पाईन ग्रोव स्कूल धर्मपुर में 78 स्कूलों को किया सम्मानित सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा सहकारिता मंत्री डाॅ. राजीव सैजल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों के साथ-साथ जन-जन को व्यक्तिगत रूप से भी उत्तरदायी बनना होगा। डाॅ. सैजल आज सोलन जिला के कसौली विधानसभा क्षेत्र के धर्मपुर स्थित पाईन ग्रोव स्कूल में हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद (हिमकोस्ट) के सौजन्य से आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन विभिन्न विद्यालयों को पर्यावरण संरक्षण एवं विद्यालयों में स्वच्छता की दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सम्मानित करने के लिए किया गया। डाॅ. सैजल ने इस अवसर पर सोलन जिला के 78 विद्यालयों को पर्यावरण संरक्षण एवं विद्यालयों में स्वच्छता की दिशा में उत्कृष्ट रहने पर सम्मानित किया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एवं देश को सही मायनों में स्वच्छ रखने के केन्द्र एवं प्रदेश सरकार के प्रयास तभी सार्थक होंगे जब प्रत्येक व्यक्ति इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी को समझेगा। उन्होंने कहा कि हमें अपने आवास एवं आसपास की स्वच्छता के साथ-साथ अपने क्षेत्र, समाज, प्रदेश तथा देश की स्वच्छता के लिए एकजुट होकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विश्व भर में विख्यात है तथा देश-विदेश से पर्यटक राज्य के विभिन्न स्थलों पर भ्रमण करने आते हैं। इसलिए हम सभी का दायित्व है कि हम प्रदेश में उन्हें बेहतर सुविधाएं देने के साथ-साथ स्वच्छ एवं स्वास्थ्यवर्धक पर्यावरण कायम रखने में अपना योगदान दें। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि पर्यावरण संरक्षण तथा स्वच्छता कायम रखने में सरकार के प्रयासों को संबल प्रदान करें। डाॅ. सैजल ने पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहतरीन कार्य करने वाले विद्यालयों को बधाई देते हुए कहा कि वैश्वीकरण, उष्मीकरण एवं निजीकरण के इस दौर में पर्यावरण संरक्षण एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। पहाड़ों पर पिघलते ग्लेशियर हमारे पर्यावरण के संतुलन को खतरा उत्पन्न कर रहे हैं। इसलिए प्रकृति के संरक्षण तथा जल संरक्षण में समस्त वर्गों को मिलजुल कर कार्य करना होगा ताकि हम भावी पीढ़ी को सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण प्रदान कर सकें। डाॅ. सैजल ने ग्रीन स्कूल कार्यक्रम के अंतर्गत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बोहली, विकास खंड धर्मपुर तथा एमआरए डीएवी स्कूल सोलन को जिला में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए पुरस्कृत किया। इससे पूर्व उप जिला शिक्षा अधिकारी चंद्रमोहन शर्मा ने मुख्यतिथि का स्वागत किया तथा कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि ग्रीन स्कूल कार्यक्रम के तहत समस्त प्राथमिक विद्यालयों में 5 पौधे तथा माध्यमिक तथा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में 10 पौधे रोपित किए जा रहे हैं। जिला सोलन में वर्तमान समय में 250 इको क्लब विभिन्न विद्यालयों में संचालित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण के सदस्य एवं ग्राम पंचायत गुल्हाड़ी के प्रधान मदन मोहन मेहता, पाइन ग्रोव पब्लिक स्कूल के अध्यापकगण तथा विभिन्न विद्यालयों के प्रतिनिधि व काफी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
भारतीय जनता पार्टी का मजबूत संगठन पर्व सदस्यता अभियान जोरों पर चलाया जा रहा है। प्रभावित किसान सभा दाड़लाघाट के संयोजक जगदीश शर्मा ने गांव रोड़ी,खाता,बागा,सुल्ली,बटेड, कून,पछीवर आदि गांव का दौरा किया। जगदीश शर्मा ने बताया कि सदस्यता अभियान से लोगों में खुशी का माहौल है,गांव में लोग केंद्र में मोदी सरकार की ईमानदार एवं स्पष्ट नीतियों तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कुशल प्रशासन से बेहद प्रभावित हैं और यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर रहे हैं। जगदीश शर्मा ने बताया कि उन्होंने अभी तक ऑनलाइन डिजिटल मेंबरशिप के जरिए लगभग 250 लोगों को भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण करवाई है और यह अभियान जारी है। जगदीश शर्मा ने बताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं में सदस्यता अभियान को लेकर भारी जोश है और वे घर घर जाकर नए सदस्य बना रहे हैं। 6 जुलाई से शुरू हुआ यह सदस्यता अभियान पूरे अर्की विधानसभा क्षेत्र में जोरों पर चला हुआ है। हमारा लक्ष्य है कि हम अर्की विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा नए सदस्य पार्टी को बना कर दें।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. राजीव बिंदल ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार स्वर्गीय डाॅ. यशवंत सिंह परमार की संपूर्ण हिमाचल के संतुलित विकास की परिकल्पना को पूर्ण रूप से साकार कर रही है। डाॅ. बिंदल गत देर सांय यहां स्वर्गीय डाॅ. परमार की 113वीं जयंती पर सिरमौर कल्याण मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। डाॅ. राजीव बिंदल ने कहा कि हिमाचल जैसे दुरूह भौगोलिक परिस्थितियों वाले प्रदेश में गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के लिए दूरदर्शी सोच रखने के कारण ही डाॅ. परमार को हिमाचल निर्माता कहा जाता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विभिन्न नवीन योजनाओं एवं प्रयासों के माध्यम से राज्य के गांव-गांव का एक समान विकास सुनिश्चित बनाने की दिशा में कार्यरत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार डाॅ. परमार के हिमाचल को हर क्षेत्र में आदर्श बनाने के सपने को पूरा करने के लिए कृतसंकल्प है।विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में 4 अगस्त, 2019 को डाॅ. यशवंत सिंह परमार के सम्मान में जो कार्य किया गया है वह बहुत पहले हो जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश कीे सभी सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं तथा महाविद्यालयों में डाॅ. वाईएस परमार की जयंती मनाने की घोषणा की है। यह न केवल हिमाचल निर्माता को सच्ची श्रद्धांजलि है अपितु इसके माध्यम से भावी पीढ़ियों को सही मायनों में विकास में उनके योगदान और उनकी सोच की जानकारी मिलेगी। डाॅ. बिंदल ने कहा कि 4 अगस्त, 2019 को ही विधानसभा में डाॅ. परमार के वक्तव्यों का संकलन कर एक पुस्तक का विमोचन किया गया है। इस पुस्तक का एक-एक शब्द स्वर्गीय डाॅ. परमार की जुबानी है और इससे कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। उन्होंने डाॅ. परमार के कार्यों को सभी तक पहुंचाने और सिरमौर जिला की विशिष्ट संस्कृति के संवर्द्धन एवं प्रचार-प्रसार के लिए सिरमौर कल्याण मंच सोलन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय डाॅ. परमार के जन्म स्थान जिला सिरमौर के चन्हालग में संग्रहालय बनाने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए वे स्वयं क्षेत्र का दौरा करेंगे। उन्होंने सोलन में निर्मित होने वाले सिरमौर कला एवं संस्कृति भवन के लिए अपनी ऐच्छिक निधि से 2 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने सिरमौर कल्याण सभा को अपनी ऐच्छिक निधि से 21 हजार रुपये तथा चूड़ेश्वर लोक सांस्कृतिक कलामंच को 10 हजार रुपये प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने इस अवसर पर प्रकाशित स्मारिका का विमोचन भी किया। डाॅ. राजीव बिंदल ने इस अवसर पर राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड में कार्यरत जिला सिरमौर के विवेक ठाकुर को विश्व की सबसे ऊंची एवरेस्ट चोटी सहित अन्य पर्वतों पर सफलतापूर्वक फतह हासिल करने के लिए ‘सिरमौर सम्मान’ तथा सुप्रसिद्ध गायक एवं लेखक विद्यानंद सरैक को उनके कार्यों के लिए ‘परमार सम्मान’ से विभूषित किया। इस अवसर पर चूड़ेश्वर सांस्कृतिक दल द्वारा सिरमौरी कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर डाॅ. परमार की स्मृतियों को संजोए रखने के लिए भाषा एवं कला संस्कृति विभाग के सहयोग से एक कवि एवं विचार गोष्ठी भी आयोजित की गई। सिरमौर कल्याण मंच के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार बलदेव चैहान ने मुख्यातिथि का स्वागत किया और सिरमौर कल्याण मंच द्वारा डाॅ. परमार की स्मृति में आयोजित की जा रही विभिन्न गतिविधियों की जानकारी प्रदान की। उन्होंने सिरमौर कला एवं संस्कृति भवन के निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध करवाने की मांग की। सोलन के विधायक डाॅ. कर्नल धनीराम शांडिल, शिमला लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद प्रो. वीरेंद्र कश्यप, प्रदेश खादी बोर्ड के उपाध्यक्ष पुरूषोत्तम गुलेरिया, नगर परिषद सोलन के अध्यक्ष देवेंद्र ठाकुर, उपाध्यक्ष मीरा आनंद, पार्षदगण, जिला परिषद सदस्य शीला, सोलन से भाजपा के उम्मीदवार रहे डाॅ. राजेश कश्यप, डाॅ. यशवंत सिंह परमार वानिकी एवं बागवानी विश्वविद्यालय नौणी के कुलपति डाॅ. परमेंद्र कौशल, एपीएमसी के सदस्य पदम सिंह पुंडीर, ग्राम पंचायत शामती के प्रधान संजीव सूद, दुधारू पशु सुधार सभा सोलन के अध्यक्ष रविंद्र परिहार, जिला भाजपा महामंत्री नरेंद्र ठाकुर, कोषाध्यक्ष लक्ष्मी ठाकुर, बीडीसी कंडाघाट के पूर्व अध्यक्ष नंदराम कश्यप, भाजपा, भाजयुमो एवं अन्य संस्थाओं के पदाधिकारी, प्रदेश विधानसभा के सचिव यशपाल शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सोलन डाॅ. शिव कुमार शर्मा, उपमंडलाधिकारी सोलन रोहित राठौर, सिरमौर कल्याण मंच के महासचिव डाॅ. राम गोपाल शर्मा, वरिष्ठ सदस्य डाॅ. एसएस परमार, यशपाल कपूर, अन्य पदाधिकारी, सदस्य, जिले के वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
सोमवार को ज़िला सोलन के पट्टा के नज़दीक एक निजी बस पहाड़ी से आधी नीचे लटक गई,गनीमत यह रही कि बस पहाड़ी से नीचे नहीं गिरी अन्यथा एक बहुत बड़ा हादसा हो सकता था। प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह 9:30 बजे के करीब एक निजी बस (एचपी 12c 7993) जोकि नालागढ़ से वाया पट्टा सोलन जा रही थी, पट्टा से दो मोड आगे सामने से आ रही निगम की बस को पास देते समय जगह धसने के कारण पहाड़ी से नीचे लटक गई। इसके कारण गाड़ी में बैठी सवारियों में अफरा-तफरी मच गई। वहीं चालक की समझदारी से इन सवारियों को सुरक्षित उतार लिया गया। आईटीआई निर्माण के कारण सड़क के आधे हिस्से में मिट्टी और पत्थर प्राप्त जानकारी के अनुसार जहां यह हादसा हुआ वहां पर आईटीआई का निर्माण हो रहा है। निर्माण के चलते सड़क का आधे से भी ज्यादा हिस्सा मिट्टी और पत्थरों ने घेर रखा है। वहीं संबंधित विभाग के अधिकारियों ने इस सड़क के प्रति लापरवाही का रुख अपनाया हुआ है जिसके कारण एक बड़ा हादसा होने से बाल-बाल बचा है। लोगों ने विभाग से इस सड़क में पड़े हुए मिट्टी और पत्थरों को उठवा कर सड़क को खोलने की मांग की है ताकि भविष्य में कोई अनहोनी न हो।
प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर के निर्माण की स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। हालहीं में प्रदेश सरकार इसके निर्माण का ज़िम्मा शहरी विकास मंत्रालय से वापस लेकर परिवहन मंत्रालय को देने का निर्णय ले चुकी है। बीते 2 अगस्त को हाई कोर्ट में हुई सुनवाई में शहरी विकास मंत्रालय ने माननीय न्यायलय को भी औपचारिक तौर पर इस बात से अवगत करवाया है। इसके बाद कोर्ट ने 8 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में इस हेतु परिवहन मंत्रालय का शपथ पत्र जमा करवाने के निर्देश दिए है। ऐसे में अगर कोई और नया ट्विस्ट नहीं आता है तो इस पुरे मामले से शहरी विकास विभाग लगभग अलग हो चूका है, साथ ही सोलन नगर परिषद् की भी अब इसमें शायद ही कोई भूमिका रहे। पर इस पुरे घटनाक्रम के बीच विस्थापित हुए लोगों की मुश्किलें अभी ही कम नहीं हुई है। प्रदेश की नई सरकार के गठन के बाद सोलन के लिए एकमात्र महत्पूर्ण घोषणा ट्रांसपोर्ट नगर ही है। खुद सीम जयराम ठाकुर ने इसका शिलान्यास किया था, लेकिन अब तक कार्य शुरू नहीं हुआ।सवाल ये भी है कि जब सरकार के पास ट्रांसपोर्ट नगर हेतु बजट का प्रावधान ही नहीं है, तो शिलान्यास क्यों किया गया ? समझिये क्या है ट्रांसपोर्ट नगर का मसला और क्यों अटका है इसका कार्य फोरलेन निर्माण की जड़ में आने के चलते चम्बाघाट स्थित मोटर मार्किट उजाड़ गया था। यहाँ सड़कों लोगों के परिवार पालते थे जो रातो रात सड़क पर आ गए। हालांकि सरकार के पास उन्हें विस्थापित करने हेतु पर्याप्त समय था लेकिन उपयुक्त कदम नहीं उठाये गए। 2017 विधानसभा चुनाव से पूर्व मांग ने तूल पकड़ा और राजनैतिक दलों ने इसे अपने घोषणा पत्र में शामिल किया। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद 14 अप्रैल 2018 को सीएम जयराम ठाकुर ने ट्रांसपोर्ट नगर का शिलान्यास किया। ट्रांसपोर्ट नगर के निर्माण का ज़िम्मा नगर परिषद् सोलन को दिया गया, किन्तु कई माह तक इसका कार्य शुरू नहीं हुआ। नगर परिषद ने 17 मई 2018 को एक मांग पत्र मोटर मार्किट एसोसिएशन को जारी किया था जिसमें 50 फीसदी लागत राशि की मांग की गई थी। एसोसिएशन का कहना था कि जब उन्हें दुकानें किराये पर मिलनी है तो वे आधी राशि का भुगतान किस आधार पर करें। कई माह बीतने के बाद भी ट्रांसपोर्ट नगर का काम शुरू नहीं हुआ।नगर परिषद् सोलन का कहना था कि उन्हें इस बाबत उन्हें फण्ड नहीं मिला, जिसके चलते वे काम शुरू नहीं कर पाए। शुरुआत में ट्रांसपोर्ट नगर में करीब 250 दुकानें बनाई जानी थी जिसकी लागत करीब 17 करोड़ 60 लाख थी। बाद में शहरी विकास विभाग ने करीब 22 करोड़ की लागत से सिर्फ 100 दुकानें बनाने की योजना पेश की। यदि ट्रांसपोर्ट नगर में सिर्फ 100 दुकानें बनाई जाती है तो समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा क्यों कि ऐसे में मोटर मार्किट से जुड़े सभी लोगों को एक जगह पर स्थापित नहीं किया जा सकता। आखिरकार हताश होकर मोटर मार्किट एसोसिएशन ने कोर्ट का सहारा लिया। कोर्ट की फटकार के बाद नगर परिषद् ने ट्रांसपोर्ट नगर की डीपीआर तैयार करवाई। अब सरकार ने ट्रांसपोर्ट नगर के निर्माण का ज़िम्मा परिवहन मंत्रालय को दिया है, जिसके बाद संभवतः पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू होगी। टांसपोर्ट नगर की जमीन नगर परिषद् के नाम ट्रांसफर करवाई गई थी, इसे शायद फिर से ट्रांसफर किया जायेगा। नगर परिषद् द्वारा बनाई गई डीपीआर को शायद ही स्वीकृति मिले। 20 लाख से भी अधिक की राशि व्यय कर ये डीपीआर बनाई गई थी। ऐसे में ये राशि भी बर्बाद हो जाएगी। कंट्रीब्यूशन राशि पर स्थिति स्पष्ट नहीं है यदि मोटर मार्किट एसोसिएशन को दुकानें किराये पर दी जानी है, तो उनसे कंट्रीब्यूशन राशि किस आधार पर ली जा सकती है। यदि दुकानें लीज पर दी जानी है, तभी असोसिएशन कंट्रीब्यूशन राशि देने को राजी होगी।
कुरुक्षेत्र के पिहोवा के गांव अरुणाय में स्थित संगमेश्वर महादेव मंदिर रहस्यमयी शिव मंदिर हैं, जहां भोलेनाथ के चमत्कार तो नजर आते हैं, लेकिन इन चमत्कारों का कारण कोई नहीं जानता। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की महिमा ही मानते हैं। बताया जाता है कि देवी सरस्वती ने यहीं पर शिव की आराधना की थी यहां साल में एक बार नाग और नागिन का जोड़ा देखा जाता है। यह जोड़ा शिवलिंग की परिक्रमा करने के कुछ देर बाद खुद-ब-खुद चला जाता है। आज तक इस जोड़े ने किसी भी श्रद्धालु को नुकसान नहीं पहुंचाया। इनके दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ जाती है। दर्शन करने के बाद ये जोड़ा कहां जाता है किसी को कुछ नहीं पता। ये कहां से आते हैं और कहां चले जाते, इसका पता अब तक कोई नहीं लगा पाया है। पुराने समय से इसे अरुणा और सरस्वती नदी के संगम का स्थल माना जाता है। मंदिर के पास से सरस्वती नदी गुजरती है। पुराणों के अनुसार महर्षि वशिष्ठ और विश्वामित्र ऋषि में एक दूसरे से अधिक तपोबल हासिल करने की होड़ लगी हुई थी। तब विश्वामित्र ने सरस्वती को छल से महर्षि वशिष्ठ को अपने आश्रम तक लाने की बात कही, ताकि वे महर्षि वशिष्ठ को समाप्त कर सकें। श्राप के डर से सरस्वती तेज बहाव के साथ महर्षि वशिष्ठ को विश्वामित्र आश्रम के द्वार तक ले आईं। लेकिन जब विश्वामित्र महर्षि वशिष्ठ की ओर बढ़ने लगे तो सरस्वती महर्षि वशिष्ठ को पूर्व की ओर बहा कर ले गईं। इससे विश्वामित्र क्रोधित हो गए और सरस्वती को खून से भरकर बहने का श्राप दे दिया। खून का बहाव शुरू होने पर सरस्वती के किनारे राक्षसों ने डेरा डाल लिया। महर्षि वशिष्ठ ने सरस्वती को यहां प्रकट हुए शिवलिंग की आराधना करने को कहा। सरस्वती ने इसी तीर्थ पर शिव की आराधना की तो भगवान शिव ने उसे विश्वामित्र के श्रप से मुक्त कर फिर से जलधारा से भर दिया। तभी से यहां भगवान शिव की आराधना शुरू हो गई। चुनाव जीतने की मन्नत मांगने आते है नेता लोगों की मान्यता हैं कि सावन माह में स्वयंभू शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, जो भी श्रद्धालु यहां पर पूरी श्रद्धा से पूजा-अर्चना करता है, उसके सभी काम बनते हैं। यहां मंदिर में राजनेताओं व व्यापारियों का भी आस्था का केंद्र हैं। यहां चुनाव लड़ने से पूर्व बहुत से नेता मन्नत मांगते हैं और पूरी होने पर यहां पूजन व धागा खोलने के लिए आते हैं।
The owner of a tailoring shop in Keran near Line of Control (LoC) in Kupwara district was arrested on Sunday after 15 hand grenades were recovered from his shop. The man, identified as Parvez Khawaja. As per the information received, a local resident, identified as Abdul Hamid Bajad, had died in the explosion, sunday morning. After an explosion was heard in the area, a joint team of police and the Indian Army reached the spot and arrested the tailoring shop owner and rcovered 15 hand grenades from his shop.
Rich tributes were paid today to the architect of modern Himachal Pradesh and the first Chief Minister Dr YS Parmar on his 114th birth anniversary at the Dr YS Parmar University of Horticulture and Forestry (UHF), Nauni. In a befitting tribute to the leader, the university celebrated the day as Van Mahotsav in which the university students, faculty and staff, and farmers from Ajmer participated. The event began with the university officials and staff paying floral tributes to the visionary leader whose strenuous efforts led to full statehood of Himachal Pradesh. Speaking on the occasion, Dr Parvinder Kaushal, UHF Vice-Chancellor said it was a matter of great pride and honour that the university was named after the great leader. He said that Dr Parmar was a true champion who advocated the development of horticulture and forestry in the state. It was his vision that has led to the development of the state. Dr Kaushal urged the students and staff to follow in the footsteps of Dr Parmar who dedicated his life for the development of the state and betterment of the poor and farmers. “We at this University named after him, along with the people of the state are forever indebted to this great leader. Van Mahotsav is an event, which not only connects everyone with nature but is also an important activity to maintain a balance with nature. Celebrating Van Mahotsav on Dr Parmar’s birth anniversary is an appropriate homage to this role model leader of the hill states,” said Dr Kaushal. He said that the university will take several green initiatives in the coming years and develop itself as a clean, green and smart campus. While explaining the importance of trees for the survival of humankind, Dr Rakesh Gupta, Director Extension Education called for collective efforts to conserve existing forests and undertake plantation in newer areas. Dr PK Mahajan, Dean College of Forestry asked for the support of all the university employees and students in ensuring the survivability of all the plants. The participants undertook a plantation drive at the university campus in which over 500 trees of Chinese raintree, Sandalwood, Yellow Gulmohar and Silver oak were planted. The local branches of the State Bank of India, UCO Bank and Jogindra Bank also supported the programme.
गायक, संगीतकार, अभिनेता, निर्माता, लेखक ; किशोर सही मायनो में बहुमुखी प्रतिभा के धनि थे। आज किशोर कुमार का जन्मदिन है। अपनी दिलकश आवाज में गाए हज़ारों गीतों के जरिए किशोर कुमार आज भी हमारे आसपास मौजूद हैं। दिलचस्प बात है कि उन्होंने संगीत की तालीम हासिल नहीं की थी। देव आनंद, राजेश खन्ना और अमिताभ के करियर में योगदान किशोर की आवाज के जादू से देवआनंद सदाबहार हीरो कहलाए। राजेश खन्ना को पहले सुपर स्टार बने और अमिताभ बच्चन महानायक हो गए। जाने किशोर कुमार की चार पत्नियों के बारे में... रुमा गुहा से की पहली शादी किशोर कुमार की पहली पत्नी रूमा गुहा ठाकुरता का एक एक्ट्रेस थीं। उन्होंने 1951 में किशोर कुमार से शादी की थी। दोनों की शादी से एक बेटा अमित कुमार हुआ। अमित कुमार भी एक गायक है। शादी के 8 साल बाद किशोर कुमार के रिश्ते में खटास आनी शुरू हो गई और उन्होंने अपनी पहली पत्नी रूमा से तलाक ले लिया। मधुबाला से हुआ इश्क़ मधुबाला और दिलीप कुमार के ब्रेक अप के बाद किशोर और मधुबाला की कहानी शुरू हुई। उस दौर में दोनों एकसाथ कई फिल्मों में काम कर रहे थे, तभी दोनों के बीच प्रेम प्रसंग हुआ और 1960 में किशोर कुमार और मधुबाला ने आपस में शादी कर ली। हालांकि 27 साल की मधुबाला के दिल में छेद पाया गया था और गंभीर रूप से बीमार पड़ने के बाद 35 साल की उम्र में मधुबाला का देहांत हो गया था योगिता से रचाई तीसरी शादी मधुबाला की मौत के बाद किशोर कुमार की जिंदगी में योगिता बाली आईं और दोनों ने शादी कर लीं। पर इसके बाद योगिता की जिंदगी में मिथुन चक्रवर्ती आ गए और दो साल बाद योगिता बाली ने किशोर को छोड़ दिया और मिथुन से शादी कर ली। लीना चंद्रावरकर से की चौथी शादी लीना किशोर कुमार से 20 साल छोटी थी पर इश्क़ उम्र कहा देखता है। लीना ने पिता के खिलाफ जाकर 1980 में किशोर कुमार से शादी कर ली।
आज हम आपको दर्शन करवाने जा रहें हैं वशिष्ठ मंदिर की जो हमाचल प्रदेश के ज़िला कुल्लू के वशिष्ठ गांव में है।यह मंदिर मनाली से करीब 6 किलोमटेर दूर ब्यास नदी के तट पर स्तिथ है। शिष्ठ मंदिर 4000 साल से अधिक पुराना माना जाता है।पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऋषि वशिष्ठ जो हिंदू धर्म के मुख्य 7 ऋषियों में एक थे, उन्होंने अपने पुत्र की विश्वामित्र ( एक हिंदू ऋषि ) द्वारा हत्या किए जाने के बाद नदी में कूद कर जान देने का प्रयास किया। किन्तु पानी के बहाव में ऋषि बहते गए और इस गांव में आकर बच गए, इसलिए इस गांव को वशिष्ठ गांव कहा जाता है। इसके बाद ऋषि वशिष्ठ ने इस गांव में अपने जीवन की एक नई शुरूआत की। इस घटना के बाद यहां बहने वाली व्यास नदी को विपाशा नदी के नाम से पुकारा जाने लगा था जिसका अर्थ होता है - बंधनों से मुक्त। वर्तमान में विपाशा नदी को व्यास नदी के नाम से जाना जाता है। वशिष्ठ गाँव ब्यास नदी के उस पार मनाली से लगभग 3 किमी दूर स्थित एक छोटा सा गाँव है।वशिष्ट गाँव के बारे में कहा जाता है कि इस गाँव के नजदीक छोइड़ नामक झरना है, उस झरने में लोग अपने -बच्चों को मुन्ड़न कराने लाते है। यहाँ मुन्डन कराये बच्चों के बारे में कहते है कि उन्हे भूत प्रेत के ड़र से मुक्ति मिल जाती है। यह खूबसूरत गाँव अपने शानदार गर्म पानी के झरनों और वशिष्ठ मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर में स्थित झरने के पानी में बहुत अच्छी उपचार शक्तियां हैं, जो कई त्वचा रोगों और अन्य संक्रमणों को ठीक कर सकती हैं। यहां तुर्की शैली के स्नान घर उपलब्ध हैं, जिनमें झरनों का गर्म पानी होता है। पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए अलग-अलग स्नान घर हैं, जो वर्षों से सुसज्जित हैं। मुख्य मन्दिर के ठीक सामने एक अन्य मन्दिर बना है, जिसे श्रीराम जी का मन्दिर बताया जाता है। वशिष्ठ गांव में कई मंदिर हैं जो एक स्थानीय संत वशिष्ठ और भगवान राम को समर्पित हैं। यह मन्दिर लोक शैली में बनाया गया है। मन्दिर में लगायी गयी लकड़ियों में शानदार नक्काशी की गयी है। यहां गेस्ट हाउस लंबे प्रवास के लिए उपलब्ध हैं। (एक महीने 4 से 4 महीने तक)
कुनिहार की प्राचीन शिव ताण्डव गुफा कुनिहार में सावन के तीसरे सोमवार को गुफा समिति व शम्भू परिवार के सौजन्य से विशाल भण्डारे का आयोजन किया जा रहा है। गुफा विकास समिति के अध्यक्ष राम रतन तनवर व उपाध्यक्ष अमरीश ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि रविवार 4 अगस्त से गुफा में रामचरित मानस कथा का दो दिवसीय पाठ शुरू होगा इसे सोमवार को पूजा व पूर्णाहुति के साथ विराम दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सोमवार को शाम 4 बजे से रात 11 बजे तक गुफा प्रांगण में नव दुर्गा संकीर्तन जागरण पार्टी सोलन द्वारा भोले का गुणगान किया जाएगा। भंडारा दोपहर 12 बजे से आरम्भ कर दिया जाएगा जो प्रभु इच्छा तक चलता रहेगा। गुफा समिति व शम्भू परिवार के सभी सदस्यों ने गुफा में प्राकृतिक शिवलिंग के दर्शन करने,भजन संध्या का आनन्द लेने व भण्डारे का प्रशाद ग्रहण करने की अपील सभी क्षेत्र वासियों से की है।
उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी सोलन केसी चमन ने जिला निर्वाचन विभाग के अधिकारियों तथा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम-2020 तथा मतदान केन्द्रों के युक्तिकरण के संबंध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता की। केसी चमन ने कहा कि भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रथम जनवरी, 2020 की अर्हता तिथि के अनुसार फोटोयुक्त मतदाता सूचियों का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण 15 अक्तूबर से 30 नवंबर, 2019 तक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 15 अक्तूबर से, 30 नवंबर, 2019 तक इस संबंध में दावे व आक्षेप प्राप्त किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि 15 दिसंबर, 2019 तक दावों एवं आक्षेपों का निपटारा किया जाएगा। प्रथम जनवरी, 2020 से 15 जनवरी, 2020 तक फोटोयुक्त मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। केसी चमन ने कहा कि मतदाता सूचियों को त्रुटिरहित बनाने के लिए भारत के निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 16 अगस्त से 30 सितंबर, 2019 तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। अभियान के प्रथम चरण में 16 अगस्त से मतदाता सूची में पाई जाने वाली त्रुटियों, दौरान दोहरे पंजीकरण की जांच एवं खराब गुणवत्ता की फोटो इत्यादि बदलने का कार्य किया जाएगा। इसके अतिरिक्त मतदाता इस अवधि में स्वयं मतदाता सूचियों में अपनी प्रविष्टियों की जांच व सत्यापन करेंगे तथा पंजीकरण से छूटे हुए पात्र मतदाताओं एवं मृत तथ स्थान छोड़ चुके मतदाताओं की सूची उपलब्ध करवाएंगे। उन्होंने कहा कि अभियान के दूसरे चरण में प्रथम सितंबर से 30 सितंबर, 2019 तक बूथ स्तर के अधिकारी घर-घर जाकर मतदाता सूची व प्रथम चरण में प्राप्त सूचना का सत्यापन करेंगे। इस अवधि में छूटे हुए मतदाताओं के नाम सूची में सम्मिलत किए जाएंगे व अपात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाएं जाएंगे। उन्होंने कहा कि मतदाता इस संबंध में पूर्ण जानकारी वोटर हेल्पलाइन एप तथा एनवीएस पोर्टल से प्राप्त कर सकते हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि मतदाता सूचियों को अद्यतन रखने में बूथ लेवल एजेंटों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार प्रत्येक बूथ पर बूथ लेवल एजेंट की प्रतिनियुक्ति की जानी अनिवार्य है। उन्होंने इस विषय में सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की मांग की। वर्तमान में जिला जिला के 557 मतदान केन्द्रों पर भारतीय जनता पार्टी के 543 तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 468 बूथ लेबल एजेंट हैं। अन्य मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों का कोई भी बूथ लेवल का एजेंट नहीं है। केसी चमन ने कहा कि निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मतदान केन्द्रों के युक्तिकरण का कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। मतदान केन्द्रों की सूची का प्रारूप प्रकाशित किया जा चुका है। यह जानकारी एवं निरीक्षण हेतु जिला निर्वाचन कार्यालय एवं सभी निर्वाचक पंजीकरण कार्यालयों में उपलब्ध है। उन्होंने आग्रह किया कि मतदान केन्द्रों की सूचियों के संबंध में आक्षेप एवं प्रस्तावनाएं 6 अगस्त, 2019 तक दाखिल की जा सकी हैं। इन पर सुनवाई निकट भविष्य में आयोजित की जाने वाली बैठक में की जाएगी। इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीविक्षाधीन अधिकारी डाॅ. निधि पटेल, नायब तहसीलदार निर्वाचन महेंद्र ठाकुर उपस्थित थे।
रोगी कल्याण समिति की बैठक का आयोजन एसडीएम अर्की विकास शुक्ला (अध्यक्ष रोगी कल्याण समिति )की अध्यक्षता में नागरिक चिकित्सालय कुनिहार में किया गया। बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा की गई और प्रस्ताव भी पास किए गए। बैठक में 2018-19 में किए गए कार्यों एवम खर्चों की समीक्षा की गई। 2018-19 में कुल 1075854 रू खर्च किए गए। वित्त वर्ष 2019- 20 के लिए 3845000 रु का अनुमानित बजट पारित किया गया। बैठक में सिविल हॉस्पिटल के पुराने भवन पर टीन चदर व हॉस्पिटल की चार दिवारी पर ग्रील लगाने के लिए बजट का प्रावधान ,हॉस्पिटल में जनरेटर व सीसी टीवी कैमरों के प्रावधान, संस्थान में जो तीन स्वयंसेवी कार्यरत है उनके लिए भी बजट का प्रावधान, 0 से 1 वर्ष के बच्चों के लिए प्रयोग होने वाली दवाइयां ,एक्स-रे मटेरियल, गर्भवती महिलाओं के लिए ट्रीटमेंट, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत मुफ्त चिकित्सा सेवाएं मुद्दों पर विशेष चर्चा की। इस बैठक में विकास शुक्ला अध्यक्ष रोगी कल्याण समिति /एसडीएम अर्की, डॉ राधा शर्मा बीएमओ अर्की, डॉक्टर मनीष मित्तल सचिव रोगी कल्याण समिति कुनिहार ,सुधीर कुमार,सुरेन्द्र सिंह ,शानिया चौहान ,अश्वनी कुमार,राकेश कुमार, प्रेमचंद प्रधान कोठी पंचायत ,सुधीर,सीमा महंत बीडीसी सदस्य,राजीव अंगिरस, लोकेंदर कंवर प्रेस सचिव सहित अन्य समिति के सदस्य मौजूद रहे।
भाजपा महिला मोर्चा अर्की मंडल ने शनिवार को से सदस्यता अभियान शुरू किया। इस अवसर पर कालेज में शिक्षा प्राप्त कर रही युवतियों को भाजपा का प्राथमिक सदस्य बनाया गया। इस अवसर पर महिला मोर्चा ने डिलीटल सदस्यता भी की। इस मोके पर महिला मोर्चा की पदाधिकारियों ने कहा कि पुरे विधानसभा क्षेत्र में हर बुथ पर महिलाओं को भाजपा का सदस्य बनाया जाएगा। महिला मोर्चा ने 3000 महिलाओं को सदस्य बनाए जाने का लक्ष्य रखा है। इस अवसर पर प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की सदस्य आशा परिहार व सोनिया ठाकुर, मंडल महिला मोर्चा की अध्यक्षा विनती मुकुल व महासचिव सरस्वती कश्यप मौजुद रहे।
प्रदेश पुलिस विभाग में आरक्षी पद पर भर्ती के लिए सोलन ज़िला की लिखित परीक्षा 11 अगस्त, 2019 को आयोजित की जाएगी। यह जानकारी पुलिस अधीक्षक सोलन मधुसूदन शर्मा ने दी। मधुसूदन शर्मा ने कहा कि यह लिखित परीक्षा 11 अगस्त, 2019 को प्रातः 10.00 बजे से एलआर ग्रुप ऑफ इंस्टीच्यूट(इंजीनियरिंग एण्ड टैक्नोलाॅजी) ओच्छघाट ज़िला सोलन में आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस लिखित परीक्षा में केवल वही अभ्यर्थी भाग ले सकेंगे, जिन्होंने 2 जुलाई 2019 से 6 जुलाई 2019 तक सोलन में आयोजित पुलिस भर्ती की शारीरिक परीक्षा उत्तीर्ण की है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि इस संदर्भ में सभी पात्र अभ्यर्थियों को उनके मोबाइल नंबर पर एसएमएस द्वारा सूचित कर दिया गया है। प्रवेश पत्र उनके द्वारा आवेदन पत्र में दर्शाए गए ई-मेल पते पर भेज दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि पात्र अभ्यर्थियों ने किसी अन्य व्यक्ति का मोबाइल नंबर अथवा ईमेल प्रयोग किया है तो उक्त व्यक्ति से संपर्क करके एसएमएस चैक कर लें और ईमेल से प्रवेश पत्र डाउनलोड कर लें। उन्होंने कहा कि यह कार्य 8 अगस्त, 2019 से पूर्व सुनिश्चित कर लें। मधुसूदन शर्मा ने कहा कि यदि किसी पात्र उम्मीदवार को प्रवेश पत्र न मिला हो तो वह 8 अगस्त, 2019 से पूर्व पुलिस अधीक्षक कार्यालय सोलन में संपर्क करें। उन्होंने कहा कि बिना प्रवेश पत्र के किसी भी उम्मीदवार को लिखित परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी व ऐसे उम्मीदवार को अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि लिखित परीक्षा में किसी भी प्रकार के इलैक्ट्राॅनिक उपकरण जैसे कि मोबाइल फोन, केलकुलेटर एवं इलैक्ट्राॅनिक वाॅच इत्यादि मान्य नहीं होंगे। अधिक जानकारी के लिए दूरभाष नंबर 01792-223836 पर संपर्क किया जा सकता है।
देवरा पंचायत के गांव जखौली में महिला मंडल जखौली की महिलाओं द्वारा बीडीसी सदस्य राकेश कुमार की अगुवाई में पौधरोपण किया गया । हनुमान मंदिर से भद्रकाली मन्दिर जखौली तक बनी सड़क के किनारे 50 पौधे रोपित किए गए। वहीं सड़क किनारे उगी झाड़ियों को भी काटा गया। बीडीसी सदस्य राकेश कुमार ने कहा कि जल संकट को दूर करने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए पौधरोपण करना बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी लोगों को आगे आना चाहिए। उन्होंने सभी से आग्रह किया वह स्वयं पौधरोपण कर उसकी सही से देखभाल कर अन्य लोगों को भी जागरूक करे। उन्होंने कहा की जल्द ही आगामी दिनों में पंचायत के अन्य वार्डो में भी पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस मौके पर वार्ड सदस्य रीता भारद्वाज, सत्या शर्मा, शर्मिला, मंगला शर्मा, कांता, निर्मला, बिमला, गीता व प्रोमिला,खेमराज सहित अन्य महिलाएं मौजूद रही ।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा सहकारिता मंत्री डाॅ. राजीव सैजल ने कसौली विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत जाबली के आदर्श राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला राजड़ी में जाबली को सुरक्षा कारणों से शीघ्र स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं। डाॅ. सैजल ने आज जाबली स्थित इस विद्यालय का निरीक्षण किया और निर्देश दिए कि छात्रों की सुरक्षा एवं शिक्षा के दृष्टिगत इस विद्यालय को समीप स्थित हिम प्रोसेस फ्रूट ग्रोवर मार्केटिंग कोऑपरेटिव सोसायटी के भवन में स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने फोरलेन कार्य में संलग्न कंपनी के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सोसायटी के भवन को तीन दिन के भीतर तैयार कर छात्रों को बैठने के उपयुक्त बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से इस विद्यालय भवन को अन्यत्र स्थानांतरित करना आवश्यक है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। डाॅ. सैजल तथा जिला प्रशासन एवं स्कूल प्रबंधन समिति ने सोसायटी के भवन का निरीक्षण किया तथा स्थानीय लोगों से चर्चा के उपरांत विद्यालय की कक्षाएं इस भवन में स्थानांतरित करने पर सहमति बनने के उपरांत यह निर्णय लिया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने उपायुक्त सोलन को निर्देश दिए कि राष्ट्रीय राजमार्ग के फोरलेन कार्य में संलग्न कंपनी को निर्देश दिए जाएं कि फोरलेन निर्माण कार्य में समूचे क्षेत्र के पारिस्थितिकीय संतुलन एवं भौगोलिक परिस्थितियों का ध्यान रखा जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय राजमार्ग के फोरलेन कार्य में प्राकृतिक जल स्त्रोतों का संरक्षण भी सुनिश्चित बनाया जाए। ग्राम पंचायत जाबली के प्रधान दुनीचंद धीमान ने डाॅ. सैजल एवं जिला प्रशासन को विद्यालय भवन सहित क्षेत्र की अन्य आवश्यकताओं के संबंध में अवगत करवाया। इस अवसर पर ग्राम पंचायत गुल्हाड़ी के प्रधान एवं क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण के सदस्य मदन मोहन मेहता, ग्राम पंचायत के अन्य सदस्य, उपायुक्त सोलन केसी चमन, पुलिस अधीक्षक मधुसूदन शर्मा, तहसीलदार कसौली कपिल तोमर, उपनिदेशक उच्च शिक्षा योगेंद्र मखैक, उप जिला शिक्षा अधिकारी डाॅ. चंद्रमोहन शर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
विद्युत उपमंडल भूमती के अंतर्गत बलि गांव डुमैहर,भूमती, बलेरा,जयनगर व मान गांव में 05 अगस्त 2019 को विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। यह जानकारी देते हुए सहायक अधिशाषी अभियंता विद्युत उपमंडल भूमती गौरव अधीर ने बताया कि विद्युत उपमंडल भूमती की लाइन में बिजली के आवश्यक रखरखाव हेतु प्रात 10:00 बजे से 6:00 बजे तक विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। उन्होंने सभी संबंधित लोगों से असुविधा हेतु सहयोग की अपील की है। उन्होंने सभी अनुभागों के उपभोक्ताओं को सूचित किया कि जिन्होंने अपने विद्युत बिल जमा नहीं करवाए हैं,वह आगामी 2 दिनों के अंदर अपना विद्युत बिल प्रातः10:00 बजे से 3:00 बजे तक जमा करवाएं अन्यथा किसी भी प्रकार की सूचना दिए बिना विद्युत सप्लाई काट दी जाएगी।
पाइनग्रोव स्कूल सुबाथू में पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस अंतर सदनीय प्रतियोगिता में चिनार, देवदार, ओक और टीक सदन के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सभी चार सदनों से कनिष्ठ और वरिष्ठ वर्ग में चार -चार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता का विषय 'हैकिंग कानूनी भी हो सकती है' रखा गया। देवदार सदन ने जीता ओवरआल खिताब दिव्यांशी बुंदेला के बेहतरीन प्रदर्शन के बुते देवदार सदन ने ये प्रतियोगिता अपने नाम की। जबकि टीक सदन दूसरे और चिनार व ओक सदन तीसरे स्थान पर रहे। प्रतियोगिता का ओवरआल खिताब भी देवदार सदन के ही नाम रहा। अंत में हेड टीचर देवेंद्र वर्मा ने सभी विजेता छात्रों को पुरुस्कृत किया। इस अवसर पर शिक्षकगण व सत्र मौजूद रहे।
हिमाचल प्रदेश में बारिश कहर बरपाने लगी है। बारिश ने प्रदेश को अब तक लगभग 300 करोड़ का नुक्सान पहुंचाया है। वहीं लोक निर्माण विभाग को सबसे अधिक 158 करोड़ 51 लाख और आईपीएच विभाग को 104 करोड़ चार लाख का नुकसान हुआ है। राज्य में 186 सड़कें बंद हैं। मंडी में सबसे अधिक 102 मार्ग अवरुद्ध हैं। इसके अलावा शिमला सर्किल में 47, हमीरपुर में 22 और कांगड़ा में 15 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। लोक निर्माण विभाग की मानें तो राज्य में बंद पड़ी 186 सड़कों मेें से 153 सड़कें जल्द ही आवाजाही के लिए बहाल होे जाएंगी। बारिश से मकानों को भी भारी नुकसान प्रदेश भर में बारिश से पक्के व कच्चे मकानों को नुकसान हुआ है। ऊना में बारिश से एक पक्का मकान गिरा है। वहीं, मंडी में तीन, हमीरपुर में दो,सोलन के जाबली में एक स्कूल, कांगड़ा में चार कच्चे मकानों कोे आंशिक नुकसान हुआ है। इसके अलावा कांगड़ा में दो कच्चे मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं। आईपीएच विभाग की 2516 योजनाएं प्रभावित राज्य में भारी बारिश होने से आईपीएच विभाग की 2561 योजनाएं प्रभावित चल रही है। राज्य में सबसे अधिक पेयजल परियोजनाएं सुंदरनगर में प्रभावित हैं। सुंदरनगर में 474 पेयजल परियोजनाएं प्रभावित चल रही हैं। सोलन मे 238 व कुल्लू में 201 और 238 योजनाएं प्रभावित हैं।
यहां पता लगाना मुश्किल, सड़क है या कीचड़ हिमाचल प्रदेश के ज़िला सोलन के कुमारहट्टी चौक में सड़क का हाल देखने वाला है। यहा यह समझ नहीं आ रहा है कि सड़क है या कीचड़। बारिश के कारण आसपास की मिट्टी सड़क पर फैल चुकी है। सड़क की ख़स्ता हालात यात्रियों खासकर वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। अकसर ऐसा होता है कि गीली मिट्टी में गाड़ियों के टायर फिसल जाते हैं जो किसी बड़े हादसे को रुप दे सकती है। बता दें कि सोलन के कुमारहट्टी में फ्लाईओवर का काम चल रहा है जो लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। इस फ्लाईओवर के निर्माण कार्य के चलते यहां घंटों जाम लग रहा है।
भक्तों का माता भंगायणी के ऊपर अटूट विश्वास है। उत्तरी भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में शामिल माँ भंगायनी का मंदिर हरिपुरधार में शिवालिक पर्वतमाला की तलहटी में स्थित है, जो हिमाचल प्रदेश में सिरमौर ज़िले की सीमा पर है। मंदिर समुद्र तल से लगभग 8000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। शिरगुल महादेव की एक देव बहन के रूप में जानी जाने वाली, माँ भंगायनी को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में पूजा जाने वाली सबसे शक्तिशाली देवी माना जाता है। मां भंगायणी मंदिर 1986 से पूर्व एक देवठी के रूप में थी। इसका जीर्णोद्धार 1986 से यहां मंदिर कमेटी ने शुरू किया। 1992 से 2000 के बीच यहां सक्रिय होकर मंदिर निर्माण का कार्य आरंभ किया गया। शिरगुल महाराज की बहन है भंगायणी माता बताते हैं कि भंगायणी माता शिरगुल महाराज की बहन है। माँ भंगायनी मंदिर का इतिहास चुरेश्वर महादेव (चूड़धार) से जुड़ा हुआ है। किंवदंतियों के अनुसार, शिरगुल महादेव को एक मुगल राजा द्वारा कैद किया गया था क्योंकि मुगल राजा को शिरगुल महादेव की आध्यात्मिक शक्तियों से डर था। बगद के राजा गुगा पीर ने उन्हें माता भंयानी के आशीर्वाद से जेल से बाहर निकलने में मदद की। शिरगुल महादेव के लिए मुगलों के कारावास से मुक्त होना बहुत मुश्किल था लेकिन उन्हें माता भंगायानी की मदद से बचाया गया था। तब से मां भंगायनी को शिरगुल महादेव की बहन के रूप में पूजा जाता है। भंगायणी माता शिरगुल महाराज की बहन है। माता भंगायणी मंदिर को लकड़ी और स्लेटनुमा पत्थर की शैली से नक्काशी के साथ निर्मित किया गया है। मुख्य सडक से करीब दो सौ मीटर हटकर मन्दिर की सीढियां शुरू होती हैं। स्थानीय व्यक्ति जो शिरगुल महाराज के दर्शन करने जाते हैं, वे भंगायणी माता के भी दर्शन अवश्य करते हैं। माता भंगायणी मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु माथ टेकने पहुंचते हैं। मंदिर में चैत्र नवरात्रि, अश्विन नवरात्रि, दशहरा, और दीपावली के त्योहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं। मंदिर सड़क मार्ग, हवाई मार्ग, रेल मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है।
ज़िला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा सोलन स्थित कल्याण भवन में विश्व स्तनपान सप्ताह पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की जन शिक्षा एवं सूचना अधिकारी शारदा सारस्वत ने की। उन्होंने कहा कि मां का दूध नवजात शिशु के लिए अमृत समान है। इसमें वे सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं जो कि शिशु के लिए विकास व वृद्धि के लिए आवश्यक होते हैं। उन्होंने कहा कि जन्म से लेकर 6 माह तक शिशु को केवल स्तनपान करवाया जाना चाहिए। शिशु के मानसिक व बौद्धिक विकास मां के दूध से होता है। मां का दूध सुपाच्य होता है और यह डायरिया, न्यूमोनिया और अस्थमा से बचाता है। उन्होंने कहा कि शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर केवल 45 प्रतिशत महिलाएं ही बच्चे को स्तनपान करवाती हैं। जन शिक्षा एवं सूचना अधिकारी ने कहा कि स्तनपान करवाना केवल शिशु के लिए ही नहीं बल्कि मां के लिए भी लाभदायक है। स्तनपान महिलाओं में स्तन कैंसर, गर्भाश्य कैंसर, दिल का दौरा और स्ट्रोक के जोखिम को कम करता है। उन्होंने कहा कि यह शरीर की चर्बी को भी कम करता है। स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को संतुलित भोजन करवाना चाहिए जिसमें उचित मात्रा में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाईड्रेट, खनिज पदार्थ और विटामिन हों ताकि बच्चे को भरपूर दूध मिल सके। इस अवसर पर मेहंदी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। प्रतियोगिता में नीना देवी प्रथम, बिट्टु द्वितीय तथा सोनिया तृतीय स्थान पर रही। नारा लेखन प्रतियोगिता में पुष्पा प्रथम, सुमन द्वितीय तथा ज्योति तृतीय स्थान पर रही।
बाल विकास परियोजना धर्मपुर में आंगनवाड़ी सहायिका के रिक्त पदों को भरने के लिए 28 अगस्त, 2019 को प्रातः 11 बजे बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय धर्मपुर के सभागार में वाक-इन-इन्टरव्यू (साक्षात्कार) आयोजित किए जाएंगे। यह जानकारी विभागीय प्रवक्ता ने दी। उन्होंने कहा कि इन पदों पर सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित मानदेय देय होगा। इच्छुक अभ्यर्थी बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय धर्मपुर के कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इन पदों के लिए वही महिला उम्मीदवार पात्र हैं जो सम्बन्धित आंगनवाड़ी केन्द्र के लाभान्वित क्षेत्र में प्रथम जनवरी 2019 को सामान्य रूप से रह रहे परिवार से सम्बन्ध रखती हो। उम्मीदवार की आयु 21 से 45 वर्ष के मध्य होनी चाहिए। आंगनवाड़ी सहायिका के लिए शैक्षणिक योग्यता आठवीं पास होनी चाहिए। सहायिका पद के लिए आठवीं पास शैक्षणिक योग्यता के उम्मीदवार उपलब्ध न होने की स्थिति में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पांचवी पास मान्य होगी। उन्होंने कहा कि इन पदों के लिए उम्मीदवार के परिवार की वार्षिक आय 35 हजार रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस संबंध में उम्मीदवार को तहसीलदार अथवा नायब तहसीलदार द्वारा जारी तथा प्रतिहस्ताक्षरित प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने कहा कि आवेदक को आवेदन पत्र के साथ आयु, शैक्षणिक योग्यता, जाति, अपंगता, अनुभव, हिमाचली, परिवार रजिस्टर की नकल व अन्य योग्यता प्रमाणपत्रों की प्रमाणित प्रतियां साक्षात्कार के समय या इससे पूर्व जमा करवाने होंगे। आय प्रमाण पत्र तहसीलदार अथवा नायब तहसीलदार या इनसे अधिकर स्तर के अधिकारी प्रतिहस्ताक्षरित होना चाहिए। उम्मीदवारों को साक्षात्कार के दिन इन सभी प्रमाणपत्रों की मूल प्रतियां अपने साथ लाना अनिवार्य है। साक्षात्कार की तिथि बारे अलग से सूचित नहीं किया जाएगा। अधिक जानकारी के लिए इच्छुक उम्मीदवार नजदीक के आंगनवाड़ी केन्द्र अथवा बाल विकास परियोजना अधिकारी धर्मपुर के कार्यालय दूरभाष नम्बर 01792-264037 पर सम्पर्क कर सकते हैं।
परवाणू के गाब्रिएल रोड तथा रेहड़ी मार्किट में अवैध खोखा धारकों को कुछ दिन की मोहल्लत दी गई है। इस दौरान खोखा धारक खुद नई जगह पर विस्थापित होंगे। दरअसल न्यायपालिका के आदेशानुसार हिमुडा को परवाणू के गाब्रिएल रोड तथा रेहड़ी मार्किट में अवैध खोखों को हटाने के निर्देश जारी किये गए थे । न्यायपालिका के आदेश की पालना करने के लिए शुक्रवार को हिमुडा, नगर परिषद के अधिकारी /कर्मचारी व तहसीलदार अवैध कब्जों को हटाने के लिए मौके पर पहुंचे। खोखा धारकों ने हिमुडा से मांग की कि उन्हें हटाने से पहले विस्थापन के लिए स्थान दिया जाये ताकि वह अपने खोखे वहां स्थानांतरित कर सकें। स्थिति का जायजा लेने के लिए न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डा. राजीव सैजल भी मौके पर पहुंचे जहाँ खोखा धारकों ने उनके सामने अपनी समस्या रखी। इसके बाद खोखा धारकों के साथ पीडब्ल्यूडी रेस्ट हॉउस में बैठक की गई , जिसमें खोखा धारकों ने अपना पक्ष रखा। खोखा धारकों ने कहा कि हम स्वयं खोखा हटाने को तैयार हैं परन्तु हमें वेंडिंग कमेटी द्वारा अभी तक विस्थापन का स्थान नहीं दिया गया है। इस बारे में हिमुडा के अधिकारीयों ने जानकारी दी कि खोखों के लिए हिमुडा द्वारा विभिन्न स्थानों पर नगर परिषद् को जगह चिन्हित करा दी गयी है। वहीँ नगर परिषद् के अधिकारीयों ने बैठक में बताया कि जो जगह हिमुडा द्वारा दी गयी है वह अभी विस्थापन के लिए ठीक नहीं है , उन जगहों को पहले समतल करना होगा तब वहां खोखे लगाए जा सकते हैं । तमाम पक्षों को सुनने के बाद डा. सैजल ने कहा कि न्यायपालिका के आदेशों की अवहेलना नहीं की जा सकती परन्तु गरीबों की समस्याओं को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। इसलिए नगर परिषद् जल्द से जल्द खोखा धारकों को जगह दे ताकि बिना किसी नुकसान के खोखा धारक विस्थापन कर सकें व न्यायपालिका के आदेश को भी पूरा किया जा सके। 2-3 दिन में जगह उपलब्ध करवाएगी नगर परिषद् नगर परिषद् के कार्यकारी अधिकारी सुधीर शर्मा ने कहा कि हिमुडा द्वारा जो स्थान चिन्हित किया गया है उसे समतल कर खोखा लगाने लायक बनाया जायेगा, जिसके लिए दो या तीन दिन का समय लगेगा। इसके बाद खोखा धारक सव्य अपने खोखे वेंडिंग जोन में विस्थापित कर सकेंगे।
सोलन के नौणी गांव में वीरवार रात को कुछ घरों की दीवारों में अचानक विद्युत प्रवाह होने से सनसनी फैल गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार नौणी के कुछ घरों की दीवारों में अचानक विद्युत प्रवाह होने के चलते कुछ लोगों को करंट के झटके लगे। इसी दौरान करंट की चपेट में आने से पशुशाला में बंद एक गाय की मौत भी हो गई। फिर बड़ी मुश्किल से लोगों ने बिजली आपूर्ति को काट कर पशुशाला में बांधे गए बाकी पशुओं को बाहर निकाला। इस दौरान लोगों को कई दफा करंट के झटके लगे। गनिमत इस बात की रही कि समय रहते ही बिजली को बंद करवा दिया गया और इस तरह एक बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय निवासियों ने बिजली विभाग से अपील करते हुए कहा कि वह इसे जल्द से जल्द व्यवस्थित करे ताकि यहां कोई अप्रिय घटना नहीं घटे।
108 एंबुलेंस में करवाए गए 1043 प्रसव सोलन जिला में 108 एंबुलेंस सेवा के माध्यम से इस वर्ष जून माह तक विभिन्न प्रकार की आपाताकालीन सेवाओं में 1 लाख 12 हजार 272 रोगियों को आपातकालीन स्थिति में प्रदान की गई। इस अवधि के दौरान पुलिस द्वारा सूचित 4325 आपात मामलों, अग्निशमन के 1373 आपात मामलों तथा चिकित्सा आपाताकाल के एक लाख 6 हजार 574 मामलों में सेवाएं प्रदान की गई। आपाताकालीन चिकित्सा तकनीशियन (ईएमटी) द्वारा 1043 प्रसव एंबुलेंस में ही करवाए गए। ये जानकारी डीसी सोलन केसी चमन ने जीवीके ईएमआरआई 108 राष्ट्रीय आपाताकालीन एंबुलेंस सेवा के संबंध में आयोजित एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी। डीसी ने कहा कि सोलन जिला में 11 पुरानी 108 एंबुलेंस को बदला जा चुका है तथा शीघ्र ही 5 अन्य पुरानी 108 एंबुलेंस को भी बदल दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला के सभी बस अड्डों तथा सभी बसों में 108 सेवा के स्टीकर चिपकाएं जाएं और लोगों को इस सेवा के विषय में प्रचार-प्रसार के माध्यम से जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि अगस्त 2019 के अंत तक धर्मपुर, जाबली, चेवा, सलोगड़ा तथा राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर स्थित अन्य ग्राम पंचायतों में त्वरित राहत प्रणाली (आईआरएस) से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया जाए। उन्होंने अगली बैठक से पूर्व पुलिस, अग्निशमन तथा 108 एंबुलेंस सेवा की सामूहिक माॅकड्रिल करवाने के निर्देश भी दिए।
ग्राम पंचायत आंजी और शामती के करीब आधा दर्जन गावों को जोड़ने वाली संपर्क सड़क खस्ताहाल है। कीचड़ से लबालब इस रास्ते में सड़क का नामोनिशान तक नहीं बचा है। करीब 200 परिवार इसी रास्ते से होकर गुजरते है और इस मार्ग पर दुर्घटना होना आम हो चूका है। आये दिन कोई न कोई दुपहिया वाहन यहाँ गिरता है या कीचड़ में फंस जाता है। इस मार्ग से शमलेच, मझोटी, बग्गर, बड़ल्याना, चिलड़ी, चिल्ला गावों के सड़कों लोग रोज गुजरते है। लम्बे समय से इस मार्ग की हालत ऐसी ही है और स्थानीय लोग इसे दुरुस्त करने की मांग करते रहे है, किन्तु अब तक इस दिशा में कोई उचित कदम नहीं उठाया गया वादा किया, पर पूरा नहीं किया 2017 के विधानसभा चुनाव में जब नेता इस क्षेत्र में वोट मांगने पहुंचे तब भी लोगों ने इस मार्ग को दुरुस्त करने की मांग उठाई थी। नेताओं ने वादे तो किये लेकिन उसे पूरा नहीं किया। इसी तरह हालहीं में हुए लोकसभा चुनाव में भी स्थानीय नेताओं ने इस मार्ग को जल्द दुरुस्त करवाने का वादा किया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कुछ नहीं हुआ। इस सड़क की खस्ताहालत को लेकर लोगों में भारी रोष है। खासतौर से नेताओं के प्रति। विधायक धनीराम शांडिल को भी लोग इस बारे में कई बार अवगत करवा चुके है लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। करीब दो दशक पूर्व इस सड़क का निर्माण हुआ था लेकिन सम्बंधित विभाग ने कभी ही इसे दुरुस्त करने की जहमत नहीं उठाई।
हिमाचल प्रदेश में मौसम फिर से रौद्र रूप दिखाएगा। राज्य के मैदानी इलाकों सहित शिमला, कुल्लू, सोलन, सिरमौर, मंडी व चंबा के कुछ स्थानों पर तीन व चार अगस्त को भारी बारिश होगी। विभाग ने राज्य के इन क्षेत्रों में भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग की मानें तो राज्य मे सात अगस्त तक मौसम खराब बना रहेगा। इस दौरान राज्य के अनेक स्थानों पर बारिश होगी। जो राज्य में जनता की दिक्कतों को बढ़ा सकता है। बारिश से अधिकतम तापमान में एक से चार डिग्री तक की गिरावट रिकार्ड की गई है। सोलन के अधिकतम तापमान में सबसे अधिक चार डिग्री की गिरावट आंकी गई है। नाहन, भुंतर के तापमान में तीन, चंबा, डलहौजी, सुदंरनगर, ऊना व केलांगं के तापमान में एक डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के निदेशक डा. मनमोहन सिंह ने बताया कि राज्य के मैदानी व मध्यम ऊचांई वाले क्षेत्रों में तीन व चार अगस्त को भारी बारिश होगी। सात अगस्त तक मौसम खराब बना रहेगा।
भारत वर्ष में ‘कटहल’ की खेती अनिवार्य होगी। हिमाचल में भी 500 करोड़ के बागबानी प्रोजेक्ट में कटहल की खेती को शामिल करने की योजना पर व्यापक मंथन चल पड़ा है। देश व प्रदेश में किसानों की आय को दो गुना करने की राष्ट्रीय महत्त्वाकांक्षी योजना को कटहल फल की मार्फत त्वरित गति से पूरा करने का खाका तैयार किया जा रहा है। बागबानी विशेषज्ञों ने कटहल की खेती के व्यावसायिक प्रयोग पर अपने अनुसंधानित विचार सरकार को प्रेषित किए हैं। पद्मश्री से सम्मानित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व अध्यक्ष केएल चड्डा के नेतृत्व में गठित राष्ट्र स्तरीय छह सदस्यीय कमेटी ने भी कटहल की खेती से किसानों की पैदावार को डबल करने के सुझाव लोकसभा की कमेटी को दिए हैं। वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के मुताबिक बागबानी वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के मुताबिक देश के सभी 29 प्रदेशों में कटहल फल को उगाया जाता है। किसी राज्य में इसकी बहुतायत में पैदावार होती है तो किसी प्रदेश में शौकिया तौर पर इस फल को उगाया जाता है। कटहल किसी भी प्रकार की मिट्टी व जलवायु में 4500 फुट की ऊंचाई में उगाया जा सकता है। देश में 29 में से सिर्फ ओडिशा व तमिलनाडु में ही कटहल की व्यावसायिक रूप से खेती होती है। पूरे देश को 56 सेक्टरों में बांटकर इस फसल की प्रमाणिकता को लेकर सर्वे किया जा चुका है तथा कुल 13 कृषि केंद्रों में इस बाबत व्यापक तौर पर रिसर्च कार्य चल रहा है। कटहल फल की खासियत हिमाचल के सोलन, बिलासपुर, मंडी, हमीरपुर, ऊना इत्यादि मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कटहल की फसल को उगाने के लिए उपयुक्त माहौल है। कटहल फल की खासियत यह है कि एक वृक्ष सीजन से 200 फल तक दे देता है। बाजार में इसकी कीमत 30 रुपए किलो से लेकर 60 रुपए प्रति किलो तक है। व्यावसायिक खेती के रूप में इस्तेमाल व उचित देख-रेख से एक वृक्ष 20 से 25 हजार का फल एक साल में दे सकता है। कटहल में आयरन, कैल्शियम, पोटाशियम व प्राकृतिक फाइबर की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। इसके साथ-साथ इसके लिए किसी भी प्रकार के स्प्रे व दवाइयों की आवश्यकता नहीं पड़ती है। भूमि में जड़ों की अधिक गहराई होने के कारण भूमि कटाव को रोकने में भी यह वृक्ष सहायक है। कटहल की खेती को शुरू करने की सिफारिशें भेजी गई केंद्र सरकार के पास राष्ट्रीय स्तर पर गठित कमेटी क्यूआरटी के सदस्य व नौणी विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर डा. विजय सिंह ठाकुर ने कहा कि देश भर में कटहल की व्यावसायिक खेती को शुरू करने की सिफारिशें केंद्र सरकार के पास भेजी गई हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में 500 करोड़ के बागबानी प्रोजेक्ट में कटहल की खेती को शामिल करने के भी उन्होंने सुझाव भेजे हैं। डा. विजय सिंह ठाकुर के अनुसार प्रदेश में परंपरागत फसलों के साथ कटहल की व्यावसायिक खेती को शुरू करके निश्चित तौर पर आगामी चार-पांच वर्षों में किसानों की आय को दोगुना किया जा सकता है। बंदर भी नहीं करते नुकसान कटहल फल की एक खास विशेषता यह है कि इसे बंदर नहीं खाते क्योंकि बाहर से यह खुरदरा(खसरा) होता है। दक्षिण भारत में इसे जैक फ्रूट कहा जाता है।
यहाँ माँ शक्ति की नौ ज्वालाएँ प्रज्ज्लित हैं और माना जाता है कि देवी सती की जीभ इसी जगह गिरी थी। हम बात कर रहे है ज्वाला माता मंदिर की। ज्वाला देवी का मंदिर देवी के 51 शक्ति पीठों में से एक है।ज्वाला देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा से 30 किलो मीटर दूर स्तिथ है। इस मंदिर को ज्वालामुखी मंदिर (Jwalamukhi Mandir) के नाम से भी जाना जाता है। यह हिन्दू धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थानों में शामिल है। इस मंदिर का प्राथमिक निमार्ण राजा भूमि चंद के करवाया था। बाद में महाराजा रणजीत सिंह और राजा संसारचंद ने 1835 में इस मंदिर का पूर्ण निमार्ण कराया। यहाँ धधकती ज्वाला बिना घी, तेल दीया और बाती के लगातार जलती रहती है। यह ज्वाला पत्थर को चीरकर बाहर निकलती आती है। ज्वाला देवी की उत्पत्ति से संबंधित कई कथाएं लोगों के बीच बहुत प्रचलित हैं। प्रचलित कथाएं भक्त गोरखनाथ के इंतज़ार में जल रही ज्वाला ज्वाला माता से संबंधित गोरखनाथ की कथा इस क्षेत्र में काफी प्रसिद्ध है। कथा है कि भक्त गोरखनाथ यहां माता की आरधाना किया करता था। एक बार गोरखनाथ को भूख लगी तब उसने माता से कहा कि आप आग जलाकर पानी गर्म करें, मैं भिक्षा मांगकर लाता हूं। माता आग जलाकर बैठ गयी और गोरखनाथ भिक्षा मांगने चले गये। इसी बीच समय परिवर्तन हुआ और कलियुग आ गया। भिक्षा मांगने गये गोरखनाथ लौटकर नहीं आये। तब ये माता अग्नि जलाकर गोरखनाथ का इंतजार कर रही हैं। मान्यता है कि सतयुग आने पर बाबा गोरखनाथ लौटकर आएंगे, तब-तक यह ज्वाला यूं ही जलती रहेगी। मान्यता है कि पवित्र देवी नीली लौ के रूप में खुद प्रकट हुईं थीं और यह देवी का चमत्कार ही है कि पानी के संपर्क में आने पर भी ये लौ नहीं बुझती। “पंजन पंजवन पंडवन तेरा भवन बान्या” इस मंदिर के पीछे एक और पौराणिक कथा प्रचलित है। कथा यह है कि, कई हजार साल पहले एक चरवाहे ने पाया कि उसकी एक गाय का दूध नहीं बचता था। एक दिन उसने गाय का पीछा किया और वहां एक छोटी सी लड़की को देखा, जो गाय का पूरा दूध पी जाती थी। उन्होंने राजा भूमि चंद को इसकी सूचना दी, जिन्होंने अपने सैनिकों को पवित्र स्थान का पता लगाने के लिए जंगल में भेजा, जहां मा सती की जीभ गिरी थी क्योंकि उनका मानना था कि छोटी लड़की किसी तरह देवी का प्रतिनिधित्व करती थी। कुछ वर्षों के बाद, पहाड़ में आग की लपटें पाई गईं और राजा ने इसके चारों ओर एक मंदिर बनाया। यह भी कल्पित है कि पांडवों ने इस मंदिर का दौरा किया और इसका जीर्णोद्धार किया। लोक गीत “पंजन पंजवन पंडवन तेरा भवन बान्या” इस विश्वास की गवाही देता है। अकबर क चढ़ाया छत्र मां ने नहीं किया कबूल मुगल बादशाह अकबर और देवी मां के परम भक्त ध्यानु भगत से जुड़ी कथा खास प्रचलित है। हिमाचल निवासी ध्यानु भगत काफी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ माता के दर्शन के लिए जा रहा था। एंटनी बड़ी संख्या देखकर सिपाहियों ने चांदनी चौक (दिल्ली) पर उन्हें रोक लिया और बंदी बनाकर अकबर के दरबार में पेश किया। बादशाह ने पूछा, तुम इतने आदमियों को साथ लेकर कहां जा रहे हो? ध्यानू ने उत्तर दिया, मैं ज्वाला माई के दर्शन के लिए जा रहा हूं। मेरे साथ जो लोग हैं, वह भी माताजी के भक्त हैं और यात्रा पर जा रहे हैं। अकबर ने कहा यह ज्वाला माई कौन है, वहां जाने से क्या होगा। ध्यानू ने कहा कि ज्वाला माई संसार का पालन करने वाली माता हैं। उनका प्रताप ऐसा है उनके स्थान पर बिना तेल-बत्ती के ज्योति जलती रहती है। हम लोग प्रतिवर्ष उनके दर्शन जाते हैं। इस पर अकबर ने कहा, अगर तुम्हारी बंदगी पाक है तो देवी माता अवश्य तुम्हारी इज्जत रखेगी। इम्तहान के लिए हम तुम्हारे घोड़े की गर्दन अलग कर देते हैं, तुम अपनी देवी से कहकर उसे दोबारा जिंदा करवा लेना। इस प्रकार, घोड़े की गर्दन काट दी गई। ध्यानू ने बादशाह से एक माह की अवधि तक घोड़े के सिर व धड़ को सुरक्षित रखने की प्रार्थना की। अकबर ध्यानू की बात मानते हुए उसे आगे की यात्रा की अनुमति दे दी। ध्यानु साथियों के साथ माता के दरबार में पहुंचा। उसने प्रार्थना की कि मातेश्वरी आप अन्तर्यामी हैं। बादशाह मेरी भक्ति की परीक्षा ले रहा है, मेरी लाज रखना, मेरे घोड़े को अपनी कृपा व शक्ति से जीवित कर देना। माना जाता है कि अपने भक्त की लाज रखते हुए मां ने घोड़े को फिर से जिंदा कर दिया। यह सब कुछ देखकर बादशाह अकबर हैरान हो गया। इसके बाद अहंकारी अकबर ने अपनी सेना के साथ मंदिर की तरफ चल पड़ा। मंदिर पहुंचने पर सेना से मंदिर में पानी डलवाया, लेकिन माता की ज्वाला बुझी नहीं। तब जाकर उसे मां की महिमा का यकीन हुआ। उसने माता के आगे सिर झुकाया और सोने का छत्र चढ़ाया, लेकिन माता ने वह छत्र कबूल नहीं किया। कहा जाता है कि वह छत्र गिर कर किसी अन्य पदार्थ में परिवर्तित हो गया। जिसे आज भी मंदिर में देखा जा सकता है। ज्वालामुखी मंदिर को जोता वाली का मंदिर और नगरकोट भी कहा जाता है। ज्वाला देवी मंदिर वास्तुकला की एक इंडो-सिख शैली का अनुसरण करती है। ज्वाला देवी मंदिर एक लकड़ी के मंच पर बनाया गया है और शीर्ष पर एक छोटा गुंबद है। मंदिर के गुंबद और शिखर को सोने से ढका गया था जिसे महाराजा रणजीत सिंह ने उपहार में दिया था। मुख्य द्वार से पहले एक बड़ा घंटा है, इसे नेपाल के राजा ने प्रदान किया था। कालीधर पर्वत की शांत तलहटी में बसे इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहाँ देवी की कोई मूर्ति नहीं है। यहाँ पर पृथ्वी के गर्भ से नौ अलग अलग जगह से ज्वाला निकल रही है। इन नौ ज्योतियां को महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यावासनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका, अंजीदेवी के नाम से जाना जाता है। मंदिर में विशालकाय चाँदी के दरवाज़े हैं। इसका गुंबद सोने की तरह चमकने वाले पदार्थ की प्लेटों से बना है। पूजा के लिए मंदिर का आंतरिक हिस्सा चौकोर बनाया गया है। मौसम के अनुसार मंदिर के खुलने और बंद होने के समय में बदलाव कर दिया जाता है। गर्मियों में जहां मंदिर सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक खुलता है, वहीं सर्दी के दिनों में सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक दर्शन के लिए खुलता है। भक्त अपनी भक्ति की निशानी के रूप में देवी को रबड़ी, मिश्री, चुनरी, दूध, फूल और फल अर्पित करते हैं। यहां एक कुण्ड में पानी खौलता हुआ प्रतीत होता है जबकि छूने पर कुंड का पानी ठंडा लगता है। मंदिर में पुजारियों द्वारा की जाने वाली आरती मंदिर का मुख्य आकर्षण है। इस मंदिर में दिन के दौरान पांच आरती और एक हवन किया जाता है। मुख्य हॉल के केंद्र में संगमरमर से बना एक बिस्तर है जिसे चांदी से सजाया गया है।
Assorted minds, big and small, continue to rack their brains to interpret the results of the 2019 Lok Sabha elections. There is virtually a spate of opinions which widely diverge. Undoubtedly the BJP, led by the Narendra Modi-Amit Shah duo, had a cake-walk in these elections. Its landslide victory in large parts of the country is unprecedented in ways more than one. So far no non-Congress government was ever repeated; it has taken a quantum jump this time. Jubilation in its ranks is fully justified. Let there be no mistake about it. Let us not miss the wood for the trees: the Hindu Rashtravadi forces, spearheaded by the RSS of which the BJP is the political wing, are in absolute control of the state power at the level of the Union of India, that is, Bharat. As is well-known, the RSS, since its inception in 1925, has been striving first to “Militarise Hindus, Hinduise India” and later establish a Hindu Rashtra in the country. It was exactly at that period in the history of our country when Mahatma Gandhi had emerged as the undisputed leader of the Indian National Congress founded four decades earlier. Under his leadership the party was able to bring together all sections of the people, irrespective of religion, creed, colour, caste, region etc. It became the mainstream organisation to lead the masses to achieve independence from the British colonial rule. Nationalism was its pantheon which commanded unqualified loyalty and dedication of all and sundry in the party. Right from the beginning, the RSS was, of course, successful in dividing the Hindus in particular along Sanghi Hindus and non-Sanghi Hindus. But non-Sanghi Hindus were not necessarily anti-Sanghi ones. That was true of some of the prominent leaders in the Indian National Congress also. The glaring examples are Madan Mohan Malaviya and Lala Lajpat Rai. Both of them happened to be the Presidents of the Indian National Congress at one point of time. Such leaders continued to be present even under the stewardship of Jawaharlal Nehru and Indira Gandhi. What was actually needed was the projection of such stalwarts as the Nationalist Hindus against Hindu Nationalists. Nationalism in post-independence India required an altogether different orientation for the reconstruction of the country and the rejuvenation of her people. Jawaharlal Nehru did his best to accomplish that during his lifetime. His successors, however, forgot his warning that the RSS was the biggest threat to the unity and integrity of the nation. What we witnessed in the 2014 and 2019 elections did not happen all of a sudden. Its formal beginning had been made in 1967 when Samyukt Vidhayak Dal governments were formed in more than half of the then existing States of the Union of India. The SVDs were constituted of mainly the Bharatiya Jan Sangh, the earlier version of the BJP, the Socialists and the Communists. This experiment was done at the call of Dr Rammanohar Lohia, a strong Socialist leader. As a matter of fact it was he who propounded the theory of anti-Congressism. Later it became the most popular political line of all the major parties. It suited most the Jan Sanghis but the Communists were not left behind because a trend among them had been visible since 1942 during the period of the ‘Quit India’ movement and later followed by B.T. Ranadive, one-time CPI General Secretary, in 1948. In the meantime there was hardly any political party which did not join hands with the BJP to defeat the INC. Just like the BJP the Communists of all hues regarded the Congress as the main enemy. To cite a couple of examples: The CPM-led Left Front and BJP joined hands to install the Janata Dal-led V.P. Singh Government in 1989 while in 2012, not far from 2014, the CPIs, CPM and BJP’s top leaders were seen embracing one another at Jantar Mantar, New Delhi during a protest rally against the INC-led UPA Government of Dr Manmohan Singh. This cooperation continued until the BJP Government was placed safely at Delhi. The Indian National Congress can be held guilty for inadequate appreciation of the RSS threat and inept leadership to combat it. That was why it continued to yield space to Right reactionary nationalism and miserably failed to prevent the BJP from coming to power at the Centre. It did make efforts to wean away some of the parties from the anti-Congress line and did succeed also.The example of the UPA Government between 2004-2014 is an example in point. The Communists, nonetheless. were the real facilitators of the process throughout their history. There was, however, one exception. The United Communist Party of India, rather the Unknown Communist Party of India, formed in 1989 under the leadership S.A. Dange and Mohit Sen, had consistently maintained that the RSS was the real enemy of our country and her people. With the decimation of the Congress and the elimination of the Communists, the BJP might feel safe and secure but the country is on the brink of disintegration. The nation is facing that future both horizontally and vertically. The concept of a Hindu Rashtra is self-destructive. A part claiming to be the total whole is deceptive and illusory while the part poised against the whole is suicidal. Besides nobody can stop the claim of Sikh Rashtra, Christian Rashtra and another Muslim Rashtra et al. There is definitely space for preventing the BJP from reaching its goal of establishing a Hindu Rashtra if, and this is a big IF, the nationalists transcending all political boundaries join heads and constitute a Front from the Panchayat and Municipal to the National level to expose the implications of the Hindu Rashtra in general and the way Rashtravad is being pushed by the Hindu Samrat, Narendra Modi. Nationalists everywhere have ample material knowledge and material to do so. No political party, the least, the Indian National Congress, alone can save the country from the menace posed by the Mohan Bhagwat-Narendra Modi-Amit Shah trio. Hargopal Singh is a Member, Political Committee, United Communist Party of India. This article is written by him and it is his personal opinion.
अंबुजा सीमेंट फाउंडेशन प्राइवेट आईटीआई दाड़लाघाट में केंपस प्लेसमेंट आयोजित किया गया। इसमें हीरो मोटो कॉपर्स लिमिटेड नीमराना ज़िला अलवर राजस्थान की कंपनी ने साक्षात्कार लिए। इस दौरान हिमाचल के विभिन्न जिलों से आईटीआई पास कर चुके विद्यार्थी व वर्तमान में अंतिम सेमेस्टर के एग्जाम दे रहे विद्यार्थी व वर्तमान में छात्रों ने भाग लिया। आईटीआई के प्लेसमेंट अधिकारी विनोद वर्मा ने बताया कि कंपनी को फिटर मकैनिक,इलेक्ट्रॉनिक्स, कोपा इलेक्ट्रिशियन इत्यादि की जरूरत के अनुसार साक्षात्कार व लिखित परीक्षा ली गई। इसमें हरियाणा, लखनऊ, मुजफ्फरपुर, करनाल, सिरमौर, कालका व मुरादाबाद से भी छात्र उतीर्ण हुए। इस अवसर पर लगभग 220 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। जो छात्र चयनित होंगे उन्हें ₹13500 मासिक दिए जाएंगे। इसके अलावा अन्य सुविधाएं जैसे पीएफ,ईएसआई व खाने में विशेष छूट का प्रावधान है। कंपनी को 150 विद्यार्थियों की जरूरत है। आईटीआई के प्लेसमेंट अधिकारी विनोद वर्मा ने बताया कि एचआर पुनीत हीरो मोटो कॉपर्स लिमिटेड ने कहा कि इस आईटीआई में बच्चों का व्यवहारिक ज्ञान अच्छा है, जिसके आधार पर इनका चयन किया गया है।संस्थान के प्रधानाचार्य राजेश शर्मा ने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के कैंपस इंटरव्यू का आयोजन 6 महीने में एक बार जरूर किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर घर पर ही मुहैया हो जाएंगे।
प्रदेश सरकार ने समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को गम्भीर रोग की स्थिति में त्वरित सहायता पंहुचाने के उद्देश्य से ‘सहारा’ योजना आरम्भ हो गई है। योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के रोगियों को शीघ्र सहायता प्रदान की जाएगी। सहारा योजना पूरे प्रदेश में 15 जुलाई, 2019 से आरम्भ कर दी गई है। योजना के तहत कैंसर, पार्किंसनस रोग, लकवा, मस्कुलर डिस्ट्राफी, थैलेसिमिया, हैमोफिलिया, रीनल फेलियर इत्यादि ये ग्रस्त रोगियों को वित्तीय सहायता के रूप में 2000 रुपए प्रतिमाह प्रदान किए जाएंगे। योजना के तहत किसी भी आयुवर्ग का इन रोगों से ग्रस्त रोगी आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकता है। इस योजना के तहत बीपीएल परिवार से सम्बन्धित रोगियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। रोगी को अपना चिकित्सा सम्बन्धी रिकाॅर्ड, स्थाई निवासी प्रमाण पत्र, फोटोयुक्त पहचान पत्र, बीपीएल प्र्रमाण पत्र अथवा पारिवारिक आय प्रमाण पत्र तथा बैंक शाखा का नाम, अपनी खाता संख्या, आईएफएससी कोड से सम्बन्धित दस्तावेज प्रदान करने होंगे। चलने-फिरने में असमर्थ रोगी के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी जीवित होने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। सहारा योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र रोगी को अपना आवेदन सभी दस्तावेजों सहित मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में जमा करवाना होगा। आशा कार्यकर्ता व बहुदेशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी रोगी के सभी दस्तावेज खण्ड चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में जमा करवा सकते हैं। खण्ड चिकित्सा अधिकारी इन दस्तावेजों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय को प्रेषित करेंगे। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेेदन पत्र जिला स्तर के अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा हेल्थ वेलनेस केन्द्रों में 03 अगस्त, 2019 से उपलब्ध होंगे। जिला चिकित्सा अधिकारी सोलन डाॅ. आर.के. दरोच ने सहारा योजना के विषय में अधिक जानकारी देते हुए कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना से जिला के सभी लोगों को अवगत करवाने के लिए विभाग ने आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर जागरूक बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सहारा योजना के तहत पात्र रोगियों को 2000 रुपए प्रतिमाह की वित्तीय सहायता आरटीजीएस के माध्यम से ही उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि सहारा योजना के विषय में पूरी जानकारी प्राप्त करें ताकि आवश्यकता के समय विभिन्न गम्भीर रोगों से पीड़ित रोगियों के परिजनोें को जानकारी देकर लाभान्वित किया जा सके। उन्होंने कहा कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी सोलन के कार्यालय के कक्ष संख्या 132 में योजना के सम्बन्ध में सम्पर्क किया जा सकता है। डाॅ. आर.के. दरोच ने कहा कि सहारा योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने एवं उनकी देखभाल की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।
राज्यसभा में बुधवार को मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक, 2019 पारित हो गया। यह न केवल एक मोटर वाहन अधिनियम है, बल्कि एक सड़क सुरक्षा बिल भी है। इस बिल का मकसद सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है, इसके लिए नियमों को और कड़ा किया गया है। वहीं जुर्माने में भी वृद्धि की गई है। जानिए क्या है मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक, 2019 में यातायात नियमों और विनियमों के उल्लंघन के लिए न्यूनतम जुर्माना 100 रुपए से बढ़ाकर 500 रुपए कर दिया गया है। कई अपराधों के लिए अधिकतम जुर्माना 10,000 रुपए तय किया गया है। बिना लाइसेंस के वाहन चलाने के मामले में जुर्माना 500 रुपए से बढ़ाकर 5,000 रुपए कर दिया गया है। सीट बेल्ट नहीं पहनने पर 1,000 रुपए का जुर्माना लगेगा। यह अब तक केवल 100 रुपए था। शराब पीकर वाहन चलाने के मामलों में जुर्माना 2,000 रुपए से 10,000 रुपए तक का है। खतरनाक ड्राइविंग के लिए जुर्माना 5,000 रुपए है। इमरजेंसी वाहनों को पास नहीं देने पर 10 हजार रुपए जुर्माना के रूप में लगेगा। पिछले कानून के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं था। ओवर-स्पीडिंग के मामलों में चालक को हल्के मोटर वाहनों जैसे कारों के लिए 1,000 रुपए और भारी वाहनों के लिए 2,000 रुपए का जुर्माना देना होगा। रेसिंग में लिप्त पाए जाने पर चालक को 5,000 रुपए का जुर्माना देना होगा। यदि आपके वाहन का बीमा कवरेज समाप्त हो गया है और आप अभी भी इसे चला रहे हैं, तो आपको 2,000 रुपए का जुर्माना देना होगा। जुर्माने में हर साल 10 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। मौजूदा कानून के तहत हिट-एंड-रन मामलों में क्षतिपूर्ति 25,000 रुपए है। इसे बढ़ाकर 2 लाख रुपए कर दिया गया है। चोटों के मामलों में, मुआवजा 12,500 रुपए से बढ़ाकर 50,000 रुपए कर दिया गया है। सभी सड़क उपयोगकर्ताओं को अनिवार्य बीमा कवरेज और सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा प्रदान करने के लिए केंद्रीय स्तर पर एक मोटर वाहन दुर्घटना निधि बनाई जाएगी।
प्रदेश के स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को अब साइबर सुरक्षा का पाठ भी पढ़ाया जाएगा। केंद्र सरकार के आदेश पर शिक्षा विभाग ने अगले सत्र से साइबर सुरक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। नौवीं से बारहवीं और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में इसे शामिल किया जाएगा। उच्च शिक्षा निदेशालय ने स्कूल शिक्षा बोर्ड, एससीईआरटी सोलन और कॉलेज प्रिंसिपलों को इस बाबत आदेश जारी किए हैं। साइबर विशेषज्ञ की मदद से स्कूलों-कॉलेजों में नियमित तौर पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। विद्यार्थियों को इंटरनेट पर आपराधिक गतिविधियों के बारे में जानकारी देकर बचाव के उपाय बताए जाएंगे। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि वर्तमान में साइबर क्राइम के कई मामले सामने आ रहे हैं। विद्यार्थी एटीएम कार्ड, मोबाइल इंटरनेट और अन्य डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं। उन्हें ठगी से बचने के लिए उपायों की जानकारी होनी चाहिए। इसी वजह से केंद्र ने सभी राज्यों को साइबर सुरक्षा का पाठ पढ़ाने के दिशा निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल शिक्षा बोर्ड के साथ मिलकर साइबर सुरक्षा के कुछ पाठ तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा शिक्षण संस्थानों में विशेषज्ञों को बुलाकर विद्यार्थियों को जागरूक किया जाएगा।
हिमाचल में स्क्रब टायफस बीमारी से निपटने की तैयारी व नियंत्रण को लेकर अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) आरडी धीमान की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। आरडी धीमान ने कहा कि स्क्रब टायफस बीमारी की जांच व इलाज की सुविधा सरकारी अस्पतालों में निशुल्क उपलब्ध है और सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इसके इलाज के लिए दवाइयों भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में जनवरी, 2019 से अब तक स्क्रब टायफस के 220 मामले दर्ज किए गए हैं। बिलासपुर में सर्वाधिक मामले दर्ज हुई हैं। आरडी धीमान ने कहा कि पिछले चार सालों में स्क्रब टायफस के मामलों में वृद्धि हुई हैं। स्क्रब टायफस फैलाने वाला पिस्सू शरीर के खूले भागों को ही काटता है। इसके लिए उन्होंने लोगों को सलाह दी घरों के आसपास खरपतवार आदि न उगने दें व शरीर की सफाई का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने बताया कि 104 से 105 डिग्री का तेज बुखार, सिर व जोड़ों में दर्द व कंपकंपी, शरीर में ऐंठन, अकड़न या शरीर टूटा हुआ लगना आदि स्क्रब टायफस के लक्षण हैं। यदि ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नज़दीकी अस्प्ताल में संपर्क करें।
मन में कुछ कर गुज़रने का हौंसला हो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं है। मजबूत इरादों से बड़े से बड़े पहाड़ भी कदमों तले लाये जा सकते हैं। ऐसा ही कुछ शिमला के तीन युवकों ने कर के दिखाया है। सिरमौर ज़िला के दुर्गम क्षेत्र चूड़धार पर जाने के नाम से कई लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इस स्थान को महज 11 घंटों में साइकिल से फतह कर इन लड़कों ने इतिहास रचा है। इससे पहले किसी ने इस चोटी पर साइकिल से चढ़ाई नहीं की है। हिमालयन एडवेंचर स्पोट्र्स टूरिज्म प्रोमोशन एसोसिएशन से जुड़े 19 वर्षीय अक्षित, 18 वर्षीय आशीष शेरपा व 33 वर्षीय आशीष सूद ने यह यात्रा साइकिल से पूरा करने की ठानी। उन्होंने बताया कि साइकिल के साथ शिमला से चूड़धार की दूरी तय करने का पहला प्रयास था। वे 28 जुलाई को शिमला से चूड़धार के लिए निकले। कड़कड़ाती ठंड, तीखे पहाड़, चट्टानें गिरने और सैकड़ों नालों की परवाह न करते हुए लगातार आगे बढ़ते रहे। चोटी के करीब पहुंचने पर ऑक्सीजन की कमी से परेशानी हुई। मगर चूड़धार तक पहुंच कर उनका सपना पूरा हुआ। वे इस यात्रा से युवाओं को संदेश देना चाहते हैं कि अगर युवा पीढ़ी किसी काम को करने की ठान ले तो हर मुकाम को हासिल कर सकती है।
हिमाचल प्रदेश ज़िला ऊना के बंगाणा के तहत आन वाले खुरवाई में देर रात हुए खूनी संघर्ष में एक व्यक्ति की मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। वहीं मृतक की पहचान पुरषोत्तम पुत्र वर्फी राम उम्र 40 साल निवासी खुरवाई के रूप में हुई है। वारदात के बाद अज्ञात व्यक्ति घटनास्थल से फरार हो गया। अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि मृतक की लड़ाई किससे हुई और क्यों हुई? उधर, एसपी दिवाकर शर्मा ने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है।
देवों के देव महादेव के इस मंदिर में भोलेनाथ और माता पार्वती युगल रूप में स्थापित हैं और यहाँ आने वाले भक्त खाली हाथ नहीं लौटते। हम बात कर रहे है ममलेश्वर महादेव मंदिर की। शिमला से लगभग 100 किमी की दूरी पर करसोग शहर में स्थित यह मंदिर एक ऊंचे मंच पर स्थित पत्थर और लकड़ी का बना है। लोगों की मान्यता है कि यहां 5 हजार साल पहले पांडवों ने समय बिताया था। मंदिर के मुख्य भवन की चारों ओर दीवारों पर काष्ठ मूर्तियां बनी हैं। मंदिर की मुख्य इमारत लकड़ी की है। लकड़ी की दीवारों पर बेहतरीन नक्काशी है, जिसमें देवी-देवताओं के साथ अन्य मूर्तियां उकेरी गई हैं। मंदिर के गर्भगृह में भगवान शंकर व मां पार्वती की मूर्ति युगल के रूप में स्थापित है। मंदिर के प्रवेश द्वार के ऊपर भी शिव-पार्वती की युगल मूर्ति है। मंदिर के पुजारी का कहना है कि यह दुनिया का इकलौता मंदिर है, जिसमें शिव-पार्वती की मूर्तियां युगल के रूप में हैं। यह मंदिर सतयुग, त्रेत , द्वापरयुग व कलयुग का गवाह है ।इस स्थान पर भृगु ऋषि जी के द्वारा तपस्या की गई थी। हिमयुग के अंत में किन्नर कैलाश में हुए पृथ्वी के भीतर के बदलाव के कारण किन्नर इस स्थान पर आ गये और भृगु ऋषि ने एक किन्नर लड़की से विवाह किया जिसका नाम माम्लिषा था और उसके नाम पर ही इस स्थान का नाम ममेल पड़ । इनकी दो पुत्रियाँ हुई इमला व बिमला, जो की नदियों के रूप में यहाँ स्थित है और पुरे क्षेत्र की भूमि को सिंचित करती है। मंदिर में रखा गया है भीम का ढोल इस मंदिर का पांडवो से गहरा नाता है। पांडव यहाँ अपने अजातवास के समय आये थे। इस मंदिर में एक प्राचीन ढोल है जिसके बारे में कहा जाता है की ये भीम का ढोल है। ये ढोल भेखल की लकड़ी से बना है। इसके अलावा मंदिर में स्थापित पांच शिवलिंगों के बारे में कहा जाता है की इसकी स्थापना स्वयं पांडवों ने की थी। मंदिर में सबसे प्रमुख गेहूं का दाना है जिसे की पांडवों के समय का बताया जाता है। यह गेहूं का दाना एक खास प्रकार के डिब्बे में रखा जाता है। महाभारत काल से जल रहा है अग्निकुंड इस मंदिर में एक धुना है जिसके बारे में मान्यता है कि यहां जो अग्निकुंड है वो महाभारत काल से निरंतर जल रहा है। इस के पीछे एक कहानी है की जब पांडव अज्ञातवास में घूम रहे थे तो वे कुछ समय के लिए इस गाँव में रूके। तब इस गांव में एक राक्षस ने एक गुफा में डेरा जमाया हुआ था। उस राक्षस के प्रकोप से बचने के लिये लोगों ने उस राक्षस के साथ एक समझौता किया था कि वो रोज एक आदमी को खुद उसके पास भेजेंगें उसके भोजन के लिये जिससे कि वो सारे गांव को एक साथ न मारे। एक दिन उस घर के लडके का नम्बर आया जिसमें पांडव रूके हुए थे। उस लडके की मां को रोता देख पांडवो ने कारण पूछा तो उसने बताया कि आज मुझे अपने बेटे को राक्षस के पास भेजना है। अतिथि के तौर पर अपना धर्म निभाने के लिये पांडवो में से भीम उस लडके की बजाय खुद उस राक्षस के पास गया। भीम जब उस राक्षस के पास गया तो उन दोनो में भयंकर युद्ध हुआ और भीम ने उस राक्षस को मारकर गांव को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। कहते है की भीम की इस विजय की याद में ही यह अखंड धुना चल रहा है। यह मंदिर अपनी खूबसूरती के साथ अपने चमत्कारों के लिए भी प्रसिद्ध है। ममलेश्वर मंदिर में एक अग्निकुंड है, जो हमेशा जलता रहता है। मान्यता है कि 5 हजार साल पहले पांडवों ने इस अग्निकुंड को जलाया था और तब से यह जल रहा है। यहाँ के स्थानीय लोगों का मानना है कि अज्ञातवास के दौरान पूजा करने के लिए पांडवों ने इस अग्निकुंड को बनवाया था। ममलेश्वर महादेव के मंदिर भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित है। कहा जाता है कि सावन के महीने में यहां पार्वती और शिव कमल पर बैठकर मंदिर में मौजूद रहते हैं। कहा जाता है कि ममलेश्वर मंदिर में 5 हजार साल पुराना गेहूं का दाना है, जिसका वजन 250 ग्राम है। मान्यता है कि इसे पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान खाने के लिए उगाया था। ममलेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए पांच शिवलिंग का एक साथ मौजूद होना भी इस मंदिर को खास बनाता है। कई साल पहले मंदिर के पास कई शिवलिंग, शिव और विष्णु भगवान की मूर्तियां भी मिली थीं। ममलेश्वर मंदिर में एक बड़ा ढोल भी रखा गया है। लोगों का कहना है कि अज्ञातवास के दौरान भीम ने इसे बनवाया था। भीम खाली समय के दौरान इस ढोल को बजाया करते थे और वहां से जाते समय उन्होंने इन ढोल मंदिर में रख दिया था। मंदिर में पांच शिवलिंग भी स्थापित है , मान्यता है कि यह पांडवों ने ही यहां स्थापित किए हैं। इस मंदिर के पास एक प्राचीन विशाल मंदिर और है जो की सदियों से बंद है। माना जाता है कि इस मंदिर में प्राचीन समय में भूडा यज्ञ किया जाता था जिसमे की नर बलि भी दी जाती थी। इस मंदिर में केवल पुजारी वर्ग को ही जाने की आज्ञा है।
There is a need to provide the farmers with the latest technical know-how so that they can reap the benefits from the development in the agricultural sector. Dr. Parvinder Kaushal, Vice-Chancellor of Dr. YS Parmar University of Horticulture and Forestry (UHF), Nauni, stated this during his visit to the Regional Horticultural Research Station (RHRS), Jachh and Litchi and Mango Research Station (LMRS) at Nagrota on Wednesday. Dr JN Sharma, Director Research of the university was also present on the occasion. During the visit, Dr. Kaushal interacted with Dr ML Bhardwaj, Associate Director (RHRS), scientists and staff of the station. He asked the scientists of the station to establish natural farming demonstration models on different fruits and crops so that the farmers can be apprised about the benefits of the model. He urged the scientists to work with increased determination to fulfil the goal of doubling farmers’ income in the state and continue to disseminate the latest agri-technology to the farming community. Dr. Kaushal also visited the experimental fields of the RHRS and LMRS. Dr. Atul Gupta, In-charge of the station explained about the activities of the station. At present, the station has Litchi, Mango, Papaya, Citrus and Indian Gooseberry (Amla), and jackfruit plantations. Dr Kaushal also inspected the groundwater supply scheme installed at the LMRS through support from the Government of India. He also visited the fields of Suresh Upadhyay, a progressive farmer who is raising apple orchards of low chilling varieties besides other fruits. The research station of the university serves as a centre for developing strategies for the improvement of fruits, vegetables, flowers, forest species, and medicinal plants in low hills subtropical areas. It works towards developing horticulture and forestry-based farming systems to increase and stabilize farm production through efficient use of natural and human resources.
बुधवार को विभिन्न सरकारी विभागों से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के लिए विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को उनकी सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। सेवानिवृत्ति के अवसर पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दाड़लाघाट से सुरेश कुमार जो प्रयोगशाला परिचालक के पद पर लगभग 20 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे थे,उन्हें भी अपने 20 वर्ष का सेवाकाल ईमानदारी,लग्नशीलता व सामाजिक सामंजस्य के साथ पूर्ण करने पर सम्मानित किया गया। विद्यालय की प्रधानाचार्या इंदु शर्मा ने कहा कि सुरेश कुमार को उनकी कर्तव्यनिष्ठा व इमानदारी के लिए हमेशा स्मरण किया जाएगा। इस अवसर पर हंसराज शर्मा,राजेंद्र ठाकुर,महेंद्र कौंडल,अश्वनी कुमार शर्मा,लच्छीराम,कल्पना सिंह,कमला देवी,लता देवी,अनिल शर्मा,भोपाल सिंह,जयपाल शर्मा,कामेश्वर आदि उपस्थित रहे। इस दौरान उपमंडल के अंतर्गत विभिन्न विभागों के कर्मचारियों में उप कोषागार दाड़ला से कोषाधिकारी मेहर सिंह ठाकुर,शंकर भारद्वाज यूको बैंक दाड़लाघाट,तुलसी राम स्वास्थ्य विभाग दाड़लाघाट,कर्म सिंह एचआरटीसी विभाग से सेवानिवृत्त हुए। इन सभी सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के सुखद भविष्य की कामना संबंधित विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों ने की।
समेकित बाल विकास परियोजना के तहत खण्ड स्तरीय अनुश्रवण समिति तथा बेटी बचाओ बेटी पढाओ के अन्तर्गत गठित खण्ड टास्क फोर्स की सोलन तथा धर्मपुर खण्डों की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता उपमण्डलाधिकारी सोलन रोहित राठौर ने की। रोहित राठौर ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभागीय कर्मचारी निश्चित समय अवधि में आंगनबाडी केन्द्रों में जाकर बच्चों के स्वास्थ्य का निरीक्षण करें तथा उनके स्वास्थ्य के बारे में अभिवावकों को उचित परामर्श प्र्रदान करें। उन्होंने कहा कि इससे दीर्घ अवधि में बच्चों को स्वस्थ रखने में सहायता मिलेगी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि आंगनबाडी केन्द्रों में बच्चों के स्वास्थ्य निरीक्षण की तिथि की जानकारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पहले से उपलब्ध करवाई जाए ताकि इसका व्यापक प्रचार-प्रसार हो सके। उन्होंने कहा कि यदि किसी लड़की का जन्म चयनित बीपीएल परिवार में हुआ है और उन्हें ‘बेटी है अनमोल’ योजना के तहत सरकार द्वारा प्रदान की जा रही 12,000 रूपये की राशि नही मिली है तो पात्र अभिभवावक एसडीएम कार्यालय या खण्ड विकास अधिकारी के कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। उन्होने कहा कि ‘बेटी जन्मोत्सव’ के अन्तर्गत विकास खण्ड सोलन में 72,000 रूपये जबकि विकास खण्ड धर्मपुर में 87,532 रुपए की राशि व्यय की गई। इसके अतिरिक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा सभी घरों में ‘बेटी बचाओ बेटी पढाओ’ योजना के स्टीकर चिपका कर इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इस योजना के अन्तर्गत पंचायत स्तर पर जागरूकता शिविरों, रैलियों तथा विशेष महिला ग्राम सभा का आयोजन भी किया जा रहा है। रोहित राठौर ने कहा कि सोलन जिला में लिगांनुपात में बढ़ौतरी करने के लिए शीघ्र ही उपायुक्त सोलन की अगुआई में एक व्यापक कार्य योजना पर कार्य आरम्भ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन यह प्रयास करेगा कि केन्द्रित सघन जागरूकता अभियान के माध्यम से जिले में लिगांनुपात को बेहतर किया जाए। उन्होंने कहा कि सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग उन सभी आंगनबाडी केन्द्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करे जहां अभी यह व्यवस्था नहीं है। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि डा.वी.के.गोयल, खण्ड विकास अधिकारी सोलन ललित दुल्टा, खण्ड विकास अधिकारी धर्मपुर रवि कुमार बैंस, समेकित बाल विकास परियोजना अधिकारी सोलन पवन गुप्ता, समेकित बाल विकास परियोजना अधिकारी धर्मपुर वीना कश्यप उपस्थित थे।
ग्राम पंचायत दधोगी के गांव प्योथा के नवयुवक मंडल के सदस्यों ने प्योथा के जंगल में पौधरोपण किया। युवक मंडल के प्रधान खेमराज ने बताया कि युवक मंडल के सदस्यों ने लगभग 30 पौधे रोपे। इस मौके पर युवक मंडल के प्रधान खेमराज,राजू, खेमराज,हेमराज,हेमशंकर,पवन, सतीश,पंकज,जीतराम,लीलाशंकर ने भाग लिया।
राजधानी शिमला के उप नगर संजौली इंजन घर के समीप लोअर सांगटी में बुधवार को सुबह एलपीजी के गैस रिसाव होने से घर में धमाका हो गया। सुबह के समय हुए इस धमाके की आवाज़ सुनते ही पूरी लोअर सांगटी इस धमाके से हिल उठी और लोग अपने घरों से बाहर निकले। जानकारी के अनुसार यह धमाका लोअर सांगटी के रमेश कुमार शर्मा के घर पर सुबह 6 बजकर 40 मिनट पर हुआ। घर में हुए इस धमाके से रमेश कुमार शर्मा झुलस गए और धमाका होने के कारण बेहोश हो गए। वहीं धमाके की सूचना अग्निशमन विभाग को दी गयी। सुचना मिलते ही अग्निशमन विभाग अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। अग्निशमन विभाग के अनुसार धमाका होने से घटना स्थल में लगभग 15 लाख रुपए का नुकसान आंका गया हैं। वहीं पीड़ित का आईजीएमसी अस्पताल में उपचार चल रहा है।
झारखण्ड ये है सरकारी अस्पतालों का हाल पाटलिपुत्र मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (पीएमसीएच) के इंटेंसिव केयर यूनिट (आइसीयू) में एक कैंसर मरीज शमीम मल्लिक के अंगों को चूहों ने कुतर खाया है। दरअसल , झरिया के शमशेर नगर निवासी मो. शमीम मल्लिक (73 वर्ष) के शरीर पर सोमवार की रात चूहों ने कई बार हमला बोला। शरीर के कई अंगों को चूहों ने कुतर दिया। चूहों ने उनके निजी अंग व पैर को चार जगहों पर कुतर दिया। सुबह में जख्म के स्थान पर जब परिजनों ने खून देखा तो उन्हें इसका पता चला। शमीम 28 जुलाई को अस्पताल में भर्ती हुए थे। मामले के बाद उनके परिजनों ने जमकर विरोध जताया है।
“Food doesn’t have a religion. It is a religion.” it is a tweet from Zomato’s official Twitter handle. Actually, a customer from Zabalpur wanted food to be delivered by a Hindu rider. Zomato declined to accept his preference based on the religion of the delivery boy, after which the customer asked Zomato to cancel the order and issue a refund. Zomato hadn’t processed a refund after cancelling the order and tweeted. Zomato Founder Deepinder Goyal also tweeted, “We are proud of the idea of India - and the diversity of our esteemed customers and partners. We aren’t sorry to lose any business that comes in the way of our values. ” People from every corner of India are praising the move by Zomato and company is getting huge public support for their stand.
सुरों के सरताज मोहम्मद रफी की आज 39वीं पुण्यतिथि है। आज ही के दिन 1980 को रफ़ी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था, पर रफ़ी आज भी करोड़ों दिलों पर राज़ करते है। जानते है मोहम्मद रफी के बारे में रोचक किस्से: 'शाम फिर क्यों उदास है दोस्त, तू कहीं आसपास है दोस्त'...फिल्म 'आस-पास' का ये गाना उनका आखिरी गाना था। इसे रफी साहब ने अपनी मृत्यु से बस कुछ घंटे पहले रिकॉर्ड किया था। इसके चंद घंटों बाद उनका निधन हो गया, जिसके बाद इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ उठी थी। पाकिस्तान में रह गई पहली बीवी 13 साल की उम्र में रफी की पहली शादी उनके चाचा की बेटी बशीरन बेगम से हुई थी लेकिन कुछ साल बाद ही उनका तलाक हो गया था। इस शादी से उनका एक बेटा सईद हुआ था। उनकी इस शादी के बारे में घर में सभी को मालूम था लेकिन बाहरी लोगों से इसे छिपा कर रखा गया था। दरअसल, उनकी पहली बीवी ने बटवारें के बाद पाकिस्तान में रहना पसंद किया और रफ़ी हिंदुस्तान में आ गए। बिलकिस के साथ की दूसरी शादी 1944 में 20 साल की उम्र में रफी की दूसरी शादी सिराजुद्दीन अहमद बारी और तालिमुन्निसा की बेटी बिलकिस के साथ हुई। जिनसे उनके तीन बेटे खालिद, हामिद और शाहिद व तीन बेटियां परवीन अहमद, नसरीन अहमद और यास्मीन अहमद हुईं। 6 साल बात नहीं की रफ़ी- लता ने रफी साहब और लता मंगेशकर के बीच 6 सालों तक बातचीत बंद रही। कारण था प्लेबैक सिंगर को रॉयल्टी मिलने की। लता मंगेशकर इसके हक में थीं और रफी खिलाफ थे। बाद में संगीतकार जयकिशन ने सुलह कराई, फिर एसडी बर्मन म्यूजिकल नाइट में उन्होंने एक साथ स्टेज पर गाया। बाबुल की दुआएं गीत के मिला नेशनल अवार्ड फिल्म 'नील कमल' के गाने 'बाबुल की दुआएं लेती जा' के लिए रफी साहब को नेशनल अवार्ड मिला था। इस गीत को गाते समय कई बार उनकी आंखें नम हुईं। दरअसल, इस गीत को रिकॉर्ड करने से एक दिन पहले उनकी बेटी की सगाई हुई थी और कुछ दिन में शादी थी इसलिए वो काफी भावुक थे। हज़ारों लोग उमड़े थे जनाजे में मोहम्मद रफी का निधन रमजान के महीने में हुआ था। उनकी अंतिम विदाई के दिन मुंबई में जोरों की बारिश हो रही थी। बावजूद इसकेउनकी अंतिम यात्रा में 10000 से भी ज्यादा लोग सड़कों पर थे। तब मशहूर एक्टर मनोज कुमार ने कहा था, 'सुरों की मां सरस्वती भी अपने आंसू बहा रही हैं आज'। रफी साहब को पतंग उड़ाने का शौक था। रिकॉर्डिंग करने के बाद वे पतंग उड़ाया करते थे। रफ़ी द्वारा गाया गया फिल्म सूरज का गाना 'बहारों फूल बरसाओ' आज भी कई शादियों में इस गाने को बड़े ही शौक से बजाया जाता है। रफ़ी ने अपने जीवन काल में 18 भाषाओँ में करीब 26 हजार गीत गाये।
The dead body of Cafe Coffee Day (CCD) Owner VG Siddhartha, was found on the banks of the Netravati river near Mangaluru at 4.30 am on Wednesday. He was first reported missing on Monday by his driver. Siddhartha’s family has confirmed his identity and the cremation is likely to be held on Wednesday after postmortem. Siddhartha is the son-in-law of former Karnataka Chief Minister SM Krishna. Congress accuses govt of tax terrorism, after VG Siddhartha's so called suicide.
डॉ यशवंत सिंह परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति डॉ॰ परविंदर कौशल ने सोमवार को विश्वविद्यालय के अधीन आने वाले औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी हमीरपुर का दौरा किया। इस अवसर पर डॉ कौशल ने महाविद्यालय के सभी विभागों, क्लासरूम और प्रयोगशालाओं का निरक्षण किया और महाविद्यालय के सभी संकाय और छात्रों के साथ बातचीत की। डॉ कौशल ने इस बैठक में संकाय के कामकाज और महाविद्यालय द्वारा की जा रही शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों के बारे में जाना। डॉ कौशल ने अपने सम्बोधन में महाविद्यालय के मॉडर्न क्लासरूम और प्रयोगशालाओं की प्रशंसा की। उन्होनें कहा महाविद्यालय की भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से महाविद्यालय की मान्यता के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन प्रयासरत है। उन्होनें महाविद्यालय के छात्रों और संकाय को विश्वविद्यालय की देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों में 12वीं रैंकिंग आने पर बधाई दी। इस मौके पर डॉ कौशल ने नेरी महाविद्यालय के परिसर में पौधारोपण भी किया और सभी को प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का संदेश दिया। नेरी महाविद्यालय के डी ऐन डॉ पीसी शर्मा, फ़ैकल्टि और स्टाफ के अलावा कॉलेज के छात्र भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे।


















































