत मेरे पास नही आई है।इस बारे जिला पंचायत अधिकारी सोलन से बात करे। जब इस बारे जिला पंचायत अधिकारी सोलन सुभाष अत्रि से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हमारे पास इस तरह का एक दानोघाट पंचायत की ओर से शिकायत पत्र आया है,जिसे उपायुक्त सोलन को प्रेषित कर दिया है जैसे ही वहाँ से जो आदेश आता है वैसे ही कार्यवाही की जाएगी।
भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जिन्हें देखकर हमें ऐसा महसूस होता है कि बस अब यहीं रुक जाएं, इसके आगे कोई सुकून ही नहीं है। यहां आकर आपके मन को शांति मिलती है और हर तनाव को भूल जाते हैं। बस हमारा मन कहता है कि यह ऐसी जगह है जहां आपको सबसे ज्यादा सुकून मिलेगी। कई चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें देखकर हमारी पूरी थकान उतर जाती है। ऐसा ही एक मंदिर है जिसके बारे में हम आपको बताने जा रहे है। जी हां उत्तर भारत में एक ऐसा मंदिर है जो 15 चट्टानों को काटकर बना हुआ है। जिसे देखकर आप इस बात पर विश्वास नहीं कर पाएंगे कि क्या वास्तव में ऐसा हो सकता है। आखिर इतनी अच्छी नक्काशी भी कहीं हो सकती है। हम बात कर रहे है हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के मसरूर गांव में स्थित रॉक कट टेम्पल हैं। इसके नाम से ही पता चल रहा है कि यह चट्टानों को काटकर बनाया गया है। आठवीं शताब्दी में बना ये मंदिर महाभारत के पांडवों का रहस्यमयी इतिहास भी अपने अंदर संजोये हुए है। हिमालयन पिरामिड के नाम से मशहूर ये रॉक कट टेम्पल अपने आप में एक अनोखा इतिहास समेटे हुए है। मसरूर का यह मंदिर कुरुद्वारा के नाम से पूजनीय है। वास्तव में यह भगवान् श्री राम को समर्पित है और वैष्णव धर्म का द्योतक है। मुख्य मंदिर के भीतर भगवान राम , लक्ष्मण और सीता की प्रतिमाएं स्थापित है जो पत्थर को नक्काश कर बनाई गई है। मूलतः ऐसा प्रतीत होता है कि यह भगवान् शिव को समर्पित था लेकिन समय के उतार चढ़ाव के साथ साथ बाद में यहाँ वैष्णव धर्म का प्रादुर्भाव होने से इसे विष्णु भगवान को समर्पित कर दिया गया। आपको यह बात जानकर हैरानी होगी कि ऐसी नक्काशी पत्थरों में करना बहुत ही मुश्किल काम होता है। इसे करने के लिए दूर से करीगर लाए गए थे लेकिन वास्तव वे कारीगरी किसने की इस बारे में आजतक कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है। इस मंदिर के सामने ही मसरूर झील है जो मंदिर की खूबसूरती में चार चांद लगाती है। सदियों से चली आ रही दन्त कथाओं के मुताबिक मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान किया था और मंदिर के सामने खूबसूरत झील को पांडवों ने अपनी पत्नी द्रौपदी के लिए बनवाया गया था। काँगड़ा घाटी के हरिपुर कसबे से लगभग 3 किलोमीटर की दुरी पर और समुद्रतल से 2500 फुट कि ऊँचाई पर एक रेतीली पहाड़ी पर स्थित है। गग्गल हवाई पट्टी स यहाँ तक की दुरी 20 किलोमीटर है। इसकी लम्बाई 106 फुट के करीब और चोडाई 105 फुट है। इस तरह का विशाल पत्थर को कार कर बनाया मंदिर भारत में शायद ही कहीं हो। वास्तुकला की अद्भुत अविस्मरनीय पत्थर का यह स्तंभ सपाट और शिखर शैली में बनाया गया है । पुरातात्विक विभाग के संरक्षण में यह प्राचीन कला और इतिहास का मूक साक्षी है । इसके बाहर भीतर जिस तरह की मूर्तियाँ पत्थर पर तराशी गई है वह महाबलीपुरम में छठी और इलोरा के मंदिरों में दसवीं सदी की याद दिला देती है। बहुत कुछ इन प्राचीन मंदिरों की कला से मिलता जुलता है ।इस मंदिर के मूल मंदिर के साथ कुल 15 के करीब छोटे बड़े शिखराकार मंदिर है । इनमें से कुछ मंदिरों के भाग टूट चुके है। काँगड़ा में 1905 को आये भूकंप के कारण भी इन मंदिरों को काफी क्षति पहुंची थी। मंदिर के सन्दर्भ में कोई प्रमाणिक ऐसा दस्तावेज उपलब्ध नही है जिस से इसके निर्माण काल का सही अनुमान लगाया जा सके । यह बताया जाता है कि इसका निर्माण पांडवों द्वारा ही किया गया है। आश्चर्य है कि यहाँ प्राचीन काल में कोई यात्री भी नहीं पहुंचा जिसने इस मंदिर का उलेख किया हो । कहा जाता है कि केवल सन 1913 में पुरातात्विक विभाग ने इसकी वास्तुकला का गहरायी से निरिक्षण किया।
लाखों लोगों की आस्था के केंद्र सुबाथू में बने श्री गुग्गा माड़ी मंदिर की कहानी चौकाने वाली है।करीब पौने दो सौ साल पहले वाल्मीकि परिवार से संबंध रखने वाले सुबाथू के दो व्यक्तियों को स्वपन में एक अद्भुत शक्ति ने गुग्गा माड़ी की स्थापना करने को कहा। इसके बाद इन लोगों ने मंदिर बनाने की योजना बनाई लेकिन यह बनेगा कहां, इसे लेकर जगह तय करना आसान नहीं था। सुबाथू में श्रीगुग्गामाड़ी मंदिर की स्थापना के विषय में मंदिर के वयोवृद्ध पुजारी पंडित टीका राम बताते हैं कि लगभग 170 वर्ष पूर्व बाल्मिकी परिवार से संबंध रखने वाले छित्तर व गुज्जर नामक व्यक्तियों को सपने में एक अद्भुत शक्ति ने माड़ी की स्थापना करने को कहा। गुग्गा जी के परम भक्त डींगा की इसमें अहम भूमिका रही और उन्होंने एक काले बकरे के गले में लाल डोर बांध कर खुला छोड़ दिया। पूरे सुबाथू का भ्रमण करने के बाद जहां बकरे ने घुटने टेके, वहीं माड़ी का स्थान निश्चित कर लिया गया। छित्तर व गुज्जर ने राजस्थान के हनुमानगढ़ में बनी श्री गुग्गामाड़ी से मिट्टी व ईंटें ला कर इस माड़ी की आधारशिला रखी। धीरे-धीरे इस पवित्र स्थान में लोगों की आस्था व श्रद्धा बढ़ती गई और वर्तमान में यहां श्री गुग्गा जी का भव्य मंदिर स्थापित है। गुग्गा जी के आशीर्वाद से सुबाथू में सर्पदंश से आज तक किसी की मृत्यु नहीं हुई गुग्गाजी के संबंध में अनेक दंत कथाएं प्रचलित हैं, लेकिन गुग्गा जी के गीतों से पता चलता है कि उनका जन्म बीकानेर के ददरेड़ा नामक स्थान पर जेवर सिंह चौहान के घर हुआ था। उनकी माता बाच्छल सिरसा के राजा कंवरपाल की पुत्री थी। बाच्छल की बड़ी बहन काच्छल भी इसी परिवार में ब्याही गई थी। दोनों बहनें संतानहीन थीं और उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए अनेक देवी-देवताओं की स्तुति की, लेकिन उनकी गोद नहीं भरी। उन्हीं दिनों संत गुरु गोरखनाथ मारू देश पधारे हुए थे। उन्होंने बाच्छल को सोमवृक्ष की जड़ें देते हुए उसके चूर्ण का सेवन करने को कहा, जिससे बाच्छल को गुग्गा के रूप में पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। शिला पर बचे चूर्ण को बाच्छल की तीन अन्य सखियों ने भी खा लिया और उन्हें भी एक-एक पुत्र प्राप्त हुआ, जिनके नाम नरसिंह पांडे, भजनू व रतनू रखे गए। कुछ चूर्ण बाच्छल की घोड़ी ने भी चाट लिया और उसने भी एक नीले रंग के घोड़े को जन्म दिया। गुग्गा के मंदिरों में इन सभी की पूजा की जाती है और इनके समूह को पंचवीर कहा जाता है। कई स्थानों पर गुग्गा जी को सर्प देवता के रूप में भी पूजा जाता है। गुग्गा के भक्त 'गारड़ू तांत्रिक विधि से सर्पदंश का निवारण भी करते हैं। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि गुग्गा जी के आशीर्वाद के कारण ही सुबाथू या आसपास के क्षेत्र में सर्पदंश से आज तक किसी व्यक्ति की मृत्यु नहीं हुई है। किसान अर्पण करते है नई फसल जिस प्रकार गेहूं की फसल आने पर पंजाब में बैसाखी का पर्व मनाया जाता है, उसी प्रकार क्षेत्र के किसान मक्की की नई फसल को सर्वप्रथम गुग्गा जी के मंदिर में चढ़ा कर धनधान्य की कामना करते हैं। धर्मनिरपेक्षता इस मेले का आदर्श है। हिंदू-मुस्लिम एकता की प्रतीक गुग्गा की छड़ी में नीचे की ओर नारियल और शीर्ष पर विराजमान ताजिया इसका उदाहरण है। लोक मान्यता है कि श्री गुग्गा जाहरवीर नवमी की रात को माड़ी में प्रकट हो कर लोगों के दुखों का निवारण करते हैं। टमक पूजन के साथ आरम्भ होता है मेला सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक सुबाथू का ऐतिहासिक श्री गुग्गामाड़ी मेला प्रतिवर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिन बाद सेना के लोअर कैंप स्थित मैदान में लगता आ रहा है। इन चार दिनों के दौरान गुग्गा जाहरवीर के मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु मन्नतें मांगने और मन्नतें पूरी होने के बाद शीश नवाने आते हैं। मेले में रात्रि के समय 'गुग्गा के गीत, नाटक व अन्य रंगारंग कार्यक्रमों के अलावा अंतिम दो दिन दंगल लोगों के विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। गुग्गा माड़ी मेले का टमक पूजन के साथ शुभारम्भ होता है। सैकड़ों वर्षों से चली रही परंपरा अनुसार ढोल नगाड़े बजाकर भक्तजन देवी-देवताओं को मेले में आने का आमंत्रण देते हैं। इस वर्ष मेला 5 से 8 सितम्बर तक इस वर्ष श्री गुग्गा माड़ी मेले का आयोजन 5 से 8 सितम्बर तक किया जा रहा है। मेले का शुभारम्भ डीसी सोलन केसी चमन करेंगे। दूसरे दिन एडीएम विवेक चंदेल मुख्य अतिथि होंगे। 7 तारीख को सामजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री डॉ राजीव सैजल बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे। जबकि मेले के आखरी दिन ब्रिगेडियर एचएस संधू, कमांडेंट 14 जीटीसी सुबाथू मुख्य अतिथि होंगे ।
ग्राम पंचायत मांगल के गांव हवानी में एक दिवसीय स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर की अध्यक्षता बीडीसी सदस्य सुरेश ठाकुर तथा वार्ड सदस्य हवानी जयराम ठाकुर ने की। बीडीसी सदस्य सुरेश कुमार ने कहा कि लोगों को स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी मिल सके इसके लिए चिकित्सकों द्वारा लोगों को कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की जाती है।उन्होंने कहा कि ऐसे स्वास्थ्य शिविर मांगल पंचायत के हर गांव में लगवाये जा रहे है। उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ अल्ट्राटेक कंपनी के सहयोग से भी हर गांव को छोटी-छोटी स्कीमों से जोड़ा जा रहा है,जैसे गांव में सिलाई कढ़ाई,महिला मंडल को सहयोग करवाना तथा गांव में सीएसआर के अंदर काम करवाना इत्यादि है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अल्ट्राटेक कंपनी के सहयोग से गांव पडयार में श्मशान घाट,भलग गांव में रेन शेल्टर बाथरूम,गांव बागा में रेन शेल्टर बाथरूम तथा शालूघाट में भी रेन शेल्टर का काम किया जा रहा है। इसके अलावा मांगल पंचायत में सड़क की रिपेयर का काम करवाना तथा हर स्कूल में बच्चों के लिए अलमारी,दरिया,वॉलीबॉल,डेस्क आदि दिलवाना भी उनकी प्राथमिकता में है। बीडीसी सदस्य सुरेश ठाकुर ने कहा मांगल पंचायत के अंदर लगभग 40 लाख से ऊपर बीडीसी के माध्यम से अल्ट्राटेक कंपनी से काम लिया जा रहा है।सुरेश ठाकुर ने कहा कि अभी कंपनी में और भी कई मुद्दों पर बात हो रही है इसके साथ-साथ मांगल व बैरल पंचायत में बेरोजगारी की समस्या बहुत ज्यादा है तथा रोजगार को लेकर आज भी मांगल की तरफ से बीडीसी के द्वारा लगभग 1 साल पहले रोजगार का मुद्दा हाईकोर्ट शिमला में डाला गया है।
डीएवी अम्बुजा विद्या निकेतन दाड़लाघाट के दसवीं कक्षा के छात्र सौमिल शर्मा ने एक बार फिर स्कूल तथा अभिभावकों का नाम रोशन किया है। सौमिल शर्मा ने आईएसआरओ द्वारा 10 से 25 अगस्त तक ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में प्रदेश भर में टॉप 2 में अपना स्थान बनाया। इस प्रतियोगिता के माध्यम से हर राज्य से टॉप 2 बच्चे आईएसआरओ के बंगलुरू स्थित केन्द्र से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चंद्रयान 2 की सफल लैंडिंग का लाइव टेलीकास्ट 7 सितम्बर को देखेंगे। सौमिल शर्मा की इस उपलब्धि पर स्कूल तथा अभिभावकों में खासा उत्साह है। स्कूल प्रबंधन समिति के चैयरमेन अनुपम अग्रवाल तथा स्कूल प्रधानाचार्य मुकेश ठाकुर ने सौमिल शर्मा को इस विशिष्ट उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दी। प्रधानाचार्य ने कहा कि यह हम सब के लिए गर्व की बात है कि सौमिल शर्मा प्रधानमंत्री के साथ बंगलुरू स्थित आईएसआरओ के केन्द्र से चंद्रयान 2 का नजारा देखेंगे।
कुनिहार-नालागढ़ सड़क मार्ग शुक्रवार को यातायात के लिए दो घण्टे के लिए बन्द रहेगा। जानकारी देते हुए लोक निर्माण विभाग अर्की के अधिशाषी अभियंता रवि कपूर ने बताया कि कुनिहार- नालागढ़ सड़क के मध्य पड़ने वाले कुणी पुल को प्रातः10 बजे से 12 बजे तक व कुनिहार- नालागढ़ सड़क पर बने गम्वर पुल पर 2 बजे से 4 बजे तक यातायात रोका जाएगा। उन्होंने बताया कि दोनों पुलों का निर्माण काफी वर्षो पहले किया गया था तथा कोई अप्रिय घटना न हो इसलिये दोनों पुलों की जांच पड़ताल की जा रही है।सभी से सहयोग की अपील की है।
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आज एसीसी बरमाणा व डीएवी स्कूल में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बतौर विशेष अतिथि अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल खिलाड़ी निधि शर्मा, मेनिका पाल, दीपा ठाकुर, दीक्षा ठाकुर, शालिनी ठाकुर व शैलजा शर्मा ने शिरकत की। यह जानकारी मोरसिंघी हैंडबाल नर्सरी की संचालिका व कोच स्नेहलता इस दी। अंतरराष्ट्रीय हैंडबाल खिलाड़ियों का डी ए वी बरमाणा पहुंचने पर स्कूल स्टाफ व बच्चों ने शानदार स्वागत किया। स्कूल में पढ़ाई व खेल के क्षेत्र में अव्वल आये बच्चों को विशेष अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। अपने सम्बोधन में निधि शर्मा, शैलजा शर्मा, मेनिका पाल व दीपा ठाकुर ने कहा कि हमारी जिंदगी में पढ़ाई के साथ साथ खेल भी बहुत जरूरी है। जीतना पढ़ाई की अहमियत है उतनी ही खेल की भी। खेल से हमारा शरीर तन्दरूस्त रहता है। इसलिये सभी को पढ़ाई के साथ साथ कोई ना कोई खेल जरूर खेलना चाहिए। इस अवसर स्कुल प्रधनाचार्य सुनील गांगटा ने सभी अंतरराष्ट्रीय हैंडबाल खिलाड़ियों को सम्मानित किया।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का 10 दिवसीय प्रचार-प्रसार अभियान संपन्न प्रदेश सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने के लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित किया गया 10 दिवसीय प्रचार-प्रसार कार्यक्रम आज संपन्न हो गया। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के राज्य नाट्य दल के कलाकारों ने आज कंडाघाट विकास खंड की ग्राम पंचायत सायरी तथा ग्राम पंचायत सेरीघाट में गीत-संगीत तथा नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया। कलाकारों ने जहां उपस्थित जनसमूह को कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की वहीं लोगों का भरपूर मनोरंजन भी किया। नाट्य दल के कलाकारों सुनील कुमार, रमेश चंद्र, नीतिन तोमर, राजेश कुमार, रेखा, निशा बाला, गीता ने नुक्कड़ नाटक ‘बेरोजगार-शाउणु’ के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की जानकारी प्रदान की। योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण के लिए दर्जी, हाथ कढ़ाई, छोटे पोल्ट्री किसान, ई-रिक्शा चालक और तकनीशियन, बढ़ई, सिलाई ऑप्ररेटर आदि व्यवसाय शामिल किए गए हैं। कलाकारों ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना के अंतर्गत युवाओं के कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत 18 से 45 वर्ष आयुवर्ग के युवाओं को 50 लाख रुपये तक की कुल परियोजना लागत वाले उद्यम स्थापित करने के लिए 25 प्रतिशत उपदान दिया जा रहा है। महिलाओं को 30 प्रतिशत तक के उपदान का प्रावधान है। योजना के तहत 62 कार्यों को शामिल किया गया है जिसमें हेल्थ फिटनेस संेटर खोलने से लेकर होटल और रेस्तरां चलाने जैसे कार्य शामिल किए गए हैं। योजना के अंतर्गत अब तक राज्य में 200 युवाओं को लगभग 31 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। इस वर्ष 2 हजार युवाओं को 400 करोड़ रुपये के ऋण वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। समूह गान ‘प्रगति की बंध गई नई डोर, हिमाचल प्रगति की ओर’ के माध्यम से कलाकारों ने उपस्थित जनसमूह को सामाजिक सुरक्षा पैंशन, हिमकेयर, जल संरक्षण, मुख्यमंत्री युवा स्वावलंबन योजना तथा मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना की जानकारी प्रदान की गई। लोगों को बताया गया कि प्रदेश की जयराम ठाकुर सरकार ने सत्ता में आते ही जहां सामाजिक सुरक्षा पैंशन को बढ़ाकर 750 रूपये प्रति माह किया था वहीं इस वर्ष इसे बढ़ाकर 850 रूपये प्रतिमाह कर दिया गया है। लोगों को जानकारी दी गई कि अब प्रदेश के 70 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के वरिष्ठ नागरिक सामाजिक सुरक्षा पैंशन पाने के हकदार हैं। इस वर्ष से वरिष्ठ नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा पैंशन के रूप में प्रतिमाह 1500 रुपए प्रदान किए जा रहे हैं। इस अवसर पर ग्राम पंचायत सायरी की प्रधान अंजू राठौर, वार्ड सदस्य कमला देवी, किरण बला, अनीता देवी, प्रशिक्षक सुनील मेहता, स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान रामभजन, वार्ड सदस्य रीता देवी, विजय कुमार, उमा देवी सहित काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
औद्योगिक शहर परवाणु के सैक्टर-1 में चल रहें संस्कार फाऊंडेशन ट्रस्ट के तहत नशा मुक्ति केंद्र के पंजीकरण संदेह के घेरे में आ रहा है। यहां पर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह नशा मुक्ति केंद्र कही पर पंजीकृत था या फिर बिना पंजीकरण के ही चल रहा था। इस नशा मुक्ति केंद्र पर परवाणु की एक महिला ने कथित तौर पर उसके पति के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है, जिसके बाद उसके पति की इलाज के दौरान चंडीगढ़ अस्पताल में मौत हुई। परवाणु पुलिस को अभी तक इस नशा मुक्ति केंद्र के पंजीकरण से संबंधित कोई भी दस्तावेज नहीं मिले है। हालांकि संस्कार फाऊंडेशन ट्रस्ट तहसील कसौली में पंजीकृत है, जिसकी जानकारी परवाणु पुलिस ने अपनी प्रारंभिक जांच में जुटा ली है। यहां पर सबसे बड़ी बात यह भी है कि नशा छुडवाने आए जसविंद्र की मौत को करीब 4 दिन का समय बीत चुका है, लेकिन परवाणु पुलिस की अभी तक नशा मुक्ति केंद्र के एम.डी. के साथ कोई भी बातचीत नहीं हुई है और न ही केंद्र के किसी प्रकार के दस्तावेजो को पुलिस को सौंपा गया है। फिलहाल परवाणु पुलिस की माने तो मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद कारवाई को आगे बढ़ाई जाऐगी। बता दे कि परवाणु में बीते 26 अगस्त को नशा मुक्ति केंद्र में नशा छुडवाने के लिए दाखिल हुए जसविंद्र सिंह की मौत का मामला सामने आया था। इस मामले में अभी मृतक की पत्नी ने पुलिस थाना परवाणु में मामला दर्ज करवाया है, जिसके बाद परवाणु पुलिस ने इस आधार पर शव का पोस्टमार्ट करवाया है, जिसकी रिपोर्ट अभी तक नही आई। मृतक के शरीर में मिले है नीले रंग के निशान : पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार मृतक के शरीर में नीले रंग के निशान मिले है और यह निशान पहले के थे या फिर नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल होने के बाद के है इसका खुलासा होना बाकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चल सकेगा कि यह निशान कितने दिन पुराने है। इस मामले में अभी पोस्टमार्ट की रिपोर्ट नही आई है। यह ट्रस्ट तहसील कसौली में तो पंजीकृत है, लेकिन इस नशा मुक्ति केंद्र का पता नहीं है कि कही पर पंंजीकृत है। इसके बारे में अभी तक कोई दस्तावेज नहीं मिले है। इसके अलावा इस नशा मुक्ति केंद्र के एम.डी. से भी कोई बात नही हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सब कुछ पता चल सकेगा। -रुपेश कांत, एस.एच.ओ., पुलिस थाना परवाणु।
विधानसभा सत्र में विधानसभा सदस्य बलवीर सिंह चैधरी द्वारा पंचायतों में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सदन में संकल्प लाया गया।विधायक विधानसभा क्षेत्र बिलासपुर सुभाष ठाकुर ने इसके समर्थन में कहा कि सभी सदस्यों को इसकी चिंता है और उम्मीद है कि इस संबंध में कड़े कदम उठाये जायँगे। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार कई वर्षों से पंचायतों में हो रहा है सभी सदस्य यह चाहते हैं कि इस भ्रष्टाचार को खत्म किया जाए। आज पंचायती राज सिस्टम में पंचायतों के विकास के लिए बहुत पैसा आया है यह विकास कार्य हर पंचायत में होने चाहिए। केंद्र सरकार की तरफ से 14वें वित्त आयोग के तहत 10-20-30 लाख रूपय प्रत्येक पंचायत को विकास कार्यो के लिए आता है और कई अन्य केंद्र प्रायोजित योजनाएं हैं जैसे मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना व प्रधानमंत्री आवास योजना ऐसी अनेकों योजनाएं हैं। उसी तरह हमारे राज्य में सांसद निधि, राज्य सभा सांसद निधि, विधायक निधि और अनेकों ऐसी नीतियां हैं, सभी को चिन्ता है कि इस सिस्टम को मजबूत किया जाए। हर पंचायत में हो तकनिकी सहायक उन्होंने सुझाव दिया कि हर एक पंचायत में एक-एक तकनीकी सहायक होना चाहिए। कनिष्ठ अभियंता को 25-25 पंचायतें दी गई है जिस कारण वे 1 माह में सभी पंचायतों तक नहीं पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर एक के पास 10 पंचायतें दे दी जाए तो वे यह कार्य ठीक से कर पाएंगे। इसी तरह पंचायत सचिव और बीडीओ की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
पुलिस अधीक्षक सोलन मधुसूदन शर्मा ने कहा कि आज के इस तनावपूर्ण जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को योग एवं व्यायाम नियमित रूप से करना चाहिए। ताकि वे स्वस्थ रहें और राष्ट्र निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभा सकें। मधुसूदन शर्मा आज यहां पुलिस ग्राउंड सोलन में जिला आयुर्वेद विभाग सोलन द्वारा ‘योग एवं जीवन शैली’ विषय पर आयोजित जागरूकता शिविर के शुभारंभ के अवसर पर उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। यह तीन दिवसीय योग शिविर विशेष रूप से पुलिस कर्मियों व उनके परिजनों के लिए आयोजित किया जा रहा है। मधुसूदन शर्मा ने कहा कि योग जहां हमें मानसिक रूप से सुदृढ़ करने में सहायता करता है। वहीं इससे व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ एवं पुष्ट भी बनता है। उन्होंने कहा कि योग समय की आवश्यकता है। तथा युवा पीढ़ी को अपनी दिनचर्या में इसे नियमित रूप से अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्व को योग भारत की देन है। और प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह न केवल स्वयं योग करे अपितु अपने परिजनों को भी योग करने के लिए प्रेरित करें। कार्यक्रम में जिला आयुर्वेद अधिकारी सोलन डॉ. राजेंद्र शर्मा ने प्रतिभागियों को योग की आधुनिक जीवन में उपयोगिता विषय पर सारगर्भित जानकारी प्रदान की। डॉ. राजेंद्र शर्मा ने कहा कि सोलन जिला के सभी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, विद्यालयों के साथ-साथ पंचायत स्तर पर इस प्रकार के योग शिविरों का आयोजन समय-समय पर किया जाएगा ताकि एक स्वस्थ व नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए नागरिकों को तैयार किया जा सके। उन्होंने विशेष रूप से पुलिस कर्मियों एवं उनके परिजनों से आग्रह किया कि वे अपनी कार्यशैली को देखते हुए नियमित रूप से योग करें। उन्होंने कहा कि योगाभ्यास अनेक बीमारियों का समूल नाश करता है। आयुर्वेदिक विभाग की वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक एवं योगगुरू डॉ. अनीता गौतम, डॉ. मंजेश शर्मा, प्रशिक्षित योग शिक्षिका आशा रानी द्वारा प्रतिभागियों को योग की विभिन्न मुद्राओं, आसनों एवं आवाहर-विहार की जानकारी प्रदान की गई। इस अवसर पुलिस उपाधीक्षक परवाणू योगेश रोल्टा, पुलिस उपाधीक्षक सोलन (एलआर) रमेश शर्मा, अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित थे। ताकि वे स्वस्थ रहें और राष्ट्र निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभा सकें। .
पंचायती राज संस्थाओं की मतदाता सूचियों के लिए कार्यक्रम निर्धारित हिमाचल प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार सोलन जिला में भी पंचायती राज संस्थाओं की मतदाता सूचियों के प्रारूप को अद्यतन एवं अंतिम प्रकाशन के लिए कार्यक्रम निर्धारित कर दिया गया है। यह जानकारी आज यहां जिला निर्वाचन अधिकारी(पंचायत) एवं उपायुक्त सोलन केसी चमन ने दी। जिला निर्वाचन अधिकारी ने हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994 के नियम 17 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मतदाता सूचियों को अद्यतन करने के लिए संशोधन प्राधिकरण के रूप में अधिकारी नियुक्त कर दिए हैं। खंड विकास अधिकारी धर्मपुर को धर्मपुर विकास खंड की ग्राम पंचायतों की मतदाता सूचियों के लिए, खंड विकास अधिकारी कंडाघाट को कंडाघाट विकास खंड की ग्राम पंचायतों की मतदाता सूचियों के लिए, खंड विकास अधिकारी कुनिहार को कुनिहार विकास खंड की ग्राम पंचायतों की मतदाता सूचियों के लिए, खंड विकास अधिकारी नालागढ़ को नालागढ़ विकास खंड की ग्राम पंचायतों की मतदाता सूचियों के लिए तथा खंड विकास अधिकारी सोलन को सोलन विकास खंड की ग्राम पंचायतों की मतदाता सूचियों के लिए संशोधन प्राधिकरण नियुक्त किया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, मतदाता सूचियों के प्रारूप को 30 अगस्त, 2019 को प्रकाशित किया जाएगा। संशोधन प्राधिकरण के समक्ष दावे एवं आपत्तियां दर्ज करने की तिथि 31 अगस्त, 2019 से 9 सितम्बर 2019 तक निर्धारित की गई है। संशोधन प्राधिकरण द्वारा दावे एवं आपत्तियों पर निर्णय इन्हें प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि के 3 दिन के भीतर किया जाएगा। सक्षम प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर करने के लिए 7 दिन का समय दिया जाएगा। मतदाता सूचियों का अंतिम रूप से प्रकाशन 25 सितंबर, 2019 को अथवा इससे पूर्व किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आज राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर नई दिल्ली से ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ के शुभारंभ के अवसर पर जिला में कार्यक्रम का लाईव प्रसारण किया गया। जिला स्तर का कार्यक्रम ठोडो मैदान में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के जिला आपातकालीन संचालन केन्द्र में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सहायक आयुक्त सोलन भानु गुप्ता ने की। इस अवसर पर जिला के सभी खंड विकास अधिकारी कार्यालयों, विभिन्न विद्यालयों एवं ग्राम पंचायतों में कार्यक्रम का लाईव प्रसारण किया गया और युवाओं एवं अन्य को ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ की जानकारी दी गई।भानु गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जिस उद्देश्य के साथ ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ का शुभारंभ किया गया है उसे हम सभी को पूरा करना होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा है कि ‘फिटनेस शून्य प्रतिशत का ऐसा निवेश है जिसके लाभ अनंत हैं।’ उन्होंने कहा कि हम सभी को प्रधानमंत्री के शब्दों को अक्षरशः जीवन में उतारना होगा। मानसिक एवं शारीरिक रूप से फिट रहना जहां व्यक्तिगत रूप से आवश्यक है वहीं प्रदेश एवं देश के विकास में योगदान के लिए यह अपरिहार्य भी है। उन्होंने कहा कि आज से हम सभी को अपनी दिनचर्या में फिटनेस के लिए समय को शामिल करना होगा। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि फिटनेस के लिए समय निकालें और नियमित व्यायाम करें।
हिमाचल प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी देवेश कुमार ने कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भारत के निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदाता सूचियों को अद्यतन करने के दृष्टिगत प्रथम सितंबर से 30 सितंबर, 2019 तक ‘मतदाता सत्यापन कार्यक्रम’ (ईवीपी) कार्यान्वित किया जाए। देवेश कुमार ने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2020 तक मतदाता सूची एवं पंजीकरण में सुधार लाना तथा सभी पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ना है। वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के उपरांत जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त सोलन केसी चमन ने निर्वाचन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रथम सितंबर, 2019 को अवकाश वाले दिन जिला के समस्त बूथ स्तर के अधिकारी, पर्यवेक्षक तथा निर्वाचन से संबंधित कर्मचारी अपने-अपने बूथ पर उपस्थित रहेंगे ताकि मतदाता सूचियों को मतदाताओं की उपस्थिति में अद्यतन किया जा सके। उन्होंने कहा कि मतदाताओं की सहायता के लिए जिला एवं उपमंडल स्तर पर सामान्य सेवा केन्द्र स्थापित कर दिए गए हैं। यहां से मतदाताओं को इस संबंध में पूरी जानकारी उपलब्ध होगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण कार्यालयों से समन्वय स्थापित करें ताकि जिला में मृतकों के संबंध में ईआरओ नेट पर सूची अद्यतन की जा सके। केसी चमन ने कहा कि मतदाता सत्यापन कार्यक्रम के विषय में लोगों को जागरूक करने के लिए जिला स्तर, उपमंडल स्तर एवं खंड स्तर पर होर्डिंग स्थापित किए जाएंगे। ये होर्डिंग उपायुक्त कार्यालय सोलन, जिला के सभी उपमंडलाधिकारी कार्यालयों एवं खंड विकास कार्यालयों में स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की सफलता के लिए यह आवश्यक है कि उचित स्तर पर इसका अनुश्रवण किया जाए और नियमित आधार पर फीडबैक प्राप्त की जाए। जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि जिला सोलन के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में बूथ स्तर के अधिकारियों का व्हट्सऐप ग्रुप बना दिया गया है जिसमें समय-समय पर चुनाव प्रक्रिया के बारे में आवश्यक जानकारी प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि पर्यवेक्षकों को मतदाता सत्यापन कार्यक्रम से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है तथा बूथ स्तर के अधिकारियांे को ईवीपी प्रशिक्षण 30 अगस्त को दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत कोई भी नागरिक भारतीय पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार, राशन कार्ड, सरकारी, अर्ध सरकारी कर्मचारियों का पहचान पत्र, बैंक पासबुक, किसान पहचान पत्र की प्रति संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (उपमंडलाधिकारी) कार्यालय में जमा करवा कर मतदाता सूची में विद्यमान अपनी तथा अपने परिवार की जानकारी सत्यापित कर सकता है। उन्होंने कहा कि प्रथम सितंबर से 30 सितंबर, 2019 तक मतदाता हेल्पलाइन मोबाइल ऐप, एनवीएसपी पोर्टल, लोकमित्र केंद्र पर जाकर अपने विवरण को सत्यापित कर सकता है। मतदाता, उपमंडलाधिकारी कार्यालय में स्थापित मतदाता सुविधा केंद्र जाकर मतदाता सूची में कोई त्रुटि को सत्यापित कर सकता है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग मतदाता इस सम्बन्ध में मतदाता हैल्पलाईन नंबर 1950 पर संपर्क कर सकते हैं। केसी चमन ने जिला के सभी मतदाताओं से आग्रह किया है कि वे प्रथम सितंबर, 2019 को अपने-अपने मतदान केन्द्र पर जाकर अपनी वोट के विषय में जानकारी प्राप्त कर लंे। त्रुटि अथवा संशोधन इत्यादि के संबंध में मतदान केन्द्र पर ही क्रिया पूरी की जा सकती है। इस अवसर पर तहसीलदार निर्वाचन राजेंद्र शर्मा, नायब तहसीलदार निर्वाचन महंेद्र ठाकुर सहित निर्वाचन विभाग के कर्मचारी उपस्थित थे।
ये नेता जब सीएम बना तो टिम्बर घोटाला हुआ, राज्यपाल बना तो लोकतंत्र की हत्या कर दी हिमाचल का ये नेता जब मुख्यमंत्री बना तो उसे देवदार के पेड़ खाने वाला सीएम कहा गया। यहीं नेता जब राज्यपाल बना तो उसे लोकतंत्र खाने वाला राज्यपाल कहा गया। हम बात कर रहे है ठाकुर रामलाल की। वही ठाकुर रामलाल जो 1957 से 1998 तक 9 बार जुब्बल कोटखाई से विधायक चुने गए। वहीँ ठाकुर रामलाल जिन्होंने 18 साल सीएम रहे डॉ यशवंत सिंह परमार की राजनैतिक विदाई का ताना बाना बुना और वहीँ ठाकुर रामलाल जिन्हें हिमाचल का तिकड़मबाज सीएम कहा गया। संजय गाँधी की पसंद से बने पहली बार सीएम 28 जनवरी 1977 को हिमाचल निर्माता और पहले मुख्यमंत्री डॉ यशवंत सिंह परमार इस्तीफा दे देते है। इसे डॉ परमार की समझ कहे या ठाकुर रामलाल की पोलिटिकल मैनेजमेंट, कि खुद डॉ परमार पार्टी आलाकमान का रुख भांपते हुए ठाकुर रामलाल के नाम का प्रस्ताव देते है। उसी दिन शाम को ठाकुर रामलाल पहली बार हिमाचल के सीएम पद की शपथ लेते है। ऐसा अकस्मात नहीं हुआ था। दरअसल इससे करीब एक सप्ताह पहले ठाकुर रामलाल 22 विधायकों की परेड प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के समक्ष करवा चुके थे। वैसे भी इमरजेंसी के दौरान ठाकुर रामलाल संजय गाँधी के करीबी हो चुके थे। रामलाल, डॉ परमार की कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री थे और उन्होंने संजय के नसबंदी अभियान को अपने क्षेत्र में पुरे जोर- शोर के साथ चलाया था। इसका लाभ भी उन्हें मिला। शांता को पता भी नहीं चला और उनके विधायक ठाकुर रामलाल के साथ हो लिए निर्दलीय विधायकों के सहारे बने तीसरी बार सीएम बतौर मुख्यमंत्री ठाकुर रामलाल का पहला कार्यकाल महज तीन माह का ही रहा। दरअसल इमर्जेन्सी के बाद हुए आम चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो गया और मोरारजी देसाई की सरकार ने कई प्रदेशों की सरकारें डिसमिस कर दी और चुनाव करवा दिए।हिमाचल भी इन्हीं राज्यों में से एक था। चुनाव हुए और शांता कुमार अगले मुख्यमंत्री बने। पर शांता भी सत्ता का सुख ज्यादा नहीं भोग पाए।फरवरी 1980 में ठाकुर रामलाल ने एक बार फिर अपनी तिगड़मबाज़ी दिखाई और शांता कुमार के 22 विधायक ठाकुर के साथ हो लिए। इस बीच मोरारजी देसाई की सरकार गिर गई और इंदिरा की सत्ता में वापसी हुई। इंदिरा ने भी वहीँ किया जो मोरारजी ने किया था। हिमाचल सहित कई प्रदेशों की सरकारों को डिसमिस किया। 1982 में फिर चुनाव हुए और हिमाचल में पहली बार किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। कांग्रेस को 31 सीटें मिली जो बहुमत से चार कम थी और 6 निर्दलीय विधायक भी चुन कर आये थे। और एक बार फिर ठाकुर रामलाल की राजनैतिक करामात कांग्रेस के काम आई और 5 निर्दलीय विधायकों के समर्थन से रामलाल तीसरी बार हिमाचल के मुख्यमंत्री बने। एक गुमनाम पत्र ने गिरा दी कुर्सी सीएम ठाकुर रामलाल के लिए सब कुछ ठीक चल रहा था। इसी बीच जनवरी 1983 में हिमाचल प्रदेश के मुख्य न्यायधीश को एक गुमनाम पत्र मिलता है। पत्र में लिखा गया था कि ठाकुर रामलाल के दामाद पदम् सिंह, बेटे जगदीश और उनके मित्र मस्तराम द्वारा जुब्बल-कोटखाई व चौपाल इलाके में सरकारी भूमि से देवदार की लकड़ी काटी जा रही है, जिसकी कीमत करोड़ों में है। न्यायधीश ने जांच बैठाई जिसके बाद ठाकुर रामलाल पर खुले तौर पर टिम्बर घोटाले के आरोप लगने लगे। शायद ठाकुर रामलाल इस स्थिति को भी संभाल लेते लेकिन उनसे एक और चूक हो गई जिसका खामियाजा उन्हें सीएम की कुर्सी गवाकर चुकाना पड़ा। दरअसल ठाकुर रामलाल ने दिल्ली में पत्रकार वार्ता कर ये कह दिया कि उन्हें राजीव गाँधी ने आश्वासन दिया है कि उन्हें टिम्बर घोटाले को लेकर परेशान नहीं किया जायेगा। इसके बाद राजीव गाँधी पर आरोप लगने लगे कि वे भ्रष्टाचार के आरोपी का बचाव कर रहे है। नतीजन ठाकुर रामलाल को इस्तीफा देना पड़ा। दिलचस्प बात ये रही कि जिस तरह डॉ यशवंत सिंह परमार ने इस्तीफा देकर ठाकुर रामलाल का नाम प्रतावित किया था, उसी तरह ठाकुर रामलाल को इस्तीफा देकर वीरभद्र सिंह के नाम का प्रस्ताव देना पड़ा। राज्यपाल बनकर की लोकतंत्र की हत्या ठाकुर रामलाल के बतौर मुख्यमंत्री सफर पर तो वीरभद्र सिंह के सत्ता सँभालने के बाद ही विराम लग गया था, किन्तु अभी तो ठाकुर रामलाल द्वारा लोकतंत्र की हत्या होना बाकी था। कांग्रेस ने रामलाल को आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनाकर भेज दिया था। आंध्र में 1983 में चुनाव हुए थे जिसमें एन टी रामाराव मुख्यमंत्री बने थे। इसी दौरान अगस्त 1983 में एन टी रामाराव उपचार के लिए विदेश चले गए। ठाकुर रामलाल की राजनैतिक महत्वकांशा अभी बाकी थी, सो रामलाल ने कांग्रेस नेता विजय भास्कर राव को बिना विधायकों की परेड के ही सीएम बना दिया। वे इंदिरा के दरबार में अपनी कुव्वत बढ़ाना चाहते थे, पर हुआ उल्टा। एनटी रामाराव वापस वतन लौटे और व्हील चेयर पर बैठ दिल्ली में 181 विधायकों के साथ जुलूस निकाला। कांग्रेस की जमकर थू-थू हुई और रातों रात ठाकुर रामलाल के स्थान पर शंकर दयाल शर्मा को राज्यपाल बना दिया गया। इसके बाद रामलाल ने कांग्रेस छोड़ी, वापस भी आये पर स्थापित नहीं हो पाए। वीरभद्र को चुनाव हराने वाला नेता वीरभद्र सिंह से बड़े कद का नेता शायद ही हिमाचल की राजनीति में दूसरा कोई हो। वीरभद्र अपने राजनैतिक जीवन में सिर्फ एक चुनाव हारे है। 1990 के विधानसभा चुनाव में ठाकुर रामलाल ने उन्हें जुब्बल कोटखाई से चुनाव हारकर साबित कर दिया था कि उस क्षेत्र में उनसे बड़ा कोई नेता नहीं हुआ।
फिट इंडिया मूवमेंट कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर जिला स्तरीय कार्यक्रम कहलूर स्पोर्टस काॅम्पलैक्स हाॅकी मैदान लूहणु में जिला युवा सेवा एवं खेल विभाग के तत्वावधान में आयोजित किया गया। इस अवसर पर जिला के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, राज्य खेल छात्रावास, सिटी कलब, बंदला, ऋषिकेश, कोठीपुरा, कोसरियां की टीमों के खिलाडियों, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (बाल) के विद्यार्थियों ने माननीय प्रधानमंत्री का दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम से लाईव संदेश सुना,इस मौके पर उपायुक्त राजेश्वर गोयल ने कहा कि जिला के सभी उपमण्डलों, शिक्षण संस्थानों, पंचायतों तथा विभागों में माननीय प्रधानमंत्री के संदेश का सीधे प्रसारण की व्यवस्था कर सुनाया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को फिट रखने के लिए जो संदेश दिया है हम सभी को उन सभी बातों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र और जीवन शैली में अपनाना चाहिए ताकि स्वस्थ स्वास्थ्य और स्वच्छ समाज की कल्पना को साकार किया जा सके। उन्होंने कहा कि कोई भी राष्ट्र तरक्की तभी कर सकता है जब मानव संसाधन स्वस्थ होंगे। उन्होंने आमजन मानस से अपील की है कि माननीय प्रधानमंत्री ने जो संदेश दिया है उसी के अनुरूप दिए गए संदेश को अपनी जीवन शैली में पूरी तरह से अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि आज पूरे देश में हाॅकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेजर ध्यान चंद ने तीन बार भारत का प्रतिनिधितत्व किया और तीनों ही बार स्वर्ण पदक जीता। उन्होने बताया कि इस अवसर पर जिला स्तरीय हाॅकी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जा रहा है।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी घुमारवीं ने निर्णय लिया है कि 2 सितम्बर को 10.30 प्रात: अबढाणीघाट (गुगा मंदिर के समीप) घुमारवीं में जनहित व जनाधिकार की इस लड़ाई में दोषियों के विरुद्ध आवाज बुलंद की जाएगी। पत्रकारों से बात करते हुए आल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य पूर्व सीपीएस राजेश धर्माणी ने कहा कि भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचारियों व उनको सरंक्षण देने वाले नेताओं का इतना दबाव है कि भाजपा सरेआम गुनाहगारों का साथ दे रही है, जिला फेडरेशन अध्यक्ष से इस्तीफा नहीं लिया I बिना जांच के राशन तस्करों को कलीन चिट देकर घटिया राजनीति का अनूठा उदाहरण पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि आम आदमी के हक की लड़ाई में कांग्रेस लोगों के सहयोग से निश्चित तौर पर न्याय दिलाने में कामयाब होंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी सरकार से मांग करती है कि इस घोटाले की न्यायिक जांच कारवाई जाए ताकि इन तस्करों के विरुद्ध कार्यवाही हो सके और सरकारी योजना का लाभ आम आदमी तक पंहुंच सके। धर्माणी ने कहा कि19 अगस्त,2019 को मत्वाणा गावं के एक युवक द्वारा स्टिंग कर राशन घोटाले की वीडियो जारी की गई, जिसमे सरेआम दिनदिहाड़े सरकारी गोदाम से राशन चोरी करते देखे गए हैं। इस वीडियो में आरोपी ने कई अन्य राशन तस्करी में शामिल व्यक्तियों के नाम उजागर किए जिनमें जिला फेडरेशन के अध्यक्ष व भाजपा के प्रवक्ता का नाम भी शामिल हैं। पूरे हिमाचल प्रदेश में इस घोटाले की चर्चा हर आदमी की जुबान पर है।
हमीरपुर के सांसद एवं वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर शुक्रवार से 4 दिन के लिए अपने लोकसभा क्षेत्र का दौरा करेंगे। चार दिन तक अनुराग ठाकुर अलग-अलग जगहों पर क्षेत्र का हाल जानेंगे , और लोगों की समस्याओं का समाधान करेंगे। गौरतलब है कि सांसद अनुराग ठाकुर का मंत्री बनने के बाद यह हमीरपुर का दूसरा बड़ा दौरा है। 30 अगस्त को सांसद अनुराग ठाकुर का देहरा में स्वागत होगा, और उसके बाद अनुराग ठाकुर हमीरपुर में शाम को परिधि गृह में लोगों से सीधा संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं को भी सुनेंगे। अगले दिन सुजानपुर , बड़सर और भोरंज का दौरा करेंगे। इसके बाद वह 2 सितंबर को वापस दिल्ली पहुंच जाएंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर शुक्रवार को सुबह क़रीब 10 बजे दिल्ली से हवाई मार्ग से क़रीब 11:20 बजे गग्गल हवाईं अड्डे पहुँचेंगे , जहाँ उनका भव्य स्वागत होगा। वह 12:30 बजे देहरा रेस्ट हाउस पहुँच लोगों से मिलेंगे। अनुराग ठाकुर क़रीब 4: 00 बजे हमीरपुर सर्किट हाउस पहुँच जनता की समस्याएँ सुनेंगे। अनुराग ठाकुर रात 8 बजे अपने घर समीरपुर पहुँचेंगे। शनिवार को सुबह समीरपुर में लोगों से मिलेंगे। इसके बाद वह ज़िले के अन्य क्षेत्रों में निर्धारित कार्यक्रमों में शामिल होंगे।
भीमाकली मंदिर हिमाचल प्रदेश के सराहन में हिंदुओं का एक प्रमुख तीर्थ स्थल स्थित है। देवी भीमाकली को समर्पित यह मंदिर लगभग 800 साल पहले बनाया गया माना जाता है। यह अपनी अनूठी वास्तुकला, जो हिंदू और बौद्ध स्थापत्य शैली का एक मिश्रण है, के लिए जाना जाता है। मंदिर परिसर के भीतर एक नया मंदिर 1943 में बनाया गया था। मंदिर में देवी भीमाकली की एक मूर्ति को एक कुंवारी और एक औरत के रूप में चित्रित निहित है। मंदिर परिसर में रघुनाथ और भैरों के नरसिंह तीर्थ को समर्पित दो मंदिर और हैं भीमाकली मंदिर भारत में सबसे महत्वपूर्ण 'शक्तिपीठ' या पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हिंदू देवता शिव की पत्नी सती, वैवाहिक जीवन के परम सुख और दीर्घायु की देवी, का बायाँ कान इस जगह गिर गया था। एक अन्य कथा के अनुसार, देवी भीमाकली महान हिंदू ऋषि ब्रह्मगिरी के लकड़ी के स्टाफ में सबसे पहले दिखाई दी। यहाँ हर साल लोकप्रिय हिंदू त्योहार दशहरा के समारोह को धूमधाम से मनाया जाता है।
- परवाणु पुलिस कर रही रिपोर्ट का इंतजार - नशा मुक्ति केंद्र परवाणु पर लगा है अरोप, मारपीट से हुई है मौत पुलिस थाना परवाणु के तहत सामने आए नशा छुडवाने के लिए नशा मुक्ति केंद्र परवाणु में दाखिल हुए जसविंद्र सिंह की मौत मामले में अब पोस्टमार्ट से खुलासा होगा कि आखिर जसविंद्र सिंह की मौत कैसे हुई। इस मामले में मृतक की पत्नी ने सैक्टर-1 स्थित नशा मुक्ति केंद्र पर कथित तौर पर आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करवाया हुआ है। परवाणु पुलिस भी मामले में कारवाई को आगे बढ़ाने के लिए पोस्टमार्ट रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। मामले में अभी तक पोस्टमार्टम की रिपोर्ट नही आ सकी है और आज शाम तक रिपोर्ट आने की संभावना बनी हुई है, जिसके बाद इस मामले से पर्दा उठ सकेगा। सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार मृतक के शरीर में नीले रंग के घाव भी पाए गए है, लेकिन यह अभी पता नही चल सका है कि यह घाव अभी के है या पहले के है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलते ही घाव की स्थिति भी पूरी तरह से स्पष्ट हो जाऐगी। बता दे कि इस मामले में मृतक की पत्नी कुलविंद्र कौर ने परवाणु थाने में शिकायत दर्ज करवाई है कि उसका पति जसविंद्र सिंह शराब पीने का आदी था और उसने अपने पति व जेठ को नशा छुडवाने के लिए परवाणु नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल करवाया था, जहां पर उसके साथ मारपीट की और इसके कारण उसकी हालत बिगड़ गई। इसके बाद उसके पति को चंडीगढ़ अस्पताल में भर्ती करवाया जहां पर इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। - बाक्स : पोस्ट मार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद आगे की कारवाई की जाएगी। रुपेश कांत, एस.एच.ओ., पुलिस थाना परवाणु।


















































